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इंदौर में दंपती के शव मिलने से सनसनी, हत्या के बाद आत्महत्या की आशंका

मध्यप्रदेश। इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र के मेघदूत नगर में रविवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक दंपती के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पहले पति ने अपनी पत्नी की हत्या की और फिर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह घर से लगातार एक मासूम बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी। पड़ोसियों को शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां पति-पत्नी दोनों मृत अवस्था में पाए गए। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान हल्के वीर पटेल और उनकी पत्नी रोशनी के रूप में हुई है। दंपती की एक छोटी बेटी भी है, जो घटना के समय घर में मौजूद थी। हल्के वीर पटेल पीथमपुर की एक पेस्टिसाइड कंपनी में कार्यरत था और परिवार मूल रूप से होशंगाबाद का रहने वाला बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। पुलिस के मुताबिक पत्नी के कथित प्रेम संबंध पीथमपुर निवासी सतीश साहू से थे, जिसकी जानकारी पति को हो गई थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। बताया जा रहा है कि घटना से एक दिन पहले भी हल्के वीर अपने एक रिश्तेदार के साथ सतीश साहू से मिलने गया था। इसके बाद रविवार सुबह यह दर्दनाक घटना सामने आई। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें पति ने पत्नी पर धोखा देने और दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का आरोप लगाया है। नोट में यह भी लिखा गया है कि दोनों ने जहर खाकर जान दी है और बेटी की जिम्मेदारी उसकी साली को दी जाए। साथ ही संपत्ति बेटी के 18 वर्ष की होने पर उसे सौंपने की बात भी लिखी गई है। हालांकि पुलिस जांच में एक अहम सवाल भी सामने आया है। सुसाइड नोट में जहर खाने की बात लिखी गई है, लेकिन पत्नी रोशनी के गले पर चोट के निशान मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि उसकी गला घोंटकर हत्या की गई हो सकती है। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल यह मामला घरेलू विवाद, शक और रिश्तों में तनाव से जुड़ा एक गंभीर अपराध बनकर सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया है।

इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम

मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले चार दिनों से नहाने तक के लिए पानी नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी के विरोध में शुक्रवार को कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम देखने को मिला। पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी सड़क पर उतर आए और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन की धीमी सप्लाई को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और कई घंटों तक सिटी बसों में यात्री फंसे रहे। इसी तरह दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है। लोगों को अब मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है। वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां भी महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। इससे पहले भी कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में लोग “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था। वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई वार्डों में नर्मदा लाइन की सप्लाई अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि नगर निगम से टैंकरों की कमी के कारण पानी वितरण व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण भी रहे, लेकिन एंबुलेंस को रास्ता देकर प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय दिया और उसे तुरंत निकलने दिया गया। फिलहाल शहर में जल संकट को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर तत्काल समाधान का दबाव भी तेज हो गया है।

राज्यसभा टिकट पर बयान से गरमाई सियासत, पूर्व मंत्री वर्मा ने बीजेपी पर साधा निशाना

मध्यप्रदेश। भोपाल में राज्यसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवार चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वर्मा ने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्यसभा को “पवित्र सदन” मानने के बजाय इसे राजनीतिक संतुलन साधने का माध्यम बना रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी को हॉर्स ट्रेडिंग जैसी प्रवृत्ति की आदत पड़ चुकी है और मध्य प्रदेश को राजनीतिक प्रयोगशाला या “चारागाह” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व मंत्री ने विशेष रूप से बाहरी नेताओं के चयन पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने ही राज्यों में चुनाव हार चुके हैं, ऐसे “हरल्ले” नेताओं को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजना स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है। वर्मा ने कुरियन और मुरुगन जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि बीजेपी हाईकमान मध्य प्रदेश के समर्पित और वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि बाहरी चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना था कि राज्यसभा में प्रतिनिधित्व केवल स्थानीय और योग्य नेताओं को ही मिलना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। जल्द ही 21 जून को कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिनमें दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह, बीजेपी के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इन सीटों के लिए 18 जून को मतदान प्रस्तावित है, जिससे दोनों प्रमुख दलों—बीजेपी और कांग्रेस—में अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस जहां अपनी एक सीट को सुरक्षित मानकर चल रही है, वहीं बीजेपी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में बताई जा रही है। हालांकि, इस पूरे राजनीतिक माहौल में “स्थानीय बनाम बाहरी” का मुद्दा अब चुनावी बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे भावनात्मक और संगठनात्मक मुद्दे के तौर पर उठा रही है, जबकि बीजेपी खेमे में भी दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव संख्या बल के हिसाब से तय भले हों, लेकिन ऐसे बयान आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ा सकते हैं।

पेट्रोल-डीजल EMI वाले बयान पर सफाई, कहा- गलत तरीके से पेश किया गया

मध्यप्रदेश। भोपाल में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा का सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है। शनिवार सुबह उन्होंने महंगाई और बढ़ते ईंधन दामों को लेकर एक तंज भरा पोस्ट साझा किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि भविष्य में शायद पेट्रोल-डीजल भी ईएमआई पर मिलने लगे। इस पोस्ट के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और विपक्ष ने इसे सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला बताते हुए मुद्दा बनाना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हो गया और लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालात बिगड़ते देख स्तुति मिश्रा ने तुरंत अपने बयान पर सफाई देते हुए यू-टर्न लिया। उन्होंने एक लंबा स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट को गलत संदर्भ में समझा गया है और इसका उद्देश्य किसी सरकार या संस्था की आलोचना करना नहीं था। उन्होंने अपने नए बयान में लिखा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ता है, जिसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ता है। उन्होंने इसे एक चेतावनी और जागरूकता संदेश बताते हुए कहा कि नागरिकों को प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुसार ऊर्जा संरक्षण और नियमों का पालन करना चाहिए। स्तुति मिश्रा ने आगे कहा कि यदि लोग मिलकर ईंधन की खपत कम करें तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, और यह समय देश के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात को कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया, जबकि यह एक सामाजिक संदेश था। विवाद की शुरुआत उस पोस्ट से हुई थी जिसमें उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा था कि वह दिन दूर नहीं जब बैंक होम लोन और कार लोन के साथ पेट्रोल-डीजल लोन भी देने लगेंगे, वो भी 10 प्रतिशत ईएमआई पर। इस टिप्पणी को महंगाई पर तीखा तंज माना गया और यह तेजी से चर्चा में आ गया। पोस्ट के बाद उठे राजनीतिक विवाद और आलोचना को देखते हुए उनका स्पष्टीकरण सामने आया, जिसमें उन्होंने खुद को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी को निशाना बनाना नहीं था बल्कि एक सामाजिक संदेश देना था। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच यह पोस्ट लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

भोपाल AIIMS में एक्ट्रेस ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम, सुरक्षा बढ़ाई गई

मध्यप्रदेश। भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में दिल्ली एम्स की 4 सदस्यीय मेडिकल टीम ने भोपाल एम्स परिसर में उनके शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम शुरू कर दिया है। इस दौरान पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और मॉर्च्यूरी के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया बेहद सतर्कता और निगरानी के बीच की जा रही है। परिजन भी इस दौरान मौजूद रहे और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने एक बार फिर स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें इस पूरे मामले में गहरी आशंका है और इसलिए केस को जल्द से जल्द CBI को ट्रांसफर किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं और सच सामने आना जरूरी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। अब सोमवार को CJI की बेंच में इस केस की सुनवाई होनी है, जिससे जांच की दिशा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। उधर, पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को 7 दिन की रिमांड पर लिया है। पूछताछ में उन्होंने दावा किया है कि शादी के बाद रिश्ते सामान्य थे, हालांकि प्रेग्नेंसी के बाद ट्विशा के व्यवहार में बदलाव आया और घरेलू जीवन को लेकर तनाव बढ़ा। पुलिस इन बयानों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। घटना 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में हुई थी, जहां ट्विशा की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया था, लेकिन मायके पक्ष ने इसे हत्या का मामला बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का यह भी कहना है कि घटना से पहले ट्विशा की मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को लेकर कई अहम संकेत थे, जिन्हें नजरअंदाज किया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। भोपाल कोर्ट में भी इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। सास गिरिबाला की जमानत पर सुनवाई और अन्य याचिकाओं पर भी नजर रखी जा रही है। इस बीच, राज्य सरकार की ओर से भी संकेत मिले हैं कि यदि आवश्यकता पड़ी तो जांच एजेंसी बदली जा सकती है, ताकि मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके। कुल मिलाकर, दोबारा पोस्टमॉर्टम और CBI जांच की मांग के बीच यह केस अब हाई-प्रोफाइल जांच का रूप लेता जा रहा है।

रविवार व्रत शुरू करने से पहले जानें जरूरी नियम और सावधानियां

नई दिल्ली। रविवार का व्रत, जिसे रवि व्रत भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है। यह व्रत सूर्य देव को समर्पित होता है और माना जाता है कि इसे विधिपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में तेज, सम्मान, आत्मविश्वास और सफलता का संचार होता है। खासकर वे लोग जो अपने करियर या जीवन में नई शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। व्रत की सही शुरुआत कैसे करेंरविवार के दिन व्रत रखने की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से होती है। इसके बाद घर के मंदिर या खुले स्थान पर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, रोली और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को जल अर्पित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है। इससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मानसिक शांति मिलती है। व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करेंइस व्रत में सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और केवल फलाहार ग्रहण करते हैं। शाम के समय सूर्य देव की आरती करना और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है, क्योंकि यह सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है। व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। व्रत के महत्वपूर्ण नियम और सावधानियांरवि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूरी है। व्रत में अनुशासन और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। बिना श्रद्धा या गलत विधि से किया गया व्रत अपेक्षित फल नहीं देता। इसके अलावा व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। किसी का अपमान करना या विवाद में पड़ना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है। रवि व्रत का महत्वमान्यता है कि रविवार का व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। इससे आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और मान-सम्मान में सुधार होता है। साथ ही यह व्रत पिता से जुड़े संबंधों को मजबूत करने वाला भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत करते हैं, उन्हें सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

आकाश और तारों से जुड़े शकुन-अपशकुन: जानें क्या कहते हैं प्राचीन संकेत

नई दिल्ली(New Delhi)। आकाश और तारों से जुड़े संकेतों को भारतीय परंपराओं और सामुद्रिक शास्त्र में खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि प्रकृति में होने वाले बदलाव केवल मौसम ही नहीं बताते, बल्कि आने वाले समय की शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर भी इशारा करते हैं। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन बातों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं मानता, लेकिन लोकमान्यताओं में ये संकेत आज भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। आकाश से जुड़े संकेत क्या कहते हैं?सामुद्रिक शास्त्र में आकाश के रंग और उसकी स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अनुसार,अगर आकाश अचानक लाल दिखाई दे, तो इसे अपशकुन माना जाता है। यह युद्ध, विवाद या अशांति का संकेत हो सकता है। साथ ही घर-परिवार और पड़ोस में तनाव की संभावना भी जताई जाती है।अगर आकाश नीला और साफ नजर आए, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है और यह अच्छी वर्षा व अनुकूल परिस्थितियों की ओर इशारा करता है। यदि आकाश सफेद या धुंधला दिखाई दे, तो इसे अपशकुन माना जाता है, जो बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चेतावनी हो सकता है। तारों से जुड़े शकुन-अपशकुनतारों को लेकर भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं कुछ परंपराओं में उंगली से तारों की ओर इशारा करना अशुभ माना गया है। टूटते तारे को देखना किसी महत्वपूर्ण घटना या परिवर्तन का संकेत माना जाता है। वहीं, टूटते तारे को देखकर मनोकामना करना शुभ माना जाता है और इसे इच्छापूर्ति से जोड़ा जाता है। धूमकेतु से जुड़े संकेतधूमकेतु (Comet) के दिखाई देने को भी शास्त्रों में विशेष माना गया है। इसके उदय को अपशकुन माना जाता है, जो बड़े प्रशासनिक बदलाव या अस्थिरता की ओर संकेत कर सकता है।आकाश और तारों से जुड़े ये संकेत प्राचीन परंपराओं और मान्यताओं का हिस्सा हैं। आधुनिक विज्ञान इन्हें प्रतीकात्मक मानता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इन्हें आज भी भविष्य के संकेत के रूप में देखा जाता है।

UPI यूजर्स सावधान! पुरानी ID से हो सकती है साइबर ठगी, जानें बचाव के तरीके

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दौर में UPI जहां लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है, वहीं साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक नया खतरा सामने रखा है—पुरानी या निष्क्रिय UPI ID, जो अब ठगों के लिए आसान निशाना बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग मोबाइल नंबर बदलने के बाद भी अपनी पुरानी UPI ID को अपडेट या बंद नहीं करते। यही लापरवाही बाद में बड़ा जोखिम बन सकती है। कई बार पुराना मोबाइल नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट कर दिया जाता है, और ऐसी स्थिति में उस नंबर से जुड़ी UPI ID का गलत इस्तेमाल होने की संभावना बढ़ जाती है। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं और यूजर के खाते तक पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे बैंक अकाउंट खाली होने जैसे गंभीर मामले सामने आ सकते हैं। एक्सपर्ट्स की अहम सलाहसाइबर विशेषज्ञों ने यूजर्स को सलाह दी है कि अगर आपने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है, तो तुरंत बैंक और UPI ऐप में नई जानकारी अपडेट करें। इसके साथ ही पुरानी UPI ID को निष्क्रिय या डिलीट करना भी जरूरी है। इसके अलावा, समय-समय पर अपने बैंक अकाउंट और UPI ट्रांजैक्शन की जांच करना भी बेहद जरूरी माना गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चल सके। डिजिटल सुरक्षा के जरूरी टिप्सविशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, QR कोड या कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। OTP, UPI PIN या बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा करने से बचना चाहिए। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन में शिकायत करनी चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार NPCI और बैंक समय-समय पर निष्क्रिय UPI IDs को बंद करने की प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन यूजर्स की सतर्कता सबसे अहम सुरक्षा कवच है। डिजिटल लेनदेन की सुविधा जितनी आसान है, उतना ही जरूरी है उससे जुड़ी सावधानियों को अपनाना—क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बड़ा वित्तीय नुकसान करा सकती है।

आधार कार्ड अपडेट करने का सुनहरा मौका, अब ज्यादा समय तक मिलेगा फ्री सर्विस

नई दिल्ली। आधार कार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार अपडेट से जुड़ी मुफ्त ऑनलाइन सुविधा की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया है। अब नागरिक 14 जून 2026 तक बिना किसी शुल्क के अपना आधार अपडेट कर सकते हैं। UIDAI के अनुसार यह सुविधा केवल myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध होगी, जहां यूजर्स अपने पहचान पत्र (Proof of Identity) और पते के प्रमाण (Proof of Address) जैसे जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, जिससे लोगों को आधार सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि UIDAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मुफ्त सुविधा सिर्फ ऑनलाइन अपडेट के लिए है। अगर कोई व्यक्ति आधार सेवा केंद्र पर जाकर जानकारी अपडेट कराता है तो उसे निर्धारित शुल्क देना होगा। UIDAI ने उन लोगों को खास तौर पर आधार अपडेट करने की सलाह दी है, जिनका आधार 10 साल या उससे अधिक पुराना है और अब तक अपडेट नहीं हुआ है। इससे डेटा की शुद्धता बनी रहती है और सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती। ऐसे करें ऑनलाइन आधार अपडेटआधार अपडेट की प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए यूजर्स को सबसे पहले myAadhaar पोर्टल पर जाना होगा। वहां अपने आधार नंबर और OTP की मदद से लॉगिन करना होता है। इसके बाद “Document Update” विकल्प चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और फॉर्म सबमिट कर दिया जाता है। सबमिट करने के बाद यूजर को एक SRN (Service Request Number) मिलता है, जिसकी मदद से वह अपने अपडेट का स्टेटस ट्रैक कर सकता है। UIDAI ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने आधार दस्तावेज अपडेट कर लें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

हैरान करने वाली लत: डियोड्रेंट खाने की आदत ने न्यूयॉर्क की 19 साल की लड़की को बनाया चर्चा का विषय

नई दिल्ली(New Delhi)। न्यूयॉर्क से सामने आई एक हैरान कर देने वाली घटना में 19 वर्षीय लड़की निकोल की अजीब आदत ने डॉक्टरों से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक को चौंका दिया है। निकोल ने खुलासा किया है कि उसे खाने-पीने की चीजों से ज्यादा डियोड्रेंट खाने की लत लग चुकी है और वह महीने में कई डिब्बे खत्म कर देती है। सुबह से रात तक डियोड्रेंट की तलबटीएलसी के शो “My Strange Addiction” में निकोल ने बताया कि यह आदत उसे बचपन से ही है। लगभग 4 साल की उम्र में उसने पहली बार डियोड्रेंट को चखना शुरू किया था, जो धीरे-धीरे एक गंभीर लत में बदल गई। निकोल के मुताबिक, दिन की शुरुआत हो या तनाव का समय उसे बार-बार डियोड्रेंट खाने की इच्छा होती थी। वह स्टिक डियोड्रेंट को खोलकर उसमें से हिस्सा निकालकर खा लेती थी। अलग-अलग ब्रांड का “स्वाद” भी उसे अलग लगता था, जिनमें कुछ उसे ज्यादा पसंद थे। स्प्रे डियोड्रेंट भी बना हिस्सासमय के साथ उसकी लत सिर्फ स्टिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह डियोड्रेंट स्प्रे तक इस्तेमाल करने लगी। निकोल ने बताया कि स्प्रे का स्वाद उसे तुरंत महसूस होता था, इसलिए वह इसे भी पसंद करने लगी। हालांकि, इस आदत का असर उसके शरीर पर साफ दिखने लगा—पेट दर्द, मुंह सूखना और कमजोरी जैसी समस्याएं उसे परेशान करने लगीं। डॉक्टरों की चेतावनी: गंभीर खतराचिकित्सकों के अनुसार डियोड्रेंट में कई तरह के रसायन (chemicals) होते हैं, जो शरीर में जाने पर गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों ने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए तुरंत रोकने की सलाह दी। निकोल ने यह भी बताया कि उसने इसे छोड़ने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही दिनों में उसे बेचैनी, सिरदर्द और घबराहट होने लगी। क्या है यह बीमारी?विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति Pica Disorder कहलाती है, जिसमें व्यक्ति ऐसी चीजें खाने लगता है जो खाने योग्य नहीं होतीं जैसे मिट्टी, कागज, साबुन या केमिकल युक्त वस्तुएं। यह समस्या मानसिक तनाव, चिंता या पोषण की कमी से भी जुड़ी हो सकती है। सोशल मीडिया पर चर्चा का विषयनिकोल की यह कहानी सामने आने के बाद लोग हैरान हैं। कुछ लोग इसे अजीब आदत बता रहे हैं, तो कई इसे गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या मान रहे हैं। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे सामान्य दिखने वाली आदतें धीरे-धीरे खतरनाक लत में बदल सकती हैं।