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सुपरस्टार की दिलचस्प प्रेम कहानी कैसे मिलीं अल्लू अर्जुन को उनकी लाइफ पार्टनर

नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं और इस खास मौके पर उनकी पर्सनल लाइफ खासकर उनकी लव स्टोरी भी चर्चा में आ गई है फिल्मों में अपने दमदार अंदाज और स्टाइल के लिए मशहूर अल्लू अर्जुन की असल जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है अल्लू अर्जुन की पत्नी स्नेहा रेड्डी खूबसूरती के साथ साथ अपनी पढ़ाई और प्रोफेशनल लाइफ के लिए भी जानी जाती हैं जहां एक तरफ अर्जुन ने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है वहीं स्नेहा ने अमेरिका के मशहूर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है स्नेहा एक सफल आंत्रप्रेन्योर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी हैं दोनों की पहली मुलाकात भी काफी दिलचस्प रही दरअसल अल्लू अर्जुन और स्नेहा अमेरिका में एक कॉमन फ्रेंड की शादी में पहुंचे थे वहीं पहली बार अर्जुन की नजर स्नेहा पर पड़ी और वह उन्हें देखते ही रह गए कहा जाता है कि यह उनके लिए पहली नजर का प्यार था इसके बाद उन्होंने अपने दोस्त के जरिए स्नेहा से बातचीत शुरू की और फिर धीरे धीरे दोनों के बीच फोन और मैसेज का सिलसिला बढ़ता गया दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई लेकिन उनकी शादी की राह इतनी आसान नहीं थी स्नेहा का परिवार फिल्मी दुनिया से जुड़ा नहीं था जबकि अर्जुन एक बड़े फिल्मी परिवार से आते हैं ऐसे में शुरुआत में दोनों के रिश्ते को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट थी हालांकि अर्जुन की दृढ़ता और दोनों के सच्चे रिश्ते ने आखिरकार परिवारों को मना लिया इसके बाद 26 नवंबर 2010 को हैदराबाद में दोनों की सगाई हुई और फिर 6 मार्च 2011 को एक भव्य समारोह में दोनों शादी के बंधन में बंध गए उनकी शादी साउथ इंडस्ट्री की चर्चित शादियों में से एक रही आज यह कपल दो बच्चों के माता पिता हैं जिनमें बेटा अल्लू अयान और बेटी अल्लू अर्हा शामिल हैं अर्हा ने कम उम्र में ही फिल्म शाकुंतलम से अपने अभिनय करियर की शुरुआत भी कर दी है वर्कफ्रंट की बात करें तो अल्लू अर्जुन अपनी आने वाली फिल्म को लेकर भी सुर्खियों में हैं इस फिल्म को एटली डायरेक्ट कर रहे हैं और फिलहाल इसे AA22xA6 के नाम से जाना जा रहा है फैंस इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं और इसके आधिकारिक टाइटल की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं अल्लू अर्जुन और स्नेहा रेड्डी की यह लव स्टोरी इस बात का खूबसूरत उदाहरण है कि सच्चा प्यार किसी भी फर्क को मिटा सकता है और जब दो लोग एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं तो हर मुश्किल आसान हो जाती है

2 घंटा 41 मिनट की फिल्म जिसने बदली किस्मत प्रोड्यूसर की नींद बनी सुपरहिट का राज

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिनकी सफलता के पीछे दिलचस्प और हैरान करने वाली कहानियां छिपी हुई हैं लेकिन साल 1970 में रिलीज हुई जॉनी मेरा नाम का किस्सा उन सब में सबसे अलग माना जाता है यह फिल्म करीब 2 घंटा 41 मिनट लंबी थी और जब इसका ट्रायल शो रखा गया तो एक ऐसी घटना हुई जिसने आगे चलकर इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया इस फिल्म में देव आनंद और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में नजर आए थे दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर ऐसा जादू चलाया कि दर्शक दीवाने हो गए फिल्म का निर्देशन विजय आनंद ने किया था जबकि इसके निर्माता गुलशन राय थे अब इस फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है बताया जाता है कि जब इस फिल्म का ट्रायल शो चल रहा था तब निर्माता गुलशन राय उसे देखते हुए सो गए थे आम तौर पर यह किसी भी निर्माता के लिए चिंता की बात हो सकती है क्योंकि इसका मतलब यह निकाला जाता है कि फिल्म दर्शकों को बांध नहीं पा रही है लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा निकला उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बन चुकी थी कि अगर गुलशन राय किसी फिल्म के ट्रायल के दौरान सो जाते हैं तो वह फिल्म जरूर हिट होती है और अगर वह पूरी फिल्म जागकर देख लेते हैं तो उसके फ्लॉप होने की संभावना बढ़ जाती है दिलचस्प बात यह है कि यह मान्यता सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कई बार सही साबित हुई ज्वेल थीफ और जॉनी मेरा नाम दोनों के ट्रायल में गुलशन राय सो गए थे और दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुईं वहीं जब वह जोशीला के ट्रायल में नहीं सोए तो वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही इस वजह से यह किस्सा और भी ज्यादा चर्चित हो गया जॉनी मेरा नाम एक क्राइम एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें रोमांच सस्पेंस और म्यूजिक का शानदार मेल देखने को मिला फिल्म के गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए खास तौर पर पल भर के लिए हमें कोई प्यार कर ले आज भी लोगों की जुबान पर रहता है इस फिल्म ने हेमा मालिनी को रातोंरात स्टार बना दिया और वह दर्शकों के दिलों में बस गईं बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की और यह साल 1970 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई यह देव आनंद और हेमा मालिनी की पहली फिल्म थी और उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया इसके बाद दोनों ने कई और फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी हिट मानी जाने लगी इस पूरी कहानी से यह साफ होता है कि कभी कभी फिल्म की सफलता सिर्फ उसकी कहानी या स्टारकास्ट पर ही निर्भर नहीं होती बल्कि उससे जुड़े किस्से और विश्वास भी उसे खास बना देते हैं जॉनी मेरा नाम सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है जहां एक प्रोड्यूसर की नींद ने सफलता की नई परिभाषा लिख दी

IPL 2026 में रन और विकेट की गहमागहमी, कौन बनेगा सीज़न का स्टार खिलाड़ी

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राजस्थान रॉयल्स (RR) के यशस्वी जायसवाल ने ऑरेंज कैप की दौड़ में शीर्ष स्थान हासिल कर समीर रिजवी को पीछे छोड़ दिया। वहीं, पर्पल कैप भी RR के स्पिनर रवि बिश्नोई के नाम दर्ज है। आइए जानते हैं आईपीएल 2026 के हालिया आंकड़े और टॉप परफॉर्मर्स। यशस्वी ने हिलाया रिजवी का सिंहासनIPL 2026 के 13वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस (MI) को 27 रनों से हराया। बारिश के कारण मैच 11-11 ओवर का हुआ, जिसमें RR ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 151/3 का स्कोर बनाया। जवाब में MI 123/9 पर ही आउट हो गई। इस मैच में RR के ओपनर यशस्वी जायसवाल ने अपनी धमाकेदार पारी से ध्यान खींचा। उन्होंने केवल 32 गेंदों में 77 नाबाद रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इसके साथ ही उन्होंने ऑरेंज कैप की रेस में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। यशस्वी के तीन मैचों में अब 170 रन हो गए हैं। दिल्ली कैपिटल्स के समीर रिजवी के खाते में दो मैचों में 160 रन हैं, लेकिन अब यशस्वी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा RR के वैभव सूर्यवंशी ने टॉप 5 में जगह बनाई। सूर्यवंशी ने MI के खिलाफ 14 गेंदों में 39 रन बनाए, जिसमें 1 चौका और 5 छक्के शामिल थे। IPL 2026 ऑरेंज कैप टॉप 5प्लेयर मैच रन टीमयशस्वी जायसवाल 3 170 राजस्थान रॉयल्ससमीर रिजवी 2 160 दिल्ली कैपिटल्सहेनरिक क्लासेन 3 145 सनराइजर्स हैदराबादवैभव सूर्यवंशी 3 122 राजस्थान रॉयल्सरोहित शर्मा 3 118 मुंबई इंडियंसटीम RR के ओपनर्स ने पारी की शानदार शुरुआत के साथ टॉप बल्लेबाजों की लिस्ट में अपनी पकड़ मजबूत कर दी है। पर्पल कैप भी RR के नामबल्लेबाजी की तरह ही RR के गेंदबाजों ने भी प्रदर्शन से प्रभावित किया। स्पिनर रवि बिश्नोई ने तीन मैचों में 7 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम की। वहीं, तेज गेंदबाज नांद्रे बर्गर दूसरे स्थान पर हैं, उनके खाते में दो मैचों में 5 विकेट हैं। इसके अलावा, पंजाब किंग्स के विजयकुमार वैशाख, RCB के जैकब डफी और CSK के अंशुल कम्बोज ने भी अब तक 5-5 विकेट लिए हैं। IPL 2026 पर्पल कैप लीडर्सप्लेयर मैच विकेट टीमरवि बिश्नोई 3 7 राजस्थान रॉयल्सनांद्रे बर्गर 3 5 राजस्थान रॉयल्सविजयकुमार वैशाख 3 5 पंजाब किंग्सजैकब डफी 2 5 RCBअंशुल कम्बोज 3 5 CSK ऑरेंज कैप: यशस्वी जायसवाल ने तीन मैचों में 170 रन बनाकर शीर्ष स्थान हासिल किया।पर्पल कैप: RR के रवि बिश्नोई ने तीन मैचों में 7 विकेट लेकर इसे अपने नाम किया। RR की जीत ने MI की लगातार दूसरी हार दर्ज की। वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार बल्लेबाजी ने टॉप 5 में RR की और मजबूती दी। RR ने इस जीत के साथ टीम के टॉप परफॉर्मर्स की पकड़ मजबूत कर ली है और IPL 2026 में उनके बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही क्षेत्र में प्रदर्शन शानदार है।

ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल

नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए। बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ावविशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं। पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीदपाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है। सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंताऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं। चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजीसोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई। राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरारट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।

10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज

पटना। बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है। नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी। नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे। फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। कौन बनेगा बिहार का सीएम?अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

होर्मुज के जल्द खुलने की उम्मीद…जहाजों के निकलने पर ईरान के साथ ओमान भी वसूलेगा टोल

तेहरान। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जल्द ही खुलने के आसार हैं। सीजफायर (Ceasefire) के बाद ईरान (Iran) ने भी शर्तों पर सहमति जता दी है। अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा। हालांकि, खबरें हैं कि इसके लिए मुल्कों को ईरान के साथ ओमान (Oman) को भी टोल टैक्स (Toll Tax) देना होगा। इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि टैक्स की बात सीजफायर की शर्तों में शामिल है। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के सीजफायर प्लान में फीस की बात कही गई है। इसके तहत ईरान और ओमान दोनों ही मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस रकम का इस्तेमाल मुल्क में दोबारा होने वाले निर्माण कार्यों के लिए करेगा। जबकि, यह साफ नहीं है कि ओमान राशि का किस तरह इस्तेमाल करेगा। अब तक फ्री थास्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में आता है, लेकिन दुनिया इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग ही मानती थी। इसके चलते अब तक कोई भी देश जहाज निकलने के लिए टोल नहीं देता था। भारत भी दे रहा है फीस?बीते कुछ दिनों में शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंद, पाइन गैस, ग्रीन सान्वी समेत कई जहाज भारत की ओर पहुंचे हैं। हालांकि, अब 16 भारतीय झंडे वाले जहाज स्ट्रेट पर अटके हुए हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि भारत की तरफ से कोई फीस दी जा रही है या नहीं। वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’ होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी। बाब-अल-मंदेब पर भी मंडराया था खतराएक दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि मेरिका-इजरायल ने अगर सैन्य कार्रवाइयां जारी रखीं ,तो वह यमन में अपने हूती सहयोगियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान की यह धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के तुरंत बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’। ईरान ने कहा कि ‘अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है’ तो तेहरान हूतियों से मदद मांगेगा, ‘जो बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को भी बंद कर देंगे’। हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। ये विद्रोही पहले भी इस बड़े जलमार्ग और उसके आसपास जहाजों पर अक्सर हमले करते रहे हैं, जो लाल सागर में समुद्री डकैती और उग्रवाद का प्रमुख कारण रहा है।

असम-केरल चुनाव में मुस्लिम वोटर निर्णायक, अजमल और मुस्लिम लीग के सामने सियासी परीक्षा

नई दिल्ली। असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान थम चुका है और अब 9 अप्रैल को मतदान होना है। इन चुनावों में जहां असम में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे मुस्लिम आधारित राजनीतिक दलों की भी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। देश में मुस्लिम आबादी भले ही 14-15 फीसदी के बीच हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 फीसदी और असम में 34-35 फीसदी तक है। ऐसे में इन राज्यों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव काफी ज्यादा है और यही वजह है कि इस वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है। केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं। असम में बदरुद्दीन अजमल की चुनौतीअसम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें बदरुद्दीन अजमल की पार्टी 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी का फोकस निचले असम के उन इलाकों पर है, जो बांग्लादेश सीमा से जुड़े हैं और जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। इस क्षेत्र की करीब 50 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है। 2021 में एनडीए ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन को 27 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है। धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। पिछली बार एआईयूडीएफ ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं। मुस्लिम वोटों को साधने के लिए अजमल ने असदुद्दीन ओवैसी को भी चुनाव प्रचार में उतारा है। अजमल ने 2005 में एआईयूडीएफ की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की राजनीति की। 2006 में पार्टी को 10 सीटें, 2011 में 18, 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटें मिली थीं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल को अपनी सीट गंवानी पड़ी, जिससे उनकी सियासी स्थिति कमजोर हुई है। मुस्लिम वोटर किसके साथ?असम में करीब 34 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो पहले 32 सीटों पर निर्णायक थी, लेकिन परिसीमन के बाद अब यह प्रभाव करीब 22 सीटों तक सीमित हो गया है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों ही इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं। 2021 में दोनों दल साथ थे, लेकिन इस बार अलग-अलग मैदान में हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मुस्लिम वोटर किसे प्राथमिकता देंगे, खासकर तब जब हालिया चुनावों में अजमल के प्रति समर्थन में कमी देखी गई है। केरल में मुस्लिम लीग की स्थितिकेरल में मुस्लिम आबादी करीब 27 फीसदी है और यहां मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में इनका असर ज्यादा है। राज्य की राजनीति में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत पकड़ रही है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और 140 में से 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बाकी सीटों पर सहयोगी दलों को समर्थन दिया गया है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। 1962 से अब तक पार्टी का हर लोकसभा में प्रतिनिधित्व रहा है और विधानसभा में भी इसकी निरंतर मौजूदगी बनी रही है। केरल में 140 सीटों में से 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें से 15 मुस्लिम लीग से आते हैं। राज्य की करीब 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले कई दशकों से मुस्लिम लीग ने अपने वोट बैंक को संगठित रखा है और कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव भी नहीं होता। इस बार भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है, जो मुस्लिम लीग के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है।

अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका

वाशिंगटन। गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अडानी (Sagar Adani) ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (US Securities and Exchange Commission-SEC) के खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज करने के लिए न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट (New York Federal Court) में याचिका दायर की है। अडानी की ओर से सबसे बड़ी दलील यह है कि इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र ही नहीं बनता। वकीलों के मुताबिक, कथित लेन-देन अमेरिका के बाहर हुआ, बॉन्ड किसी अमेरिकी एक्सचेंज में लिस्डेट नहीं थे और दोनों आरोपी भारत में रहते हैं, इसलिए इस मामले को अमेरिकी कानून के तहत नहीं सुना जाना चाहिए। 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड पर उठे सवालअडानी ग्रुप की ओर से कहा गया है कि जिस 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को लेकर मामला बनाया गया है, वह नियम 144A के तहत जारी किया गया था। यह बॉन्ड पहले गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेचा गया और बाद में कुछ हिस्से को संस्थागत खरीदारों को रीसेल किया गया। रॉयटर्स के मुताबिक अडानी पक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में अमेरिका की सीधी भागीदारी नहीं थी, इसलिए SEC का हस्तक्षेप उचित नहीं है। निवेशकों को नुकसान नहीं, केस कमजोरअडानी की याचिका में यह भी कहा गया है कि SEC अब तक यह साबित नहीं कर पाया है कि किसी भी निवेशक को इस सौदे से आर्थिक नुकसान हुआ हो। कंपनी के अनुसार, ये बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो चुके हैं और निवेशकों को मूलधन के साथ ब्याज भी पूरा लौटाया जा चुका है। ऐसे में “नो लॉस” की स्थिति में मुकदमे की वैधता पर सवाल उठता है। रिश्वतखोरी के आरोपों को किया खारिजअडानी ने रिश्वतखोरी के आरोपों को भी निराधार बताया है। उनका कहना है कि SEC के पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि न तो गौतम अडानी और न ही सागर अडानी का इस बॉन्ड इश्यू से कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित किया गया है। ‘भ्रामक बयान’ नहीं, सामान्य कॉर्पोरेट भाषाSEC ने जिन बयानों को भ्रामक बताया है, जैसे ESG प्रतिबद्धताएं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस, उन्हें अडानी पक्ष ने “पफरी” यानी सामान्य कॉर्पोरेट बयान करार दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे सामान्य दावे निवेशकों को गुमराह करने की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता। अडानी ग्रुप ने इस पूरे मामले को कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि अमेरिकी अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश और नियामक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बड़ा उदाहरण बन सकता है।

11 अप्रैल से मंगल और बुध की युति से इन राशियों की होगी तरक्की, बढ़ेगी आय, जानिए क्‍या होंगे लाभ?

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तो यह युति बहुत खास मानी जाती है। मंगल ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि बुध बुद्धि, संवाद और रणनीति का ग्रह। इन दोनों का संगम व्यक्ति की सोचने-समझने और स्मार्ट तरीके से काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह युति 11 अप्रैल 2026 को मीन राशि में बनेगी। मंगल पहले ही 2 अप्रैल को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, और बुध भी 11 अप्रैल को मीन राशि में आ जाएंगे। यह युति 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय पैसों और करियर के मामले में अनुकूल रहेगा। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आपकी पहचान बढ़ेगी। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है। निवेश करने का समय अनुकूल रहेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात आपका दिन और बेहतर बना सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए यह युति आर्थिक मजबूती और अवसर लेकर आएगी। धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नया काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। व्यवसाय में विस्तार और पार्टनरशिप से लाभ होने की संभावना है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। घर या वाहन खरीदने का विचार भी सफल हो सकता है। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और वित्तीय मामलों में फायदेमंद रहेगा। नौकरी में प्रमोशन या तरक्की के योग हैं। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। 11 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच का समय आपके लिए नए अवसर और मनचाही नौकरी या नई शुरुआत के संकेत लेकर आएगा।

तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी प्रचार तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से संपर्क कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी तक राज्य में चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। मोदी का सक्रिय अभियानपिछले दो महीनों में मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा कर नागरकोइल में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है। राहुल गांधी की अनुपस्थिति और DMK के साथ दूरीराहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में प्रचार अभियान नहीं चलाया। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और DMK गठबंधन में चल रहे मनमुटाव से जोड़ रहे हैं। 2021 में राहुल गांधी चुनाव से पहले ही राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर थे, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। पुडुचेरी में संकेत मिले दूरियों केहाल ही में पुडुचेरी में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। वहीं स्टालिन भी उसी दिन वहां मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग समय पर निर्धारित किए गए थे। राजनीतिक जानकार इसे सीट बंटवारे और गठबंधन खींचतान का परिणाम मान रहे हैं। पार्टियों की सफाई और आगे की योजनाDMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।