मुरैना व्यवसायिक सहकारी बैंक में इनकम टैक्स टीम की अचानक एंट्री, डाटा वेरिफिकेशन जारी

मुरैना। जीवाजी गंज राम जानकी मंदिर के पास स्थित व्यवसायिक एवं औद्योगिक सहकारी बैंक लिमिटेड में मंगलवार दोपहर लगभग 12 बजे ग्वालियर से आई इनकम टैक्स टीम ने अचानक प्रवेश कर बैंक के वित्तीय वर्ष में भेजे गए डाटा की क्रॉस वेरिफिकेशन शुरू कर दी। टीम की इस कार्रवाई से बैंक के अधिकारियों और खाताधारकों में हड़कंप मच गया। बैंक में पहुंची इनकम टैक्स टीमटीम में कुल 7 सदस्य शामिल थे। बैंक मैनेजर अर्जुन परिहार ने बताया कि टीम बैंक द्वारा वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स विभाग को भेजे गए डाटा को सत्यापित और क्रॉस चेक कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई उनके कार्यकाल में पहली बार देखी गई है। पहली बार हुई इतनी सघन जांचअर्जुन परिहार ने कहा, बैंक हमेशा से इनकम टैक्स विभाग को सभी जरूरी डाटा समय पर भेजता रहा है, लेकिन शाखा में टीम के सीधे आने और डेटा का विस्तार से निरीक्षण करना हमारे अनुभव में पहली घटना है। टीम ने बताया कि यह प्रक्रिया पिछले तीन वर्षों से जारी है, लेकिन शाखा में इस तरह की सघन जांच पहली बार हो रही है। कार्रवाई का उद्देश्यइनकम टैक्स विभाग की टीम का मकसद बैंक द्वारा भेजे गए डाटा की सही रिकॉर्डिंग और सत्यता की पुष्टि करना है। बैंक अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह टीम के सहयोग में लगे हुए हैं। फिलहाल कोई कानूनी नोटिस या प्रतिबंध सामने नहीं आया है, लेकिन टीम की जांच जारी है। खाताधारकों को सतर्क किया गयाइस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि बैंक और उसके खाताधारक इस तरह की आकस्मिक निरीक्षण प्रक्रिया के लिए तैयार रहें। नायब अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि बैंक शाखा में सभी दस्तावेज़ और रिकॉर्ड तैयार रखें, ताकि जांच में कोई बाधा न आए। मुरैना व्यवसायिक सहकारी बैंक में इस प्रकार की पहली बार इतनी व्यापक जांच हुई है, और यह कार्रवाई बैंक और खाताधारकों के लिए गंभीर संदेश है कि वित्तीय रिकॉर्ड का पारदर्शी और सटीक होना अनिवार्य है।
सिवनी मालवा में जनसुनवाई: बुकिंग के बावजूद गैस सिलेंडर नहीं, विधवा ने आर्थिक सहायता की लगाई गुहार

नई दिल्ली। मंगलवार सुबह 11 बजे जनपद सभागार में आयोजित जनसुनवाई में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों ने अपनी समस्याओं को लेकर नायब तहसीलदार कीर्ति प्रधान को आवेदन सौंपे। इस अवसर पर कुल 15 शिकायतें दर्ज की गईं। आवेदन में सबसे ज्यादा 7 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित थीं। इसके अलावा विद्युत कंपनी की 3, वन विभाग और नगर पालिका की 2-2, तथा पुलिस विभाग की 1 शिकायत शामिल थी। गैस सिलेंडर न मिलने की शिकायतजनसुनवाई में जीवन सिंह यादव ने गैस एजेंसी की मनमानी के खिलाफ आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि 8 मार्च को गैस बुकिंग कराने के बावजूद रसीद मिलने के बाद भी उन्हें अब तक सिलेंडर नहीं मिला। एजेंसी संचालक ने पहले 4-5 दिन में डिलीवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन अब वे किसी दूसरी एजेंसी से टंकी लेने की बात कह रहे हैं। यादव ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की। आर्थिक सहायता के लिए भटकती विधवाग्राम नागझिर की अनिता धुर्वे ने भी अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि दो साल पहले मजदूरी के दौरान उनके पति की मौत हो गई थी। शासन की योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए वे कई बार ग्राम पंचायत सचिव के पास आवेदन दे चुकी हैं, लेकिन आज तक उन्हें कोई राशि नहीं मिली। अनिता ने प्रशासन से गुहार लगाई कि उन्हें जल्द से जल्द सहायता राशि दिलाई जाए। अधिकारियों को सख्त निर्देशनायब तहसीलदार कीर्ति प्रधान ने सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सौंपा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोगों की समस्याओं को लटकाया न जाए और नियम अनुसार उनका तुरंत निराकरण किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इस जनसुनवाई में यह भी स्पष्ट हुआ कि सिवनी मालवा में नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय पर न होना उनके जीवन को प्रभावित कर रहा है। विशेष रूप से गैस सिलेंडर और आर्थिक सहायता जैसी मामूली लेकिन आवश्यक सुविधाओं में देरी ने लोगों में असंतोष बढ़ा दिया है। नायब तहसीलदार ने कहा कि राजस्व, विद्युत, वन विभाग, नगर पालिका और पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आवेदन मिलने के 7 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करें। इसके साथ ही नागरिकों को इस प्रक्रिया के बारे में सूचना देने का भी आदेश दिया गया। जनसुनवाई के इस सत्र ने प्रशासन और नागरिकों के बीच एक संवाद का माध्यम स्थापित किया, जिससे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाएगा।
उज्जैन में सीएम बोले- हमारे समय ऐसे बड़े कार्यक्रम नहीं होते थे, कुलगुरु की मांग पर दिए 51 लाख और 5 ड्रोन

उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके समय में इतने बड़े कार्यक्रम नहीं होते थे। न तो राज्यपाल आते थे और न ही मुख्यमंत्री। आज विद्यार्थियों को सम्मान और गोल्ड मेडल मिलने की परंपरा ने कार्यक्रम को भव्य बना दिया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल मंगुभाई पटेल कर रही थीं। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मंच पर भाषण दे रहे थे, तभी कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने उन्हें पर्ची भेजी, जिसमें विश्वविद्यालय के कार्यों के लिए 10 लाख रुपए और कृषि अध्ययन शाला के लिए एक ड्रोन मांगा गया था। मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा, “इतने से क्या होता है? मैं आपको 51 लाख रुपए और पांच ड्रोन देता हूँ।” दीक्षांत समारोह की विशेष बातेंसमारोह का शुभारंभ राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा दीप प्रज्जवलित करके किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 103 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 74 विद्यार्थियों को पीएचडी और 1 विद्यार्थी को डी-लिट की उपाधि प्रदान की गई। मंच पर सांसद अनिल फिरोजिया, निगम अध्यक्ष कलावती यादव, कुलगुरु अर्पण भारद्वाज और कुलसचिव अनिल शर्मा भी उपस्थित थे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और ग्रुप फोटो सेशन में भी भाग लिया। गीता भवन का निर्माणशिप्रा विहार वाणिज्यिक परिसर के सामने त्रिवेणी विहार योजना स्थल पर 77 करोड़ रुपए की लागत से गीता भवन बनाया जाएगा। यह भवन एक लाख वर्ग फीट में बनेगा और सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा। इस परियोजना में आडिटोरियम 12,700 वर्ग फीट और ई-लाइब्रेरी 3,600 वर्ग फीट में तैयार की जाएगी। इसके अलावा उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों के तहत विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन भी समारोह में किया गया, जिसकी कुल लागत 662.46 करोड़ रुपए है। सीएम ने घायल छात्र के परिवार से की मुलाकातदीक्षांत समारोह के बाद मुख्यमंत्री गुरकीरत सिंह मनोचा के घर पहुंचे, जो कनाडा पढ़ाई के लिए जा रहे थे, और उनके परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने मीडिया से कहा कि गुरकीरत सिंह की कार से हत्या हुई थी और उनकी बॉडी लाने में सरकार सभी खर्च उठाएगी। सीएम ने बताया कि भारत सरकार के माध्यम से कनाडा सरकार से संपर्क किया गया है और परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा, ये हमारे राज्य और खासकर हमारे परिवार का मामला है। अंतिम संस्कार सहित जितना भी खर्च आएगा, सरकार वह उठाएगी।
उज्जैन-नागदा मार्ग पर कार-ट्रक टक्कर में 2 युवकों की मौत, 2 गंभीर घायल

नई दिल्ली। उज्जैन-नागदा मार्ग पर मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे एक भीषण हादसा हुआ, जिसमें तेज रफ्तार स्विफ्ट कार और ट्रक की जोरदार टक्कर में कार में सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उन्हेल टोल नाके से लगभग 5 किलोमीटर पहले हुआ। जानकारी के अनुसार, कार में आगे की सीट पर बैठे सांवरिया सेठ जा रहे दो युवक जीवन की जंग हार गए। जबकि पीछे बैठे दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को ग्लोबल और अवंति अस्पताल, उज्जैन में भर्ती कराया गया। राहगीर ने किया बचावहादसे के समय मौके पर भारी भीड़ थी, लेकिन किसी ने तुरंत मदद नहीं की। वहीं राहगीर नंद कुमार मिश्रा, जो ग्रेसिम कंपनी में इंजीनियर हैं, मौके पर पहुंचे और उन्होंने घायल युवकों की मदद की। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक युवक को CPR देने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद उन्होंने दो युवकों के शव एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाए और घायल देवेंद्र को अपनी गाड़ी से ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया। घायल युवकों की स्थितिघायलों में प्रवेश मारोठिया शामिल हैं, जिनके पैर में फ्रैक्चर आया है। वहीं देवेंद्र की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रवेश के अंकल सुनील शर्मा को उनके भाई ने घटना की जानकारी दी। इसके बाद वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और घायलों की जानकारी ली। हादसे की वजहप्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा कार की अधिक रफ्तार और ट्रक के साथ नियंत्रण न होने के कारण हुआ। मार्ग पर मंगलवार सुबह काफी ट्रैफिक था, लगभग 20-25 वाहन खड़े थे। प्रशासन की कार्रवाईउज्जैन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला दर्ज कर लिया है। हादसे की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे की मुख्य वजह तेज गति या किसी अन्य चालक की लापरवाही थी। इस हादसे ने उज्जैन-नागदा मार्ग पर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन को मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम और दुर्घटना रोकने के उपाय तेज करने की जरूरत महसूस हो रही है।
ग्वालियर में ‘नो रोड-नो टोल’ आंदोलन में तोड़फोड़, बसपा नेता समेत 2-3 आरोपियों पर केस दर्ज

नई दिल्ली। ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर सोमवार को हुए “नो रोड-नो टोल” आंदोलन का वीडियो मंगलवार को सामने आया, जिसमें भीड़ और कुछ नेताओं के टोल प्लाजा में उत्पात करते हुए नजर आ रहे हैं। आंदोलन में शामिल लोगों ने बरैठा टोल के कंट्रोल रूम, कंप्यूटर, CCTV कैमरे और सेंसर डिवाइस को नुकसान पहुंचाया। इस मामले में भिंड के बसपा नेता रक्षपाल सिंह राजावत और 2-3 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ महाराजपुरा थाना पुलिस ने केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि हंगामे के दौरान पुलिस ने नेता को रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा, “क्या टोल वाले आपको पैसा देते हैं, जो मुझे रोक रहे हो?” आंदोलन का कारणग्वालियर-भिंड-इटावा हाईवे लंबे समय से सड़क चौड़ीकरण की मांग को लेकर विवादों में रहा है। पिछले वर्षों में इस मार्ग पर सैकड़ों सड़क हादसों में लोगों की मौत हो चुकी है। साधु-संतों ने इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू किया, जो अब बड़े पैमाने पर “नो रोड-नो टोल” आंदोलन में बदल गया है। सोमवार को आंदोलन के दौरान संत समाज और आम लोग बरैठा टोल पर यज्ञ कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने वाहनों को बिना शुल्क छोड़े जाने के दौरान हंगामा शुरू कर दिया और तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ और घटना का विवरणबरैठा टोल प्लाजा के मैनेजर अमित सिंह राठौर के मुताबिक, घटना दोपहर 1:30 बजे हुई। इस दौरान रक्षपाल सिंह राजावत अपने 2-3 साथियों के साथ आए और गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ियों से टोल क्यों वसूला जा रहा है। चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने कंप्यूटर, कैमरे और सेंसर में तोड़फोड़ की। आरोपी और उनका राजनीतिक परिचयरक्षपाल सिंह राजावत बहुजन समाज पार्टी से जुड़े नेता हैं। वर्ष 2023 में उन्हें भिंड विधानसभा सीट से पार्टी का टिकट मिला था, लेकिन नामांकन से पहले ही उन्हें बदल दिया गया। वह प्रॉपर्टी और रेत के कारोबार से जुड़े हैं और भिंड के वर्तमान विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह के विरोधी के रूप में जाने जाते हैं। पुलिस कार्रवाईमहाराजपुरा थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने बताया कि पुलिस आरोपियों की पहचान कर रही है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है। ग्वालियर-भिंड बॉर्डर पर यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है और स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि हाईवे चौड़ीकरण की मांग को लेकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला आज: केरल को 554 एकड़ जमीन बेचने पर लगेगी मुहर, कई अहम प्रस्ताव भी एजेंडे में

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार आज होने वाली कैबिनेट बैठक में एक बड़ा और अहम फैसला लेने जा रही है। बैठक में केरल के वायनाड में स्थित 554.05 एकड़ जमीन को केरल सरकार को सौंपने (बेचने) के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है। यह जमीन दि प्रोविडेंट इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड (PICL) के अधीन है, जो मध्य प्रदेश सरकार से जुड़ी है। यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। वायनाड स्थित इस बीनाची एस्टेट के लगभग 453.96 एकड़ हिस्से को केरल प्राइवेट फॉरेस्ट एक्ट, 1971 के तहत केरल सरकार ने अपने अधीन ले लिया था, जिसके खिलाफ PICL ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 3 नवंबर 2023 को केरल हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों को आपसी सहमति से मामला सुलझाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश और केरल के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। अंततः 12 फरवरी 2024 की बैठक में यह तय हुआ कि उचित मुआवजे के आधार पर जमीन केरल सरकार को सौंप दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, जमीन हस्तांतरण के बाद केरल सरकार वहां रह रहे करीब 160 अतिक्रमणकारी परिवारों के पुनर्वास पर भी विचार करेगी। हालांकि मुआवजे की अंतिम राशि अभी तय नहीं हुई है और आवश्यकता पड़ने पर आर्बिट्रेटर नियुक्त किया जा सकता है। कैबिनेट में कई अहम प्रस्तावआज मंत्रालय में होने वाली कैबिनेट बैठक में सिर्फ जमीन हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जाएगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण का अनुमोदन राजधानी भोपाल में विंध्याचल, सतपुड़ा भवन और शौर्य स्मारक से जुड़े कार्यों को जारी रखने का फैसला पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति नर्मदा बेसिन परियोजनाओं के लिए अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने पर चर्चा इंदौर मेट्रो परियोजना के लिए एडीबी (ADB) से ऋण लेने का प्रस्ताव उज्जैन को मिलेगा 945 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर कैबिनेट बैठक में लोक निर्माण विभाग से जुड़ा एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसके तहत उज्जैन में 5.32 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 945.20 करोड़ रुपए है। यह कॉरिडोर चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) से इंदौर गेट और विकास चौराहा से इंदौर गेट तक विकसित किया जाएगा, जिससे शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। किसानों को भी मिलेगा फायदाकैबिनेट में रबी सीजन 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को बोनस देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है।कुल मिलाकर, आज की कैबिनेट बैठक में जमीन सौदे से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, मेट्रो और किसानों से जुड़े कई बड़े फैसले होने जा रहे हैं, जिनका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास पर सीधे तौर पर पड़ेगा।
1 अप्रैल से एमपी में गेहूं खरीदी शुरू, रात 8 बजे तक खुलेंगे केंद्र; MSP पर बोनस से किसानों को राहत

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी की तारीखों का ऐलान कर दिया है। सरकार के फैसले के मुताबिक इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से, जबकि प्रदेश के अन्य संभागों में 7 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होगी। इस बार सरकार ने खरीदी व्यवस्था को अधिक सुचारू और किसानों के अनुकूल बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा फैसला खरीदी के समय को लेकर लिया गया है। अब सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक समय मिल सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक अवकाश और त्योहारों के दिन खरीदी नहीं होगी। किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा भी की है। इसके साथ गेहूं की प्रभावी खरीदी दर ₹2625 प्रति क्विंटल तय की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब किसान लागत बढ़ने को लेकर चिंतित थे। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार इस वर्ष गेहूं बेचने के लिए किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा गया है। 15 मार्च तक कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया, जो पिछले साल के 15 लाख 44 हजार से काफी अधिक है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि किसान सरकारी खरीदी प्रणाली पर भरोसा जता रहे हैं। जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन जिले में सबसे अधिक 1,23,281 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके बाद सीहोर (1,01,793) और राजगढ़ (98,537) का स्थान है। वहीं दूसरी ओर अलीराजपुर (476), बुरहानपुर (523), पांढुर्णा (863) और अनूपपुर (882) जैसे जिलों में सबसे कम पंजीयन हुआ है। सरकार का कहना है कि सभी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। तौल, भुगतान और परिवहन की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। कुल मिलाकर, इस बार की गेहूं खरीदी नीति को किसानों के लिए राहत भरी और सुविधाजनक माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और किसानों को इसका कितना लाभ मिल पाता है।
महंगे पेट्रोल में देश में चौथे नंबर पर एमपी, पड़ोसी राज्यों से 11 रुपए तक ज्यादा कीमत

भोपाल। मध्य प्रदेश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। ताजा आंकड़ों (11 मार्च 2026) के अनुसार, प्रदेश देश का चौथा सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला राज्य बन गया है। राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत ₹106.52 प्रति लीटर पहुंच गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एमपी के पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल काफी सस्ता मिल रहा है। उत्तर प्रदेश (लखनऊ) में पेट्रोल ₹94.69 और गुजरात (गांधीनगर) में ₹94.70 प्रति लीटर है। यानी एमपी के लोगों को करीब 11 रुपए ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं अन्य पड़ोसी राज्यों की बात करें तो छत्तीसगढ़ (रायपुर) में ₹99.44, महाराष्ट्र (मुंबई) में ₹103.54 और राजस्थान में ₹104.72 प्रति लीटर पेट्रोल मिल रहा है। क्यों महंगा है एमपी में पेट्रोल?राज्यसभा में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर का मुख्य कारण अलग-अलग राज्यों में लगने वाला VAT (वैट), सेस और स्थानीय टैक्स है। मध्य प्रदेश में टैक्स ढांचा काफी भारी है:पेट्रोल पर: 29% VAT + ₹2.5/लीटर अतिरिक्त VAT + 1% सेस डीजल पर: 23% VAT + ₹3/लीटर अतिरिक्त VAT + 1% सेस इसके अलावा केंद्र सरकार पेट्रोल पर ₹19.90 और डीजल पर ₹15.80 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। जीएसटी पर अभी फैसला टलापेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, लेकिन फैसला टाल दिया गया। डीजल में भी महंगा एमपीकेवल पेट्रोल ही नहीं, डीजल के मामले में भी मध्य प्रदेश महंगे राज्यों में शामिल है। देश में डीजल की ऊंची कीमतों के मामले में एमपी टॉप-10 में 7वें स्थान पर है।
फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप

नई दिल्ली। राजधानी में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फतवे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी शाहजहांनाबाद थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, पीरगेट निवासी सैयद सोहेल अली ने 6 मार्च 2026 को दारुल इफ्ता, मसाजिद कमेटी भोपाल से एक बीमारी के आधार पर फतवा मांगा था। इसके जवाब में 10 मार्च को फतवा जारी किया गया, जिस पर मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल कलाम, मुफ्ती रईस और मुफ्ती जसीम दाद के हस्ताक्षर हैं। कमेटी का कहना है कि यह फतवा मूल रूप से एक व्यक्तिगत दस्तावेज था, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद दानिश ने कहा कि “फतवा किसी व्यक्ति विशेष के लिए होता है, लेकिन उसे सार्वजनिक कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह एक साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य शहर काजी को पद से हटाना है।” वहीं, संरक्षक शमशुल हसन ने मांग की कि फतवा लेने वाले, जारी करने वाले और उसे वायरल करने वाले—तीनों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ईद से ठीक पहले इस तरह की घटना समाज में आक्रोश पैदा कर सकती है। कमेटी ने यह भी कहा कि परंपरा के अनुसार ईद पर शहर काजी ही ईदगाह में नमाज अदा कराते हैं, ऐसे में इस समय फतवा वायरल होना कई सवाल खड़े करता है और माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ा रहा है। उधर, शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी यूपीएस चौहान ने बताया कि कमेटी की शिकायत मिल गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि फतवा सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया। साथ ही पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ईद को देखते हुए शहर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
दीपिका पादुकोण ने अपने जन्मदिन पर शुरू किया टैलेंट सपोर्ट प्रोग्राम, रणवीर सिंह ने किया प्रेरक कमेंट

नई दिल्ली:बॉलीवुड की चमक-दमक और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाली एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका प्रभाव सिर्फ अभिनय तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में दीपिका ने अपने प्लेटफॉर्म “क्रिएट विद मी” के तहत शुरू किए गए द ऑनसेट प्रोग्राम की अपडेट साझा की, जिसने इंडस्ट्री में नए टैलेंट को आगे बढ़ाने के उनके संकल्प को और मजबूत किया है। यह पहल फिल्म, टेलीविजन और विज्ञापन के क्षेत्र में उभरते क्रिएटिव लोगों को अवसर देने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है। इस प्रोग्राम को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बीच, देश-विदेश से 5000 से ज्यादा आवेदन आए हैं। दीपिका ने हाल ही में एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि वह और उनकी टीम पिछले तीन महीनों से इन सभी आवेदनकर्ताओं की ध्यानपूर्वक समीक्षा कर रही हैं। खास बात यह है कि दीपिका खुद इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं। वह न केवल आवेदन देख रही हैं बल्कि कई आवेदकों को सीधे कॉल करके उनसे बातचीत भी कर रही हैं और उनके रचनात्मक सपनों और सफर को समझ रही हैं। दीपिका की इस पहल पर उनके पति और अभिनेता रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया पर दिल से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा कि यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि दीपिका दूसरों की मदद कर रही हैं और इंडस्ट्री को वापस कुछ दे रही हैं। रणवीर का यह कमेंट उनके प्यार और समर्थन की मिसाल भी बन गया। द ऑनसेट प्रोग्राम की घोषणा दीपिका ने अपने जन्मदिन पर की थी और यह उनके उस विज़न का हिस्सा है, जिसके तहत वह इंडस्ट्री में सार्थक योगदान देना चाहती हैं, जिसने उनके करियर को आकार दिया। इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिभा को पहचानना नहीं, बल्कि उन्हें एक्सपीरियंस आधारित लर्निंग प्रदान करना है। प्रोग्राम के पहले चरण में प्रतिभागियों को फिल्ममेकिंग के अलग-अलग विभागों में काम करने का अवसर मिलेगा। इसमें राइटिंग, डायरेक्शन, कैमरा, लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड डिजाइन, आर्ट डायरेक्शन, कॉस्ट्यूम डिजाइन, हेयर स्टाइलिंग, मेक-अप आर्टिस्ट्री और प्रोडक्शन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुभव मिलेगा। प्रतिभागी सेट पर काम करके इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स से सीधे सीखेंगे और अपने करियर के लिए जरूरी स्किल्स विकसित करेंगे। इस पहल के जरिए दीपिका न केवल अपने अभिनय से बल्कि इंडस्ट्री के भविष्य को आकार देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वह नई पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स और क्रिएटर्स के लिए रास्ते खोल रही हैं और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दे रही हैं। दीपिका पादुकोण की यह पहल यह संदेश देती है कि बॉलीवुड केवल ग्लैमर की दुनिया नहीं है, बल्कि यह नए टैलेंट को पहचानने, उन्हें आगे बढ़ाने और इंडस्ट्री के विकास में योगदान देने का भी मंच है। रणवीर सिंह का समर्थन और प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि उनके प्रयास सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज और इंडस्ट्री के लिए प्रेरणादायक हैं। द ऑनसेट प्रोग्राम की सफलता से साफ है कि दीपिका पादुकोण न केवल पर्दे पर बल्कि पर्दे के पीछे भी बदलाव लाने की दिशा में सक्रिय हैं। उनकी यह पहल नए क्रिएटिव्स को अवसर और मार्गदर्शन देगी, जिससे भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का भविष्य और मजबूत होगा।