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Hair Care Tips: झड़ते बालों से छुटकारा पाने और ग्रोथ बढ़ाने के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय

नई दिल्ली। बालों को प्राकृतिक तरीके से लंबा, घना और मजबूत बनाना चाहते हैं। तब आपको नीचे दिए गए इन टिप्स को अच्छे से जाना और समझना चाहिए। ताकि आपके बाल काफी मजबूत बने रहें। आपके घर के रसोई में ही ऐसी कई चीज होती है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने बालों को अच्छा बना सकती हैं तो चलिए उनके बारे में जानते हैं और उससे जुड़ा उपाय करते हैं। मेथी दाना का कमालआपके लिए मेथी दाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। बालों की देखभाल में मेथी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है, क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों को जड़ों से पोषण देने में मदद करते हैं।अगर आप इसे नियमित रूप से अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं, तो कुछ ही हफ्तों में इसका असर साफ नजर आने लगता है। आइए जानते हैं इस असरदार मेथी हेयर पैक को बनाने और इस्तेमाल करने का सही तरीका। मेथी दाने से बने हेयर पैकमेथी दाने का हेयर पैक बनाने के लिए सबसे पहले आपको दो चम्मच मेथी दानों को पानी में कुछ घंटों के लिए भिगो दें। जब ये अच्छे से नरम हो जाएं, तो इन्हें मिक्सर में डालकर एक स्मूद पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को एक बाउल में निकालें और इसमें तीन चम्मच दही मिलाएं। दोनों चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें, ताकि एक क्रीमी और स्मूद पेस्ट तैयार हो जाए। यह मिश्रण बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है और इसे नियमित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। लगाने का सही तरीकातैयार किए गए इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं, जैसे आप कोई हेयर मास्क लगाते हैं। ध्यान रखें कि यह पैक जड़ों तक पहुंचे, तभी इसका पूरा लाभ मिलेगा। इसे लगभग 30 मिनट तक बालों में लगा रहने दें, ताकि इसके पोषक तत्व बालों में अच्छी तरह अवशोषित हो सकें। इसके बाद सामान्य पानी और हल्के शैंपू से बाल धो लें। और अच्छा रिजल्ट देखने के लिए आप कोई से हफ्ते में दो-तीन बार करना चाहिए।

भारत की ये खूबसूरत जगहें कैमरे में कैद करने लायक, Photography के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

नई दिल्ली। भारत एक सुंदर देश है। जहां के हर कौने में सुंदरता फैली हुई है। जहाँ हर राज्य में ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। अगर आप अपने कैमरे से बेहतरीन यादें कैद करना चाहते हैं, तो भारत की ये जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं।चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप अपने कैमरे में भारत की किन किन जगहों की सुंदरता को कैद कर सकते हैं। जयपुरसबसे पहले बात करें जयपुर की, जिसे ‘पिंक सिटी’ कहा जाता है। यहाँ के महल, हवेलियाँ और किले फोटोग्राफी के लिए बेहद शानदार बैकग्राउंड देते हैं। खासकर हवा महल और आमेर किला हर फ्रेम को शाही बना देते हैं। ऋषिकेशऋषिकेश भारत का एक पवित्र शहर है। यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। और गंगा के घाटों पर शाम का दृश्य कोईइ भी फोटोग्राफर छोड़ना नहीं चाहेगा। ऋषिकेश फोटोग्राफी के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और शांत जगहों में से एक है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, गंगा नदी और पहाड़ों का संगम हर फोटोग्राफर को आकर्षित करता है।लक्ष्मण झूला और राम झूला जैसे प्रसिद्ध स्थान यहां की पहचान हैं, जहाँ से गंगा का नजारा बेहद शानदार दिखता है। सुबह और शाम का समय यहां फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है, जब सूरज की रोशनी पानी पर सुनहरी चमक बिखेरती है। मनाली, हिमाचल प्रदेशमनाली भारत के सबसे खूबसूरत पहाड़ी स्टेशनों में से एक है आप यहां आकर फोटोग्राफी के लिए कई दृश्यों को देख सकते हैं जो आपका दिल खुश कर देगीं।यहां पर आपको ऐसे कई नजारे देखेंगे जो आप अपने कैमरे में कैद जरूर करना चाहेंगे। डल झील, कश्मीरकश्मीर के हर नजारे काफी खूबसूरत होते हैं लेकिन डल झील की बात ही खास है। डल झील कश्मीर में स्थित हैं। डल झील को देखकर आपका रोम-रोम खिल उठेगा।यहां आकर यहां की सुंदर तस्वीरो को कैद कर फिल्मी झरोखों की तरह संभाल सकते हैं। यहां फोटोग्राफी का अनुभव शानदार होगा।

एलोवेरा जेल के साइड इफेक्ट्स: किन लोगों के लिए हो सकता है नुकसानदायक, जानें जरूरी सावधानियां

नई दिल्ली। एलोवेरा जेल को स्किन और बालों की देखभाल के लिए एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय माना जाता है। यह त्वचा को ठंडक देने, जलन कम करने और बालों को पोषण देने में मदद करता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी नहीं कि एलोवेरा हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सुरक्षित हो। कुछ लोगों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए। त्वचा पर एलर्जी वाले लोग रहें सावधानजिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें एलर्जी की समस्या रहती है, उन्हें एलोवेरा जेल का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। कुछ मामलों में इससे खुजली, लालिमा या जलन हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए सावधानीविशेषज्ञों के अनुसार, एलोवेरा शरीर के ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन या उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएंगर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को एलोवेरा जेल या इसके किसी भी आंतरिक उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह हार्मोन और शरीर पर असर डाल सकता है। त्वचा रोग या खुले घाव में न लगाएंजिन लोगों को गंभीर त्वचा रोग, संक्रमण या खुले घाव हैं, उन्हें बिना सलाह के एलोवेरा जेल का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है। सही उपयोग से ही मिलेगा लाभएलोवेरा जेल प्राकृतिक जरूर है, लेकिन इसका सही और सीमित उपयोग ही फायदेमंद होता है। बाजार में उपलब्ध शुद्ध और प्रमाणित उत्पादों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

आंखों की समस्या केवल थकान नहीं पित्त असंतुलन भी हो सकता है कारण, जानें देखभाल के सरल उपाय

नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन के उपयोग के कारण आंखों में भारीपन, जलन और पानी आने जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समस्या सुबह उठते ही अधिक महसूस हो तो इसे केवल थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार आंखों की सेहत केवल बाहरी कारणों पर निर्भर नहीं करती बल्कि शरीर के भीतर मौजूद पित्त संतुलन से भी गहराई से जुड़ी होती है। पित्त शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है, लेकिन जब यह असंतुलित हो जाता है तो शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने लगती है। इसका सीधा प्रभाव आंखों पर पड़ता है जिससे जलन, सूखापन और भारीपन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। दैनिक जीवन की कई आदतें इस असंतुलन को बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं। देर तक स्क्रीन देखना, नींद पूरी न होना, तनावपूर्ण दिनचर्या और अनियमित खानपान शरीर में पित्त को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि आंखें शरीर के पित्त से जुड़ी होती हैं और पित्त रक्त से जुड़ा होता है। रक्त का संबंध पाचन और लिवर से होता है, ऐसे में जब पाचन और लिवर पर दबाव बढ़ता है तो इसका असर आंखों की सेहत पर भी दिखाई देता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करना बेहद जरूरी है। रात में हल्का और संतुलित भोजन करने से पाचन तंत्र पर दबाव कम होता है और शरीर को आराम मिलता है। सुबह उठते ही ठंडे पानी से आंखों को धोने से आंखों की थकान कम होती है और ताजगी महसूस होती है। दिन में दो बार त्रिफला जल से आंखों की सफाई करना भी आंखों के लिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से आंखों को ठंडक और आराम प्रदान करता है। इसके अलावा खीरा या ककड़ी का उपयोग आंखों पर करने से सूजन और जलन में राहत मिलती है। लगातार स्क्रीन पर काम करने से बचना और बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है। डिजिटल आदतों में संतुलन लाना आंखों की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आहार का भी आंखों की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विटामिन ए, सी और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, गाजर, अनार, पपीता, शकरकंद, कद्दू, दूध और अंडे आंखों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ये पोषक तत्व न केवल आंखों की रोशनी को बेहतर बनाते हैं बल्कि थकान और जलन को भी कम करते हैं। शरीर के भीतर होने वाले बदलावों को समझना और सही जीवनशैली अपनाना आंखों की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

Ayurvedic medicine for thyroid : थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

 Ayurvedic medicine for thyroid : नई दिल्ली। सदियों से भारत में जड़ी-बूटियों के माध्यम से कई बीमारियों का उपचार किया जाता रहा है। आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जिसका उपयोग शरीर की गांठों, सूजन और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याओं में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औषधि थायराइड जैसी समस्याओं में भी सहायक भूमिका निभा सकती है, बशर्ते इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से किया जाए। कंचनार गुग्गुलु क्या है? कंचनार गुग्गुलु आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसे मुख्य रूप से कंचनार वृक्ष की छाल और गुग्गुलु से तैयार किया जाता है। यह शरीर में कफ और मेद धातु को संतुलित करने में मदद करती है और ग्रंथियों की सूजन को कम करने में सहायक मानी जाती है। SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन थायराइड और हार्मोन संतुलन में मददगार आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन) जमा होने से गांठें और हार्मोन असंतुलन की समस्या बढ़ सकती है, जिससे थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कंचनार गुग्गुलु शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारकर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्स गुण कंचनार गुग्गुलु में एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की सूजन को कम करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि कंचनार गुग्गुलु पाउडर और टैबलेट दोनों रूप में उपलब्ध है, लेकिन इसका सेवन सही मात्रा और सही स्थिति में ही करना चाहिए। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। धरती के भीतर छिपी हलचल का विज्ञान भूकंप कैसे आता है और वैज्ञानिक इसे कैसे मापते हैं समझिए पूरी प्रक्रिया जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी इसके साथ ही केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है। जंक फूड और अधिक चीनी का सेवन कम करना चाहिए, नियमित व्यायाम और सुबह की सैर को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। आयुर्वेद में हल्दी वाला दूध और हरे धनिए का सेवन भी थायराइड संतुलन में सहायक माना गया है।

Ankle movement exercise : घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम

  Ankle movement exercise : नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली जीवनशैली के कारण शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर टखनों, पीठ, कंधों और कमर में अकड़न आम हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ छोटे लेकिन असरदार व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है ‘एंकल मूवमेंट’, जो टखनों की जकड़न और दर्द में तेजी से राहत देता है। आयुष मंत्रालय भी मानता है प्रभावी भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी एंकल मूवमेंट को एक सरल और प्रभावी व्यायाम मानता है। इसे रोजाना सिर्फ 3 से 5 मिनट करने से पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है, जकड़न कम होती है और शरीर का संतुलन मजबूत होता है। यह व्यायाम घर, ऑफिस या किसी भी जगह आसानी से किया जा सकता है। SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन टखनों और पैरों के लिए बेहद फायदेमंद विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह एक्सरसाइज बेहद लाभकारी है। नियमित अभ्यास से टखनों की लचीलापन बढ़ती है, जोड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और चलने-फिरने में आसानी होती है। यह खासकर बुजुर्गों के लिए गिरने के खतरे को भी कम करता है। आसान है करने की प्रक्रिया एंकल मूवमेंट करना बेहद सरल है। इसके लिए पहले सीधे खड़े होकर शरीर को संतुलित करें और एक पैर को लगभग 9 इंच तक ऊपर उठाएं। फिर उस पैर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं और गोल घुमाव में चलाएं—पहले घड़ी की दिशा में और फिर उल्टी दिशा में। हर दिशा में 5 से 10 बार यह प्रक्रिया दोहराएं, फिर दूसरे पैर से भी यही करें। शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय किसी भी समय किया जा सकता है अभ्यास यह व्यायाम दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, जैसे सुबह उठने के बाद या काम के दौरान छोटे ब्रेक में। जरूरत पड़ने पर दीवार या कुर्सी का सहारा भी लिया जा सकता है ताकि संतुलन बना रहे। नियमित अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ नियमित एंकल मूवमेंट करने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सूजन और थकान कम होती है और जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है। इससे घुटनों और कूल्हों पर दबाव भी कम पड़ता है और शरीर अधिक सक्रिय रहता है।

SUMMER HACKES : शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय

  SUMMER HACKES : नई दिल्ली।  गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके मुकाबले लस्सी एक पारंपरिक और प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है। दही से बनने वाली सेहतमंद ड्रिंक लस्सी दही से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय भारतीय पेय है, जिसे मथकर उसमें चीनी या नमक और अन्य स्वाद बढ़ाने वाली चीजें मिलाकर बनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन मानी जाती है। गर्मी में शरीर को देती है ठंडक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जिसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को तुरंत राहत देता है और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करती है। पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद लस्सी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। लस्सी पीने का सही समय विशेषज्ञों के अनुसार लस्सी का सेवन दिन के समय, विशेषकर दोपहर में करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। दोपहर के भोजन के साथ लस्सी पीने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को गर्मी से राहत मिलती है। रात में सेवन से बचें हालांकि कुछ लोग रात में भी लस्सी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। रात में इसका सेवन कुछ लोगों में भारीपन या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए इसे दिन में ही पीना बेहतर माना जाता है। गर्मी में प्राकृतिक राहत कुल मिलाकर, लस्सी गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करती है।

केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद अब 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह पवित्र धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पांडवों से जुड़ी कथा, लेकिन यह पूरी कहानी नहींअक्सर केदारनाथ धाम के इतिहास को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें पांडवों के तप और शिवजी के बैल रूप में प्रकट होने की कथा प्रचलित है। मान्यता है कि पांडवों ने शिवजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए तप किया था और बाद में भगवान शिव ने केदार घाटी में बैल का रूप धारण कर उन्हें दर्शन दिए थे। इसी आधार पर केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। स्कंदपुराण में मिलता है केदारनाथ नाम का वास्तविक स्रोतहालांकि, केदारनाथ नाम और इसकी उत्पत्ति को लेकर एक विस्तृत वर्णन स्कंदपुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार, एक बार हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने तीनों लोकों पर अधिकार कर देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया था। पराजित होकर देवराज इंद्र अन्य देवताओं के साथ हिमालय क्षेत्र में पहुंचे और मंदाकिनी नदी के किनारे भगवान शिव की तपस्या करने लगे। इंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव महिष (भैंसे) के रूप में प्रकट हुए। उसी रूप में उन्होंने इंद्र से पूछा “के दारयामि?” यानी “किसका विनाश करूं?” यही प्रश्न आगे चलकर ‘केदार’ नाम की उत्पत्ति का आधार बना। देवताओं की विनती और दैत्यों का अंतइंद्र ने भगवान शिव को उन दैत्यों के नाम बताए जो देवताओं के लिए संकट बने हुए थे हिरण्याक्ष, सुबाहु, वक्त्रकंधर, त्रिशृंग और लोहिताक्ष। भगवान शिव ने भैंसे के रूप में ही इन दैत्यों का संहार किया, जिससे देवताओं को राहत मिली। इसके बाद भगवान शिव ने एक कुंड का निर्माण किया और इंद्र की प्रार्थना पर उसी स्थान पर केदारनाथ रूप में निवास करने का वरदान दिया। कहा जाता है कि इस स्थान पर पूजा और जल अर्पण से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके कुल का उद्धार होता है। मोक्ष और आस्था का केंद्रमान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान और पूजा अत्यंत फलदायी होती है और यह स्थल मोक्ष प्राप्ति का विशेष केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि केदारनाथ धाम को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली तीर्थों में स्थान प्राप्त है।

कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच

नई दिल्ली । आजकल वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी एक आम चुनौती बन चुकी है। इसी कारण लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, जिनमें सबसे आम तरीका कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को पूरी तरह से छोड़ देना माना जाता है। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि रोटी, चावल, ब्रेड या आलू खाने से वजन बढ़ता है और इन्हें बंद कर देने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की राय इस धारणा को पूरी तरह गलत बताती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनके प्रकार और मात्रा में होती है। शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य स्रोतों में कार्बोहाइड्रेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें पूरी तरह बंद कर देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक आम मिथक है कि सभी कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाते हैं। वास्तव में शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को सक्रिय रखने और दिनभर की गतिविधियों के लिए कार्ब्स की आवश्यकता होती है। अगर इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो शरीर में कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। WHO और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सफेद चीनी, सफेद मैदा, सफेद चावल, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन सीमित किया जाए। ये कार्ब्स तेजी से पचते हैं और शरीर में फैट बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इसके बजाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा और स्थिर बनाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि ये कार्ब्स वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स को हेल्दी कार्ब्स की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा फल जैसे सेब, केला और संतरा, साथ ही सब्जियां, नट्स और बीज भी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ वजन संतुलन में मदद करते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखते हैं। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है। एक संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही अनुपात हो, वही सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक पूरी तरह कार्ब-फ्री डाइट अपनाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि प्रोसेस्ड कार्ब्स की जगह हेल्दी और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, जिससे वजन नियंत्रण भी हो और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहे।

गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां शरीर को थका देता है वहीं आंखों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है। तेज धूप गर्म हवा और बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों में जलन सूजन और थकान जैसी समस्याओं को जन्म देता है। मोबाइल कंप्यूटर और लैपटॉप पर घंटों काम करने से आंखें ड्राई हो जाती हैं और उनमें भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में एक सरल घरेलू उपाय ठंडा कॉटन पैड आंखों को तुरंत राहत देने में बेहद कारगर साबित होता है। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी आंखों की देखभाल के लिए ठंडे सेक को फायदेमंद मानते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा भी आंखों की थकान और जलन से राहत के लिए ठंडे कॉटन पैड के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। यह उपाय पूरी तरह सुरक्षित है और इसे किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं। ठंडे कॉटन पैड का उपयोग करना बेहद आसान है। सबसे पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें ताकि धूल और पसीना हट जाए। इसके बाद साफ और मुलायम कॉटन पैड लें और उन्हें ठंडे पानी में भिगो दें। हल्का सा निचोड़कर अतिरिक्त पानी निकाल लें ताकि पैड ज्यादा गीला न हो। फिर आराम से लेट जाएं और आंखें बंद करके दोनों आंखों पर कॉटन पैड रख लें। करीब 10 मिनट तक इसी स्थिति में आराम करें और गहरी सांस लेते रहें। यह ठंडा सेक आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम देता है और सूजन को कम करता है। साथ ही आंखों में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे थकान और भारीपन दूर होता है। अगर चाहें तो पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे आंखों को अतिरिक्त ताजगी और सुकून मिलता है। इस उपाय को दिन में एक बार या जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। खासकर तब जब आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम कर चुके हों या धूप में रहने के कारण आंखों में जलन हो रही हो। शाम के समय इसे करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इस समय आंखों को आराम की जरूरत होती है। हालांकि यह उपाय सामान्य थकान और जलन के लिए बेहद प्रभावी है लेकिन अगर आंखों में लगातार दर्द धुंधलापन या कोई गंभीर समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा ध्यान रखें कि हमेशा साफ कॉटन पैड का इस्तेमाल करें और पानी बहुत ज्यादा ठंडा न हो। इस तरह ठंडा कॉटन पैड एक सरल सस्ता और प्रभावी तरीका है जो गर्मियों में आंखों को राहत देने के साथ उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से आंखें तरोताजा रहती हैं और दिनभर की थकान आसानी से दूर हो जाती है।