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कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है। रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे। यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया। रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया। आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!

नई दिल्ली। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के डायरेक्टर काश पटेल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी गर्लफ्रेंड को लग्जरी ट्रीटमेंट देने के लिए किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काश पटेल ने अपनी निजी यात्रा के दौरान FBI के जेट विमान का इस्तेमाल किया और हजारों डॉलर के आलीशान सुइट में म्यूजिक कंसर्ट का आनंद लिया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को काश पटेल अपनी 27 वर्षीय गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विलकिंस के साथ FBI के गल्फस्ट्रीम V जेट से वॉशिंगटन से फिलाडेल्फिया पहुंचे थे। वहां दोनों ने मशहूर कंट्री सिंगर्स George Strait और Chris Stapleton का लाइव म्यूजिक कंसर्ट देखा। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए दोनों ने करीब 35 हजार से 50 हजार डॉलर कीमत वाले प्राइवेट लग्जरी सुइट का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, FBI फ्लाइट क्रू और सुरक्षा कर्मियों को देर रात तक ड्यूटी पर इंतजार करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें ओवरटाइम भुगतान भी किया गया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सवाल उठने लगे कि क्या सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल नियमों के खिलाफ था। हालांकि काश पटेल ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह पहला मौका नहीं है जब काश पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी यात्राओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में निजी लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में पर्ल हार्बर मेमोरियल के पास वीआईपी टूर को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी। हालांकि FBI के प्रवक्ता बेन विलियमसन ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि यात्रा को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह एक आधिकारिक दौरा था। बावजूद इसके, अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करते हुए कहा है कि इस बार फैल रहा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले के मुकाबले अलग और बेहद चिंताजनक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस ईबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो के इटुरी प्रांत में ईबोला का यह 17वां बड़ा प्रकोप है। हालांकि इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था, जहां सैकड़ों लोग संक्रमित हुए थे और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई थीं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ईबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इंसानों में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाते हैं। ज़ैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है, जबकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में भी मौत का खतरा 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस अफ्रीका के घने जंगलों में मौजूद जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संपर्क में आने से यह तेजी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। ईबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द महसूस होता है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून बहना शुरू हो सकता है और कई बार मरीज के अंग काम करना बंद कर देते हैं। WHO और स्वास्थ्य एजेंसियां प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने, संक्रमित मरीजों को अलग रखने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संक्रमण कई देशों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

नई दिल्ली ।  रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तेजी से उभरती कंपनी Solex Energy ने अपने ताजा तिमाही नतीजों से बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए मुनाफे में 305 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल की है। इसके साथ ही कंपनी का रेवेन्यू भी कई गुना बढ़ा है, जिसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी के मुताबिक, चौथी तिमाही के दौरान उसका शुद्ध मुनाफा बढ़कर 57.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 14.3 करोड़ रुपये था। इसी तरह कंपनी की कुल आय में भी बड़ी छलांग देखने को मिली। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 885.5 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक साल पहले 254.4 करोड़ रुपये था। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि कंपनी ने बेहद तेज रफ्तार से कारोबार का विस्तार किया है। कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी मजबूत सुधार देखने को मिला। EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट 251 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 98.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 28 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी हल्के सुधार के साथ 11.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कंपनी की परिचालन क्षमता को मजबूत दर्शाता है। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। इस दौरान कंपनी की कुल आय 1,621 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 144 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं EBITDA 186 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया और कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी 132 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 98 करोड़ रुपये के पार निकल गया। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि कंपनी केवल रेवेन्यू ग्रोथ ही नहीं बल्कि मुनाफे के स्तर पर भी मजबूत पकड़ बना रही है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि बीता वित्त वर्ष उसके लिए बदलाव और विस्तार का दौर रहा। Solex Energy अब केवल एक मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह खुद को एक इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी बिजनेस के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने निवेशकों को लगभग 3900 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि यह स्टॉक लंबे समय से निवेशकों की पसंद बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में भी कंपनी के शेयरों में करीब 300 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जबकि एक साल के भीतर भी स्टॉक ने मजबूत रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिल रहे सरकारी समर्थन और बढ़ती मांग का सीधा फायदा ऐसी कंपनियों को मिल रहा है, जो सोलर और क्लीन एनर्जी क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे इस तरह की कंपनियों के कारोबार में और तेजी देखने को मिल सकती है। Solex Energy के ताजा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी केवल तेजी से बढ़ ही नहीं रही, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी लगातार खरी उतर रही है।

घाटे में चल रही कंपनी में भी रिलायंस को दिख रहा भविष्य, आलोक इंडस्ट्रीज के जरिए टेक्सटाइल कारोबार मजबूत करने की तैयारी

नई दिल्ली ।  भारतीय कॉरपोरेट जगत में जब भी लंबी अवधि की रणनीति और बड़े निवेश की बात होती है, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम प्रमुखता से सामने आता है। इसी रणनीतिक सोच के तहत कंपनी ने कुछ वर्ष पहले टेक्सटाइल सेक्टर की संघर्ष कर रही कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज में बड़ी हिस्सेदारी खरीदकर बाजार को चौंका दिया था। उस समय यह निवेश कई लोगों के लिए जोखिम भरा माना गया, क्योंकि कंपनी भारी कर्ज, कमजोर वित्तीय स्थिति और लगातार बढ़ते घाटे से जूझ रही थी। हालांकि रिलायंस ने इस निवेश को तात्कालिक मुनाफे के बजाय भविष्य की औद्योगिक मजबूती और वैल्यू चेन विस्तार के नजरिए से देखा। आज भी आलोक इंडस्ट्रीज का शेयर लगभग 13 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है और कंपनी पूरी तरह लाभ में नहीं लौट पाई है, लेकिन इसके बावजूद रिलायंस की रणनीति में कोई बदलाव दिखाई नहीं देता। आलोक इंडस्ट्रीज कभी देश की बड़ी वर्टिकली इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल कंपनियों में गिनी जाती थी। कंपनी स्पिनिंग, यार्न, फैब्रिक, गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल्स जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी रखती थी। लेकिन समय के साथ गलत विस्तार योजनाएं, प्रबंधन संबंधी चुनौतियां और बढ़ते कर्ज ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। हालात इतने खराब हो गए कि कंपनी को दिवाला प्रक्रिया के तहत पुनर्गठन के दौर से गुजरना पड़ा। इसी समय रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अवसर को पहचानते हुए कंपनी में हिस्सेदारी लेकर इसे फिर से खड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाया। रिलायंस की रणनीति केवल एक कंपनी को बचाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य टेक्सटाइल कारोबार की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना भी था। रिलायंस पहले से ही पॉलिएस्टर और संबंधित कच्चे माल के क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखती है, जबकि आलोक इंडस्ट्रीज यार्न और फाइबर उत्पादन में अच्छी क्षमता रखती है। ऐसे में दोनों कंपनियों के बीच तालमेल के जरिए उत्पादन लागत कम करने, सप्लाई सिस्टम मजबूत करने और बड़े स्तर पर लागत नियंत्रण हासिल करने की योजना बनाई गई। इसके अलावा टेक्सटाइल और रिटेल कारोबार के बीच बेहतर समन्वय भी इस निवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। हालांकि कंपनी के सामने अभी भी कई बड़े ऑपरेटिंग चैलेंज बने हुए हैं। बढ़ती कच्चे माल की कीमतें, बिजली और ईंधन पर बढ़ता खर्च, वैश्विक बाजार में कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े दबाव कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर डाल रहे हैं। कई बार परिचालन स्तर पर सुधार दिखाई देता है और आय में बढ़ोतरी भी दर्ज होती है, लेकिन भारी ब्याज भुगतान और पुराने वित्तीय बोझ के कारण कंपनी का कुल घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। लगातार नुकसान का असर कंपनी की नेटवर्थ पर भी दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद उद्योग जगत में माना जा रहा है कि रिलायंस इस निवेश को तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति के रूप में देख रही है। कंपनी का फोकस टेक्सटाइल सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भविष्य के बाजार अवसरों का लाभ उठाने पर है। आने वाले वर्षों में यदि वैश्विक बाजार की स्थिति बेहतर होती है और परिचालन लागत नियंत्रित रहती है, तो आलोक इंडस्ट्रीज धीरे-धीरे मजबूत वापसी कर सकती है।

मुनाफा घटा लेकिन कारोबार में जबरदस्त तेजी, Hind Rectifiers की ऑर्डर बुक ₹845 करोड़ के पार

नई दिल्ली ।  शेयर बाजार में निवेशकों के बीच चर्चित कंपनी Hind Rectifiers एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी वाली इस कंपनी ने अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा भले ही कमजोर रहा हो, लेकिन कारोबार की रफ्तार ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसकी ऑर्डर बुक भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्र में इस शेयर की चाल पर बनी हुई है। ताजा वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत घटकर 4.51 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने करीब 9.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। हालांकि मुनाफे में यह गिरावट बाजार के लिए चिंता का विषय बनी, लेकिन दूसरी ओर कंपनी के कारोबार में आई तेज वृद्धि ने स्थिति को संतुलित किया। चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 279.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 185.1 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है। कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला। EBITDA में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 8.42 करोड़ रुपये रह गया। इसके साथ ही EBITDA मार्जिन भी घटकर 3 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 10.8 प्रतिशत था। विशेषज्ञ मानते हैं कि लागत बढ़ने और कुछ परिचालन दबावों के कारण कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई है, लेकिन मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार से भविष्य की संभावनाएं अभी भी सकारात्मक दिखाई दे रही हैं। Hind Rectifiers ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसकी ऑर्डर बुक बढ़कर 845.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा उपलब्धि स्तर माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि रेलवे सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार ने ऑर्डर बुक को मजबूती दी है। इसके अलावा सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश का भी कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि बाजार में भविष्य को लेकर कंपनी के प्रति सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का भी ऐलान किया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 1.40 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह फैसला निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि कमजोर मुनाफे के बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों को रिटर्न देने का भरोसा बनाए रखा है। बाजार में इस कंपनी को लेकर एक और बड़ी वजह चर्चा में है और वह है दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक उनके पास कंपनी में 1.45 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो लगभग 5 लाख शेयरों के बराबर है। निवेशकों का मानना है कि किसी अनुभवी निवेशक की मौजूदगी अक्सर कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ाती है। अब आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार के दम पर कंपनी अपने मुनाफे को फिर से मजबूत कर पाती है या नहीं।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बड़ी कंपनी को झटका, घटती कमाई और कमजोर मार्जिन से शेयर टूटा

नई दिल्ली ।  इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी KEC International के हालिया तिमाही नतीजों ने बाजार और निवेशकों दोनों को चौंका दिया है। मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े प्रोजेक्ट्स होने के बावजूद कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, जिसके चलते शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर दबाव साफ दिखाई दिया। चौथी तिमाही के आंकड़ों में मुनाफे, रेवेन्यू और परिचालन आय में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को बढ़ती लागत, प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में चुनौतियों और मार्जिन दबाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जिसका असर सीधे वित्तीय नतीजों पर दिखाई दिया। तिमाही रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 28 प्रतिशत घटकर 193 करोड़ रुपए रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा कहीं अधिक मजबूत था। कंपनी के कुल रेवेन्यू में भी गिरावट दर्ज की गई और परिचालन प्रदर्शन पर दबाव साफ दिखाई दिया। इसके साथ ही EBITDA में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि लागत नियंत्रण और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। EBITDA मार्जिन में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया, क्योंकि यह किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। कमजोर नतीजों का असर कंपनी के शेयर पर भी तुरंत दिखाई दिया और बाजार में स्टॉक दबाव में आ गया। बीते कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और यह अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में स्टॉक में लगातार कमजोरी देखी गई है, जिससे अल्पकालिक निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। हालांकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण अभी भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन मौजूदा तिमाही के प्रदर्शन ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया है। इसके बावजूद कंपनी के पास मौजूद मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। पावर ट्रांसमिशन, रेलवे, सिविल कंस्ट्रक्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में कंपनी की मजबूत मौजूदगी आने वाले समय में ग्रोथ को दोबारा गति दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी आने वाली तिमाहियों में प्रोजेक्ट्स के निष्पादन में सुधार करती है और कच्चे माल की लागत स्थिर रहती है, तो उसकी लाभप्रदता में सुधार संभव है। सरकार की ओर से लगातार बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं भी कंपनी के लिए दीर्घकालिक अवसर के रूप में देखी जा रही हैं। ऐसे में बाजार की मौजूदा कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में कंपनी के परिचालन सुधार और मार्जिन रिकवरी पर बनी रहेगी, जो आगे स्टॉक की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विजय के मुख्यमंत्री बनने पर पहली बार बोले रजनीकांत, कहा- जलन नहीं, सिर्फ सम्मान और शुभकामनाएं

नई दिल्ली ।  तमिलनाडु की राजनीति और फिल्म जगत में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब सुपरस्टार रजनीकांत ने मुख्यमंत्री बने विजय को लेकर चल रही तमाम अफवाहों पर पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। लंबे समय से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा था कि विजय की ऐतिहासिक जीत के बाद रजनीकांत असहज महसूस कर रहे हैं। अब इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए रजनीकांत ने साफ शब्दों में कहा कि उनके मन में विजय के लिए किसी प्रकार की जलन नहीं है, बल्कि वे उनकी उपलब्धि से प्रभावित और खुश हैं। चेन्नई स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए रजनीकांत ने कहा कि अगर वे इन अफवाहों पर चुप रहते, तो लोग इन्हें सच मान लेते। उन्होंने कहा कि राजनीति और व्यक्तिगत रिश्तों को अलग नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, जिसे लेकर कई तरह की बातें बनाई गईं, लेकिन वह मुलाकात केवल व्यक्तिगत संबंधों और सम्मान के आधार पर थी। रजनीकांत ने उन आरोपों का भी जवाब दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई नहीं दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से विजय को शुभकामनाएं दे दी थीं और उनके मन में नई सरकार के लिए सकारात्मक सोच है। सुपरस्टार ने कहा कि किसी व्यक्ति की सफलता से जलन रखना उनकी सोच नहीं है और वे हमेशा प्रतिभा और मेहनत का सम्मान करते हैं। बातचीत के दौरान रजनीकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि अगर उनके करीबी मित्र कमल हासन मुख्यमंत्री बनते, तो शायद मजाक में थोड़ी जलन महसूस होती, लेकिन विजय के मामले में ऐसा कुछ नहीं है। उनके इस बयान के बाद माहौल हल्का हो गया और वहां मौजूद लोग मुस्कुरा उठे। रजनीकांत ने विजय की राजनीतिक उपलब्धि की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि विजय ने बेहद कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में खुद को स्थापित किया है और जनता का विश्वास जीतकर एक नई पहचान बनाई है। सुपरस्टार ने यह भी माना कि विजय की जीत ने उन्हें भी हैरान किया, क्योंकि इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता कम समय में हासिल करना किसी भी नेता के लिए बड़ी बात होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में जनता का विश्वास सबसे बड़ी ताकत होता है और विजय को अब उस विश्वास पर खरा उतरना होगा। रजनीकांत ने उम्मीद जताई कि नई सरकार राज्य के विकास और लोगों की उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में सकारात्मक काम करेगी। तमिलनाडु में विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब रजनीकांत ने इतने विस्तार से अपनी राय रखी। उनके बयान के बाद अब सोशल मीडिया पर चल रही कई चर्चाओं को विराम मिलता दिखाई दे रहा है। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि दक्षिण भारतीय सिनेमा के दो बड़े सितारों के बीच सम्मान और सकारात्मक संबंध कायम हैं।

रवीना टंडन का बड़ा खुलासा, भीड़ ने घर के बाहर किया हंगामा; एक शख्स जबरन अंदर घुसा

नई दिल्ली ।  बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने हाल ही में एक पुराने विवादित मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया है। अभिनेत्री ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि कैसे एक वायरल वीडियो के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि कुछ लोग उनके घर तक पहुंच गए थे और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया था। रवीना ने इस पूरे मामले को बेहद डरावना और परेशान करने वाला अनुभव बताया। यह मामला साल 2024 का बताया जा रहा है, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। उस वीडियो में अभिनेत्री और उनके ड्राइवर पर एक महिला के साथ बदसलूकी और कार से टक्कर मारने जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि बाद में जांच और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सच्चाई अलग निकली, लेकिन उस समय स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। रवीना टंडन ने बताया कि वीडियो को इस तरह पेश किया गया, जिससे पूरा मामला गलत दिशा में चला गया। उनके अनुसार, कुछ लोग जानबूझकर हंगामा खड़ा करना चाहते थे और उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे थे। अभिनेत्री ने कहा कि जब उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए खुद बाहर जाकर बात करने की कोशिश की, तभी माहौल अचानक बेकाबू हो गया। उन्होंने बताया कि बाहर निकलते ही बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। उनके ड्राइवर को घेर लिया गया और स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें तुरंत पुलिस को बुलाना पड़ा। अभिनेत्री के मुताबिक, उनके ड्राइवर को धमकियां दी जा रही थीं और लोग उसे बाहर सौंपने की मांग कर रहे थे। रवीना ने कहा कि वह अपने कर्मचारी को अकेला छोड़ने की स्थिति में नहीं थीं, क्योंकि उन्हें डर था कि भीड़ उसके साथ हिंसा कर सकती है। रवीना ने इस घटना का सबसे डरावना हिस्सा बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनके घर के अंदर घुसने की कोशिश भी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पुलिस बुलाने की बात कही तो उनका फोन तक छीनने की कोशिश हुई। इसी दौरान एक व्यक्ति जबरन घर के भीतर घुस आया, जिसे उन्होंने खुद रोकते हुए बाहर धकेला। अभिनेत्री के मुताबिक, उस समय घर में मौजूद महिलाएं और स्टाफ लगातार लोगों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उनके घर के बाहर जो कुछ हो रहा था, वह बेहद भयावह था और उन्होंने ऐसी स्थिति की कभी कल्पना नहीं की थी। बाद में सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस जांच में साफ हो गया कि लगाए गए आरोप सही नहीं थे और घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। रवीना टंडन का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा। उन्होंने यह भी माना कि ऐसी घटनाएं किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकती हैं। यह खुलासा सामने आने के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। फैंस अभिनेत्री के समर्थन में प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं।

DU PG Admission 2026 शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित University of Delhi ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीजी में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्र अब कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस बार यूनिवर्सिटी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत एक वर्षीय और दो वर्षीय मास्टर डिग्री प्रोग्राम भी शुरू किए हैं, जिससे छात्रों को नए विकल्प मिलेंगे। 7 जून तक भर सकेंगे फॉर्मदिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 16 मई 2026 से शुरू हो चुकी है। छात्र 7 जून 2026 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। CUET PG स्कोर से होगा एडमिशनइस बार पीजी कोर्सेज में दाखिला केवल CUET PG 2026 स्कोर के आधार पर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कोर्स में एडमिशन के लिए छात्रों को उसी विषय में CUET PG परीक्षा देना जरूरी होगा। जो छात्र फिलहाल ग्रेजुएशन के तीसरे या चौथे वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पात्रता की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी। DigiLocker फीचर से आसान होगी प्रक्रियाइस बार एडमिशन प्रक्रिया को ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने के लिए DigiLocker/API Setu आधारित ऑटो-इंटीग्रेशन फीचर जोड़ा गया है। इसके जरिए छात्रों का नाम, जन्मतिथि, श्रेणी और CUET स्कोर जैसी जानकारी स्वतः पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी। इससे दस्तावेज अपलोड करने में आसानी होगी और गलतियों की संभावना भी कम रहेगी। आवेदन शुल्क कितना है?यूनिवर्सिटी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आवेदन शुल्क श्रेणी के अनुसार तय किया गया है-SC/ST/PwBD वर्ग : ₹100 प्रति प्रोग्रामUR/OBC-NCL/EWS वर्ग : ₹250 प्रति प्रोग्रामछात्र एक से अधिक कोर्स के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन प्रत्येक प्रोग्राम के लिए अलग शुल्क देना होगा। कौन-कौन से डॉक्यूमेंट होंगे जरूरी?आवेदन के दौरान छात्रों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, जिनमें-CUET PG स्कोर कार्डग्रेजुएशन मार्कशीटपासपोर्ट साइज फोटोहस्ताक्षरकैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र छात्रों को दी गई खास सलादिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों से कहा है कि वे एडमिशन से जुड़ी हर अपडेट के लिए आधिकारिक CSAS पोर्टल नियमित रूप से चेक करते रहें। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने शुरुआती तकनीकी समस्याओं की जानकारी भी साझा की है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द फॉर्म भरना बेहतर रहेगा। नए कोर्स और बढ़ते अवसरNEP के तहत शुरू किए गए नए मास्टर प्रोग्राम्स के चलते छात्रों को अब अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और स्पेशलाइजेशन का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दिल्ली यूनिवर्सिटी के ये नए कोर्स छात्रों के करियर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।