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US-Cuba Relations: ट्रंप ने क्यूबा पर हमले की अटकलों को किया खारिज, लूला बोले- सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं

US-Cuba Relations: नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की व्हाइट हाउस में हुई बंद कमरे की अहम बैठक के बाद बड़ा बयान सामने आया है। ब्राजीलियाई राष्ट्रपति लूला ने दावा किया कि अमेरिका की क्यूबा पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में क्यूबा, क्षेत्रीय सुरक्षा और लैटिन अमेरिका की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद वाशिंगटन स्थित ब्राजील दूतावास में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए लूला ने कहा कि ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि वह क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते। लूला बोले- बातचीत से हल चाहता है क्यूबा ब्राजीलियाई राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अब वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। लूला के मुताबिक, लगातार लगे प्रतिबंधों ने क्यूबा के विकास और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।उन्होंने इस मुलाकात को सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद जरूरी है। कॉन्सर्ट विवाद या कुछ और? तारा–वीर के रिश्ते टूटने की असली वजह पर नया खुलासा.. अमेरिका की नीति अब भी सख्त हालांकि ट्रंप के बयान के बावजूद अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बनाए रखा है। हाल ही में अमेरिका ने क्यूबा की कई कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि क्यूबा की सैन्य कंपनी GAISA और खनन क्षेत्र से जुड़ी कुछ संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। इन प्रतिबंधों का असर क्यूबा-कनाडा साझेदारी वाली कंपनी Moa Nickel पर भी पड़ा है। क्यूबा पर बढ़ता आर्थिक दबाव अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा सरकार पर दबाव बनाना है। वहीं आलोचकों का मानना है कि इन कदमों से क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।ट्रंप और लूला की मुलाकात के बाद फिलहाल क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं कम होती दिख रही हैं, लेकिन अमेरिका-क्यूबा संबंधों में तनाव अब भी बरकरार है।

Adobe Noida Expansion: नोएडा बना टेक इनोवेशन का नया केंद्र, अडोबी ने 1.58 लाख वर्गफुट में शुरू किया अत्याधुनिक ऑफिस

 Adobe Noida Expansion: नई दिल्ली । नोएडा के एक आधुनिक व्यावसायिक परिसर में हाल ही में एक ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर दिया है। ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी अडोबी ने यहां अपने नए बड़े ऑफिस की शुरुआत कर दी है, जो न केवल एक कॉर्पोरेट विस्तार है बल्कि भारत के बढ़ते डिजिटल भविष्य का भी प्रतीक बन चुका है। करीब 1.58 लाख वर्गफुट में फैला यह नया कार्यस्थल इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी विकास का एक मजबूत केंद्र बनता जा रहा है। इस नए ऑफिस में 700 से अधिक पेशेवर एक साथ काम करेंगे, जिनमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ग्राहक अनुभव से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह कार्यस्थल इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां नवाचार, सहयोग और रचनात्मकता को बढ़ावा मिल सके। जैसे-जैसे दुनिया एआई आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस केंद्र की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी। यह विस्तार केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत में बढ़ते तकनीकी भरोसे और प्रतिभा की क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में वर्षों से विकसित हो रही डिजिटल स्किल्स और मजबूत इंजीनियरिंग इकोसिस्टम ने वैश्विक कंपनियों को लगातार आकर्षित किया है। इसी कड़ी में नोएडा का यह नया केंद्र आने वाले समय में बड़े इनोवेशन का हिस्सा बनने जा रहा है। Apple India Policy: भारत में iPhone खरीदते ही फंस जाते हैं ग्राहक! अमेरिका में 14 दिन तक मिलता है रिटर्न का अधिकार इस पूरे कैंपस को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करे। यहां का माहौल न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता देता है। ऊर्जा की बचत करने वाली प्रणालियां, टिकाऊ निर्माण तकनीक और आधुनिक डिजाइन इस बात को दर्शाते हैं कि भविष्य के कार्यस्थल किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत में कंपनी की यात्रा कई वर्षों पहले एक छोटे अनुसंधान केंद्र के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन आज यह देश इसके वैश्विक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। यहां मौजूद हजारों कर्मचारी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक उत्पादों और सेवाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस नए विस्तार से यह योगदान और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। नोएडा में इस तरह के बड़े निवेश यह भी दिखाते हैं कि यह क्षेत्र अब केवल एक औद्योगिक या आवासीय केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह एक पूर्ण तकनीकी और नवाचार हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम इसे वैश्विक कंपनियों के लिए एक आदर्श स्थान बना रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार के निवेश न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा देंगे। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक को बनाने और दिशा देने वाला देश बनता जा रहा है।

West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

  West Asia Crisis: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है। लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा। युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है। कॉन्सर्ट विवाद या कुछ और? तारा–वीर के रिश्ते टूटने की असली वजह पर नया खुलासा.. दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा। ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा। खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।  

भारत–इजिप्ट रणनीतिक साझेदारी मजबूत, 2030 तक 12 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

नई दिल्ली। भारत और मिस्र (इजिप्ट) के बीच आर्थिक संबंधों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। हाल ही में मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एक बिजनेस डेलिगेशन मीटिंग में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया। इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि दोनों देश आने वाले वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान लगभग 5 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 12 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इस मौके पर मुंबई में तैनात डाहलिया मोहम्मद नाजिह मोहम्मद तवाकोल ने कहा कि भारत और इजिप्ट के संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने जून 2023 में रणनीतिक साझेदारी समझौता किया था, जिससे सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, फार्मास्युटिकल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएं हैं। विशेष रूप से सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र को भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा निवेश केंद्र बताया गया है। इस अवसर पर विजय कलंत्री ने भी कहा कि भारत और इजिप्ट के बीच व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 5 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 12 अरब डॉलर करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए इजिप्ट एक बड़ा बाजार बन सकता है। साथ ही, इजिप्ट में भारतीय निवेश भी बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। हालांकि कुछ लॉजिस्टिक और वीजा संबंधी चुनौतियां हैं, लेकिन दोनों देश इन्हें तेजी से हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत और इजिप्ट की यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोल सकती है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।

जर्मनी में बढ़ी भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की डिमांड, UN में जर्मन अधिकारी बोले- भारत सबसे अहम साझेदार

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जर्मनी ने भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की जमकर सराहना की। जर्मनी के बहुपक्षीय मामलों के कमिश्नर फ्लोरियन लॉडी ने कहा कि स्किल्ड माइग्रेशन के लिए भारत जर्मनी के सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा साझेदार देशों में शामिल है। जर्मनी के लिए ‘ट्रिपल विन’ साबित हो रहे भारतीयभारत के यूएन मिशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फ्लोरियन लॉडी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच माइग्रेशन सहयोग दोनों देशों और कामगारों के लिए “ट्रिपल विन” है। इससे भारतीय युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जर्मनी को कुशल श्रमिक मिल रहे हैं और भारत के विशाल कार्यबल को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि जर्मनी में भारतीय माइग्रेंट्स बेहद क्वालिफाइड हैं, खासकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में। उनकी आय जर्मनी की औसत आय से भी अधिक है, जो उनकी योग्यता को दर्शाती है। 2025 में 1.8 लाख भारतीयों ने जर्मन वर्कफोर्स में दिया योगदानलॉडी के मुताबिक, अकेले 2025 में करीब 1,80,000 भारतीय जर्मनी की वर्कफोर्स का हिस्सा बने हैं। पिछले 10 वर्षों में यह संख्या 656 फीसदी बढ़ी है, जो दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी लोकतंत्र, स्वतंत्रता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों के कारण मजबूत साझेदार बन चुके हैं। वीजा और डिग्री प्रक्रिया हो रही आसानजर्मन अधिकारी ने बताया कि 2022 में हुए Migration and Mobility Partnership Agreement (MMPA) के बाद स्किल्ड वर्कर्स, छात्रों और रिसर्चर्स के लिए जर्मनी जाने की प्रक्रिया आसान हुई है। अब वीजा प्रक्रिया को डिजिटल और तेज बनाया जा रहा है, जबकि डिग्री रिकग्निशन और जर्मन भाषा प्रशिक्षण को भी अधिक सुलभ किया जा रहा है। जर्मनी में पढ़ रहे 60 हजार से ज्यादा भारतीय छात्रफ्लोरियन लॉडी ने बताया कि लगातार तीसरे साल 60,000 से ज्यादा भारतीय छात्र जर्मनी के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। भारतीय छात्र अब वहां सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह बन चुके हैं। इनमें से आधे से ज्यादा छात्र पढ़ाई पूरी होने के बाद जर्मनी में नौकरी भी हासिल कर लेते हैं।इसके अलावा करीब 10,000 भारतीय अप्रेंटिस जर्मनी के प्रतिष्ठित वोकेशनल ट्रेनिंग सिस्टम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं।

ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद दुनिया भर में अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने क्यों रद्द किए टैरिफ?अमेरिकी संघीय अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत मिली सीमित शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था। ट्रंप ने फरवरी में 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लागू किए थे, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। लेकिन अदालत ने इन्हें कानून के दायरे से बाहर माना। भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति में लगातार हो रहे कानूनी बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय हैं। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन मौजूदा हालात में इस समझौते पर जल्दबाजी भारत के लिए जोखिम भरी हो सकती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि जब तक अमेरिका अपनी व्यापार नीति को स्थिर और भरोसेमंद नहीं बनाता, तब तक भारत को किसी बड़े व्यापारिक समझौते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अमेरिका क्या चाहता है?विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क कम करे या खत्म करे, जबकि खुद अमेरिका अपने “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (MFN) टैरिफ में बड़ी कटौती करने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में भारत को व्यापारिक संतुलन बनाए रखने में सावधानी बरतनी होगी। क्या पूरी दुनिया पर तुरंत असर पड़ेगा?फिलहाल अदालत का फैसला केवल उन पक्षों पर लागू हुआ है जिन्होंने यह मामला दायर किया था। हालांकि माना जा रहा है कि इस फैसले का असर आगे चलकर अमेरिका की पूरी व्यापार नीति पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन अब फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर सकता है। साथ ही धारा 301 और धारा 232 जैसे अन्य सख्त कानूनों के जरिए व्यापारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश भी की जा सकती है। WTO और वैश्विक व्यापार को राहतविश्व व्यापार संगठन (WTO) से जुड़े विशेषज्ञों ने अदालत के फैसले को वैश्विक व्यापार नियमों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की व्यापार प्रणाली फिर पुराने MFN ढांचे की ओर लौट सकती है। भारत के लिए क्या है रणनीति?विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। अमेरिका की घरेलू व्यापार नीतियों में स्थिरता आने तक किसी दीर्घकालिक समझौते से बचना भारत के हित में हो सकता है। कई अन्य देश भी अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों के बीच नए दौर की शुरुआत के संकेत देते हुए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में औपचारिक जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने बीजिंग में चीन के सहायक विदेश मंत्री और प्रोटोकॉल विभाग के महानिदेशक होंग लेई को अपने साख पत्रों (क्रेडेंशियल्स) की प्रति सौंपी। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में राजनयिक परंपराओं के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा है कि दुरईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन कई संवेदनशील मुद्दों के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय दूतावास में आयोजित हुआ विशेष समारोहगुरुवार को बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने भी हिस्सा लिया। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीक कार्रवाई और दृढ़ संकल्प को याद किया गया। साथ ही पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया गया। अनुभवी राजनयिक हैं विक्रम दुरईस्वामीविक्रम दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और उन्हें विदेश नीति व अंतरराष्ट्रीय संबंधों का लंबा अनुभव है। चीन में नियुक्ति से पहले वह ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। Ambassador Vikram Doraiswami presented a copy of his credentials to Assistant Foreign Minister and Director-General of the Protocol Department of the Ministry of Foreign Affairs of the People’s Republic of China, HE Hong Lei, in Beijing on 7 May 2026. pic.twitter.com/1Q2w3NEymC — India in China (@EOIBeijing) May 7, 2026 बीजिंग पहुंचने पर उनका चीनी अधिकारियों और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि दुरईस्वामी की कूटनीतिक समझ आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अब तक जहाज पर 5 संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। जहाज में 2 भारतीय नागरिक भी मौजूद बताए जा रहे हैं। WHO बोला- गंभीर मामला, लेकिन कोरोना जैसा खतरा नहींविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घटना को गंभीर बताया है, हालांकि फिलहाल आम लोगों के लिए बड़े खतरे की आशंका कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस कोरोना की तरह तेजी से इंसानों में नहीं फैलता। नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की डॉक्टर करिन एलेन वेल्डकैंप ने कहा कि हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद सीमित होता है और इसका फैलाव कोविड-19 जितना तेज नहीं है। मरीजों को आइसोलेशन में रखा गयाजहाज पर संक्रमित पाए गए लोगों को अलग आइसोलेशन में रखा गया है। मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों में लक्षण खत्म होने और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही आइसोलेशन हटाया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लंबा हो सकता है। कुछ मामलों में लक्षण 6 हफ्ते तक बाद में भी सामने आ सकते हैं। इसी वजह से संक्रमितों और संपर्क में आए लोगों को लंबे समय तक क्वारंटाइन में रखा जा रहा है। एंडीज स्ट्रेन का शकWHO के अनुसार मौत के मामलों में एंडीज स्ट्रेन होने की आशंका है। यह हंतावायरस का ऐसा प्रकार है, जो कुछ स्थितियों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है। जांच में पता चला है कि शुरुआती संक्रमित दंपती यात्रा से पहले अर्जेंटीना, चिली और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे, जहां वायरस फैलाने वाले चूहों की प्रजातियां पाई जाती हैं। कई देशों को अलर्ट170 यात्रियों और 71 क्रू सदस्यों वाले इस जहाज ने मार्च में अर्जेंटीना से यात्रा शुरू की थी और अब स्पेन के कैनरी आइलैंड की ओर बढ़ रहा है। WHO ने ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर समेत 12 देशों को अलर्ट जारी किया है।क्रूज कंपनी और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले पेय की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में सत्तू का नमकीन शरबत एक बेहद सरल और प्रभावी देसी विकल्प बनकर सामने आता है। यह न सिर्फ शरीर को तुरंत राहत देता है बल्कि लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है। सत्तू, जिसे भुने हुए चने से तैयार किया जाता है, भारतीय घरों में एक पारंपरिक और पौष्टिक सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर की गर्मी को भी संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। इस शरबत को तैयार करना बेहद आसान है। सबसे पहले सत्तू को ठंडे पानी में अच्छी तरह घोलकर स्मूद मिश्रण बनाया जाता है ताकि कोई गांठ न रहे। इसके बाद इसमें भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। चाहें तो इसमें नींबू का रस, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी मिलाई जा सकती है, जिससे इसका स्वाद चटपटा और ताजगी भरा हो जाता है। तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद इसे परोसा जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। बर्फ मिलाकर इसे और अधिक ठंडा बनाया जा सकता है, जिससे गर्मी में तुरंत राहत महसूस होती है। सत्तू का नमकीन शरबत न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे अनावश्यक भूख कम लगती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। यही वजह है कि यह ड्रिंक खासकर गर्मियों में बहुत उपयोगी माना जाता है। देसी और प्राकृतिक होने के कारण यह बाजार के ठंडे पेयों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। इसे रोजाना की डाइट में शामिल करके गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को तरोताजा रखा जा सकता है।

गर्मी में घड़े का पानी क्यों है सबसे बेहतर? एक्सपर्ट्स ने बताए सेहत से जुड़े बड़े फायदे

नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच शरीर को हाइड्रेट और संतुलित रखने के लिए सही पानी का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। आमतौर पर लोग ठंडक पाने के लिए फ्रिज का पानी पीते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के घड़े यानी मटके का पानी ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज का बहुत ठंडा पानी गले और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है। इससे कई बार गले में खराश, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। मिट्टी के घड़े में रखा पानी न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि इसमें हल्की प्राकृतिक सुगंध भी होती है, जो इसे और अधिक ताजगी भरा बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी पानी में मौजूद अशुद्धियों को अपने अंदर सोख लेती है और कुछ हद तक उसे शुद्ध करने में मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मटके का पानी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसके अलावा यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे कई मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। आयुर्वेद में भी मिट्टी के घड़े के पानी को बेहद लाभकारी माना गया है। इसे प्राकृतिक और शुद्ध जल का स्रोत माना जाता है, जो शरीर को भीतर से ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मटके का पानी फ्रिज के पानी की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प है, खासकर गर्मियों के मौसम में। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मटके का पानी पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है और इसमें प्राकृतिक मिनरल्स मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए मटके का पानी एक सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घर में मिट्टी का घड़ा जरूर रखा जाए और नियमित रूप से इसका पानी पिया जाए, ताकि शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती रहे और स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।