छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित

नई दिल्ली। फिरोजाबाद (Firozabad) में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों (Small and Medium Industries) का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे देश की कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित कर रहा है। बेंगलुरु की कंपनी Mossant Craft Kombucha के को-फाउंडर शिशिर साथ्यान पिछले एक महीने से अपने प्रीमियम ड्रिंक्स के लिए कांच की बोतलें जुटाने में परेशान हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब कांच के फ्लास्क मिल ही नहीं रहे हैं, जबकि गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक की मांग सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती लागत को संभालने के लिए कंपनी अब मार्केटिंग और डिस्काउंट बजट में कटौती करने पर मजबूर हो गई है। गैस सप्लाई में बड़ी कटौती का असरदेश में कांच की कमी की सबसे बड़ी वजह गैस संकट है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरों की ओर मोड़ दी है। इसका सीधा असर कांच बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है, जो गैस पर निर्भर होते हैं। फिरोजाबाद बना संकट का केंद्रपिछले 400 साल से कांच उद्योग का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है। यहां के कारखाने नेचुरल गैस से चलते हैं। कांच बनाने की भट्टियां 1500°C तापमान पर लगातार चलती रहती हैं। अगर ये ठंडी पड़ जाएं तो दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का खर्च लगता है। प्रोडक्शन हुआ आधा, कीमतें 20% तक बढ़ींगैस सप्लाई कम होने के कारण कई कंपनियों को उत्पादन 50% तक घटाना पड़ा है। कांच की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और विस्तार योजनाएं रोक दी गई हैं। ग्लोबल कंपनियों को सप्लाई करने वाले उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं। हर सेक्टर पर असर: दवा, शराब, FMCG तक झटकाकांच की कमी का असर सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं है। दूध की बोतलें, जैम के जार, दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, सबकी सप्लाई प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत 30% तक बढ़ानी पड़ी है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल को उम्मीद है कि कांच उत्पादन में यह रुकावट महीनों तक चलेगा। उनका कहना है, “अगर युद्ध एक सप्ताह बढ़ता है, तो हमारा कारोबार एक महीने के लिए गड़बड़ा जाता है। इसका मतलब है कि अभी अगले चार महीने बिगड़ चुके हैं।” भारत की क्या है कमजोरीभारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लगभग 50% नेचुरल गैस आयात होती है। करीब 40% LNG सिर्फ कतर से आता है। LPG का लगभग 90% आयात मिडिल-ईस्ट से होता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है। रेस्टोरेंट और शादी सीजन भी प्रभावित: गैस की कमी का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस भी LPG की कमी से जूझ रहे हैं। इसका असर शादी सीजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख रहा है। जल्दी राहत की उम्मीद कम: हालांकि सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि अगर युद्ध एक हफ्ता भी बढ़ता है, तो इसका असर कई महीनों तक चलता है।
होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

नई दिल्ली। अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है। भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयानइस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारीरिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्कसूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है। ईरान और ओमान दोनों की भूमिकारिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है। भारत को पहले मिली थी राहतयुद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे। वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजरहोर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।
चीन ने ताइवान के आसपास का बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिन के लिए किया बंद… ?

बीजिंग। चीन (China) ने ताइवान (Taiwan.) के आसपास बड़ा हवाई क्षेत्र (Large Airfield) नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है। इस बार प्रतिबंधित क्षेत्र ताइवान से दोगुना बड़ा है। अधिकारियों ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (US Federal Aviation Administration.- FAA) ने 27 मार्च को विमान चालकों के लिए एक नोटिस (NOTAM) जारी किया, जो कुछ घंटों बाद प्रभावी हो गया। यह नोटिस 6 मई तक, यानी कुल 40 दिनों तक लागू रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र 73000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो ताइवान के कुल क्षेत्रफल (36,197 वर्ग किलोमीटर) से लगभग दोगुना है। यह क्षेत्र ताइवान से कुछ सौ किलोमीटर उत्तर में स्थित है और पीले सागर तथा पूर्वी चीन सागर के ऊपर फैला हुआ है। हालांकि चीन ने इस प्रतिबंध का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य उद्देश्य नहीं हो सकता। एएफपी को दिए गए बयान में सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने कहा कि इस तरह के हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य संभावित उपयोग नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण, हवाई अभ्यास या अन्य सैन्य गतिविधियों के लिए हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब चीन ने इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को इतने लंबे समय तक अचानक प्रतिबंधित किया है। विमानन और रक्षा सलाहकार एनएक्सटी के जेवियर टाइटेलमैन ने भी इस प्रतिबंध को ‘असामान्य’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी अवधि, आकार और ऊंचाई पर किसी भी प्रकार की सीमा न होने के कारण यह सामान्य NOTAM से अलग है। आमतौर पर NOTAM सैन्य अभ्यास, आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाओं के लिए जारी किए जाते हैं। नागरिक विमानों पर प्रतिबंध, सैन्य विमानों पर नहींटाइटेलमैन ने बताया कि इस क्षेत्र को केवल नागरिक उड्डयन के लिए बंद किया गया है। सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन इस प्रतिबंध से प्रभावित नहीं होंगे। इसका मतलब है कि चीन सरकार ने अपने सैन्य उपयोग के लिए यह क्षेत्र आरक्षित कर लिया है। प्रतिबंध दो क्षेत्रों पर पीले सागर में (चीन-दक्षिण कोरिया के बीच) और तीन क्षेत्रों पर पीले सागर व पूर्वी चीन सागर के बीच (चीन-जापान के बीच) लागू है। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग 100 किलोमीटर चौड़े हवाई गलियारे छोड़े गए हैं, जिससे शंघाई तक नागरिक विमानों की आवाजाही संभव हो सके। क्या है ताइवान का आरोप?ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चीन मध्य पूर्व में अमेरिका के व्यस्त होने का फायदा उठाते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि चीन का मकसद अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों को डराना और हिंद-प्रशांत में अमेरिकी सैन्य प्रभाव को कमजोर करना है। सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने इसे चीन की ‘पहुंच से इनकार’ की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह चीन द्वारा अपने पड़ोसी देशों की भूमि और समुद्री सीमाओं पर दबाव बढ़ाने और कब्जा करने के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।
लौंग से लेकर नमक के पानी तक, इन घरेलू उपायों से पाएं दांतों का दर्द कम!

नई दिल्ली।दांत का दर्द किसी भी दिन की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। कभी ठंडा-गरम खाने से झनझनाहट, तो कभी मसूड़ों में सूजन या सड़न के कारण तेज दर्द होने लगता है। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में दांत दर्द कम करने के कई असरदार घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना दवा के आराम पा सकते हैं। 1. लौंग: प्राकृतिक दर्द निवारकलौंग दांत दर्द के लिए सबसे प्रभावी घरेलू उपायों में से एक है। इसमें पाया जाने वाला यूजेनॉल प्राकृतिक दर्द निवारक और एंटीबैक्टीरियल होता है। कैसे करें इस्तेमाल: लौंग को सीधे दांत के पास रखें या लौंग का तेल प्रभावित जगह पर लगाएं।फायदा: नसों को हल्का सुन्न करता है और बैक्टीरिया के विकास को रोकता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है। सावधानी: अधिक मात्रा में लगाने से जलन हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही उपयोग करें। 2. नीम: मसूड़ों का संरक्षकनीम में पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करते हैं। नीम की दातुन से दांतों को साफ करने से मसूड़े मजबूत रहते हैं। वैज्ञानिक लाभ: नीम मुंह के पीएच लेवल को संतुलित रखता है, जिससे बैक्टीरिया का विकास कम होता है। नियमित उपयोग: दांत और मसूड़े लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। 3. हल्दी: सूजन और संक्रमण कम करेंहल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होता है। कैसे इस्तेमाल करें: हल्दी को पानी या नारियल तेल में मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। फायदा: मसूड़ों की सूजन कम होती है, दर्द में राहत मिलती है और घाव जल्दी भरते हैं। 4. मुलेठी: प्राकृतिक क्लीनरमुलेठी के तत्व बैक्टीरिया से लड़ते हैं और दांतों की सड़न को रोकते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: मुलेठी का पाउडर दांतों पर हल्के हाथ से रगड़ें। फायदा: दांतों की सतह पर जमा गंदगी साफ होती है और मसूड़ों को आराम मिलता है। 5. नमक के पानी से गरारेनमक में संक्रमण को कम करने और मसूड़ों को साफ रखने की क्षमता होती है। कैसे करें इस्तेमाल: गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें। फायदा: मुंह के बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन में राहत मिलती है। इन प्राकृतिक उपायों से दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है और तेज दर्द में तुरंत राहत मिलती है। लौंग, नीम, हल्दी, मुलेठी और नमक का पानी दांतों के लिए असरदार घरेलू उपचार हैं। फिर भी, अगर दर्द लगातार बना रहे या मसूड़ों में अधिक सूजन और रक्तस्राव हो, तो तुरंत किसी डेंटिस्ट या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
स्कूल में तीन बार फेल हुए थे अक्षय कुमार, दोस्त ने खोले बचपन के राज

नई दिल्ली।बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार Akshay Kumar एक बार फिर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर चर्चा में हैं। मशहूर निर्देशक Priyadarshan के साथ उनकी यह जोड़ी लंबे समय बाद एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। फिल्म का ट्रेलर हाल ही में 6 अप्रैल को रिलीज हुआ, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया और सोशल मीडिया पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। बचपन के दोस्त ने खोले अक्षय कुमार के अनसुने किस्सेएक रियलिटी शो ‘Wheel of Fortune’ के दौरान अक्षय कुमार ने अपने बचपन के दोस्त जिनेश को स्टेज पर इंट्रोड्यूस किया और पुराने दिनों की कई यादें ताज़ा कीं। बातचीत के दौरान अक्षय ने खुद स्वीकार किया कि वे KG से 9वीं क्लास तक के दौरान तीन बार फेल हुए थे। उनका यह खुलासा सुनकर शो के दर्शक हैरान रह गए। अक्षय ने मजाकिया अंदाज में बताया कि बचपन में उनकी और उनके दोस्त की शरारतों के कारण पढ़ाई पर ध्यान कम रहता था। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बचपन शरारतों और मस्ती से भरा हुआ था, जिसकी वजह से अकादमिक प्रदर्शन कमजोर रहा। दोस्त का मजेदार जवाब और साइकिल वाली यादेंअक्षय के दोस्त जिनेश ने भी इस बातचीत में खूब हंसी-मजाक किया। जब अक्षय ने उनसे पूछा कि वे बार-बार फेल क्यों होते थे, तो उन्होंने मजाक में कहा कि “आपके साथ ज्यादा समय बिताने की वजह से ऐसा होता था।” इसी बातचीत में अक्षय ने यह भी बताया कि उनके दोस्त की एक खास आदत थी—साइकिल चलाकर शहर में लड़कियों की झलक पाने की कोशिश करना। इस पर दोस्त ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि असल में देखने वाला कौन था, यह वही बेहतर जानते हैं। इस मजेदार बहस ने पूरे स्टूडियो में हंसी का माहौल बना दिया। ‘भूत बंगला’ की रिलीज डेट में बदलावफिल्म ‘भूत बंगला’ पहले 10 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी रिलीज डेट बदलकर 17 अप्रैल कर दी गई है। इसके साथ ही 16 अप्रैल को रात 9 बजे से फिल्म के पेड प्रीव्यू भी शुरू किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि बॉक्स ऑफिस पर प्रतिस्पर्धा और अन्य बड़ी रिलीज़ के कारण मेकर्स ने यह फैसला लिया है। अक्षय कुमार की पुरानी यादों ने जीता दिलइस पूरे एपिसोड में अक्षय कुमार का बेबाक और मजाकिया अंदाज फैंस को काफी पसंद आया। बचपन के फेलियर से लेकर शरारतों तक की कहानियों ने यह दिखाया कि बड़े स्टार बनने से पहले उनका जीवन भी सामान्य और संघर्षों से भरा रहा है। अक्षय कुमार ने खुलासा किया कि वे स्कूल में तीन बार फेल हुए थे और बचपन की शरारतों के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई, वहीं उनकी फिल्म ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है।
महाराष्ट्र का 50 हजार साल पुराना लोनार झील, जहां रहस्यमयी ढंग से बदलता है पानी का रंग!

नई दिल्ली। प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। महाराष्ट्र में बुलढाणा जिले के लोनार गांव के पास स्थित लोनार क्रेटर एक ऐसा ही अनोखा प्राकृतिक चमत्कार है। यह क्रेटर लगभग 35 से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर समझा गया, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह उल्कापिंड की तेज टक्कर का परिणाम है। लोनार क्रेटर का वैज्ञानिक महत्वलोनार क्रेटर दुनिया में बेसाल्ट चट्टानों पर बने एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर के रूप में जाना जाता है। यह चंद्रमा और मंगल ग्रह के क्रेटरों के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण है। क्रेटर का व्यास लगभग 1,830 मीटर (1.8 किलोमीटर) और गहराई करीब 150 मीटर है। इसका किनारा आसपास की जमीन से 20 मीटर ऊंचा उठकर दिखता है। क्रेटर के अंदर बनी झील नमकीन और क्षारीय है। यह वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने साल 2004 में उपग्रह से इसकी तस्वीर ली थी, जिसमें झील हरी-नीली दिखाई देती है और चारों ओर वनस्पति, खेत और बस्तियां स्पष्ट नजर आती हैं। रंग बदलती झील का रहस्यलोनार झील का सबसे रोचक पहलू इसकी पानी का बदलता रंग है। जून 2020 में झील का रंग अचानक हरे से गुलाबी या लाल हो गया। वैज्ञानिकों ने सैंपल लेने पर पता लगाया कि यह परिवर्तन हेलोआर्किया जैसे नमकीन पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों के कारण हुआ। गर्म और सूखे मौसम में पानी का स्तर कम होने से खारापन बढ़ता है और ये जीव तेजी से बढ़कर झील को गुलाबी रंग दे देते हैं। ऐसा रंग परिवर्तन ऑस्ट्रेलिया की लेक हिलियर और ईरान की लेक उर्मिया में भी देखा गया है। झील का रंग हमेशा नहीं रहता, बल्कि मौसम और पानी की मात्रा के अनुसार बदलता रहता है। क्रेटर की खोज और अध्ययन1823 में ब्रिटिश अधिकारी सी.जे.ई. अलेक्जेंडर ने लोनार क्रेटर को पहचाना। 1970 के दशक में मास्केलिनाइट की मौजूदगी से पुष्टि हुई कि यह क्रेटर वास्तव में उल्कापिंड के टकराने से बना है। मास्केलिनाइट केवल तेज गति की टक्करों में बनती है। लोनार क्रेटर का बेसाल्ट प्लेटफॉर्म इसे चंद्रमा की सतह जैसी विशेषता देता है। इस कारण नासा और भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों ने यहां कई अध्ययन किए हैं। पर्यावरण और संरक्षणहाल के वर्षों में झील का पानी बढ़ने की समस्या सामने आई है। इससे पास के प्राचीन मंदिरों पर असर पड़ा है और झील का रासायनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिक इस प्राकृतिक चमत्कार के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं।
मुकुल चौधरी ने रचा इतिहास और बने यह कारनामा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी

नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में समय-समय पर कई दिग्गजों ने अपने बल्ले से जौहर दिखाए हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने खेल जगत को एक नए सितारे से परिचित कराया है। मुकुल चौधरी ने मैदान पर वह कारनामा कर दिखाया है जिसकी कल्पना अब तक केवल किरोन पोलार्ड और एबी डी विलियर्स जैसे महान विदेशी खिलाड़ियों से की जाती थी। भारतीय क्रिकेट के इस उभरते हुए खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मानसिक दृढ़ता के दम पर वह मुकाम हासिल किया है जो इससे पहले किसी भी अन्य भारतीय खिलाड़ी के नाम दर्ज नहीं था। इस उपलब्धि ने न केवल उनके करियर को एक नई दिशा दी है बल्कि इस लीग के मंच पर भारतीयों के दबदबे को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की उनकी अद्भुत क्षमता ने विपक्षी गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए। जब मुकुल क्रीज पर आए थे तब टीम को एक ऐसी पारी की जरूरत थी जो न केवल स्कोरबोर्ड को गति दे सके बल्कि प्रतिद्वंद्वी टीम के मनोबल को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दे। मुकुल ने इस जिम्मेदारी को बखूबी समझा और बिना किसी दबाव के अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी जारी रखी। उनकी टाइमिंग और तकनीक का मिश्रण इतना सटीक था कि खेल के बड़े विशेषज्ञ भी उनकी सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाए। इस वैश्विक मंच पर जहां दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज अपनी पूरी रणनीति के साथ आते हैं, वहां एक भारतीय युवा का इस तरह निडर होकर खेलना भविष्य के सुखद संकेत देता है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि मुकुल ने उन रिकॉर्ड्स को चुनौती दी है जो सालों से अटूट माने जाते थे। पोलार्ड और डी विलियर्स जैसे खिलाड़ियों ने अपनी पावर हिटिंग से जो मानक स्थापित किए थे, मुकुल ने उन्हीं मानकों पर खरे उतरते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। खेल के प्रति उनका समर्पण और दबाव की स्थितियों में शांत रहने की कला उन्हें अन्य समकालीन खिलाड़ियों से अलग करती है। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों के शोर के बीच उन्होंने जिस एकाग्रता का परिचय दिया वह वाकई काबिल ए तारीफ है। इस पारी ने भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं और अब उन्हें क्रिकेट के अगले बड़े सितारे के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन प्रतिभाओं को तराशने के उद्देश्य को सिद्ध करते हैं। यह प्रतियोगिता हमेशा से नए हुनर को बड़ा मंच देने का काम करती रही है और मुकुल चौधरी इस सिलसिले की सबसे नई और चमकदार कड़ी बनकर उभरे हैं। उनकी इस उपलब्धि से खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है और देश के युवा क्रिकेटर उनसे प्रेरित हो रहे हैं। कड़ी मेहनत और लगन से निकलकर दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली लीग के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराना किसी सपने के सच होने जैसा है। मुकुल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत में ईमानदारी हो तो किसी भी बड़े रिकॉर्ड को तोड़ना असंभव नहीं है। मैच के दौरान मुकुल के फुटवर्क और हाथों की गति ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह खेल के सबसे छोटे प्रारूप के लिए पूरी तरह परिपक्व हैं। उन्होंने हर गेंद को उसकी मेरिट के आधार पर खेला और जोखिम लेने से भी पीछे नहीं हटे। उनकी इस पारी ने मैच का रुख पूरी तरह से बदल दिया और अंत में यही अंतर टीम की जीत का मुख्य आधार बना। आने वाले मैचों में मुकुल पर सभी की निगाहें टिकी होंगी और उनसे इसी तरह के निरंतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाएगी। खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व का क्षण है कि एक स्वदेशी खिलाड़ी ने वह कीर्तिमान स्थापित किया है जो अब तक केवल विदेशी दिग्गजों के नाम के साथ जुड़ा हुआ था।
गरीबी कम उम्र की शादी और ग्लैमर की कीमत सिल्क स्मिता की अधूरी कहानी

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा की दुनिया में एक ऐसा नाम रहा जिसने अपने अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस से पूरे दौर को बदल दिया लेकिन उनकी असल जिंदगी उतनी ही दर्दनाक और संघर्षों से भरी रही यह कहानी है सिल्क स्मिता की जिनका जन्म एक साधारण तेलुगु परिवार में हुआ था आर्थिक हालात इतने कमजोर थे कि उन्हें चौथी कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी बचपन में ही जिम्मेदारियों का बोझ उनके कंधों पर आ गया और वह अपनी मां के साथ घर के कामों में हाथ बंटाने लगीं जिंदगी ने उस वक्त और बड़ा मोड़ लिया जब महज 14 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई यह शादी उनकी मर्जी के खिलाफ थी और ससुराल में उन्हें सम्मान के बजाय हिंसा और अपमान का सामना करना पड़ा कुछ समय तक इस रिश्ते को निभाने की कोशिश के बाद उन्होंने साहस दिखाया और इस शादी को छोड़ने का फैसला किया यह कदम उस दौर में बेहद बड़ा और जोखिम भरा था लेकिन यहीं से उनकी असली लड़ाई शुरू हुई शादी टूटने के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में टच अप आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया धीरे धीरे छोटे रोल मिलने लगे लेकिन उनकी किस्मत तब बदली जब एक निर्देशक ने उनकी प्रतिभा को पहचाना उन्हें अभिनय और डांस की ट्रेनिंग दिलाई गई और इसके बाद उन्होंने फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बना ली सिल्क स्मिता ने अपने बोल्ड अंदाज और इंटीमेट सीन से उस समय के सिनेमा में तहलका मचा दिया 80 और 90 के दशक में उनकी मौजूदगी फिल्म की सफलता की गारंटी मानी जाने लगी हर फिल्ममेकर उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहता था और उनके गानों को खास तौर पर शामिल किया जाता था उन्होंने अपने करियर में 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और दर्शकों के दिलों पर राज किया लेकिन यह चमक ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी धीरे धीरे उनके करियर में गिरावट आने लगी और निजी जिंदगी में भी परेशानियां बढ़ती चली गईं वह डिप्रेशन का शिकार हो गईं और अकेलेपन में घिरती चली गईं आखिरकार 23 अक्टूबर को उनकी मौत की खबर ने सबको हिला दिया वह अपने घर में पंखे से लटकी हुई पाई गईं कुछ लोगों ने इसे आत्महत्या माना तो कुछ ने इस पर सवाल भी उठाए लेकिन सच आज भी रहस्य बना हुआ है उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म ने भी काफी चर्चा बटोरी जिसमें एक्ट्रेस विद्या बालन ने उनका किरदार निभाया इस भूमिका के लिए उन्होंने अपना वजन भी बढ़ाया और उनकी परफॉर्मेंस को खूब सराहा गया दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का ऑफर पहले कई अन्य अभिनेत्रियों को दिया गया था लेकिन उन्होंने इसे करने से मना कर दिया था सिल्क स्मिता की कहानी सिर्फ ग्लैमर या विवाद की नहीं है बल्कि यह एक ऐसी महिला की कहानी है जिसने हर मुश्किल का सामना किया अपनी पहचान बनाई लेकिन अंत में अकेलेपन और दर्द के आगे हार गई उनकी जिंदगी आज भी एक सबक है कि सफलता के पीछे छिपे संघर्ष को समझना कितना जरूरी है
आपातकाल के दौरान किशोर कुमार के गानों पर लगा था बैन, जानिए वजह

नई दिल्ली। 25 जून 1975 का दिन भारतीय इतिहास में उस दौर के रूप में दर्ज है, जिसे आपातकाल (Emergency) के नाम से जाना जाता है। इस समय देश में 21 महीने तक विशेष परिस्थितियां लागू रहीं और कई नागरिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी। इसी कठिन दौर में भारतीय सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार भी एक ऐसे विवाद में फंस गए, जिसने उनके करियर और लोकप्रियता पर गहरा असर डाला। सरकारी आदेश और किशोर कुमार से जुड़ा विवादउस समय सरकार की ओर से यह प्रयास किया जा रहा था कि सरकारी योजनाओं और संदेशों को लोकप्रिय माध्यमों के जरिए जनता तक पहुंचाया जाए। इसके लिए सबसे लोकप्रिय आवाजों का सहारा लेने की योजना बनी। मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाओं के अनुसार, तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से किशोर कुमार से सरकारी प्रचार गीत गाने का अनुरोध किया गया था। कहा जाता है कि किशोर कुमार से संपर्क कर उन्हें यह संदेश दिया गया कि वे सरकार के लिए एक प्रचार गीत रिकॉर्ड करें, ताकि योजनाओं को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके। किशोर कुमार का साफ इनकारकिशोर कुमार, जो अपनी बेबाक और स्वतंत्र सोच के लिए जाने जाते थे, ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि उन्हें यह गीत क्यों गाना चाहिए और किस आधार पर उनसे यह अपेक्षा की जा रही है। बताया जाता है कि उन्हें जवाब मिला कि यह “ऊपर से आदेश” है। इसी जवाब के बाद किशोर कुमार ने स्पष्ट रूप से सरकार के अनुरोध को ठुकरा दिया। यही वह मोड़ था, जिसने पूरे विवाद को जन्म दे दिया। बैन का फैसला और बढ़ा विवादकिशोर कुमार के इनकार के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। कुछ समय बाद सरकारी प्रसारण माध्यमों आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गीतों के प्रसारण को लेकर प्रतिबंध लगाने की खबरें सामने आईं। हालांकि यह बैन आधिकारिक रूप से लंबे समय तक स्थायी नहीं रहा, लेकिन करीब 6 महीने तक उनके गानों के प्रसारण पर असर पड़ा, ऐसा कई मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्म जगत से जुड़े लोग बताते हैं। फैंस और इंडस्ट्री पर असरउस दौर में न तो इंटरनेट था और न ही यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म। ऐसे में रेडियो और दूरदर्शन ही मनोरंजन के प्रमुख साधन थे। किशोर कुमार की आवाज उस समय पूरे देश में बेहद लोकप्रिय थी, और अचानक उनके गानों का गायब हो जाना उनके प्रशंसकों के लिए बड़ा झटका था। फिल्म और संगीत उद्योग पर भी इसका असर देखने को मिला, क्योंकि किशोर कुमार उस समय के सबसे प्रमुख और व्यस्त गायकों में से एक थे। विवाद के बाद भी बरकरार रही लोकप्रियताहालांकि यह विवाद उनके करियर में एक मुश्किल दौर के रूप में देखा जाता है, लेकिन किशोर कुमार की लोकप्रियता पर इसका स्थायी असर नहीं पड़ा। समय के साथ वे फिर से बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा गायकों में शामिल हो गए और उन्होंने कई यादगार गीत दिए।उनकी आवाज आज भी भारतीय संगीत इतिहास में अमर मानी जाती है। किशोर कुमार और आपातकाल से जुड़ा यह विवाद भारतीय फिल्म इतिहास का एक चर्चित अध्याय है, जो यह दिखाता है कि उस दौर में कला, राजनीति और स्वतंत्रता के बीच तनाव किस तरह गहराता गया था।
क्या टूटेगा पुष्पा 2 का रिकॉर्ड धुरंधर 2 की रफ्तार तेज लेकिन साउथ में कमजोर पकड़

नई दिल्ली । भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इस समय एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है जहां एक तरफ है धुरंधर 2 और दूसरी तरफ है पुष्पा 2 दोनों फिल्मों ने अपने अपने स्तर पर जबरदस्त प्रदर्शन किया है लेकिन अब असली सवाल यही है कि क्या धुरंधर 2 इतिहास रचते हुए पुष्पा 2 का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी या नहीं मौजूदा आंकड़े इस मुकाबले को और भी रोमांचक बना रहे हैं धुरंधर 2 ने रिलीज के 22वें दिन 7.15 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया जबकि पुष्पा 2 ने अपने 22वें दिन 10.50 करोड़ रुपये की कमाई की थी यानी शुरुआती रफ्तार में धुरंधर 2 थोड़ी पीछे जरूर नजर आती है लेकिन कुल कमाई के मामले में यह फिल्म अब भी मजबूती से टिकी हुई है तीन हफ्तों में धुरंधर 2 ने 1048.42 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार कर लिया है जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है वहीं अगर पुष्पा 2 की बात करें तो उसने 9 हफ्तों में 1234.10 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था इस हिसाब से धुरंधर 2 के पास अभी भी लगभग 6 हफ्तों का समय बचा हुआ है और उसे इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए करीब 186 करोड़ रुपये और कमाने होंगे आंकड़ों के लिहाज से यह लक्ष्य मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं दिलचस्प बात यह है कि हिंदी बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर 2 ने पुष्पा 2 को पीछे छोड़ दिया है धुरंधर 2 के हिंदी वर्जन ने तीन हफ्तों में 983.79 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है जबकि पुष्पा 2 ने हिंदी में 812.14 करोड़ रुपये कमाए थे यानी हिंदी बेल्ट में धुरंधर 2 का दबदबा साफ दिखाई देता है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है लेकिन असली चुनौती साउथ बॉक्स ऑफिस में छिपी हुई है पुष्पा 2 को तेलुगू तमिल मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में जबरदस्त समर्थन मिला था खासतौर पर तेलुगू वर्जन ने 341.48 करोड़ रुपये की भारी कमाई की थी इसके मुकाबले धुरंधर 2 साउथ में काफी पीछे नजर आती है इसके तमिल वर्जन ने 18.49 करोड़ तेलुगू वर्जन ने 41.22 करोड़ कन्नड़ वर्जन ने 3.18 करोड़ और मलयालम वर्जन ने केवल 1.74 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है यही वह अंतर है जो इसे रिकॉर्ड से दूर रख रहा है अब सवाल यह है कि क्या धुरंधर 2 इस अंतर को भर पाएगी इसका जवाब आने वाले दिनों में छिपा है क्योंकि फिल्म के सामने अब एक नई चुनौती आने वाली है 17 अप्रैल को भूत बंगला रिलीज हो रही है जिसमें अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी लंबे समय बाद साथ नजर आएगी इस फिल्म को लेकर दर्शकों में अच्छा खासा उत्साह है और इसका सीधा असर धुरंधर 2 की कमाई पर पड़ सकता है खासकर हिंदी बेल्ट में जहां से धुरंधर 2 को सबसे ज्यादा कमाई मिल रही है वहीं अगर नई फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लेती है तो इसके कलेक्शन में गिरावट आ सकती है ऐसे में धुरंधर 2 के पास अगले 5 से 6 दिन बेहद अहम हैं यही वह समय है जब फिल्म को ज्यादा से ज्यादा कमाई करनी होगी कुल मिलाकर धुरंधर 2 के पास रिकॉर्ड तोड़ने का मौका जरूर है लेकिन राह आसान नहीं है हिंदी में मजबूत पकड़ के बावजूद साउथ में कमजोर प्रदर्शन और नई फिल्मों की एंट्री इसके लिए बड़ी बाधा बन सकती है अब देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म इतिहास रचती है या फिर पुष्पा 2 अपना ताज बरकरार रखती है