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नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं। केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए। इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।

आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे। इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी। ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा। दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।

देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

नई दिल्ली । देहरादून से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक हादसे की खबर सामने आई है, जहां शहर के एक प्रमुख अस्पताल पैनेसिया में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुई, जहां अचानक एयर कंडीशनर में विस्फोट होने के बाद आग तेजी से फैल गई और पूरे वार्ड में घना धुआं भर गया। इस हादसे में एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मरीजों के प्रभावित होने और घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। धुएं की वजह से आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिससे स्थिति और भी अधिक भयावह हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर या अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया ताकि उनकी देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे। प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए पूरे परिसर को खाली करवा लिया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। इस घटना के बाद गढ़वाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग ICU में लगे एयर कंडीशनर के फटने के कारण लगी, लेकिन वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल का संचालन एक निजी ग्रुप द्वारा लीज पर किया जा रहा था, इसलिए फायर सेफ्टी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी। प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और ऐसी भयावह घटना कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आपात स्थिति में अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी थी। यह हादसा न केवल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। फिलहाल राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

रेड कार्पेट पर Jacqueline ने बिखेरा जलवा, Cannes लुक की चर्चा तेज

नई दिल्ली । कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में बॉलीवुड अभिनेत्री Jacqueline Fernandez ने अपने शानदार फैशन स्टेटमेंट से सभी का ध्यान खींच लिया। प्रतिष्ठित रेड कार्पेट इवेंट में उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। ब्लैक मिनी ड्रेस में दिखा बोल्ड और एलिगेंट लुकइस खास मौके पर जैकलीन ने कैरोलिन कूट्योर की ब्लैक मिनी ड्रेस पहनी, जिसमें मॉडर्न एलिगेंस और हाई-फैशन का बेहतरीन मेल देखने को मिला। स्ट्रैपलेस डिजाइन और टेक्सचर्ड डिटेलिंग ने उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना दिया। ड्रेस की फिटिंग और शॉर्ट हेमलाइन ने उनके लुक में बोल्ड और यूथफुल टच जोड़ा, जिससे उनका रेड कार्पेट अपीयरेंस और भी दमदार नजर आया। डायमं ड ज्वेलरी ने बढ़ाया ग्लैमरअपने आउटफिट को और खास बनाने के लिए जैकलीन ने चोपार्ड की लग्जरी डायमंड ज्वेलरी पहनी। चमकते डायमंड्स ने उनके ऑल-ब्लैक लुक को और भी ग्लैमरस और क्लासी बना दिया। उनका पूरा लुक फैशन और एलीगेंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन नजर आया, जिसने फोटोग्राफर्स और फैंस दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरेंजैसे ही उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, फैंस ने उन्हें खूब पसंद किया और शेयर करना शुरू कर दिया। रेड कार्पेट पर उनका कॉन्फिडेंट और ग्लैमरस अंदाज चर्चा का विषय बन गया है। ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में पहचानकान्स में उनकी यह उपस्थिति एक बार फिर साबित करती है कि जैकलीन सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन सर्किट में भी अपनी मजबूत पहचान रखती हैं।

KKR vs MI Pitch Report: ईडन गार्डन्स में बल्लेबाजों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली । कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान में आज आईपीएल 2026 का बड़ा मुकाबला खेला जाएगा, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस आमने-सामने होंगे। पिच रिपोर्ट के अनुसार यह मैदान हमेशा से बल्लेबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां गेंद बैट पर अच्छी तरह आती है, जिससे स्ट्रोक खेलना आसान हो जाता है। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को हल्की स्विंग और मूवमेंट मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ती है, बल्लेबाजों का दबदबा बढ़ जाता है।  स्पिनर्स भी निभा सकते हैं अहम भूमिकाहालांकि ईडन गार्डन्स सिर्फ बल्लेबाजों का मैदान नहीं है। दूसरी पारी में पिच धीरे-धीरे धीमी हो जाती है, जिससे स्पिन गेंदबाजों को टर्न और ग्रिप मिलने लगता है। मिडिल ओवर्स में स्पिनर्स का रोल बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वहीं से मैच का रुख बदल सकता है। कप्तानों के लिए यह एक रणनीतिक चुनौती भी होगी कि कब स्पिन अटैक को इस्तेमाल किया जाए। ओस और टॉस का बड़ा असरइस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर करीब 190 रन माना जा रहा है। ऐसे में एक बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। दूसरी पारी में ओस (Dew) का असर पड़ने की संभावना है, जिससे बल्लेबाजी और आसान हो जाएगी। यही कारण है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है। फैंस को मिलेगा हाई-स्कोरिंग थ्रिलरदोनों टीमों के पास विस्फोटक बल्लेबाज मौजूद हैं, जिससे फैंस को चौकों और छक्कों की बारिश देखने को मिल सकती है। मुकाबला पूरी तरह रन-फेस्ट और रोमांच से भरा होने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट में इंसानियत और कानून का संगम, बुजुर्ग की अपील पर CJI सूर्यकांत का भावुक लेकिन स्पष्ट जवाब

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में गुरुद्वारा कमेटियों के फंड से जुड़े कथित दुरुपयोग के मामले की सुनवाई के दौरान एक बेहद भावुक और मानवीय क्षण सामने आया, जिसने पूरे माहौल को गंभीरता और संवेदनशीलता से भर दिया। सुनवाई के दौरान जब एक बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने अपनी बात रखते हुए भावुक होकर कहा कि वह न्याय की उम्मीद में अदालत के आगे नतमस्तक हैं, तो पूरा कोर्टरूम कुछ पल के लिए शांत हो गया। याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में मामले की गंभीरता को विस्तार से रखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाए और किसी भी तरह के अपरिवर्तनीय निर्णय पर रोक लगाई जाए। इस भावुक अपील को सुनकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद संतुलित और विनम्र तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अदालत हमेशा नागरिकों के लिए उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन किसी भी नीति या कानून में बदलाव का अधिकार न्यायपालिका के बजाय विधायिका के पास होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उचित मंच तक पहुंचना ही सही प्रक्रिया होती है। CJI ने आगे याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह संबंधित विषय को संसद की याचिका समिति के समक्ष भी रख सकते हैं, ताकि वहां से उचित प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका हर मामले में सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप कर सकती है, खासकर जब मामला नीतिगत या विधायी क्षेत्र से जुड़ा हो। इस पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट में भावनाओं और कानून का संतुलन स्पष्ट रूप से देखने को मिला। एक तरफ बुजुर्ग की भावुक अपील थी, तो दूसरी तरफ न्यायिक प्रक्रिया की स्पष्ट सीमाएं, जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने बेहद सम्मानपूर्वक और सहज भाषा में समझाया। यह घटना न केवल न्याय व्यवस्था की गरिमा को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अदालतें भावनाओं को समझते हुए भी कानून की सीमाओं के भीतर ही निर्णय लेने के लिए बाध्य होती हैं।

बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा

उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में सुभासपा प्रमुख Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि अगर वह इतने “ज्ञानी-महाज्ञानी” हैं, तो उन्हें बताना चाहिए कि महाराजा सुहेलदेव के इतिहास को किस साजिश के तहत दबाया गया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। महाराजा सुहेलदेव के इतिहास पर छिड़ा नया विवादराजभर ने अपने पोस्ट में महाराजा सुहेलदेव को पिछड़े समाज और वंचित वर्गों के सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने दावा किया कि बहराइच की धरती पर महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर इतिहास रचा था, लेकिन उनके योगदान को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने पिछड़े वर्ग के नायकों को इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया और उनकी गौरवगाथा को दबाने का प्रयास किया गया। सपा पर 13 साल की सत्ता का सवालराजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी यूपी में लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन इस दौरान महाराजा सुहेलदेव के सम्मान और इतिहास को स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सपा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए इसे “मुगलिया और अंग्रेज मानसिकता” से जोड़ दिया। उनका कहना है कि पिछड़े समाज के नायकों के योगदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा कमजोर हुई। 2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक घमासानराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, यूपी में जातीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर राजनीति और तेज होगी। राजभर के इस बयान ने एक बार फिर पिछड़ा वर्ग की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

EV सेगमेंट में नई एंट्री: सिंगल चार्ज में 440KM चलने वाली Skoda SUV

नई दिल्ली ।  ऑटोमोबाइल की दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Skoda ने अपनी नई इलेक्ट्रिक SUV Epiq EV को पेश कर दिया है। यह कंपनी की अब तक की सबसे किफायती और कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मानी जा रही है, जिसे खास तौर पर शहरी उपयोग और लंबी दूरी दोनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। Skoda का दावा है कि नई Epiq EV सिंगल चार्ज में करीब 440 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है, जिससे यह अपने सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकती है। इसके साथ ही इसका छोटा बैटरी वेरिएंट लगभग 310 किलोमीटर की रेंज भी प्रदान करता है। डिजाइन की बात करें तो Skoda ने इसे अपनी नई “Modern Solid” डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया है। SUV का लुक काफी फ्यूचरिस्टिक और प्रीमियम है। फ्रंट में ब्लैक फिनिश ग्रिल, स्लिम LED DRLs और L-शेप हेडलाइट्स दी गई हैं, जो इसे एक मॉडर्न अपील देती हैं। वहीं साइड प्रोफाइल में कूपे-स्टाइल रूफलाइन, ब्लैक क्लैडिंग और एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स इसे और स्पोर्टी बनाते हैं। पीछे की तरफ T-शेप LED टेललाइट्स और रूफ स्पॉइलर इसका डिजाइन पूरा करते हैं। आकार की बात करें तो Skoda Epiq EV लगभग 4.17 मीटर लंबी है, जिससे यह कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में आती है और शहरों में ड्राइविंग व पार्किंग के लिए आसान साबित हो सकती है। इसके बावजूद कंपनी ने इसमें पर्याप्त केबिन स्पेस दिया है। इसमें लगभग 475 लीटर का बूट स्पेस और 25 लीटर का फ्रंक (फ्रंट ट्रंक) भी मिलता है। इंटीरियर को भी पूरी तरह हाईटेक और प्रीमियम बनाया गया है। इसमें 13-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो Android आधारित सॉफ्टवेयर पर काम करता है। इसके साथ डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। फीचर्स की बात करें तो इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, पैनोरमिक सनरूफ, ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस चार्जिंग, 10-स्पीकर Canton ऑडियो सिस्टम और 360-डिग्री कैमरा जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance System) और 7 एयरबैग जैसी आधुनिक सेफ्टी टेक्नोलॉजी शामिल है। Skoda Epiq EV को Volkswagen Group के नए MEB+ प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है, जो इसे और अधिक एफिशिएंट और मॉडर्न बनाता है। कंपनी का फोकस इसे एक ग्लोबल मास-मार्केट EV के रूप में स्थापित करने पर है। हालांकि कंपनी ने अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट और कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि यह जल्द ही यूरोपीय बाजारों में लॉन्च की जाएगी और बाद में अन्य देशों में भी पेश की जा सकती है।

कॉरपोरेट हलचल: स्टारबक्स ने कई पदों पर की बड़े स्तर पर नौकरी में कटौती

नई दिल्ली । दुनिया की सबसे बड़ी कॉफी चेन कंपनियों में शामिल Starbucks ने अमेरिका में एक बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक स्तर पर छंटनी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद कंपनी में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ा है। छंटनी की इस प्रक्रिया में केवल सामान्य कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वाइस प्रेसिडेंट, मैनेजर और प्रशासनिक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कंपनी ने इस कदम को अपनी नई रणनीति “Back to Starbucks” नीति का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य संगठन को अधिक चुस्त, प्रभावी और लाभदायक बनाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के सीईओ ब्रायन निकोल (Brian Niccol) के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है, जिसमें लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है। स्टारबक्स अब अपने संचालन मॉडल को पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। कंपनी की योजना के अनुसार, कर्मचारियों को शिकागो, डलास, अटलांटा, बरबैंक और कैलिफोर्निया जैसे विभिन्न शहरों में ट्रांसफर भी किया जाएगा, ताकि कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके। जानकारी के अनुसार, यह छंटनी केवल एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है। फरवरी 2025 से अब तक कंपनी 2,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है, जिसमें स्टोर स्टाफ, रिटेल और रोस्टरी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि यह फैसला लंबे समय की ग्रोथ स्ट्रैटजी और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। स्टारबक्स के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि कंपनी अपने ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही रियल एस्टेट और नई योजनाओं पर लगभग 400 मिलियन डॉलर खर्च करने की भी योजना है। हालिया वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, स्टारबक्स की सालाना बिक्री करीब 9.5 बिलियन डॉलर रही है, जबकि कुल मुनाफा लगभग 511 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। हालांकि, बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव के चलते कंपनी अब खर्चों में कटौती पर विशेष ध्यान दे रही है। इस बड़े फैसले के बाद कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है, और माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी इसी तरह की लागत-कटौती रणनीतियों को अपना सकती हैं।

रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है। इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।