घर पर बनाएं नींबू का चटपटा-चटकारेदार अचार: आसान और फटाफट रेसिपी

नई दिल्ली । नींबू का अचार सिर्फ खाने का स्वाद ही बढ़ाता है बल्कि यह पाचन के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। भारतीय खाने में अचार की खास जगह है चाहे पराठे हों या चावल दी दा अचार खाने का मज़ा दुगना कर देता है। गर्मियों में नींबू का अचार बनाना एक परंपरा जैसी हो गई है। खट्टा मीठा और मसालेदार यह अचार खाने में चटपटा और पाचन के लिए हितकारी होता है। अगर आप भी घर पर नींबू का अचार बनाना चाहते हैं तो यहां आसान रेसिपी नोट कर लें। सामग्री नींबू 500 ग्राम पतले छिलके वाले और रसीले ,नमक 50 ग्राम लगभग 4 बड़े चम्मच ,काला नमक 1 बड़ा चम्मच,लाल मिर्च पाउडर 2 बड़े चम्मच तीखापन स्वाद अनुसार ,हल्दी पाउडर 1 छोटा चम्मच,अजवाइन 1 बड़ा चम्मच हथेलियों से रगड़कर ,भुना हुआ जीरा पाउडर 1 बड़ा चम्मच,हींग आधा छोटा चम्मचबनाने की विधि नींबू की तैयारी: नींबू को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रहे कि नींबू पर कोई नमी न रहे नहीं तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। काटना: प्रत्येक नींबू को 4 या 8 टुकड़ों में काट लें। आप चाहें तो नींबू का रस अंदर ही रहने दें या थोड़ा रस अलग से निचोड़कर ऊपर डाल सकते हैं। मसाले मिलाना: एक बड़े सूखे बर्तन में नींबू के टुकड़े डालें। अब इसमें नमक काला नमक हल्दी लाल मिर्च पाउडर अजवाइन जीरा पाउडर और हींग डालें। मिक्स करना: चम्मच या हाथों से नींबू और मसालों को अच्छे से मिलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसाला लग जाए। अगर आप खट्टा मीठा स्वाद चाहते हैं तो इस समय थोड़ा गुड़ या चीनी भी मिला सकते हैं। धूप दिखाना: तैयार अचार को एक कांच के सूखे जार में भरें। इसे 4 5 दिनों तक धूप में रखें। दिन में एक बार जार को हल्का हिलाएं ताकि मसाले और रस अच्छी तरह मिल जाए। इस तरह आपका चटपटा और चटकारेदार नींबू का अचार तैयार हो जाएगा। इसे पराठे चावल या स्नैक्स के साथ परोसें और खाने का स्वाद दोगुना करें।
बढ़ती उम्र में मांसपेशियां कमजोर? दही-इडली से रखें मसल्स मजबूत, 60 के बाद भी फिट रहें

नई दिल्ली । बुढ़ापे में थकान चलने में दिक्कत और गिरने का डर आम बात लगती है लेकिन यह केवल उम्र का खेल नहीं है। इसका मुख्य कारण है सार्कोपेनिया यानी मांसपेशियों का कमजोर होना। 60 की उम्र के बाद शरीर प्रोटीन का सही उपयोग नहीं कर पाता जिससे मसल्स धीरे-धीरे गलने लगती हैं। डॉ. शैलेंद्र भदौरिया एमडी-जेरियाट्रिक मेडिसिन एम्स नई दिल्ली बताते हैं कि इस उम्र में मसल्स मजबूत रखने के लिए डाइट और हल्की कसरत दोनों जरूरी हैं। आईसीएमआर और WHO के अनुसार 60+ उम्र में प्रतिदिन प्रति किलो शरीर वजन के हिसाब से 1 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आपका वजन 65 किलो है तो रोजाना 65 ग्राम प्रोटीन शामिल करें। मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने में फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही इडली ढोकला और खमीर वाले अन्य पदार्थ बहुत मददगार हैं। ये प्रोबायोटिक्स से पेट की सेहत सुधारते हैं जिससे प्रोटीन आसानी से पचता और अवशोषित होता है। लेकिन अकेले फर्मेंटेड फूड पर्याप्त नहीं हैं। प्रोटीन की सही मात्रा और हल्की वजन वाली कसरत मिलाकर ही मसल्स मजबूत रह सकती हैं। WHO की सलाह के अनुसार 65 साल से ऊपर के लोगों को हफ्ते में कम से कम 2 दिन मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने वाली कसरत करनी चाहिए। इसके लिए आसान एक्सरसाइज जैसे कुर्सी से 10 बार उठना-बैठना दीवार के सहारे पुश-अप या पानी की बोतल से वेट लिफ्टिंग करना पर्याप्त है। डॉ. भदौरिया बताते हैं कि एक संतुलित दिनचर्या अपनाने से मसल्स कमजोर होने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर: सुबह: हल्की एक्सरसाइज + प्रोटीन युक्त नाश्ता दोपहर: दाल पनीर और सलाद शाम: 20 मिनट वॉक रात: हल्की खिचड़ी या पौष्टिक डिनर इस तरह नियमित प्रोटीन फर्मेंटेड फूड और हल्की कसरत से 60 पार भी मसल्स मजबूत बनी रह सकती हैं और थकान या गिरने का डर कम होता है। बुढ़ापे में फिट रहने के लिए यह आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है।
चीज: स्वादिष्ट भी, सेहत के लिए फायदेमंद भी? डाइटीशियन से जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स

नई दिल्ली । यदि आप किसी रेस्टोरेंट में गए हैं तो मेन्यू पर अक्सर एक्स्ट्रा चीज बर्गर एक्स्ट्रा चीज पिज्जा या एक्स्ट्रा चीज सैंडविच जैसे आइटम्स दिखते हैं। स्वाद में लाजवाब चीज सिर्फ खाने को मजेदार ही नहीं बनाती बल्कि प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी है। लेकिन क्या चीज नियमित रूप से खाना सेहत के लिए सुरक्षित है? डॉ. पूनम तिवारी सीनियर डाइटीशियन डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ बताती हैं कि चीज एक डेयरी उत्पाद है जो पालतू जानवरों के दूध से बनाया जाता है। इसके उत्पादन में दूध को हल्का गर्म किया जाता है फिर उसमें स्टार्टर कल्चर मिलाकर दूध को खट्टा किया जाता है। उसके बाद रेनेट या नींबू का रस डालकर दूध जमाया जाता है। जमा हुआ दूध छोटे टुकड़ों में काटा जाता है ताकि उसमें मौजूद व्हे यानी बचा हुआ पानी अलग हो सके। जो ठोस हिस्सा बचता है वही चीज कहलाता है। कुछ चीज को हफ्तों या महीनों तक एज भी किया जाता है जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर और बेहतर होता है। चीज में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्वों में प्रोटीन और कैल्शियम शामिल हैं। यह हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के विकास के लिए उपयोगी है। इसके अलावा चीज में विटामिन A B12 और फास्फोरस भी होते हैं। वहीं इसका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है क्योंकि इसमें सैचुरेटेड फैट और सोडियम भी काफी मात्रा में होता है। ज्यादा चीज खाने से वजन बढ़ने कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हृदय संबंधी जोखिम भी हो सकता है। डॉ. तिवारी के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना 30–40 ग्राम चीज खाना सेहत के लिए लाभकारी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हड्डियों और दांतों की मजबूती में मदद करता है। हालांकि उच्च ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल वाले लोग चीज का सेवन कम या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। इस प्रकार चीज का स्वाद और न्यूट्रिशनल बेनिफिट दोनों ही इसे खास बनाते हैं। लेकिन इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए। पिज्जा पास्ता या सैंडविच में एक्स्ट्रा चीज लेना स्वादिष्ट तो है लेकिन सेहत का ध्यान रखते हुए इसका सेवन संतुलित रूप से करना ही सही है।
हरसिंगार प्लांटेशन: सफेद फूलों और खुशबू से सजाएं अपना गार्डन

नई दिल्ली। इसे पारिजात के नाम से भी जाना जाता है। रात में खिलने और सुबह जमीन पर बिखर जाने वाले ये फूल न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी से भर देते हैं। हरसिंगार का पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता, इसलिए यह घरेलू बगीचों के लिए एकदम परफेक्ट माना जाता है। सही जगह, उपयुक्त मिट्टी और थोड़ी-सी धैर्य के साथ आपका गार्डन कुछ ही महीनों में सफेद फूलों से लहलहा सकता है। हरसिंगार पौधा लगाने और देखभाल के टिप्स1. सही जगह का चुनावहरसिंगार को धूप और हल्की छांव दोनों पसंद हैं। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां रोज़ाना 4-6 घंटे की धूप मिल सके। बहुत तेज धूप में छोटे पौधे की पत्तियां झुलस सकती हैं, इसलिए शुरुआती दिनों में हल्की छाया बेहतर रहती है। अगर आप गमले में पौधा लगा रहे हैं, तो 12–16 इंच का बड़ा गमला चुनें। 2. मिट्टी कैसी हो?इस पौधे के लिए अच्छी जलनिकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। आप 40% गार्डन सॉइल, 30% रेत और 30% गोबर की सड़ी खाद मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकते हैं। मिट्टी ज्यादा कड़ी न हो, वरना जड़ें फैल नहीं पाएंगी। रोपण से पहले गड्ढे में थोड़ी जैविक खाद डालना लाभकारी होता है।3. पौधा लगाने की विधिनर्सरी से स्वस्थ और हरे पत्तों वाला पौधा चुनें। जमीन में लगभग 1–1.5 फुट गहरा गड्ढा खोदें। पौधे को सावधानी से रखें और मिट्टी भरकर हल्के हाथ से दबा दें। तुरंत हल्का पानी दें ताकि मिट्टी जड़ों से अच्छी तरह चिपक जाए। गमले में लगाने पर नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है। 4. सिंचाई और देखभालहरसिंगार को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। गर्मियों में 2-3 दिन में एक बार और सर्दियों में हफ्ते में एक बार पानी देना पर्याप्त है। ध्यान रखें कि पानी जमा न हो, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। हर 2-3 महीने में जैविक खाद डालने से फूलों की संख्या बढ़ती है। सूखी और पीली टहनियों की समय-समय पर छंटाई करें। 5. कब आएंगे फूल?आमतौर पर मानसून के बाद से लेकर शरद ऋतु तक इस पौधे में फूल आने लगते हैं। सुबह जमीन पर गिरे फूलों को इकट्ठा करना भी एक सुखद अनुभव है। सही देखभाल मिलने पर पौधा हर साल और ज्यादा घना और खूबसूरत होता जाता है। हरसिंगार लगाने के फायदेबगीचे की खूबसूरती बढ़ाता है हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी देती है कम देखभाल में भी लंबे समय तक फूल देती है पारंपरिक और धार्मिक महत्व भी रखता है हरसिंगार न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाता है, बल्कि सफेद फूलों और हल्की खुशबू के जरिए घर के वातावरण को सुंदर और ताजगी से भर देता है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल के साथ आपका गार्डन सालों तक हरसिंगार के फूलों से लबालब भरा रह सकता है।
रंगों का त्योहार, ठंडाई के साथ: जानें खसखस ठंडाई बनाने का तरीका..

नई दिल्ली।होली केवल रंगों और गुलाल का त्योहार नहीं है। यह त्योहार स्वाद और ताजगी के लिए भी जाना जाता है। और जब बात हो ठंडक और ऊर्जा की, तो ठंडाई का नाम सबसे पहले आता है। खासकर खसखस ठंडाई, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में अद्भुत संतुलन देती है। इस होली, आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए घर पर खसखस ठंडाई बनाकर त्योहार को और यादगार बना सकते हैं। ठंडाई क्यों खास है?ठंडाई केवल ठंडी ड्रिंक नहीं है। इसमें खसखस, बादाम, काजू, किशमिश और गुलाब जल जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो न केवल शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, ठंडाई में मौजूद सूखे मेवे और मसाले शरीर को गर्मियों की उमस से बचाने में मदद करते हैं। खसखस ठंडाई बनाने की सामग्री:खसखस – 2 बड़े चम्मच काजू – 10-12 पीसेस बादाम – 10-12 पीसेस काली मिर्च – 1/4 चम्मच गुलाब जल – 1 छोटा चम्मच ठंडा दूध – 500 ml शक्कर – 4-5 बड़े चम्मच (स्वाद अनुसार) साबुत किशमिश – 8-10 पीसेस खसखस ठंडाई बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी:1. खसखस और मेवे भिगोएँ: खसखस, काजू और बादाम को 4–5 घंटे या रात भर पानी में भिगोकर नरम कर लें। 2. पीसना: भिगोए हुए खसखस और मेवे को ब्लेंडर में डालकर थोड़ा पानी डालकर महीन पेस्ट तैयार करें। 3. मिलाना: पेस्ट में ठंडा दूध डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। 4. मसाले डालें: अब इसमें काली मिर्च, गुलाब जल और शक्कर डालकर फिर से मिक्स करें। 5. छानना: मिश्रण को छलनी से छानकर गाढ़ा दूध निकाल लें। 6. ठंडा परोसें: ठंडाई को फ्रिज में 1–2 घंटे ठंडा करें और साबुत किशमिश से गार्निश करके सर्व करें। खसखस ठंडाई क्यों चुनें?खसखस ठंडाई न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसमें ऊर्जा बढ़ाने वाले तत्व और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। यह पारंपरिक ठंडाई की तुलना में हल्की और आसानी से पचने वाली होती है। होली पर ठंडाई पीने के फायदे:शरीर को ठंडक देती है प्यास बुझाने के साथ ऊर्जा भी देती है रंगों और गुलाल खेलने के बाद डिहाइड्रेशन से बचाती है स्वाद में बच्चों और बड़ों दोनों को समान रूप से पसंद आती है परंपरा और त्योहार का संगम:होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने, खास पकवान और ड्रिंक के माध्यम से जुड़ने का अवसर भी है। ठंडाई इस त्योहार में सिर्फ पेय नहीं, बल्कि खुशियों और यादों की मिठास जोड़ती है। इस होली, खसखस ठंडाई बनाकर आप रंगों की मिठास के साथ स्वाद और ठंडक का मज़ा भी बढ़ा सकते हैं।
Skin Care Tips: डल स्किन को अलविदा कहो, बस अपनाएं ये ट्रिक, सिर्फ 6 आसान टिप्स से निखार रहेगा दिन-रात

नई दिल्ली । बदलते मौसम में सबसे पहले असर हमारी त्वचा पर दिखने लगता है. कभी रूखापन कभी ऑयलीनेस तो कभी पिंपल्स और रैशेज स्किन कन्फ्यूज हो जाती है. उसे आखिर चाहिए क्या. ऐसे में अगर सही देखभाल न की जाए तो चेहरा बेजान लगने लगता है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और रोजमर्रा की आदतें अपनाकर आप बिना मेकअप भी चांद सा निखार पा सकते हैं. बदलते मौसम में थोड़ी सी सावधानी और नियमित स्किन केयर रूटीन अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग रख सकते हैं. याद रखिए असली खूबसूरती नैचुरल होती है. सही देखभाल से वही निखार सबसे ज्यादा दमकता है. मैक्स हॉस्पिटल में प्रिंसिपल कंसल्टेंट के तौर पर तैनात डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी श्रीवास्तव का कहना है कि जब हम अपनी डाइट को बैलेंस करते हैं और केमिकल्स और मेकअप के बजाय नेचुरल चीज़ों पर ध्यान देते हैं तो स्किन ग्लो करती है. क्लेंजिंग है सबसे पहला कदम मौसम चाहे कोई भी हो दिन में 2 बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना जरूरी है. इससे धूल-मिट्टी और अतिरिक्त ऑयल हटता है और पोर्स साफ रहते हैं, लेकिन बार-बार फेसवॉश करने से बचें, वरना स्किन ड्राई हो सकती है.मॉइश्चराइजर कभी न छोड़ें अक्सर लोग सोचते हैं कि गर्मी में मॉइश्चराइजर की जरूरत नहीं होती हैं, लेकिन बदलते मौसम में स्किन का बैलेंस बिगड़ जाता है. हल्का, वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ताकि त्वचा हाइड्रेटेड रहे और ग्लो बरकरार रहे. सनस्क्रीन है जरूरी धूप सर्दी-गर्मी नहीं देखती. बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं. इससे टैनिंग, पिग्मेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों से बचाव होता है.बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत ज़रूरी है. खासकर गर्मियों में, सनस्क्रीन हमारी स्किन के लिए बहुत सारी प्रॉब्लम खड़ी कर सकता है, जिससे यह डल और इरिटेटेड दिखती है. हफ्ते में एक-दो बार एक्सफोलिएशन डेड स्किन हटाने के लिए हल्के स्क्रब या केमिकल एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल करें. इससे त्वचा साफ और फ्रेश दिखती है, लेकिन ज्यादा स्क्रब करने से स्किन डैमेज हो सकती है. इसलिए संतुलन जरूरी है. पानी और डाइट पर ध्यान दें खूबसूरत त्वचा सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से भी बनती है. दिन में 7-8 गिलास पानी पिएं और अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर चीजें शामिल करें. इससे त्वचा में नैचुरल ग्लो आता है.ब्यूटी स्लीप को न करें नजरअंदाज रात की 7-8 घंटे की नींद स्किन के लिए बेहद जरूरी है. सोते समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है, जिससे चेहरा सुबह फ्रेश और चमकदार नजर आता है.
HERBAL FACEWASH: घर पर ऐसे बनाएं हर्बल फेस वॉश मुलायम और ग्लोइंग त्वचा का आसान नुस्खा

HERBAL FACEWASH: नई दिल्ली । हमारी त्वचा दिनभर प्रदूषण, धूल-मिट्टी, पसीना और गंदगी के संपर्क में रहती है, जिससे स्किन बेजान, रूखी या पिंपल्स जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। कई बार लोग बाजार के महंगे फेस वॉश प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं, लेकिन उनमें कई रसायन केमिकल्स भी होते हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में घर पर मौजूद सरल नेचुरल सामग्री से बनने वाला हर्बल फेस वॉश एक बेहतर, सुरक्षित और सस्ता विकल्प है। DIY फेस वॉश पाउडर को आप अपनी स्किन टाइप के हिसाब से तैयार कर सकते हैं और यह त्वचा को अंदर से साफ, पोषित और चमकदार बनाता है। इस हर्बल फेस वॉश में मुल्तानी मिट्टी, चंदन, बेसन और कस्तूरी हल्दी जैसी पारंपरिक सामग्री होती हैं, जिनके प्राकृतिक फायदे त्वचा साफ करने, एक्ने को रोकने और निखार लाने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी निकालती है, चंदन ठंडक और ग्लो प्रदान करता है, बेसन डेड स्किन हटाता है और कस्तूरी हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुंहासों के खिलाफ मदद करते हैं। सामग्री चम्मच कस्तूरी हल्दी – प्राकृतिक रंग निखारने में मदद चम्मच चंदन पाउडर – ठंडक और चमक के लिए चम्मच बेसन – त्वचा से गंदगी हटाने वाला चम्मच चावल का आटा – स्क्रब जैसा असर चम्मच मुल्तानी मिट्टी – डीप क्लींजिंग के लिए बनाने की विधि सभी सूखी सामग्री को अच्छे से मिलाएँ और एक एयर-टाइट कंटेनर में भरकर स्टोर करें। जब इस्तेमाल करना हो, तो 2 चम्मच पाउडर लें और उसमें थोड़ा गुलाब जल, दूध या शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। पेस्ट को गीले चेहरे पर लगाएँ और 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इसे सुबह या शाम नियमित रूप से लगाने से त्वचा में साफ-सुथरा ग्लो और मुलायम निखार दिखाई देने लगता है। क्यों यह हर्बल फेस वॉश काम करता है गहरा क्लेंज़िंग: मुल्तानी मिट्टी और बेसन त्वचा के पोर्स से गंदगी निकालते हैं। त्वचा का निखार: चंदन और हल्दी त्वचा को टोन और ग्लो देते हैं। घरेलू और सुरक्षित: बिना रसायनों के, नेचुरल सामग्री से तैयार। नई सामग्री को चेहरे पर लगाने से पहले एक छोटे हिस्से पर पैच-टेस्ट जरूर करें ताकि कोई एलर्जी न हो। नियमित उपयोग से त्वचा में धीरे-धीरे बदलाव नजर आता है।
हेल्दी लाइफ का सीक्रेट: मूंग स्प्राउट्स से बढ़ाएं ताकत और घटाएं वजन

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति फिट और हेल्दी रहने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में खानपान में पौष्टिक और प्राकृतिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मूंग दाल के स्प्राउट्स यानी अंकुरित मूंग एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे सेहत के लिए लाभकारी मानते हैं। जैसे ही मूंग दाल अंकुरित होती है, इसके पोषक तत्वों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे अंकुर शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मूंग स्प्राउट्स का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी मूंग स्प्राउट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन सही रहता है, तो शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। अच्छे पाचन का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और मुंहासों व दाग-धब्बों में कमी देखी जा सकती है। वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। मूंग स्प्राउट्स में कैलोरी कम होती है, लेकिन यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनावश्यक खाने से बचाव होता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को टोन रखने में सहायक होता है। दिल की सेहत के लिए भी मूंग स्प्राउट्स लाभकारी हैं। इनमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। आयरन और फोलेट की पर्याप्त मात्रा रक्त की गुणवत्ता को सुधारती है और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए भी यह फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। साथ ही यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है। मूंग स्प्राउट्स को अपने आहार में शामिल करना बेहद आसान है। आप इसे सलाद में मिलाकर, सूप में डालकर, सब्जी के रूप में या हल्का भूनकर भी खा सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और आप खुद को ज्यादा ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करते हैं।
सुबह के नाश्ते में झटपट बनाएं सूजी का चीला आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता

नई दिल्ली । सुबह की भागदौड़ में अगर आपको तेजी से बनने वाला स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता चाहिए तो सूजी का चीला बढ़िया ऑप्शन है। यह नाश्ता सिर्फ जल्दी तैयार नहीं होता बल्कि सब्जियों के साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी बनता है। सूजी चीला खासतौर पर सुबह के लिए उत्तम विकल्प है क्योंकि यह ऊर्जा देता है पेट भरा रखता है और आप इसमें अपनी पसंद की सब्जियाँ भी मिला सकते हैं जिससे इसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाता है। सबसे पहले एक बड़े बाउल में 1 कप सूजी और आधा कप दही डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए गाढ़ा चिपचिपा घोल तैयार करें और इसे लगभग 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि सूजी घूमकर थोड़ी फूल जाए। अब घोल में बारीक कटी प्याज शिमला मिर्च कद्दूकस किया हुआ गाजर हरी मिर्च हरा धनिया स्वादानुसार नमक हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। यह मिश्रण स्वाद और पोषण दोनों को बेहतर बनाता है क्योंकि सब्जियाँ विटामिन और फाइबर प्रदान करती हैं। एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और उस पर थोड़ा तेल या घी लगाएँ। तैयार मिश्रण में से एक कलछी भरकर तवे पर डालें और हल्के हाथ से गोल आकार में फैलाएँ। मध्यम आंच पर इसे दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक सेकें। चीले को क्रिस्पी किनारों और सॉफ्ट अंदरूनी टेक्सचर के साथ पकाना चाहिए। जब चीला दोनों तरफ से अच्छे से हल्का ब्राउन हो जाए तो इसे गरमागरम उतार लें और अपनी पसंद की हरी चटनी टमाटर सॉस या दही के साथ परोसें। स्वादिष्ट सूजी चीला न सिर्फ सुबह की भूख शांत करेगा बल्कि पोषण और स्वाद का बेहतरीन मेल भी देगा। सूजी का चीला सिर्फ स्वादिष्ट नाश्ता ही नहीं है बल्कि यह पोषक तत्वों जैसे आयरन विटामिन B और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है जो सुबह की ऊर्जा और सक्रियता को बनाए रखने में मदद करता है। इस आसान रेसिपी के साथ आप रोज़ के नाश्ते को स्वाद और हेल्थ का बेहतरीन संयोजन बना सकते हैं चाहे आप ऑफिस जाने वाले हों बच्चों का टिफिन तैयार कर रहे हों या सप्ताहांत के नाश्ते का प्लान बना रहे हों।
काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे

नई दिल्ली ।होली का त्योहार आते ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है। रंग, परिधान और सजावट के साथ-साथ महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है उनके गहनों की चमक। खासकर पायल और बिछिया, जिन्हें महिलाएं अक्सर रोज पहनती हैं, समय के साथ काली पड़ जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि होली पर आपके गहने फिर से चमकदार दिखें, तो कुछ आसान घरेलू नुस्खों से इन्हें आप मिनटों में चमका सकते हैं। सबसे पहले बेकिंग सोडा और नींबू का तरीका बहुत कारगर है। एक कटोरी में थोड़ी बेकिंग सोडा लें और उसमें कुछ बूंदें नींबू का रस डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे पायल या बिछिया पर हल्के हाथों से रगड़ें और कुछ मिनट बाद साफ पानी से धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे चांदी की काली परत हटकर गहने फिर से चमकने लगेंगे। दूसरा तरीका है टूथपेस्ट का। इसके लिए गहनों पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाएं और मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से साफ करें। इसके बाद गहनों को पानी से धोकर सुखा लें। यह तरीका जल्दी और आसान होने के साथ ही चांदी को खरोंच से भी बचाता है। तीसरा तरीका है सिरका और बेकिंग सोडा का मिश्रण। एक कप सफेद सिरके में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें और गहनों को इसमें 10–15 मिनट तक भिगो दें। भिगोने के बाद साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें। इस तरीके से गहनों की काली परत आसानी से हट जाती है और चमक लौट आती है। चौथा तरीका है इमली के पानी का। इमली में प्राकृतिक एसिड होता है जो चांदी की काली परत हटाने में मदद करता है। थोड़ी सी इमली को गुनगुने पानी में भिगो दें और जब पानी गाढ़ा हो जाए, उसमें गहनों को 10 मिनट के लिए डुबोकर रखें। इसके बाद मुलायम ब्रश या कपड़े से हल्के हाथों से रगड़कर गहनों को साफ करें। पाँचवां और अंतिम आसान तरीका है गर्म पानी और नमक का। एक कटोरी में गर्म पानी लें और उसमें एक चम्मच नमक डालकर घोल बनाएं। इसमें गहनों को 10 मिनट तक भिगोकर, मुलायम ब्रश से साफ करें। इसके बाद पानी से धोकर सुखाएं। यह तरीका भी चांदी की चमक बढ़ाने में बेहद प्रभावी है। इन सरल तरीकों से आप अपने पायल और बिछिया को होली से पहले चमकदार और नए जैसे बना सकते हैं। याद रखें कि सफाई करते समय ज्यादा जोर न लगाएं, क्योंकि इससे गहनों पर खरोंच आ सकती है। होली पर रंगों के साथ-साथ अपने गहनों की चमक भी बनाए रखें और इन आसान टिप्स के जरिए त्योहार को और भी खास बनाएं।