Chambalkichugli.com

Gold-Petrol Today: सोना गिरा, चांदी कमजोर; जानें पेट्रोल-डीजल आज कहां महंगा और कहां सस्ता

नई दिल्ली। देश में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 23 मार्च 2026 को राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 650 रुपये सस्ता होकर 1,52,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,53,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि वायदा बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली है। MCX पर सोने का भाव 333 रुपये बढ़कर 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बड़ा असर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं। यही वजह है कि सोना फिलहाल दबाव में बना हुआ है, जबकि कच्चे तेल और डॉलर की ओर निवेश बढ़ा है। आज का सोने का ताजा भाव (IBJA)IBJA के मुताबिक आज सोने के रेट इस प्रकार हैं 24 कैरेट: ₹1,47,218 प्रति 10 ग्राम23 कैरेट: ₹1,46,628 प्रति 10 ग्राम22 कैरेट: ₹1,34,852 प्रति 10 ग्राम18 कैरेट: ₹1,10,414 प्रति 10 ग्राम14 कैरेट: ₹86,123 प्रति 10 ग्रामदेश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में हल्का अंतर देखने को मिला दिल्ली: ₹1,46,120 (24K), ₹1,33,950 (22K),मुंबई: ₹1,45,970 (24K), ₹1,33,800 (22K)कोलकाता: ₹1,45,970 (24K), ₹1,33,800 (22K)चेन्नई: ₹1,48,580 (24K), ₹1,36,200 (22K)पटना: ₹1,46,020 (24K), ₹1,33,850 (22K) पेट्रोल-डीजल का ताजा अपडेटपेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज मिलाजुला असर देखने को मिला पटना में पेट्रोल 51 पैसे महंगा हुआ जमशेदपुर में 84 पैसे की बढ़ोतरी चेन्नई में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ वहीं दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतडॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स इसी वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना बदलते रहते हैं। घर बैठे SMS के जरिए भी आप कीमत जान सकते हैं Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजे BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें सोने की कीमतों में फिलहाल गिरावट का दौर जारी है, जबकि चांदी भी कमजोर बनी हुई है। वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती आगे भी कीमतों की दिशा तय करेंगे। वहीं पेट्रोल-डीजल के दाम में स्थानीय स्तर पर उतार-चढ़ाव जारी है।

ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई। सुबह 9:28 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,309 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.78 प्रतिशत शेयर 73,223 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 408 अंक 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,705 पर कारोबार हुआ। हर सेक्टर में बिकवाली,अजनबी में डर का माहौलशुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। मेटल, पीएससीयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, आईटी, स्कॉर्पियो, एनर्जी और आर्किटेक्चर जैसे लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बिजनेस कर रहे थे। लार्जकैप स्टॉकहोम के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार में भी नजर आए। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है। वैश्विक हस्ताक्षर भी फ़्राईड, एशियाई अख़्तियार में भी गिरावटभारतीय बाज़ार की इस गिरावट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय संकेत भी बड़ी वजह बने। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल जैसे एशियाई सामानों की भी भारी बिक्री आंकी गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ गिरावट आई थी, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा टूट गया है। तेल के कारखाने और मध्य पूर्व संकट बना सबसे बड़ा कारणवैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में भारी तनाव है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी असमानता। इस क्षेत्र में वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह के संकटग्रस्त कच्चे तेल की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। तेल की पेट्रोलियम कंपनी भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इसी वजह से तेल की पेट्रोलियम कंपनी की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है। विदेशी ग्राहकों की लगातार बिकवालीबाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। पिछले फेस्टिवल सत्र में एफओआई ने 5,518 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री की, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू एंटरप्राइज़ कॉमर्स (डीआईआई) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की। आगे क्या? विद्यार्थी के लिए संकेतविशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तब तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। आवेदकों को अनुमति और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

टेक दुनिया में बड़ा बदलाव! सैमसंग और एप्पल के बीच फाइल ट्रांसफर अब और हारने

नई दिल्ली। टेक वर्ल्ड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म क्विक शेयर को एयरड्रॉप के साथ कंपैटिबल बनाया है। इसका मतलब यह है कि अब क्लाइमेट और आईफोन ग्राहकों के बीच फाइल शेयर करना पहले कहीं और आसान हो जाएगा। गैलेक्सी S26 उपभोक्ता को मिलेगा पहला फायदायह नई सुविधा सुविधा Galaxy S26 सीरीज उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है। इस अपडेट के बाद गैलेक्सी उपभोक्ता सीधे आईफोन उपभोक्ताओं के साथ फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट और अन्य चीजें साझा कर सकते हैं। पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि दोनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग सिस्टम पर काम करते थे। कैसे काम करें यह विशेषता?क्विक शेयर और एयरड्रॉप दोनों ही रॉकेट और रॉकेट डिटेक्शन तकनीक पर आधारित हैं। अब इन दोनों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (पारस्पर काम करने की क्षमता) जोड़ दिया गया है, जिससे अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम के उपकरण भी आसानी से जुड़ सकते हैं। कंपनी के अनुसार:शुरुआत में यह फीचर गैलेक्सी S26 पर उपलब्ध होगाबाद में इसे अन्य बाज़ारों तक भी विस्तारित किया जाएगाअमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इसकी शुरुआत सबसे पहले होगी कार से घर नियंत्रण: नई स्मार्ट सेवा शुरू की गई सिर्फ फाइल शेयरिंग ही नहीं, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने हुंडई मोटर ग्रुप के साथ मिलकर एक नई “कार-टू-होम” सर्विस भी लॉन्च की है। इस सेवा के माध्यम से उपभोक्ता स्मार्टथिंग्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपनी कार से ही घर के उपकरणों को नियंत्रित कर सकते हैं। उदाहरण:घर पहुंचने से पहले एसी और लाइट ऑन करेंबाहरी व्यवसाय ही गैर-जरूरी सुपरमार्केट बंदरोबोटिक रॉकेट लॉन्चर को चालू करनायह सुविधा 2022 के बाद हुंडई और किआ में उपलब्ध है। नवरात्र एक्सपीरियंस में बड़ा बदलावइस कदम को टेक और इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से एप्पल एंड्रॉइड के बीच फाइल शेयरिंग एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब इस इंटरऑपरेबिलिटी से उपभोक्ता को अलग-अलग इकोसिस्टम के बावजूद भी सहज अनुभव मिलेगा।

Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली। देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले अहम कदम के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। यह दोनों विधेयक आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतियां, बजट नीतियां और कॉर्पोरेट नीतियां में सुधार को लागू करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वित्त विधेयक 2026-27: बजट लागू करने की दिशा में अहम कदमवित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट नीतियों को कानूनी रूप देना है। इसके जरिए सरकार कराधान, खर्च और आर्थिक नीतियों को लागू करेगी। संसद में इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। यह विधेयक देश की आर्थिक रणनीति, विकास योजनाओं और राजकोषीय संतुलन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। कॉर्पोरेट कानून में बदलाव की तैयारीइसके साथ ही निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया, जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव प्रस्तावित हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना, हस्तांतरण बढ़ाना और कंपनियों के संचालन को अधिक पक्षपाती बनाना है। कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन, प्रबंधन और बंद होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम संयंत्रों को सीमित दायित्वों के साथ काम करने का अवसर देता है। नए संशोधनों से निवेश माहौल को और बेहतर बनाने की उम्मीद है। IBC संशोधन का रास्ता भी साफसरकार ने पहले ही दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे हरी झंडी दी थी, जिससे मौजूदा सत्रों में IBC संशोधन विधेयक पेश होने का रास्ता साफ हो गया है। संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित बदलावप्रस्तावित संशोधन बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें दिवालियापन प्रक्रिया को तेज करने और देरी को कम करने पर जोर दिया गया था। समिति ने सुझाव दिया:दिवालियापन मामलों के समाधान के लिए सख्त समयसीमालेनदारों की समिति (CoC) को अधिक अधिकारसीमा पार दिवालियापन के लिए नया ढांचा निवेश और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा? इन विधेयकों के लागू होने से भारत में वित्तीय माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है। तेज दिवालियापन प्रक्रिया और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से भारतीयों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड

नई दिल्ली। सोने और चांदी के जिले में सोमवार को आंशिक ढलान वाला दृश्य मिला, जिसने अवशोषण को चौंका दिया। घरेलू बाजार बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना और चांदी दोनों में तेजी से बिकवाली दर्ज की गई। सोने का दाम 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया है, जबकि चांदी का दाम भी 2.13 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे चला गया है। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट में से एक पैसा जा रही है। MCX पर सोने- पानी के भाव में भारी गिरावट2 अप्रैल 2026 को फॉक्सवैगन्स की कीमत 7,619 रुपए पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोना 1,36,403 रुपये के रु. तक पहुंच गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,40,158 रुपये रहा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के दशक में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 14,495 रुपये पर 6.39 प्रतिशत टूटकर 2,12,277 रुपये पर आ गया। इंट्रा-डे में चांदी 2,11,086 रुपये तक। अंतर्राष्ट्रीय इस्टेट का दिखावा भी असरदारवैश्विक संस्था में भी मंदी का रुख देखने को मिला। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना 5.50 प्रतिशत टूटकर 4,359 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जबकि सिल्वर 6.65 प्रतिशत टूटकर 65.08 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस गिरावट का सीधा असर भारतीय उद्योग पर भी डाला गया है। इतनी बड़ी गिरावट क्यों?विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मोती लाल ओसवाल के कमोडिटी पसन्द मानव मोदी का कहना है कि अमीर भाई-बहनों ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। राजनीतिक तनाव और असहमति की रणनीतिहालांकि आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर अलग नजर आती है। भीष्म रुचि की आशा और डॉलर की रेस्तरां के विद्यार्थियों ने सोने से दूरी बना ली। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है। आगे क्या रहेगा रुख?विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले सोने और चांदी के सिक्कों में दिन जारी कर सकते हैं। संस्था की नजरें अब सांख्यिकी के आंकड़े, मध्याह्न के बिंदु और वैश्विक राजनीतिक संकट पर रहेंगे। यदि हितधारकों के पास स्वामित्व है, तो सोने में दबाव बनाया जा सकता है।

ग्लोबल मार्केट में भूचाल: एशिया में भारी गिरावट, क्या भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा असर?

नई दिल्ली। हफ्ते की शुरुआत के साथ ही वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिलेगी? बीते शुक्रवार को जहां सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए थे वहीं आज विदेशी बाजारों से बेहद कमजोर संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में सोमवार को भारी बिकवाली का माहौल है। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 4.10 फीसदी गिरकर 50 800 के स्तर पर आ गया जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लगभग 3 फीसदी की गिरावट के साथ 24 532 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का असर दिख रहा है। DAX 2.01 फीसदी CAC 1.90 फीसदी और FTSE-100 करीब 1.50 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे कमजोर संकेतभारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत देने वाला गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ रेड जोन में ट्रेड करता दिखा। खबर लिखे जाने तक यह करीब 50 अंक फिसलकर 23 737 के स्तर पर था। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली थी जहां डाउ जोंस और उसके फ्यूचर्स लगभग 1 फीसदी गिरकर बंद हुए थे। इन नकारात्मक वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है जो पिछले सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है। शुक्रवार को दिखी थी मजबूतीअगर पिछले कारोबारी दिन की बात करें तो गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 325.72 अंक चढ़कर 74 532.96 पर बंद हुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 112.35 अंकों की बढ़त के साथ 23 114.50 के स्तर पर पहुंच गया था। नोट: शेयर बाजार में निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

नई दिल्ली। नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे। PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगाअब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी। HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्तासैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है। क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा। अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्ससरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा। कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्टअगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। नया आयकर अधिनियम 2025 लागू1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सख्त नियमपेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगीअब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्या है इसका सीधा असर?इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ग्लोबल संकेत, तेल-रुपया और मिडिल ईस्ट हालात पर फोकस

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। वैश्विक और घरेलू उत्पाद के बीच दोस्ती की नज़र मध्य पूर्व में जारी तनाव, डॉलर के डॉलर के डॉलर की चाल और कच्चे तेल की दुकान पर रहेगा। ये तीन बड़े फैक्टर बाजार की दिशा तय करने में अंतिम भूमिका निभाएंगे। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का कारणअमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच रिलीज मॅथेल में अब चौथे हफ्ते में एंट्री कर दी गई है। सामान्य स्थिति के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक उद्योगों में अनिश्चितता बढ़ गई है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रीट पर चेतावनी देते हुए तनाव को और बढ़ाया है। यह वैश्वीकरण तेल शोषित का प्रमुख मार्ग है, ऐसे में यहां किसी भी क्षेत्र में सीधे कच्चे तेल के प्रवेश को प्रभावित किया जा सकता है। कच्चे तेल की दुकान में तेज़ उछालमध्य पूर्व के तनाव का असर कच्चे तेल की झील पर साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम में एक सप्ताह में 8.77 प्रतिशत और पिछले एक महीने में 57.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। तेल की टंकी में यह उछाल भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हो सकती है और कंपनी की लागत पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार पर भी देखा जा सकता है। रुपयों की मंदी से बढ़ा दबावडॉलर के थोक भारतीय मुद्रा की गिरावट के लिए भी बाजार में नकारात्मक संकेत दे रही है। पिछला सप्ताह पोर्टफोलियो 93.71 के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा (FII) की लगातार बिकवाली रही। विदेशी निवेशकों के विश्वास को बाजार में प्रभावित किया जाता है और शेयर बाजार में जमा किया जाता है। एफओआई और डीओआई का संतुलनडेज वीक एफओआई ने लगभग 29,718.9 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालाँकि, डोमेस्टिक एंटरप्राइज़ एंटरप्राइज़ (डीआईआई) ने 30,642 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो कुछ हद तक समर्थित है। यह बैलेंस बाज़ार में बड़े पैमाने पर गिरावट से बचा हुआ है, लेकिन अगर फ़ोई की बिकवाली जारी रहती है तो बाज़ार पर दबाव बढ़ सकता है। पिछली शनिवार की रिलीज़- रिलीज़16 से 20 मार्च के बीच शेयर बाजार में भारी उछाल- देखने को मिला। अंत में बीएसई सेंसेक्स 74,523.96 और निफ्टी 50 23,114.50 के स्तर पर बंद हुआ। सेक्टोरल स्टॉक्स में डिफेन्स, फ़्यूसीजी और रियल्टी स्टॉक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। इन सेक्टरों में क्रमश: 2.41%, 1.91% और 1.89% की गिरावट जारी है। वहीं, ऑटो और मेटल सेक्टर में क्रमश: 2.15% और 1.06% की बढ़त दर्ज की गई। किशोरी के लिए क्या संकेत?आने वाले सप्ताह में सहकर्मियों को रहने की आवश्यकता है। वैश्विक घटना, विशेष रूप से मध्य पूर्व की स्थिति, रुपये की चाल और कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक इन तीनों में स्थिरता नहीं आएगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

एविएशन अपडेट: मिडिल ईस्ट संकट के चलते IndiGo-Air India का सीमित ऑपरेशन

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 22 मार्च से सीमित उड़ान संचालन फिर से शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, एयरलाइंस ने यात्रियों को घेर लिया है कि क्षेत्र की सीमित स्थिति के चलते आखिरी समय में बदलाव संभव हैं। इंडिगो का सतर्क कदमबजट एयरलाइन इंडिगो ने घोषणा की है कि वह सुलभ उड़ानों का संचालन शुरू कर रही है। कंपनी ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट के लिए खुलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें। इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अनिश्चित परिस्थितियों में भी उनकी टीमें 24 घंटे यात्रियों की मदद के लिए काम कर रही हैं। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी उड़ानें सुरक्षा मानकों और नियामकों के अनुसार ही संचालित की जा रही हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की संयुक्त पहलदूसरी ओर एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ मिलकर एयर इंडिया ने भी बड़ा कदम उठाया है। दोनों एयरलाइंस ने 22 मार्च को पश्चिम एशिया क्षेत्र से आने-जाने वाली लगभग 50 उड़ानों के संचालन की घोषणा की है। इनमें निर्धारित (Scheduled) और विशेष (Non-scheduled) दोनों प्रकार की उड़ानें शामिल हैं, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में मदद मिल सके। जेद्दा और मस्कट जैसे रूट पर फोकसएयरलाइंस ने जेद्दा और मस्कट जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए नियमित सेवाएं जारी रखने का फैसला लिया है। भारत और जेद्दा के बीच कुल 20 उड़ानें संचालित की जाएंगी। इनमें एयर इंडिया दिल्ली और मुंबई से उड़ानें संचालित करेंगी, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, मंगलुरु और कोझिकोड से अपनी सेवाएं जारी रखेगी। इसके अलावा, एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, कोच्चि, मुंबई और कन्नूर से मस्कट के लिए आठ निर्धारित उड़ानें भी संचालित करेंगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी। विशेष उड़ानों का भी प्रबंधनियमित सेवाओं के अलावा एयरलाइंस संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के विभिन्न गंतव्यों के लिए लगभग 30 अतिरिक्त विशेष उड़ानें भी संचालित करने की योजना बना रही हैं। हालांकि, इन उड़ानों का संचालन स्लॉट की प्राप्ति, स्थानीय परिस्थितियों और संबंधित देशों के नियामक प्राधिकरणों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। एयरलाइंस ने स्पष्ट किया है कि सभी उड़ानें आवश्यक सुरक्षा मानकों और अनुमतियों के साथ ही संचालित की जाएंगी। यात्रियों के लिए अहम सलाहएयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति की जांच करें और संभावित उड़ानों के लिए तैयार रहें। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उड़ानों के समय और रूट में अचानक बदलाव संभव हैं।

अमेरिका के ईरान तेल निर्यात पर अस्थायी पाबंदी हटाने पर भारत को राहत, वैश्विक तेल संकट हो सकता है कम

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर अस्थायी पाबंदी हटाने का ऐलान किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक तेल संकट में कुछ राहत मिल सकती है। सीमित समय के लिए यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है और भारत को ऊर्जा संकट से निपटने में कुछ राहत मिल सकती है। भारत की रिफाइनरियों की तैयारी भारत की तेल रिफाइनरियों के पास उच्च तकनीक और लॉजिस्टिक क्षमता है जिससे वे कच्चे तेल को प्रोसेस करने में कुशल हैं। हाल के वर्षों में ये रिफाइनरियां रूसी तेल को प्रोसेस करने में भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय फिलहाल अमेरिका की ओर से स्पष्ट शर्तों का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही भारत की रिफाइनरियां खरीद का अंतिम निर्णय लेंगी।ईरानी तेल की स्थिति और भारत की लाभकारी स्थिति इस समय ईरान के 140 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल समुद्र में जहाजों पर हैं जिनमें बड़ा हिस्सा चीन के लिए निर्धारित है। शेष मात्रा अन्य देशों के लिए उपलब्ध है। भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है। वर्तमान में कच्चे तेल के दाम 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। भारत का ईरान से तेल आयात इतिहास भारत अपनी ऊर्जा का लगभग 85 प्रतिशत विभिन्न देशों से आयात करता है। वर्ष 2018-19 में भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत थी। 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत का आयात घटा और अब सीमित मात्रा में ही ईरान से आयात होता है। साल 2025 में ईरान से भारत का आयात केवल 0.44 बिलियन डॉलर रहा जबकि ईरान का भारत को निर्यात 1.24 बिलियन डॉलर रहा।