पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए

नई दिल्ली। इंश्योरेंस पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन बीच में उसे छोड़ना भारी पड़ सकता है। कई लोग आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताओं या गलत वित्तीय योजना के कारण पॉलिसी सरेंडर करने का फैसला कर लेते हैं, जबकि इसके दूरगामी नुकसान को पूरी तरह समझ नहीं पाते। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने पर बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम देती है उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहा जाता है। शुरुआती वर्षों में यह राशि अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से काफी कम होती है, क्योंकि पहले कुछ सालों में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कमीशन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है। सबसे बड़ा झटका यह होता है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत समाप्त हो जाता है। यानी किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो कोई बचत घटक होता ही नहीं, इसलिए उसे बीच में छोड़ने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलता। वहीं एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में कुछ सरेंडर वैल्यू मिल सकती है, लेकिन भविष्य के बोनस, गारंटीड रिटर्न और मैच्योरिटी लाभ खत्म हो जाते हैं। बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले की तुलना में कुछ बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम जमा किया गया हो। फिर भी, यह जरूरी नहीं कि नुकसान पूरी तरह टल जाए। पूरी तरह पॉलिसी बंद करने की बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प पर विचार किया जा सकता है, जिसमें आगे प्रीमियम देना बंद कर दिया जाता है, लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। इसके अलावा, कंपनियां 15–30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के तहत लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू (रिवाइवल) भी किया जा सकता है। इसलिए पॉलिसी सरेंडर करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, परिवार की सुरक्षा, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और वैकल्पिक विकल्पों का संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।
दीपिंदर गोयल का नया वेंचर Temple: एलीट एथलीट्स के लिए भर्ती की अनोखी शर्त

नई दिल्ली। जोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने अपने नए वेंचर Temple के लिए 12 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। यह स्टार्टअप न्यूरोटेक की दुनिया में कदम रख रहा है और एलीट एथलीट्स के लिए एक क्रांतिकारी ‘हेड-वॉर्न’ वियरेबल डिवाइस विकसित कर रहा है। यह डिवाइस नियर-इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दिमाग की गतिविधियों और ब्लड फ्लो को ट्रैक करेगा, जिससे एथलीट्स के प्रदर्शन और स्वास्थ्य को नए स्तर पर मापा जा सकेगा। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए 12 विशिष्ट इंजीनियरिंग और न्यूरोसाइंस पदों पर भर्ती की जानकारी साझा की। इन पदों पर सालाना 10 लाख से लेकर 45 लाख रुपये या उससे अधिक का पैकेज मिलने की संभावना है। शुरुआती स्तर के इंजीनियरों से लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिकों तक के लिए अवसर उपलब्ध हैं। हालांकि इस भर्ती की सबसे विवादित और चर्चित शर्त इसकी ‘फिटनेस अनिवार्यता’ है। चूंकि Temple का फोकस एथलीट्स के लिए उत्पाद विकसित करना है, इसलिए गोयल चाहते हैं कि उनकी टीम के सदस्य भी खुद एथलीट हों। इसके तहत पुरुष आवेदकों का बॉडी फैट प्रतिशत 16% से कम और महिलाओं का 26% से कम होना आवश्यक है। इस अनोखी शर्त ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से स्टार्टअप को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ वास्तविक एथलीट अनुभव भी मिलेगा। टीम के सदस्य खुद फिट और सक्रिय होने के कारण उत्पाद के डिजाइन और परीक्षण में बेहतर योगदान दे सकेंगे। हालांकि कुछ लोगों ने इस फिटनेस मानक को लेकर विवाद भी उठाया है और इसे प्रतिभा चयन में बाधा मान रहे हैं। Temple का यह प्रोजेक्ट एथलीट्स के प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर आधारित डेटा-संचालित समाधान प्रदान करेगा। इस वियरेबल डिवाइस से खिलाड़ियों के दिमाग और शरीर की गतिविधियों का वास्तविक समय ट्रैकिंग संभव होगी। दीपिंदर गोयल का यह नया प्रयोग स्टार्टअप और न्यूरोटेक जगत में काफी उम्मीदों और उत्सुकता के साथ देखा जा रहा है। Temple स्टार्टअप में 12 पदों पर खुली भर्ती ने तकनीकी और वैज्ञानिक समुदाय के बीच हलचल मचा दी है। एथलीट-केंद्रित फिटनेस शर्त ने इसे अलग और ध्यान आकर्षित करने वाला अवसर बना दिया है। साथ ही, यह दिखाता है कि भविष्य के स्टार्टअप न केवल तकनीकी दक्षता बल्कि वास्तविक अनुभव और स्वास्थ्य मानकों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.

नई दिल्ली। शुक्रवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange यानी MCX पर सोने के भाव 500 रुपये से अधिक बढ़ गए और चांदी के भाव में 9,000 रुपये से भी अधिक की उछाल दर्ज की गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 525 रुपये बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इसी तरह मई डिलीवरी वाली चांदी में 9,547 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद भाव 2,77,500 रुपये तक जा पहुंचा। हालांकि दिन के मध्य में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में तेजी की लहर मजबूत बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक बाजार में सॉलिडिटी की तलाश ने कीमती धातुओं में मांग बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हुए सोने-चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेष रूप से चांदी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखी गई है कि यह फिर से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता रहा तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। सोने में निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण एमसीएक्स पर सोने के कारोबार में भी जोरदार तेजी बनी रही। इस तेजी का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ज्वेलरी मार्केट और स्थानीय सोने-चांदी व्यापारियों के भाव में भी असर दिखा। व्यापारियों ने कहा कि खरीदारी में तेजी के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषकर त्योहार और शादी के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी आम लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक भावों में अचानक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें। हालांकि सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोना और चांदी हमेशा आकर्षक रहे हैं, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है। इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स के आंकड़े बताते हैं कि सोना और चांदी में तेजी की शुरुआत सुबह के शुरुआती कारोबार से ही हुई थी और निवेशकों ने इसी लहर का फायदा उठाया। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव लगातार बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी ने 2,77,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया। वैश्विक निवेशकों की नजरों में बढ़ते तनाव और टैरिफ अस्थिरता ने सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश का प्रमुख साधन बना दिया है। इसलिए घरेलू बाजार में भी तेजी की यह लहर मजबूत बनी हुई है। निवेशक और व्यापारी इस उछाल का लाभ उठाने की रणनीति बना रहे हैं।
NEW WHATSAPP RULE: बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

NEW WHATSAPP RULE: नई दिल्ली। अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी। SIM-Binding क्या है? जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा। 1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा। आम लोगों पर पड़ेगा ये असर अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।
SIP में हर महीने ₹5,000 जमा करें तो 20 साल में कितना फंड होगा तैयार, देखें कैलकुलेशन

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में उठा-पटक जारी है। हफ्ते के दूसरे दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दोपहर 02.30 बजे तक सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा और निफ्टी 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन पर भी पड़ता है। लेकिन भारतीय निवेशक इस भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में जमकर पैसा लगा रहे हैं। म्यूचुअल फंड्स एसआईपी में भी घरेलू निवेशक जमकर निवेश कर रहे हैं। यहां हम जानेंगे कि एसआईपी में हर महीने 5 000 रुपये का निवेश करें तो 20 साल में कितना फंड तैयार हो सकता है? 5 000 रुपये की SIP से 20 साल में कितना फंड होगा तैयार अगर आपको हर साल 12 प्रतिशत का अनुमानित रिटर्न मिलता है तो 5 000 रुपये की एसआईपी से 20 साल में लगभग 46 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है जिसमें आपके निवेश के 12 लाख रुपये और रिटर्न के लगभग 34 लाख रुपये शामिल हैं। ऐसे ही अगर आपको हर साल 15 प्रतिशत का अनुमानित रिटर्न मिलता है तो 5 000 रुपये की एसआईपी से 20 साल में लगभग 66.35 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है जिसमें आपके निवेश के 12 लाख रुपये और लगभग 54.35 लाख रुपये का अनुमानित रिटर्न शामिल है। एसआईपी में निवेश करने से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश शुरू करने से पहले आपको कुछ बेहद जरूरी बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। एसआईपी में कभी भी एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता है। एसआईपी से आपको कितना रिटर्न मिलेगा ये पूरी तरह से शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अगर बाजार में तेजी बनी रहती है तो आपको बेहतर रिटर्न मिलेगा। इसी तरह अगर बाजार में गिरावट चलती है तो आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म में नुकसान का जोखिम काफी कम हो जाता है। एसआईपी से आपको जो रिटर्न मिलता है उस पर आपको कैपिटल गेन्स टैक्स भी चुकाना होता है।
Gold-Silver Price: हफ्तेभर में 70500 रुपये महंगे हुए सोने की आज गिरी कीमत, जानें अपने शहरों में 24 कैरेट का लेटेस्ट भाव

नई दिल्ली । Gold-Silver Price Today: सोने की कीमतों में बीते लगभग 7 दिनों से तेजी देखी जा रही थी जिस पर आज ब्रेक लगा है. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिका में कारोबार को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही थी. आज गुरुवार 26 फरवरी को सोने-चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी जा रही है. आज कितनी है सोने की कीमत? आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,61,680 रुपये प्रति 10 ग्राम है जो कल के मुकाबले 210 रुपये कम है. कल 24 कैरेट सोने की कीमत 1,61,890 रुपये थी. वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 1,48,200 रुपये है. इसमें भी बुधवार के मुकाबले 200 रुपये की कमी आई है. एक दिन पहले 10 ग्राम के 22 कैरेट सोने की कीमत 1,48,400 रुपये थी. इसी तरह से 18 कैरेट सोने का भाव भी कल के 1,21,420 रुपये के मुकाबले 160 रुपये सस्ती होकर 1,21,260 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है. बुधवार को कितनी बढ़ी थी कीमत? गुडरिटर्न्स के मुताबिक बुधवार को भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 11 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 16,189 रुपये प्रति ग्राम हो गया. बीते सात दिनों में 24 कैरेट सोने का दाम करीब 705 रुपये प्रति ग्राम बढ़ा है यानी इसी दौरान 100 ग्राम का दाम करीब 70,500 रुपये बढ़ा है. इसी तरह से बुधवार को भारत में 22 कैरेट सोने का दाम 10 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 14,840 रुपये प्रति ग्राम हो गया और 18 कैरेट सोने का दाम 8 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 12,142 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया. आज कितनी है कीमत? मुंबई कोलकाता हैदराबाद केरल बेंगलुरु पुणे नागपुर भुवनेश्वर विजयवाड़ा में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,168 रुपये 22 कैरट सोने की कीमत 14,820 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,126 रुपये प्रति ग्राम है. दिल्ली नोएडा गाजियाबाद गुड़गांव अयोध्या चंडीगढ़ में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,183 रुपये 22 कैरट सोने की कीमत 14,835 रुपये और 18 कैरट सोने की कीमत 12,141 रुपये प्रति ग्राम है. चेन्नई कोयंबटू मदुरै सेलम जैसे कई शहरों में आज 24 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 16,277 रुपये 14,920 रुपये और 12,765 रुपये है .चांदी की कितनी है कीमत? आज 26 फरवरी को चांदी की भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. MCX Multi Commodity Exchange पर चांदी की कीमत में 1-1.2 परसेंट की कमी आई है. दिल्ली मुंबई कोलकाता जैसे देश के प्रमुख शहरों में आज चांदी का भाव 2,84,900 रुपये है जिसमें कल के मुकाबले प्रति किलो 100 रुपये तक की कमी आई है
INCOME TAX DEPARTMENT : करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

INCOME TAX DEPARTMENT : नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे। नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है। फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’ किन्हें देनी होगी जानकारी? अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है। कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी? एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो। परिवार को किराया देना अब भी मान्य नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा। जानकारी न देने पर क्या होगा? अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है। ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है। कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए। उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।
भारतीय शेयर बाजार में 700 अंकों की छलांग, IT और एफआईआई ने बढ़ाया रुख

नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी के साथ खुला और दिन के दौरान सेंसेक्स ने 82,957.91 अंक का उच्चतम स्तर छुआ। यह कल की क्लोजिंग 82,225.92 से करीब 732 अंक अधिक है। बाजार में तेजी के पीछे पांच मुख्य कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। 1. IT शेयरों में मजबूत खरीदारी:निफ्टी आईटी इंडेक्स खबर लिखे जाने तक 2.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों के काम करने के तरीके में बदलाव लाएगा और नए अवसर पैदा करेगा। हाल ही में एंथ्रोपिक और इंफोसिस के साथ साझेदारी ने इसका सकारात्मक असर दिखाया है। टीसीएस भी ओपनएआई के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। 2. वैश्विक संकेतों का सकारात्मक होना:अमेरिकी बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुए थे। इससे एशियाई बाजारों के साथ भारतीय बाजारों में भी तेजी का रुझान बना रहा। 3. डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत:डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 6 पैसे मजबूत होकर 90.89 पर पहुंचा। रुपया मजबूती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार और अधिक आकर्षक बन गया। 4. विदेशी निवेशकों की खरीदारी:कल की बड़ी गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सिर्फ 102.53 करोड़ रुपए की बिकवाली की। इससे पहले सोमवार को एफआईआई ने कैश मार्केट में 3,483.70 करोड़ रुपए की खरीदारी की थी। यह संकेत है कि विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार के पक्ष में है। 5. सकारात्मक बाजार धारणा और निवेशकों का भरोसा:एफआईआई की खरीदारी और वैश्विक संकेतों से बाजार में निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली।इन पांच कारणों के चलते भारतीय शेयर बाजार बुधवार को मजबूती के साथ हरे निशान में खुला और कारोबार कर रहा है। निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है कि बाजार में लम्बे समय तक रुझान मजबूत बने रहने की संभावना है।
शेयर बाजार हरे निशान में खुला, आईटी और मिडकैप शेयरों में तेजी..

नई दिल्ली । मजबूत वैश्विक संकेतों से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार सकारात्मक रुख में खुला। सुबह 9:20 बजे सेंसेक्स 478 अंक या 0.58 प्रतिशत बढ़कर 82,751 और निफ्टी 147 अंक या 0.58 प्रतिशत मजबूत होकर 25,570 पर कारोबार कर रहे थे। शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों ने तेजी में मुख्य भूमिका निभाई और निफ्टी आईटी सूचकांक शीर्ष गेनर रहा। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी एनर्जी के सूचकांक भी हरे निशान में थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 235 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,307 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 98 अंक या 0.59 प्रतिशत मजबूत होकर 17,058 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, पावर ग्रिड, इंडिगो, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एलएंडटी, सन फार्मा, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बीईएल प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं, एसबीआई, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। वैश्विक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। शंघाई, टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, जकार्ता और सोल में कारोबार हरे निशान में था। अमेरिकी बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में तेजी का प्रमुख कारण एफआईआई की ओर से बिकवाली का कम होना है। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों एफआईआई ने केवल 102.53 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों डीआईआई ने 3,161.22 करोड़ रुपए की खरीदारी की। सोने और चांदी में भी तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक सोना 0.44 प्रतिशत की मजबूती के साथ 5,199 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 89 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
होली से पहले LPG उपभोक्ताओं को लग सकता है झटका… 1 मार्च को अपडेट होंगे रेट

नई दिल्ली। होली से पहले 1 मार्च को LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के रेट ( Price) अपडेट होंगे। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (Oil Marketing Companies) इस दिन नए रेट जारी करेंगी। पिछले 5 साल का ट्रेंड बताता है कि मार्च के महीने में घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट बढ़े ही हैं। कॉमरशियल सिलेंडर तो हर बार महंगा हुआ है, जबकि इस दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG cylinder) के रेट मार्च में जब भी बदले, उपभोक्ताओं को झटका ही लगा है। अभी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपये, कोलकाता में 879 रुपये, मुंबई में 852.50 रुपये और चेन्नई में 868.50 रुपये में मिल रहा है। आंकड़े इंडियन ऑयल की वेबसाइट से लिए गए हैं। इसके अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 1740.50 रुपये, कोलकाता में 1844.50 रुपये, मुंबई में 1692 और चेन्नई में 1899.50 रुपये में बिक रहा है। घरेलू सिलेंडर के रेट का मार्च ट्रेंडपिछले 5 साल में तीन बार ही मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले। दो बार 1 मार्च को और एक बार 22 मार्च को। एक मार्च 2023 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर 50 रुपये महंगा हो गया। 6 जुलाई 2022 के बाद रेट में बदलाव हुआ था और दिल्ली में यह 50 रुपये बढ़कर 1103 रुपये पर पहुंच गया। 14 किलो वाले इस सिलेंडर के दाम कोलकाता में 1129, मुंबई में 1102.50 और चेन्नई में 1118.50 रुपये पर पहुंच गए। जबकि, साल 2022 में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट में बदलाव 22 मार्च को हुआ। इस दिन भी 50 रुपये का इजाफा हुआ। रेट में बदलाव 6 अक्टूबर 2021 के बाद हुआ था। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 949.50 रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह कोलकाता में 976, मुंबई में 949.50 और चेन्नई में 965.50 रुपये का हो गया। साल 2021 का मार्च भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका ही दिया। 1 मार्च 2021 को घरेलू एलपीजी सिलेंड दिल्ली में 25 रुपये महंगा होकर 819, कोलकाता में 845.50, मुंबई में 819 और चेन्नई में 835 रुपये का हो गया। पिछले 5 साल से मार्च महीने में क्या रहा कॉमर्शियल सिलेंडर का ट्रेंडमार्च 2025 में बढ़े थे सिलेंडर के दामपिछले साल यानी 2025 में दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट में मामूली बढ़ोतरी हुई थी। एक फरवरी को 19 किलो वाला सिलेंडर यहां 1 फरवरी को 1797 रुपये में बिक रहा था, जो 1 मार्च 2025 को 6 रुपये बढ़कर 1803 रुपये का हो गया। कोलकाता में भी इतना ही महंगा होकर 1913, मुंबई में 1756 और चेन्नई मे 1965 रुपये का हो गया था। मार्च 2024 में दाम मामूली बढ़ेसाल 2024 में कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट में 26 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई। 1 मार्च 2024 को यह दिल्ली में 1795 और मुंबई में भी 26 रुपये बढ़कर 1749 रुपये का हो गया। जबकि, कोलकाता में 24 रुपये महंगा होकर 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1911 और चेन्नई में 24 रुपये ही बढ़कर 1961 रुपये का हो गया। 2023 के मार्च में 108 रुपये तक महंगा हुआ सिलेंडरसाल 2023 में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा। दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 105 रुपये महंगा होकर 2120, कोलकाता में 108 रुपये बढ़कर 2222 रुपये, मुंबई में 106 रुपये उछलकर 2072 रुपये और चेन्नई में 106 रुपये महंगा होकर 2268 रुपये पर पहुंच गए। 2022 के मार्च में 100 रुपये से अधिक का झटकासाल 2022 में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट दो बार बदले। 1 मार्च को और 22 मार्च को। एक फरवरी 2022 के रेट की तुलना में 1 मार्च को कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम दिल्ली में 105 रुपये उछलकर 2012 रुपये, कोलकाता में 108 रुपये महंगा होकर 2095 रुपये पर पहुंच गए। मुंबई और चेन्नई में भी नीला सिलेंडर 106-106 रुपये महंगा हो गया। मुंबई में यह 1963 और चेन्नई में 2146 रुपये पर पहुंच गया। 2021 के मार्च में 95 रुपये महंगा हुआ सिलेंडरमार्च महीने में झटका साल 2021 में भी लगा। 1 मार्च 2021 को दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 95 रुपये बढ़कर 1614 रुपये पर पहुंच गए। कोलकाता में 98 रुपये बढ़े और 1681.50 रुपये पर पहुंच गए। मुंबई और चेन्नई में 96-96 रुपये बढ़े और क्रमश: 1564 और 1731 रुपये पर पहुंच गए।