Chambalkichugli.com

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिहार के नए नेतृत्व को दी बधाई विकास की जताई उम्मीद

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिहार में नई सरकार के गठन पर शुभकामनाएं देते हुए वहां के नए नेतृत्व को बधाई दी है। उन्होंने सम्राट चौधरी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। इसके साथ ही बिजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर भी बधाई दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में इन सभी नेताओं के सफल कार्यकाल की कामना की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की एनडीए सरकार विकास और सुशासन के नए मानक स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में मजबूत नेतृत्व और बेहतर प्रशासन से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा और राज्य तेजी से प्रगति की दिशा में आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि नई सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और विकास के साथ साथ सुशासन को भी प्राथमिकता देगी।

आज से अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र यात्रा में शामिल होंगे। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर अगस्त के अंत तक चलेगी। यात्रा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना परमिट के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालु ऑनलाइन या देशभर की निर्धारित बैंक शाखाओं के जरिए ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। Amarnath Yatra के लिए कैसे करें रजिस्ट्रेशन और कितनी है फीसअमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन दो तरीकों से किया जा सकता है—ऑनलाइन और ऑफलाइन। ऑनलाइन आवेदन श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किया जा सकता है, जबकि ऑफलाइन प्रक्रिया बैंक शाखाओं के माध्यम से पूरी होती है। रजिस्ट्रेशन के दौरान श्रद्धालुओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पहचान पत्र और हेल्थ सर्टिफिकेट जमा करना होता है। इसके बाद यात्रा परमिट जारी किया जाता है। फीस की बात करें तो भारतीय श्रद्धालुओं के लिए यह लगभग 150 से 220 रुपये के बीच तय की गई है, जबकि विदेशी यात्रियों के लिए शुल्क अधिक हो सकता है। रूट, नियम और जरूरी गाइडलाइनअमरनाथ यात्रा के लिए दो मुख्य रूट निर्धारित किए गए हैं—पहलगाम और बालटाल। पहलगाम रूट लंबा लेकिन आसान माना जाता है, जबकि बालटाल रूट छोटा लेकिन ज्यादा कठिन है। यात्रा के लिए कुछ जरूरी नियम भी तय किए गए हैं:उम्र 13 से 70 साल के बीच होनी चाहिएअनिवार्य हेल्थ सर्टिफिकेट (CHC) जरूरी हैRFID कार्ड साथ रखना होगागर्भवती महिलाओं (6 सप्ताह से अधिक) को अनुमति नहीं हैइसके अलावा श्रद्धालुओं को मौसम, सुरक्षा और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए इस बार व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया गया है। अगर आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो समय रहते रजिस्ट्रेशन कराना बेहद जरूरी है।

Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Pawan Khera को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत (ट्रांजिट अग्रिम जमानत) के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे अब यह मामला (Pawan Khera Case) और ज्यादा गंभीर हो गया है और कानूनी लड़ाई शीर्ष अदालत तक पहुंच गई है। दरअसल, तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। क्या है Pawan Khera Case?यह विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर कुछ आरोप लगाए थे। इसके बाद असम में उनके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। वहां से उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?असम सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का कहना है कि इस तरह की राहत जांच को प्रभावित कर सकती है और मामला गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे अब पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं। कुल मिलाकर, यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

राज्यसभा डिप्टी लीडर बने Ashok Mittal पर ED की कार्रवाई

नई दिल्ली।  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई पंजाब के जालंधर स्थित उनके आवास पर की जा रही है, जहां जांच एजेंसी की टीम सुबह से ही मौजूद है। दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगाले जा रहेसूत्रों के मुताबिक, ED की टीम मित्तल के घर पर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह कार्रवाई किस मामले में की जा रही है। Ashok Mittal हाल ही में चर्चा में आए थे, जब AAP ने Raghav Chadha की जगह उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। व्यवसाय से शिक्षा तक का सफरअशोक मित्तल का जन्म जालंधर में हुआ था। उनके परिवार ने ‘लवली स्वीट्स’ नाम से मिठाई का कारोबार शुरू किया था, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने 2005 में Lovely Professional University की स्थापना की, जो आज देश की बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में शामिल है। इस छापेमारी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि AAP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाती रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

इकोनॉमी को राहत: एक्सपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट 20.67 अरब डॉलर पर आया

नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी व्यापार से राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च 2026 में देश का व्यापारिक निर्यात 6.3% बढ़कर 38.92 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। यह जानकारी Ministry of Commerce and Industry की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आई है।  निर्यात में मजबूती, सालाना प्रदर्शन भी बेहतरवाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। यह पिछले वित्त वर्ष (825.26 अरब डॉलर) की तुलना में 4.22% की बढ़त दर्शाता है।यह आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। आयात में गिरावट से घाटा कममार्च में आयात 5.98% घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया। आयात में कमी आने से व्यापार घाटा घटा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को राहत मिली।विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में कमी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की रणनीतिक खरीद में बदलाव रहा है। तेल रणनीति ने दिलाई राहतवैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय अपने भंडार का उपयोग किया। इससे तेल आयात बिल कम हुआ और व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ा।  वैश्विक तनाव के बीच आया डेटायह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल-गैस का व्यापार होता है, वहां तनाव के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।  भारत को मिली राहत: LPG सप्लाई जारीतनाव के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया। ‘जग विक्रम’ नामक पोत 20,400 मीट्रिक टन LPG लेकर Kandla Port पहुंचा ‘ग्रीन आशा’ जहाज 15,400 टन LPG के साथ Jawaharlal Nehru Port पहुंचा इससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।  क्या है इसका व्यापक असर?निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगाआयात घटने से व्यापार घाटा नियंत्रित रहेगावैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता मजबूत दिखती है

ईरान अमेरिका तनाव के बीच इजरायल लेबनान वार्ता क्या बदलने वाली है मध्य पूर्व की तस्वीर

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भू राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है जहां इजरायल और लेबनान के बीच करीब 33 साल बाद सीधी बातचीत शुरू हुई है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इस पूरी बातचीत को एक बड़े कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है जिसकी मध्यस्थता अमेरिका कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। दरअसल इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है जिसकी एक बड़ी वजह दक्षिणी लेबनान में सक्रिय संगठन हिजबुल्लाह है। यह संगठन ईरान का समर्थक माना जाता है और समय समय पर इजरायल पर हमले करता रहा है। विशेष रूप से 7 अक्टूबर 2023 हमास हमला के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था जब हमास के हमलों के साथ ही हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हाल के घटनाक्रमों में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की स्थिति कुछ कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल इस मौके का फायदा उठाकर क्षेत्रीय समीकरण बदलने की कोशिश में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान के साथ सीधी बातचीत का मकसद हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम करना है। यदि लेबनानी सरकार इस दिशा में सख्त कदम उठाती है तो यह ईरान के लिए बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि हिजबुल्लाह को उसका प्रमुख सहयोगी माना जाता है। हाल ही में लेबनान सरकार ने गैर सरकारी हथियारों को हटाने के निर्देश दिए हैं जिसकी सराहना बेंजामिन नेतन्याहू ने भी की है। यह संकेत देता है कि लेबनान धीरे धीरे हिजबुल्लाह के प्रभाव को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और इजरायल अन्य मोर्चों पर भी ईरान को घेरने की रणनीति अपना रहे हैं जिसमें समुद्री मार्गों पर दबाव बनाना भी शामिल है।हालांकि इजरायल ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर का असर लेबनान पर नहीं पड़ेगा यानी दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। कुल मिलाकर यह वार्ता केवल दो देशों के बीच संवाद नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम है। अगर यह बातचीत सफल होती है तो इससे क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्ष की दिशा बदल सकती है और हिजबुल्लाह के प्रभाव को कमजोर किया जा सकता है।

शहरी विकास को मिलेगा बूस्ट: अर्बन फंड से बढ़ेगी बाजार आधारित फाइनेंसिंग

नई दिल्ली। देश के शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने बुधवार को 1 लाख करोड़ रुपए के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) और क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (CRGSS) की गाइडलाइंस लॉन्च कीं। इस फंड का मकसद बाजार आधारित फाइनेंसिंग के जरिए करीब चार गुना यानी 4 लाख करोड़ रुपए तक निवेश जुटाना है।  सरकारी पैसे से खींचेंगे निजी निवेशकार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि यह फंड शहरी विकास के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पूंजी का उपयोग कर निजी और संस्थागत निवेश को आकर्षित करना है।Government of India की इस पहल से शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें निवेश के लिए आकर्षक बनाया जाएगा। ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदममंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहर अब आर्थिक विकास, इनोवेशन और रोजगार के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। ऐसे में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर प्लानिंग, फाइनेंसिंग और गवर्नेंस बेहद जरूरी है। कहां खर्च होगा पैसा?इस 1 लाख करोड़ रुपए के फंड का इस्तेमाल कई अहम प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा—पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकासशहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटीगैर-मोटर चालित परिवहन (साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग)पानी, स्वच्छता और क्लाइमेट-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग मॉडल क्या होगा?इस योजना की खास बात इसका फाइनेंसिंग मॉडल है-केंद्र सरकार केवल 25% तक ही फंड देगीकम से कम 50% राशि म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और PPP मॉडल से जुटाई जाएगीइससे शहरों को आत्मनिर्भर बनने और बाजार से पूंजी जुटाने की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।  बजट का पूरा ब्रेकअप₹90,000 करोड़ – इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स₹5,000 करोड़ – प्रोजेक्ट तैयारी और क्षमता निर्माण₹5,000 करोड़ – CRGSS (गारंटी स्कीम)  छोटे शहरों को भी मिलेगा फायदाCRGSS स्कीम का खास फोकस टियर-2, टियर-3 शहरों और पहाड़ी व उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों पर रहेगा। इसका उद्देश्य इन शहरों को भी बाजार से फंड जुटाने में सक्षम बनाना है, ताकि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ULBs की भूमिका होगी अहममंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने और आधुनिक फाइनेंसिंग मॉडल अपनाने पर जोर दिया। इससे शहर खुद अपने विकास के लिए संसाधन जुटा सकेंगे।  डिजिटल कनेक्टिविटी और साझेदारी को बढ़ावाइस मौके पर शहरों को बैंकों, वित्तीय संस्थानों और क्रेडिट एजेंसियों से जोड़ने के लिए एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई। साथ ही राज्यों और मंत्रालय के बीच MoU तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए।  कब तक लागू रहेगा फंड?सरकार के अनुसार, यह फंड वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक लागू रहेगा और इसका लक्ष्य भारतीय शहरों को ‘ग्रोथ हब’ में बदलना है।

मंदसौर मर्डर मिस्ट्री पत्नी और प्रेमी ने रची खौफनाक साजिश हत्या के बाद खुद ही पहुंच गए थाने

मंदसौर । मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला हत्याकांड सामने आया है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही पति की हत्या कर दी और फिर चालाकी से उसे गुमशुदा दिखाने की कोशिश की। जानकारी के अनुसार आरोपी पंकज चौधरी और मृतक की पत्नी धापुबाई के बीच पिछले करीब पांच वर्षों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस संबंध की जानकारी जब पति धनराज नाथ को लगी तो उसने इसका विरोध किया और पत्नी को कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन यह बात दोनों को नागवार गुजरी और उन्होंने रास्ते से हटाने के लिए धनराज की हत्या की साजिश रच डाली। योजना के तहत 10 अप्रैल की शाम पंकज चौधरी मोटरसाइकिल से धनराज के घर पहुंचा और उसे भरोसे में लेकर अपने साथ खेत पर ले गया। वहां पहुंचकर उसने पहले उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उसने शव के टुकड़े किए और पेट्रोल पंप से डीजल लाकर उसे जला दिया। इतना ही नहीं आरोपी ने शव को बोरे में भरकर जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर खेत में दफना दिया ताकि किसी को भनक न लगे। हत्या के बाद भी दोनों आरोपियों ने अपनी चालाकी जारी रखी और भानपुरा थाने पहुंचकर खुद ही धनराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी ताकि शक से बचा जा सके। हालांकि तीन दिन तक जब धनराज का कोई पता नहीं चला तो परिजनों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने जब जांच तेज की और मोबाइल लोकेशन व कॉल डिटेल खंगाले तो मामला संदिग्ध लगा। सख्त पूछताछ में पंकज चौधरी ने आखिरकार हत्या की पूरी साजिश कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस खेत तक पहुंची और वहां से शव के अवशेष बरामद किए गए। मौके पर एफएसएल टीम ने भी जांच की और साक्ष्य एकत्रित किए गए। घटना का खुलासा होते ही मृतक के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गरोठ भानपुरा मार्ग पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। परिजन आरोपी के मकान पर बुलडोजर चलाने और मामले की गहन जांच की मांग पर अड़े रहे। करीब 8 घंटे तक चला यह प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। पुलिस ने इस मामले में पंकज चौधरी और धापुबाई के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है बल्कि यह भी दिखाती है कि निजी रिश्तों में उपजे विवाद किस हद तक खतरनाक रूप ले सकते हैं।

बातचीत चाहते हैं, दबाव नहीं सहेंगे: ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका इजरायल को कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ किया है कि ईरान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी तरह का दबाव या शर्तें थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा ईरान ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश कभी भी टकराव या अस्थिरता का समर्थक नहीं रहा है। लेकिन यदि किसी ने ईरान को झुकाने या उस पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की तो वह पूरी तरह विफल होगी। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी संप्रभुता से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगा। नागरिकों पर हमलों पर उठाए सवाल ईरानी न्यूज एजेंसी के हवाले से राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत नागरिकों बच्चों और बौद्धिक वर्ग को निशाना बनाना साथ ही स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों को नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। संवाद ही रास्ता लेकिन दबाव नहीं राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान का रुख हमेशा से संवाद और सहयोग का रहा है। उन्होंने कहा कि देश न तो युद्ध चाहता है और न ही अस्थिरता लेकिन अगर उसकी संप्रभुता पर दबाव बनाया गया तो ईरानी जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को झुकाने या सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की हर कोशिश नाकाम रहेगी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस दौरान तेहरान सहित कई बड़े शहरों पर हमले हुए। इसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल के ठिकानों और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस्लामाबाद वार्ता रहीं बेनतीजा तनाव कम करने के लिए 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने नेतृत्व किया जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। दोनों पक्षों ने माना कि कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं जिससे दीर्घकालिक समाधान फिलहाल संभव नहीं हो पाया है।

रोजाना शहद का सेवन क्यों है जरूरी? जानिए इसके जबरदस्त हेल्थ बेनिफिट्स

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में लोग प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों की तलाश में रहते हैं। इन्हीं में एक बेहद असरदार चीज है Honey, जिसे सदियों से आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में उपयोग किया जाता रहा है। हल्की मिठास और पोषक तत्वों से भरपूर शहद न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में भी मदद करता है।  इम्युनिटी बढ़ाने में कारगरशहद में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि रोजाना सीमित मात्रा में शहद का सेवन करने की सलाह दी जाती है।  वजन घटाने में सहायकअगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो शहद आपकी डाइट का हिस्सा बन सकता है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया तेज होती है। खास बात यह है कि शहद, रिफाइंड शुगर की तुलना में एक हेल्दी विकल्प है, जिससे मीठा खाने की इच्छा भी संतुलित तरीके से पूरी हो सकती है। शहद-नींबू ड्रिंक: सुबह का हेल्दी स्टार्टवजन घटाने के लिए Honey और Lemon का मिश्रण बेहद लोकप्रिय है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से शरीर डिटॉक्स होता है और पाचन तंत्र बेहतर बनता है। इससे दिनभर हल्कापन और ऊर्जा बनी रहती है।  दालचीनी के साथ डबल फायदाशहद को Cinnamon के साथ मिलाकर सेवन करने से भी मोटापा कम करने में मदद मिलती है। ग्रीन टी में शहद और दालचीनी मिलाकर पीने से ब्लड शुगर संतुलित रहता है और शरीर को नेचुरल एनर्जी मिलती है।  सेवन में रखें सावधानीभले ही शहद प्राकृतिक है, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, खासकर डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।  क्यों बनाएं शहद को डेली रूटीन का हिस्सा?इम्युनिटी बढ़ाता हैपाचन सुधारता हैवजन नियंत्रित करने में मदद करता हैशरीर को नेचुरल एनर्जी देता है