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डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

नई दिल्ली । देश में डिजिटल खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच एक नया बदलाव देखने को मिला है, जहां स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष मार्केटप्लेस की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत में बने उत्पादों को एक संगठित डिजिटल मंच प्रदान करना है, ताकि छोटे कारीगरों, किसानों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जा सके। इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता अब बिना किसी मध्यस्थ के सीधे उन लोगों से खरीदारी कर सकेंगे, जो अपने हाथों से या स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करते हैं। इसमें रोजमर्रा की जरूरत के सामान से लेकर हस्तशिल्प, कपड़े, कृषि उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और कई अन्य श्रेणियां शामिल की गई हैं। इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी को भी कम करता है। लंबे समय से यह समस्या देखी जा रही थी कि छोटे उत्पादक बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाते थे, जिससे उनकी आय सीमित रह जाती थी। नए प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सीधे उत्पादक और ग्राहक के बीच संबंध स्थापित करता है। इससे न केवल कीमतों में पारदर्शिता आती है, बल्कि उत्पादकों को उनके काम का उचित मूल्य भी मिल पाता है। यह व्यवस्था छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है। इस प्रणाली से जुड़ने वाले कारीगरों और किसान समूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ग्रामीण भारत भी अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले जहां स्थानीय उत्पाद केवल सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंच पाते थे, अब वे देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य में केवल एक खरीदारी मंच तक सीमित न रहे, बल्कि एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो सके। इसमें कई प्रकार की सेवाओं को जोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से भारत की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। छोटे उद्योगों को डिजिटल बाजार मिलने से उनकी पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। कुल मिलाकर, यह नया डिजिटल मार्केटप्लेस केवल एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादन को सम्मान और पहचान देने का एक प्रयास है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय उत्पादों को न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान दिला सकती है।

EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने निजी क्षेत्र के प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। नए नियमों के तहत अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को मनमानी ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। यह कदम कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। ब्याज दर पर सख्त लिमिट लागूEPFO के नए नियमों के अनुसार अब कोई भी प्राइवेट या छूट प्राप्त PF ट्रस्ट EPFO द्वारा तय की गई सालाना ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत तक ही ज्यादा ब्याज दे सकेगा। इससे पहले कुछ कंपनियां अधिक ब्याज दरों का वादा कर कर्मचारियों को आकर्षित कर रही थीं, जिससे भविष्य में वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका थी। ऑडिट सिस्टम में बड़ा बदलावEPFO ने अब सभी ट्रस्ट्स के लिए हर साल अनिवार्य ऑडिट को खत्म कर दिया है। इसकी जगह अब रिस्क बेस्ड ऑडिट सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि केवल उन्हीं कंपनियों का ऑडिट होगा जहां नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी की संभावना होगी। इससे अनुपालन करने वाली कंपनियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा। कर्मचारियों की बचत पर फोकसदेश में हजारों कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं। EPFO ने स्पष्ट किया है कि इन ट्रस्ट्स को कर्मचारियों को कम से कम EPFO जैसी या उससे बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। साथ ही अगर कोई कंपनी अपना छूट प्राप्त दर्जा छोड़ती है, तो उसे सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी ताकि कर्मचारियों को किसी तरह का नुकसान न हो। क्यों जरूरी हुआ यह कदम?हाल के समय में कुछ प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा ज्यादा ब्याज दरों का लालच देकर निवेश आकर्षित करने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे भविष्य में फंड की स्थिरता पर सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए EPFO ने यह सख्त फैसला लिया है ताकि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रहे।

ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक

नई दिल्ली। ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्री लोअर बर्थ को सबसे आरामदायक मानते हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और लंबी दूरी के यात्री लोअर सीट को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन टिकट कन्फर्म होने के बाद भी कई बार अपर या मिडिल बर्थ मिल जाती है। अगर आप भी हर बार लोअर बर्थ चाहते हैं, तो IRCTC की टिकट बुकिंग के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। 1. Reservation Choice में जरूर चुनें Lower Berthटिकट बुक करते समय “Reservation Choice” सेक्शन में “Lower Berth” का विकल्प जरूर चुनें। इससे रेलवे का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम आपकी प्राथमिकता को रिकॉर्ड करता है और सीट अलॉटमेंट के दौरान उसे ध्यान में रखता है। हालांकि यह 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन संभावना काफी बढ़ जाती है। 2. जितनी जल्दी बुकिंग, उतने ज्यादा चांसलोअर बर्थ पाने का सबसे बड़ा नियम है  जल्दी टिकट बुक करना। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, लोअर बर्थ उपलब्धता कम होती जाती है। Tatkal या आखिरी समय की बुकिंग में अक्सर मिडिल और अपर बर्थ ही बचती हैं। 3. सीनियर सिटीजन कोटे का लें फायदाभारतीय रेलवे बुजुर्ग यात्रियों और 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ कोटा देता है। अगर बुकिंग के दौरान सही उम्र और विवरण भरे जाएं तो सिस्टम प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ अलॉट कर सकता है। 4. ज्यादा लोगों की बजाय छोटे ग्रुप में करें बुकिंगअगर आप एक साथ बहुत ज्यादा लोगों की टिकट बुक करते हैं, तो सिस्टम सभी को साथ सीट देने की कोशिश करता है। ऐसे में लोअर बर्थ मिलने की संभावना कम हो सकती है। कम यात्रियों के साथ अलग-अलग बुकिंग करने पर लोअर सीट मिलने के चांस बढ़ सकते हैं। 5. चार्ट बनने के बाद TTE से जरूर बात करेंकई बार अंतिम समय में यात्रियों के टिकट कैंसिल हो जाते हैं या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में चार्ट बनने के बाद TTE से विनम्रता से बात करने पर लोअर बर्थ मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में TTE सीट एडजस्ट करने में मदद कर सकते हैं। ध्यान रखें ये जरूरी बातरेलवे का सीट अलॉटमेंट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होता है, इसलिए हर बार लोअर बर्थ मिलना तय नहीं होता। लेकिन सही विकल्प, समय पर बुकिंग और रेलवे नियमों की जानकारी आपकी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकती है।

Hyundai Discount Offer: Creta पर 1 लाख से ज्यादा की छूट, Verna और i20 भी सस्ती

नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो Hyundai की ओर से आया यह ऑफर आपके लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है। कंपनी ने मई 2026 में अपनी कई लोकप्रिय कारों पर आकर्षक डिस्काउंट और एक्सचेंज बेनिफिट्स की घोषणा की है। इसमें SUV से लेकर हैचबैक और सेडान तक कई मॉडल शामिल हैं। सबसे ज्यादा फायदा Hyundai की पॉपुलर SUV Hyundai Creta पर मिल रहा है। इस पर ग्राहकों को करीब 1.05 लाख रुपये तक का लाभ दिया जा रहा है। इसमें कैश डिस्काउंट के साथ-साथ एक्सचेंज और स्क्रैपेज बोनस भी शामिल हैं। Creta पहले से ही बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और इस ऑफर के बाद इसकी डिमांड और बढ़ने की उम्मीद है। सेडान सेगमेंट में Hyundai Verna पर भी शानदार ऑफर दिया जा रहा है। इस कार पर करीब 55 हजार रुपये तक का फायदा मिल सकता है। स्टाइलिश डिजाइन और फीचर्स की वजह से यह कार फैमिली और यंग कस्टमर्स के बीच काफी पसंद की जाती है। हैचबैक सेगमेंट में Hyundai i20 पर लगभग 65 हजार रुपये तक की छूट दी जा रही है। वहीं Hyundai Grand i10 Nios पर करीब 80 हजार रुपये तक का लाभ मिल रहा है। ये दोनों मॉडल कम बजट में बेहतर माइलेज और फीचर्स के लिए जाने जाते हैं।कॉम्पैक्ट SUV Hyundai Exter पर भी लगभग 40 हजार रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। शहरों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह ऑफर ग्राहकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इन सभी ऑफर्स में कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बेनिफिट और लॉयल्टी ऑफर्स शामिल हैं। अगर ग्राहक अपनी पुरानी कार एक्सचेंज करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त फायदा भी मिल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी ऑफर्स सीमित समय के लिए हैं और मई 2026 तक ही लागू रहेंगे। अलग-अलग शहरों और डीलरशिप पर ऑफर की राशि में थोड़ा अंतर हो सकता है।

PPF नियम: मैच्योरिटी के बाद एक्सटेंशन नहीं कराया तो भी पैसा रहेगा सुरक्षित, जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली ।पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF लंबे समय से भारत की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय बचत योजनाओं में से एक माना जाता है। सुरक्षित निवेश, निश्चित रिटर्न और टैक्स छूट जैसे फायदे इसे आम निवेशकों के बीच खास बनाते हैं। इस योजना की मूल अवधि 15 साल होती है, जिसके बाद निवेशक के पास अपने खाते को लेकर कुछ विकल्प होते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर मैच्योरिटी के बाद एक्सटेंशन का फॉर्म समय पर जमा करना भूल जाएं, तो क्या उनका पैसा खतरे में पड़ सकता है? असल में, PPF में निवेशक के लिए मैच्योरिटी के बाद तीन मुख्य विकल्प होते हैं। पहला विकल्प होता है कि पूरा पैसा निकालकर खाता बंद कर दिया जाए। दूसरा विकल्प यह होता है कि खाते को आगे बढ़ाकर उसमें नया निवेश जारी रखा जाए। तीसरा विकल्प यह होता है कि खाते को चालू रखा जाए लेकिन उसमें कोई नया योगदान न किया जाए। अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी के बाद खाते को आगे बढ़ाना चाहता है और उसमें नियमित निवेश भी जारी रखना चाहता है, तो इसके लिए उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में जरूरी फॉर्म जमा करना होता है। लेकिन यदि कोई निवेशक यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं करता, तो घबराने की जरूरत नहीं होती। ऐसी स्थिति में PPF खाता अपने आप 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ता रहता है। यानी खाता बंद नहीं होता और निवेशक का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों की लंबी अवधि की बचत सुरक्षित बनी रहे, भले ही वे समय पर औपचारिकता पूरी न कर पाएं। हालांकि, इस ऑटो एक्सटेंशन की स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह होता है कि निवेशक नए योगदान नहीं कर सकता। यानी खाते में पहले से जमा राशि पर ही ब्याज मिलता रहता है, लेकिन अतिरिक्त निवेश की अनुमति नहीं होती। साथ ही, निवेशक को हर वित्तीय वर्ष में केवल एक बार आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर अपनी बचत का उपयोग कर सकता है। PPF पर मिलने वाला ब्याज सरकार द्वारा तय किया जाता है और यह समय-समय पर बदल सकता है। खास बात यह है कि एक्सटेंशन की स्थिति में भी यह ब्याज नियमित रूप से मिलता रहता है, जिससे निवेश की वृद्धि जारी रहती है। यही कारण है कि PPF को लंबी अवधि की सुरक्षित और स्थिर निवेश योजना माना जाता है। निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति भविष्य में नियमित रूप से निवेश जारी रखना चाहता है, तो उसे समय पर एक्सटेंशन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इससे वह नए योगदान का लाभ भी उठा सकता है और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिल सकता है।

सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार गिरावट, ज्वेलरी स्टॉक्स में मचा हड़कंप, कई कंपनियों के शेयर टूटे

नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही, जहां सोमवार को कारोबार की शुरुआत से ही भारी गिरावट का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स दबाव में रहे और पूरे दिन निवेशकों की चिंता बढ़ती रही। खासकर ज्वेलरी सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जहां कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही टाइटन के शेयर में गिरावट देखने को मिली और कुछ ही समय में इसमें लगभग 7 प्रतिशत तक की कमी आ गई। इसी तरह ज्वेलरी सेक्टर की अन्य कंपनियां भी दबाव में रहीं और निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी। कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसे स्टॉक्स में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जिससे पूरे सेक्टर में हड़कंप मच गया। इस गिरावट का असर केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बाजार पर इसका दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी बड़े नुकसान के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में इस अचानक कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और कई ट्रेडर्स सतर्क हो गए। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार की स्थिति को कमजोर किया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बना हुआ है। ज्वेलरी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का एक कारण निवेशकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया भी माना जा रहा है। सोने की मांग और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े संकेतों ने इस सेक्टर को सीधे प्रभावित किया, जिससे अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली। कुल मिलाकर, आज का दिन शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ, जहां ज्वेलरी स्टॉक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक संकेत और घरेलू बाजार की स्थिति मिलकर आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।

भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

नई दिल्ली ।सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसकी ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने भारत की मजबूती, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर ने बार-बार कठिन दौर और आक्रमणों के बावजूद खुद को पुनः स्थापित किया, उसी तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक सशक्त होकर उभरा है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सदियों के संघर्ष और कई बार हुए हमलों के बाद भी इस मंदिर का अस्तित्व और उसकी पुनर्स्थापना यह दर्शाती है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें कितनी मजबूत हैं। Piyush Goyal ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश के लिए केवल धार्मिक महत्व की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बना। यह वह समय था जब देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने और अपनी विरासत पर गर्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। उन्होंने भारत की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उनके अनुसार भारत की खासियत यह है कि यहां आधुनिकता और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर देश तकनीक, उद्योग और आर्थिक विकास में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को भी मजबूती से संजोए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन हर कठिन परिस्थिति के बाद देश ने नई ऊर्जा के साथ वापसी की है। यही क्षमता भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। उनके अनुसार भारत की सभ्यता और संस्कृति ने हमेशा लोगों को जोड़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। अपने विचारों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों, विरासत और आत्मविश्वास से तय होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का आधार उसकी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत ही बनी रहेगी, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी

नई दिल्ली । एक बड़े उद्योग सम्मेलन के दौरान अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के भविष्य को लेकर अपनी रणनीति और विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि समूह ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है जो आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल और स्वच्छ विकास की मजबूत नींव साबित होगा। उनके मुताबिक, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीकी ढांचे में किया जा रहा निवेश भारत को नई दिशा देने वाला है। उन्होंने बताया कि गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा पहले ही शुरू किया जा चुका है और इसे भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है। उनका कहना था कि आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा देश की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल होगी और भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गौतम अदाणी ने कहा कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन और हरित ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है। उनका मानना है कि भविष्य में वही देश सबसे मजबूत होंगे जो ऊर्जा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन पाएंगे। इसी सोच के साथ समूह लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने डेटा सेंटर को भी भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर को देखते हुए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसी दिशा में देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े डेटा सेंटर कैंपस तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे डिजिटल क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का भविष्य केवल मशीनों और सर्वर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें लाखों युवाओं की भागीदारी होगी। इंजीनियर, तकनीशियन, ऑपरेटर और स्किल्ड प्रोफेशनल्स इस बदलाव की असली ताकत बनेंगे। इसी वजह से समूह कौशल विकास और नई तकनीकों से जुड़ी ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। सामाजिक विकास को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य तभी मजबूत होगा जब तकनीकी विकास के साथ समाज का हर वर्ग आगे बढ़े। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा ऐसी जगहों पर निर्माण किया जहां पहले संभावनाएं बेहद कम थीं। उनका मानना है कि चुनौतियों के बीच ही सबसे बड़े अवसर छिपे होते हैं और भविष्य उन्हीं का होता है जो नई सोच और बड़े विजन के साथ आगे बढ़ते हैं।

बाजार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव हावी, निफ्टी टूटा 24000 का स्तर, चौतरफा बिकवाली से निवेशक चिंतित

नई दिल्ली । सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुई, जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत ही लाल निशान में हुई और शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसल गए। निफ्टी ने 24000 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़ते हुए 23900 के आसपास कारोबार शुरू किया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। सुबह के सत्र में सेंसेक्स भी भारी गिरावट के साथ खुला और करीब 900 अंकों से अधिक टूट गया। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई, जिसका असर सीधे इक्विटी बाजार पर पड़ा। बाजार में हर तरफ बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और किसी भी सेक्टर में मजबूती टिक नहीं पाई। कारोबार के दौरान लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और मीडिया सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में भारी बिकवाली के कारण बाजार की गिरावट और गहरी हो गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कमजोरी व्यापक स्तर पर फैली हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। आमतौर पर जब बड़े शेयरों में दबाव होता है तो छोटे शेयर कुछ हद तक स्थिर रहते हैं, लेकिन इस बार सभी वर्गों में समान रूप से कमजोरी रही। इससे यह संकेत मिला कि बाजार में विश्वास की कमी गहराती जा रही है और निवेशक फिलहाल सुरक्षित रुख अपना रहे हैं। वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा, लेकिन एशियाई बाजारों के कई हिस्सों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और राजनीतिक अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई की आशंका भी बढ़ गई है। इसी कारण निवेशकों ने इक्विटी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े देशों के बीच जारी तनाव माना जा रहा है, जहां कूटनीतिक बातचीत में अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। शांति प्रस्तावों पर सहमति न बनने और रणनीतिक मुद्दों पर टकराव के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि जब तक वैश्विक तनाव में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निफ्टी के लिए 24000 का स्तर अब मजबूत प्रतिरोध बन चुका है, जबकि नीचे की ओर दबाव जारी रहने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों के लिए फिलहाल यह समय सावधानी और सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा को तेजी से बदल रहे हैं।

गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..

नई दिल्ली ।  वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर एक बार फिर कमोडिटी बाजार में साफ दिखाई दिया है। सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों की कीमतों ने निवेशकों को मिश्रित संकेत दिए, जहां एक ओर सोना दबाव में रहा तो दूसरी ओर चांदी में हल्की मजबूती देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में Gold की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और इसके बाद पूरे सत्र में कीमतें उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में घूमती रहीं। बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी के कारण निवेशक सतर्क नजर आए और बड़ी खरीदारी से बचते दिखे। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में यह दबाव मुख्य रूप से वैश्विक घटनाक्रमों और निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता के चलते सुरक्षित निवेश की मांग तो बनी हुई है, लेकिन साथ ही अनिश्चितता ने बाजार को अस्थिर भी कर दिया है, जिससे कीमतों में स्थिरता नहीं बन पा रही है। इसके विपरीत Silver ने शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती दिखाई। चांदी की कीमतों में दिनभर सकारात्मक रुझान बना रहा, हालांकि इसमें तेज उछाल नहीं देखा गया। सीमित बढ़त के बावजूद निवेशकों की रुचि बनी रही और खरीदारी का माहौल थोड़ा बेहतर नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं का रुख समान रूप से अस्थिर रहा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि सोने और चांदी दोनों में स्पष्ट ट्रेंड के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में कमोडिटी बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर हो गया है। किसी भी बड़े राजनीतिक या आर्थिक संकेत का सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विभिन्न देशों के बीच जारी मतभेद और कूटनीतिक अस्थिरता का असर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग पर पड़ रहा है, लेकिन साथ ही बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं हो पा रही है। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी का बाजार संतुलन की तलाश में नजर आ रहा है। दोनों धातुएं सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं और निवेशक फिलहाल स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही इस बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।