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भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल दुनिया के विकासशील देशों के लिए बना मिसाल: रिपोर्ट

नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने आधुनिक इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी) परिवर्तन में से एक को अंजाम दिया है, जिसकी बदौलत देश आज दुनिया के सबसे उन्नत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में से एक बन गया है। यह मॉडल अब अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है।अजरबैजान स्थित न्यूज डॉट एजेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मॉडल दिखाता है कि सरकारी नीतियां, तकनीकी नवाचार और व्यापक मोबाइल कनेक्टिविटी मिलकर किस तरह एक प्रभावी भुगतान ढांचा तैयार कर सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति ने वैश्विक स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया है। अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ इसे अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक सफल मॉडल के रूप में अध्ययन कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान प्रणाली, तेजी से बढ़ती मोबाइल कनेक्टिविटी, आधुनिक पेमेंट प्लेटफॉर्म और सरकार की सहायक नीतियों के संयोजन ने दुनिया के सबसे बड़े और कुशल डिजिटल इकोसिस्टम में से एक को जन्म दिया है। रिपोर्ट में सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा गया कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और लाखों लोगों को डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने वाले सरकारी कार्यक्रमों ने इस व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार की। साथ ही सस्ते स्मार्टफोन और तेजी से बढ़ती मोबाइल इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम-वानी) कार्यक्रम के जरिए सार्वजनिक इंटरनेट सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। फरवरी 2026 तक इस पहल के तहत 4,09,111 वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें 207 PDO एग्रीगेटर और 113 ऐप प्रदाता सपोर्ट कर रहे हैं। इसका उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इन सभी विकासों ने बड़े स्तर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए जरूरी माहौल तैयार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान को बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं से जोड़ने से वित्तीय संस्थान उपयोगकर्ताओं की पहचान सुरक्षित तरीके से सत्यापित कर सकते हैं और लेनदेन को तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने नकदी पर निर्भरता कम करने में भी मदद की है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आर्थिक लेनदेन अधिक कुशल हुए हैं। सरकार ने हाल ही में एक बयान में कहा कि जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई के जरिए हर महीने लगभग 28.33 लाख करोड़ रुपए के लेनदेन होते हैं। इस दौरान 21.7 अरब डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो मोबाइल फोन के माध्यम से शून्य लागत पर रियल-टाइम भुगतान की सुविधा देते हैं और शहरों से लेकर गांवों तक तथा हर आय वर्ग में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।

Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में हल्की बढ़त के बाद बाजार में अचानक गिरावट आ गई। BSE Sensex करीब 435 अंक गिरकर 77,770.74 पर कारोबार करता नजर आया। यह अपने पिछले बंद 78,205.98 के मुकाबले लगभग 0.56% नीचे है। वहीं Nifty 50 भी करीब 110 अंक गिरकर 24,150 के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में दिखी तेजीजहां भारतीय बाजार में गिरावट देखी गई, वहीं एशियाई बाजारों में तेजी का रुख नजर आया। Nikkei 225 में 1.36% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि TOPIX इंडेक्स 1.22% ऊपर रहा। दक्षिण कोरिया का KOSPI 2.52% चढ़ा, जबकि स्मॉल-कैप इंडेक्स KOSDAQ में 1.39% की बढ़त देखी गई। वहीं Hang Seng Index फ्यूचर्स 25,936 के स्तर पर कारोबार करते नजर आए। वॉल स्ट्रीट लाल निशान में बंदमंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति पर बनी हुई है। S&P 500 0.21% गिरकर 6781.48 पर बंद हुआ। वहीं Dow Jones Industrial Average 34.29 अंक गिरकर 47,706.51 पर बंद हुआ। हालांकि Nasdaq Composite में हल्की बढ़त देखने को मिली और यह 0.01% बढ़कर 22,697.10 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावटबुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। WTI Crude की कीमत 0.03% गिरकर 83.43 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। वहीं Brent Crude पिछले सत्र के हाई लेवल 119.50 डॉलर से गिरकर अब 87 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार International Energy Agency ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। एजेंसी ने अपने इतिहास के सबसे बड़े Emergency Oil Reserve को जारी करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत 182 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल बाजार में जारी किया जा सकता है ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।

सेल ने वित्त वर्ष 26 में अप्रैल-फरवरी तक की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की

नई दिल्ली सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (सेल) ने वित्त वर्ष 26 के अप्रैल-फरवरी अवधि में 18.24 मिलियन टन स्टील बेचकर अब तक की सबसे अधिक बिक्री का रिकॉर्ड बनाया। यह सालाना आधार पर 14 प्रतिशत अधिक है। स्टील मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी साझा की और बताया कि इस अवधि में कैश कलेक्शन 1.11 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। फरवरी में विशेष प्रदर्शनमंत्रालय ने बताया कि अकेले फरवरी 2026 में सेल ने 1.58 मिलियन टन की कुल बिक्री की। इसके साथ ही कंपनी ने जनवरी की तुलना में स्टॉक में 1.05 लाख टन की कमी की और अपने ऋण को 1,000 करोड़ रुपए घटाया। ये आंकड़े वित्तीय अनुशासन और कुशल संचालन का संकेत देते हैं। रिटेल बिक्री और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोणसेल ने रिटेल बिक्री के क्षेत्र में भी सुधार दिखाया। स्टॉकयार्ड बिक्री और घर-घर डिलीवरी दोनों में मजबूत सुधार हुआ, जो कंपनी के ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करता है। चेकर प्लेट उत्पादन की शुरुआतबाजार की बदलती मांग के अनुसार, सेल ने झारखंड के Bokaro Steel Plant में चेकर प्लेट का उत्पादन फिर से शुरू किया है। यह उत्पाद पहली बार बोकारो में बनाया जा रहा है और प्रमुख क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादक क्षमता बढ़ाने का कदम है। वित्तीय अनुशासन और बाजार तालमेलकंपनी के निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे A.K. Panda ने कहा कि कंपनी बाजार की जरूरतों को पूरा करते हुए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने बताया, “हम इन्वेंट्री और कार्यशील पूंजी का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके वित्तीय अनुशासन प्रदर्शित कर रहे हैं, जो कंपनी की नींव को मजबूत करता है।” रिकॉर्ड बिक्री और ग्राहक भरोसापांडा ने आगे कहा कि रिकॉर्ड बिक्री और नकद संग्रह हमारे ग्राहकों के हम पर भरोसे का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी बाजार के साथ तालमेल बिठाने और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। सेल का यह प्रदर्शन न केवल वित्तीय मजबूती को दर्शाता है बल्कि यह संकेत भी देता है कि कंपनी अपने ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और कुशल प्रबंधन के साथ भविष्य में भी स्थिर और सतत विकास की राह पर आगे बढ़ रही है।

रियल एस्टेट निवेश में भारत की चमक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बना प्रमुख केंद्र

नई दिल्ली। कॉलियर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नौ प्रमुख बाजारों में रियल एस्टेट निवेश के मामले में 2025 में सबसे तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान कुल निवेश 162 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया कि साल के दूसरे हिस्से में निवेश गतिविधियों में तेजी आई, क्योंकि खरीदार और विक्रेता कीमतों को लेकर एक-दूसरे के करीब आए। भारत और सिंगापुर में निवेश में सबसे अधिक बढ़ोतरीरिपोर्ट में उल्लेख है कि सिंगापुर और भारत में सालाना आधार पर सबसे ज्यादा निवेश वृद्धि हुई। सिंगापुर में 35 प्रतिशत और भारत में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार की बेहतर स्थिति और निवेश के आकर्षक अवसरों को दर्शाती है। विदेशी निवेशकों की मजबूत भागीदारीकॉलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर Badal Yagnik ने कहा कि भारत में विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी काफी मजबूत रही। 8.5 अरब डॉलर के निवेश में से करीब 43 प्रतिशत हिस्सा विदेशी निवेशकों का था। उन्होंने कहा कि घरेलू और विदेशी निवेश दोनों ने मिलकर भारत को रियल एस्टेट निवेश का आकर्षक केंद्र बना दिया है। ऑफिस प्रॉपर्टी में सबसे अधिक निवेशरिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में भारत में सबसे ज्यादा निवेश ऑफिस प्रॉपर्टी में हुआ। इसकी वजह उच्च गुणवत्ता वाले ऑफिस स्पेस की लगातार मांग और प्रमुख केंद्रीय व्यापार क्षेत्र (सीबीडी) में सीमित नई आपूर्ति रही। भारत में 2025 में ऑफिस प्रॉपर्टी में करीब 4.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल संस्थागत निवेश का आधे से अधिक हिस्सा है। रिटेल और वैकल्पिक एसेट्स में भी निवेश बढ़ारिटेल सेक्टर में निवेश सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ा। बेहतर एसेट प्रदर्शन और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसके अलावा, वैकल्पिक एसेट क्लास सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर बना, जहां संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग देखने को मिली। 2026 में निवेश की संभावनाएंरिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में भी भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश मजबूत रहने की संभावना है। इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं और उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों की लगातार मांग है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताएं निवेश पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों की रायकॉलियर्स इंडिया के रिसर्च नेशनल डायरेक्टर Vimal Nadar ने कहा कि भारत में संस्थागत निवेशकों की पहली पसंद ऑफिस सेक्टर ही बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 2025 में नौ प्रमुख एशिया-प्रशांत बाजारों में से पांच में रियल एस्टेट निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा ऑफिस सेक्टर का रहा। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, भारत न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर रियल एस्टेट निवेश के लिए आकर्षक और स्थिर केंद्र बनता जा रहा है। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, निवेशकों के भरोसे और उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों की मांग इस स्थिति को और मजबूत करती है।

भारत अमेरिका का अहम साथी, तेल की कीमतें स्थिर रखने में भी निभा रहा भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि भारत दुनिया में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर लिखा कि भारत की रूस से निरंतर तेल खरीद ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। राजदूत ने इसे अमेरिका और भारत के बीच वैश्विक तेल मार्केट में स्थिरता लाने वाले सहयोग का उदाहरण बताया। भारत: तेल का बड़ा उपभोक्ता और रिफाइनरSergio Gor ने आगे कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और रिफाइनर है, इसलिए भारत की नीतियां वैश्विक तेल बाजार पर सीधे असर डालती हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत को मिलकर मार्केट में स्थिरता लाने के लिए काम करना जरूरी है।” इस बयान के साथ उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रूस से भारत की लगातार तेल खरीद इस वैश्विक स्थिरता प्रयास का हिस्सा है। ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिकायह बयान ऐसे समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में खतरा पैदा हुआ है। इसके चलते तेल कीमतों में उथल-पुथल होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने इस स्थिति में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी, ताकि तेल की आपूर्ति को बनाए रखा जा सके और बाजार में स्थिरता बनी रहे। व्हाइट हाउस की पुष्टिव्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Caroline Leavitt ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रपति, ट्रेजरी विभाग और नेशनल सिक्योरिटी टीम की बैठक के बाद लिया गया। उनका कहना था कि भारत अमेरिका के लिए भरोसेमंद सहयोगी रहा है और इस फैसले से वैश्विक तेल सप्लाई में ईरान संकट से पैदा हुए अंतर को कम करने में मदद मिली। रूस को आर्थिक लाभ का कोई खास असर नहींलेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस छूट से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और स्थिरता बनाए रखना था। उन्होंने बताया कि छूट मिलने से पहले ही भारत के लिए शिपमेंट भेज दिए गए थे, जिससे तेल आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आई। राजदूत Sergio Gor के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल खुद के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। रूस से भारत की तेल खरीद को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है।

Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव और गैस सप्लाई प्रभावित होने का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। देश के कई शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है तो कहीं गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। दिल्ली में गैस बुकिंग में आ रही दिक्कतराजधानी दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी टोल-फ्री नंबर भी कई बार ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर गैस बुकिंग के लिए जारी नंबर 7718955555 पर कॉल करने पर कभी कॉल नहीं लगती, कभी नंबर स्विच ऑफ बताता है तो कभी ‘नॉट इन यूज’ की जानकारी मिलती है। ऐसे में लोग ऑनलाइन बुकिंग की बजाय सीधे गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं, जहां लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। मुंबई में लोगों ने ढूंढे वैकल्पिक साधनमुंबई में भी गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर ग्राहकों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग खाना बनाने के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं। बाजार में इलेक्ट्रिक कुकर, माइक्रोवेव ओवन, इलेक्ट्रिक तवा, एयर फ्रायर, मल्टी कुकर और हॉट प्लेट जैसे उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। होटल और रेस्टोरेंट को गैस सप्लाई में कटौतीमुंबई के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर और गैस एजेंसियां फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। बताया जा रहा है कि 6 मार्च से होटल और रेस्टोरेंट को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई में भारी कटौती की गई है और करीब 80 फीसदी तक सप्लाई कम हो चुकी है। इसका असर मुंबई के कई पुराने और मशहूर होटलों पर भी देखने को मिल रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास स्थित करीब 178 साल पुराने ‘पंचम पुरीवाला’ होटल को भी गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मशहूर होटल में मेन्यू हुआ सीमित1848 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक होटल में पहले करीब 79 तरह के मेन्यू आइटम मिलते थे और खास तौर पर यहां पांच तरह की पूरियां परोसी जाती थीं। लेकिन एलपीजी की कमी के कारण अब होटल में सिर्फ दो आइटम पूरी-भाजी और आमरस-पूरी ही उपलब्ध हैं। होटल प्रबंधन के अनुसार उनके पास गैस का बहुत सीमित स्टॉक बचा है और उन्हें कई जगहों से उधार सिलेंडर लेकर काम चलाना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर भी दिख रही भीड़सिर्फ एलपीजी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ती दिख रही है। कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ गई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कई पेट्रोल पंपों पर भी लंबी कतारें देखी जा रही हैं। हालांकि महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने कहा है कि फिलहाल गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है। कंपनी के अनुसार सीएनजी और पाइप के जरिए घरों में जाने वाली पीएनजी गैस की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण एलएनजी आयात प्रभावित होने पर औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए गैस सप्लाई पर कुछ असर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो ईंधन की कमी की आशंका बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले समय में गैस और ईंधन की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला; बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली

मुंबई। वैश्विक तनाव और निवेशकों की बढ़ती चिंता के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 1000 अंक से ज्यादा टूटकर लगभग 77,250 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं Nifty 50 भी करीब 300 अंक फिसलकर 24,000 के आसपास पहुंच गया। बाजार में गिरावट का असर खास तौर पर बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिला। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण जोखिम कम करने के लिए बिकवाली बढ़ा दी, जिससे बाजार पर दबाव बन गया। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। Iran और Israel के बीच बढ़ते टकराव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने का डर भी निवेशकों को सताने लगा है। इसी बीच सोने की कीमतों में तेजी देखी गई। India Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 500 रुपये बढ़कर करीब 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। हालांकि चांदी की कीमत में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 2000 रुपये घटकर 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। Nikkei 225 और KOSPI में बढ़त दर्ज की गई, जबकि Hang Seng Index और Shanghai Composite Index मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजारों में भी एक दिन पहले हल्की गिरावट रही थी। Dow Jones Industrial Average और S&P 500 नीचे बंद हुए, जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स Nasdaq Composite लगभग स्थिर स्तर पर बंद हुआ। इस बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। आंकड़ों के अनुसार 10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,672 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 6,333 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों की सतर्कता के कारण फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कीवर्ड: सेंसेक्स, निफ्टी, शेयर बाजार गिरावट, ईरान-इजराइल तनाव, सोने की कीमत, विदेशी निवेशक

एलपीजी संकट के बीच चमके इंडक्शन चूल्हा कंपनियों के शेयर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच भारत में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल बाजारों में इन उपकरणों की खरीदारी बढ़ने लगी है। इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग और बढ़ सकती है। घरेलू उपकरण कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजीइलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बढ़ती मांग का सीधा फायदा होम अप्लायंसेज कंपनियों को मिला है। किचन अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनी Butterfly Gandhimathi Appliances के शेयर में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। दोपहर करीब 12:45 बजे कंपनी का शेयर करीब 7.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 651 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान इसने 660 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने से कंपनी के कारोबार को फायदा मिल सकता है। टीटीके प्रेस्टीज और स्टोव क्राफ्ट के शेयर भी चढ़ेइसी तरह किचन उपकरण क्षेत्र की एक और प्रमुख कंपनी TTK Prestige के शेयर में भी तेज उछाल देखा गया। कंपनी का शेयर करीब 9.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 530 रुपये के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 556 रुपये तक भी गया। वहीं Stove Kraft, जो ‘पिजन’ ब्रांड के नाम से उत्पाद बेचती है, के शेयर में भी करीब 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कंपनी का शेयर लगभग 510 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया और दिन के दौरान इसने 525 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि एलपीजी की संभावित कमी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बिक्री में तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों ने इंडक्शन स्टोव को बताया बेहतर विकल्पऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी आपूर्ति में संभावित दबाव को देखते हुए शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव जैसे विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े शोध संस्थान Council on Energy, Environment and Water (सीईईडब्ल्यू) के फेलो Abhishek Kar ने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है। इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति पश्चिम एशियाई देशों से आती है, जिनमें United Arab Emirates, Qatar और Saudi Arabia प्रमुख हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है। ‘गिव इट अप’ अभियान जैसे नए प्रयास का सुझावअभिषेक कर ने सुझाव दिया कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे प्रावधानों का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही एलपीजी सब्सिडी के लिए चलाए गए ‘गिव इट अप’ अभियान की तर्ज पर एक नया अभियान शुरू किया जा सकता है। इस अभियान का उद्देश्य उन परिवारों को एलपीजी का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित करना हो सकता है, जिनके पास पहले से इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव हैं या जो इसे आसानी से खरीद सकते हैं। इससे घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सकता है। रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाहएलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच होटल और रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। National Restaurant Association of India (एनआरएआई) ने अपने सदस्यों से गैस की खपत कम करने के उपाय अपनाने का आग्रह किया है। संगठन ने सुझाव दिया है कि रेस्तरां ऐसे मेनू पर अधिक ध्यान दें जिनमें कम गैस की खपत होती हो या जिनका खाना जल्दी तैयार हो सके। इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्प अपनाने पर जोरएनआरएआई ने अपने सदस्यों को जारी सलाह में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आ सकती हैं। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो रेस्तरां उद्योग को संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जहां संभव हो, वहां खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों के विकल्प अपनाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उद्योग की स्थिरता के लिए जरूरी कदमसंगठन ने कहा कि व्यापार की निरंतरता, रोजगार और पूरे खाद्य सेवा क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखने के लिए ईंधन संरक्षण के उपाय अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता और वैकल्पिक कुकिंग तकनीकों को बढ़ावा देना भविष्य में इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। देश में कुकिंग गैस की संभावित कमी को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के बीच सरकार ने वैकल्पिक आयात मार्गों और नए स्रोतों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों और वैकल्पिक समुद्री मार्गों से प्राप्त की गई एलपीजी और एलएनजी की खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की यह रणनीति घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है। घरेलू रिफाइनरियों ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादनसरकार द्वारा तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसका उद्देश्य संभावित आयात बाधाओं के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण बनाए रखने में सहूलियत होती है। जामनगर रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाने पर जोरदेश की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी Reliance Industries Limited ने भी इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। कंपनी का Jamnagar Refinery परिसर कुकिंग गैस एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय घरों के लिए जरूरी ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालन को लगातार अनुकूलित किया जा रहा है और टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। केजी-डी6 गैस से भी मिलेगी मददकंपनी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप KG‑D6 Basin से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और शहरों में पाइप्ड गैस और सीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस उत्पादन का बेहतर उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने नागरिकों को किया आश्वस्तइस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश विभिन्न देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रहा है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सीएनजी और पीएनजी आपूर्ति भी सामान्यसरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। अधिकारियों के अनुसार शहरों में गैस वितरण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का प्रबंधन किया जा रहा है। उद्योगों को भी मिल रही पर्याप्त गैसभू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को भी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। सरकार के अनुसार उद्योगों को उनकी कुल गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों पर अधिक असर नहीं पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश भर में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकसकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार देश के हर घर तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से वैश्विक संकट के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है।

GOLD SILVER PRICE DROP: बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

  GOLD SILVER PRICE DROP: नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में मुनाफावसूली के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम कमजोर पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के चलते निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति दिशा ही इन धातुओं की आगे की चाल तय करेंगे। एमसीएक्स पर सोना-चांदी के दाम फिसले घरेलू वायदा बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह करीब 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में सोने और चांदी में आई तेजी के बाद निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी करीब 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका हुआ है, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। युद्ध के संकेतों से बाजार में अनिश्चितता कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी है। हाल के दिनों में Donald Trump के बयान और युद्ध से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले संकेत मिले थे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से तत्काल तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है और युद्ध लगातार बारहवें दिन तक जारी रहने की खबरों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब ईरान ने दावा किया कि उसने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। इन घटनाओं के कारण ऊर्जा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं पर पड़ता है। अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर विशेषज्ञों के अनुसार अब कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। निवेशक विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति यानी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है। जीडीपी और मुद्रास्फीति से तय होगी आगे की दिशा विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर कीमती धातुओं पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।