ITC शेयर का भविष्य: 300 रुपये के स्तर पर आया भाव, तेजी या मंदी?

नई दिल्ली। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में जनवरी महीने में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली और यह 20 फीसदी तक टूट गया। 1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू पर लागू हुए नए टैक्स के चलते शेयरों में कमजोरी आई और 2 फरवरी को यह ₹302 के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया कि अब ITC के शेयरों में और गिरावट आएगी या तेजी का दौर शुरू होगा। ब्रोकरेज और एक्सपर्ट का नजरियाघरेलू ब्रोकरेज फर्म ICICI Direct ने ITC के शेयरों पर एक साल के नजरिये से ₹350 का टारगेट प्राइस दिया है और ₹285 के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी की राय दी है। फर्म का कहना है कि बजट में ऐसा कोई एलान नहीं हुआ जो आईटीसी के बिजनेस को प्रभावित करे। सिगरेट और तंबाकू पर 55% टैक्स की घोषणा बजट से पहले की जा चुकी थी और अब इसका असर बाजार में पहले ही समाहित हो चुका है। इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा ने माना कि ITC के शेयरों ने निचला स्तर बना लिया है और अब तेजी की संभावना है। उनका कहना है कि लंबे समय में शेयर ₹400+ तक जा सकता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निकट अवधि में शेयर ₹325 तक जा सकता है और ₹306 रुपये पर मजबूत सपोर्ट नजर आता है। ITC शेयरों के लिए अहम स्तरटेक्निकल विश्लेषक जिगर एस पटेल के अनुसार ITC के शेयरों में निकट भविष्य में ₹325 तक तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं निचला स्तर यानी सपोर्ट ₹306 रुपये है। इस स्तर से नीचे गिरावट जोखिम भरा हो सकता है और निवेशकों को स्टॉप लॉस का ध्यान रखना चाहिए। ICICI Direct का मानना है कि 1 साल के नजरिये से ₹350 टारगेट तक पहुंचना संभव है और अंबरीश बलिगा का दीर्घकालिक टारगेट ₹400+ है। निवेशकों के लिए संकेतविशेषज्ञों के अनुसार ITC ने हाल ही में बॉटम बना लिया है। कम अवधि के निवेशक सपोर्ट और रेसिस्टेंस के स्तर पर निगरानी रखकर कदम उठा सकते हैं। लंबे समय के निवेशक बजट और टेक्स प्रावधानों के स्थिर होने की वजह से शेयर में मजबूती देख सकते हैं। बाजार में मंदी का डर कम हुआ है और तकनीकी संकेत तेजी की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। ITC का बिजनेस मॉडल एफएमसीजी सेक्टर में स्थिर है और टैक्स पहले ही शेयर मूल्य में समाहित हो चुका है। निवेशकों को चाहिए कि स्टॉप लॉस और टारगेट प्राइस के हिसाब से पोर्टफोलियो मैनेजमेंट करें और भावुक होकर फैसले न लें।
शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद

नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी दिखाई और दिन के अंत में मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर पहुंच गया। बाजार में इस तेजी का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने किया। सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी इन्फ्रा 2.26 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.04 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.04 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.88 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 1.87 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी आईटी 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57,667.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,523.35 के स्तर पर पहुंच गया।सेंसेक्स के 30 शेयरों में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक नुकसान में बंद हुए। एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है, हालांकि व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। उनका कहना है कि इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है और किसी भी तेजी का इस्तेमाल लीवरेज पोजीशन घटाने और शॉर्ट पोजीशन बनाने में करना चाहिए। निफ्टी के लिए 25,200 का स्तर रुकावट और 24,900 का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है। गौरतलब है कि मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी। सेंसेक्स 167 अंक की गिरावट के साथ खुला था और निफ्टी भी लाल निशान में था, लेकिन कुछ ही मिनटों में बाजार ने वापसी करते हुए हरे निशान में कारोबार शुरू कर दिया।
Gold-Silver Crash: चांदी फिर क्रैश… झटके में ₹16000 सस्ती, सोना भी 4000 रुपये फिसला

नई दिल्ली :सोना-चांदी की कीमतें क्रैश होने का सिलसिला जारी है. बजट के दिन भर-भराकर टूटने के बाद सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. एक ओर जहां 1 Kg Silver Price झटके में करीब 16,000 रुपये गिर गया, तो वहीं दूसरी ओर 10 Gram 24 Karat Gold का वायदा भाव एमसीएक्स पर 4000 रुपये से ज्यादा कम हो गया. इतना रह गया 1 किलो चांदी का भावचांदी की कीमतें बीते सप्ताह के गुरुवार को इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के पार निकलने के बाद से ही लगातार क्रैश हो रही हैं. रविवार को Budget 2026 वाले दिन करीब 9 फीसदी से ज्यादा टूटने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जब MCX पर कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, तो चांदी खुलते ही और भी सस्ती हो गई. बीते कारोबारी दिन सिल्वर प्राइस तगड़ी गिरावट और फिर रिकवरी के बाद अंत में 2,65,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और सोमवार को जैसे ही कारोबार ओपन हुआ, तो ये गिरकर 2,55,652 रुपये प्रति किलो पर आ गया और फिर इसके कुछ ही मिनटों बाद ये 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि चांदी वायदा 15,943 रुपये और सस्ती हो गई. अपने हाई से अब इतनी सस्ती Silverचांदी में जिस रफ्तार से बीते कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी, उससे तेज रफ्तार इसके फिसलने की है. बता दें कि पिछले गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते 4,20,048 रुपये के नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, लेकिन इस स्तर से अब तक Silver Price 1,70,335 रुपये कम हो चुका है. सोने का भी चांदी जैसा हालSilver Price Crash होने से साथ ही सोना भी धड़ाम नजर आ रहा है. बजट वाले दिन ये भी 13,000 रुपये तक टूट गया था, हालांकि फिर थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली थी. रविवार को ये 1,47,753 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था और सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही ये फिसलकर 1,43,321 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 4432 रुपये तक सस्ता हो गया. हाई से अब कितना सस्ता Goldसोने की कीमत ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते गुरुवार को अपना नया हाई लेवल छुआ था और तूफानी तेजी के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई थी. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Gold Rate बिखरता हुआ चला गया और अब तक ये 49,775 रुपये सस्ता मिल रहा है.
साल 2026-27 के बजट में बांग्लादेश को आधी मदद, भूटान को बड़ी राशि, चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत की विदेश सहायता नीति में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। बांग्लादेश के लिए आवंटित राशि इस बार आधी कर दी गई है। जबकि भूटान को पिछले वर्ष से अधिक मदद दी जाएगी। वहीं, ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए इस बार कोई फंड नहीं रखा गया। बांग्लादेश और पड़ोसी देशों को मदद इस वित्तीय वर्ष में बांग्लादेश को 60 करोड़ रुपये सहायता के रूप में आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 120 करोड़ रुपये थी। संशोधित अनुमान के अनुसार पिछली बार यह राशि 34.48 करोड़ रुपये रह गई थी। भूटान को सबसे अधिक मदद के रूप में 2,288 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। नेपाल को 800 करोड़ रुपये, जबकि मालदीव और मॉरीशस को 550-550 करोड़ रुपये की सहायता मिल रही है। चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड नहीं चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें भारत पिछले वर्षों से 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निवेश करता आया है, इस बार बजट में शामिल नहीं है। यह बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संपर्क के लिए अहम माना जाता है और ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस बार चाबहार को कोई आवंटन नहीं दिया गया।अमेरिका द्वारा पिछले वर्ष सितंबर में ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के तहत भारत को चाबहार परियोजना पर छह महीने की छूट दी गई थी, जो 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।विदेश मंत्रालय का बजट विदेश मंत्रालय के लिए 2026-27 के बजट में कुल 22,118 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो चालू वित्त वर्ष के 21,742 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान और 20,516 करोड़ रुपये के मूल अनुमान से अधिक है। विदेश साझेदारी विकास मद में कुल 6,997 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें करीब 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित हैं। इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्र, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़क और पुल जैसी बड़ी परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर सामुदायिक विकास कार्यों तक किया जाएगा। लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता 120 करोड़ रुपये तय की गई है।
CENTRAL BUDGET 2026: टैक्स शेयर घटा, लेकिन विकास की उम्मीद कायम: बजट 2026 में मध्य प्रदेश को कितना नुकसान और कहां से मिल सकती है राहत!

CENTRAL BUDGET 2026: मध्यप्रदेश। केंद्रीय बजट 2026 में मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को मिलने वाले करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा 7.86 प्रतिशत से घटाकर 7.34 प्रतिशत कर दिया है। इसके चलते प्रदेश को अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक हर साल औसतन 7500 करोड़ रुपये कम मिलने का अनुमान है। MAHARASHTRA DEPUTY CM: अजित पवार के निधन के चौथे दिन सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री इस कटौती का असर सिर्फ आने वाले वर्षों तक सीमित नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भी अनुमानों में संशोधन किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था, अब यह घटकर 1,09,348 करोड़ रुपये रह गया है। यानी इस साल ही प्रदेश को करीब 2314 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। टैक्स में कमी, लेकिन पूंजीगत खर्च से राहत की उम्मीद हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स हिस्सेदारी घटने के बावजूद बजट में किए गए कैपिटल एक्सपेंडिचर के प्रावधान मध्य प्रदेश के लिए राहत बन सकते हैं। केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में राज्य को इस बार करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलने की संभावना जताई जा रही है। GUNA BIKE ACCIDENT: ड्यूटी से लौटते समय सड़क हादसे में कंप्यूटर ऑपरेटर की मौत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपये की विशेष पूंजीगत सहायता का ऐलान किया गया है। इस श्रेणी में आने वाले मध्य प्रदेश के करीब 10 शहरों को इसका लाभ मिल सकता है। 10 शहरों के विकास को मिल सकता है 5000 करोड़ तक का फंड वित्तीय जानकारों के अनुसार, इस फंड से भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7000 करोड़ रुपये तक, जबकि अन्य शहरों को 5000 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। MP Weather Update: ग्वालियर में मौसम का बदला मिजाज, अगले 72 घंटे भारी; 20 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट इसके साथ ही देश में प्रस्तावित 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप में से एक भोपाल को मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। भोपाल के भौंरी क्षेत्र में राज्य सरकार पहले से ही एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है, जिसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप का रूप दिया जा सकता है। सिंहस्थ 2028 के लिए पैकेज नहीं मिला हालांकि बजट से कुछ उम्मीदें जगी हैं, लेकिन सिंहस्थ कुंभ 2028 के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश द्वारा मांगे गए 20,000 करोड़ रुपये के स्पेशल पैकेज को लेकर केंद्र सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। इसे राज्य के लिए एक बड़ी निराशा के रूप में देखा जा रहा है। RAPE CASE : बर्थडे पार्टी में डीजे की आड़ में नाबालिग से दुष्कर्म, 10 घंटे में आरोपी गिरफ्तार शहरी निकायों और सामाजिक योजनाओं पर फोकस बजट में शहरी विकास को लेकर भी अहम प्रावधान किए गए हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े नगर निगम अब अमृत बॉन्ड के जरिए 1000 करोड़ रुपये तक जुटा सकेंगे, जिस पर केंद्र से अतिरिक्त सहायता मिलेगी। इसके अलावा अमृत 2.0 योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 7022 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनका फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में कोलार और बैरागढ़ क्षेत्रों में नई सीवेज परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। GWALIOR ROBBER BRIDE : 2 लाख में शादी कर फरार हुई लुटेरी दुल्हन, तीन आरोपी गिरफ्तार महिला, किसान और छात्राओं के लिए घोषणाएं महिला सशक्तीकरण के लिए बजट में ‘शी-मार्ट’ योजना की घोषणा की गई है, जिससे मध्य प्रदेश की 16 लाख से अधिक महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं 75 लाख छोटे और सीमांत किसानों के लिए ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि मिशन और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की योजना है। शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने राज्य के 55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण के लिए सहायता देने का ऐलान किया है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी 52 जिला अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उद्योग से रोजगार की उम्मीद वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पीएम मित्र पार्क को लेकर भी बजट में समर्थन दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, इससे राज्य में करीब 3 लाख लोगों को रोजगार और 6 लाख किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
Gen Z दफ्तरों की जटिल अंग्रेजी से परेशान…. आसान भाषा अपनाने की उठी मांग

नई दिल्ली। ऑफिस (Office) में इस्तेमाल होने वाली भारी-भरकम अंग्रेजी (Heavy English.) आज की युवा पीढ़ी (Young Generation-Gen Z) के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। जेन-जी (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) का कहना है कि ऐसे शब्द न सिर्फ भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि कामकाजी संवाद को भी मुश्किल बना देते हैं। इसी को लेकर अमेरिका के भाषा शिक्षण प्लेटफॉर्म ‘प्रेपली’ ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब मैनेजर मीटिंग में यह कहते हैं कि “इस प्रोजेक्ट के लिए सिनर्जी चाहिए” या “क्या आपके पास इसकी बैंडविड्थ है”, तो कई युवा कर्मचारियों को इन शब्दों का सही मतलब समझने में दिक्कत होती है। भाषा विशेषज्ञों का कहना है कि हर महीने हजारों युवा इन कॉर्पोरेट शब्दों के अर्थ जानने के लिए गूगल का सहारा लेते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि ‘Synergy’ सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला ऑफिस शब्द है, जिसे हर महीने करीब 40,500 बार सर्च किया जाता है। इसके बाद ‘Paradigm’ (लगभग 27,000 सर्च) और ‘Best Practice’ जैसे शब्द सूची में शामिल हैं। युवाओं को कैसी भाषा चाहिए?आज की पीढ़ी ऐसी भाषा को प्राथमिकता देती है जो साफ, सरल और सीधी हो। उनके अनुसार, दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक अंग्रेजी मुहावरे अक्सर दिखावटी लगते हैं और बातचीत को जटिल बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी कर्मचारी को काम समझने के लिए शब्दों का मतलब अलग से ढूंढना पड़े, तो यह संचार की कमजोरी को दर्शाता है। डिजिटल दौर से मेल नहीं खा रही कॉर्पोरेट भाषाजेन-जी का कहना है कि पारंपरिक कॉर्पोरेट अंग्रेजी अब डिजिटल युग की बातचीत से तालमेल नहीं बैठा पा रही है। वे चाहते हैं कि दफ्तरों की भाषा भी रोजमर्रा की बातचीत जैसी स्वाभाविक हो। यह बदलाव सिर्फ कार्यस्थल तक सीमित नहीं है—निजी जीवन में भी पुराने और भारी शब्दों की जगह आसान भाषा लेती जा रही है। भाषा विशेषज्ञों के अनुसार, हर पीढ़ी अपने समय के अनुसार भाषा को ढालती है और जेन-जी के लिए स्पष्टता और सादगी सबसे अहम है। जैसे-जैसे इस पीढ़ी की भागीदारी कार्यक्षेत्र में बढ़ रही है, वैसे-वैसे दफ्तरों में भी संवाद का तरीका बदल रहा है। कठिन शब्दों की जगह आसान विकल्पSynergy → TeamworkBandwidth → Availability (समय/उपलब्धता)Circle Back → दोबारा बात करना युवाओं का मानना है कि इस तरह की सरल भाषा अपनाने से न सिर्फ काम आसान होगा, बल्कि संवाद भी ज्यादा प्रभावी बन सकेगा।
Bihar: केन्द्रीय बजट में बड़ी सौगात… पटना में गंगा तट पर 300 करोड़ की लागत से बनेगा शिप रिपेयर सेंटर

पटना। पटना (Patna) में गंगा नदी (River Ganges) के किनारे दीघा क्षेत्र (Digha area) में 300 करोड़ रुपये की लागत से एक जहाज मरम्मत केंद्र (Ship Repair Center) स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय बजट (Union Budget) में इसकी घोषणा के बाद इसका मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए दीघा में कुर्जी के सामने गंगा किनारे पांच एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। केंद्र बनने के बाद जलमार्ग से माल ढुलाई और पर्यटन उद्देश्यों के लिए चलने वाले जहाजों की संख्या बढ़ेगी और परिवहन लागत में कमी आएगी। दूर-दराज से भी जहाज पहुंचेंगेवर्तमान में जहाजों की मरम्मत के लिए उन्हें कोलकाता या वाराणसी ले जाना पड़ता है। पटना में सुविधा उपलब्ध होने के बाद अब स्थानीय जहाजों के साथ-साथ दूरदराज से आने वाले जहाजों की मरम्मत भी यहीं की जाएगी। इससे कोलकाता या वाराणसी तक जहाज भेजने और वापस लाने में होने वाले हजारों रुपये के परिवहन खर्च में बचत होगी। साथ ही, केंद्र के खुलने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। एक बार में चार जहाज की मरम्मतइस नए केंद्र में एक बार में चार जहाजों की मरम्मत की सुविधा होगी। इसके लिए लिफ्ट सिस्टम लगाया जाएगा। जहाज को लिफ्ट से गंगा नदी से उठाकर खुले स्थान पर रखा जाएगा, फिर मरम्मत की जाएगी और कार्य पूरा होने के बाद उसे पुनः पानी में स्थापित किया जाएगा।रोजगार और परिचालन के नए अवसरवर्तमान में गंगा में लगभग 50-60 छोटे और बड़े जहाज चलते हैं, जिनका परिचालन बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और बंगाल तक होता है। पटना में मरम्मत केंद्र की कमी के कारण सरकारी विभाग और निजी लोग जहाज संचालन में कम रुचि दिखाते थे। केंद्र खुलने के बाद परिवहन और पर्यटन विभाग जहाज परिचालन बढ़ा सकते हैं और निजी कंपनियां भी माल ढुलाई और पर्यटन के लिए जहाज संचालन कर सकती हैं।
यूपीआई लेन-देन जनवरी महीने में 28.33 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली। देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) (Unified Payments Interface – UPI) के जरिए होने वाला लेन-देन (Translations) जनवरी में 28.33 लाख करोड़ रुपये के मूल्य और 21.70 अरब की संख्या के साथ रिकॉर्ड स्तर (Record level.) पर पहुंच गया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से रविवार को जारी की गई आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। एनपीसीआई के मुताबिक दिसंबर 2025 में यूपीआई के जरिए लेन-देन का मूल्य 27.97 लाख करोड़ रुपये रहा था। मासिक आधार पर लेन-देन के मूल्य में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में औसत दैनिक लेनदेन 70 करोड़ रहा जिसका औसत मूल्य 91,403 करोड़ रुपये था। वर्ल्डलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमेश नरसिम्हन ने में कहा कि यूपीआई की वृद्धि की गति लगातार मजबूत हो रही है। केवल जनवरी में भारतीयों ने 28.33 लाख करोड़ रुपये के 21.7 अरब यूपीआई लेनदेन किए, जो दिसंबर की तुलना में ज्यादा है, जो सालाना आधार पर 28 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्शाता है।
सकल जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली। अर्थव्यस्था (Economy) के मोर्चे पर अच्छी खबर है। सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह (Gross Goods and Services Tax (GST) Revenue Collection) जनवरी महीने में आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। जीएसटी महानिदेशालय ने रविवार को जारी आंकड़ों में बताया कि जनवरी में शुद्ध माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह में 7.6 फीसदी की वृद्धि हुई और यह करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, कुल ‘रिफंड’ में 3.1 फीसदी की गिरावट आई, यह 22,665 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में घरेलू लेन-देन से सकल कर संग्रह 4.8 फीसदी बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात राजस्व 10.1 फीसदी बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये रहा। वहीं, इस दौरान तंबाकू उत्पादों से उपकर संग्रह जनवरी में 5,768 करोड़ रुपये रहा। जनवरी, 2025 में यह 13,009 करोड़ रुपये रहा था, जब कार तथा तंबाकू उत्पादों जैसे विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता था। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी थीं, जिससे सामान सस्ता हो गया। साथ ही, पहले की तरह विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर लगने वाले उपकर के बजाय अब केवल तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर ही क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह पर असर पड़ा है।
आयकर स्लैब में बदलाव नहीं, कैंसर की 17 दवाइयां सीमा शुल्क मुक्त, 3 आयुर्वेदिक एम्स, बनेंगे सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने रविवार को लोकसभा (Lok Sabha) में केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) पेश किया। नौवीं बार बजट पेश करते हुए वह संसद में 85 मिनट बोलीं, लेकिन आम आदमी के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया। हालांकि, आयकर दाखिल करने में सहूलियत, 7 रेलवे प्रोजेक्ट और तीन नए आयुर्वेदिक एम्स का प्रस्ताव बजट भाषण में किया है। वित्त मंत्री लोकसभा में तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ी पहनकर पहुंचीं जरूर, लेकिन साल 2026 होने वाले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी चुनाव पर सीधा असर डालने वाली घोषणाएं नहीं कीं। इसके साथ ही बजट भाषण में कोई सीधा चुनावी ऐलान भी नहीं हुआ है।ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने जियो-पॉलिटिक्स और चुनौतियों की बात कही और देश का रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया। इस तरह रक्षा बजट में कुल 15.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रक्षा बजट की खास बात ये है कि हथियार खरीदी और सेना के आधुनिकीकरण पर पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 2.19 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये पूंजीगत खर्च में सीधे 22 फीसदी की बढ़ोतरी है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “मरीजों, खासकर कैंसर से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए मैं 17 दवाओं पर बुनियादी सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव करती हूं। सीतारमण ने कहा कि मैं दवाओं, मेडिसिन और खास मेडिकल मकसद के लिए इस्तेमाल होने वाले खाने के व्यक्तिगत आयात पर आयात शुल्क से छूट देने के मकसद से 7 और दुर्लभ बीमारियों को जोड़ने का भी प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने कहा, “मैं एक खास वन-टाइम उपाय के तौर पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में योग्य विनिर्माण इकाइयां को घरेलू टैरिफ एरिया में रियायती ड्यूटी दरों पर बिक्री करने की सुविधा देने का प्रस्ताव करती हूं। वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक तय अनुपात तक सीमित होगी।” वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लोकसभा में पेश करते हुए अपने बजट भाषण में कहा, “रक्षा क्षेत्र की यूनिट्स द्वारा मेंटेनेंस, रिपेयर या ओवरऑल जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले एयरक्राफ्ट के पार्ट्स बनाने के लिए इंपोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव है।” सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा, “मैं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम, जिसे एलआरएस के नाम से जाना जाता है, के तहत शिक्षा और मेडिकल मकसद से टीसीएस दर को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी करने का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सीतारमण ने कहा, “…सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले कर्ज का अनुपात जीडीपी का 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है।” सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मैं बैटरी के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर दी गई बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स तक बढ़ाने का प्रस्ताव करती हूं। उन्होंने कहा कि मैं सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट के इंपोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने बजट भाषण में कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 में मैं सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ पैसेंजर सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए हम शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाएंगे, जिसमें मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी, वाराणसी से सिलीगुड़ी शमिल है।” सीतारमण ने कहा, “भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए मैं राज्यों को देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद करने के लिए एक योजना का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “नारियल उत्पादन में कॉम्पिटिशन को और बढ़ाने के लिए मैं एक नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव करती हूं, ताकि अलग-अलग तरीकों से उत्पादन बढ़ाया जा सके और उत्पादकता बेहतर हो सके। इसमें मुख्य नारियल उगाने वाले राज्यों में बेकार पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारतीय काजू और कोको के लिए एक खास प्रोग्राम का प्रस्ताव है, ताकि भारत कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन और प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बन सके, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड में बदला जा सके।” केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा, “…मैं भविष्य के चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड बनाने का प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “…2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू की गई थी। अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव देते हैं।” आधारभूत संरचना पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “…हम 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों, यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी रखेंगे।” सीतारमण ने कहा, “…हाई-वैल्यू, टेक्नोलॉजी-एडवांस्ड सीआईई की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट को बेहतर बनाने की एक योजना शुरू की जाएगी। इसमें आग बुझाने के उपकरण से लेकर लिफ्ट और टनल बोरिंग मशीन तक शामिल हो सकते हैं।” केंद्रीय वित्त मंत्री कहा, “…मैं चुनौती मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं। मैं खादी और हथकरघा को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने कहा, “पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए, मैं पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव करती हूं, अगले 5 सालों में 20 नए जलमार्ग चालू किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वॉटरवे 5 से होगी, जो तालचेर और अंगुल के खनिज-समृद्ध इलाकों