क्या रोजमेरी तेल सच में बढ़ाता है बालों की ग्रोथ? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया सच!

नई दिल्ली। बाल झड़ना और पतले होना आजकल आम समस्या बन गई है। लोग तरह-तरह के प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनमें रोजमेरी तेल सबसे लोकप्रिय माना जाता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या रोजमेरी तेल सच में बालों को मजबूती देता है या यह सिर्फ एक देसी नुस्खा है। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. चांदनी जैन गुप्ता ने इस पर अपने अनुभव और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर रोशनी डाली। रोजमेरी तेल के कथित फायदेआम धारणा के अनुसार, रोजमेरी तेल के ये फायदे माने जाते हैं: डैंड्रफ कम करनाबालों की ग्रोथ बढ़ानाहेयर फॉल कम करनासफेद बालों में कमी लाना लेकिन क्या ये सब सच में असर करते हैं? वैज्ञानिक दृष्टिकोणसेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की एक रिसर्च में रोजमेरी तेल और 2% मिनोक्सिडिल के प्रभाव की तुलना की गई। तीन महीने तक अलग-अलग ग्रुप्स में इस्तेमाल के बाद पाया गया कि दोनों के बीच बालों के झड़ने में कोई खास अंतर नहीं दिखा। डॉ. चांदनी बताती हैं कि रोजमेरी तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। कुछ स्टडीज में यह भी पाया गया कि रोजमेरी तेल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स को पोषण मिलता है और बालों की ग्रोथ में मदद मिल सकती है। खासकर एंड्रोजेनिक एलोपेसिया (पैटर्न हेयर लॉस) के मामलों में यह लाभकारी हो सकता है। लेकिन ध्यान रहे, यह कोई जादुई उपाय नहीं है। असर दिखाने में कम से कम 3 से 6 महीने का समय लगता है और इसे रोजाना इस्तेमाल करना जरूरी होता है। रोजमेरी तेल का सही इस्तेमालरोजमेरी तेल को सीधे स्कैल्प पर लगाने से बचें। इसे किसी कैरियर ऑयल जैसे नारियल या बादाम तेल में मिलाकर इस्तेमाल करें। सीधे लगाने से जलन या एलर्जी हो सकती है।सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को पैच टेस्ट करना जरूरी है। हेयर फॉल कम करने के लिए विशेषज्ञ की सलाहअगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हों, स्कैल्प में खुजली, लालिमा या पपड़ी हो रही हो, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। ऐसे में अनुभवी डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। सही और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट से ही बाल लंबे समय तक हेल्दी, स्ट्रॉन्ग और शाइनी बने रह सकते हैं।
कंगाली से बचने के लिए शुक्रवार को करें ये उपाय, जानें क्या न करें!

नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है। यह दिन धन, सुख और वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा और उपासना करने से घर में समृद्धि और स्थिरता आती है। लेकिन ध्यान रहे, इस दिन कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें करने से मां लक्ष्मी नाराज़ हो सकती हैं और घर में कंगाली का खतरा बढ़ सकता है। 1. शुक्रवार के दिन न करें ये दानदान-पुण्य करना शुक्रवार को सामान्यतः शुभ फलदायी माना जाता है, लेकिन कुछ चीजें देने से बचना चाहिए। सफेद चीजें जैसे चीनी, सफेद मिठाई या चांदी का दान शुक्रवार के दिन वर्जित हैं। इसके अलावा किसी को उधार देना भी ठीक नहीं होता। ऐसा करने से शुक्र ग्रह कमजोर होता है और घर के भौतिक सुख कम होने लगते हैं। 2. पति-पत्नी में झगड़ा न करेंशुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है, जो विवाह और दांपत्य सुख का कारक है। इस दिन पति-पत्नी के बीच किसी भी प्रकार का झगड़ा नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो घर में वैवाहिक और भौतिक सुख दोनों पर असर पड़ सकता है। दांपत्य जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं और घर में माहौल खराब हो सकता है। 3. अचल संपत्ति की खरीद से बचेंशुक्रवार को जमीन या घर जैसी अचल संपत्ति खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इस दिन की गई डील लाभकारी नहीं होती और नुकसान हो सकता है। यदि संपत्ति खरीदने का विचार हो, तो दिन, समय और शुभ मुहूर्त के लिए अपने ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना आवश्यक है। 4. महिलाओं का अपमान न करेंशुक्र ग्रह का प्रतीक स्त्री है, इसलिए शुक्रवार के दिन घर या बाहर किसी महिला का अपमान करना बिल्कुल वर्जित है। महिलाएं मां लक्ष्मी का स्वरूप मानी गई हैं। यदि किसी महिला का अपमान होता है, तो घर में लक्ष्मी का वास नहीं रहता और कंगाली का खतरा बढ़ जाता है।
AAJ Ka Rashifal: 10 अप्रैल का राशिफल पढ़ें, मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए!

नई दिल्ली।गुरुवार, 10 अप्रैल 2025 के लिए राशिफल बता रहा है कि कुछ राशियों के लिए दिन सफलता और खुशियों से भरा रहेगा, तो कुछ राशियों को सतर्क रहने की जरूरत है। जॉब, बिजनेस, करियर और लव लाइफ सभी क्षेत्रों में ग्रहों की स्थिति अहम प्रभाव डालेगी। मेष (Aries)आज का दिन आपके लिए खास और लाभकारी रहेगा। योजनाबद्ध तरीके से काम करने से सफलता मिलेगी। कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। यात्रा के योग बन रहे हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समय निकालें, इससे मानसिक शांति मिलेगी। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे। वृषभ (Taurus)व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों क्षेत्रों में आज सकारात्मक ऊर्जा रहेगी। किसी विशेष आयोजन में शामिल होने का मौका मिलेगा। खर्चे बढ़ सकते हैं, लेकिन आय भी पर्याप्त होगी। ऑफिस में मेहनत और आत्मविश्वास से काम करें। छात्रों के लिए दिन अच्छा रहेगा। मिथुन (Gemini)आज का दिन ठीक-ठाक रहेगा। आपकी सूझबूझ से समस्याएं हल होंगी। महिलाओं का दिन ऑनलाइन शॉपिंग या परिवार से जुड़ी गतिविधियों में बीतेगा। रिश्तेदार के घर जाने का निमंत्रण मिल सकता है। बच्चे और कारोबार पर नजर रखें। कर्क (Cancer)आज परिवार संबंधी मुद्दों पर सलाह-मशवरा लाभकारी रहेगा। व्यवसाय में योगदान आवश्यक होगा। मनोरंजन और लव लाइफ दोनों के लिए दिन अच्छा है। दांपत्य जीवन में खुशियां आएंगी। सिंह (Leo)आज का दिन आपके लिए सुनहरा रहेगा। प्रॉपर्टी या किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलेगी। शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त महसूस करेंगे। यात्रा से फिलहाल परहेज करें। पारिवारिक सहयोग सुखद वातावरण बनाएगा। कन्या (Virgo)आज दिन अच्छा रहेगा। किसी मार्गदर्शक के सहयोग से कार्य सफल होंगे। धार्मिक और सामाजिक सेवा में समय बीतेगा। बिजनेस में नए प्रयोग फायदेमंद रहेंगे। जीवनसाथी का सहयोग सुकून देगा। तुला (Libra)आज का दिन नई उमंग और ऊर्जा से भरा रहेगा। आत्मविश्वास और मेहनत से रुके हुए काम बन जाएंगे। बेकार गतिविधियों से बचें। कारोबार में ऑर्डर पूरा करते समय टारगेट पर ध्यान दें। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा। वृश्चिक (Scorpio)आज दिन उत्तम रहेगा। कर्म प्रधान रहेंगे और मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा। भूमि या वाहन से संबंधित काम सफल होंगे। मनोरंजन के लिए समय निकालें। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान देना होगा। ऑफिस का माहौल व्यवस्थित रहेगा। धनु (Sagittarius)धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुझान बढ़ेगा। व्यक्तिगत कार्य पारिवारिक सहयोग से पूरे होंगे। वरिष्ठों के मार्गदर्शन का सम्मान करें। सरकारी नौकरी में ओवरटाइम की संभावना। लव लाइफ में अनबन समाप्त होगी। मकर (Capricorn)आज दिन बेहतर रहेगा। उपलब्धियों का दिन, कार्यों की रूपरेखा बनाकर करें। निजी मामलों पर ध्यान देकर काम पर फोकस करें। एकांत, ध्यान और कारोबारी गतिविधियां सुचारू रहेंगी। ऑफिस में प्रमोशन या खुशखबरी मिल सकती है। कुंभ (Aquarius)आज का दिन खुशियों और सकारात्मक परिणाम से भरा रहेगा। विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुभ समाचार। करियर में लाभकारी सूचना मिलने की संभावना। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा। मीन (Pisces)आज का दिन आपके अनुकूल रहेगा। उद्देश्य की पूर्ति होगी। दौड़-धूप अधिक रहेगी, पर सफलता खुशी देगी। रुका पैसा वापस मिलेगा। फाइनेंस और व्यापार में सतर्क रहें। कर्मचारियों का सहयोग बना रहेगा।
मेष संक्रांति पर सत्तू दान से प्राप्त पुण्य, स्वास्थ्य और समृद्धि

नई दिल्ली । मेष संक्रांति हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य, सफलता और धन-ऐश्वर्य प्राप्त होता है। इसलिए श्रद्धालु इस दिन गंगा स्नान, सूर्य को अर्घ्य देने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व देते हैं। मेष संक्रांति के दिन सत्तू का दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो सत्तू दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से इसे समझें तो अप्रैल के महीने में गर्मी बढ़ने लगती है, ऐसे में सत्तू शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को सत्तू, जल, फल और वस्त्र का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। भारत में मेष संक्रांति का उत्सव अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। पंजाब में इसे बैसाखी कहा जाता है, पश्चिम बंगाल में पोइला बोइशाख के रूप में, तमिलनाडु में पुथंडु और असम में बोहाग बिहू इसी दिन या इसके आसपास मनाए जाते हैं। यह पर्व सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है और कई जगह इसे नए साल की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से मेष संक्रांति का महत्व अत्यंत बड़ा है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति नई शुरुआत और उन्नति की ओर अग्रसर होता है। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। खासकर गंगा स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा अत्यंत शुभ मानी जाती है। सत्तू का दान केवल धार्मिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद है। यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है, गर्मी में ऊर्जा बनाए रखता है और पाचन तंत्र को भी संतुलित करता है। इसी कारण, इस दिन जरूरतमंदों को सत्तू, जल, फल और अन्य वस्तुएं दान करना समृद्धि और पुण्य दोनों का माध्यम माना गया है। संक्षेप में, मेष संक्रांति का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह शरीर, मन और समाज के लिए भी लाभकारी है। सत्तू दान, गंगा स्नान और सूर्य पूजा जैसी परंपराओं से व्यक्ति न केवल पुण्य कमाता है, बल्कि जीवन में स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि भी प्राप्त करता है। यह दिन नई शुरुआत, उन्नति और शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
माता लक्ष्मी को क्यों कहते हैं धन की देवी? जानिए इसकी पौराणिक कथा!

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी या देवता की पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) को धन की देवी (Goddess of Wealth) क्यों माना गया है। और क्यों उनके लिए शुक्रवार का दिन समर्पित किया गया। तो चलिए आज माता लक्ष्मी से जुड़ी सारी जानकारी जानते है। माता लक्ष्मी की मान्यतामाता लक्ष्मी हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं और उन्हें धन, वैभव, समृद्धि तथा सौभाग्य की देवी माना जाता है। वे भगवान विष्णु की पत्नी हैं और सृष्टि के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माता लक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक बताया गया है—वे कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं, उनके चार हाथ होते हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक हैं। मां लक्ष्मी की उत्पत्ति की कथाविष्णु पुराण के अनुसार एक बार एक बार ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को फूलों की माला प्रसन्न होकर दी, लेकिन इंद्र ने उस माला को अपने ऐरावत हाथी के सिर पर रख दिया, जिसे हाथी ने पृथ्वी लोक में फेंक दिया।इससे दुर्वासा ऋषि बहुत नाराज हुए। उन्होंने इंद्र को श्राप दे दिया कि जिस धन समृद्धि के बल पर तुमने मेरी इस भेंट का अनादर किया है, आज से तुम उस लक्ष्मी से विहीन हो जाओगे। तुम्हारा स्वर्ग लोक ही नहीं ये तीनों लोक श्रीहीन हो जाएंगे। इसके बाद तीनों लोकों में हलचल मच गई। ऐसे में इंद्र भगवान विष्णु के पास इस परेशानी का हल पूछने गए. तब श्री विष्णु ने कहा कि समुद्र मंथन के जरिए भी ‘श्री’ को फिर से प्राप्त किया जा सकता है।श्री हरि के सलाहनुसार देवताओं ने दानवों के साथ मिलकर क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया। समुद्र मंथन से 14 रत्न समेत अमृत और विष की प्राप्ति हुई।इसी दौरान माता लक्ष्मी की भी उत्पत्ति हुई। माता लक्ष्मी को श्रीहरि ने अपनी अर्धांग्नी रूप में धारण किया। इस प्रकार कहने लगे माता को सुख समृद्धि की देवीलक्ष्मी के उत्पन्न होने के साथ ही तीनों लोकों में सुख समृद्धि वापस लौट आयी।देवताओं ने अमृत पान किया, अमर हो गए। उन्होंने दानवों के आतंक से मुक्ति पा ली। तब से माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी कहा जाने लगा। पूजा विधिमाता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली और कोजागरी पूर्णिमा के दिन की जाती है। पूजा करने के लिए सबसे पहले घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी को स्थापित करें। दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। माता को कमल का फूल, चावल, हल्दी, कुमकुम और मिठाई चढ़ाएं। “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें और लक्ष्मी आरती गाएं। पूजा के अंत में प्रसाद बांटें और सभी से आशीर्वाद लें।इस प्रकार श्रद्धा और नियम से की गई माता लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने बनाया रिकॉर्ड, FY 2026 में अब तक की सबसे ज्यादा 19,363 यूनिट्स की बिक्री

नई दिल्ली।जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री का रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने कुल 19,363 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष के 18,928 यूनिट्स से 2.29 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के पीछे टॉप-एंड और कोर लग्जरी सेगमेंट की मजबूत मांग रही। मार्च तिमाही में भी बिक्री बढ़ीजनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी ने 7.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसमें कुल 5,131 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 4,775 यूनिट्स बिके थे। कंपनी का कहना है कि इसका श्रेय बेहतर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, नेटवर्क अपग्रेड और शानदार ग्राहक अनुभव को जाता है। टॉप-एंड लग्जरी सेगमेंट में जबरदस्त वृद्धिउच्च श्रेणी के लग्जरी सेगमेंट में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई। वित्त वर्ष 2025-26 में इस सेगमेंट की बिक्री 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मार्च तिमाही में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसमें शामिल हैं: एस-क्लासमर्सिडीज-मेबैक रेंजईक्यूएस एसयूवीएएमजी मॉडल्स इस सेगमेंट का कुल बिक्री में योगदान 27 प्रतिशत रहा, और इन मॉडलों के लिए 4 महीने से 1 साल तक का वेटिंग पीरियड है, खासकर एएमजी जी 63 जैसे मॉडल के लिए। कोर सेगमेंट और लॉन्ग-व्हीलबेस ई-क्लासकंपनी के कोर सेगमेंट में शामिल मॉडल्स – सी-क्लास, ई-क्लास एलडब्ल्यूबी, जीएलसी और जीएलई एसयूवी -ने भी बिक्री में अहम योगदान दिया। लॉन्ग-व्हीलबेस ई-क्लास भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली लग्जरी कार बनी रही और इसकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। एंट्री लग्जरी में गिरावटएंट्री लग्जरी सेगमेंट में 18 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिसका कारण कम कीमत वाले विकल्प और बाजार में उपलब्ध ऑफर्स रहे। मर्सिडीज-बेंज इंडिया का ध्यान वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय ब्रांड की लंबी अवधि रणनीति और फीचर-रिच प्रोडक्ट्स पर केंद्रित है। इलेक्ट्रिक वाहन: तेजी से बढ़ती मांगवित्त वर्ष 2025-26 में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों का टॉप-एंड लग्जरी सेगमेंट में 20 प्रतिशत योगदान रहा। 1.4 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 85 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसमें ईक्यूएस एसयूवी और ईक्यूएस मेबैक एसयूवी शामिल हैं। कंपनी 24 अप्रैल को सीएलए इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने जा रही है, जो नई सॉफ्टवेयर-डिफाइंड गाड़ियों की शुरुआत होगी। नेटवर्क विस्तार और निवेश योजना2026 में मर्सिडीज-बेंज इंडिया ‘गो टू कस्टमर’ रणनीति के तहत 20 से ज्यादा नए लग्जरी आउटलेट खोलने की योजना बना रही है। इसके तहत विशाखापत्तनम और वाराणसी जैसे नए बाजारों में प्रवेश किया जाएगा, जबकि बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, पुणे और गोवा जैसे मौजूदा बाजारों में उपस्थिति मजबूत होगी। आगामी दो वर्षों में फ्रेंचाइजी पार्टनर्स द्वारा 450 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य बेहतर सुविधाओं और नई तकनीकों के जरिए ग्राहक अनुभव को और बेहतर बनाना है।
पतले शरीर को मोटा बनाने का तरीका, सुपरफूड्स से बढ़ाएं मसल्स और वजन!

नई दिल्ली। आजकल मोटापा जितना आम है, उतना ही पतलापन भी लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। पतले लोग वजन बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन अक्सर उनका फायदा नहीं होता। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दिव्या मलिक के अनुसार, वजन बढ़ाने के लिए हाई कैलोरी और न्यूट्रिशन से भरपूर सुपरफूड्स डाइट में शामिल करना जरूरी है। वजन बढ़ाने में मददगार सुपरफूड्स 1. केला: नेचुरल वेट गेनरकेला वजन बढ़ाने के लिए सबसे आसान और फायदेमंद सुपरफूड माना जाता है। इसमें नेचुरल शुगर, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जो वजन तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं। केला इंस्टेंट एनर्जी देता है और शरीर को मजबूत बनाता है। उपयोग: रोज सुबह 1-2 केले खाएं या दूध/दही के साथ मिलाकर शेक बनाकर पिएं। 2. ड्राई फ्रूट्स और नट्स: हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का पावरहाउसबादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और अंजीर वजन बढ़ाने में कारगर हैं। इनमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और कैलोरी पर्याप्त मात्रा में होती है। यह मसल्स बिल्डिंग में मदद करता है और शरीर को एनर्जी देता है। उपयोग: रात में भिगोकर सुबह खाएं या ड्राई फ्रूट्स मिल्कशेक बनाकर पिएं। इससे कई बीमारियों से भी बचाव होता है। 3. आलू: हेल्दी कार्बोहाइड्रेट का स्रोतआलू और चावल में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो तेजी से वजन बढ़ाते हैं। यह शरीर को एक्टिव रखता है और एनर्जी स्तर बढ़ाता है। ध्यान दें: ज्यादा तला-भुना आलू स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसे उबालकर या हल्का फ्राई करके खाना अधिक सुरक्षित रहता है। स्वस्थ वजन बढ़ाने के लिए अन्य सुझावडेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। नियमित भोजन: दिन में 5-6 मात्रा भोजन करें, जिससे शरीर को लगातार पोषण मिले।व्यायाम: वेट ट्रेनिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज मसल्स बिल्डिंग में मदद करती हैं।हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, यह मेटाबोलिज्म और पोषण अवशोषण को बेहतर बनाता है।
गर्मी में चुस्त-तंदुरुस्त रहने के लिए ये आटे की रोटियां खाएं

नई दिल्ली । गर्मी के दिनों में खान-पान का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इस मौसम में ऐसे भोजन की जरूरत होती है जो न केवल आसानी से पच जाए बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाए और ऊर्जा बनाए रखे। भारतीय रसोई में रोटी हर भोजन का अहम हिस्सा है। लंच डिनर या नाश्ते में इसे दाल सब्जी और करी के साथ खाया जाता है। लेकिन गर्मियों में रोटी बनाने के लिए सही आटे का चुनाव करना स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी है। ज्वार का आटा गर्मियों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्वार की तासीर ठंडी होती है और यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण आसानी से पच जाता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज से राहत दिलाता है। इसलिए गर्मियों में इसे लंच में शामिल करना फायदेमंद होता है। रागी का आटा अक्सर सर्दियों में खाने के लिए सुझाया जाता है लेकिन यदि इसे सीमित मात्रा में या अन्य ठंडे आटों के साथ मिलाकर लिया जाए तो यह कब्ज के लिए रामबाण साबित होता है। रागी में कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत करते हैं। चावल के आटे की रोटी भी गर्मियों में शरीर को ठंडक देने वाली मानी जाती है। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह आसानी से पचती है और पेट को लंबे समय तक भरा रखती है। इसके अलावा यह हल्की और स्वादिष्ट होती है जिससे लंच या डिनर में इसे शामिल करना आरामदायक होता है। चने का आटा जिसे सत्तू के नाम से भी जाना जाता है प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और बाउल मूवमेंट को नियमित करता है जिससे पेट हल्का रहता है। ओट्स का आटा गर्मियों में नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकन नामक फाइबर पाचन तंत्र को साफ रखता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है। ओट्स की रोटी खाने से ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है और शरीर हल्का महसूस होता है। सिंघाड़े का आटा भी गर्मियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। सिंघाड़ा पानी में उगता है इसलिए इसकी तासीर ठंडी होती है। इसमें कम कैलोरी और उच्च फाइबर होता है जिससे यह पेट को हल्का रखता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। यह रोटियां खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो गर्मियों में हल्का और ताजगी भरा भोजन चाहते हैं। संक्षेप में गर्मियों में ज्वार रागी चावल चने और सिंघाड़े के आटे की रोटियां शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन ऊर्जा और हाइड्रेशन में मदद करती हैं। इन रोटियों को नियमित रूप से शामिल करने से आप पूरे दिन चुस्त-तंदुरुस्त और स्वस्थ महसूस करेंगे।
टीवी और फिल्मी दुनिया के अनोखे संगम ने दर्शकों को भव्य, रोमांचक और यादगार मनोरंजन अनुभव प्रदान किया

नई दिल्ली:मनोरंजन जगत में टीवी और फिल्मों के बीच बढ़ती साझेदारी ने दर्शकों के अनुभव को और समृद्ध बना दिया है। इसी क्रम में लोकप्रिय फैंटेसी धारावाहिक नागिन 7 का आगामी विशेष एपिसोड खास चर्चा में है, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार एक अनोखे और प्रभावशाली रूप में नजर आने वाले हैं। इस एपिसोड को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें कहानी, रोमांच और स्टार पावर का अनूठा मेल प्रस्तुत किया जाएगा। इस विशेष कड़ी में अक्षय कुमार नाग गुरु के रूप में दिखाई देंगे, जो कहानी में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनका यह किरदार न केवल रहस्यमयी है बल्कि मार्गदर्शक के रूप में भी सामने आता है। शुरुआत में उनका ऊर्जावान अंदाज दर्शकों को आकर्षित करता है, लेकिन जल्द ही कहानी एक गंभीर मोड़ ले लेती है जब वह नागिन आहना को एक बड़े खतरे के बारे में चेतावनी देते हैं। कहानी में ड्रैगन का प्रवेश एक विशाल और खतरनाक शक्ति के रूप में दिखाया गया है। नाग गुरु के अनुसार यह दुश्मन इतना शक्तिशाली है कि उसकी उपस्थिति ही विनाश का संकेत बन जाती है। यह चेतावनी कथा को और अधिक रोचक बनाती है और आहना के सामने एक कठिन चुनौती खड़ी कर देती है। अब उसे न केवल अपनी शक्तियों का सही उपयोग करना होगा, बल्कि अपने साहस और समझदारी की भी परीक्षा देनी होगी। एपिसोड का मुख्य आकर्षण ड्रैगन पर्ल को लेकर होने वाला संघर्ष है, जो कहानी को एक भव्य और रोमांचक रूप देता है। नागिन और ड्रैगन के बीच यह टकराव केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन जाता है। इस दौरान नाग गुरु मार्गदर्शन देते हैं, लेकिन स्पष्ट करते हैं कि अंतिम जीत आहना को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर ही हासिल करनी होगी। कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब नाग गुरु यह संकेत देते हैं कि ड्रैगन को हराने का उपाय उसकी अपनी शक्ति में ही छिपा है। यह विचार कथा को गहराई प्रदान करता है और दर्शकों के मन में उत्सुकता जगाता है कि आहना इस रहस्य को किस तरह अपने पक्ष में इस्तेमाल करेगी। इसके बाद आहना का आत्मविश्वास और भी मजबूत होता है और वह पूरी दृढ़ता के साथ इस चुनौती का सामना करने का संकल्प लेती है। यह विशेष प्रस्तुति दर्शाती है कि किस प्रकार आधुनिक मनोरंजन उद्योग में विभिन्न माध्यम एक साथ मिलकर दर्शकों को नया और प्रभावशाली अनुभव देने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह के प्रयोग न केवल कहानी को रोचक बनाते हैं बल्कि दर्शकों को विविधता से भरपूर मनोरंजन भी प्रदान करते हैं।
कालाष्टमी व्रत 2026: ग्रहदोष शांत करने के असरदार उपाय

नई दिल्ली । कालाष्टमी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है जिसे विशेष रूप से कालभैरव की उपासना के लिए मनाया जाता है। इस दिन शनि राहु और केतु से जुड़े ग्रहदोषों को शांत करने के लिए भक्त विशेष उपाय करते हैं। 2026 में वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को रात 09:19 मिनट से शुरू होकर 10 अप्रैल को रात 11:15 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस वर्ष कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल शुक्रवार को रखा जाएगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार कालभैरव की पूजा निशा काल में करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यह समय इसलिए शुभ है क्योंकि कालभैरव का जन्म रात्रि में हुआ था। रात के समय विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति जीवन में भय रोग और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त करता है और ग्रहों के क्रूर प्रभाव शांत होते हैं। कालाष्टमी पर कई अचूक उपायों का पालन कर भक्त अपनी समस्याओं और बाधाओं से मुक्त हो सकते हैं। सबसे पहले इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ लगी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। यदि काला कुत्ता न मिले तो किसी भी कुत्ते को रोटी अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शाम के समय कालभैरव मंदिर में जाकर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाना अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। साथ ही 108 बार ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करने से कोर्ट-कचहरी और शत्रुओं की बाधाएं दूर होती हैं। शनि की महादशा यदि प्रभावी हो रही हो तो भैरव जी को शमी के पत्ते और काले तिल अर्पित करना चाहिए। इससे भगवान शिव और भैरव दोनों प्रसन्न होते हैं और आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है। नींबू से जुड़ा उपाय भी इस दिन बड़ा कारगर माना गया है। कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए नींबू अर्पित करने से कालसर्प दोष और ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। इसके अलावा विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बाधाओं का नाश होता है और मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। वैशाख माह की कालाष्टमी इस बार कई विशेष संयोगों के कारण अधिक महत्व रखती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय अपनाने से जातक को स्वास्थ्य शत्रु से मुक्ति और आर्थिक लाभ की प्राप्ति संभव होती है। इसलिए भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन व्रत और पूजा का पालन पूरी श्रद्धा और विधि विधान से करें। संक्षेप में कालाष्टमी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि जीवन में शांति सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला भी है। काले कुत्ते को रोटी खिलाना सरसों के तेल का दीपक जलाना शमी के पत्ते और काले तिल अर्पित करना और नींबू से उपाय करना इन सभी कर्मों से शनि राहु और केतु दोषों से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार कालाष्टमी व्रत व्यक्ति के जीवन में डर रोग और शत्रुओं से सुरक्षा की नींव रखता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर मार्गदर्शित करता है।