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Cannes 2026: मौनी रॉय ने सिल्वर क्रिस्टल गाउन में बिखेरा जलवा, रेड कार्पेट पर दिखा ग्लैमरस और बोल्ड अवतार

नई दिल्ली । Cannes 2026 के रेड कार्पेट पर इस बार मौनी रॉय ने अपने स्टाइल और ग्लैमर से खास पहचान बनाई। जैसे ही वह इवेंट में पहुंचीं, कैमरों की नजरें उन पर टिक गईं और उनका लुक तुरंत चर्चा का विषय बन गया। मौनी ने इस खास मौके के लिए एक शानदार सिल्वर क्रिस्टल गाउन चुना था, जिसने उनके पूरे व्यक्तित्व को और अधिक आकर्षक बना दिया। उनका आत्मविश्वास और स्टाइलिश अंदाज रेड कार्पेट पर अलग ही चमक बिखेरता नजर आया, जिससे वह इवेंट की सबसे चर्चित हस्तियों में शामिल हो गईं। मौनी रॉय ने इस प्रतिष्ठित फिल्म समारोह में एक फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान शिरकत की, जहां उनका फैशन सेंस पूरी तरह से सुर्खियों में रहा। उन्होंने आइवरी शेड का स्ट्रैपलेस क्रिस्टल गाउन पहना था, जो बॉडी-फिटेड डिजाइन के साथ उनके लुक को बेहद ग्लैमरस बना रहा था। गाउन पर बारीकी से किया गया सिल्वर क्रिस्टल वर्क और अनोखा डिजाइन उनके पूरे स्टाइल को और भी खास बना रहा था। रेड कार्पेट पर उनकी मौजूदगी ने फैशन प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और वह एक यादगार अपीयरेंस के रूप में दर्ज हो गईं। अपने इस लुक को और भी शानदार बनाने के लिए मौनी ने डायमंड जूलरी का चयन किया, जिसमें नेकलेस, ब्रेसलेट और रिंग्स शामिल थे। चमकदार डायमंड जूलरी ने उनके पूरे लुक को रॉयल टच दिया और कैमरे की फ्लैश लाइट में उनका अंदाज और भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आया। उनके स्टाइलिश अवतार ने यह साबित कर दिया कि वह फैशन और ग्लैमर की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान रखती हैं। मौनी का मेकअप भी उनके पूरे लुक के साथ पूरी तरह मेल खाता हुआ नजर आया। उन्होंने हल्का और एलिगेंट मेकअप चुना, जिसमें न्यूड ग्लॉसी लिप्स, सॉफ्ट कंटूर और ड्रमैटिक आई मेकअप शामिल था। स्लीक बन हेयरस्टाइल ने उनके गाउन और जूलरी को और अधिक उभार दिया, जिससे उनका पूरा लुक संतुलित और आकर्षक दिखाई दिया। रेड कार्पेट पर मौनी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जहां फैंस ने उनके लुक की जमकर तारीफ की। उनकी तस्वीरें विभिन्न पोज़ में सामने आईं, जिनमें उनका आत्मविश्वास और स्टाइल साफ झलक रहा था। फैंस ने उनके लुक को बेहद आकर्षक बताते हुए कहा कि उन पर से नजरें हटाना मुश्किल है। इस इवेंट में उनकी मौजूदगी ऐसे समय पर भी चर्चा में रही जब उनकी निजी जिंदगी को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। हालांकि, मौनी ने अपने इस शानदार अपीयरेंस से पूरी तरह ध्यान अपने फैशन और ग्लैमर पर केंद्रित रखा। कुल मिलाकर, Cannes 2026 में उनका यह लुक लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला साबित हुआ।

क्रिकेट में वापसी की कहानी: मनीष पांडे ने साझा किया संघर्ष और इंतजार

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में Kolkata Knight Riders के अनुभवी बल्लेबाज Manish Pandey ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच के बाद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार मुकाबलों से पूरी तरह तैयार थे और बस मौके का इंतजार कर रहे थे। मनीष ने कहा कि वह हर मैच में “पैड पहनकर” तैयार रहते थे, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि किसी भी समय टीम उन्हें खेलने का मौका दे सकती है। आखिरकार जब मौका मिला, तो उन्होंने उसे पूरी तरह भुनाया।  नंबर-3 पर उतरकर खेली मैच जिताऊ पारीमुंबई इंडियंस के खिलाफ अहम मुकाबले में मनीष पांडे को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। उन्होंने इस मौके को शानदार तरीके से इस्तेमाल करते हुए 33 गेंदों में 45 रनों की अहम पारी खेली। इस दौरान उन्होंने कप्तान Ajinkya Rahane और Rovman Powell के साथ मजबूत साझेदारियां कीं। रहाणे के साथ 38 रन और पॉवेल के साथ 64 रनों की साझेदारी ने केकेआर की जीत की नींव रख दी।  “छोटी साझेदारियां ही मैच जिताती हैं” – पांडेमैच के बाद बातचीत में मनीष ने बताया कि टीम मैनेजमेंट और कोच का प्लान साफ था छोटी लेकिन मजबूत साझेदारियां बनानी हैं। उन्होंने कहा कि कप्तान रहाणे लगातार उन्हें विकेट पर टिककर खेलने और गेंद को करीब से देखने की सलाह देते रहे। मनीष के मुताबिक, यही रणनीति टीम के लिए निर्णायक साबित हुई और आखिरी ओवरों में जीत लगभग आसान हो गई।  तैयारी और प्रोसेस पर भरोसामनीष पांडे ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार तैयारी और प्रोसेस पर भरोसे को दिया। उन्होंने कहा कि घरेलू सीजन के बाद वह लगातार फिटनेस और नेट प्रैक्टिस पर काम कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में मौका कभी भी मिल सकता है, इसलिए हर खिलाड़ी को हमेशा तैयार रहना चाहिए।  केकेआर की जीत और प्लेऑफ उम्मीदें जिंदामुंबई इंडियंस को हराकर Mumbai Indians को केकेआर ने 4 विकेट से मात दी और प्लेऑफ की दौड़ में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा। इस जीत में मनीष पांडे की पारी सबसे अहम साबित हुई, जिसने दबाव वाले मैच में टीम को स्थिरता दी और जीत की राह आसान बनाई। मनीष पांडे का यह प्रदर्शन साबित करता है कि अवसर का सही इस्तेमाल ही बड़े खिलाड़ियों की पहचान होता है। इंतजार से लेकर मैच विनिंग पारी तक का उनका सफर केकेआर के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी सकारात्मक कहानियों में से एक बन गया है।

कांग्रेस का केंद्र पर निशाना: राजीव गांधी को याद करते हुए उठाए महंगाई के मुद्दे

मध्यप्रदेश । देश के पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मध्य प्रदेश के Ujjain में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन पिपली नाका स्थित राजीव गांधी की प्रतिमा पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और पुष्पांजलि अर्पित की गई। नेताओं की मौजूदगी, प्रतिमा पर पुष्पांजलिइस मौके पर विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष Mahesh Parmar, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी और वरिष्ठ नेता मनोहर बैरागी सहित कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।  IT और पंचायत व्यवस्था पर योगदान का जिक्रकार्यक्रम में वक्ताओं ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति की मजबूत नींव रखी। साथ ही पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। नेताओं ने कहा कि राजीव गांधी की सोच आधुनिक भारत की दिशा तय करने वाली रही, खासकर युवाओं और तकनीक के क्षेत्र में।  महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर हमलाश्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार को महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।  कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगीइस कार्यक्रम में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस पार्षद, ब्लॉक अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में राजीव गांधी के योगदान को याद किया और उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया। राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संदेशों का मंच भी बन गया, जहां कांग्रेस ने महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा।

उज्जैन में धार्मिक आयोजन की तैयारी तेज: शिप्रा परिक्रमा को लेकर अहम बैठक

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain में हर वर्ष आयोजित होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा इस बार भी भव्य रूप में शुरू होने जा रही है। 25 मई को सुबह 9 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा और धर्म ध्वजा के पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।  सीएम मोहन यादव होंगे शामिलइस वर्ष परिक्रमा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav स्वयं कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर रामघाट पर मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित करेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। भाजपा नगर मंडल की बैठकों में यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं ताकि आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।  रामघाट से शुरू होकर शहर के मार्गों से गुजरेगी यात्रापरिक्रमा की शुरुआत रामघाट से होगी, जिसके बाद यह नृसिंह घाट, लालपुल और त्रिवेणी होते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए वापस रामघाट पहुंचेगी। 26 मई को गंगा दशहरा के दिन यात्रा का समापन होगा, जहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  23 वर्षों पुरानी परंपरायह परिक्रमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। तब से यह परंपरा लगातार जारी है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।  भव्य आयोजन की तैयारियां तेजइस वर्ष आयोजन को सफल और भव्य बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस आयोजन को और अधिक भव्य और महत्वपूर्ण बना देगी।

पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और अब जांच एजेंसी ने इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जाट उर्फ ‘लंगड़ा’ को मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी नंबर-1 बताया है। जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी स्थानीय घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क द्वारा रची गई गहरी साजिश थी, जिसमें डिजिटल संचार, ड्रोन तकनीक और ओवरग्राउंड नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार सैफुल्लाह पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर इस पूरे हमले को अंजाम देने की रणनीति तैयार कर रहा था और हमलावरों को रियल टाइम निर्देश भी दे रहा था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और रास्तों की जानकारी लगातार उपलब्ध कराई जा रही थी, जिससे वे अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सके। जांच में मिले तकनीकी सबूतों, जैसे आईपी एड्रेस और मोबाइल नेटवर्क डेटा, ने इस बात की पुष्टि की है कि हमले की योजना और संचालन पूरी तरह सीमापार बैठे नेटवर्क द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। एजेंसी ने यह भी खुलासा किया है कि इस हमले के पीछे केवल हिंसा ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि इसके साथ एक संगठित प्रोपेगैंडा अभियान भी चलाया गया था, जिसका मकसद इस घटना को गलत तरीके से पेश कर भ्रम फैलाना था। हालांकि जांच में जुटाए गए डिजिटल और मानव स्रोतों के साक्ष्यों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चार्जशीट के अनुसार हमले से पहले और बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके। सैफुल्लाह उर्फ ‘लंगड़ा’ के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से कश्मीर में सक्रिय रहा है और उसने पहले भी कई गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसका जन्म पाकिस्तान के कसूर में हुआ था और वह वर्ष 2005 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में छिपकर रहा था। इस दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया और कई लोगों को संगठन से जोड़ा। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन वहां से लगातार अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा। जांच में यह भी सामने आया है कि 2019 के बाद कश्मीर में युवाओं को प्रभावित करने के लिए टीआरएफ नामक संगठन के विस्तार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही वह ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय था, जिससे सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। हमले से कुछ दिन पहले ही उसने फिदायीन हमलावरों को निर्देशित कर बेसरन घाटी की ओर रवाना किया था। इस पूरे मामले में जुटाए गए सबूतों के आधार पर एजेंसी ने कहा है कि यह हमला एक सुनियोजित, तकनीकी रूप से संचालित और सीमा पार से नियंत्रित आतंकवादी अभियान था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

स्कूलों के बाद अब मदरसों पर भी लागू हुआ राष्ट्रगीत नियम, बंगाल सरकार के फैसले से राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील नीतिगत फैसला सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अब सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इस निर्णय को शिक्षा और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा एक अहम कदम बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर इसे लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। सरकारी आदेश के अनुसार यह नियम केवल सामान्य सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था के सभी स्तरों पर लागू होगा। इसमें सरकारी मॉडल मदरसे, सहायता प्राप्त संस्थान, स्वीकृत मदरसा शिक्षा केंद्र, शिशु शिक्षा केंद्र और मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसे सभी शामिल किए गए हैं। इस आदेश के बाद पुराने सभी संबंधित नियम और पूर्व प्रथाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जाएंगी। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में एक समान सांस्कृतिक और राष्ट्रीय अभ्यास को लागू करने से एकरूपता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी। इस फैसले के पीछे सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि जब राज्य के अन्य सभी सरकारी स्कूलों और विशेष भाषा आधारित विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन पहले से ही लागू है, तो फिर मदरसों को इससे अलग रखना उचित नहीं है। सरकार के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि छात्रों में राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति सम्मान और एकता की भावना विकसित करना भी है। इसी सोच के तहत इस निर्णय को लागू किया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यह निर्णय किसी एक वर्ग या संस्था को लक्षित नहीं करता, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में समान नियम लागू करना है। प्रशासन का मानना है कि इससे छात्रों के बीच सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय भावना को और अधिक मजबूती मिलेगी। वहीं इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस तरह के निर्देश विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की विविध परंपराओं और व्यवस्थाओं के साथ संतुलन बना पाएंगे या नहीं। इससे पहले राज्य सरकार ने कुछ दिन पूर्व ही सामान्य सरकारी स्कूलों में भी यही नियम लागू किया था, जिसके बाद अब इसे मदरसों तक विस्तारित कर दिया गया है। इस विस्तार को सरकार की एक व्यापक नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सभी शिक्षा संस्थानों में एक समान सांस्कृतिक अभ्यास सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस निर्णय को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय एकता और शिक्षा में समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे शैक्षणिक स्वतंत्रता और परंपराओं से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। हालांकि सरकार अपने रुख पर कायम है और इस नीति को राज्य के सभी संबंधित संस्थानों में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है। कुल मिलाकर यह निर्णय पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक ढांचे पर भी पड़ सकता है।

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा ने लिया बाबा महाकाल का आशीर्वाद, भक्ति में डूबीं नजर आईं

मध्यप्रदेश । भोजपुरी फिल्मों और टीवी की जानी-मानी अभिनेत्री Monalisa (Antara Biswas) गुरुवार तड़के मध्य प्रदेश के Ujjain स्थित प्रसिद्ध Mahakaleshwar Temple पहुंचीं, जहां उन्होंने भस्म आरती में हिस्सा लिया। करीब सुबह 3 बजे मंदिर पहुंचकर उन्होंने लगभग दो घंटे नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दिव्य दृश्य देखा। इस दौरान वह पूरी तरह भक्ति भाव में डूबी नजर आईं। नंदी हॉल में बैठकर देखी भस्म आरतीमोनालिसा ने नंदी हॉल में बैठकर महाकाल की भस्म आरती का अनुभव लिया। आरती समाप्त होने के बाद उन्होंने नंदी जी का पूजन और अभिषेक किया तथा नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद उन्होंने चांदी द्वार से पुजारी के माध्यम से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका विधिवत स्वागत और सत्कार किया। भोजपुरी से टीवी तक का सफरमोनालिसा भोजपुरी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्हें लोकप्रियता रियलिटी शो Bigg Boss 10 से मिली, जिसके बाद उनकी पहचान और भी व्यापक हो गई। इसके अलावा उन्होंने ‘नज़र’ और ‘नमक इश्क का’ जैसे टीवी धारावाहिकों में भी अहम भूमिकाएं निभाईं, जहां उनके नकारात्मक किरदारों को दर्शकों ने काफी पसंद किया।  200 से ज्यादा फिल्मों का अनुभवमोनालिसा ने हिंदी, बंगाली, ओड़िया, तमिल, कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों के साथ-साथ 200 से अधिक भोजपुरी फिल्मों में काम किया है। उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकारों जैसे पवन सिंह, दिनेश लाल यादव और खेसारी लाल यादव के साथ स्क्रीन साझा की है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मोनालिसा की यह यात्रा भक्ति और आस्था से भरी रही। भस्म आरती में उनकी उपस्थिति ने एक बार फिर दिखाया कि फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच भी आध्यात्मिक जुड़ाव गहरा होता है।

पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट किया शिरुई लिली सिल्क स्टोल, भारत की सांस्कृतिक विरासत ने जीता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पांच देशों की यात्रा के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए, जिसने एक बार फिर भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को मजबूती दी है। इस यात्रा के दौरान दिए गए उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं थे, बल्कि उनमें भारत की विविधता, परंपरा और सांस्कृतिक गहराई की झलक भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री को मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किया, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाते हैं। मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी से आने वाला एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित प्राकृतिक रेशम है, जिसे इसकी सुनहरी चमक और मजबूती के लिए जाना जाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है और समय के साथ इसकी चमक और भी निखरती जाती है, जो इसे अत्यंत खास बनाता है। वहीं शिरुई लिली सिल्क स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी वादियों से प्रेरित है। इस क्षेत्र में पाया जाने वाला शिरुई लिली फूल अपनी दुर्लभता और अद्वितीय सुंदरता के लिए जाना जाता है। हल्के गुलाबी और सफेद रंग की पंखुड़ियों वाला यह फूल स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इस स्टोल में न केवल इस फूल की सुंदरता को दर्शाया गया है, बल्कि वहां की लोककथाओं और सांस्कृतिक भावनाओं को भी बारीकी से उकेरा गया है। भारत द्वारा दिए गए इन उपहारों का एक खास पहलू यह भी है कि इनमें भारत और इटली की सांस्कृतिक समानताओं की झलक भी दिखाई देती है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, जिससे दोनों देशों के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक जुड़ाव और समझ विकसित होती है। यह प्रतीकात्मक समानता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा बनाती है। इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति को आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान कलाकारों की सीडी भी भेंट की। यह उपहार भारत की कला, संगीत और शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान बने हुए हैं। आगरा की पच्चीकारी कला, जिसे मार्बल इनले वर्क भी कहा जाता है, विश्व प्रसिद्ध है और इसका ऐतिहासिक संबंध भी भारत और इटली की कला परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह कला दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये सांस्कृतिक उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कौशल और परंपराओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली माध्यम बने हैं, जिससे भारत-इटली संबंधों को एक नई सांस्कृतिक गहराई मिली है।

तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक बदलाव: मुख्यमंत्री विजय ने 23 मंत्रियों को दिलाई शपथ, कांग्रेस की एंट्री से बढ़ा सियासी समीकरण

नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपने मंत्रिमंडल का व्यापक विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। यह समारोह चेन्नई के लोक भवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल द्वारा सभी नवनियुक्त मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं, खासकर गठबंधन राजनीति के संदर्भ में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए मंत्रियों में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम के 21 विधायक शामिल हैं, जबकि पहली बार कांग्रेस के दो विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। कांग्रेस के एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन के मंत्री बनने को राजनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद राज्य की सरकार में कांग्रेस की औपचारिक भागीदारी हुई है। यह घटनाक्रम राज्य की पारंपरिक राजनीतिक संरचना में नए बदलावों का संकेत देता है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा किया गया यह विस्तार केवल प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस नए बदलाव ने गठबंधन की राजनीति को नई दिशा दे दी है। सरकार में कांग्रेस की एंट्री ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है, क्योंकि यह कदम दशकों पुराने राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस विस्तार में सरकार के दो अन्य सहयोगी दलों इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और विदुथलाई चिरुथाईगल कात्ची के विधायकों को फिलहाल जगह नहीं दी गई है। दोनों दलों की ओर से सरकार में शामिल होने की इच्छा जताई गई है, लेकिन मंत्रियों के नामों को लेकर अंतिम सहमति न बन पाने के कारण उन्हें इस चरण में शामिल नहीं किया जा सका। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल अस्थायी स्थिति है और आगामी फेरबदल में इन दलों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। इस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की कुल संख्या 32 तक पहुंच गई है, जिससे अभी भी तीन पद खाली हैं। इन खाली पदों को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हैं और माना जा रहा है कि भविष्य में इन्हें सहयोगी दलों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। नए मंत्रियों की सूची में कई नए चेहरे शामिल हैं, जिससे सरकार में युवा और नए नेतृत्व को भी अवसर मिला है। यह बदलाव प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा और गति लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह भी संकेत मिलते हैं कि सरकार आने वाले समय में अपनी नीतियों और कार्यशैली में और अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी में है। कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इससे न केवल सत्ता संतुलन बदला है बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा और गठबंधन समीकरणों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

ग्रामीण रोजगार में बड़ा बदलाव: जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, 125 दिन की गारंटी के साथ नया मॉडल

नई दिल्ली। ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आने जा रहा है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से मौजूदा मनरेगा योजना की जगह नई VB-G RAM G योजना लागू किए जाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि यह नई व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने, विकास कार्यों में तेजी लाने और पूरी प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। लगभग दो दशकों से ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी का सबसे बड़ा सहारा रही मनरेगा को अब एक नए मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है। इस नई योजना का पूरा नाम “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” बताया गया है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन तक रोजगार देने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान व्यवस्था में 100 दिनों की रोजगार गारंटी दी जाती है, लेकिन नई योजना में इसे बढ़ाकर लोगों की आय में सुधार और पलायन को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि अधिक दिनों का रोजगार मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में ही आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। योजना के संचालन में तकनीकी प्रणाली को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। पारंपरिक जॉब कार्ड की जगह अब स्मार्ट रोजगार कार्ड दिए जाने की योजना है, जिसमें डिजिटल पहचान, फेस रिकग्निशन और ई-केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य लाभार्थियों की पहचान को अधिक सटीक बनाना और भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता लाना बताया जा रहा है। इसके साथ ही गांवों में होने वाले कार्यों की प्राथमिकता में भी बदलाव किया जा रहा है, जिसमें जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, आजीविका से जुड़े कार्य और पर्यावरण तथा जलवायु आधारित परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार विकास योजनाएं तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिन्हें ग्राम सभा की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। योजना के वित्तीय ढांचे में भी केंद्र और राज्यों की भागीदारी तय की गई है, जहां सामान्य राज्यों में खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में यह 90:10 के अनुपात में होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मनरेगा के तहत पहले से चल रहे कार्य अचानक बंद नहीं किए जाएंगे, बल्कि उन्हें नई योजना में शामिल कर पूरा किया जाएगा ताकि किसी भी श्रमिक को रोजगार में बाधा न आए। हालांकि इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ विशेषज्ञों और संगठनों का मानना है कि इस परिवर्तन के दौरान ग्रामीण मजदूरों को शुरुआती चरण में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि सरकार इसे ग्रामीण विकास के एक आधुनिक और अधिक प्रभावी मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई व्यवस्था ग्रामीण रोजगार की दिशा में कितना प्रभावी साबित होती है।