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पैन कार्ड बनवाने और अपडेट करने के नियम बदले 1 अप्रैल से लागू होंगे नए कड़े प्रावधान

नई दिल्ली । देश में वित्तीय लेनदेन और पहचान से जुड़े सबसे अहम दस्तावेजों में से एक पैन कार्ड अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। 1 अप्रैल 2026 से पैन कार्ड बनवाने और उसे अपडेट कराने के नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन लागू होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। अब तक जहां पैन कार्ड बनवाना काफी आसान प्रक्रिया मानी जाती थी वहीं आने वाले समय में यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और दस्तावेज आधारित हो जाएगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत आधार कार्ड के जरिए पैन कार्ड बनवाना बेहद सरल था। कई लोग सिर्फ आधार नंबर के आधार पर ही अपना पैन कार्ड बनवा लेते थे लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह सुविधा सीमित हो जाएगी। अब केवल आधार कार्ड के भरोसे पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा और आवेदकों को अपनी पहचान और जन्म से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण देने होंगे। नए नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 के बाद अगर कोई व्यक्ति पैन कार्ड के लिए आवेदन करता है तो उसे आधार कार्ड के अलावा अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे। इनमें वोटर आईडी कार्ड जन्म प्रमाण पत्र ड्राइविंग लाइसेंस पासपोर्ट और हाई स्कूल यानी 10वीं कक्षा की मार्कशीट या सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है ताकि किसी भी तरह की गलत जानकारी या फर्जीवाड़े की संभावना को कम किया जा सके। इतना ही नहीं नाम से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नए प्रावधान के अनुसार पैन कार्ड पर वही नाम प्रिंट होगा जो आधार कार्ड में दर्ज होगा। यानी अगर आपके आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग गलत है या नाम में कोई त्रुटि है तो उसे पहले ठीक करवाना जरूरी होगा। अन्यथा वही गलती आपके पैन कार्ड में भी दिखाई देगी जिससे भविष्य में वित्तीय लेनदेन या दस्तावेज सत्यापन के दौरान परेशानी हो सकती है। फॉर्म से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अभी तक जिन फॉर्म्स के जरिए पैन कार्ड बनवाया या अपडेट किया जाता है वे 1 अप्रैल 2026 से अमान्य हो जाएंगे। उनकी जगह नए फॉर्म जारी किए जाएंगे जिनके जरिए ही आवेदन या अपडेट की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि अगर आप पुराने फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं तो आपका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में यदि आप पैन कार्ड बनवाने की सोच रहे हैं या उसमें किसी तरह का सुधार करवाना चाहते हैं तो यह सही समय है कि आप 1 अप्रैल से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। इससे आप नई सख्त नियमावली से बच सकते हैं और बिना अतिरिक्त जटिलताओं के अपना काम आसानी से पूरा कर सकते हैं। कुल मिलाकर सरकार का यह कदम पैन कार्ड प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि इससे प्रक्रिया थोड़ी जटिल जरूर होगी लेकिन लंबे समय में यह बदलाव पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकता है।

ईरान युद्ध से भारत में बीयर की किल्लत जैसे हालात, कई ब्रांड हो सकते हैं महंगे

तेहरान। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के शराब उद्योग पर भी दिखने लगा है। अब आशंका जताई जा रही है कि कई बड़े ब्रांड्स की किल्लत भारत में हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसके चलते बीयर महंगी भी हो सकती हैं। वैश्विक बीयर कंपनियों हाइनेकेन, एबी इनबेव और कार्ल्सबर्ग ने भारत में बीयर की सप्लाई रुकने और कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। संकट के मुख्य कारण कांच और एल्युमीनियम की कमी: युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कांच की बोतलें बनाने वाली भट्टियां बंद हो रही हैं। बोतलों की कीमतों में 20% तक का उछाल आया है। वहीं, शिपिंग में देरी से कैन बनाने के लिए जरूरी एल्युमीनियम का आयात भी प्रभावित हुआ है। गैस आपूर्ति पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत की 40% गैस कतर से मंगवाता है। ईरानी हमलों के कारण कतर की निर्यात क्षमता पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए गैस की भारी किल्लत हो गई है। पैकेजिंग लागत: बीयर की बोतलों के अलावा पेपर कार्टन (गत्ते) के दाम दोगुने हो गए हैं और लेबल-टेप जैसी सामग्रियों की लागत भी बढ़ गई है। कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी की मांग ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के महानिदेशक विनोद गिरी के अनुसार, उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि अब काम जारी रखना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकारों से बीयर की कीमतों में 12% से 15% तक की बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है। भारत में गर्मियों का सीजन शुरू हो रहा है, जो बीयर की बिक्री का पीक समय होता है। यदि संकट जल्द नहीं सुलझा, तो इस साल शादियों और गर्मियों के सीजन में बीयर की भारी कमी देखने को मिल सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को लगाया फोन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने, शांति बहाल करने और वैश्विक व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने का समर्थन करता है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत है। इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, और कहा कि यह वैश्विक शांति, स्थिरता एवं आर्थिक खुशहाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पीटीआई भाषा के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि मोदी और ट्रंप के बीच फोन कॉल पर हुई बातचीत को भारत की उस पहल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसका मुख्य उद्देश्य जल्द से जल्द शत्रुता को समाप्त करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा का आवागमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जलमार्ग की नाकाबंदी जारी रहती है तो देश की खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है। साथ ही यह भी कहा कि शत्रुता के भयावह परिणाम होने वाले हैं क्योंकि यह जल्द ही अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ उर्वरक आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है।

कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा

नई दिल्ली:       देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रेलवे सेक्टर की दो प्रमुख सरकारी कंपनियां Rail Vikas Nigam Limited और IRCON International को मर्ज करने की तैयारी चल रही है। इस प्रस्तावित विलय का मकसद दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा खत्म कर उन्हें एक मजबूत और एकीकृत इकाई के रूप में खड़ा करना हैअब तक स्थिति यह रही है कि ये दोनों कंपनियां कई प्रोजेक्ट्स में एक दूसरे के खिलाफ बोली लगाती रही हैं। इससे न केवल रेट कम हो जाते हैं बल्कि संसाधनों का बिखराव भी होता है। सरकार का मानना है कि मर्जर के बाद यह डुप्लिकेशन खत्म होगा और दोनों कंपनियों की ताकत एक जगह केंद्रित होगी विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी की क्षमता काफी बड़ी होगी। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक आरवीएनएल का मार्केट कैप करीब 53877 करोड़ रुपये है जबकि इरकॉन की वैल्यू करीब 11159 करोड़ रुपये है। दोनों के एक साथ आने पर ज्वाइंट ऑर्डर बुक डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। इससे यह नई इकाई देश की बड़ी इंफ्रा कंपनियों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ जाएगी इस फैसले का असर शेयर बाजार में भी तुरंत देखने को मिला। मर्जर की खबर आते ही दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि बड़ी और मजबूत कंपनी बनने से वैल्यूएशन और ग्रोथ दोनों में सुधार होगा सरकार के इस कदम को रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में Nirmala Sitharaman द्वारा पीएसयू सेक्टर में सुधार के संकेत दिए गए थे। यह मर्जर उसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है जिसमें सरकारी कंपनियों को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर है मर्जर के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नई कंपनी बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को आसानी से संभाल सकेगी। देश के भीतर रेलवे नेटवर्क के विस्तार के साथ साथ विदेशों में भी बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही मैनपावर और टेक्निकल क्षमता दोनों में इजाफा होगा जिससे प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे किए जा सकेंगे हालांकि यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी। इसके लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी होगी जिसमें मंत्रालयों की स्वीकृति और कैबिनेट की अंतिम मुहर शामिल है। लेकिन अगर यह योजना सफल होती है तो भारतीय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है सरकार का फोकस साफ है रेलवे को न केवल देश के भीतर मजबूत बनाना बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत करना। RVNL और IRCON का यह संभावित विलय उसी बड़े विजन की ओर एक अहम कदम माना जा रहा है

भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से

नई दिल्ली:  भीम ऐप में एक नया और अहम फीचर जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल पेमेंट और भी आसान और तेज हो जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सहायक कंपनी एनबीएसएल ने यह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है इस फीचर के जरिए अब यूजर्स 5,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन को अपने फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन से कन्फर्म कर सकेंगे। इसका मतलब है कि छोटे पेमेंट के लिए हर बार UPI PIN डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस बदलाव से पेमेंट प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी बल्कि यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा। अक्सर लोग पिन भूल जाते हैं या गलत पिन डाल देते हैं, जिससे ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। नया फीचर इस समस्या को काफी हद तक कम कर देगा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके यूजर्स अपने दोस्तों और परिवार को पैसे भेज सकते हैं, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी आसानी से कर सकते हैं कंपनी के अनुसार, यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है क्योंकि फिंगरप्रिंट और फेस डेटा सीधे यूजर के डिवाइस में सुरक्षित रहता है। इससे पिन शेयर होने या उसके गलत इस्तेमाल का खतरा कम हो जाता है हालांकि, 5,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए अभी भी UPI PIN की जरूरत होगी, जिससे बड़े पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बनी रहेगी फिलहाल यह सुविधा उन स्मार्टफोन्स पर उपलब्ध है जिनमें बायोमेट्रिक सपोर्ट यानी फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन की सुविधा मौजूद है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iOS डिवाइस

आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

नई दिल्ली:  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग IPO के जरिए फंड जुटाने में फाइनेंशियल सेक्टर ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल से फरवरी की अवधि में जुटाई गई कुल राशि में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही, जो अन्य सभी क्षेत्रों से अधिक है रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सेक्टर के बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11 प्रतिशत योगदान दिया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान मुख्य रूप से वित्तीय और उपभोक्ता आधारित कंपनियों की ओर बना हुआ है एसएमई SME सेगमेंट में अलग रुझान देखने को मिला। यहां इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी 23 प्रतिशत और मटेरियल सेक्टर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शामिल रहे। यह दिखाता है कि छोटे और मझोले उद्योगों में औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी ज्यादा है मेनबोर्ड आईपीओ की बात करें तो अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 99 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1,65,036 करोड़ रुपए जुटाए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, जहां 79 कंपनियों ने 1,62,517 करोड़ रुपए जुटाए थे हालांकि, एसएमई आईपीओ में कुछ गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 105 एसएमई आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे कुल 5,121 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि पिछले वर्ष 163 आईपीओ के जरिए 7,111 करोड़ रुपए जुटाए गए थे निवेशकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक एनएसई पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुंच गई। हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़ रहे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ से अधिक निवेशकों के साथ पहला राज्य बन गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान प्रमुख निवेशक आधार वाले राज्य हैं

ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..

नई दिल्ली:फूड डिलीवरी सेक्टर में एक बार फिर कीमतों का बोझ बढ़ गया है। Swiggy ने अपने प्लेटफॉर्म पर लगने वाली फीस में बढ़ोतरी कर दी है जिससे अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। कंपनी के अनुसार प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर अब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया गया है जिसमें जीएसटी भी शामिल है। पहले यह फीस 14.99 रुपये थी। इस तरह करीब 2.59 रुपये यानी लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्विगी का कहना है कि यह बढ़ोतरी प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत करने और डिलीवरी अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है जिसके चलते यह बदलाव किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी कंपनी ने फीस बढ़ाकर 12 रुपये से करीब 14-15 रुपये के स्तर तक पहुंचा दिया था। अब एक बार फिर बढ़ोतरी ने ग्राहकों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। इसी तरह Zomato ने भी हाल ही में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया था। कंपनी ने फीस में करीब 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया था। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि करीब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच गई है। फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है जिससे रेस्तरां की लागत बढ़ गई है। इससे पूरे फूड डिलीवरी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ा है और इसका असर ग्राहकों तक पहुंच रहा है। बाजार में इस खबर के बीच स्विगी के शेयरों में हल्की तेजी देखी गई। दोपहर 12:30 बजे कंपनी का शेयर करीब 2.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 279.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि पिछले कुछ समय में शेयर में गिरावट का रुख रहा है और बीते एक हफ्ते में यह 5 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं एक महीने में करीब 10 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 36 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। कुल मिलाकर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती फीस ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये कंपनियां अपनी कीमतों को और बढ़ाती हैं या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ राहत देती हैं। 🏷️ Tags swiggy news, zomato update, food delivery India, platform fee increase, stock market news

एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति

नई दिल्ली:HDFC Bank ने अपने पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने इस पूरे मामले की जांच के लिए बाहरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्मों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह निर्णय बैंक के बोर्ड की 23 मार्च को हुई बैठक में लिया गया। बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस जांच का उद्देश्य इस्तीफे की परिस्थितियों को स्पष्ट करना और गवर्नेंस से जुड़े मानकों को और मजबूत बनाना है। कानूनी फर्मों को निर्देश दिया गया है कि वे चक्रवर्ती के इस्तीफा पत्र की गहराई से समीक्षा करें और एक तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। गौरतलब है कि अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने संकेत दिया था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी गड़बड़ी या कदाचार के कारण नहीं बल्कि विचारधाराओं और दृष्टिकोण में मतभेद के चलते लिया गया है। वे वर्ष 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे। इस बीच Reserve Bank of India ने बैंक के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि चक्रवर्ती के जाने के बाद बैंक के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाहरी जांच का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुनिश्चित करना है। यह कदम निवेशकों और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ने अपने विदेशी कारोबार से जुड़े एनआरआई ग्राहकों को हाई-रिस्क एटी1 बॉन्ड की बिक्री के मामले में भी सख्त कार्रवाई की है। आंतरिक जांच के बाद बैंक ने तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयर में हलचल देखने को मिली। मंगलवार दोपहर 12 बजे बैंक का शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 757.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बीते एक सप्ताह में शेयर में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।  यह मामला बैंक के भीतर गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। बाहरी जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट से ही इस पूरे प्रकरण पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

सोना-चांदी में तेज गिरावट मजबूत डॉलर, ने बिगाड़ा बाजार का खेल

नई दिल्ली:वैश्विक बाजार में मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का सीधा असर सोना और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट दर्ज की गई और कीमतें लगभग 4.3 प्रतिशत तक फिसल गईं। घरेलू बाजार में MCX पर सोने के अप्रैल 2026 कॉन्ट्रैक्ट में सुबह 10:34 बजे तक 2094 रुपये यानी करीब 1.50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 1,37,166 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान सोने ने 1,36,684 रुपये का न्यूनतम स्तर और 1,38,450 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं चांदी में गिरावट और भी ज्यादा रही। MCX पर मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी करीब 9837 रुपये यानी 4.37 प्रतिशत टूटकर 2,15,330 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,15,330 रुपये का निचला स्तर और 2,19,658 रुपये का ऊपरी स्तर देखा। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मजबूत होता अमेरिकी डॉलर माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स, जो कि दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है, इस समय करीब 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.23 के स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर की मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है जिससे इसकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना हुआ है। सोना 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4356 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है जबकि चांदी करीब 3.78 प्रतिशत टूटकर 66.73 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर में देखें तो बीते एक सप्ताह में सोना 13 प्रतिशत से अधिक और पिछले एक महीने में 15 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं चांदी में गिरावट और भी तेज रही है जहां एक सप्ताह में 16 प्रतिशत से ज्यादा और एक महीने में 24 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डॉलर मजबूत बना रहेगा और ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी तब तक सोना और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि बाजार में अस्थिरता के बीच निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने का है।

शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके

नई दिल्ली:मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूत शुरुआत की और निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। बेंचमार्क इंडेक्स SENSEX 1516.08 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74212.47 के स्तर पर खुला। वहीं NIFTY 50 365.80 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 22878.45 पर पहुंच गया। इस तेजी ने पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में नजर आए और चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। लार्जकैप के साथ साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। NIFTY Midcap 100 करीब 772 अंक यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53490 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं NIFTY Smallcap 100 भी 219 अंक यानी 1.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 15318 पर कारोबार करता नजर आया। इससे साफ है कि बाजार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि छोटे और मिड साइज कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। ब्रोकरेज हाउस चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह के अनुसार निफ्टी फिलहाल अपने शॉर्ट टर्म सपोर्ट जोन से नीचे ट्रेड कर रहा है जिससे बाजार का रुझान अभी कमजोर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 22650 से 22700 के स्तर पर मजबूत रुकावट देखी जा रही है जबकि 22300 से 22400 के बीच सपोर्ट जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले समय में बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है। सेंसेक्स पैक में कई बड़े स्टॉक्स ने मजबूती दिखाई। एशियन पेंट्स, इंडिगो, ट्रेंट, टाइटन, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। केवल पावर ग्रिड एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो लाल निशान में ट्रेड कर रहा था। ग्लोबल मार्केट की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल जैसे प्रमुख बाजार हरे निशान में खुले। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे जहां डाओ और नैस्डैक इंडेक्स में करीब 1.38 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत और वैश्विक स्तर पर बेहतर निवेश माहौल को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी पक्ष द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले को फिलहाल टालने के फैसले से तनाव में कमी आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में खरीदारी तेज हुई है।

सोने-चांदी के बाजार में ऐतिहासिक 'ब्लैक मंडे'! चांदी ₹9000 से ज्यादा टूटी, 45 सालों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज!

नई दिल्ली:  साल 2026 के मार्च महीने ने सोने और चांदी के निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। घरेलू वायदा बाजार (MCX) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक, कीमती धातुओं की कीमतों में ऐसी गिरावट देखी गई है जिसे विशेषज्ञ पिछले 45 वर्षों का सबसे बड़ा ‘क्रैश’ मान रहे हैं। सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें 4.21% यानी करीब 9,474 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,15,693 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं। वहीं, सोने में भी 2,460 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी कटौती देखी गई, जिसके बाद भाव 1,36,800 रुपये के स्तर पर सिमट गए। बाजार में आई इस सुनामी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव कम होने के संकेत बताए जा रहे हैं। जैसे ही भू-राजनीतिक अस्थिरता कम होने की उम्मीद जगी, निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना 1.5% गिरकर 4,340.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी में 3.3% की गिरावट दर्ज की गई।45 साल का रिकॉर्ड टूटा, ‘बेयर मार्केट’ की आहटमार्च 2026 का यह महीना इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है क्योंकि इस महीने अब तक दोनों धातुओं की कीमतों में 20% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह करीब साढ़े चार दशकों में देखी गई सबसे तेज गिरावट है। तकनीकी रूप से, जब किसी एसेट की कीमत अपने ‘ऑल टाइम हाई’ से 20% या उससे ज्यादा गिर जाती है, तो उसे ‘बेयर मार्केट’ माना जाता है। वर्तमान में सोना और चांदी दोनों इसी दायरे में प्रवेश कर चुके हैं। गिरावट के प्रमुख कारण:विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे चार प्रमुख वैश्विक कारक काम कर रहे हैं: मजबूत अमेरिकी डॉलर: डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया, जिससे मांग में कमी आई। ऊंची ब्याज दरें: महंगाई के दबाव के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना ने बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों (सोना-चांदी) के प्रति आकर्षण कम कर दिया है। मुनाफावसूली: हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू किया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा। सेफ हेवन की छवि को झटका: आमतौर पर युद्ध या तनाव के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के कारण सोना अपनी साख बरकरार नहीं रख पाया। बाजार जानकारों का मानना है कि अल्पकालिक (Short-term) निवेश करने वालों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह ‘करेक्शन’ खरीदारी का एक बेहतर अवसर साबित हो सकता है। फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, इसलिए विशेषज्ञों ने चरणबद्ध तरीके से निवेश (Step-by-step investment) करने की सलाह दी है।