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‘मेरे पिता पाकिस्तान नहीं गए’! Rakesh Bedi का Nabil Gabol को करारा जवाब

नई दिल्ली। फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अभिनेता राकेश बेदी का एक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। उन्होंने पाकिस्तानी नेता नबील गबोल के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि फिल्म में उनका किरदार कहीं न कहीं उनसे प्रेरित है। इस पर राकेश बेदी ने बेहद सहज और मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा-“मेरी शक्ल आपसे मिलती जरूर है, लेकिन मेरे पिता कभी पाकिस्तान नहीं गए।” दरअसल, ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ भले ही पाकिस्तान में बैन रही हों, लेकिन वहां के दर्शकों के बीच इन फिल्मों को लेकर काफी दिलचस्पी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें पाकिस्तान के लोग फिल्म के किरदारों पर प्रतिक्रिया देते नजर आए। इन वीडियो में नबील गबोल के बयान भी चर्चा में आए, जहां उन्होंने कहा कि राकेश बेदी का किरदार ‘जमील जमाली’ उनके व्यक्तित्व से मिलता-जुलता है, हालांकि फिल्म में इसे हास्य रूप में पेश किया गया। इंटरव्यू में सामने आया पूरा मामलाएक इंटरव्यू के दौरान जब राकेश बेदी को नबील गबोल के बयान के बारे में बताया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं भी कहना चाहूंगा—आई लव यू, नबील गबोल साहब।” उनके इस जवाब ने माहौल को हल्का बना दिया और दर्शकों के बीच यह बयान खूब पसंद किया जा रहा है। “शक्ल मिलना इत्तेफाक है”राकेश बेदी ने आगे स्पष्ट किया कि किसी से शक्ल मिलना महज एक इत्तेफाक होता है। उन्होंने कहा कि “हो सकता है कि हमारी शक्लें कुछ हद तक मिलती हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई सीधा संबंध है। ना आपके पिता भारत आए, ना मेरे पिता पाकिस्तान गए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिल्म में उनके पहनावे और अंदाज ने भी इस समानता को और बढ़ा दिया। विवाद से ज्यादा मजाक में लिया बयानपूरे मामले में खास बात यह रही कि राकेश बेदी ने इस मुद्दे को विवाद बनाने के बजाय हंसी-मजाक में लिया। उनके जवाब से यह साफ हो गया कि वे इस तुलना को गंभीरता से नहीं लेते, बल्कि इसे एक दिलचस्प संयोग मानते हैं। सोशल मीडिया पर छाया बयानराकेश बेदी का यह हल्का-फुल्का अंदाज अब सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। फैंस उनके इस जवाब को पसंद कर रहे हैं और इसे एक सकारात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर देख रहे हैं, जहां किसी संभावित विवाद को हंसी में टाल दिया गया।

रामायण में हनुमान बनेंगे सनी देओल, एक्‍टर के सामने दारा सिंह की यादों बनाए रखने की चुनौती

नई दिल्ली। रामायण की महान गाथा अब बड़े पर्दे पर लौट रही है। डायरेक्टर नितेश तिवारी और रणबीर कपूर मिलकर रामायण फिल्म ला रहे हैं, जिसमें भगवान राम की भूमिका में रणबीर नजर आएंगे। हनुमान जयंती पर फिल्म की पहली झलक रिलीज़ हुई है, जिसमें राम बने रणबीर दिखाई दे रहे हैं। इस झलक के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया है। हनुमान जी की भूमिका में नजर आएंगे सनी देओल फिल्म में हनुमान जी की भूमिका में सनी देओल नजर आएंगे। सनी देओल की छवि हमेशा ताकतवर और जोशीले किरदार वाली रही है, इसलिए कई लोगों का मानना है कि हनुमान के रोल में उनकी कास्टिंग उपयुक्त है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सनी दारा सिंह जैसे अपनी छाप लोगों के दिलों में छोड़ पाएंगे? दारा सिंह ने रामानंद सागर की रामायण में हनुमान बनकर सभी का दिल जीत लिया था। इस रोल के लिए उन्हें 60-62 साल की उम्र में भी घंटों बैठकर गेटअप तैयार करना पड़ता था। उनके चेहरे पर मोल्ड मास्क लगाया जाता, पूंछ और मेकअप के कारण उन्हें खाने-पीने और बैठने में तकलीफ होती। पूरी तैयारी में उन्हें 3-4 घंटे लगते थे। स्मरणीय मेहनत और श्रद्धा दारा सिंह की मेहनत और श्रद्धा के चलते हनुमान का किरदार आज भी यादगार है। अब सनी देओल पर जिम्मेदारी होगी कि वे इस किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत कर सकें। फिल्म रामायण इस साल दिवाली पर रिलीज होगी। बताया जा रहा है कि सनी का रोल इस पार्ट में छोटा है, लेकिन अगले पार्ट में, जो 2027 की दिवाली पर आएगा, उनकी ताकत और दमदार हनुमान की भूमिका दिखाई देगी।

1967 से आज तक अटूट यात्रा कृषि दर्शन की अनोखी कहानी

नई दिल्ली । भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत दूरदर्शन के साथ साल 1959 में हुई थी और तभी से यह माध्यम देश के हर वर्ग तक जानकारी मनोरंजन और शिक्षा पहुंचाने का सशक्त जरिया बन गया। समय के साथ दूरदर्शन पर कई लोकप्रिय कार्यक्रम प्रसारित हुए जिनमें रामायण हम लोग और आपबीती जैसे शो शामिल हैं लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा कार्यक्रम भी रहा जिसने न सिर्फ इतिहास बनाया बल्कि आज तक अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता को बनाए रखा है। इस शो का नाम है कृषि दर्शन जिसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला टेलीविजन शो माना जाता है। कृषि दर्शन की शुरुआत 26 जनवरी 1967 को हुई थी जो कि गणतंत्र दिवस का खास दिन था। इस शो को खासतौर पर किसानों के लिए डिजाइन किया गया था ताकि उन्हें खेती से जुड़ी नई तकनीकों उन्नत बीजों और आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जा सके। शुरुआत में यह कार्यक्रम केवल दिल्ली के आसपास के लगभग 80 गांवों में ही प्रसारित किया जाता था। उस समय इसका उद्देश्य साफ था किसानों को सशक्त बनाना और उन्हें वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना। समय के साथ इस शो की लोकप्रियता बढ़ती गई और यह सीमित क्षेत्र से निकलकर पूरे देश तक पहुंच गया। आज कृषि दर्शन न केवल टीवी पर बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है जिससे किसान कहीं भी कभी भी इसे देख सकते हैं। यह शो पहले डीडी नेशनल पर प्रसारित होता था लेकिन साल 2015 में इसे डीडी किसान चैनल पर स्थानांतरित कर दिया गया जिससे इसका फोकस और अधिक स्पष्ट रूप से कृषि पर केंद्रित हो गया। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यह केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का काम किया। खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान नई तकनीकों का प्रदर्शन और विशेषज्ञों की सलाह इस शो की पहचान बन गई। यही वजह है कि दशकों बाद भी इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई बल्कि और अधिक मजबूत हुई है। कृषि दर्शन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के सहयोग से शुरू किया गया था। यह पहल भारत सरकार की उस सोच का हिस्सा थी जिसमें कृषि को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। विकिपीडिया के अनुसार इस शो के अब तक 62 सीजन पूरे हो चुके हैं और 16780 से अधिक एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं जो इसे अपने आप में एक रिकॉर्ड बनाता है। आज जब मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं तब भी कृषि दर्शन अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यह सिर्फ एक टीवी शो नहीं बल्कि किसानों के लिए ज्ञान का एक भरोसेमंद स्रोत है जिसने पीढ़ियों को जोड़ा है और देश के कृषि विकास में अहम भूमिका निभाई है।

रणबीर की ‘रामायण’ में अमिताभ बच्चन के दामाद नजर आएंगे, निभा रहे खास रोल

नई दिल्ली।बॉलीवुड में जब बड़े बजट की फिल्में बनती हैं, तो स्टार कास्ट और कहानी दोनों ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा देते हैं। इसी कड़ी में रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ चर्चा में है। इसका पहला टीजर सामने आ चुका है और इसमें रणबीर के किरदार भगवान राम के रूप में पहली झलक देखने को मिली। डायरेक्टर नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को लेकर फैन्स काफी उत्साहित हैं। फिल्म में बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक के जाने-माने कलाकार शामिल हैं। खास बात यह है कि इसमें बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के दामाद भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का बजट और स्टार कास्ट‘रामायण’ का प्रोडक्शन ग्लोबल विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन स्टूडियो DNEG के फाउंडर नमित मल्होत्रा कर रहे हैं। इस पिक्चर का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। लीड रोल में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी, यश, रवि दुबे, सनी देओल शामिल हैं। इसके अलावा सपोर्टिंग कास्ट भी बेहद शानदार है-अरुण गोविल, काजल अग्रवाल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, इंदिरा कृष्णन और शीबा चड्ढा जैसे कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं। इस बीच, अमिताभ बच्चन के दामाद कुणाल कपूर भी एक महत्वपूर्ण रोल निभाते नजर आएंगे। कुणाल कपूर निभा रहे हैं भगवान इंद्र का रोलफिल्म में कुणाल कपूर भगवान इंद्र का किरदार निभा रहे हैं। भले ही यह छोटा सा रोल है, लेकिन रामायण की कहानी में इसका महत्व अत्यधिक है। भगवान इंद्र के कारण ऋषि गौतम ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर में बदल दिया था। बाद में भगवान राम ने उन्हें मोक्ष दिलाया। ऐसे में कुणाल का यह रोल कहानी के अहम हिस्से से जुड़ा हुआ है। कुणाल कपूर ने इस फिल्म को लेकर कहा था,“ये फिल्म हमारी संस्कृति के इतिहास में बहुत जरूरी है। इसे इतने बड़े स्केल पर बनाना जरूरी था, जितनी पहले कभी नहीं बनी। ये बहुत स्पेशल होने वाली है। ऑडियंस इसे देखकर सरप्राइज हो जाएगी।” अमिताभ बच्चन संग व्यक्तिगत रिश्ताकुणाल कपूर, अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ बच्चन की बेटी नैना बच्चन के पति हैं। अजिताभ और उनकी पत्नी रमोला बच्चन की बेटी नैना से कुणाल ने फरवरी 2015 में शादी की थी। इस तरह से वह बॉलीवुड के प्रतिष्ठित परिवार का हिस्सा भी बन चुके हैं। कुणाल कपूर का करियरकुणाल कपूर को फिल्म इंडस्ट्री में कई चर्चित फिल्मों में देखा जा चुका है। उनकी फिल्में ‘रंग दे बसंती’, ‘आजा नचले’, ‘लव शव ते चिकन खुराना’, ‘डॉन 2’ और ‘ज्वेल थीफ’ दर्शकों को याद हैं। उनकी एक्टिंग और स्क्रीन प्रजेंस ने उन्हें इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त बनाया है। दर्शकों की उत्सुकताफिल्म का बड़ा बजट, स्टार कास्ट और ऐतिहासिक महत्व इसे बेहद खास बनाते हैं। रणबीर कपूर के भगवान राम के रूप में स्क्रीन पर आने के साथ-साथ, कुणाल कपूर का छोटा लेकिन अहम रोल फिल्म की कहानी में नई जान डालने वाला है।

बॉलीवुड की चौंकाने वाली कहानी: स्टार एक्ट्रेस और बेटे के जन्मदिन पर हुई दर्दनाक घटना

नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई कलाकारों की जिंदगी पर्दे के पीछे संघर्ष और दर्द से भरी होती है। इनमें से कुछ को अपने करियर के साथ-साथ पर्सनल लाइफ में भी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है अभिनेत्री सईदा खान की, जिनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द उनके बेटे के जन्मदिन पर हुआ। फिल्म इंडस्ट्री में कदम और शुरुआती सफलतासईदा खान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा फिल्ममेकर एचएच रवैल की मदद से। उन्हें पहली बार पहचान मिली फिल्म “अपना हाथ जगन्नाथ” से, जिसमें उनके साथ किशोर कुमार थे। इसके अलावा, उन्होंने “कांच की गुड़िया” जैसी फिल्मों में भी काम किया, जिसमें उनके साथ मनोज कुमार नजर आए। हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद सईदा का करियर बड़े पैमाने पर नहीं चला और उन्होंने धीरे-धीरे बी और सी ग्रेड फिल्मों में काम करना शुरू किया। प्यार और परिवार की स्थापनाइस दौरान सईदा का प्यार डायरेक्टर बृज सदनाह से हुआ। दोनों ने शादी की और दो बच्चे हुए—एक बेटा कमल और एक बेटी नम्रता। कमल ने बाद में कुछ फिल्मों में काम किया। सईदा अपने परिवार के प्रति बेहद समर्पित थीं और बच्चों की परवरिश में पूरा ध्यान देती थीं। बेटा के बर्थडे पर हुई दर्दनाक घटना21 अक्टूबर 1990 का दिन सईदा खान के लिए और उनके परिवार के लिए भयानक रात में बदल गया। उनके बेटे कमल का 20वां जन्मदिन था और सईदा इस दिन के जश्न की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान उनके पति, शराब के नशे में, सईदा और बेटी पर गोली चला दी। उन्होंने बेटे कमल को भी गोली मारने की कोशिश की और इसके बाद उन्होंने अपनी जान ले ली। इस हमले में सईदा की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे कमल ने चमत्कारिक रूप से बचने में सफलता पाई। बेटे कमल ने साझा की कहानी कमल ने बाद में इस घटना का दर्दनाक सच साझा किया। उन्होंने बताया, “मुझे भी गोली लगी थी और बुलेट मेरी गर्दन के पास से निकली। मुझे बचने का कोई लॉजिकल कारण नहीं था। मेरी एकमात्र उम्मीद थी कि मुझे आगे बढ़ने दो और जीवन जीने दो।” कमल ने बताया कि उन्होंने अपनी माँ और बहन को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त बेड नहीं थे। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अपनी माँ और बहन को जिंदा करने की कोशिश करें। अंततः कमल का जीवन बच गया, लेकिन उन्होंने अपना पूरा परिवार खो दिया। 40 की उम्र में हुई सईदा की मौत और उनकी यादेंसईदा खान की मौत उनके 40वें साल में हुई और यह बॉलीवुड की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है। उनके बेटे और परिवार ने इस त्रासदी का सामना किया, लेकिन सईदा की कहानी आज भी हर किसी के रोंगटे खड़े कर देती है। उनकी जिंदगी और करियर ने यह दिखाया कि स्टारडम की चमक के पीछे कई बार दर्द और संघर्ष छिपा होता है। सईदा की कहानी बॉलीवुड के उन दुखद किस्सों में शामिल है, जो हमेशा याद रखी जाएंगी।

दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज

नई दिल्ली।80 और 90 के दशक में श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार थीं। उनकी खूबसूरती और अदाकारी के दीवाने पूरे देश में थे। 1992 में जब दिव्या भारती ने बॉलीवुड में कदम रखा, तो दर्शकों और इंडस्ट्री में उनकी तुलना श्रीदेवी से होने लगी। दोनों की शक्ल, बड़ी आंखें और कर्ली बाल इतने मिलते-जुलते थे कि दिव्या को ‘मिनी श्रीदेवी’ कहा जाने लगा। पहली मुलाकात और हॉलीवुड जैसी तारीखेंदिव्या और श्रीदेवी की पहली मुलाकात केवल एयरपोर्ट पर हुई थी, जहां उन्होंने सिर्फ ‘हाय’ कहा। लेकिन उनके जीवन में संयोग और भी दिलचस्प थे। दिव्या का जन्म 25 फरवरी को हुआ और श्रीदेवी की मौत 24 फरवरी को, यानी दिव्या के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले। दुखद मौतें और रहस्यदिव्या भारती की मौत चौथी मंजिल से गिरने से हुई, लेकिन इसे लेकर आज तक रहस्य बना हुआ है कि यह हादसा था या हत्या। उनके पति और निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी शक के घेरे में रहे। श्रीदेवी की अचानक बाथटब में डूबने और कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत ने भी देश को हिला दिया। उनके पति और निर्माता बोनी कपूर पर भी शक जताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला। ‘लाडला’ फिल्म का कनेक्शनफिल्म ‘लाडला’ भी दोनों की जिंदगी से जुड़ी है। शुरुआत में इसे दिव्या भारती अनिल कपूर के साथ करने वाली थीं और शूटिंग का आधा हिस्सा पूरा हो चुका था। दिव्या की मौत के बाद यह फिल्म श्रीदेवी के हाथ में चली गई। दोनों का लुक, डायलॉग और अंदाज इतना समान था कि सेट पर लोग दंग रह जाते थे। करियर और निजी जिंदगी में समानताएंदोनों ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से करियर की शुरुआत की और बाद में बॉलीवुड पर राज किया। इसके अलावा, दोनों ने फिल्म निर्माता से शादी की थी। इस तरह उनके जीवन और करियर में कई अनजाने और रहस्यमय संयोग देखने को मिलते हैं। दिव्या भारती और श्रीदेवी के जीवन में संयोग और समानताएं लगातार नजर आती हैं—जन्म और मौत की तारीख, फिल्म ‘लाडला’, करियर की शुरुआत और निजी जीवन। हालांकि दोनों की मौत ने बॉलीवुड को हिला दिया, उनके योगदान और यादें आज भी जीवंत हैं।

सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी

नई दिल्ली।आज हम याद कर रहे हैं मनोज कुमार को, जिनकी पुण्यतिथि है। उन्हें देशभक्ति और किसान-जवान-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया। बचपन से संघर्ष और अभिनय की राहमनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ था। असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। 1947 के बंटवारे के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया और शरणार्थी कैंप में रहने लगा। बचपन से ही वे दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी नकल किया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिलाई मशीन का काम भी किया। मुंबई की शुरुआत और पहले सफलताअभिनय का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। साल 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से उन्होंने शुरुआत की। पांच साल बाद विजय भट्ट की ‘हरियाली और रास्ता’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली। 1965 में आई ‘हिमालय की गोद में’ ने उन्हें और मजबूती दी। उसी साल उन्होंने भगत सिंह पर फिल्म ‘शहीद’ बनाने का फैसला किया। प्रेम चोपड़ा और गीतकार प्रेम धवन के साथ यह फिल्म भगत सिंह के जीवन पर सबसे प्रामाणिक मानी गई। ‘उपकार’ की रचना: दिल्ली से मुंबई की ट्रेन मेंमनोज कुमार के करियर में दो पहलू थे रूमानी नायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत ‘भारत कुमार’। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे कहा था, “क्या मेरे नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर फिल्म नहीं बन सकती?” दिल्ली से मुंबई लौटते समय मनोज कुमार ने रजिस्टर और नए पेन खरीदे और ट्रेन की यात्रा में कहानी लिख डाली। दिल्ली से मुंबई पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘उपकार’ की पूरी कहानी तैयार हो गई। गाने की पृष्ठभूमि: ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’‘उपकार’ के गानों में सबसे खास है ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’। गीतकार गुलशन बावरा रेलवे में क्लर्क थे और पंजाब से आने वाली गेहूं की बोरियां उतारते समय उनकी डायरी में यह पंक्ति दर्ज हुई। बाद में मनोज कुमार ने इसे फिल्म में शामिल किया। महेंद्र कपूर की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया। बाद की उपलब्धियां1970 में मनोज कुमार ने ‘पूरब और पश्चिम’ बनाई, जो भारतीय परंपरा और पश्चिमी संस्कृति के टकराव पर आधारित थी। यह फिल्म भी खूब सराही गई। मनोज कुमार ने देशभक्ति और आम आदमी की कहानियों को पर्दे पर जीवंत किया। ट्रेन में लिखी ‘उपकार’ की कहानी और ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ जैसे गाने आज भी उनके योगदान की याद दिलाते हैं।

Dhurandhar के ‘रहमान डकैत’ रोल पर हुआ ड्रामा! तीन स्टार्स ने कहा ‘ना’, कास्टिंग डायरेक्टर ने सब बताया

नई दिल्ली। फिल्म जगत में अक्सर देखा जाता है कि कई ऐसी फिल्में होती हैं जो बड़े-बड़े सेलेब्स को ऑफर की जाती है।लेकिन उनमें से कई उसे ठुकरा देते हैं। बीते साल 2025 के दिसंबर में रिलीज हुई फिल्म Dhurandhar ने काफी तबाही मचाई थी इस फिल्म ने काफी अच्छा खासा कलेक्शन किया था। इस फिल्म में Ranveer Singh और Akshaye Khanna की बेहतरीन एक्टिंग देखने को मिला था। आज भी इसका दूसरा पार्ट लगातार सिनेमाघरों में तूफान लेकर आया है और जबरदस्त कलेक्शन करता जा रहा है। रहमान डकैत के किरदार में छाए थे अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna)आपको बता दें, इसके पहले पार्ट में अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने रहमान डकैत का किरदार निभाया था इसलिए उनकी काफी तारीफ हुई लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया। अक्षय खन्ना ने अब तक कई बेहतरीन फिल्में की है लेकिन इस फिर मैं उनके करियर में चार चांद लगा दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म में इस किरदार को उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स को ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इस किरदार को करने से मना कर दिया था अब इसका खुलासा फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने खुद किया है। तीन कलाकारों ने ठुकराया था यह किरदारहाल ही में फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने इस बारे में दिलचस्प खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड हंगामा के साथ एक इंटरव्यू में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत का रोल पहले तीन अलग-अलग एक्टर्स को ऑफर किया गया था, लेकिन सभी ने इसे करने से मना कर दिया। इनमें से एक एक्टर साउथ इंडस्ट्री से थे और दो बॉलीवुड के थे. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने बताया कि सब ने यह कहकर मना कर दिया कि यह फिल्म रणवीर सिंह की है तो इसमें उनका किरदार उतना खास नहीं दिखेगा। डायरेक्टर ने अक्षय खन्ना की तारीफ कीइसके बाद उन्होंने अक्षय खन्ना के बारे में सोचा। खास बात ये रही कि अक्षय ने तुरंत स्क्रिप्ट सुनी और एक ही दिन में फिल्म के लिए हां कर दी। मुकेश ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि अक्षय उन कलाकारों में से हैं, जो दिल से फैसले लेते हैं। फिल्म की कहानी किरदारधुरंधर’ की कहानी कराची के लयारी इलाके पर है, जो अपराध के लिए जाना जाता है. फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया. वहीं रणवीर सिंह एक स्पाई एजेंट के रोल में दिखे, जो पाकिस्तान में घुसकर मिशन को अंजाम देता है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी भी नजर आए हैं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।

राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी दिलचस्प हो जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है सुरों की मलिका लता मंगेशकर और शोमैन राज कपूर की महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम से। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई और अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति के कारण सुपरहिट साबित हुई लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद जीनत अमान नहीं बल्कि खुद लता मंगेशकर थीं। फिल्म की कहानी रूपा नाम की एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती है जिसका चेहरा बचपन में जल जाता है लेकिन उसकी आवाज इतनी मधुर होती है कि हर कोई उसका दीवाना बन जाता है। राज कपूर ने इस किरदार की कल्पना एक साधारण चेहरे और दिव्य आवाज वाली महिला के रूप में की थी और उनके मन में इस छवि के लिए लता मंगेशकर बिल्कुल फिट बैठती थीं। यही वजह थी कि वह उन्हें इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे और यह किरदार उनके इर्दगिर्द ही गढ़ा गया था। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब राज कपूर का एक बयान गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने सुंदरता को लेकर एक दार्शनिक बात कही थी जिसमें उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि दृष्टिकोण में होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी कभी बेहद खूबसूरत आवाज सुनने के बाद जब हम उस व्यक्ति को देखते हैं तो वह हमारी कल्पना से अलग हो सकता है। इस बात को लता मंगेशकर से जोड़कर देखा गया और यह उन्हें बेहद चुभ गया। इस टिप्पणी ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी उन्होंने फिल्म के लिए गाना गाने से भी मना कर दिया जो अपने आप में एक बड़ा झटका था क्योंकि उनकी आवाज इस कहानी की आत्मा मानी जा रही थी। राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी क्योंकि फिल्म की परिकल्पना ही लता की आवाज के इर्दगिर्द बनी थी। हालांकि बाद में काफी मनाने और समझाने के बाद लता मंगेशकर इस बात के लिए राजी हुईं कि वह फिल्म का टाइटल ट्रैक गाएंगी। उनके गाए इस गीत ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी और आज भी वह गाना लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। दूसरी ओर फिल्म में रूपा का किरदार जीनत अमान को मिला और उन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस भूमिका को यादगार बना दिया। उनके साथ शशि कपूर की जोड़ी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी। यह घटना न केवल फिल्म इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी कभी एक छोटी सी बात किस तरह बड़े फैसलों को प्रभावित कर देती है। अगर उस वक्त हालात अलग होते तो शायद यह फिल्म और इसकी पहचान कुछ और ही होती लेकिन यही अनिश्चितता सिनेमा को इतना खास बनाती है।

दिल दहला देने वाला अनुभव यह फिल्म आपके दिमाग और आत्मा दोनों को झकझोर देगी

नई दिल्ली । वीकेंड की शुरुआत अक्सर आराम और एंटरटेनमेंट के साथ होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुकून नहीं बल्कि सिहरन चाहिए होती है अगर आप भी उन्हीं में से हैं और ऐसी हॉरर फिल्म की तलाश में हैं जो सिर्फ डराए नहीं बल्कि आपके अंदर तक उतर जाए तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है साल 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म आज भी लोगों के बीच चर्चा में बनी हुई है और इसे देखने के बाद लोग अपने दोस्तों को इसे जरूर सुझाते हैं इस फिल्म की कहानी पारंपरिक भूतिया घरों या पुराने खंडहरों से हटकर एक बेहद अनोखे कॉन्सेप्ट पर आधारित है जो इसे बाकी हॉरर फिल्मों से अलग बनाता है कहानी एक रहस्यमयी हाथ के इर्द गिर्द घूमती है जो ममीफाइड है यानी उस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है जब कोई व्यक्ति इस हाथ को पकड़कर एक खास वाक्य बोलता है तो उसके सामने एक मृत आत्मा प्रकट हो जाती है यह सिर्फ शुरुआत होती है असली डर तब शुरू होता है जब उस आत्मा को अपने शरीर में आने की अनुमति दी जाती है इसके बाद जो होता है वह दर्शकों को भीतर तक हिला देता है फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका रियलिस्टिक ट्रीटमेंट है इसमें जरूरत से ज्यादा वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि मेकअप साउंड डिजाइन और माहौल के जरिए डर को इस तरह रचा गया है कि हर सीन असली लगता है यही वजह है कि फिल्म देखते समय दर्शक खुद को उस स्थिति में महसूस करने लगते हैं और डर कई गुना बढ़ जाता है कई ऐसे दृश्य हैं जो अचानक आते हैं और दर्शक को चौंका देते हैं यह फिल्म धीरे धीरे आपको अपने जाल में फंसाती है और फिर एक ऐसा अनुभव देती है जिससे निकलना आसान नहीं होता खास बात यह है कि यह सिर्फ डराने तक सीमित नहीं रहती बल्कि इंसानी जिज्ञासा और उसके खतरनाक परिणामों को भी दिखाती है फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है इसकी कहानी निर्देशन और एक्टिंग की खूब तारीफ हुई है यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि अगर कॉन्सेप्ट मजबूत हो और उसे सही तरीके से पेश किया जाए तो बिना भारी तकनीक के भी गहरा असर छोड़ा जा सकता है दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बनाने वाले निर्देशक पहले यूट्यूब पर डरावने वीडियो बनाया करते थे उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फिल्म के सेट पर ऐसा माहौल तैयार किया कि कलाकारों का डर पूरी तरह असली लगे यही वजह है कि फिल्म के कई सीन बेहद नैचुरल और प्रभावशाली महसूस होते हैं अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपके दिमाग में लंबे समय तक बना रहे और आपको अंधेरे से डराने लगे तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए लेकिन इसे देखने से पहले खुद को तैयार कर लें क्योंकि यह अनुभव हल्का नहीं होने वाला है