दिल्ली से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर है भारत का सबसे शांत हिल स्टेशन, यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही खो बैठेंगे अपना दिल

नई दिल्ली । अगर आप दिल्ली के शोर से दुखी हो गए हैं और किसी शांत जगह पर जाना चाहते हैं तो आपको लैंसडाउन जाना चाहिए। दिल्ली से इस जगह की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है। यहां आप सिर्फ 5 घंटे में पहुंच सकते हैं। खास बात ये है कि ये जगह काफी शांत है और यहां घूमने के लिए आपको ज्यादा तैयारी करने की भी जरूरत नहीं है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपने मन को शांत कर देगी और आपको बेहतर महसूस करवाएगी। यहां पहाड़ है, झाड़ियां हैं, जंगल हैं और उनके बीच बहती हुई नदियां हैं। ये पूरा हिल होटल के किसी कमरे से देखने पर भी सुंदर लगता है। इसके अलावा कमरे से निकलकर किसी पहाड़ की ओट में भी बैठना बेहद सुखद होता है।लैंसडाउन में घूम आएं ये जगहें ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर: लैंसडाउन में ही है ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर जहां आप घूमने जा सकते हैं। यह जगह बेहद खूबसूरत है और यहां जाकर घूमना आपको स्पेशल महसूस करवा सकता है। लैंसडाउन की खास बात ये है कि इन मंदिरों तक जाने का रास्ता तक बेहद खूबसूरत है जहां से गुजरना एक सुखद अहसास कराता है। कालागढ़ टाइगर रिजर्व: कालागढ़ टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के कई जीवों का घर है। यहां आपको बाघ देखने को मिल जाएंगे। साथ ही यहां की जंगल सफारी आपके मन को खुश कर देगी। तो, लैंसडाउन जाकर आप इस जगह में घूम सकते हैं। ये बेहद खास है और यहां घूमना प्रकृति के बनाए वन्स जीवों को देखने और यहां की शांत वातावरण को देखने और महसूस करने का मौका है। टिप इन टॉप: टिप इन टॉप लैंसडाउन की एक ऐसी जगह है जहां सैंट मेरी चर्च है और आसपास के इलाकों में कई और छोटे चर्च भी हैं। यहां घूमना आपके लिए खास हो सकता है खासकर कि अगर आपके पास समय हो तो आप आस-पास के इलाकों के कई सारे चर्च में घूमकर आ सकते हैं। तो, अगर आपको समय मिले तो लैंसडाउन जरूर घूमकर आएं।
Hidden Peaks Of India: माउंट एवरेस्ट तो सब जानते हैं, लेकिन देखने लायक हैं भारत की इन 3 चोटियों के व्यूज

Hidden Peaks Of India: नई दिल्ली । घूमने फिरने का शौक भला किसे नहीं होता है। हर कोई जैसे ही मौका पाता है, वो बैग उठाकर निकल पड़ता है। किसी को पहाड़ों पर जाना पसंद होता है तो कोई बीच पर सुकून भरे पल बिताने जाता है। घूमने से मन को शांति मिलती है। हमारे यहां भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखने लायक होता है। वहीं जिन लोगों को एडवेंचर पसंद होता है, वो ट्रेकिंग जरूर करते हैं। जब भी बात भारत की सबसे खूबसूरत चोटियों की बात आती है तो लोगों के मन में केवल उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का ही ख्याल आता है। ये दोनों राज्य वाकई में बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन हम आपको कुछ ऐसी चोटियों के बारे में बता रहे हैं जहां की ट्रेकिंगआपको एक बार जरूर करनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि अगर जीते जी आपको स्वर्ग के दर्शन करने हैं तो यहां जरूर जाएं। आइए जानते हैं- कलसूबाई पीक, महाराष्ट्र महाराष्ट्र की खूबसूरती से तो हम सभी वाकिफ हैं। नासिक जिले में स्थित कलसूबाई पीक दुनिया के सबसे खूबसूरत पीक में से एक है। ये लगभग 5400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी ट्रेकिंग बरी के बेस गांव से शुरू होती है, जहां जाने के लिए लोहे की सीढ़ियां, एडवेंचर ट्रेक करके पहुंचा जा सकता है। जब आप इसकी पीक पर पहुंचेंगी तो वहां पर आपको दिल थाम देने वाले नजारे देखने को मिलेंगे। यहां जाने में आपको भले ही कठिनाइयों का सामना करना पड़े, लेकिन यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। नेत्रावती पीक, कर्नाटक ये पीक भी कर्नाटक राज्य की सबसे खूबसूरत चोटी है। चोटी तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 6 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ेगी। इस दौरान आपको पहाड़ाें पर हरे भरे नजारे देखने को मिलेंगे। जब आप इसके टॉप पर पहुंचेंगी तो आपको खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे। कुलकुमलाई पीक, तमिलनाडु ये पीक भले ही तमिलनाडु में है, लेकिन इसकी ट्रेकिंग की शुरुआत इडुक्कि जिले से होती है। यहां का सानराइज देखने लायक होता है। ऐसे में अगर आप सूर्योदय का खूबसूरत नजारा देखना चाहती हैं तो सुबह 3 बजे आपको निकलना पड़ेगा। तो अगर आप भी एडवेंचर लवर हैं, तो भारत के ये Hidden Peaks आपको जरूर एक्सप्लोर करने चाहिए। यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
LIFESTYLE UPDATE स्किन केयर में इन बातों का रखें ध्यान, बढ़ती उम्र में होगा एजिंग से बचाव

LIFESTYLE UPDATE: नई दिल्ली। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, चेहरे पर झुर्रियां और रिंकल्स दिखाई देने लगते हैं। लेकिन अगर तीस की उम्र में ही झुर्रियां दिखने लगें, तो इसकी सबसे बड़ी वजह स्किन केयर में लापरवाही है। सही देखभाल और कुछ आदतों को अपनाकर चेहरे की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। सुबह उठकर करें स्किन क्लीनिंग सुबह उठते ही कॉटन पैड की मदद से चेहरे को साफ करें। इसके साथ ही बाहर से आने के बाद भी स्किन को क्लीन करना जरूरी है। यह धूल, पॉल्यूशन और अन्य मैल को दूर करता है। चेहरे को साफ करने के बाद हमेशा मॉइस्चराइज़र लगाएं, ताकि त्वचा नमी बनी रहे और ड्रायनेस से बचा जा सके। MP POLITICS: राजस्व विभाग का बड़ा फैसला,119 राजस्व निरीक्षक बने नायब तहसीलदार; यहां देखें लिस्ट! स्क्रबर और फेशवॉश का चयन सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल बाहर जाने से पहले एसपीएफ 50 वाले सनस्क्रीन का उपयोग अनिवार्य करें। सूरज की यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं और एजिंग को तेज करती हैं। प्रोडक्ट्स में क्वालिटी और एंटीऑक्सीडेंट सस्ते और चिप स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। हमेशा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर प्रोडक्ट्स का चयन करें। विटामिन C और E त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं और झुर्रियों को कम करने में प्रभावी हैं। BANGLADESH NEW PM: बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, 25-सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल एक हिंदू नेता रात को मेकअप हटाना और घरेलू नुस्खे सोने से पहले हमेशा मेकअप हटा दें। अगर मेकअप नहीं किया है, तब भी चेहरे को पानी से धोकर ही सोएं। त्वचा की देखभाल के लिए घरेलू नुस्खों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बेसन, हल्दी, दही, शहद और एलोवेरा त्वचा को पोषण देते हैं और उसे नरम व दमकदार बनाते हैं।
अचानक बाल झड़ने लगे? हो सकता है एलोपेशिया जानें लक्षण और इलाज

नई दिल्ली । क्या आपके सिर या दाढ़ी में अचानक गोल पैच बन रहे हैं और बाल झड़ रहे हैं? यह सिर्फ सामान्य हेयर फॉल नहीं बल्कि एलोपेशिया एरियाटा हो सकता है जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही बालों की जड़ों पर हमला करता है और बाल अचानक झड़ने लगते हैं। एलोपेशिया सिर के साथ साथ दाढ़ी आइब्रो और शरीर के अन्य हिस्सों के बालों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एलोपेशिया और सामान्य गंजापन अलग हैं। सामान्य गंजापन धीरे धीरे होता है हॉर्मोन और जेनेटिक कारणों से बाल पतले होने लगते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसकती है। वहीं एलोपेशिया में बाल अचानक सिक्के के आकार के पैच में झड़ते हैं लेकिन जड़ें जीवित रहती हैं। इसका मतलब है कि सही समय पर पहचान और इलाज से बाल दोबारा उग सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 2% लोग जीवन में कभी न कभी एलोपेशिया का सामना कर चुके हैं। अमेरिका में करीब 68 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। शुरुआती लक्षणों में अचानक बाल झड़ना नहाते या कंघी करते समय बाल गुच्छों में गिरना शामिल है। कुछ लोगों को स्कैल्प पर खुजली हल्की जलन या झुनझुनी महसूस हो सकती है। इसके अलावा नाखूनों पर छोटे गड्ढे या सफेद धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। एलोपेशिया का इलाज समय पर पहचान और चिकित्सकीय देखभाल से संभव है। स्टेरॉयड क्रीम हेयर टॉनिक और चिकित्सक द्वारा सुझाई गई दवाइयाँ बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही तनाव कम करना संतुलित आहार और स्कैल्प की सही देखभाल भी लाभकारी होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि शुरुआती पहचान और उचित उपचार से बालों की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है। हालांकि यह बीमारी कॉस्मेटिक रूप से परेशान कर सकती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से संपर्क और उपचार से बाल दोबारा उग सकते हैं और एलोपेशिया को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए अगर अचानक बाल झड़ना शुरू हो जाए तो इसे नजरअंदाज न करें।
युवाओं पर कोरियन कल्चर का रंग, ग्लास स्किन से के-पॉप तक बढ़ा क्रेज

नई दिल्ली । देशभर में कोरियन कल्चर का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। संगीत, खान-पान, फैशन और जीवनशैली में कोरिया के नए ट्रेंड युवाओं में खासे लोकप्रिय हो गए हैं। राजधानी और बड़े शहरों में युवाओं की पसंद में के-पॉप म्यूजिक, ग्लास स्किन मेकअप, स्टाइलिश पहनावे और कोरियन फूड का क्रेज नजर आ रहा है। डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की वजह से युवा पीढ़ी कोरियन कल्चर के करीब आ रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप वीडियो, कोरियन वेब सीरीज, ब्यूटी और फैशन टिप्स को बहुत देखा और अपनाया जा रहा है। इस प्रवृत्ति ने न केवल मेकअप और कपड़ों पर असर डाला है, बल्कि खाने-पीने की आदतों और लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेंड का असर कुछ मामलों में नकारात्मक भी हो सकता है। हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या की दुखद घटना ने सवाल उठाए कि कोरियन कल्चर की लगातार आदत और डिजिटल दुनिया के दबाव का युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह घटना यह संकेत देती है कि डिजिटल और ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है। फैशन और मेकअप के क्षेत्र में खासकर ग्लास स्किन और के-पॉप स्टार्स की स्टाइलिंग का क्रेज सबसे अधिक देखा जा रहा है। युवा अपनी पहचान और स्टाइल को कोरियन ट्रेंड्स के साथ जोड़ रहे हैं। खान-पान में भी कोरियन फूड जैसे किमची, त्तोकबॉकी और कोरियन स्नैक्स की मांग बढ़ रही है। शहरों में कोरियन रेस्टोरेंट्स और कैफे इस ट्रेंड का फायदा उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरियन कल्चर की लोकप्रियता तकनीक, ग्लोबल कनेक्टिविटी और डिजिटल कंटेंट की वजह से बढ़ी है। हालांकि, यह जरूरी है कि युवा अपने स्थानीय और पारंपरिक मूल्यों के साथ इस ट्रेंड का संतुलित अनुभव करें। देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरियन कल्चर की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि ग्लोबल कल्चर और डिजिटल दुनिया युवा पीढ़ी के जीवन पर तेजी से असर डाल रही है। यह प्रवृत्ति फैशन, म्यूजिक और फूड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की सोच और सामाजिक व्यवहार में भी असर डाल रही है।
यूरिक एसिड बढ़ा है? इन 9 संकेतों से पहचानें और बिना दवा भी करें कंट्रोल

नई दिल्ली । अगर अचानक जोड़ों में दर्द, सूजन या पैरों के अंगूठे में जलन महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके पीछे हाई यूरिक एसिड (Uric Acid) की संभावना हो सकती है। शरीर भोजन के पाचन और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं के दौरान यूरिक एसिड बनाता है। आमतौर पर किडनी इसे पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन अगर इस प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाए तो यूरिक एसिड शरीर में जमा होने लगता है और गाउट यानी गठिया जैसी परेशानी पैदा कर सकता है। लक्षण यूरिक एसिड बढ़ने के सबसे सामान्य लक्षण जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और जकड़न हैं। खासकर पैरों के अंगूठे, घुटने और टखने प्रभावित होते हैं। दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है और रात में बढ़ सकता है। कुछ मामलों में किडनी पर असर पड़ सकता है, जिससे पेशाब में जलन या किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कॉम्प्लिकेशन्स यूरिक एसिड लंबे समय तक हाई रहने पर जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जम सकते हैं, जिससे परमानेंट डैमेज हो सकता है। गाउट के कारण जोड़ों में लगातार सूजन और तेज दर्द रहता है। इसके अलावा किडनी स्टोन का खतरा भी बढ़ जाता है। नॉर्मल लेवल एक स्वस्थ वयस्क में यूरिक एसिड का सामान्य स्तर पुरुषों में 3.4–7.0 mg/dL और महिलाओं में 2.4–6.0 mg/dL होता है। इसके ऊपर जाने पर जोड़ों और किडनी को असर पड़ सकता है। टेस्ट यूरिक एसिड लेवल जानने के लिए सीरम यूरिक एसिड ब्लड टेस्ट या यूरिन यूरिक एसिड टेस्ट करवाया जा सकता है। ये टेस्ट सुरक्षित और आसान होते हैं। इलाज और कंट्रोल हल्का बढ़ा यूरिक एसिड लाइफस्टाइल सुधार से कंट्रोल किया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, वजन नियंत्रित रखना और हेल्दी डाइट अपनाना मददगार है। अगर गाउट अटैक हो रहे हैं, तो डॉक्टर दवा देते हैं। डाइट और खान-पान लो-प्यूरिन और फाइबर से भरपूर फूड जैसे हरी सब्जियां, मौसमी फल, होल ग्रेन्स और लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स फायदेमंद हैं। विटामिन-C वाले फल जैसे संतरा, नींबू और आंवला यूरिक एसिड को किडनी से बाहर निकलने में मदद करते हैं। इसके विपरीत रेड मीट, ऑर्गन मीट, सी-फूड, शराब, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और बहुत मीठे जूस से परहेज करें। डॉक्टर से कंसल्ट कब करें: बार-बार गाउट अटैक लंबे समय तक दर्द बना रहना चलने-फिरने में दिक्कत पेशाब में जलन या खून आना बहुत कम पेशाब किडनी स्टोन की समस्या समय रहते लक्षण पहचानकर सही इलाज और संतुलित जीवनशैली अपनाने से यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है।
Skin Care Tips: बदलते मौसम में भी स्किन रहे फ्रेश और हेल्दी, बस फॉलो करें ये ब्यूटी टिप्स

नई दिल्ली । बदलते मौसम की वजह से सिर्फ सेहत ही नहीं बल्कि स्किन भी प्रभावित होती है. अभी ठंड पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. भले ही सुबह और शाम का मौसम अच्छा रहता है, लेकिन दिन की तेज चिलचिलाती धूप लोगों को बाहर निकलने से पहले सोचने पर मजबूर कर रही है. ऐसे में अपनी स्किन को ग्लोइंग बनाए रखने के लिए सही डाइट लेना और स्किन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. मौसम में बदलाव के कारण स्किन पर बुरा असर पड़ता है, जैसे कि ड्राई स्किन, ऑयलीनेस, पिंपल्स या एलर्जी की समस्या. यहां कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बदलते मौसम में भी हेल्दी और ग्लोइंग स्किन पा सकते हैं. सनस्क्रीन जरूर लगाएं हर मौसम में सनस्क्रीन का उपयोग करना जरूरी होता है. इसे केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों और बरसात में भी लगाना चाहिए. सनस्क्रीन त्वचा को धूप से होने वाले दाग-धब्बों, झुर्रियों और अन्य समस्याओं से बचाने में मदद करती है. बाहर जाने से पहले SPF 40+ या उससे ज्यादा एसपीएफ वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं. सही मॉइस्चराइजर का करें इस्तेमाल मौसम बदलने के साथ त्वचा में नमी की कमी हो सकती है, इसलिए इसे मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है. गर्मियों में ग्रीसी और भारी क्रीम की बजाय जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर का उपयोग करें. हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स जैसे एलोवेरा, खीरा और गुलाब जल का इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा में ताजगी बनी रहे. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है. दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. पानी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो सकती है. इसके अलावा, फेस मिस्ट का उपयोग करें, ताकि स्किन को एक्स्ट्रा हाइड्रेशन मिले. चेहरे को दिन में दो बार धोएं गर्मी के कारण धूल, गंदगी और पसीने की वजह से त्वचा ऑयली हो जाती है, जिससे पिंपल्स की समस्या हो सकती है. दिन में कम से कम दो बार फेस वॉश से चेहरा साफ करें. इसके बाद टोनर का इस्तेमाल करें, ताकि पोर्स क्लीन रहें और स्किन फ्रेश दिखे.
क्या आपकी त्वचा भी पड़ रही है काली? मेलानिन को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स!

नई दिल्ली। हमारी त्वचा का प्राकृतिक रंग ‘मेलानिन’ नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है। हालाँकि मेलानिन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से हमारी रक्षा करता है, लेकिन शरीर में इसकी अधिकता चेहरे पर काले धब्बे, झाइयां और असमान रंगत (पिगमेंटेशन) का कारण बन सकती है। अगर आप भी अपनी त्वचा को एक समान, साफ और चमकदार बनाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान और असरदार उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं। 1. सूर्य की किरणों से सुरक्षा सनस्क्रीन का जादूसूरज की यूवी किरणें मेलानिन के उत्पादन को सबसे ज्यादा उत्तेजित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे खिड़की से आने वाली धूप हो या बादलों वाला मौसम, SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन रोज लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा, बाहर निकलते समय टोपी, छाता और हल्के सूती कपड़ों का उपयोग त्वचा को सीधी धूप से बचाने में मदद करता है। 2. विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स का सेवनविटामिन C मेलानिन को रोकने का एक पावरहाउस है। यह न केवल त्वचा को अंदर से साफ करता है बल्कि टायरोसिनेस (Tyrosinase) एंजाइम को रोककर मेलानिन उत्पादन धीमा करता है। अपने आहार में संतरा, आंवला, स्ट्रॉबेरी और अंगूर शामिल करें। इसके साथ ही, चेहरे पर अच्छी गुणवत्ता वाला विटामिन C सीरम लगाना भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। ग्रीन टी और बेरीज भी इसमें काफी सहायक होते हैं। 3. नियमित एक्सफोलिएशनत्वचा की ऊपरी मृत कोशिकाओं (Dead Cells) में मेलानिन जमा हो जाता है, जिससे त्वचा डार्क दिखने लगती है। साप्ताहिक स्क्रबिंग या कोमल केमिकल एक्सफोलिएशन से इन मृत कोशिकाओं को हटाया जा सकता है, जिससे नीचे की साफ और नई त्वचा बाहर आती है। ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा कठोर न हो, वरना त्वचा छिल सकती है। 4. नींबू और प्राकृतिक फेस पैकनींबू में प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग गुण होते हैं। लेकिन इसे सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय दही या शहद के साथ मिलाकर लगाना ज्यादा सुरक्षित है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और नींबू का विटामिन C मिलकर पिगमेंटेशन को कम करते हैं और त्वचा को हाइड्रेटेड रखते हैं। 5. लाइफस्टाइल में बदलावआपकी त्वचा आपके अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे), भरपूर पानी पीना और तनाव मुक्त रहना मेलानिन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। तनाव से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जो मेलानिन बढ़ा सकता है। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब से परहेज करना भी त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए जरूरी है। डर्मेटोलॉजिस्ट की राय: विशेषज्ञों का मानना है कि मेलानिन को पूरी तरह खत्म करना न तो संभव है और न ही सही, क्योंकि यह त्वचा का सुरक्षा कवच है। लेकिन सही सनस्क्रीन, संतुलित आहार और स्किनकेयर रूटीन के जरिए डार्क स्पॉट्स और असमान पिगमेंटेशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कब्ज और अपच से राहत दिलाए खीरे का यह नुस्खा, चेहरे को भी दे प्राकृतिक चमक

नई दिल्ली में आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोगों को समय पर और व्यवस्थित भोजन करने का अवसर नहीं मिल पाता। कई बार व्यक्ति संतुलित आहार तो लेता है, लेकिन इसके बावजूद शरीर में कमजोरी, सुस्ती और भारीपन की शिकायत बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण खराब पाचन तंत्र हो सकता है। यदि भोजन ठीक से नहीं पचता, तो उसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह नहीं मिल पाते। ऐसे में भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है और शरीर को अपेक्षित ऊर्जा और पोषण नहीं मिलता। इसलिए केवल संतुलित आहार लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पचना भी उतना ही जरूरी है। जब पाचन प्रक्रिया कमजोर हो जाती है, तो पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं। गैस, अपच और कब्ज जैसी परेशानियां न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती हैं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। आयुर्वेद में पेट से जुड़े रोगों के लिए कई रामबाण उपाय बताए गए हैं, लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि बिना दवा के भी पेट की पाचन अग्नि को सुधारा जा सकता है। इसके लिए एक सरल और असरदार उपाय है खीरे की सलाद। अधिकांश लोग खीरे की सलाद खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका नियमित सेवन पेट की कई समस्याओं से राहत दिला सकता है। रोज़ एक कटोरी ताजा खीरे की सलाद खाना पाचन सुधारने में बेहद सहायक माना जाता है। खीरे में भरपूर पानी, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये पेट को साफ करने, कब्ज को तोड़ने और आंतों को लुब्रिकेट करने में मदद करते हैं। खीरे का पानी शरीर की शुष्कता कम करता है और मल त्यागने में आसानी होती है। खीरे की सलाद का सेवन करने का सबसे अच्छा समय दोपहर के भोजन के साथ माना जाता है। आप चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू और काला नमक मिला सकते हैं। इसे हफ्ते में चार दिन आहार में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। ध्यान रखें कि ज्यादा नमक न डालें और यदि खीरा फ्रिज में रखा था तो सामान्य तापमान पर आने के बाद ही इसका सेवन करें। खीरे का लाभ केवल पाचन तक ही सीमित नहीं है। यह त्वचा और बालों को भी स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करता है। गर्मियों के मौसम में त्वचा की ड्राईनेस कम करने के लिए खीरे का सेवन और लेपन भी फायदेमंद है। खीरे का नियमित सेवन चेहरे को प्राकृतिक ग्लो देता है और थकान भी कम करता है। इस प्रकार रोज़ाना खीरे की सलाद न केवल पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती है, बल्कि त्वचा और बालों की सुंदरता में भी सुधार लाती है। यह एक सरल, प्राकृतिक और असरदार नुस्खा है, जिसे आप अपने दैनिक आहार में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
इंडियाएआई मिशन का असर, सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर इलाज

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को रणनीतिक रूप से शामिल किया है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना, बीमारी की जल्द पहचान सुनिश्चित करना और दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर इलाज पहुंचाना है। आधिकारिक बयान में बताया गया कि एआई टूल्स का उपयोग अब कई प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किया जा रहा है। National TB Elimination Programme के तहत एआई आधारित स्क्रीनिंग और विश्लेषण से टीबी के गंभीर मामलों में 27 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इसी तरह National Diabetic Retinopathy Screening Programme में एआई की मदद से गैर-विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मी भी शुरुआती जांच कर पा रहे हैं। बीमारी निगरानी प्रणाली में एआई के इस्तेमाल से अब तक 4,500 से अधिक संभावित प्रकोपों के अलर्ट समय रहते मिल चुके हैं, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी। इससे संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद मिली है। डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म eSanjeevani ने इस बदलाव को और मजबूती दी है। इस ऑनलाइन परामर्श सेवा के जरिए अब तक 28.2 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सलाह मिल चुकी है। एआई आधारित टूल्स डॉक्टरों को बीमारी की पहचान और उपचार निर्णय में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। सरकार ने कुपोषण की निगरानी के लिए भी एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग शुरू किया है। इससे बच्चों और माताओं में पोषण संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है। अब भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं रहा। कैंसर के उपचार, आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण और National One Health Programme के तहत मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित दृष्टिकोण में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी कड़ी में 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ के पहले अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जहां नीति, शोध, उद्योग और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने IndiaAI Mission को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य एआई के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देना है।इसी मिशन के तहत ‘इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव’ भी चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश की प्रमुख समस्याओं के समाधान हेतु स्वदेशी एआई समाधान विकसित करना है। बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं इस पहल का एक महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही हैं। सरकार का दावा है कि एआई के इस्तेमाल से दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुधर रही है, उपचार की लागत घट रही है और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंच रही हैं। यदि यह पहल इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र डिजिटल और तकनीकी दृष्टि से और अधिक सशक्त हो सकता है।