डबल्स फाइनल में आदिल और मुकुंद का दमदार प्रदर्शन, खिताब अपने नाम किया

नई दिल्ली। बेंगलुरु में आयोजित एसएम कृष्णा मेमोरियल ओपन 2026 में भारतीय टेनिस के लिए एक यादगार पल दर्ज हुआ, जब आदिल कल्याणपुर और मुकुंद शशिकुमार की जोड़ी ने डबल्स का खिताब अपने नाम कर लिया। यह जीत न सिर्फ उनके करियर के लिए खास रही, बल्कि घरेलू दर्शकों के सामने मिली यह सफलता भारतीय टेनिस के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने कजाकिस्तान के पेट्र बार बिरयुकोव और ग्रिगोरी लोमाकिन को कड़ी टक्कर दी। शुरुआत में मुकाबला पूरी तरह रोमांचक रहा, जहां पहला सेट टाई-ब्रेकर में 6-7 (3) से हारने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार संयम और आक्रामकता दिखाते हुए 6-4 से वापसी की और मैच को सुपर टाई-ब्रेकर तक पहुंचा दिया। निर्णायक सुपर टाई-ब्रेकर में आदिल और मुकुंद ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और 10-3 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम कर लिया। यह मुकाबला करीब एक घंटे 37 मिनट तक चला, जिसमें भारतीय जोड़ी का आत्मविश्वास और तालमेल निर्णायक साबित हुआ। इस टूर्नामेंट में उनका सफर भी बेहद प्रभावशाली रहा। सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी ने जापान की कोकोरो इसोमुरा और रयुकी मात्सुडा को सीधे सेटों में 6-3, 7-6 (4) से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं क्वार्टर फाइनल में भी उन्होंने दूसरी सीड वाली आयरलैंड ऑस्ट्रेलिया की मजबूत जोड़ी को 6-4, 6-3 से मात देकर सबको चौंका दिया था। हालांकि टूर्नामेंट में अन्य भारतीय खिलाड़ियों को डबल्स में सफलता नहीं मिल सकी। निकी कलियांडा पूनाचा और साकेत माइनेनी की जोड़ी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई। सिंगल्स मुकाबलों में भी कई रोमांचक मैच देखने को मिले, लेकिन खिताब कजाकिस्तान के पेट्र बार बिरयुकोव ने अपने नाम किया। उन्होंने फाइनल में बेलारूस के इल्या इवाश्का को तीन सेटों तक चले कड़े मुकाबले में 7-6 (0), 4-6, 6-4 से हराया। एसएम कृष्णा मेमोरियल ओपन 2026 इस साल बेंगलुरु में आयोजित तीसरा एटीपी चैलेंजर टूर्नामेंट रहा, जिसने भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का एक और मजबूत मंच दिया।
2026 का दुर्लभ पंचांग संयोग: दो ज्येष्ठ मास, लेकिन नौतपा देगा सिर्फ एक बार प्रचंड गर्मी

नई दिल्ली(New Delhi)। साल 2026 हिंदू पंचांग के लिहाज से बेहद दुर्लभ और चर्चा में रहने वाला वर्ष माना जा रहा है। इस बार अधिक मास (मलमास) के कारण ज्येष्ठ मास दो बार पड़ने वाला है, जिससे लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि क्या नौतपा भी दो बार पड़ेगा और क्या गर्मी पिछले वर्षों से कहीं ज्यादा खतरनाक हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह स्थिति पंचांगीय दृष्टि से विशेष जरूर है, लेकिन इसका असर नौतपा पर अलग तरीके से ही देखने को मिलेगा। ज्येष्ठ मास दो बार, लेकिन नौतपा नहीं होगा डबलज्योतिष विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि 2026 में ज्येष्ठ मास भले ही दो बार आए, लेकिन नौतपा केवल एक बार ही पड़ेगा। इसका कारण यह है कि नौतपा का संबंध महीनों से नहीं बल्कि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से होता है। सूर्य वर्ष में एक बार ही रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और इसी अवधि में शुरुआती 9 दिन “नौतपा” कहलाते हैं। इसलिए पंचांग में बदलाव होने के बावजूद नौतपा की संख्या नहीं बदलती। कब पड़ेगा नौतपा और कितना रहेगा असरगणनाओं के अनुसार 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने की संभावना है। इस अवधि को उत्तर और मध्य भारत में सबसे अधिक गर्म माना जाता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 48 से 50 डिग्री तक भी पहुंच सकता है। तेज धूप के साथ लू (Heatwave) का असर भी बढ़ेगा, जिससे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। 2026 का नौतपा क्यों माना जा रहा है खासज्योतिषीय दृष्टि से 2026 का नौतपा एक और कारण से विशेष माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस अवधि में दो मंगलवार भी पड़ेंगे, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से “अग्नि तत्व” से जुड़ा माना जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका तापमान पर सीधा प्रभाव साबित नहीं है, लेकिन परंपरागत मान्यताओं में इसे गर्मी की तीव्रता बढ़ाने वाला योग माना जाता है। मानसून से भी जुड़ी है मान्यताभारतीय परंपराओं में नौतपा को मानसून की तैयारी का संकेत भी माना जाता है। माना जाता है कि इस दौरान तेज गर्मी से लो प्रेशर सिस्टम बनता है, जो आगे चलकर मानसून को सक्रिय करने में मदद करता है। इसलिए नौतपा को सिर्फ गर्मी का समय नहीं बल्कि मौसम परिवर्तन का महत्वपूर्ण चरण भी माना जाता है। कुल मिलाकर 2026 का वर्ष पंचांग और मौसम दोनों दृष्टि से खास रहने वाला है। ज्येष्ठ मास के दो बार आने से जहां यह साल अनोखा बन रहा है, वहीं नौतपा अपने तय नियमों के अनुसार केवल एक बार ही भीषण गर्मी का असर दिखाएगा। इस दौरान लोगों को धूप, लू और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह निकला ‘होम फ्रॉम वर्क’, रवि किशन ने वायरल वीडियो पर पहली बार तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली । इंटरनेट के दौर में कौन कब वायरल हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी फोटो तो कभी लोगों की जुबान से निकले शब्द सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं। जब लोग कुछ सोच पाते हैं तब तक वह हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में कुछ लोगों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक वीडियो गोरखपुर सांसद रवि किशन का वायरल हो गया। रवि किशन के इस वीडियो पर लोगों ने अब मीम्स बनाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि रवि किशन ने इसको लेकर सफाई भी दी। गोरखपुर से भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन का कहना है कि वह आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और ‘मीम्स’ क्यों प्रसारित होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह महज एक आम इंसान हैं और दूसरों की तरह उनसे भी गलतियां हो जाती हैं। अभिनेता रवि किशन से शुक्रवार शाम उनकी आगामी फिल्म ‘मां बहन’ के ट्रेलर जारी करने के मौके पर उनकी हालिया वायरल हुई वीडियो के संबंध में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने गलती से ‘वर्क फ्रॉम होम’ कहने के बजाय ‘होम फ्रॉम वर्क’ कह दिया। वह इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील के समर्थन में बोल रहे थे। मां-बहन फिल्म में नजर आएंगे रवि किशनगोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन ने कहा, मैं महादेव की कसम खाकर कहता हूं कि मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि मैं क्यों वायरल होता रहता हूं। मैं उस समय संसद जा रहा था और कहना चाहता था कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने की जरूरत है, लेकिन उसकी जगह मुंह से ‘होम फ्रॉम वर्क’ निकल गया। बतादें कि ‘मां बहन’ फिल्म में रवि किशन के साथ माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धारणा दुर्गा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। नेटफ्लिक्स की इस फिल्म का निर्देशन ‘सूबेदार’ और ‘तुम्हारी सुलू’ फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने किया है। साइकिल चलाकर दिया था पेट्रोल-डीजल बचत का संदेशईंधन बचाने को लेकर पीएम मोदी की अपील के बाद पिछले दिनों सांसद रवि किशन ने साइकिल चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश दिया था। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। सांसद रवि किशन शुक्ला ने पेट्रोल-डीजल संकट से निपटने के लिए तारामंडल क्षेत्र में साइकिल चलाकर लोगों को जागरूक किया। सांसद ने अपने समर्थकों के साथ रामगढ़झील क्षेत्र में साइकिल चलाई। मीडिया से बातचीत में कहा कि मध्य पूर्व एशिया में युद्ध से उपजे हालात से क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल हो रहा है। पेट्रोलियम पदार्थ की खरीद में देश को करोड़ों डॉलर आयात में खर्च करना पड़ रहा है। सासंद ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर खर्च होने वाले डॉलर को देश वासी जागरूकता से बचा सकते हैं।
भुवनेश्वर कुमार पर्पल कैप की दौड़ में आगे, गेंदबाजों में कड़ा मुकाबला

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का रोमांच अब अपने चरम पर पहुंच चुका है, जहां हर मैच के साथ ऑरेंज और पर्पल कैप की दौड़ और भी दिलचस्प होती जा रही है। पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेले गए 68वें मुकाबले ने इस रेस को पूरी तरह हिला दिया। पंजाब किंग्स ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लखनऊ को 7 विकेट से मात दी, और इस जीत के साथ ही उनके दो बल्लेबाजों ने ऑरेंज कैप की रेस में जोरदार एंट्री मार दी। मैच में कप्तान श्रेयस अय्यर ने कप्तानी पारी खेलते हुए 51 गेंदों पर नाबाद 101 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और 5 शानदार छक्के शामिल रहे। अय्यर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और टीम को आसान जीत दिलाई। इसी प्रदर्शन के दम पर वह अब 498 रन बनाकर टॉप-11 बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। उनकी इस पारी ने उन्हें ऑरेंज कैप की रेस में एक मजबूत दावेदार के रूप में खड़ा कर दिया है। वहीं दूसरी ओर प्रभसिमरन सिंह ने भी 39 गेंदों पर 69 रनों की तूफानी पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा। लगातार आक्रामक अंदाज में खेलते हुए उन्होंने सीजन में अपने रन 510 तक पहुंचा दिए हैं और अब वह टॉप-10 बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो चुके हैं। पंजाब किंग्स के इन दोनों बल्लेबाजों की साझेदारी ने टीम को जीत के साथ-साथ व्यक्तिगत रैंकिंग में भी बड़ा फायदा दिलाया है। इस सीजन ऑरेंज कैप फिलहाल गुजरात टाइटंस के साई सुदर्शन के पास है, जिन्होंने 14 मैचों में 638 रन बनाए हैं। उनके ठीक पीछे शुभमन गिल 616 रन के साथ मजबूती से खड़े हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासेन 606 रन बनाकर तीसरे स्थान पर हैं, जबकि युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी 579 रन के साथ चौथे स्थान पर मौजूद हैं। ईशान किशन 569 रन बनाकर टॉप-5 में अपनी जगह बनाए हुए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो पर्पल कैप पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का दबदबा कायम है। उन्होंने 14 मैचों में 24 विकेट झटककर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। हालांकि उन्हें कगिसो रबाडा से कड़ी टक्कर मिल रही है, जो 24 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के अंशुल कंबोज 21 विकेट लेकर तीसरे स्थान पर हैं, जबकि राशिद खान 19 विकेट के साथ चौथे और ईशान मलिंगा 19 विकेट लेकर पांचवें स्थान पर बने हुए हैं। आईपीएल 2026 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, ऑरेंज और पर्पल कैप की यह रेस और भी तेज होती जा रही है, जहां हर मैच किसी नए सितारे को चमकने का मौका दे रहा है।
शनि-गोचर का बड़ा असर: बुध नक्षत्र में शनि से चमकेगा भाग्य, 4 राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ

नई दिल्ली(New Delhi)। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह का नक्षत्र परिवर्तन कई राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आता है। वर्ष 2026 में शनि के बुध के नक्षत्र में प्रवेश और उसके रेवती नक्षत्र में गोचर के दौरान कुछ राशियों पर विशेष कृपा रहने वाली है। इस अवधि में कई लोगों की किस्मत चमक सकती है और जीवन में आर्थिक व करियर से जुड़ी बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है। शनि का नक्षत्र परिवर्तन और अवधिज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार शनि 17 मई 2026 को रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस लगभग 4 महीने की अवधि को कई राशियों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस दौरान शनि की स्थिति कुछ राशियों के लिए धन, नौकरी और उन्नति के नए अवसर लेकर आएगी। वृषभ राशि: आर्थिक मजबूती और तरक्की के योगवृषभ राशि वालों के लिए यह समय बेहद लाभकारी माना जा रहा है। इनकम में बढ़ोतरी के साथ रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है, वहीं व्यापारियों के लिए बिजनेस विस्तार के अवसर बनेंगे। निजी जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मिथुन राशि: करियर में नए अवसरमिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय नई नौकरी और करियर ग्रोथ के संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर सीनियर्स का सहयोग मिलेगा और आपके काम की सराहना होगी। विदेश से जुड़े काम करने वालों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही मानसिक तनाव में कमी और विवादों में जीत के योग भी बन रहे हैं। तुला राशि: भाग्य का साथ और सुख-सुविधाओं में वृद्धितुला राशि के लिए शनि का यह गोचर भाग्य को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। संपत्ति और वाहन सुख मिलने के योग हैं। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं। अविवाहित लोगों के लिए रिश्ते के प्रस्ताव आने की संभावना भी बन रही है। धनु राशि: आर्थिक लाभ और निवेश के अवसरधनु राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। आय में वृद्धि के साथ बचत और निवेश के नए अवसर मिलेंगे। नया काम शुरू करने के लिए भी यह अवधि अनुकूल मानी जा रही है। पारिवारिक और निजी जीवन में भी संतुलन बना रहेगा। उपायशनि के शुभ प्रभाव को और बढ़ाने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना, पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना गया है।यह गोचर कुछ राशियों के लिए 4 महीने का सुनहरा दौर लेकर आ सकता है, जिसमें आर्थिक मजबूती, करियर ग्रोथ और जीवन में सकारात्मक बदलाव के योग बनते दिखाई दे रहे हैं।
तीन बार रिजेक्ट हुआ था बॉलीवुड का ये मशहूर गीत, आज भी बारिश में गूंजता है हर दिल में

नई दिल्ली । हिंदी फिल्मों में कई अमर गीत बने हैं। अमर गीतों की लिस्ट में एक ऐसा भी गाना है जिसे एक नहीं बल्कि तीन बार रिजेक्ट किया गया। सेंसर बोर्ड ने गाने के कुछ बोल पर आपत्ति जताई जिसके बाद उस गाने को फिल्म में लाना मुश्किल हो गया। लेकिन अंत में जब वही गाना सालों बाद किसी दूसरी फिल्म में सुनाई दिया तो वो गाना हमेशा के लिए अमर हो गया। आज भी बारिश के गानों में एक उस गाने की गिनती भी की जाती है। सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया गानाये 50 का दशक था। उस दौर में मम्यूजिक कंपोजर कल्याण जी आनंदजी की नई जोड़ी थी जो फिल्म मदारी के लिए गाने बना रही थी। फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी। जब इस फिल्म को सर्टिफिकेट के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया तो गाने के कुछ बोल को लेकर उसे रिजेक्ट कर दिया गया। बोर्ड की तरफ से गाने के बोल में बदलाव करने की बात कही गई। लेकिन गाना तो पहले ही शूट हो चुका था। और रिलीज डेट भी करीब थी। ऐसे में मेकर्स ने रिस्क नहीं लिया और गाने को ही फिल्म से हटा दिया। लेकिन कल्याणजी आनंदजी जानते थे कि इस गाने में वो बात है जो ऑडियंस को खुश कर सकती है। उन्होंने वो गाना अपनी आने वाली फिल्मों में इस्तेमाल करने के बारे में सोचा। दूसरी फिल्म से रिजेक्ट हुआ गानाइसके बाद 1959 में कल्याणजी आनंदजी को फिल्म घर घर की बात में गाने देने का मौका मिला। लेकिन इस फिल्म में भी वो अपना रिजेक्ट हुआ गाना इस्तेमाल नहीं कर पाए, क्योंकि फिल्म की सिचुएशन वैसी नहीं थी। इसके बाद 1960 में दिल भी तेरा हम भी तेरे रिलीज हुई। फिल्म के हीरो थे धर्मेंद्र। फिल्म का गाना कल्यानजी आनंदजी बना रहे थे। उन्होंने अपना वही गीत डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी को सुनाया। लेकिन उन्हें ये गाना पसंद नहीं आया। ऊपर गाना सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया था। तो डायरेक्टर रिस्क नहीं लेना चाहते थे। अब तक ये गाना दो फिल्मों से रिजेक्ट हो चुका था। लेकिन म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी को अपने गाने पर यकीन था। राज कपूर की फिल्म में मिला मौका1960 में एक फिल्म आई छलिया। इस फिल्म में राज कपूर और नूतन लीड रोल में थे। फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे पर बेस्ड थी। इस फिल्म में कल्यानजी आनंदजी को म्यूजिक देने का मौका मिला। मनमोहन देसाई की ये पहली डायरेक्टोरियल फिल्म थी। इस फिल्म के लिए उन्हें एक बारिश सॉन्ग की जरूरत थी। उन्होंने ये बात जब म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी कल्यानजी और आनंदजी को बताई तो उन्होंने फटाक से अपना रिजेक्टेड गाना उन्हें सुना दिया। मनमोहन देसाई को गाना बहुत पसंद आया। क्योंकि सेंसर बोर्ड को गाने के कुछ बोल से आपत्ति थी तो गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से उस गाने के बोल बदलने के लिए बुलाया गया। मुखड़ा वैसा ही रखा लेकिन अंतरे में बदलाव किया गया। इस गाने को आवाज देने वाले मुकेश को फिर से बुलाया गया और गाना अंतरा फिर से रिकॉर्ड किया गया। आज अमर है ये गीतगाने के नए वर्जन पर राज कपूर और नूतन ने खूब डांस करते हुए शूट किया। लेकिन जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची तो गाना फिर से अटक गया। सेंसर बोर्ड ने फिर से अंतरे के बोल पर आपत्ति जताई। गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से बुलाया गया। गाने के बोल फिर से बदले गए। और जिस गाने को लेकर सभी को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था वो था ‘डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा’ । इस गाने के अंतरे के पहले बोल थे ‘देखो लुटारा आज लुट गया हाय अल्लाह’ की जगह ‘देखो रे आज कोई लुट गया’ और ‘भोला भाला छुप के डाका डाला जाने तू कैसा मेहमान है’ की जगह ‘सनम हम माना गरीब हैं नसीब खोटा ही सही सही बंदा छोटा सही दिल खजाना है प्यार का हाय अल्लाह’। ये गाना जब बनकर फिल्म में सुना गया तो अमर हो गया। आज भी ये गीत अमर है।
स्टेज पर हुई चूक के बाद राम चरण ने जसप्रीत बुमराह से माफी मांगी

नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार राम चरण इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी कड़ी में हाल ही में वह भोपाल पहुंचे, जहां फिल्म का म्यूजिक लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान एक हल्की-फुल्की लेकिन चर्चा में आ जाने वाली गलती ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इवेंट के दौरान स्टेज पर एक रैपिड फायर सेशन रखा गया था, जिसमें राम चरण से भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ियों के बारे में सवाल पूछे गए। जब सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा और विराट कोहली के बारे में सवाल किए गए, तो राम चरण ने उनके जवाब बड़े ही सहज अंदाज में दिए। लेकिन जब बात तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की आई, तो एक्टर से एक बड़ी भूल हो गई। राम चरण ने बुमराह को क्रिकेटर की जगह फुटबॉलर कह दिया। उन्होंने कहा कि वह बुमराह के बड़े फैन हैं और उन्हें फुटबॉल को आगे बढ़ाते हुए देखकर गर्व महसूस होता है। यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, तेजी से वायरल हो गया और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे। वीडियो वायरल होने के कुछ ही घंटों बाद राम चरण को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बुमराह से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि नामों को लेकर कभी-कभी उनसे गलती हो जाती है और यह एक मानवीय भूल थी, जो इवेंट की भीड़ और उत्साह के बीच हो गई। राम चरण ने अपने माफीनामे में यह भी कहा कि वह जसप्रीत बुमराह के खेल के बड़े प्रशंसक हैं और जब वह बल्लेबाजों को लगातार बैकफुट पर धकेलते हैं, तो हर भारतीय गर्व महसूस करता है। उन्होंने बुमराह के प्रति अपनी गहरी सम्मान भावना भी व्यक्त की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दीं, जहां कुछ लोगों ने इसे एक सामान्य मानवीय भूल बताया, वहीं कुछ ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। गौरतलब है कि राम चरण की फिल्म ‘पेड्डी’ का निर्देशन बुची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म में राम चरण के साथ जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म में शिव राजकुमार, जगपति बाबू और दिव्येंदु जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म 4 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
जिहादी’ बयान से मचा बवाल: दृश्यम 3 एक्ट्रेस अंसीबा हसन के आरोपों से हिली मलयालम इंडस्ट्री

नई दिल्ली(New Delhi)। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां ‘दृश्यम 3’ फेम एक्ट्रेस अंसीबा हसन ने अपने को-एक्टर टाइनी टॉम और एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अंसीबा का दावा है कि उनके खिलाफ आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणियां की गईं, जिसमें उन्हें “जिहादी” तक कहा गया। हालांकि, टाइनी टॉम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अंसीबा हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संगठन के एक सदस्य ने उन्हें बताया कि टाइनी टॉम ने उनके खिलाफ यह टिप्पणी की है। एक्ट्रेस का आरोप है कि उन पर धर्म परिवर्तन को लेकर भी गलत बातें फैलाई गईं और उनकी निजी जिंदगी को लेकर अफवाहें उड़ाई गईं, जिससे उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ा। एक्ट्रेस ने यह भी दावा किया कि उन्होंने 21 फरवरी को निजी कारणों और काम के दबाव का हवाला देते हुए AMMA से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके पीछे असली वजह उन्होंने संगठन के सचिव को अलग से बताई थी। उनका आरोप है कि कार्यकारी समिति की एक महिला सदस्य ने उनके खिलाफ पुलिस में झूठी शिकायत भी दर्ज कराई, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। वहीं, इन सभी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टाइनी टॉम ने कहा कि यह बातें पूरी तरह गलत हैं और उन्होंने कभी किसी के खिलाफ ऐसी टिप्पणी नहीं की। उनका कहना है कि ये आरोप किसी सुनी-सुनाई बात पर आधारित हैं और वह अपने काम को गंभीरता से लेते हैं। टॉम ने यह भी कहा कि AMMA की कार्यकारी समिति इस मामले की जांच करेगी और उचित निर्णय लेगी। इस पूरे विवाद ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब ‘दृश्यम 3’ पहले से ही सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में अंसीबा हसन ने मोहनलाल के किरदार जॉर्जकुट्टी की बेटी अंजू जॉर्ज का रोल निभाया है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने दो दिनों में करीब 26.90 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। गौरतलब है कि ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी मलयालम सिनेमा की सबसे सफल सीरीज में से एक है, जिसके पहले दो भागों के हिंदी रीमेक में अजय देवगन ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
पुनर्मतदान के बाद फाल्टा में भाजपा का दबदबा, चौथे राउंड तक देबांग्शु पांडा ने बनाई निर्णायक बढ़त

नई दिल्ली । फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान के बाद जारी मतगणना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चौथे राउंड की काउंटिंग समाप्त होने तक भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने मजबूत बढ़त बनाकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। शुरुआती रुझानों के बाद भाजपा समर्थकों में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी ओर विपक्षी खेमों में चिंता बढ़ती नजर आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट का परिणाम राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला साबित हो सकता है। फाल्टा विधानसभा सीट इस बार शुरुआत से ही चर्चा का केंद्र बनी रही। पहले चरण के मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष मतदान की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया। पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई और पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। किसी भी प्रकार की हिंसा या बड़ी गड़बड़ी की खबर सामने नहीं आई, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली। चुनाव अधिकारियों के अनुसार पुनर्मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारी संख्या में लोगों के मतदान केंद्रों तक पहुंचने से यह साफ संकेत मिला कि जनता इस चुनाव को लेकर बेहद गंभीर थी। मतदान प्रतिशत भी काफी ऊंचा दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक दलों की चिंता और उत्सुकता दोनों को बढ़ा दिया। यही वजह है कि मतगणना शुरू होते ही सभी दलों की नजरें फाल्टा सीट पर टिक गईं। इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला और सीपीआई(एम) के शंभू नाथ कुर्मी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा था। इसके अलावा कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में मौजूद हैं। हालांकि चुनावी मुकाबले को सबसे बड़ा मोड़ तब मिला जब तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतगणना से पहले खुद को चुनावी दौड़ से अलग करने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए और भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती दिखाई दी। चौथे राउंड की मतगणना समाप्त होने तक भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को 25 हजार से अधिक वोट मिल चुके हैं। लगातार मिल रही बढ़त ने भाजपा खेमे का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर यही रुझान आगे भी कायम रहता है तो फाल्टा सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दूसरी ओर विपक्षी दल अभी अंतिम परिणाम आने तक उम्मीद बनाए हुए हैं और उनका कहना है कि आगे के राउंड में तस्वीर बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक फाल्टा सीट का परिणाम केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने वाला है। यह नतीजा राज्य की भविष्य की राजनीति और दलों की रणनीति पर भी असर डाल सकता है। भाजपा इस सीट को अपनी राजनीतिक मजबूती के प्रतीक के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसे अपनी साख से जोड़कर देख रहा है। अब सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
जब 16 हजार लौटाकर मोहम्मद रफी ने रच दिया इंसानियत का इतिहास, जीतेंद्र भी रह गए हैरान

नई दिल्ली(New Delhi)। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के दिग्गज पार्श्वगायक मोहम्मद रफी को उनकी बेहतरीन आवाज के साथ-साथ उनकी सादगी और इंसानियत के लिए भी याद किया जाता है। उनसे जुड़ा एक ऐसा ही भावुक किस्सा अभिनेता जीतेंद्र ने साझा किया था, जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है। दरअसल, कुछ साल पहले एक संगीत समारोह में जीतेंद्र ने अपने और मोहम्मद रफी के बीच का एक पुराना अनुभव सुनाया था। उन्होंने बताया कि वे एक मिडिल क्लास परिवार से थे और बाद में उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा। अपनी कंपनी “तिरुपति फिल्म्स” के तहत उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण किया, जिनमें ‘हमजोली’, ‘परिचय’, ‘खुशबू’, ‘ज्योति बने ज्वाला’ और ‘दीदार-ए-यार’ जैसी फिल्में शामिल थीं। ‘दीदार-ए-यार’ उनके करियर की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी, जिसमें ऋषि कपूर भी मुख्य भूमिका में थे। इसी फिल्म के लिए मोहम्मद रफी ने एक गाना गाया था, जिसके लिए उन्हें शुरुआत में 4 हजार रुपये फीस दी गई थी। समय के साथ फिल्म का बजट बढ़ गया और बाद में एक और गाना किशोर कुमार और मोहम्मद रफी दोनों ने मिलकर रिकॉर्ड किया। इस दौरान जीतेंद्र के मैनेजर ने निर्णय लिया कि दोनों गायकों को समान फीस दी जाए और उन्होंने मोहम्मद रफी को 20 हजार रुपये भेज दिए। लेकिन जब यह बात मोहम्मद रफी तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब फिल्म की शुरुआत में उनकी फीस 4 हजार तय हुई थी, तो उससे अधिक पैसे लेना उन्हें स्वीकार नहीं है। इसके बाद मोहम्मद रफी ने केवल 4 हजार रुपये ही अपने पास रखे और बाकी 16 हजार रुपये वापस कर दिए। उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ उतनी ही रकम लेंगे जितनी शुरुआत में तय हुई थी। उनकी इस ईमानदारी और विनम्रता ने जीतेंद्र को गहराई से प्रभावित किया और यह किस्सा आज भी वह भावुक होकर याद करते हैं। यह घटना सिर्फ एक लेन-देन की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर के कलाकारों की सादगी, सिद्धांत और सम्मान की भावना को भी दर्शाती है, जो आज के समय में भी मिसाल के रूप में देखी जाती है।