Chambalkichugli.com

11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक, सीहोर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन

सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से आस्था और भक्ति का एक अद्भुत दृश्य सामने आया है जहां भेरूंदा क्षेत्र के सातदेव स्थित प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मां नर्मदा का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक किया गया जिसका दृश्य देखने वालों के लिए श्रद्धा और आश्चर्य का संगम बन गया। इस अनोखे आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे भक्ति का विराट रूप बता रहे हैं। यह आयोजन संत शिवानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ जिसमें दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महायज्ञ की शुरुआत 18 मार्च से हुई थी और 21 दिनों तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान पूजा-पाठ और हवन का क्रम चलता रहा। प्रतिदिन करीब 21 क्विंटल हवन सामग्री से महाहवन किया गया जिसमें विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के साथ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया गया। पूरे आयोजन के दौरान लगभग 41 टन हवन सामग्री की आहुति दी गई जिसमें सोने और चांदी की आहुति भी शामिल रही। समापन के दिन सबसे खास क्षण वह रहा जब टैंकरों के माध्यम से 11 हजार लीटर दूध लाकर मां नर्मदा का अभिषेक किया गया। यह दृश्य बेहद भव्य और भावुक करने वाला था। श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए और पूरे क्षेत्र में मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज सुनाई देती रही। दीपों की रोशनी और धार्मिक माहौल ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में नारियल अर्पित किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के लिए करीब 5 एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल तैयार किया गया था जहां व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित तरीके से की गई थीं। सातदेव क्षेत्र को प्राचीन काल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्त ऋषियों ने यहां कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और आस्था का केंद्र बना हुआ है। इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन रहा और बाद में मराठा साम्राज्य की महान शासक अहिल्याबाई होल्कर ने यहां कई धार्मिक निर्माण कराए जिससे इसकी महत्ता और बढ़ गई। आज भी यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस तरह सीहोर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना बल्कि सामूहिक सहभागिता और परंपरा के संरक्षण का भी एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।

दतिया बस हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया बस हादसे से जुड़े अहम मामले में बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए साफ संदेश दिया है कि न्याय केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा, न कि अनुमान या अप्रमाणित सामग्री पर। कोर्ट ने पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा। क्या है पूरा मामलायह मामला 8 नवंबर 2022 को दतिया जिले के भांहेर-दतिया रोड पर हुए दर्दनाक बस हादसे से जुड़ा है। इस दुर्घटना में बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पहले ही मिल चुका था मुआवजे का आदेशमामले की सुनवाई के बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) दतिया ने बस चालक की लापरवाही मानते हुए मृतक के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। बीमा कंपनी की दलील पर कोर्ट का सख्त रुखबीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटना जिस बस से हुई, वह बीमित बस नहीं थी। कंपनी ने दावा किया कि किसी अन्य बिना बीमा वाली बस को बचाने के लिए इस बस को फर्जी तरीके से मामले में शामिल किया गया है। यूट्यूब वीडियो और गवाह दोनों खारिजसुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में एक यूट्यूब वीडियो पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इसकी प्रमाणिकता और स्रोत स्पष्ट न होने के कारण इसे सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, कंपनी द्वारा पेश किए गए गवाह को ‘तैयार किया हुआ’ मानते हुए उसकी गवाही को भी अविश्वसनीय करार दिया गया। पुलिस जांच पर सवाल उठाना पड़ा भारीबीमा कंपनी ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर जांच गलत थी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया। यह तर्क भी कंपनी के खिलाफ गया। जांच रिपोर्ट को नहीं माना ठोस साक्ष्यन्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट केवल एक राय हो सकती है, उसे पुख्ता साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में केवल रिपोर्ट के आधार पर फैसले को प्रभावित नहीं किया जा सकता। कोर्ट का अंतिम फैसलासभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि हादसा बस क्रमांक MP32 P 0184 से ही हुआ था। इसके साथ ही बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी गई और पीड़ितों को मुआवजा देने के अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा गया।

ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

तेहरान। ईरान ने अमेरिका  के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।” The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्गईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणाडोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया। ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।

धार भोजशाला मामला फिर गरमाया, पूजा अधिकार को लेकर हिन्दू पक्ष ने पेश किए अहम कानूनी तर्क

धार । मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में हिन्दू पक्ष ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा दावा पेश किया है। हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अदालत में कहा कि जिस स्थान पर एक बार मंदिर स्थापित हो जाता है, वह हमेशा मंदिर ही रहता है और इसी आधार पर उन्हें वहां पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए। हिन्दू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में अपने तर्क रखते हुए कहा कि उनका दावा केवल इस आधार पर नहीं है कि वे लंबे समय से वहां पूजा करते आ रहे हैं, बल्कि उनका मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक मंदिर मौजूद था। उन्होंने कहा कि जब किसी स्थान का मूल स्वरूप मंदिर का रहा हो, तो वह धार्मिक पहचान समाप्त नहीं होती। वकील ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण मामलों का हवाला भी दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मामले में दिए गए न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देवता की ज्यूरिस्टिक पर्सनैलिटी यानी कानूनी व्यक्तित्व की मान्यता तब भी बनी रहती है, जब उसकी मूर्ति या संरचना को नुकसान पहुंचाया गया हो या उसे बदल दिया गया हो। उन्होंने तर्क दिया कि यही सिद्धांत भोजशाला मामले में भी लागू होता है। हिन्दू पक्ष ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने धार्मिक अधिकारों की वैधानिक मान्यता प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि इतिहास और परंपरा के आधार पर यह स्थान मां सरस्वती के मंदिर के रूप में जाना जाता रहा है, जिसे वाग्देवी मंदिर कहा जाता है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह परिसर कमाल मौला मस्जिद है और उन्हें यहां नमाज अदा करने का अधिकार मिलना चाहिए। इस विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी और सामाजिक तनाव बना हुआ है। भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व भी इस विवाद को और संवेदनशील बना देता है। माना जाता है कि इस इमारत का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा कराया गया था और यह एक प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र हुआ करता था। समय के साथ इसके स्वरूप और उपयोग को लेकर अलग अलग दावे सामने आते रहे हैं, जिससे यह विवाद गहराता गया है। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी है और गुरुवार को भी इस पर बहस होने की संभावना है। इस केस का फैसला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि यह धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े बड़े कानूनी सवालों को छूता है। फिलहाल सभी की नजरें अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर किस पक्ष के तर्कों को कानूनी मान्यता मिलती है।

फेसबुक फ्रेंड ने शादी का झांसा देकर किया रेप, ग्वालियर में आरोपी गिरफ्तार

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर हुई दोस्ती ने एक विवाहित महिला की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। आरोपी युवक ने पहले दोस्ती बढ़ाई, फिर शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया और बाद में धमकाने लगा। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। फेसबुक से शुरू हुई बातचीत, बढ़ा संपर्कपुलिस के अनुसार 37 वर्षीय महिला की करीब एक साल पहले विक्की जाटव से फेसबुक के जरिए पहचान हुई थी। आरोपी मुरैना जिले के उत्तमपुर का निवासी है। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फोन पर नियमित संपर्क होने लगा। इसी दौरान आरोपी ने महिला को अपने झांसे में ले लिया। होटल में ले जाकर किया दुष्कर्मबताया जा रहा है कि 7 जुलाई 2025 को आरोपी ग्वालियर पहुंचा और महिला को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद वह उसे शहर के एक होटल में ले गया, जहां शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने जल्द शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया। एक साल तक बनाता रहा संबंध, फिर मुकराआरोप है कि इसके बाद आरोपी महिला को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे जान से मारने की धमकी देने लगा। इससे परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस की शरण ली। शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाईपीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मुरैना पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसे ग्वालियर लाया गया है। पुलिस कर रही पूछताछमामले में थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरह की घटना कहीं और तो नहीं की। सावधानी भी जरूरी: सोशल मीडिया पर सतर्क रहेंयह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना कितना जरूरी है। किसी भी तरह के रिश्ते में जल्दबाजी या बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करना गंभीर परिणाम दे सकता है।

भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आपने आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव रखने की प्रेरणा दी। मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र भविष्य की योजनाओं और संभावित चुनौतियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन में निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक है क्योंकि संवाद ही बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सलाह दी कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और आम जनता के साथ सतत संवाद बनाए रखें ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आगे कहा कि कई बार व्यक्ति यह सोचता है कि वह सभी कार्य कर सकता है जो एक सकारात्मक सोच है लेकिन बेहतर परिणाम तब मिलते हैं जब व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कार्य को स्पष्ट लक्ष्य मजबूत योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता निश्चित होती है। इस दौरान नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने और जमीनी स्तर पर काम करने के व्यावहारिक पहलुओं को सीखने का अवसर दिया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया जिससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और चुनौतियों को समझने में मदद मिली। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य की रूपरेखा तैयार करने और भविष्य में बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाने की दिशा में मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री श्री पटेल ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने का माध्यम बना बल्कि अधिकारियों को जनहित में कार्य करने की नई दृष्टि और ऊर्जा भी प्रदान कर गया।

सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट

तेहरान। करीब 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ, तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही हालात बदलते नजर आ रहे हैं। तीनों प्रमुख पक्ष—ईरान, इजरायल और अमेरिका—के बयान अलग-अलग दिशा में जाते दिख रहे हैं, जिससे सीजफायर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका ने खारिज किया ईरान का प्रस्तावकूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रस्ताव को “कूड़े के डिब्बे में डाल दिया गया।” इससे संकेत मिला कि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है और वह इजरायल के रुख का समर्थन कर रहा है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजफायर समझौते में लेबनान से जुड़े हमलों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उस मोर्चे पर कार्रवाई जारी रह सकती है। लेबनान पर इजरायल के हमले तेजसीजफायर के तुरंत बाद इजरायल ने समझौते की तकनीकी खामी का हवाला देते हुए कहा कि लेबनान में उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इसके बाद इजरायली हमलों में तेजी देखी गई, जिनमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है।इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा और यह कार्रवाई सीजफायर का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी। ईरान की चेतावनी—हमले हुए तो खत्म समझौताइजरायल के रुख पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने कहा कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो सीजफायर स्वतः समाप्त माना जाएगा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि “गेंद अब आपके पाले में है”, यानी जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। क्या हो सकता है असर? अगर सीजफायर पूरी तरह टूटता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। हिजबुल्लाह के सीधे युद्ध में उतरने से संघर्ष कई मोर्चों पर फैल सकता है और ईरान की प्रत्यक्ष भागीदारी का खतरा बढ़ जाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बिगड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। महज 24 घंटे में समझौते का डगमगाना यह दिखाता है कि पक्षों के बीच अविश्वास कितना गहरा है और शांति की राह अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है।

ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध  के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है। सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है। बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है। तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है। बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।

चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है। बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है। जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

स्टार्टअप से संकट तक का सफर, ShopClues की कहानी ने सबको चौंकाया!

नई दिल्ली। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में एक समय ShopClues का नाम तेजी से उभरते स्टार्टअप्स में लिया जाता था। 2016 में कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। लेकिन कुछ ही वर्षों में हालात इतने बदल गए कि 2019 में सिंगापुर की कंपनी Qoo10 ने इसे मात्र 70–100 मिलियन डॉलर में खरीद लिया यानी लगभग 90% गिरावट। टियर-2 और टियर-3 शहरों पर दांव, शुरुआत में मिली बड़ी सफलताShopClues ने खुद को “ऑनलाइन चांदनी चौक” के रूप में स्थापित किया था। कंपनी ने छोटे शहरों के कीमत-संवेदनशील ग्राहकों को टारगेट किया और कम कीमत वाले, बिना ब्रांड के प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराए। उस समय Amazon और Flipkart जैसे दिग्गज मुख्य रूप से मेट्रो शहरों पर फोकस कर रहे थे, जिससे ShopClues को तेजी से ग्रोथ मिली। बड़ी कंपनियों की एंट्री से बिगड़ा खेलजैसे ही Amazon और Flipkart ने छोटे शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की, बेहतर लॉजिस्टिक्स, तेज डिलीवरी और भरोसेमंद सर्विस के दम पर उन्होंने बाजार पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। ShopClues का सस्ता मॉडल इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाया और कंपनी का मार्केट शेयर तेजी से गिरने लगा। खराब क्वालिटी और बढ़ते रिटर्न ने तोड़ा भरोसाShopClues की सबसे बड़ी कमजोरी बनी-असंगठित विक्रेताओं पर अत्यधिक निर्भरता। इससे प्लेटफॉर्म पर नकली और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की भरमार हो गई। नतीजतन, रिटर्न रेट 30-40% तक पहुंच गया और ग्राहकों का भरोसा टूटने लगा। वहीं प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने क्वालिटी और कस्टमर एक्सपीरियंस पर भारी निवेश किया। लीडरशिप संकट और विवादों ने बढ़ाई मुश्किलेंकंपनी को अंदरूनी झटके भी लगे। सह-संस्थापक Sandeep Aggarwal को अमेरिका में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों के बाद पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद Radhika Aggarwal और Sanjay Sethi ने नेतृत्व संभाला। संस्थापकों के बीच सार्वजनिक विवादों ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर कर दिया। फंडिंग की कमी और गिरता कारोबारIPO से पहले मुनाफा दिखाने के प्रयास में कंपनी ने मार्केटिंग खर्च घटा दिया, जिससे बिक्री (GMV) में भारी गिरावट आई। नए निवेश जुटाने के प्रयास भी असफल रहे और मौजूदा निवेशकों ने भी हाथ खींच लिया। इससे कंपनी “पतन के चक्र” में फंसती चली गई। रणनीतिक बदलाव भी नहीं बचा पाएShopClues ने बिजनेस मॉडल बदलने की कोशिश की—जैसे B2B वर्टिकल और रीसेलर प्लेटफॉर्म but ये प्रयास गिरावट को रोकने में नाकाम रहे। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जैसी खबरों ने अनिश्चितता और बढ़ा दी। संस्थापक का नया सफर, लेकिन चुनौतियां जारीShopClues छोड़ने के बाद संदीप अग्रवाल ने Droom की शुरुआत की, जो सेकंड हैंड वाहनों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। हालांकि, यह कंपनी भी GST जांच जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।