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सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बने अत्याधुनिक प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। करीब 78 वर्षों तक रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो गया है। पुराने दफ्तर में शुक्रवार शाम 4 बजे केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस ऐतिहासिक इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक माना जा रहा है। उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन की नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाता है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नए कार्यालय में महिलाओं, युवाओं, किसानों और कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। इन फैसलों में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि अवसंरचना कोष की राशि 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ करना और 10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी देना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में बना ‘सेवा तीर्थ’ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है और इसे करीब 1189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले इस परियोजना का नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे दिसंबर 2025 में बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। परिसर में तीन इमारतें हैंसेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय स्थित है। यह पूरा कॉम्प्लेक्स केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का निर्माण किया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं। सरकार का कहना है कि पहले कई मंत्रालय अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे तालमेल की कमी, देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए एकीकृत परिसर से प्रशासनिक कार्यों में तेजी, समन्वय और पारदर्शिता बढ़ेगी। आने वाले समय में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदलने की योजना है, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस बदलाव के साथ केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर गया है।

कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री तय? सियासत में हलचल तेज

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस से हाल ही में इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब नई राजनीतिक पारी की तैयारी में बताए जा रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक, वह 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ले सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और सपा के लिए अहम सियासी संदेश माना जाएगा। अखिलेश यादव करा सकते हैं सदस्यतासूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनके साथ कुछ पूर्व विधायक और क्षेत्रीय नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यह केवल एक व्यक्ति का दल बदल नहीं, बल्कि एक छोटे राजनीतिक समूह का पुनर्संयोजन भी हो सकता है। कांग्रेस से अलग होने के बाद सिद्दीकी के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज थीं। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन अब सपा में संभावित एंट्री की खबरों ने यूपी की राजनीतिक फिजा बदल दी है। बसपा से कांग्रेस और अब सपा की ओरनसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे और पार्टी प्रमुख मायावती के करीबी सहयोगी माने जाते थे। 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था। हालांकि कांग्रेस में उनकी पारी लंबी नहीं चली। 24 जनवरी को उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले ने कांग्रेस संगठन में भी हलचल मचा दी थी। अब सपा में संभावित शामिल होने की चर्चा ने इसे और ज्यादा सियासी रंग दे दिया है। इस्तीफे के पीछे क्या वजह?सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ते समय संकेत दिए थे कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली और अंदरूनी माहौल से संतुष्ट नहीं थे। चर्चा यह भी रही कि उन्हें अपेक्षित सम्मान और भूमिका नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उनका असंतोष धीरे-धीरे सार्वजनिक फैसले में बदल गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम अहम साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक और पारंपरिक समीकरणों को लेकर दलों की रणनीति पहले से ही तेज है। ऐसे में सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का सपा के साथ जाना विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। बदलते सियासी समीकरणयूपी की राजनीति में दल-बदल नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले बड़े चेहरों की हलचल हमेशा संकेत देती है कि जमीन पर तैयारी शुरू हो चुकी है। यदि 15 फरवरी को सिद्दीकी की सपा में औपचारिक एंट्री होती है, तो यह आने वाले महीनों में और राजनीतिक पुनर्संयोजन का रास्ता खोल सकती है।

फिच रिपोर्ट: भारत इस साल भी बना रहेगा एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था… 6.4% रहेगी रफ्तार

नई दिल्ली। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत (India) 2026 में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था (Asia’s Fastest-Growing Major Economy) बना रहेगा। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से आगे होगी। फिच ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस की इकनॉमिक ग्रोथ पर ट्रेड पैटर्न में बदलाव का फिलहाल कम असर पड़ेगा, क्योंकि ये अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनका मैन्यूफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स कम है। भारत अमेरिकी टैरिफ के जोखिम को कम करने के लिए कई व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापार संबंध बढ़ा रहा है। हाल ही में उसने यूरोपीय संघ के साथ भी समझौता किया है। पिछले दो महीनों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ सौदे किए हैं। अमेरिका के साथ यह समझौता 6 फरवरी को घोषित किया गया था। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है। नीति और वित्तीय सुधार: मजबूत बुनियाद की ओरनीतिगत मोर्चे पर फिच का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। दिसंबर में दर में कटौती के बाद अब RBI नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई है और बजट में अधिक खर्च मदों को शामिल किया है। वहीं, तेज वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने से राजस्व भी मजबूत हुआ है, जिससे मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में मामूली गिरावट की संभावना बढ़ी है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज का जीडीपी अनुपात अभी भी उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है। 7.3 ट्रिलियन का सपना: कैसे बदल रही है इंडियन इकनॉमीभारत का इकनॉमिक ग्रोथ लगातार दुनिया का ध्यान खींच रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, देश 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विकास की यह रफ्तार निर्णायक नीति-निर्माण, संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते एकीकरण की मजबूती को दर्शाती है। तेज वृद्धि के साथ भारत ने एक बार फिर वैश्विक साथियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उछाल मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और बढ़ती श्रम भागीदारी पर टिकी है। घरेलू निवेश में आई तेजी और निवेशकों के मजबूत विश्वास से स्थिर और व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था की झलक मिलती है। जीडीपी आंकड़े: तेज छलांग का सबूतकुछ दिन पहले पीआईबी पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक जीडीपी 8.2% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 5.6% थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी, जो पिछले साल की समान तिमाही में 6.5% थी। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़े भी बताते हैं कि दूसरी तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र में 3.1%, द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% और सेवा क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई। पहली छमाही में 8% की रफ्तारवित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी 8% की दर से बढ़ी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.1% थी। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र में 2.9% की मध्यम वृद्धि हुई, जबकि द्वितीयक (7.6%) और तृतीयक क्षेत्र (9.3%) ने लगातार शानदार विस्तार किया।

लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य

नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2008 से चल रही लाडली योजना को 31 मार्च 2026 को बंद कर दिया जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से उसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना लागू होगी, जिसका उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता देना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इसे पूरी तरह डिजिटल मोड में लागू किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और सहजता बनी रहे। नई लखपति बिटिया योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा तक अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर कुल 56,000 रुपये जमा करेगी, जो समय के साथ मिलकर ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक हो सकते हैं। यह राशि सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। राशि निकासी की शर्तों के अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी होने और 12वीं पास करने पर या 21 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन/डिप्लोमा पूरा करने के बाद की जा सकेगी। इस योजना में राशि चरणबद्ध रूप से दी जाएगी। जन्म के समय 11,000 रुपये, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश पर 5,000-5,000 रुपये, कक्षा 10 पास करने पर 5,000 रुपये, कक्षा 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान 20,000 रुपये दिए जाएंगे। कुल मिलाकर 56,000 रुपये की सरकारी सहायता बेटियों के खाते में जमा होगी, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर करीब एक लाख रुपये बन सकती है। योजना का लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलेगा जिनका जन्म दिल्ली में हुआ है और जिनका परिवार कम से कम तीन साल से राजधानी में रह रहा है। परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और हर परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी। लाभार्थी को मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करनी होगी और पूरा टीकाकरण अनिवार्य है। 18 साल से पहले शादी हो जाने पर लाभ निरस्त कर दिया जाएगा; यदि निर्धारित शर्तों पर क्लेम समय पर नहीं किया गया तो राशि सरकार को वापस चली जाएगी। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या नई योजना में दोबारा आवेदन करना होगा? सरकार ने स्पष्ट कहा है कि लाडली योजना 31 मार्च 2026 को बंद होगी और नई लखपति बिटिया योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, इसलिए पात्र लाभार्थियों को इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे किसी सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई पात्र बेटियों को तय शर्तों के अनुसार आवेदन करना होगा। सरकार ने यह भी बताया है कि लाडली योजना के कई खाते मैच्योरिटी के बाद भी क्लेम नहीं किए गए थे। ऐसे लंबित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बड़ी राशि लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और लाडली योजना की अप्रयुक्त राशि को भी नई लखपति बिटिया योजना में समायोजित किया जाएगा ताकि बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग निरंतर जारी रह सके।

अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, BMC को चेतावनी कमिश्नर को घोड़े पर ऑफिस आना पड़ेगा

नई दिल्ली । मुंबई में सड़क अतिक्रमण की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC ब्रॉम्बे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़ी फटकार लगाई है। पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंद्र घुघे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि शिकायतों के बावजूद अतिक्रमण हटाने में लापरवाही चिंताजनक है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कमिश्नर को ‘घोड़े पर’ दफ्तर आना पड़ सकता है। पवई के हीरानंदानी इलाके की लगभग 90 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण की तस्वीरें कोर्ट में पेश की गईं। अदालत ने देखा कि फुटपाथ पर कई झुग्गियां बन गई हैं जिससे स्कूली बच्चों और आम जनता को चलने-फिरने में भारी परेशानी हो रही है। सड़क की चौड़ाई घटकर लगभग एक लेन रह गई है जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। जस्टिस घुघे ने कहा देखा जाए तो इस सड़क से चार कारें एक साथ गुजर सकती हैं लेकिन अब देखिए क्या हाल हो गया है यह घटकर सिर्फ एक लेन की रह गई है। मुझे तो यह सोचकर हैरानी होती है कि आने वाले सालों में क्या होगा लोगों को मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ेगी और साइकिल अपनानी होगी या फिर सबसे अच्छा विकल्प घोड़ा है घोड़ा भीड़-भाड़ में भी अच्छी तरह रास्ता निकाल लेता है। कल्पना कीजिए कि आपके BMC के कमिश्नर घोड़े पर बैठकर अपने ऑफिस आ रहे हैं तो वह कैसे लगेंगे। उन्होंने आगे कहा मुंबई को आखिर क्या होता जा रहा है? जैसे ही कोई सड़क बनती है लोग वहां आकर कब्जा जमा लेते हैं देखिए आप अपने ही शहर का क्या हाल कर रहे हैं। इतनी खूबसूरत सड़क है और आपने इसका क्या बना दिया है? हम नगर निगम के प्रमुख कमिश्नर या किसी भी अन्य अधिकारी को कोर्ट बुला सकते हैं और उनसे इस पर जवाब मांग सकते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कई बार शिकायतें और बैठकें की गईं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही कहा गया कि कुछ सिविक अथॉरिटीज अतिक्रमण को टैंकर से पानी सप्लाई और टॉयलेट की सुविधा देकर बढ़ावा दे रहे हैं। क्षेत्र में चार स्कूल होने के कारण माता-पिता के आने-जाने से वाहन अधिक होते हैं और अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ जाती है। हाईकोर्ट ने BMC की ओर से पेश वकील को निर्देशों के पालन के लिए समय दिया है और कार्रवाई की जानकारी अदालत में देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाया जाए और सड़क को सामान्य रूप से खुला सुनिश्चित किया जाए।

वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य -जिसने जलाई स्वतंत्रता की ज्वाला, अब उसे मिला औपचारिक सम्मान

नमो मात्रे पृथिव्ये, नमो मात्रे पृथिव्या:। माता पृथ्वी (मातृभूमि) को नमस्कार है, मातृभूमि को नमस्कार है।भारत की आत्मा में यदि कोई सबसे पवित्र भाव प्रवाहित होता है, तो वह है, मातृभूमि का भाव। यह भाव आज की राजनीति से नहीं, सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना से जन्मा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मातृदेवी की मूर्तियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वज धरती को उर्वरता और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में पूजते थे।अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त (12.1.12) में उद्घोष है , माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। अर्थात-धरती मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ। यह केवल मंत्र नहीं, भारतीय अस्मिता का मूल स्वर है। यस्यां वेदाः प्रतिष्ठिताः-जिस भूमि पर ज्ञान और संस्कृति प्रतिष्ठित हुई, वह केवल मिट्टी नहीं, चेतना है। भारत की हर परंपरा इस भाव की साक्षी है ,निर्माण से पहले भूमि-पूजन, किसान का बोआई से पहले मिट्टी को प्रणाम, गृहप्रवेश से पूर्व भूमि स्पर्श। यह सब बताता है कि जो हमें अन्न, जल और वायु देती है, वह पूज्य है। इसी मातृभाव को शब्द दिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने, अपने उपन्यास आनंदमठ में। वंदे मातरम् कोई कविता नहीं थी, यह राष्ट्रीय पुनर्जागरण का बिगुल था। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह स्वदेशी क्रांति का घोष बना। क्रांतिकारी फाँसी के फंदे पर झूलते हुए यही कहते थे , वंदे मातरम्! अरविंद घोष से लेकर भगत सिंह तक, इस गीत ने अनगिनत हृदयों में ज्वाला जलाई। यह जन-जन के कंठ की आवाज बन गया। औपनिवेशिक काल में सांप्रदायिक संवेदनशीलता और राजनीतिक संतुलन के कारण गीत के कुछ अंशों को सीमित किया गया। परंतु प्रश्न आज भी वही है-क्या मातृभूमि की वंदना किसी एक पंथ का विषय है? अनेक देशों के राष्ट्रगानों में भूमि और राष्ट्र की स्तुति है। यदि जन्मदात्री माँ का सम्मान स्वाभाविक है, तो धात्री माँ-जो हमें जीवन देती है-उसका सम्मान विवाद क्यों बने? दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था यदि ‘भारत माता’ में से ‘माता’ निकाल दें, तो ‘भारत’ का अर्थ ही नहीं रह जाता। यह कथन आज और भी प्रासंगिक प्रतीत होता है।आज की ऐतिहासिक घोषणाकेंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 वंदे मातरम् के संबंध में स्पष्ट और औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान, एकरूपता और गरिमा सुनिश्चित करना बताया गया नए दिशा-निर्देश : क्या-क्या अनिवार्य है?जब भी राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण का गायन या वादन होगा, सभी उपस्थित व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। यदि फिल्म, समाचार-फीचर या वृत्तचित्र के हिस्से के रूप में बजाया जाए, तो खड़े होना अनिवार्य नहीं है। अब वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाए/बजाए जाएंगे। जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) जो पहले प्रायः केवल पहले दो छंद (लगभग 65 सेकंड) उपयोग में आते थे। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम् उसके बाद जन गण मन होगा। वन्दे मातरम का गायन राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर, राष्ट्रपति/राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान पर , नागरिक सम्मान समारोह (जैसे पद्म पुरस्कार) , औपचारिक सरकारी कार्यक्रम , विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में और अन्य सार्वजनिक अवसर (सरकार के निर्देशानुसार) पर होगा। विद्यालयों में शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगीत से की जा सकती है। इस हेतु ध्वनि-प्रसारण की उचित व्यवस्था हो। गीत के शब्द प्रतिभागियों में वितरित किए जा सकते हैं। गायन सामूहिक और सम्मानपूर्ण हो। वंदे मातरम के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह मूल रूप से संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था। बंकिम चंद्र ने यह गीत हुगली नदी के किनारे, चिनसुरा (Chinsurah) में लिखा था, जो वर्तमान पश्चिम बंगाल में स्थित है। यह माना जाता है कि वंदे मातरम् की कल्पना बंकिम चंद्र को लगभग 1876 के आसपास तब हुई, जब वे ब्रिटिश शासन में जिला अधिकारी (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) के पद पर कार्यरत थे। यह गीत बंकिम चंद्र के उपन्यास आनंदमठ (प्रकाशित: 1882) से लिया गया है। गीत लिखे जाने के तुरंत बाद जदुनाथ भट्टाचार्य से इसे संगीतबद्ध (धुन तैयार करने) का अनुरोध किया गया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे जन गण मन (राष्ट्रीय गान) के साथ समान सम्मान प्रदान करते हुए राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। 1896 में कलकत्ता (कोलकाता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। यह प्रस्तुति रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी।इसका गद्य रूप में अंग्रेज़ी अनुवाद श्री अरविंद ने 20 नवंबर 1909 को अपनी पत्रिका कर्मयोगिन में प्रकाशित किया। 1896 – पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी गई 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् को सार्वजनिक रूप से गाया।1937 – सीमित उपयोग का निर्णय लिया गया, 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (कोलकाता/फैजपुर संदर्भ) ने निर्णय लिया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो छंद गाए जाएँ।प्रख्यात शास्त्रीय गायक ओंकारनाथ ठाकुर ने इस सीमित संस्करण का विरोध किया। उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन में गाने से इंकार कर दिया, परंतु अपने निजी संगीत समारोहों में पूरा वंदे मातरम् गाना जारी रखा। 15 अगस्त 1947 – ऐतिहासिक रेडियो प्रसारण इस दिन स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 1947) की सुबह आल इंडिया रेडियो से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया।प्रसिद्ध गायिका हीराबाई बड़ोदेकर ने इसे राग तिलक कामोद में प्रस्तुत किया (AIR दिल्ली) , दिलीपकुमार रॉय ने इसे ध्रुपद-धमार शैली में गाया। विष्णुपंत पागनीस ने ग्रामोफोन रिकॉर्ड में इसे राग सारंग में प्रस्तुत किया। केशवराव भोले ने इसे राग देशकार में रिकॉर्ड किया। वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना का प्रवाह है। नए दिशा-निर्देश इसे संस्थागत सम्मान देने का प्रयास हैं। पर एक मूल प्रश्न भी उठता है क्या अपनी ही धरा-माता के सम्मान के लिए कानून बनाना पड़े? सच यह है कि मातृभूमि का सम्मान हमारा जन्मजात कर्तव्य है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर तौलना उचित नहीं। स्वतंत्रता का अर्थ अनुशासनहीनता नहीं होता। माँ का सम्मान बहस का विषय नहीं, संस्कार का विषय है। वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं-भारतीयता का चिरंतन स्पंदन है। सिंधु सभ्यता से वेदों तक, स्वतंत्रता संग्राम से आज तक मातृभूमि का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल तत्व रहा है। आज जब छहों अंतरों के साथ इसे औपचारिक सम्मान मिला

पंजाब-दिल्ली में बड़े हमले की साजिश नाकाम, अमृतसर में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश

नई दिल्ली । पंजाब और दिल्ली को दहलाने की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है। अमृतसर में स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल ने पाकिस्तान समर्थित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक रिमोट कंट्रोल आईईडी विदेशी निर्मित पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस विस्फोटक खेप का इस्तेमाल पंजाब और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में बड़े हमलों के लिए किया जाना था। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि बरामद आतंकी सामग्री सीमा पार से पाकिस्तान की ओर से भेजी गई थी। गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर के सीधे संपर्क में था जो एक आतंकी नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी को इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए निर्देश दिए जा रहे थे। वह एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश कर रहा था। बरामद रिमोट कंट्रोल आईईडी इस बात का संकेत देता है कि किसी भीड़भाड़ वाले इलाके या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की योजना थी। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से संभावित बड़ा हमला टल गया। पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। यह भी जांच की जा रही है कि फंडिंग लॉजिस्टिक्स और हथियारों की सप्लाई की पूरी श्रृंखला कैसे संचालित हो रही थी। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े हो सकते हैं। हाल के दिनों में पंजाब में हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी की घटनाएं बढ़ी हैं। एक दिन पहले भी आरडीएक्स से बने एक आईईडी को बरामद कर बड़ी साजिश को विफल किया गया था। उस मामले में भी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था जिसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले थे। इसके अलावा अमृतसर क्षेत्र में सीमा पार से भेजे गए दो हैंड ग्रेनेड भी जब्त किए गए थे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के जरिए ड्रोन और अन्य माध्यमों से हथियारों की तस्करी की कोशिशें की जा रही हैं। पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चला रही हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी के नेटवर्क की परतें खोलने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Bharat Bandh: भारत बंद 12 फरवरी 2026 जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा

नई दिल्ली। गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में भारत बंद का असर दिखाई दे सकता है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 से अधिक राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन से यह हड़ताल आयोजित की गई है। इसे कृषि, ग्रामीण और अनौपचारिक श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया है। कौन-कौन से सेवाएं प्रभावित हो सकती हैंयातायात: बसें, टैक्सियां और लोकल ट्रेनें प्रभावित हो सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में “चक्का जाम” की संभावना।बैंकिंग: AIBEA, AIBOA और BEFI के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सार्वजनिक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी।बाजार और दुकानें: अधिकतर थोक और खुदरा दुकानें, रेस्तरां बंद रहने की संभावना।हवाई यात्रा: एयरपोर्ट खुले रहेंगे, लेकिन ट्रैफिक जाम के कारण अतिरिक्त समय लेने की सलाह। स्कूल और कॉलेजआधिकारिक अवकाश नहीं: भारत भर में स्कूल और कॉलेज खुलेंगे।स्थानीय असर: केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हड़ताल के कारण कुछ संस्थान बंद रह सकते हैं। यात्रियों के लिए सलाहसड़क अवरोध और विरोध प्रदर्शन के कारण यात्रा में विलंब की संभावना।रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखें।प्रभावित क्षेत्रों में राज्य संचालित बसें और ऑटो-रिक्शा सीमित हो सकते हैं। हड़ताल के पीछे कारण और मांगेनवंबर 2025 में लागू चार नए श्रम संहिता को वापस लेने की मांग।बीज विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक और पशु-अधिनियम को रद्द करने की मांग।MGNREGA की बहाली।विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का विरोध।इस हड़ताल में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC जैसे प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने SKM के समर्थन में देशभर के श्रमिकों, कर्मचारियों और किसानों को शामिल किया है।

MP WEATHER UPDATE: मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज: अगले दो दिन नहीं पड़ेगी तेज ठंड

WEATHER REPORT

MP WEATHER UPDATE: ग्वालियर। मध्य प्रदेश में अगले दो दिनों तक कड़ाके की ठंड से राहत रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बढ़ा तापमान दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर प्रदेश में दिख रहा है। इसके चलते ठंडी हवाओं की रफ्तार कम हुई है और दिन का तापमान बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन दिन में तेज धूप, रात और सुबह ठंड भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत कई शहरों में दिन में तेज धूप खिली रही। बता दें कि अधिकतम तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान ठंडा बना हुआ है। 13 से 15 फरवरी के बीच फिर बदलेगा मौसम मौसम वैज्ञानिक एच.एस. पांडे के मुताबिक, पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के बाद जैसे ही सिस्टम आगे बढ़ेगा, उत्तर से ठंडी हवाएं मध्य प्रदेश में प्रवेश करेंगी। इसका असर 13, 14 और 15 फरवरी को देखने को मिलेगा, जब तापमान में गिरावट आएगी और ठंड फिर बढ़ेगी। फिलहाल प्रदेश में बारिश के कोई संकेत नहीं हैं। इस्पात मंत्रालय ने 85 विशेष इस्पात परियोजनाओं के लिए 11,887 करोड़ रुपये के निवेश वाले एमओयू पर किए हस्ताक्षर 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे कटनी (करौंदी): 5.9°C शहडोल/खजुराहो: 6.4°C पचमढ़ी: 7.4°C अमरकंटक: 7.8°C दतिया: 8.1°C रीवा: 8.3°C भोपाल: 10.2°C ग्वालियर: 10.6°C इंदौर: 11.2°C जबलपुर: 11.4°C उज्जैन: 12.4°C देशभर में मौसम का हाल हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान 26–28°C राजस्थान-गुजरात में दिन का तापमान 30°C के करीब पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान 10–12°C दक्षिण भारत में मौसम शुष्क, तापमान सामान्य मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन

World Cancer Day 2026: भारत में हर दिन 4,000 से ज्यादा लोग हो रहे कैंसर का शिकार, आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

WORLD CANCER DAY

World Cancer Day 2026: मध्यप्रदेश। भारत में कैंसर एक गंभीर राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। हर दिन देश में 4,000 से ज्यादा लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। आज World Cancer Day के मौके पर सामने आए आंकड़े इस बीमारी की भयावह तस्वीर दिखाते हैं। कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि लाखों भारतीय परिवारों की रोज़ की लड़ाई बन चुका है। MORENA CRIMES: दलित युवक के साथ अमानवीय व्यवहार, मुर्गा बनाकर पीटा; वीडियो सामने आने पर आरोपी गिरफ्तार हर साल बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने 2025 तक भारत में कैंसर के मामलों में 2020 की तुलना में 12.8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावनाएं जताई थी , हालाँकि अभी तक ये आकड़ा सामने नहीं आया है। इससे पहले साल 2024 में देश में कैंसर के 15 लाख 33 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए थे। अगर पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में हर साल औसतन 30 से 35 हजार नए कैंसर मरीज बढ़ रहे हैं। भारत में सबसे ज्यादा कौन-सा कैंसर होता है? आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर है। वहीं पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है, जिसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू, गुटखा और पान मसाले का बढ़ता सेवन है। Sanitation workers’ protest: 3 महीने से वेतन नहीं मिलने पर भड़के सफाईकर्मी, विधायक बाबू जंडेल का अल्टीमेटम: 4 दिन में पेमेंट नहीं तो FIR इसके अलावा फेफड़ों का कैंसर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी मुख्य वजह धूम्रपान और बढ़ता वायु प्रदूषण मानी जा रही है। वहीं सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर और लिवर कैंसर भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। इन राज्यों में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा कैंसर मामलों वाला राज्य बन चुका है। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे बड़े राज्य कैंसर के मामलों में टॉप पर हैं। CENTRAL BUDGET 2026: टैक्स शेयर घटा, लेकिन विकास की उम्मीद कायम: बजट 2026 में मध्य प्रदेश को कितना नुकसान और कहां से मिल सकती है राहत! बड़े शहरों में भी बढ़ रहा खतरा शहरों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां साल 2024 में 28 हजार से ज्यादा कैंसर के मामले सामने आए। इसके अलावा मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में भी कैंसर के केस लगातार बढ़ रहे हैं।