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Global crisis: ईरान संकट में निवेश: वॉरेन बफे की सलाह से बनाएं स्मार्ट रणनीति

   Global crisis: नई दिल्ली। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला कर रख दिया है। इस उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जो तेज़ी से बढ़ती हुई भारतीयों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है। बढ़ती तेल की कीमतें महंगाई को बढ़ाती हैं और वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकती हैं। भारत में शेयर बाजारों पर दबाव भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इस संकट का असर और गहरा है। बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच जोखिम कम करने के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने लगे। उद्यमियों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार घाटा भी बढ़ा सकती हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। वॉरेन बफे की सलाह बनी चर्चा का केंद्र बाजार में इस उथल-पुथल के बीच दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चर्चा में आ गया है। 2022 में पत्रकार चार्ली रोज को दिए गए इंटरव्यू में बफे ने युद्ध, आर्थिक मंदी और महामारी जैसी परिस्थितियों में भारतीयों के लिए अहम सुझाव दिए थे। बफे, जो बर्कशायर हाथवे के डिपार्टमेंट और पूर्व सीईओ रह चुके हैं, को दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में मिलता जाता है। उनकी निवेश रणनीति का मुख्य आधार लंबी अवधि का निवेश और बाजार की स्थिरता के दौरान धैर्य बनाए रखना है। ‘ओरेकल ऑफ ओमाहा’ के नाम से मशहूर बफे का रुझान है कि भू-राजनीतिक संकट, आर्थिक मंदी और बाजार में गिरावट समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन ये लंबे समय में आर्थिक प्रगति को रोक नहीं पाता। इतिहास से सीख इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार ने कई बड़े संकटों का सामना किया है – महानदी, वैश्विक वित्तीय संकट और कोविड-19 जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन मुश्किल दौरों के बावजूद समय के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार आगे बढ़ रहे हैं। बफे का कहना है कि संभावित संकट के बावजूद लंबी अवधि में बाजार की बढ़ोतरी बनी रहती है, और इसलिए स्थानीय उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। लंबी अवधि के नजरिए पर ध्यान दें मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। लंबी अवधि तक युद्ध और तेल बाजार में बाधाओं की आशंका से शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे समय में कई निवेशक तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय जोखिम कम करने के लिए जल्दबाजी में फैसला लेते हैं। बफे की फिलॉसफी यही कहती है कि कंपनियों की लंबी अवधि की वृद्धि पर ध्यान दें, न कि बाजार की स्थानीय हलचल पर। उनकी परिस्थितियां हैं कि संकट भले ही कुछ समय के लिए बाजार को प्रभावित करें, लेकिन अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक प्रगति को पटरी से नहीं उतारते। अवसरों के लिए संदेश वॉरेन बफे की सलाह हर निवेशक के लिए स्पष्ट है: संकट के समय धैर्य बनाए रखें, लंबी अवधि के अवसरों को पहचानें और जल्दबाजी से बचें। चाहे युद्ध हो, आर्थिक मंदी या महामारी, बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। समझ यही है कि संभावित लाभार्थियों को समझ हुए दीर्घकालिक रणनीति अपनी जाए, जिससे निवेश स्थिर और सुरक्षित रहे।

India vehicle sales: दो-पहिया और कारों की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी, बाजार में उत्साह

   India vehicle sales: नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने फरवरी 2026 में मजबूत बिक्री के आंकड़े दर्ज किए हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में यात्री वाहनों की थोक बिक्री फरवरी में सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत बढ़कर 4,17,705 यूनिट्स हो गई है। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 3,77,689 यूनिट्स था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि के पीछे बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट और उपभोक्ता मांग में मजबूती का बड़ा हाथ है। SUV की बढ़ती लोकप्रियता ने खींचा ध्यान सियाम के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में सबसे अधिक वृद्धि एसयूवी सेगमेंट में हुई। बीते महीने एसयूवी की बिक्री सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत बढ़कर 2,36,957 यूनिट्स हो गई, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 2,08,795 यूनिट्स था। हालांकि कारों की थोक बिक्री में हल्की गिरावट रही, जो 1,06,799 यूनिट्स पर सीमित रही, पिछले साल समान अवधि में यह 1,10,966 यूनिट्स थी। वैन की बिक्री में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 11,620 यूनिट्स रही। दोपहिया वाहनों की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि फरवरी 2026 में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 35.2 प्रतिशत का उछाल आया, जो पिछले साल समान महीने में 13,84,605 यूनिट्स से बढ़कर 18,71,406 यूनिट्स पर पहुंच गई। दोपहिया वाहन, विशेषकर स्कूटर और मोटरसाइकिल की मांग में तेजी ने बिक्री में यह बड़ा योगदान दिया। तिपहिया वाहनों की मांग में भी बढ़ोतरी इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। फरवरी 2026 में तिपहिया वाहनों की बिक्री 74,573 यूनिट्स रही, जो फरवरी 2025 में 57,788 यूनिट्स थी। इस प्रकार, यात्री वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो इंडस्ट्री के लिए उत्साहवर्धक संकेत है। उद्योग में सकारात्मक माहौल, लेकिन चुनौतियां भी सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा, “उद्योग में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। फरवरी में अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज हुई है। हालांकि मार्च में देश के कई हिस्सों में त्योहार का माहौल रहेगा, लेकिन पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष आपूर्ति श्रृंखला पर चिंता का विषय बना हुआ है, जो विनिर्माण और निर्यात दोनों को प्रभावित कर सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों के बावजूद, घरेलू मांग के चलते विश्वास है कि साल 2026 में बिक्री में बढ़ोतरी जारी रहेगी। निष्कर्ष: ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूती फरवरी 2026 के आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारत का ऑटोमोबाइल बाजार मजबूत स्थिति में है। SUV और दोपहिया वाहन खपत में तेज़ी के साथ, यह सेक्टर न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहा है, बल्कि निर्यात संभावनाओं के लिहाज से भी आशाजनक बना हुआ है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में त्योहार और छुट्टियों के चलते बिक्री में और बढ़ोतरी संभव है। मुख्य तथ्य: यात्री वाहन: 4,17,705 यूनिट्स (+10.6%) SUV: 2,36,957 यूनिट्स (+13.5%) कार: 1,06,799 यूनिट्स (-3.8%) वैन: 11,620 यूनिट्स दोपहिया वाहन: 18,71,406 यूनिट्स (+35.2%) तिपहिया वाहन: 74,573 यूनिट्स (+29%) इस तरह फरवरी 2026 ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक मजबूत और उत्साहवर्धक महीना साबित किया है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर Donald Trump बोले- अमेरिका के लिए अच्छा मौका

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इस स्थिति से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और कई सरकारें ईंधन की खपत कम करने के उपाय तलाश रही हैं। इसी बीच Donald Trump ने कहा है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका को आर्थिक रूप से फायदा हो रहा है। उनका कहना है कि क्योंकि United States दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए तेल महंगा होने पर उसे ज्यादा आय प्राप्त होती है। ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने रखी अपनी बातट्रंप ने यह टिप्पणी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। उन्होंने लिखा कि जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो अमेरिका को इससे काफी मुनाफा होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Iran को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे मध्य पूर्व और पूरी दुनिया की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि वे किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। गैस की बढ़ती कीमतों को बताया नियंत्रण मेंट्रंप ने बुधवार को ओहियो में एक कार्यक्रम के दौरान भी ईंधन की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतें जितनी बढ़ने की आशंका थी, उतनी नहीं बढ़ी हैं। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में कीमतें इतनी कम हो जाएंगी कि लोगों को इसकी चिंता भी नहीं रहेगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आईईए ने दी तेल आपूर्ति संकट की चेतावनीइस बीच International Energy Agency (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े हमलों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण दुनिया को तेल आपूर्ति में बड़ी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी का कहना है कि यह इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक साबित हो सकती है। स्थिति को संभालने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने बुधवार को एक अहम फैसला लिया। इसके तहत 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। आपातकालीन भंडार से तेल जारी करने का फैसलाआईईए के सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी सरकारी नियमों के तहत लगभग 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल का भंडार उपलब्ध है।यह समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का आईईए के इतिहास में छठा मौका है। इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में भी इसी तरह के कदम उठाए गए थे। गौरतलब है कि International Energy Agency की स्थापना 1974 में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रभावित हुई आपूर्तिआईईए के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने हाल ही में सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और तेल आपूर्ति पर उसके असर का आकलन किया गया। बैठक के बाद ही आपातकालीन भंडार जारी करने का निर्णय लिया गया। दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हो गई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मौजूदा हालात में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) में अहम नियुक्ति करते हुए सीनियर अधिकारी कोम्पेला वेंकट रमना मूर्ति को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने आधिकारिक बयान में बताया कि 1991 बैच के इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस (IDAS) अधिकारी रहे रमना मूर्ति को तीन साल की अवधि के लिए सेबी का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है। उनकी नियुक्ति सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद की गई है और यह उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरीसरकार के बयान के अनुसार, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने के.वी. रमना मूर्ति की नियुक्ति को तीन साल की अवधि या अगले आदेश तक के लिए स्वीकृत दी है। सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी भूमिका, पूंजी बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों, नियामक निगरानी और जांच दिशानिर्देशों में अहम होगी। इससे पहले मूर्ति रक्षा लेखा तंत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वे प्रोडक्शनल कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स जैसे प्रमुख पद पर भी कार्य कर चुके हैं। पहले भी सेबी बोर्ड से जुड़े रहे हैं मूर्तिके.वी. रमना मूर्ति का सेबी से कार्य पहले से रहा है। इससे पहले वे मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के प्रतिनिधि के रूप में सेबी बोर्ड में अंशकालिक सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके पास सरकारी वित्तीय प्रबंधन और नियामक उद्देश्यों का लंबा अनुभव है, जिसे अब पूंजी बाजार के नियमन और विकास में उपयोग किया जाएगा। सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या हुई चाररमना मूर्ति की नियुक्ति के साथ सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। पिछले वर्ष कुछ पद खाली होने के बाद बोर्ड में यह महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेबी के अन्य पूर्णकालिक सदस्यों में कमलेश चंद्र वार्ष्णेय और संदीप प्रधान शामिल हैं, जो भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) कैडर से आते हैं। इसके अलावा अमरजीत सिंह भी पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने सेबी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। सेबी बोर्ड की संरचनासेबी के बोर्ड की संरचना में एक अध्यक्ष, चार पूर्णकालिक सदस्य और चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। वर्तमान में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे हैं, जिन्होंने 1 मार्च 2025 को यह पदभार संभाला था। अंशकालिक सदस्यों में दीप्ति गौड़ मुखर्जी, अनुराधा ठाकुर, शिरीष चंद्र मुर्मू और एन. वेंकटराम शामिल हैं। ये सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नियामक प्रक्रिया में व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है। कैपिटल बाजार के विकास में अहम भूमिकासेबी के पूर्णकालिक सदस्य देश केकैपिटल बाजार के विकास, निकायों के हितों की रक्षा और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे नीतिगत आशाजनक, बाजार निगरानी और जांच से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। इस बीच सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) भारत के कैपिटल बाजार के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फंड डीटीएच ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे

नई दिल्ली। अनमोल के बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। सोने और चांदी की खदानों में वसुले के कारण दबाव बनाया जा रहा है, जिससे दोनों किशोरों के दाम नीचे आ गए। अंतर्राष्ट्रीय आंतरायिक से मिले फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और रेस्टॉरेंट द्वारा मान्यता प्राप्त क्रांति के कारण घरेलू बाज़ार में भी गिरावट का माहौल बना हुआ है। इसी के साथ सोने की कीमत एक बार फिर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गयी है, जबकि चांदी की कीमत भी 2.60 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे हो गयी है। 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,700 रुपये से ज्यादा की गिरावटइंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (सीएए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी ताजा गिरावट के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोना 1,748 रुपये सस्ता 1,58,555 रुपये प्रति 10 ग्राम। इससे पहले इसकी कीमत 1,60,303 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सोने के समुद्र तट में यह विविधता के बीच सार्वभौम का संकेत जा रहा है। विशेषज्ञ का कहना है कि हाल के दिनों में सोने में तेज गति से देखने को मिला था, बाद में जिज्ञासा ने लाभ बुक करना शुरू कर दिया। 22 और 18 कैरेट सोना भी हुआ सस्तासोने के अन्य कैरेट में भी गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट सोने का दाम 1,46,838 रुपये प्रति 10 ग्राम, प्रति 10 ग्राम कीमत 1,45,236 रुपये। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,20,227 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम कीमत 1,18,916 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।कोल्डजे की ओर से सोने-अलावेरिया के शोरूम में दो बार रिलीज की जाती है-एक बार दोपहर 12 बजे और दूसरी बार शाम 5 बजे। इन कोटा के आधार पर देश के विभिन्न शहरों, बाजारों में दम तय हो जाता है। चांदी की कीमत में 8,000 रुपये से ज्यादा की गिरावटसोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी से गिरावट का आकलन किया गया। चांदी का दाम 8,350 रुपये प्रति यूनिट 2,59,951 रुपये प्रति किलो रह गया। इससे पहले इसकी कीमत 2,68,301 रुपये प्रति किलो थी। सिल्वर की इंडस्ट्रीज़ में यह औद्योगिक गिरावट की मांग है, औद्योगिक और वैश्विक उद्यमों में वित्तीय रुझान के कारण मनी जा रही है। विशेषज्ञ के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय कंपनी दबाव बना रही है तो चांदी के बाजार में भी आगे बढ़ सकती है। बाज़ार में भी बेचारेघरेलू बाज़ार बाज़ार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (MCX) पर भी सोने और चाँदी की कमी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:30 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का बायोडाटा कॉन्ट्रैक्ट 0.40 प्रतिशत प्रतिशत 1,59,632 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार हो रहा था। वहीं चांदी का 5 मई 2026 को नरसंहार अनुबंध 1.81 प्रतिशत जनसंख्या 2,63,099 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि इंटर्नशिप का रुख सख्त हो गया है। अंतरराष्ट्रीय में भी दबाववैश्विक बाजार में भी अनमोल साॅस्टेट्स की मंदी का रुख बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 0.64 प्रतिशत शेयर बाजार 5,092 डॉलर प्रति शेयर की बढ़त पर पहुंच गई, जबकि चांदी करीब 3 प्रतिशत शेयर बाजार में 82 डॉलर प्रति शेयर की बढ़ोतरी पर कारोबार कर रही थी।विशेषज्ञ का कहना है कि वैश्विक आर्थिक पर्वतमाला और वैज्ञानिकों के रुख का सीधा असर सोने-असारिया की सीमा पर है। डॉलर और बांड उपज बढ़ने से दबावमोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी स्टॉक मानव मोदी के अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादकता और उत्पादन को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। इंडोनेशिया में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी से देखने को मिल रही है, जिससे सोने की कीमत पर दबाव पड़ रहा है। निवेशकों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक विकास और डॉलर की चाल के आधार पर सोने-रेसा के बांध में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, BSE Sensex और Nifty 50 लाल निशान में

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स के बीच चिंता का माहौल बन गया। कमजोर वैश्विक सेंसेक्स, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली हावी रही और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि अंतरराष्ट्रीय सेंसेक्स और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब एक प्रतिशत की गिरावटशुक्रवार सुबह करीब 11:40 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 निफ्टी वाला सेंसेक्स 706 अंक यानी 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,334 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 240 अंक यानी 1.02 प्रतिशत टूटकर 23,398 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा और कई प्रमुख सेक्टरों में तेजी से बिकवाली देखी गई। मेटल, डिफेंस, ऑटो और पीएसयू बैंक से जुड़े सप्लाई में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का समग्र सेंटिमेंट कमजोर हो गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ा कारणविशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति टमाटर के करीब पहुंच गई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मज में संभावित बाधाओं के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस वजह से डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति टमाटर और ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति टमाटर के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी से आर्थिक दृष्टि से चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक सेंसेक्स की कमजोरी का भी पड़ा असरभारतीय बाजार पर वैश्विक सेंसेक्स का भी नेगेटिव असर देखने को मिला। एशियाई सेंसेक्स में भी शुक्रवार को कमजोरी का माहौल रहा। सियोल, टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता के प्रमुख शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वैश्विक सेंसेक्स में इस कमजोरी ने सेंसेक्स के मान्य को प्रभावित किया, जिसका असर भारतीय सेंसेक्स पर भी साफ दिखाई दिया। विदेशी सेंसेक्स की बिकवाली से बढ़ा दबावभारतीय बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी सेंसेक्स की लगातार बिकवाली भी है। एक्सचेंज के आंकड़ों के हिसाब से विदेशी सेंसेक्स ने गुरुवार को ही 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए थे। मार्च महीने में अब तक एफआईआई भारतीय बाजार से 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली से बाजार में तरलता पर असर पड़ रहा है और सेंसेक्स का भरोसा भी कमजोर हो रहा है। रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंताडॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर बढ़ता दबाव भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शुक्रवार के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 92.60 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। कमजोर होता रुपया विदेशी फर्मों के लिए जोखिम बढ़ता है, जिससे वे भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें घट स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता जारी रहती है, तो निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।

RTAIL INFLATION: देश की खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.2 फीसदी के स्तर पर आई

RTAIL INFLATION: नई दिल्ली। फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि जनवरी महीने में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला पर आधारित हैं।फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि जनवरी महीने में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला पर आधारित हैं। मां ने चार महीने के बेटे को मार डाला, नुकीली ईंट से हत्या कर लकड़ियों में छिपाया शव सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों में बताया कि खुदरा महंगाई दर में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य, पेय पदार्थ, और ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण आई है, जो 2024 आधार वर्ष वाली नई श्रृंखला के तहत दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 फीसदी रही है, जो कि जनवरी महीने में 2.73 फीसदी थी। शहरी इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.02 फीसदी रही, जो कि शहरी इलाकों में 2.75 फीसदी रही थी। एनएसओ के मुताबिक खाद्य महंगाई दर फरवरी में 3.47 फीसदी रही है। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 फीसदी और शहरी इलाकों में 3.48 फीसदी रही है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों (सब्जियों, मांस, मछली, अंडे) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई में यह उछाल आया है। यह दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की 2-6 फीसदी की लक्षित सीमा के भीतर है।

ED on Anil Ambani: ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

ED on Anil Ambani: नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की दो कंपनियों आरएचएफएल और आरसीएफएल की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की गई है। ईडी ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि उसने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की दो कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की है, जिसमें देश के कई राज्यों में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल प्रॉपर्टीज को अटैच किया गया है। यूपी भाजपा में बन रही बड़े संगठनात्मक फेरबदल की योजना, 2027 चुनाव से पहले नई टीम बनाने की तैयारी केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि ईडी ने 11 मार्च, 2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के मामले में गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया गया है, जिनकी कीमत 581.65 करोड़ रुपये है। ईडी के मुताबिक यह अटैचमेंट विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड (आर-पावर) के मामले में 6 मार्च, 2026 को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद किया गया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कुल कुर्क संपत्ति 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

एमपी में गैस संकट गहराया: रीवा में 2000 रुपए का सिलेंडर, भोपाल-इंदौर में लंबी कतारें, होटल-रेस्टोरेंट डीजल भट्ठी पर खाना बना रहे

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में LPG संकट गंभीर रूप ले चुका है। रीवा में घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी का मामला सामने आया है, जहां 900 रुपए का सिलेंडर दलालों द्वारा 1700 से 2000 रुपए तक बेचा जा रहा है। राज्यभर में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। प्रदेश में पिछले तीन दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 7 दिन की देरी हो रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि फिलहाल केवल 15% गैस ही उपलब्ध कराई जा रही है, जो मुख्य रूप से इमरजेंसी सेवाओं और घरों के लिए है। रीवा में उमेश शुक्ला जैसे उपभोक्ताओं ने बताया कि सुबह से कतार में लगे रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पाया। दलाल महंगे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता मजबूरी में अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं। कमर्शियल सिलेंडर अब केवल अस्पताल, सेना-पुलिस कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड के भोजनालय को ही मिलेगा। वहीं, होटल, मैरिज गार्डन और सराफा कारीगरों को सप्लाई नहीं हो पा रही। छिंदवाड़ा में शादियों के आयोजन के लिए रसोई गैस की कमी के कारण डीजल भट्ठियों पर खाना बनाना पड़ रहा है। भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली ने बताया कि राजधानी के डेढ़ हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट हर रोज 2 से 2.5 हजार सिलेंडर उपयोग करते हैं। वर्तमान स्टॉक केवल 48 घंटे का ही काम चला पाएगा। सिर्फ सप्लाई की कमी ही नहीं, बल्कि घरेलू सिलेंडर के लिए भी लंबी वेटिंग है। भोपाल के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए भाग-दौड़ और भीड़ देखी गई। इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर के संकट के कारण होटल और रेस्टोरेंट लकड़ी, कंडा और कोयला जैसे पारंपरिक ईंधन पर खाना बना रहे हैं। मार्च में प्रदेश भर में 20,000 से अधिक शादियां आयोजित होने वाली हैं, जिनमें कमर्शियल सिलेंडर का भारी उपयोग होता है। सिलेंडर की कमी के कारण खाने की तैयारी में बाधा आ रही है। इसके अलावा, किराना और खाद्य सामग्री की कीमतों में भी तेजी आई है। हरी मूंग, मसूर, चना और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। पिस्ता, अंजीर, केसर और अन्य महंगे ड्राई फ्रूट्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं। सरकार का कहना है कि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई सामान्य है और पेट्रोलियम उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर गैस कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं। संकट से निपटने के लिए सरकार ने पांच अहम कदम उठाए हैं: हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत गैस की जमाखोरी पर रोक। घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन बाद ही होगी। डिलीवरी एजेंटों द्वारा OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य। LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश, अतिरिक्त उत्पादन केवल घरेलू गैस के लिए। इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद भी होटल और रेस्टोरेंट 48 घंटे के स्टॉक पर निर्भर हैं। सरकार की तरफ से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों में चिंता बरकरार है।

देशभर में LPG की किल्लत, सिलेंडर की कालाबाजारी और इंडक्शन की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

नई दिल्ली। देशभर में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच एलपीजी (LPG) की किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं, वहीं घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बिहार के कई शहरों में 1000 रुपए वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत अब1800 तक पहुँच गई है। मध्य प्रदेश में स्थिति और गंभीर है, यहाँ 1900 रुपए वाले कॉमर्शियल सिलेंडर को4000 में बेचा जा रहा है। इस बढ़ती कीमत और आपूर्ति संकट के कारण लोगों को गैस सिलेंडर पाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सप्लाई की कमी के चलते कई होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इंडक्शन पर खाना बनाने की ओर रुख किया है। इसके परिणामस्वरूप बाजार में इंडक्शन की मांग में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है। गैस की कमी और कालाबाजारी ने ऊर्जा सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर गंभीर प्रभाव डाला है। सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे एलपीजी के सही उपयोग और अनुचित मूल्य वृद्धि से बचने के लिए सतर्क रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और संघर्ष की वजह से एलपीजी की उपलब्धता अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार उत्पादन बढ़ाकर और आपूर्ति चैन को सुचारू बनाए रखकर समस्या का समाधान कर रही है। इस संकट के बीच जनता और व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जैसे कि इंडक्शन, पीएनजी, और अन्य वैकल्पिक ईंधन, ताकि खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी की जा सकें।घरेलू सिलेंडर के दाम 1000 से 1800 तक बढ़े, कॉमर्शियल सिलेंडर1900 से4000 पर।इंडक्शन की मांग 50% बढ़ी।सरकार ने कालाबाजारी रोकने और आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए।ऊर्जा संकट के बीच वैकल्पिक ईंधनों पर ध्यान केंद्रित।