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ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। देश में कुकिंग गैस की संभावित कमी को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के बीच सरकार ने वैकल्पिक आयात मार्गों और नए स्रोतों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों और वैकल्पिक समुद्री मार्गों से प्राप्त की गई एलपीजी और एलएनजी की खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की यह रणनीति घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है। घरेलू रिफाइनरियों ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादनसरकार द्वारा तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसका उद्देश्य संभावित आयात बाधाओं के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण बनाए रखने में सहूलियत होती है। जामनगर रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाने पर जोरदेश की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी Reliance Industries Limited ने भी इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। कंपनी का Jamnagar Refinery परिसर कुकिंग गैस एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय घरों के लिए जरूरी ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालन को लगातार अनुकूलित किया जा रहा है और टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। केजी-डी6 गैस से भी मिलेगी मददकंपनी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप KG‑D6 Basin से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और शहरों में पाइप्ड गैस और सीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस उत्पादन का बेहतर उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने नागरिकों को किया आश्वस्तइस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश विभिन्न देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रहा है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सीएनजी और पीएनजी आपूर्ति भी सामान्यसरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। अधिकारियों के अनुसार शहरों में गैस वितरण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का प्रबंधन किया जा रहा है। उद्योगों को भी मिल रही पर्याप्त गैसभू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को भी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। सरकार के अनुसार उद्योगों को उनकी कुल गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों पर अधिक असर नहीं पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश भर में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकसकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार देश के हर घर तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से वैश्विक संकट के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है।

GOLD SILVER PRICE DROP: बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

  GOLD SILVER PRICE DROP: नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में मुनाफावसूली के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम कमजोर पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के चलते निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति दिशा ही इन धातुओं की आगे की चाल तय करेंगे। एमसीएक्स पर सोना-चांदी के दाम फिसले घरेलू वायदा बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह करीब 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में सोने और चांदी में आई तेजी के बाद निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी करीब 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका हुआ है, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। युद्ध के संकेतों से बाजार में अनिश्चितता कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी है। हाल के दिनों में Donald Trump के बयान और युद्ध से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले संकेत मिले थे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से तत्काल तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है और युद्ध लगातार बारहवें दिन तक जारी रहने की खबरों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब ईरान ने दावा किया कि उसने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। इन घटनाओं के कारण ऊर्जा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं पर पड़ता है। अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर विशेषज्ञों के अनुसार अब कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। निवेशक विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति यानी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है। जीडीपी और मुद्रास्फीति से तय होगी आगे की दिशा विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर कीमती धातुओं पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

crude oil price drop: तेल बाजार में गिरावट, IEA के संभावित रिजर्व रिलीज के बीच क्रूड 90 डॉलर से नीचे

   crude oil price drop: नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली और दाम 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। गिरावट की प्रमुख वजह International Energy Agency (IEA) द्वारा इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी कर आपूर्ति बढ़ाने की संभावित योजना को माना जा रहा है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में गिरावट रिपोर्ट्स के मुताबिक खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। Brent Crude की कीमत 0.99% गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं West Texas Intermediate (WTI) वायदा 0.75% गिरकर 82.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी रिपोर्ट्स के अनुसार International Energy Agency इमरजेंसी रिजर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहा है ताकि हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। बताया जा रहा है कि यह प्रस्तावित आपूर्ति 2022 में Russia द्वारा Ukraine पर हमले के बाद जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से भी अधिक हो सकती है। G7 देशों ने भी आईईए से इस तरह के कदम के लिए तैयार रहने को कहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ा था तनाव हाल के दिनों में Strait of Hormuz में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका के कारण Brent Crude की कीमत हाल के दिनों में करीब 50% बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। ट्रंप के बयान का भी असर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की एक वजह Donald Trump का बयान भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा था कि United States और Iran के बीच चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी जारी है और संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच खबरें सामने आई हैं कि Iran Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ है तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।

Indian stock market crash: बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स में करीब 1,000 अंक की बड़ी गिरावट

 Indian stock market crash:  नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली। दोपहर करीब 12 बजे BSE Sensex 987 अंक यानी 1.26% टूटकर 77,218 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 275 अंक यानी 1.13% की गिरावट के साथ 23,986 पर कारोबार करता दिखा। बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाया दबाव आज की गिरावट में बैंकिंग शेयरों की बड़ी भूमिका रही। Nifty Bank करीब 1.6% गिरकर 56,044 के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा ऑटो, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, सर्विसेज, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, रियल्टी, डिफेंस, आईटी और इंफ्रा सेक्टर के शेयर भी दबाव में कारोबार कर रहे थे। हालांकि फार्मा, एनर्जी, मीडिया, मेटल, हेल्थकेयर और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है। मंगलवार को Foreign Institutional Investors (FII) ने करीब 4,673 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वहीं Domestic Institutional Investors (DII) ने करीब 6,333 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। वैश्विक तनाव भी बना बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा है। हाल ही में United States और Iran के बीच बढ़ते टकराव और Israel की ओर से ईरान पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। इस तनाव के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम हुआ है, जिससे शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है। बाजार में बढ़ी अस्थिरता बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला India VIX करीब 8.73% बढ़कर 20.55 पर पहुंच गया है। आमतौर पर जब वोलैटिलिटी इंडेक्स बढ़ता है तो बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और गिरावट देखने को मिल सकती है। सपाट शुरुआत के बाद आई तेज गिरावट बुधवार को बाजार की शुरुआत लगभग सपाट रही थी। BSE Sensex 33 अंक की हल्की बढ़त के साथ 78,238 पर खुला था। Nifty 50 30 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,231 पर खुला था। लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई और बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

भारत की आर्थिक वृद्धि पर हो सकता है ईरान-युद्ध का असर… ICRA ने बढ़ाई टेंशन

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (Rating agency ICRA) ने एक रिपोर्ट में यह कहा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमान 7.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी तनाव से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण वृद्धि प्रभावित हो सकती है। वैश्विक स्तर पर तनावबता दें कि इजराइल-अमेरिका के ईरान पर हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह एक अहम वैश्विक ऊर्जा गलियारा है। इससे आपूर्ति प्रभावित होने और माल ढुलाई लागत में वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ी है। पश्चिम एशिया भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। भारत के निर्यात में इसकी लगभग 14 प्रतिशत और आयात में लगभग 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में, यदि तनाव और बढ़ता है तो व्यापार के साथ ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी। भारत के लिए जोखिम हैं ये फैक्टरइक्रा की रिपोर्ट में कहा गया- यह संघर्ष विशेष रूप से माल ढुलाई लागत में वृद्धि, आपूर्ति में देरी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के रूप में भारत के व्यापार प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है। इक्रा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत का चालू खाते का घाटा 0.30-0.40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। साथ ही थोक और खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है। ईंधन की बढ़ती लागत से उपभोग मांग कम हो सकती है और समग्र आर्थिक गतिविधि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एजेंसी के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल रहती हैं तो इससे चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक प्रतिशत के आसपास बना रह सकता है। हालांकि, यदि कीमतें बढ़कर 100-105 डॉलर प्रति बैरल हो जाती हैं, तो घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.9-2.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे वृहद आर्थिक दबाव बढ़ेगा। इक्रा ने कहा कि इस स्थिति का असर बाहर से भेजे जाने वाली राशि पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत में आने वाले रेमिंटन्स का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं।

घरेलू LPG आपूर्ति को बनाए रखने रिलायंस ने बढ़ाया उत्पादन, सरकार के साथ मिलकर कर रही काम

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चल रही उथल-पुथल को देखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने कहा है कि घरेलू बाजार में जरूरी ईंधन की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति उनकी प्राथमिकता है। इस दिशा में जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। जामनगर को दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब माना जाता है और यहां की टीम दिन-रात काम कर रही है ताकि घरेलू गैस आपूर्ति स्थिर बनी रहे। यह कदम भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उठाया गया है। केजी-डी6 बेसिन की गैस प्राथमिक क्षेत्रों को जाएगीरिलायंस ने यह भी घोषणा की कि केजी-डी6 बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस अब प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर भेजी जाएगी। यह फैसला राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और देश के नागरिकों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और करोड़ों भारतीय परिवारों की भलाई उनकी सबसे बड़ी चिंता है। सरकार के साथ सहयोग और नियमों का पालनरिलायंस ने बताया कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी राष्ट्रीय नियमों तथा आवंटन प्राथमिकताओं का पूरा पालन कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा की आपूर्ति उन क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच भरोसेमंद कदमकंपनी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अनिश्चितता के इस समय में वे देश के साथ मजबूती से खड़े हैं। रिलायंस हर संभव प्रयास कर रही है ताकि देश के लिए आवश्यक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और घरेलू बाजार में LPG आपूर्ति में कोई कमी न आए।

केंद्र सरकार के निर्देश पर देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन 10 फीसदी बढ़ाया

नई दिल्ली। घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस (एलपीजी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़ा दिया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी आपूर्ति में आई बाधा के बीच एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए देश की तेल रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे। उत्पादन बढ़ाने के बाद सभी रिफाइनरियां 100 फीसदी क्षमता पर काम कर रही हैं। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर पीएम ने की उच्च स्तरीय बैठकएलपीजी की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग का प्रतीक्षा समय बढ़ाकेंद्र सरकार के निर्देश के बाद उत्पादन बढ़ाने के इस कदम से संभावित आपूर्ति बाधित होने को लेकर उठ रही चिंताओं को कम करने में मदद मिली है। सरकार ने घरेलू एलपीजी के दुरुपयोग और अनियमितताओं को रोकने के लिए नए गैस सिलिंडर की बुकिंग के बीच प्रतीक्षा की अवधि भी 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की किल्लत पर मंत्रालय ने बनाई समितिवाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की अचानक किल्लत होने से होटल और रेस्तरां उद्योग में चिंता बढ़ने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक रेस्तरां, होटलों और अन्य उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति से संबंधित मांगों की समीक्षा के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है। एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को गैस आवंटन में मिलेगी प्राथमिकतापश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आयात प्रभावित होने के बीच सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया है कि अब घरेलू रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर उन इकाइयों को की जाएगी, जो इसका उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करती हैं। अभी तक संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और घरों में पाइप के जरिये पहुंचाई जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) ही ऐसे दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र थे जिन्हें कच्चे माल के रूप में घरेलू प्राकृतिक गैस मिलती थी। भारत में सालाना लगभग 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है, इसमें लगभग 87 फीसदी हिस्सा घरेलू रसोई गैस का है, जबकि बाकी का उपयोग होटल, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में होता है। देश की कुल एलपीजी जरूरत का करीब 62 प्रतिशत आयात से पूरा होता है। भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से एलपीजी आयात का 85 से 90 फीसदी हिस्सा मिलता है।

मदुरै एयरपोर्ट हुआ इंटरनेशनल, केंद्र ने बढ़ाई तमिलनाडु की ग्लोबल कनेक्टिविटी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया। मंत्रिमंडल के बयान में कहा गया कि मदुरै, जो मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है, का यह हवाई अड्डा दक्षिणी तमिलनाडु का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह न केवल पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मंत्रिमंडल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को गति मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री एवं व्यवसायों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। मदुरै हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप है, जिससे यह दक्षिण भारत में यात्रा और पर्यटन के लिए एक अहम केंद्र बन जाएगा। 2047 तक 350 हवाई अड्डों का लक्ष्य और विमानन क्षेत्र में नई दिशाकेंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत में वर्तमान में 164 हवाई अड्डे संचालित हैं और सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 200 और हवाई अड्डे जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती केवल हवाई अड्डे बनाने की नहीं, बल्कि “भारत में अधिक विमान कैसे लाए जाएं” की है। नायडू के अनुसार, विमान निर्माण प्रणाली को तैयार करके भारत नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अगला बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। यह प्रणाली न केवल अगले 10-20 वर्षों में बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमान निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में भी मदद करेगी। पिछले दस वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या, यात्री संख्या और विमान बेड़े में दोगुनी वृद्धि हुई है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नागरिक उड्डयन सुधारों का परिणाम बताया। विशेष रूप से उड़ान योजना ने देश में विमानन क्षेत्र की गति और पहुँच बढ़ाई है। नायडू ने यह भी कहा कि नागर विमानन मंत्रालय विमानन क्षेत्र में निवेश और निर्माण के लिए भारत के साथ साझेदारी करने वाले सभी लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल हवाई परिवहन सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विमानन उद्योग में रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे। मदुरै एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय दर्जे का महत्वमदुरै एयरपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा को नया impulso मिलेगा। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और पर्यटन उद्योग के लिए भी आर्थिक विकास का अवसर लेकर आएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के आने से मदुरै और आसपास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने देशभर में जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 5 मार्च 2026 तक कुल 25,02,217 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 2024-25 में इस पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि योजना के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह योजना 2024 में शुरू की गई थी और यह डिमांड-ड्रिवन योजना है। इसके तहत देश के सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन है, राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय लाभसरकार का अनुमान है कि अगर एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएँ, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही इन सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इस पहल से ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। 2025 के अंत तक योजना को लागू करने में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान सबसे आगे रहे हैं। ये राज्य सौर ऊर्जा के उत्पादन और घरों में सोलर सिस्टम के विस्तार में शीर्ष पर हैं। नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की प्रगतिमंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.61 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.16 गीगावाट लघु जल विद्युत और 50.91 गीगावाट वृहद जल विद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी शामिल है। सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह मिशन देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में हरित ऊर्जा समाधान के लिए भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

जल जीवन मिशन का विस्तार, केंद्र ने 8.69 लाख करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसके स्वरूप में बदलाव करने का प्रस्ताव मंजूर किया। अब यह मिशन केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक साफ़ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने पर जोर देगा। सरकार ने इस योजना का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपए कर दिया है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपए होगी, जो 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपए से 1.51 लाख करोड़ अधिक है। डिजिटल मैपिंग और ग्राम स्तर पर जवाबदेहीजल जीवन मिशन 2.0 के तहत राष्ट्रीय डिजिटल फ्रेमवर्क ‘सुजलम भारत’ लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत हर गांव को एक यूनिक ‘सुजल गांव’ या सर्विस एरिया आईडी दी जाएगी, जिससे पानी के स्रोत से लेकर घर तक की पूरी आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा। ग्राम पंचायत (जीपी) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को योजना के क्रियान्वयन और औपचारिक हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा, जिसे ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया कहा गया है। किसी भी ग्राम पंचायत को ‘हर घर जल’ घोषित करने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि गांव में पानी की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है। सरकार की योजना है कि हर साल ‘जल उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग मिलकर जल व्यवस्था की समीक्षा और रखरखाव करेंगे। यह समुदाय की भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा है। मिशन के असर और सामाजिक लाभसाल 2019 में मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों (करीब 17%) में नल से पानी की सुविधा थी। अब तक 12.56 करोड़ नए ग्रामीण घरों को नल का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में लगभग 15.80 करोड़ घरों (81.61%) में नल से जल कनेक्शन पहुंच चुका है। सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, योजना के कारण लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोज पानी लाने की मेहनत से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के मुताबिक, इससे महिलाओं के रोजाना श्रम में लगभग 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो रही है, और डायरिया से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% तक कमी संभव है, जिससे हर साल करीब 1.36 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। आईआईएम बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अध्ययन के अनुसार, मिशन के जरिए 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराया जाए और सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाए। इसे नागरिक-केंद्रित सेवा मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर ग्रामीण जल आपूर्ति ढांचे के दीर्घकालिक संचालन, रखरखाव और जल स्रोत संरक्षण के लिए समन्वित रणनीति भी लागू करेगी।