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ट्रंप के ऐलान के बाद भी संशय कायम, इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बढ़ी सुरक्षा और चिंता

नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो हफ्ते के संघर्षविराम की घोषणा के बाद दुनिया को उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे और तनाव कम होगा लेकिन घटनाक्रम ने एक अलग ही तस्वीर पेश कर दी है। सीजफायर के ऐलान के बावजूद जमीनी हालात और प्रमुख नेताओं के बयानों ने इस समझौते की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का उल्लेख करते हुए संघर्षविराम की घोषणा की थी जिसे वैश्विक स्तर पर राहत के रूप में देखा गया। पाकिस्तान ने भी इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के तौर पर प्रस्तुत किया लेकिन इसके तुरंत बाद इजरायल की सैन्य गतिविधियां और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के बयान इस उम्मीद पर पानी फेरते नजर आए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों में कई ऐसे संकेत मिले जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सीजफायर को लेकर पूरी तरह सहमति और स्पष्टता नहीं है। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले और हिज्बुल्लाह को लेकर अस्पष्ट स्थिति ने इस समझौते को और अधिक उलझा दिया है। खुद ट्रंप ने यह कहा कि हिज्बुल्लाह को लेकर इस समझौते में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है जबकि पाकिस्तान का दावा था कि यह भी समझौते का हिस्सा है। इसी बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। आम दिनों की चहल-पहल की जगह अब सन्नाटा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने ले ली है। शहर के कई हिस्सों में आवागमन सीमित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसका मुख्य कारण ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन है जो अमेरिका के साथ संवेदनशील कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंच रहा है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि इस प्रयास को जितनी सराहना मिल रही है उतनी ही शंका भी इसके परिणामों को लेकर बनी हुई है। इस वार्ता के सफल होने में सबसे बड़ी बाधा भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर संदेह है कि क्या यह बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी या केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास साबित होगी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने पहले ही अमेरिका पर सीजफायर के 10 में से तीन बिंदुओं के उल्लंघन का आरोप लगा दिया है जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट और उसका बाद में डिलीट होना भी इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके पोस्ट में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने और 10 बिंदुओं पर गंभीर बातचीत की बात कही गई थी लेकिन पोस्ट हटाए जाने से कूटनीतिक गोपनीयता और अनिश्चितता दोनों उजागर हुई हैं। यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं जहां सन्नाटे और सख्त सुरक्षा के बीच शांति की एक कठिन कोशिश जारी है।

शौर्य और बलिदान की मिसाल सीआरपीएफ, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीर जवानों को किया नमन

भोपाल । भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शौर्य दिवस के अवसर पर देश के वीर जवानों को शुभकामनाएं दी हैं। इस मौके पर उन्होंने सीआरपीएफ के शौर्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि यह बल देश की सुरक्षा का एक मजबूत आधार है और इसके जवान अदम्य साहस अटूट संकल्प और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सीआरपीएफ के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करते हैं। चाहे आंतरिक सुरक्षा की चुनौती हो या आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटना हो सीआरपीएफ के जवान हर मोर्चे पर डटकर देश की रक्षा करते हैं। उनका साहस और त्याग पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ यादव ने कहा कि सीआरपीएफ का इतिहास वीरता और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा हुआ है। इस बल के जवानों ने कई बार अपने प्राणों की आहुति देकर देश की एकता और अखंडता की रक्षा की है। उनका यह समर्पण देशवासियों के मन में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शौर्य दिवस हमें उन वीर जवानों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके साहस से प्रेरणा लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि हमें अपने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और समर्थन की भावना हमेशा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीआरपीएफ के जवानों का अनुशासन परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें अन्य बलों से विशिष्ट बनाती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि देश सेवा सर्वोपरि है और इसके लिए हर कठिनाई का सामना करना चाहिए। प्रदेशवासियों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भी इन वीर जवानों के त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें। इस अवसर पर पूरे देश में सीआरपीएफ के शौर्य दिवस को सम्मान और गर्व के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल बल के वीर जवानों के शौर्य को याद करने का अवसर है बल्कि उनके प्रति आभार व्यक्त करने का भी प्रतीक है।

गुरु अर्जन देव जी के प्रकाश पर्व पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश, मानवता और सेवा की राह पर चलने का आह्वान

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सिख धर्म के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। इस पावन अवसर पर उन्होंने गुरु अर्जन देव जी के जीवन और उनके आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका त्याग सेवा समर्पण और सहिष्णुता का संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने मानवता को जो मार्ग दिखाया वह केवल एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि संपूर्ण समाज और विश्व के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि गुरु जी के विचार हमें यह सिखाते हैं कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए हमें हर परिस्थिति में धैर्य और करुणा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब समाज कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है तब गुरु अर्जन देव जी की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सेवा और समर्पण के माध्यम से ही सच्ची मानवता की स्थापना की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे गुरु जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में प्रेम भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करें। डॉ यादव ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का जीवन त्याग और बलिदान की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने समाज को एकता और समरसता का संदेश दिया और हर वर्ग को साथ लेकर चलने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने न केवल सिख समाज बल्कि पूरे मानव समाज को दिशा देने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हमें गुरु अर्जन देव जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा भाव और परोपकार की भावना ही समाज को मजबूत बनाती है और यही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है। इस अवसर पर प्रदेशभर में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु गुरु अर्जन देव जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके उपदेशों को याद कर रहे हैं। गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर सेवा और भक्ति का संदेश आत्मसात कर रहे हैं। इस प्रकार गुरु अर्जन देव जी का प्रकाश पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि मानवता सेवा और भाईचारे के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी है, जो समाज को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करता है।

नागपुर रेल मंडल में 20 दिन का ब्लॉक: 2 ट्रेनें पूरी तरह रद्द, कई गाड़ियां अलग-अलग तारीखों में रहेंगी प्रभावित

भोपाल । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में गोंदिया स्टेशन पर प्रस्तावित तकनीकी कार्य के चलते भोपाल मंडल से गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनें प्रभावित रहेंगी। रेलवे द्वारा लाइन नंबर-05 पर वॉशेबल एप्रन हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक में बदलाव किया जाएगा, जिसके कारण 20 दिनों तक यातायात ब्लॉक लागू रहेगा।गोंदिया स्टेशन पर होगा ट्रैक अपग्रेड रेलवे प्रशासन के मुताबिक गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म-3 से जुड़ी UP मेन लाइन (लाइन नंबर-05) पर वॉशेबल एप्रन को हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक बिछाया जाएगा। इस कार्य का उद्देश्य ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाना और उनकी गति में सुधार करना है। काम के दौरान इस लाइन पर आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा, जिससे भोपाल मंडल की कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। 24 अप्रैल 2026 तक तीन जोड़ी ट्रेनों पर इसका असर पड़ेगा और अलग-अलग तारीखों में उनकी सेवाएं बाधित रहेंगी। ये ट्रेनें रहेंगी पूरी तरह रद्द गाड़ी संख्या 18237 कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस – 25 अप्रैल 2026 तक रद्दगाड़ी संख्या 18238 अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस – 27 अप्रैल 2026 तक रद्द इन ट्रेनों की सेवाएं रहेंगी प्रभावित (आंशिक निरस्तीकरण) 12410 हजरत निजामुद्दीन-रायगढ़ एक्सप्रेस – 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल12409 रायगढ़-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस – 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल12807 विशाखापत्तनम-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस – 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल यात्रियों के लिए जरूरी सूचना रेलवे प्रशासन ने इस अस्थायी असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए यात्रियों से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर सुरक्षा, तेज रफ्तार और सुगम संचालन सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने का पूरा अधिकार, पुराने बसों की छुट्टी तय!

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की सड़क परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रदेश में 15 साल पुरानी 899 कमर्शियल बसें जल्द ही चलन से बाहर होंगी। राज्य सरकार ने 14 नवंबर 2025 को इसका आदेश जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट ने वैध करार दिया। बस ऑपरेटरों की याचिकाओं को जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने और स्टेज कैरिज परमिट से जुड़े निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। 15 साल की उम्र पार कर चुकी बसें, खतरनाक हालातमध्यप्रदेश में 899 ऐसी बसें हैं, जो 15 साल की उम्र पार कर चुकी हैं। ये वाहन खटारा हो चुके हैं और फिर भी शहरों और जिलों के बीच यात्रियों को ढो रही हैं। जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा खटारा बसें जबलपुर में हैं और सबसे कम रीवा संभाग में। परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने सभी बसों की सूची आयुक्त विवेक शर्मा को सौंप दी है। रोजाना प्रदेश में 11,000 वैध बसें चल रही हैं, जिनमें लगभग 4.5 लाख यात्री सफर करते हैं। बस ऑपरेटरों की याचिकाओं पर कोर्ट का फैसलाबस ऑपरेटरों ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उनकी बसों को जब परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट मिला, तब उनकी उम्र 15 साल नहीं हुई थी। लेकिन अदालत ने कहा कि नियम और संशोधन पहले ही वैध ठहराए जा चुके हैं और उनके आधार पर जारी आदेश अवैध नहीं है। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने 27 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दीं। अब प्रदेश में 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। पुराने वाहनों पर नियम और सख्तीमध्यप्रदेश मोटरयान नियम, 1994 के तहत: 10 साल से पुरानी स्टेज कैरिज बस को अंतरराज्यीय परमिट नहीं मिलेगा।15 साल से पुरानी मंजिली बस को राज्य के अंदर साधारण रूट का परमिट नहीं मिलेगा।20 साल से पुरानी गाड़ी को किसी भी तरह का परमिट नहीं मिलेगा। हालांकि, अधिकारियों की लापरवाही के कारण 899 खटारा बसें अब तक सड़कों पर चल रही थीं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी। नई ‘जनबस’ योजना से मिलेगा आधुनिक परिवहनपुरानी बसों के हटने के बाद सरकार ‘जनबस’ योजना लागू करेगी। अप्रैल 2026 से इंदौर से शुरुआत होगी और पहले चरण में 25 जिलों में 10,879 बसों का संचालन किया जाएगा। योजना में ई-बस, मोबाइल ऐप, सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग और कार्गो सुविधा जैसी आधुनिक सेवाएं शामिल होंगी। इसके संचालन के लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई गई है, जबकि बसें निजी ऑपरेटर चलाएंगे।  मध्यप्रदेश सरकार ने 15 साल से पुरानी 899 बसों को सड़क से हटाने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने आदेश को वैध करार दिया, बस ऑपरेटरों की सभी याचिकाएं खारिज की गईं। पुरानी बसें हटने के बाद ‘जनबस’ योजना शुरू होगी, जिससे आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था प्रदेशवासियों को मिलेगी।

नर्मदापुरम में दर्दनाक हादसा: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में महुआ बीनने गए आदिवासी को बाघ ने बनाया शिकार

नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में महुआ बीनने गए एक 49 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण को बाघ ने हमला कर मार डाला। घटना के बाद बाघ शव के पास ही बैठा रहा। गुरुवार सुबह जब परिजन तलाश करते हुए मौके पर पहुंचे तो उन्होंने बाघ को वहीं देखा जिसे बाद में भगाया गया। महुआ बीनने गया था अगले दिन मिला शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान सुधराम 49 पिता हजारी चौहान निवासी चनागढ़ झुनकर के रूप में हुई है। वह बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने गुरुवार सुबह उसकी तलाश शुरू की। जंगल में खोजबीन के दौरान महुआ के पेड़ के पास बाघ बैठा दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो मृतक का सिर और धड़ पड़ा था जबकि बाघ उसके हाथ-पैर खा चुका था। शव के पास बैठा मिला बाघ परिजन और ग्रामीण बाघ को देखकर घबरा गए लेकिन हिम्मत जुटाकर उसे वहां से भगाया। इसके बाद घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को सुखतवा भिजवाया। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि मृतक महुआ बीनने गया था और वापस नहीं लौटा। बाघ ने उसके हाथ-पैर खा लिए थे और केवल सिर व धड़ ही मिला है। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। वहीं एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना टाइगर रिजर्व के बैकवॉटर क्षेत्र के पास हुई है।

रैकी कर चोरी का प्लान, कबाड़ बीनने वाला बन गया हड़प का आरोपी

नई दिल्ली। नर्मदापुरम के जुमेराती क्षेत्र में 3 अप्रैल को एक सूने मकान का ताला तोड़कर 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी करने वाले 19 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चोरी की घटनापुलिस के अनुसार, फरियादी रामगोपाल पाण्डे अपने परिवार के साथ 3 अप्रैल को गांव गए थे। इसी दौरान 19 वर्षीय शेख शादाब (पिता शेख नौशाद), जो कबाड़ बीनने का काम करता है, मकान की रैकी कर चोरी को अंजाम दिया। उसने गोदरेज का ताला तोड़कर सोने-चांदी के आभूषण और 2,500 रुपए नकद चोरी किए। पुलिस की कार्रवाईकोतवाली टीआई कंचन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी की लोकेशन खंडवा के ग्राम सिहाड़ा में ट्रेस की। टीम ने शेख शादाब को गिरफ्तार कर लिया। माल बरामदपूछताछ में आरोपी ने चोरी स्वीकार की। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी की गई 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और भगवान की चांदी की मूर्ति बरामद की। कबाड़ बीनने वाला 19 वर्षीय शादाब नर्मदापुरम में सूने मकान की रैकी कर 5 लाख रुपए की चोरी कर गया था। पुलिस ने उसे खंडवा से गिरफ्तार कर चोरी का पूरा माल बरामद कर लिया है।

योजना में कटौती का असर, बैतूल में पात्र जोड़े वंचित, प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

बैतूल । बैतूल मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में इस वर्ष की गई कटौती का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। जिले में सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिए निर्धारित सीमित संख्या के चलते बड़ी संख्या में पात्र जोड़े योजना का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आवेदन करने पहुंचे कई जोड़ों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा, जिससे मौके पर हंगामे जैसी स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने इस वर्ष जिले में चार स्थानों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक आयोजन में अधिकतम 200 जोड़ों को ही शामिल किए जाने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार पूरे जिले में केवल 800 जोड़ों का ही विवाह इस योजना के तहत संपन्न हो सकेगा। जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या कई गुना अधिक रही है और बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिलता रहा है। योजना में इस कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने पहले से ही अपनी बेटियों के विवाह के लिए इस योजना पर भरोसा किया था, लेकिन सीमित संख्या के कारण वे अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि वे सभी जरूरी पात्रता पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल संख्या सीमा के कारण योजना से बाहर कर दिया गया है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक है। मौके पर पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठाए और संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है, लेकिन संख्या सीमित कर देने से इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को लोगों को समझाइश देकर शांत करना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शासन स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार लिया गया है और उन्हें उसी के तहत कार्यक्रम आयोजित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लंबे समय से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा रही है, जिसके तहत सामूहिक विवाह के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लेकिन इस वर्ष संख्या में की गई कटौती ने इस योजना की पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल बैतूल में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे, ताकि अधिक से अधिक पात्र जोड़ों को इस योजना का लाभ मिल सके और किसी को भी निराश होकर लौटना न पड़े।

नर्मदापुरम का ग्रामीण बाघ का शिकार, जंगल में हुई जानलेवा घटना!

नर्मदापुरम। नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में गुरुवार को एक 49 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण सुधराम पर बाघ ने हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। घटना के अनुसार, बाघ ने सुधराम के हाथ और पैर खा लिए और शव के पास बैठा रहा। घटना का विवरणपुलिस के अनुसार, मृतक सुधराम, पिता हजारी चौहान (निवासी चनागढ़ झुनकर), बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर न लौटने पर परिजन गुरुवार सुबह जंगल में खोजबीन के लिए निकले। जंगल में खोज के दौरान सुधराम का शव महुआ के पेड़ के पास मिला, जबकि बाघ उसके धड़ के पास बैठा था। परिजनों ने हिम्मत करके बाघ को वहां से भगाया और घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी। पुलिस और वन विभाग की कार्रवाईकेसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि शव के सिर और धड़ को सुखतवा लाया गया, जबकि हाथ-पैर बाघ ने खा लिए थे। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने पुष्टि की कि यह घटना बैक वॉटर क्षेत्र में हुई, जो एसटीआर के अंतर्गत आता है। घटना से प्रभावित परिजनशव के पास बाघ को देखकर परिजन और ग्रामीण बुरी तरह सहम गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने हिम्मत करके बाघ को भगाया और शव को सुरक्षित निकाला।

अंबेडकर जयंती कार्यक्रम प्रतिमा स्थल पर कराने की मांग, अहिरवार समाज ने दिया ज्ञापन!

नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती के आयोजन स्थल को लेकर विवाद की स्थिति बनती दिख रही है। अहिरवार समाज संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य कार्यक्रम शहर के प्रतिमा स्थल पर ही आयोजित किया जाए, ताकि अनुयायियों की भावनाओं का सम्मान बना रहे। प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापनगुरुवार को समाज के प्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र नागेश को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समाज के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार चौधरी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायियों की यह स्पष्ट इच्छा है कि शासन का मुख्य आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क स्थित प्रतिमा स्थल पर ही हो। प्रतिमा स्थल से जुड़ी हैं भावनाएंसमाज का कहना है कि अंबेडकर पार्क न सिर्फ एक सार्वजनिक स्थल है, बल्कि यह बाबा साहब की स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां कार्यक्रम आयोजित करने से लोगों को भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है और वे बड़ी संख्या में शामिल हो सकते हैं। अन्य स्थान पर आयोजन से नाराजगी की आशंकाज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कार्यक्रम किसी अन्य स्थान पर किया गया, तो इससे समाज के लोगों में नाराजगी फैल सकती है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि शहर के केंद्र में स्थित यह पार्क सभी वर्गों के लोगों के लिए आसानी से पहुंचने योग्य है, जिससे अधिक से अधिक लोग जयंती में भाग ले सकते हैं। कई संगठनों का मिला समर्थनइस मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन जताया। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्लिम समाज, जामा मस्जिद कमेटी, बहुजन सोशल फ्रंट, बंसकार समाज, वंशी समाज सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से प्रतिमा स्थल पर ही आयोजन कराने की अपील की। प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरेंअब देखना होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। फिलहाल, समाज की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आयोजन स्थल को लेकर उनकी भावना प्रतिमा स्थल से जुड़ी हुई है और वे इसी पर कार्यक्रम चाहते हैं।