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स्किन के लिए खतरा बन सकता है ओवरनाइट फेस पैक जानें एक्सपर्ट की सलाह

नई दिल्ली । चेहरे को चमकाने के लिए लोग कई प्रकार के फेस पैक लगाते हैं। ताकि अच्छा निखार आ सके।लेकिन कई बार देखा जाता है कि लोग इसका इस्तेमाल करते समय कुछ गलतियां कर देते हैं। फेस मास्क या फेस पैक लगाते समय यह गलती कर बैठते हैं कि उसे जरूरत से ज्यादा देर तक चेहरे पर लगा रहने देते हैं। उनकी सोच होती है कि जितनी देर फेस पैक रहेगा, त्वचा उतनी ज्यादा ग्लो करेगी। लेकिन इससे ज्यादा गला नहीं होता है बल्कि आपकी स्किन को नुकसान पहुंचता है चलिए बताते हैं कैसे। अधिक देर तक न लगाए रखेंचाहे आप कोई प्रोडक्ट का फेस पैक लगा रहे हो या फिर बेसन और हल्दी का। अधिकतर लोग यही मानते हैं कि ज्यादा देर तक लगाने से स्किन और बेहतर हो जाएगी। चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए फेस पैक का उपयोग काफी आम है। यह त्वचा की गंदगी हटाने, नमी बनाए रखने और नेचुरल ग्लो देने में मदद करता है। लेकिन अगर इसे जरूरत से ज्यादा समय तक चेहरे पर छोड़ दिया जाए, तो यह लाभ की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है। जब फेस पैक पूरी तरह सूख जाता है और उसके बाद भी उसे चेहरे पर लगा रहने दिया जाता है, तो त्वचा सिकुड़ने लगती है। इससे चेहरे पर खिंचाव महसूस होता है और कई बार जलन, खुजली या लालपन जैसी समस्या भी हो सकती है। त्वचा में रूखापन और नमी की कमीफेस पैक त्वचा से अतिरिक्त तेल, गंदगी और डेड स्किन को हटाने का काम करता है। लेकिन अगर इसे जरूरत से ज्यादा देर तक रखा जाए, तो यह त्वचा की प्राकृतिक नमी भी सोख लेता है। इसके कारण चेहरा सूखा, खुरदरा और थका हुआ दिखने लगता है। कुछ फेस पैक में क्ले, चारकोल या एक्टिव इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो लंबे समय तक त्वचा पर रहने पर रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं। इससे पिंपल्स, दाने या एलर्जिक रिएक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए आपको इन्हें सीमित समय तक कि उसे करना चाहिए यानी कि कैसे फेस पैक सुख आपको उसे धूल देना चाहिए ताकि आपका चेहरा अच्छा रहे।

मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा

नई दिल्ली । भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में एयर कूलर आम लोगों के लिए राहत का सबसे सस्ता और असरदार साधन बन जाता है खासकर मिडिल क्लास परिवारों में कूलर का उपयोग तेजी से बढ़ जाता है लेकिन इसके साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आती है और वह है कूलर के टैंक में जमा गंदा पानी और उससे आने वाली बदबू यह समस्या न केवल असहजता पैदा करती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है दरअसल कूलर में जमा पानी कुछ ही दिनों में गंदा होने लगता है और उसमें बैक्टीरिया तथा सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं यही कारण है कि कूलर चलाने पर कमरे में सीलन और बदबू महसूस होती है इसके अलावा रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाता है जिससे डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ऐसी स्थिति में अगर आप इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आपकी रसोई में मौजूद एक साधारण सी चीज फिटकरी बेहद कारगर साबित हो सकती है फिटकरी का उपयोग सदियों से पानी को साफ करने के लिए किया जाता रहा है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है जब फिटकरी को पानी में डाला जाता है तो यह उसमें मौजूद गंदगी के सूक्ष्म कणों को आपस में जोड़ देती है जिससे वे भारी होकर टैंक की तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी साफ और पारदर्शी हो जाता है कूलर के टैंक में फिटकरी का एक छोटा सा टुकड़ा डालने से पानी लंबे समय तक साफ बना रहता है और उसमें गंदगी जल्दी जमा नहीं होती इसके साथ ही यह मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना को भी कम कर देता है क्योंकि फिटकरी पानी के रासायनिक संतुलन में ऐसा बदलाव लाती है जो मच्छरों के लिए अनुकूल नहीं होता इसके अलावा फिटकरी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं यही वजह है कि कूलर से आने वाली बदबू भी धीरे धीरे खत्म हो जाती है जब पानी साफ और बैक्टीरिया मुक्त होता है तो कूलर से निकलने वाली हवा भी ताजी और ठंडी महसूस होती है हालांकि फिटकरी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार कूलर के टैंक में बहुत अधिक मात्रा में फिटकरी डालना सही नहीं है एक छोटा सा टुकड़ा ही पर्याप्त होता है अधिक मात्रा में उपयोग करने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है इसके साथ ही केवल फिटकरी पर निर्भर रहना भी सही नहीं है कूलर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है टैंक और पैड्स को समय समय पर साफ करना चाहिए ताकि फंगस और गंदगी जमा न हो सके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर तीन से चार दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदलना एक अच्छी आदत है अगर आप इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो न केवल कूलर की बदबू और गंदगी से छुटकारा पा सकते हैं बल्कि अपने परिवार को मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारियों से भी सुरक्षित रख सकते हैं

healthy hair routine : बालों की सेहत का राज गर्मियों में कितनी बार धोएं बाल और कैसे रखें नैचुरल चमक बरकरार

 healthy hair routine : नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप पसीना धूल और प्रदूषण का असर सबसे पहले हमारे बालों और सिर की त्वचा पर दिखाई देने लगता है। इस दौरान कई लोगों के बाल चिपचिपे और बेजान हो जाते हैं तो कुछ लोगों को रूखेपन और बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या गर्मियों में रोजाना बाल धोना चाहिए या फिर सीमित बार ही शैंपू करना बेहतर होता है दरअसल हमारे सिर की त्वचा प्राकृतिक रूप से एक तेल बनाती है जिसे सीबम कहा जाता है। यह तेल बालों को पोषण देता है और उन्हें सूखने से बचाकर उनकी प्राकृतिक चमक बनाए रखता है। लेकिन गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण यह तेल धूल और गंदगी के साथ मिलकर सिर में चिपचिपाहट पैदा कर देता है। यदि लंबे समय तक बाल साफ नहीं किए जाएं तो इससे खुजली डैंड्रफ और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रोजाना शैंपू करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार बार बार शैंपू करने से सिर की त्वचा का प्राकृतिक तेल कम हो जाता है जिससे बाल कमजोर और रूखे हो सकते हैं। इसलिए बाल धोने की सही आवृत्ति हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति पर निर्भर करती है MORENA ILLEGAL MINING: मुरैना में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त जिन लोगों के बाल तैलीय यानी ऑयली होते हैं उन्हें सप्ताह में लगभग तीन बार बाल धोने की सलाह दी जाती है ताकि अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ हो सके। वहीं जिन लोगों के बाल सूखे या घुंघराले होते हैं उनके लिए सप्ताह में एक या दो बार शैंपू करना पर्याप्त होता है। घुंघराले बालों में प्राकृतिक तेल नीचे तक आसानी से नहीं पहुंच पाता जिससे वे जल्दी सूख जाते हैं जबकि सीधे और पतले बाल जल्दी ऑयली नजर आते हैं बाल धोने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उन्हें धोने की आवृत्ति। बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि इससे बालों की नमी खत्म हो जाती है और वे बेजान दिखने लगते हैं। हमेशा हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर होता है शैंपू लगाने का सही तरीका यह है कि पहले उसे हथेली पर लेकर हल्का झाग बना लें और फिर धीरे धीरे सिर की त्वचा पर लगाएं। बालों को जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाल टूट सकते हैं। इसके बाद साफ पानी से बालों को अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि कोई केमिकल अवशेष न रह जाए Health Alert: पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत शैंपू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल भी बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह बालों को मुलायम बनाता है और उन्हें टूटने से बचाता है। खासकर लंबे और सूखे बालों वाले लोगों के लिए कंडीशनर बेहद जरूरी माना जाता है अंत में यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के बाल अलग होते हैं इसलिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं होता। सही जानकारी और संतुलित देखभाल से ही आप गर्मियों में भी अपने बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रख सकते हैं

Healthy Lifestyle: ना कोल्ड ड्रिंक ना जूस, गर्मी में शरीर को ठंडा रखेगा घर का बना कच्चे आम का झोलिया

 Healthy Lifestyle: नई दिल्ली । भीषण गर्मी और तपती धूप के इस मौसम में जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है तब शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है ऐसे में लू और डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है लोग राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस का सहारा लेते हैं लेकिन ये पेय पदार्थ शरीर को तात्कालिक राहत देने के बजाय कई बार नुकसान भी पहुंचा सकते हैं ऐसे समय में किचन में मौजूद एक देसी और पारंपरिक उपाय आपकी सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है और वह है कच्चे आम से बना झोलिया कच्चे आम जिसे कैरी भी कहा जाता है गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है इससे बना झोलिया न केवल स्वाद में चटपटा और ताजगी भरा होता है बल्कि यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और लू से बचाने में मदद करता है खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है झोलिया बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे आम को धोकर छील लिया जाता है और छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है इसके बाद एक बर्तन में पानी गरम करके आम के टुकड़ों को कुछ मिनट तक उबाला जाता है जब आम नरम हो जाए तो उसे ठंडा कर लिया जाता है इसके बाद मिक्सर में उबले हुए आम के साथ पुदीना हरा धनिया हरी मिर्च और कुछ खास मसाले मिलाए जाते हैं इसमें काला नमक सादा नमक काली मिर्च और स्वादानुसार चीनी डालकर इसे अच्छी तरह पीस लिया जाता है जब यह मिश्रण स्मूद हो जाए तो इसे छानकर ठंडा किया जाता है और जरूरत के अनुसार पानी या बर्फ मिलाकर सर्व किया जाता है यह पेय न केवल प्यास बुझाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है गर्मी के मौसम में कच्चे आम का झोलिया पीने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं यह पाचन को बेहतर बनाता है शरीर को ऊर्जा देता है और लू के प्रभाव से बचाता है साथ ही इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में पानी की कमी को दूर करने में सहायक होते हैं खास बात यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक पेय है जिसमें किसी प्रकार के केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं होते इसलिए यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है इसे आप घर आए मेहमानों को भी ठंडे शरबत के रूप में परोस सकते हैं या फिर इसे पानी पुरी के पानी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं आज जब लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर लौट रहे हैं ऐसे में कच्चे आम का झोलिया एक बार फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है यह न केवल स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है बल्कि भारतीय परंपरा का भी एक अहम हिस्सा है जो हमें प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ रहने की सीख देता है

Health Alert: पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

   Health Alert: नई दिल्ली ।गर्मी के मौसम में बार-बार प्यास लगना और गला सूखना आम बात मानी जाती है लेकिन जब पर्याप्त पानी पीने के बाद भी यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है यह शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है जिसे मेडिकल भाषा में जेरोस्टोमिया कहा जाता है जेरोस्टोमिया वह स्थिति है जिसमें मुंह में लार का उत्पादन कम हो जाता है लार हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह भोजन को पचाने में मदद करती है मुंह को नम बनाए रखती है और बैक्टीरिया से बचाव करती है जब लार ग्रंथियां ठीक से काम नहीं करतीं तो मुंह में सूखापन महसूस होने लगता है और व्यक्ति को बार बार पानी पीने की जरूरत पड़ती है हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह समस्या केवल पानी की कमी नहीं बल्कि कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है इनमें सबसे प्रमुख डायबिटीज है जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए अधिक पेशाब बनाती है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मुंह सूखने लगता है साथ ही लगातार प्यास भी महसूस होती है MORENA ILLEGAL MINING: मुरैना में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त इसके अलावा यह लक्षण अल्जाइमर स्ट्रोक एचआईवी संक्रमण और नर्व डैमेज जैसी गंभीर स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं कई मामलों में यह ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का संकेत भी होता है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही अपनी लार ग्रंथियों को प्रभावित करने लगती है विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई बार यह समस्या बीमारियों के बजाय दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी हो सकती है हाई ब्लड प्रेशर एलर्जी डिप्रेशन या घबराहट की दवाएं लार ग्रंथियों की कार्यक्षमता को कम कर देती हैं जिससे मुंह सूखने की समस्या बढ़ जाती है इस स्थिति से बचने के लिए केवल सादा पानी पीना पर्याप्त नहीं होता शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट रखना जरूरी है इसके लिए नींबू पानी नारियल पानी और ओआरएस का सेवन फायदेमंद माना जाता है इसके साथ ही तरबूज खरबूजा खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करना चाहिए चाय कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकते हैं पानी में पुदीना या नींबू डालकर पीना भी राहत दे सकता है अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहती है और इसके साथ चबाने या निगलने में कठिनाई महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है

घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ नजर आने लगा है लंबे समय तक बैठकर काम करना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान के कारण घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द कमजोरी और अकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं पहले ये समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देती थीं लेकिन अब युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है ऐसे में योग का एक बेहद आसान लेकिन प्रभावी अभ्यास नी मूवमेंट लोगों के लिए राहत का जरिया बन सकता है जिसे समस्थिति भी कहा जाता है यह एक बेसिक योग मुद्रा है लेकिन इसके फायदे बेहद व्यापक हैं भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास न केवल घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है बल्कि शरीर के निचले हिस्से की स्थिरता और ताकत भी बढ़ाता है नी मूवमेंट को करने के लिए किसी विशेष उपकरण या जगह की जरूरत नहीं होती इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें और नजर सामने की ओर स्थिर रखें इसके बाद धीरे धीरे अपने शरीर को ऐसे नीचे झुकाएं जैसे आप हवा में कुर्सी पर बैठने जा रहे हों इस स्थिति में शरीर को संतुलित रखते हुए कुछ मिनट तक रुकना होता है यह अभ्यास देखने में जितना सरल लगता है उतना ही असरदार है नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में मजबूती आती है साथ ही जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और कमजोरी को दूर करता है नी मूवमेंट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाता है जिससे रोजमर्रा के काम करना आसान हो जाता है इसके साथ ही यह मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ाता है जब आप इस मुद्रा में स्थिर रहते हैं तो आपका ध्यान पूरी तरह शरीर और सांस पर केंद्रित होता है जिससे तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है यह अभ्यास केवल शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में भी मदद करता है व्यस्त दिनचर्या में यदि रोजाना कुछ मिनट भी इस अभ्यास के लिए निकाल लिए जाएं तो यह लंबे समय में बड़े फायदे दे सकता है हालांकि यह एक सरल योग अभ्यास है लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है जिन लोगों को गंभीर जोड़ों की समस्या या आर्थराइटिस है उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए स्वस्थ व्यक्ति इसे नियमित रूप से अपनाकर अपने शरीर को मजबूत और संतुलित बना सकते हैं

महंगी सनस्क्रीन छोड़ें, किचन के ये देसी नुस्खे देंगे नेचुरल ग्लो और टैनिंग से छुटकारा

नई दिल्ली । तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बीच त्वचा की देखभाल आज के समय में एक बड़ी जरूरत बन गई है लोग अपनी स्किन को टैनिंग और यूवी किरणों से बचाने के लिए महंगी सनस्क्रीन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं लेकिन इसके बावजूद कई बार चेहरे पर कालापन पिग्मेंटेशन और रूखापन बना रहता है इसका कारण केवल प्रोडक्ट नहीं बल्कि सही जानकारी का अभाव और गलत चुनाव भी होता है अक्सर लोग सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ SPF नंबर देखकर ही फैसला कर लेते हैं जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है सही सनस्क्रीन वही होती है जिस पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा हो क्योंकि यह UVA और UVB दोनों तरह की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करती है इसके साथ ही स्किन टाइप के अनुसार सनस्क्रीन चुनना भी बेहद जरूरी है ऑयली स्किन वालों को जेल बेस्ड और ड्राई स्किन वालों को लोशन बेस्ड सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए इसके अलावा कई सनस्क्रीन में ऐसे केमिकल होते हैं जो लंबे समय में त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए प्रोडक्ट खरीदते समय उसके इंग्रीडिएंट्स और एक्सपायरी डेट की जांच करना भी जरूरी है कई बार गलत या एक्सपायर्ड सनस्क्रीन त्वचा पर उल्टा असर डालती है अगर आप केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचना चाहते हैं तो किचन में मौजूद प्राकृतिक चीजें आपकी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं घरेलू नुस्खे न केवल सस्ते होते हैं बल्कि लंबे समय तक त्वचा को हेल्दी बनाए रखते हैं दही और मसूर दाल का पैक त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है मसूर दाल को पीसकर उसमें दही मिलाकर लगाने से यह एक नेचुरल एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को ठंडक देता है और टैनिंग को कम करने में मदद करता है इस पैक को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा साफ और चमकदार बनती है इसी तरह एलोवेरा और नारियल तेल का मिश्रण भी त्वचा के लिए बेहद लाभकारी है एलोवेरा में हल्का प्राकृतिक SPF होता है जो त्वचा को धूप से बचाने में मदद करता है वहीं नारियल तेल त्वचा को मॉइश्चराइज कर उसे मुलायम बनाए रखता है यह खासतौर पर ड्राई स्किन वालों के लिए बेहद असरदार उपाय है सिर्फ घरेलू नुस्खे अपनाना ही काफी नहीं है बल्कि सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका भी जानना जरूरी है घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगानी चाहिए ताकि वह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं तो हर 3 से 4 घंटे में इसे दोबारा लगाना चाहिए त्वचा की देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही जानकारी और प्राकृतिक उपायों के संतुलन से ही असली निखार मिलता है इस गर्मी में अपनी स्किन को सुरक्षित और चमकदार बनाए रखने के लिए किचन के इन आसान और असरदार नुस्खों को अपनाना एक बेहतर और सस्ता विकल्प साबित हो सकता है

Summer Travel Guide: भीषण गर्मी में राहत देने वाली खूबसूरत जगहें, घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

नई दिल्ली। इस समय गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगतार गर्मी बढ़ती ही जाएगी। गर्मियों की तपती धूप से राहत पाने के लिए ठंडी और सुकून भरी जगहों की तलाश हर किसी को होती है। भारत में कई ऐसे खूबसूरत हिल स्टेशन और ठंडी जगहें हैं, जहां आप गर्मी से बचकर आरामदायक छुट्टियां बिता सकते हैं। चलिए जानते हैं वो घूमने की जगहें। वैली ऑफ फ्लावर्सउत्तराखंड की मशहूर वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक गर्मियों में बेहद खूबसूरत लगती है। यहां चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल और हरियाली देखने को मिलती है, जो ट्रेकिंग के शौकीनों को खास अनुभव देती है। यहां आने के बाद आपका मन जहां से जाने को बिलकुल भी नहीं करेगा। यहां आप कई तस्वीरें भी खींच सकती हैं। मनालीइस समय मनाली जाने का अच्छा ऑप्शन हैं। गर्मियों के लिए ये सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन में से एक है। यहां का ठंडा मौसम, बर्फ से ढके पहाड़ और हरी-भरी वादियां पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। आप यहां रोहतांग पास, सोलंग वैली और एडवेंचर एक्टिविटीज का मजा ले सकते हैं। गुलमर्गअगर आप कश्मीर की खूबसूरती देखना चाहते हैं, तो गुलमर्ग जरूर जाएं। यहां का ठंडा मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य इसे “धरती का स्वर्ग” बनाता है। आप यहां केबल कार राइड और बर्फीले नजारों का आनंद ले सकते हैं।यहां के नजारे ही इतने प्यारे होते हैं कि आप यहां आने के लिए मजबूर हो जाएंगे। जुकू वैलीनागालैंड की जुकू वैली ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां हरे-भरे मैदान और खूबसूरत फूल देखने को मिलते हैं, जो इसे एक अलग और यादगार ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बनाते हैं। शिलॉन्गशिलॉन्ग को ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और यह भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है। यहां का ठंडा और सुहावना मौसम, हरियाली से भरी पहाड़ियां और झरने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गर्मियों में भी यहां का तापमान काफी आरामदायक रहता है, इसलिए यह घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा, तेज गर्मी में सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ीं

नई दिल्ली । प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ने के साथ ही लोगों की सेहत पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण अस्पतालों और क्लीनिकों में हीट स्ट्रोक, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति लापरवाही करने पर गंभीर रूप भी ले सकती है। हीट स्ट्रोक क्या है और कैसे होता हैहीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। तेज धूप में लंबे समय तक रहने, पर्याप्त पानी न पीने और अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से यह स्थिति बनती है। इसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे दिमाग और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। सिरदर्द और चक्कर आने के मुख्य कारणगर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है, जिससे ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। इसी कारण लोगों को सिरदर्द, कमजोरी, थकान और चक्कर आने की शिकायत होती है। कई बार तेज धूप में अचानक बाहर निकलने से भी यह समस्या बढ़ जाती है। किन लोगों को ज्यादा खतराबुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर इस मौसम में ज्यादा जोखिम में रहते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणविशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों में तेज सिरदर्द, चक्कर, मतली, त्वचा का लाल होना, अत्यधिक पसीना या अचानक पसीना बंद हो जाना शामिल है। गंभीर स्थिति में मरीज बेहोश भी हो सकता है, जो आपातकालीन स्थिति मानी जाती है। गर्मी से बचाव के उपायडॉक्टर सलाह देते हैं कि दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी या ओआरएस का सेवन करें। तली-भुनी चीजों से भी बचना चाहिए। कब लें तुरंत चिकित्सा सहायताअगर किसी व्यक्ति को तेज चक्कर, बेहोशी, लगातार उल्टी या शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर हीट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है।

गर्मी में डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े, शरीर में पानी की कमी से बिगड़ सकती है सेहत

नई दिल्ली । तेज गर्मी और लू के बीच इन दिनों डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी शिकायतें हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। डिहाइड्रेशन क्या है और कैसे होता हैडिहाइड्रेशन तब होता है जब शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से कम हो जाती है। गर्मी में अधिक पसीना आने और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। डिहाइड्रेशन के सामान्य लक्षणपानी की कमी होने पर शरीर कई संकेत देता है। इनमें अत्यधिक प्यास लगना, मुंह सूखना, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना, पेशाब का रंग गहरा होना और थकान शामिल हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति बेहोशी तक महसूस कर सकता है। किन लोगों में ज्यादा खतराविशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और खुले में काम करने वाले मजदूर डिहाइड्रेशन के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जो लोग कम पानी पीते हैं या अधिक शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन बढ़ने के कारणतेज धूप में लंबे समय तक बाहर रहना, पसीने के साथ शरीर से नमक और पानी का अधिक निकलना, और पानी की पर्याप्त मात्रा में पूर्ति न होना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन भी शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है। बचाव के आसान उपायडॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्मी में हर कुछ समय पर पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस का सेवन भी फायदेमंद होता है। हल्के और सूती कपड़े पहनें और धूप में बाहर निकलने से बचें। कब हो जाए सावधानअगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या बेहोशी महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी होता है।