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शूटिंग खत्म, लेकिन किस्मत अटकी-आज तक रिलीज नहीं हो पाईं ये फिल्में

नई दिल्ली। बॉलीवुड में फिल्म बनाना लंबी और मेहनत भरी प्रक्रिया होती है—स्टार्स, डायरेक्टर्स और पूरी टीम सालों तक काम करती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि शूटिंग पूरी होने के बावजूद फिल्में रिलीज तक नहीं पहुंच पातीं। आज हम आपको ऐसी ही फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जो बनकर तैयार हैं लेकिन अब तक पर्दे से दूर हैं। Chakda ‘Xpress – अनुष्का शर्मा का रुका हुआ कमबैक Anushka Sharma ने इस फिल्म की शूटिंग साल 2022 में पूरी कर ली थी। इसमें वह भारतीय महिला क्रिकेटर Jhulan Goswami का किरदार निभा रही हैं। फिल्म को Netflix पर रिलीज होना था और इसे अनुष्का के कमबैक के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब तक इसकी रिलीज डेट सामने नहीं आई है। The Battle of Bhima Koregaon – ऐतिहासिक कहानी, रिलीज अटकी इस फिल्म में Arjun Rampal लीड रोल में हैं। कहानी 1818 की ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है, जिसमें सिद्धनक महार की वीरता को दिखाया गया है। फिल्म की शूटिंग काफी पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसकी रिलीज को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। Sanaa – फेस्टिवल में तारीफ, थिएटर में इंतजार Radhika Madan स्टारर इस फिल्म का प्रीमियर कई फिल्म फेस्टिवल्स में हो चुका है और इसे सराहना भी मिली। बावजूद इसके, फिल्म अब तक थिएटर या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं हो पाई है। Section 84 – अमिताभ बच्चन की फिल्म पर सस्पेंस Amitabh Bachchan, Abhishek Banerjee और Diana Penty स्टारर इस फिल्म की शूटिंग 2023 में पूरी हो चुकी थी। लेकिन अब तक मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। Shlok – The Desi Sherlock – बॉबी देओल की स्पाई थ्रिलर अटकी Bobby Deol की यह स्पाई थ्रिलर फिल्म 2022 में ही बनकर तैयार हो गई थी। इसे Kunal Kohli ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म के जरिए Ananya Birla ने एक्टिंग डेब्यू किया था, लेकिन रिलीज अब तक नहीं हो सकी। Shoebite – पूरी फिल्म, फिर भी रिलीज नहीं Amitabh Bachchan की यह फिल्म Shoojit Sircar के निर्देशन में बनी थी। फिल्म पूरी तरह तैयार है, लेकिन कानूनी और प्रोडक्शन से जुड़े कारणों के चलते यह आज तक रिलीज नहीं हो पाई। इन फिल्मों का अटका रहना यह दिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ शूटिंग पूरी होना ही काफी नहीं होता। रिलीज के लिए कई और पहलुओं का सही होना जरूरी है चाहे वह कानूनी मुद्दे हों, प्लेटफॉर्म की रणनीति या मार्केटिंग प्लान।

रियलिज़्म के नाम पर बिंदास भाषा, इन फिल्मों ने मचा दी थी सनसनी

नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ अपनी कहानी से ज्यादा संवादों में इस्तेमाल हुई गालियों को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है—कुछ लोग इसे रियलिस्टिक बताते हैं तो कुछ इसे ओवरडोज मानते हैं। हालांकि, फिल्मों में कच्ची और तीखी भाषा का इस्तेमाल कोई नया ट्रेंड नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसी फिल्में आ चुकी हैं जिन्होंने अपनी बोल्ड डायलॉग डिलीवरी से सिनेमा में अलग पहचान बनाई। Gangs of Wasseypur – देसी गालियों का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’Anurag Kashyap की इस फिल्म को गालियों के इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। बिहार की देहाती भाषा और कच्चे संवादों ने फिल्म को रियल और रॉ बना दिया। यहां गालियां सिर्फ शब्द नहीं थीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बन गईं। Delhi Belly – शहरी स्लैंग का बेबाक अंदाजAamir Khan के प्रोडक्शन में बनी इस डार्क कॉमेडी फिल्म ने शहरी गालियों को मेनस्ट्रीम में ला दिया। ‘एफ-वर्ड’ जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल उस समय काफी चौंकाने वाला था, लेकिन युवाओं ने इसे खूब पसंद किया। Omkara – देसी बोली में तीखापनVishal Bhardwaj ने शेक्सपियर के ‘ओथेलो’ को देसी अंदाज में पेश करते हुए उत्तर प्रदेश की कड़क भाषा और गालियों का इस्तेमाल किया। इससे किरदार और भी असली और प्रभावशाली लगे। Bandit Queen – विवादों में घिरी कड़वी सच्चाईShekhar Kapur की इस फिल्म में फूलन देवी की जिंदगी को बिना किसी लाग-लपेट के दिखाया गया। इसकी भाषा और सीन्स को लेकर सेंसर बोर्ड से लंबी लड़ाई चली, लेकिन फिल्म ने सिनेमा में रियलिज्म की नई परिभाषा दी। Udta Punjab – सिस्टम की सच्चाई दिखाती कच्ची भाषापंजाब के ड्रग संकट पर बनी इस फिल्म में किरदारों की हताशा और गुस्से को दिखाने के लिए गालियों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। सेंसर बोर्ड के साथ इसकी लड़ाई भी काफी चर्चा में रही। Satya – अंडरवर्ल्ड की असली भाषाRam Gopal Varma की इस कल्ट क्लासिक फिल्म में मुंबई अंडरवर्ल्ड की कड़वी हकीकत को दिखाने के लिए सड़कछाप भाषा और गालियों का बेहतरीन इस्तेमाल हुआ। इससे किरदारों की खौफनाक छवि और मजबूत बनी। Animal – एग्रेसिव भाषा का नया ट्रेंडRanbir Kapoor स्टारर इस फिल्म ने हाल के समय में अपने हिंसक संवादों और तीखी भाषा से काफी विवाद खड़ा किया। Sandeep Reddy Vanga की इस फिल्म ने बड़े बजट के सिनेमा में ‘वर्बल एग्रेसन’ को नया आयाम दिया। ‘धुरंधर’ को लेकर चल रही बहस के बीच यह साफ है कि फिल्मों में गालियों का इस्तेमाल हमेशा से कहानी को ज्यादा रियल और प्रभावी बनाने के लिए किया जाता रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि समय के साथ इसकी तीव्रता और स्वीकार्यता बदलती गई है।

गेम शो मनोरंजन में एक बार फिर नया रोमांच लेकर लौट रहा है व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया..

नई दिल्ली: टेलीविजन की दुनिया में मनोरंजन और गेम शो फॉर्मेट का आकर्षण एक बार फिर नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है क्योंकि लोकप्रिय शो व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया का दूसरा सीजन जल्द ही दर्शकों के सामने आने की तैयारी में है। पहले सीजन की मजबूत लोकप्रियता और लगातार मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इसके नए संस्करण को हरी झंडी मिल चुकी है। इस बार भी अभिनेता अक्षय कुमार शो के होस्ट के रूप में वापसी करते नजर आएंगे और दर्शकों को एक बार फिर उनके अंदाज में मनोरंजन और रोमांच का मिश्रण देखने को मिलेगा। पहला सीजन इस साल की शुरुआत में प्रसारित हुआ था और इसे दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था। शो का फॉर्मेट, जिसमें प्रतिभागियों को पहेलियों और भाग्य आधारित राउंड्स के माध्यम से इनाम जीतने का मौका मिलता है, भारतीय दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ। अक्षय कुमार की सहज प्रस्तुति और प्रतिभागियों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार शो की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज संवाद शैली ने कार्यक्रम को पारिवारिक मनोरंजन का स्वरूप दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध इस गेम शो का भारतीय संस्करण लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसका मूल फॉर्मेट कई दशकों से वैश्विक टेलीविजन पर लोकप्रियता बनाए हुए है और भारत में इसके अनुकूलन ने इसे नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाया है। प्राइज आधारित गेम शो का भारतीय टेलीविजन पर हमेशा से खास स्थान रहा है और इसी श्रेणी में यह शो भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। अक्षय कुमार के लिए टेलीविजन होस्टिंग कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वे कई रियलिटी और गेम आधारित कार्यक्रमों में होस्ट की भूमिका निभा चुके हैं, जहां उनकी उपस्थिति ने शो की लोकप्रियता को बढ़ाया। उनकी शैली में सादगी और मनोरंजन का संतुलन देखने को मिलता है, जो दर्शकों को जोड़कर रखने में मदद करता है। व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया में भी उन्होंने इसी अंदाज को अपनाया और शो को एक अलग पहचान दी। दूसरे सीजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और शो के प्रारूप को और अधिक रोचक बनाने पर काम किया जा रहा है। प्रोडक्शन टीम का उद्देश्य है कि इस बार कार्यक्रम को और अधिक इंटरैक्टिव और रोमांचक बनाया जाए ताकि दर्शकों की भागीदारी और रुचि दोनों बढ़ सकें। टीवी इंडस्ट्री में गेम शो की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इस नए सीजन से काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। टेलीविजन पर लगातार बदलते मनोरंजन के स्वरूप के बीच व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया जैसे कार्यक्रम दर्शकों को हल्के-फुल्के और पारिवारिक मनोरंजन का विकल्प प्रदान करते हैं। अक्षय कुमार की वापसी इस शो को एक बार फिर चर्चा में ले आई है और दर्शकों में नए सीजन को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है।है।

फर्श से अर्श तक अरशद वारसी का प्रेरणादायक सफर अनाथपन से कॉमेडी के शिखर तक पहुंची एक असाधारण कहानी..

नई दिल्ली: बॉलीवुड में अपनी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय से अलग पहचान बनाने वाले अरशद वारसी का जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरक कहानी है। मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट के किरदार और गोलमाल सीरीज में माधव जैसे रोल ने उन्हें कॉमेडी के क्षेत्र में मजबूत स्थान दिलाया। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था और इसके पीछे गहरी व्यक्तिगत चुनौतियां और कठिन जीवन परिस्थितियां छिपी हैं। अरशद वारसी का बचपन संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में उन्होंने माता पिता की गंभीर बीमारियों का सामना देखा। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और घर में संसाधनों की कमी थी। उनके पिता व्यापार में असफल रहे और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे जबकि उनकी मां लंबे समय तक किडनी की बीमारी से पीड़ित रहीं। नियमित डायलिसिस की वजह से परिवार पर आर्थिक दबाव बना रहता था। इस स्थिति में अरशद ने छोटी उम्र में काम करना शुरू किया और जिम्मेदारियां समय से पहले समझ लीं। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे अकेलेपन से जूझते रहे और खुद को लिखकर व्यक्त करने की आदत विकसित की। अरशद ने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा और मंच पर प्रदर्शन करने लगे। यहीं से उनकी आय का छोटा जरिया बना लेकिन पारिवारिक हालात लगातार चुनौतीपूर्ण रहे। माता पिता के निधन ने उन्हें गहरे स्तर पर प्रभावित किया और जीवन को नए सिरे से समझने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और काम की तलाश में फिल्मी दुनिया की ओर रुख किया। संघर्ष के दौर में उन्हें कई छोटे बड़े काम करने पड़े लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे। फिल्मी करियर की शुरुआत में उन्हें छोटे भूमिकाओं में काम मिला और धीरे धीरे अनुभव बढ़ता गया। शुरुआती संघर्षों के बावजूद उन्होंने अभिनय को सीखने और सुधारने की प्रक्रिया जारी रखी। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें ऐसे किरदार मिलने लगे जिन्होंने उन्हें पहचान दिलाई। अरशद वारसी के करियर का बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट का किरदार मिला। इस भूमिका ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद गोलमाल सीरीज में माधव का किरदार निभाकर उन्होंने कॉमेडी शैली में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। इन किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी कलाकारों में शामिल कर दिया। आज अरशद वारसी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों से निकलकर मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बनाई। उनका सफर यह दिखाता है कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, लगन और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।

अभिनय और किरदार की सच्चाई को लेकर अभिनेत्री ने खोला अपने अनुभवों का राज..

नई दिल्ली: 1993 में रिलीज हुई फिल्म खलनायिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इससे जुड़ा एक पुराना दृश्य और अभिनेत्री अनु अग्रवाल की हालिया टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आई है। आशिकी से पहचान बनाने वाली अनु अग्रवाल ने इस फिल्म में अपने किरदार और उस समय चर्चा में रहे एक विशेष सीन को लेकर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि जिसे उस समय विवादित या बोल्ड माना गया था, वह उनके लिए केवल कहानी और किरदार की स्वाभाविक मांग थी। अनु अग्रवाल ने बताया कि खलनायिका में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो परिस्थितियों और कहानी के अनुसार जटिल भावनाओं से गुजरती है। फिल्म के एक दृश्य में उन्हें एक बच्चे को दूध पिलाते हुए दिखाया गया था, जिसे लेकर उस समय काफी बहस हुई थी। हालांकि अभिनेत्री का मानना है कि अभिनय का उद्देश्य किसी दृश्य को बाहरी नजर से जज करना नहीं होता, बल्कि उसे किरदार की परिस्थिति में समझकर निभाना होता है। उनका कहना है कि एक कलाकार को अक्सर अपनी व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर किरदार की भावनाओं और कहानी की जरूरतों के अनुसार काम करना पड़ता है। इसी कारण उन्होंने उस दृश्य को भी सामान्य अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा माना और उसे उसी दृष्टिकोण से निभाया। फिल्म खलनायिका एक ऐसी कहानी पर आधारित थी जिसमें एक महिला अपने जीवन में मिले संघर्षों और अन्याय के बाद बदले की भावना से आगे बढ़ती है। कहानी में कई भावनात्मक और तीव्र मोड़ शामिल थे, जिनके कारण फिल्म अपने समय में चर्चा का विषय बनी रही। अनु अग्रवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी और उस दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम करके अपनी पहचान बनाई। बाद में एक गंभीर दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल दिया, लेकिन वे समय समय पर अपने अनुभवों और फिल्मों से जुड़े पुराने पलों को साझा करती रहती हैं। उनका कहना है कि फिल्मों में हर दृश्य को कहानी और किरदार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि अभिनय केवल अभिनय नहीं बल्कि एक परिस्थिति को जीने की प्रक्रिया होती है।

करोड़ों के नुकसान की परवाह नहीं, शक्तिमान के लिए रणवीर फिट नहीं, मुकेश खन्ना का बड़ा बयान

नई दिल्ली । भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय सुपरहीरो शो शक्तिमान को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है और इसकी वजह हैं इसके मूल कलाकार मुकेश खन्ना जिनका रुख अब भी पहले की तरह सख्त नजर आ रहा है। लंबे समय से इस शो के रीबूट की खबरें सामने आती रही हैं और इसमें रणवीर सिंह के मुख्य भूमिका निभाने की अटकलें भी जोरों पर थीं लेकिन मुकेश खन्ना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह रणवीर को शक्तिमान के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। हाल ही में एक बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना ने रणवीर सिंह की प्रतिभा की सराहना जरूर की लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि शक्तिमान का किरदार निभाना सिर्फ अभिनय का मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि रणवीर एक शानदार अभिनेता हैं जिनमें जबरदस्त ऊर्जा है और वे अलग अलग तरह के किरदार निभा सकते हैं लेकिन शक्तिमान के लिए एक खास व्यक्तित्व और छवि की जरूरत होती है जो हर किसी में नहीं होती। मुकेश खन्ना ने इस दौरान यह भी कहा कि वह इस भूमिका के लिए किसी बड़े स्टार या पहले से स्थापित छवि वाले अभिनेता को नहीं लेना चाहते। उनके मुताबिक शक्तिमान ऐसा किरदार है जिसे एक साफ सुथरी और प्रेरणादायक छवि वाले नए चेहरे की जरूरत है ताकि दर्शक उसे उसी रूप में स्वीकार कर सकें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह पूरे देश में ऑडिशन लेकर एक नया चेहरा तलाश करेंगे जो इस किरदार के साथ न्याय कर सके। बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्म पृथ्वीराज में अक्षय कुमार के लुक पर भी तंज कसते हुए कहा कि ऐतिहासिक और आइकॉनिक किरदार निभाने के लिए सिर्फ कॉस्ट्यूम काफी नहीं होता बल्कि उस किरदार जैसा व्यक्तित्व भी दिखना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने ऐतिहासिक किरदार निभाए थे तो तैयार होने में लंबा समय लगता था और वह पूरी तरह उस किरदार में ढल जाते थे। मुकेश खन्ना ने यह भी माना कि उनके इस सख्त रुख के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि बड़ी प्रोडक्शन कंपनियां इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखा रही हैं। सोनी पिक्चर्स इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित बताया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद मुकेश अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आदित्य चोपड़ा ने भी पहले शक्तिमान के राइट्स लेने में दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि वह इस किरदार को किसी ऐसे रूप में नहीं देखना चाहते जो इसकी मूल भावना से अलग हो जाए। इस पूरे विवाद के बीच यह साफ है कि शक्तिमान का रीबूट अभी भी अनिश्चितताओं में घिरा हुआ है। जहां एक तरफ दर्शक अपने पसंदीदा सुपरहीरो को नए अवतार में देखने के लिए उत्साहित हैं वहीं दूसरी तरफ मुकेश खन्ना की शर्तें इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने से रोकती नजर आ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शक्तिमान को नया चेहरा मिल पाता है या यह परियोजना इसी तरह विवादों में उलझी रहती है।

350 साल पुरानी रहस्यमयी हवेली जहां फिर जगा अक्षय और प्रियदर्शन का जादू

नई दिल्ली । बॉलीवुड में हॉरर कॉमेडी का जादू एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आया है और इस बार भी केंद्र में हैं अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी। उनकी नई फिल्म भूत बंगला रिलीज के साथ ही चर्चा में है लेकिन फिल्म की कहानी से ज्यादा जिस चीज ने दर्शकों का ध्यान खींचा है वह है इसकी रहस्यमयी हवेली जो खुद में एक इतिहास समेटे हुए है। यह वही भव्य और खौफनाक हवेली है जिसे दर्शक पहले भूल भुलैया में देख चुके हैं। उस फिल्म में भी इस लोकेशन ने कहानी को एक अलग ही आयाम दिया था। अब करीब दो दशक बाद उसी जगह पर फिर से शूटिंग करके मेकर्स ने पुरानी यादों को ताजा करने की कोशिश की है। यही वजह है कि दर्शकों के बीच इस फिल्म की तुलना लगातार भूल भुलैया से की जा रही है। जयपुर के पास स्थित यह ऐतिहासिक इमारत दरअसल चोमू पैलेस के नाम से जानी जाती है। करीब 350 साल पुरानी इस हवेली का निर्माण 16वीं शताब्दी में शुरू हुआ था और समय के साथ इसमें कई बदलाव किए गए। कभी यह शाही परिवार का निवास हुआ करता था जहां दरबार और भव्य समारोह आयोजित होते थे। इसकी विशाल गलियां, ऊंची छतें और जटिल वास्तुकला इसे रहस्यमयी और सिनेमाई बनाती हैं। 20वीं शताब्दी में इस हवेली को नया रूप दिया गया और बाद में इसे एक हेरिटेज होटल में बदल दिया गया। आज भी इसकी मूल संरचना और शाही ठाठ बरकरार हैं, जो फिल्म निर्माताओं को खासा आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग यहां हो चुकी है और हर बार यह लोकेशन कहानी में जान डाल देती है। अक्षय कुमार के लिए यह हवेली सिर्फ एक शूटिंग लोकेशन नहीं बल्कि एक लकी चार्म भी मानी जा रही है। भूल भुलैया की बड़ी सफलता के बाद अब भूत बंगला के जरिए उसी जादू को दोहराने की कोशिश की गई है। फिल्म में हॉरर और कॉमेडी का मिश्रण है जिसमें पुराने कलाकारों की झलक भी देखने को मिलती है। फिल्म की शुरुआती कमाई भी ठीकठाक रही है और रिलीज के दो दिनों में इसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया है। अब नजरें इसके पहले वीकेंड पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि फिल्म दर्शकों के दिल में कितनी जगह बना पाती है। कुल मिलाकर भूत बंगला सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक यादों और इतिहास से जुड़ी यात्रा भी है जहां 350 साल पुरानी हवेली एक बार फिर अपनी रहस्यमयी कहानी के साथ दर्शकों को डराने और मनोरंजन करने के लिए तैयार खड़ी है।

90 के दशक का काला सच राम गोपाल वर्मा का बड़ा खुलासा क्यों बने थे गुलशन कुमार अंडरवर्ल्ड का निशाना

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में 1990 का दशक एक ऐसा दौर रहा है जब फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ रचनात्मकता और स्टारडम तक सीमित नहीं थी बल्कि उस पर अंडरवर्ल्ड का गहरा साया भी मंडरा रहा था इसी दौर को याद करते हुए फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं उन्होंने बताया कि उस समय मुंबई का अंडरवर्ल्ड केवल पैसा कमाने तक सीमित नहीं था बल्कि वह फिल्म इंडस्ट्री पर अपना नियंत्रण और दबदबा स्थापित करना चाहता था राम गोपाल वर्मा ने लेखक हुसैन ज़ैदी के साथ बातचीत में कहा कि अंडरवर्ल्ड की हर कार्रवाई सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होती थी गैंगस्टर बड़े और असरदार नामों को घुमाकर इंडस्ट्री में डर का माहौल बनाती थी ताकि बाकी लोग अपने आप उनके दबाव में आ जाएं उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शाहरुख खान सलमान खान और राकेश रोशन जैसे बड़े नामों को एडजस्ट करना इसी रणनीति का हिस्सा था। उनके अनुसार अंडरवर्ल्ड का मकसद केवल वसूली नहीं था बल्कि सत्ता और कंट्रोल हासिल करना भी था जब कोई बड़ा सितारा या फिल्ममेकर उनकी बात सहमत से मना करता था तो उसे एक उदाहरण बनाने की कोशिश की जाती थी ताकि बाकी लोग डर जाएं यह डर ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता था। इसी संदर्भ में उन्होंने साल 2000 में राकेश रोशन पर हुए हमले का जिक्र किया यह हमला फिल्म कहो ना… प्यार है की जबरदस्त कामयाबी के तुरंत बाद हुआ था बताया जाता है कि अंडरवर्ल्ड फिल्म की तारीखों और काम पर कंट्रोल चाहता था और जब इसका विरोध किया गया तो 21 जनवरी 2000 को उनके ऑफिस के बाहर प्रवर्तन की घटना सामने आई हालांकि किस्मत से वह इस हमले में बच गए। वहीं 1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या को लेकर भी राम गोपाल वर्मा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गुलशन कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव उन्हें अंडरवर्ल्ड के निशाने पर ले आया था। उनके अनुसार अबू सलेम जैसे अपराधियों के लिए यह घटना अपनी ताकत और पहचान स्थापित करने का एक जरिया भी रही होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गुलशन कुमार ने कथित तौर पर जबरन वसूली की संस्थाओं के आगे झुकने से इनकार कर दिया था और यही उनके खिलाफ साजिश की एक बड़ी वजह बन सकती है उस दौर में जो भी व्यक्ति दबाव के आगे नहीं झुकता था उसे अंजाम देने के लिए तैयार रहना पड़ता था यह पूरी घटना उस समय के बॉलीवुड की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जब फिल्म इंडस्ट्री को सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि अपराध जगत के प्रभाव का भी सामना करना पड़ रहा था राम गोपाल वर्मा के ये खुलेसे न केवल उस दौर की जलनता को सामने लाते हैं बल्कि यह भी बताते हैं कि किस तरह डर और दबाव के जरिए एक पूरी इंडस्ट्री को प्रभावित करने की कोशिश की गई

कद छोटा लेकिन हौसला आसमान से ऊंचा राजपाल यादव ने संघर्ष और सम्मान पर कही बड़ी बात

नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मशहूर अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं उनकी हालिया रिलीज फिल्म भूत बंगला में उनकी दमदार कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है लंबे समय बाद उन्हें बड़े पर्दे पर देखकर उनके फैंस भी खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं फिल्म में अक्षय कुमार के साथ उनकी जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने में कामयाब रही है और यही वजह है कि राजपाल यादव की वापसी को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है लेकिन इस बीच उन्होंने अपने निजी जीवन और करियर से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं पर खुलकर बात की है जो उनके संघर्ष और सोच को गहराई से उजागर करते हैं हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने अपनी हाइट को लेकर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पांच फीट दो इंच के हैं और उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया उनके अनुसार उनकी मां का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनकी मां हमेशा उन्हें आसमान जितना ऊंचा बनने का आशीर्वाद देती थीं और वही सोच उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही राजपाल यादव ने यह भी बताया कि समाज में लोगों का नजरिया अक्सर व्यक्तित्व के आधार पर बदल जाता है उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लोगों को हंसाता है सहज रहता है और विनम्र होता है उसे कई बार हल्के में लिया जाता है जबकि गंभीर और एटीट्यूड वाले लोगों को ज्यादा सम्मान दिया जाता है यह सोच कहीं न कहीं उन्हें अंदर तक प्रभावित करती है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमतर नहीं समझा उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें कभी अपनी हाइट या अपनी पहचान को लेकर कोई कॉम्प्लेक्स नहीं हुआ लोग उन्हें कॉमेडियन कहते हैं या अच्छा इंसान बताते हैं तो वह इसे प्रसाद की तरह स्वीकार करते हैं उनके लिए यह सम्मान की बात है कि वह लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला पाते हैं उनकी यह सोच न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि सफलता केवल बाहरी रूप या कद से नहीं बल्कि आत्मविश्वास और मेहनत से हासिल होती है राजपाल यादव का यह बयान उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो किसी न किसी वजह से खुद को कम आंकते हैं विवादों और मुश्किल दौर के बाद एक बार फिर से दर्शकों के दिलों में जगह बनाना आसान नहीं होता लेकिन राजपाल यादव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है उनका सफर यह बताता है कि असली ऊंचाई इंसान के कद में नहीं बल्कि उसके हौसले और सोच में होती है

मटका किंग सीजन 2 में और भी गहराई के साथ नजर आएगा विनीत कुमार सिंह का किरदार..

नई दिल्ली: वेब सीरीज मटका किंग को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसके दूसरे सीजन से जुड़ी चर्चाओं ने माहौल को और भी रोमांचक बना दिया है। सीरीज में अहम भूमिका निभा रहे अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने अपने किरदार को लेकर ऐसे संकेत दिए हैं जिससे दर्शकों की उम्मीदें और अधिक बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि दूसरे सीजन में उनका किरदार दारब अहमद वडकर कहानी में और भी गहराई और प्रभाव के साथ नजर आएगा। विनीत कुमार सिंह के अनुसार मटका किंग उनके करियर के लिए एक बेहद खास प्रोजेक्ट है। उन्होंने बताया कि इस सीरीज की शूटिंग वर्ष 2025 में पूरी की गई थी और पहले सीजन में उनका किरदार सीमित उपस्थिति के साथ नजर आता है। हालांकि दूसरे सीजन में उनकी भूमिका का विस्तार कहानी को नई दिशा देगा और दर्शकों को किरदार की नई परतें देखने को मिलेंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल वे अधिक जानकारी साझा नहीं करना चाहते क्योंकि कहानी से जुड़े कई अहम मोड़ अभी सामने आना बाकी हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा है और इसके जरिए उन्हें ऐसे रचनात्मक माहौल में काम करने का अवसर मिला जहां किरदारों को विस्तार से गढ़ा गया है। उनके अनुसार दूसरे सीजन में कहानी और भी जटिल और रोचक रूप में सामने आएगी, जिससे दर्शकों की रुचि बनी रहेगी। मुख्य अभिनेता विजय वर्मा ने भी शूटिंग के दौरान अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि सेट पर पुराने समय की कई विंटेज कारों का इस्तेमाल किया गया था, जिसने उस दौर के माहौल को जीवंत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। इन कारों की बनावट और इतिहास ने उन्हें काफी प्रभावित किया और शूटिंग का अनुभव और भी वास्तविक बना दिया। मटका किंग की कहानी मटका सट्टेबाजी की दुनिया की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें उस समय की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी दर्शाया गया है। पहले सीजन में कहानी की नींव रखी गई थी, जबकि दूसरे सीजन में किरदारों के बीच संबंध और घटनाओं की परतें और अधिक गहराई से सामने आने की उम्मीद है। इस सीरीज ने अपने विषय और प्रस्तुति के कारण पहले ही दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है और अब दूसरे सीजन को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।