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आपदा में अवसर खोजने की मानसिकता: समाज के लिए एक खतरनाक संकेत

– कैलाश चन्द्रमार्च 2026 के दूसरे सप्ताह से भारत में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति और बुकिंग से जुड़ी चर्चा अचानक सुर्खियों में आ गई। देश के अनेक हिस्सों से गैस सिलिंडर की कमी, बुकिंग में देरी और डिलीवरी में व्यवधान जैसी खबरें तेजी से फैलने लगीं। सोशल मीडिया पर लोगों की चिंता देखकर यह विषय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाए कि सिलिंडर मिल नहीं रहे, डिलीवरी डेट आगे बढ़ रही है और एजेंसियों पर दबाव बढ़ चुका है। इसके विपरीत केंद्र और राज्य सरकारों ने बार-बार स्पष्ट किया कि देश में कोई वास्तविक कमी नहीं है, परंतु कुछ क्षेत्रों में अचानक बढ़ी मांग और डिमांड–सप्लाई असंतुलन से अस्थायी तनाव अवश्य देखा गया है। यही तनाव इस पूरी चर्चा की शुरुआत बना। इन खबरों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह रहा कि अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी? इसे समझने के लिए एलपीजी बुकिंग और सप्लाई के वास्तविक आंकड़ों को देखना आवश्यक है। मार्च 2026 के आरंभ में रोज़ाना LPG बुकिंग 5.5 मिलियन के औसत स्तर से बढ़कर 7.6 मिलियन तक पहुँच गई। यह लगभग 35–40 प्रतिशत की उछाल थी, जिसे विशेषज्ञों ने ‘पैनिक बुकिंग’ की श्रेणी में रखा। कई शहरों में बुकिंग 2–3 गुना तक बढ़ गई। एक प्रमुख महानगर में केवल छह दिनों के भीतर 12 लाख से अधिक बुकिंग दर्ज होना इसकी तीव्रता का प्रमाण था। दूसरी ओर सरकार का दावा था कि घरेलू सिलिंडर की डिलीवरी 2–2.5 दिन के सामान्य समय में ही हो रही है, और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई गंभीर समस्या नहीं है, जिसे कमी कहा जाए। इसका अर्थ यह था कि समस्या व्यापक राष्ट्रीय अभाव की नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में अचानक मांग बढ़ने और वितरण प्रणाली पर बने अस्थायी दबाव की थी। इस पूरे परिदृश्य के पीछे जो वास्तविक कारण उभरकर सामने आए, वे कई स्तरों पर काम कर रहे थे। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव था। मध्य-पूर्व में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के मध्य बढ़ते संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए जहाजों में देरी, समुद्री बीमा लागत और जोखिम बढ़ने लगे। एलपीजी शिपमेंट का समय बढ़ा, जिससे भारतीय बंदरगाहों पर डिलीवरी शेड्यूल में भी देर हुई। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह था कि भारत आज भी LPG की अपनी कुल घरेलू आवश्यकता का लगभग 60–65% आयात करता है। अर्थात वैश्विक अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारतीय उपभोक्ता तक पहुँच सकता है। बड़े आयातक देशों में तनाव, शिपमेंट विलंब, पोर्ट कंजेशन और बर्करिंग समय का बढ़ना, इन सभी का प्रभाव सीधे घरेलू सप्लाई चेन पर पड़ा। इसके अतिरिक्त ट्रकों की कमी, स्थानीय परिवहन में देरी, कुछ क्षेत्रों में सड़क मरम्मत या मौसम अवरोध जैसी घरेलू परिस्थिति ने भी दबाव बढ़ाया। तीसरा कारण मीडिया और सोशल मीडिया के प्रभाव से उत्पन्न ‘पैनिक बुकिंग’ रहा। किसी भी संकट में यह मानवीय प्रतिक्रिया आमतौर पर देखी जाती है। जैसे ही कुछ उपभोक्ताओं ने देरी की बात साझा की, लोगों ने एक साथ अतिरिक्त सिलिंडर बुक करना शुरू कर दिया। कई परिवारों ने सुरक्षा कारणों से दो-तीन सिलिंडर अतिरिक्त बुक कर लिए। जबकि सामान्य परिस्थितियों में वे इतनी खपत नहीं करते। इस असामान्य मांग ने वितरण प्रणाली में तात्कालिक तनाव उत्पन्न किया और सामान्य चक्र बिगड़ गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने कई त्वरित कदम उठाए। सबसे पहले रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी प्रोपेन-ब्यूटेन स्ट्रीम्स को एलपीजी उत्पादन में परिवर्तित करें, ताकि घरेलू बाजार की जरूरतें तुरंत पूरी हों। इस निर्देश से घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 25% तक बढ़ाने में सफलता मिली। इससे तत्काल राहत मिली और डोमेस्टिक सप्लाई बैलेंस मजबूत हुआ। दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह था कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत घरेलू उपभोक्ता को प्राथमिकता देने और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की गई। वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कृत्रिम कमी की आशंका को खत्म किया गया। तीसरा कदम बुकिंग नियमों में संशोधन का था। पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए बुकिंग गैप 25 दिन तक बढ़ाया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 45 दिन तक भी बढ़ाया गया, जिससे बार-बार अनावश्यक बुकिंग रुक सके। इससे सिस्टम पर दबाव कम हुआ और जिन उपभोक्ताओं को वास्तव में सिलिंडर की जरूरत थी, उन्हें समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई। सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि जहां पीएनजी (पाइप्ड नैचरल गैस) उपलब्ध है वहाँ उपभोक्ता अस्थायी रूप से पीएनजी को प्राथमिकता दें, ताकि एलपीजी वितरण पर दबाव संतुलित किया जा सके। इसके साथ-साथ अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए प्रेस विज्ञप्तियों, मीडिया ब्रीफिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इन सभी तात्कालिक उपायों ने संकट के विस्तार को रोका, लेकिन इस स्थिति का प्रभाव विभिन्न वर्गों पर अलग-अलग दिखाई दिया। घरेलू उपभोक्ता, जिनके लिए सरकार प्राथमिकता देती है, उन्हें सामान्यतः 2–3 दिन की डिलीवरी चक्र में सिलिंडर मिलता रहा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अस्थायी देरी का अनुभव हुआ। दूसरी ओर व्यापारिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं, विशेषकर होटल, रेस्टोरेंट और फूड उद्योग—को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर प्राथमिकता सीमित थी। कुछ छोटे व्यवसायों और एमएसएसई ने भी गैस की अनिश्चिता के कारण उत्पादन लागत बढ़ने की शिकायत की। इधर-उधर से ब्लैक मार्केटिंग की सूचनाएं भी मिलीं, हालांकि सरकार ने इन शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस संकट के बीच कई मिथक भी उभरे, जिनमें प्रमुख था कि देश में गैस खत्म हो गई है। सरकारी आंकड़े और विशेषज्ञ रिपोर्टें इस दावे को स्पष्ट रूप से गलत साबित करती हैं। देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद था, और प्रमुख समस्या सप्लाई अभाव की नहीं बल्कि वितरण तनाव और पैनिक बुकिंग की थी। दूसरा मिथक यह था कि गैस आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, जबकि वास्तविकता यह थी कि देशभर में ट्रकिंग, रीफिलिंग और डिलीवरी कार्य एक सीमित देरी के साथ निरंतर जारी रहा। इस अनुभव का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति अब पहले से अधिक परिपक्व और दीर्घकालिक दिशा में बढ़ रही है। भारत

ईद पर चमकती त्वचा का राज: घर बैठे आसान स्किन केयर टिप्स

नई दिल्ली। ईद का त्योहार नजदीक आते ही हर कोई अपने लुक को लेकर खास तैयारी शुरू कर देता है। खासकर महिलाएं चाहती हैं कि इस मौके पर उनका चेहरा साफ, चमकदार और हेल्दी दिखे। लेकिन हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है। अगर आप सही स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो घर पर ही नेचुरल ग्लो पाया जा सकता है। कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी त्वचा को फ्रेश, सॉफ्ट और चमकदार बना सकते हैं। सबसे जरूरी है सही क्लीनिंग स्किन केयर की शुरुआत हमेशा क्लीनिंग से होती है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट जाता है। साफ त्वचा ही ग्लोइंग स्किन की पहली सीढ़ी होती है। डेड स्किन हटाने के लिए हल्का स्क्रब चेहरे की डेड स्किन हटाना भी बहुत जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा स्क्रब न करें। हफ्ते में 2–3 बार हल्का स्क्रब पर्याप्त होता है। घर पर स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच कॉफी और एक चम्मच शहद मिलाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे स्किन साफ और मुलायम बनती है। बेसन-दही फेस पैक से आएगा निखार ईद से पहले चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए फेस पैक बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन, एक चम्मच दही और थोड़ा सा हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाकर धो लें। यह पैक स्किन को साफ करने के साथ-साथ नेचुरल चमक भी देता है। एलोवेरा जेल से करें नाइट केयर रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल लगाना स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और ठंडक पहुंचाता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन हेल्दी रहती है। इंस्टेंट ग्लो के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो कुछ आसान उपाय तुरंत निखार दे सकते हैं गुलाब जल से चेहरा साफ करें कच्चे दूध से क्लीनिंग करें खीरे का रस लगाएं शहद और नींबू का फेस पैक इस्तेमाल करें ये उपाय त्वचा को तुरंत फ्रेश और चमकदार बना देते हैं। अच्छी नींद और हेल्दी डाइट भी जरूरी सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदर से हेल्दी रहना भी जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लें, ताकि डार्क सर्कल और डलनेस से बचा जा सके। साथ ही फलों और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान दिनभर में कम से कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं। पर्याप्त पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बरकरार रहता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें स्किन केयर करते समय नए प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाएं और स्किन को हमेशा मॉइश्चराइज रखें।

राधा रानी का दिव्य स्वरूप: शब्दों से परे सौंदर्य, जिसे केवल भक्ति से ही पाया जा सकता है

नई दिल्ली । भक्ति मार्ग में एक प्रश्न सदियों से लोगों के मन में उठता रहा है आखिर राधा रानी कैसी दिखती हैं? भक्त साधक और जिज्ञासु अक्सर संतों से इस रहस्य को जानने की इच्छा रखते हैं लेकिन संतों का स्पष्ट कहना है कि राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं है। उनका दिव्य रूप सामान्य दृष्टि से परे है और उसे देखने के लिए केवल भौतिक आंखें पर्याप्त नहीं हैं बल्कि इसके लिए दिव्य अनुभूति और गहन भक्ति की आवश्यकता होती है। संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार मनुष्य जो कुछ भी इस संसार में देखता है वह उसकी भौतिक दृष्टि तक सीमित होता है जो माया से प्रभावित है। यही कारण है कि हम केवल भौतिक जगत को ही देख पाते हैं। जिस प्रकार महाभारत में अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन के लिए दिव्य चक्षु प्रदान किए गए थे उसी प्रकार राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को देखने के लिए भी दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है। बिना इस आध्यात्मिक दृष्टि के उनके स्वरूप को समझ पाना असंभव है। संतों का कहना है कि राधा रानी सौंदर्य की पराकाष्ठा हैं। उनके रूप का वर्णन करना इतना कठिन है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर के प्रत्येक रोम में करोड़ों जिह्वाएं भी उत्पन्न हो जाएं तब भी उनके सौंदर्य की पूर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। यह भी कहा जाता है कि जिन भगवान श्री कृष्ण के सौंदर्य से करोड़ों कामदेव भी मोहित हो जाते हैं वही श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी की रूप माधुरी के सामने आकर्षित हो जाते हैं। उनकी महिमा इतनी अद्भुत है कि वेद भी उनके वर्णन में असमर्थ होकर नेति-नेति कहकर मौन हो जाते हैं। ब्रज की गोपियों का सौंदर्य भी अद्वितीय बताया गया है। कहा जाता है कि ब्रज की प्रत्येक गोपी इतनी सुंदर है कि करोड़ों लक्ष्मी भी उनके सामने फीकी पड़ जाएं। लेकिन जब यही सखियां अपनी आराध्य राधा रानी के दर्शन करती हैं तो वे भी उनके सामने नतमस्तक हो जाती हैं। राधा रानी के प्रत्येक अंग में ऐसी मधुरता और दिव्यता विद्यमान है जिसकी तुलना तीनों लोकों में कहीं नहीं मिलती। संतों के अनुसार राधा रानी के स्वरूप का अनुभव करने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग भक्ति और नाम जप है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से राधा नाम का निरंतर जप करता है तो धीरे-धीरे उसके हृदय में राधा रानी का दिव्य स्वरूप प्रकट होने लगता है। इसके साथ ही वृंदावन की पवित्र रज को माथे पर धारण करना और संतों का संग करना भी इस आध्यात्मिक यात्रा में सहायक माना जाता है। भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण के प्रेम को अद्वितीय बताया गया है। उनका संबंध मछली और जल के समान है अलग होते ही अस्तित्व समाप्त हो जाता है। जब राधा और कृष्ण एक साथ होते हैं तो वृंदावन की पूरी प्रकृति उस दिव्य प्रेम में डूब जाती है। पशु-पक्षी तक शांत होकर उस अलौकिक आनंद का अनुभव करने लगते हैं। अंततः संतों का संदेश स्पष्ट है कि राधा रानी का स्वरूप देखने के लिए बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक दृष्टि की आवश्यकता है। सच्ची भक्ति समर्पण और नाम जप के माध्यम से ही वह क्षण आता है जब भक्त इस दिव्य प्रेम और स्वरूप का अनुभव कर पाता है।

हिंदू नववर्ष पर नीम-मिश्री खाने की परंपरा क्यों? जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में गुड़ी पड़वा और उगादी के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत बेहद खास मानी जाती है। इस बार 19 मार्च से नवसंवत्सर की शुरुआत हो रही है। इस दिन सुबह पूजा के बाद नीम की पत्तियां और मिश्री या गुड़ खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसका गहरा धार्मिक दार्शनिक और वैज्ञानिक महत्व है। नीम और मिश्री जीवन का संतुलन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के पहले दिन नीम और मिश्री का सेवन जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों का प्रतीक है। नीम का कड़वा स्वाद जीवन की चुनौतियों संघर्ष और कठिनाइयों को दर्शाता है वहीं मिश्री की मिठास सुख सफलता और खुशियों का संकेत देती है। यह परंपरा सिखाती है कि जीवन में सुख दुख दोनों का संतुलन जरूरी है और हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। पौराणिक महत्व शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण इस दिन को नववर्ष और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। आयुर्वेदिक दृष्टि से भी लाभकारी आयुर्वेद के अनुसार मौसम बदलने के समय यानी बसंत से गर्मी में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। वहीं मिश्री शरीर को ऊर्जा देती है और नीम की कड़वाहट को संतुलित करती है। कैसे किया जाता है सेवन कई जगहों पर नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री गुड़ इमली या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसे नववर्ष की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इस वर्ष कौन होगा राजा और मंत्री? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिस दिन नववर्ष शुरू होता है उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है। इस बार नववर्ष गुरुवार को पड़ रहा है इसलिए गुरु ग्रह वर्ष के राजा होंगे जबकि मंगल ग्रह को मंत्री माना गया है।इसके अलावा इस वर्ष चंद्र देव सेनापति मेघाधिपति और फलधिपति रहेंगे। गुरु ग्रह नीरसाधिपति धनाधिपति और सस्याधिपति भी होंगे जबकि बुध धान्याधिपति और शनि रसाधिपति माने गए हैं। कुल मिलाकर हिंदू नववर्ष पर नीम मिश्री खाने की परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन और स्वास्थ्य से जुड़ा एक गहरा संदेश भी देती है।

अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा

नई दिल्ली । गुजरात के कच्छ जिला में भुज के पास स्थित माधापार गांव का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है जो सदियों से टूटी अवस्था में होने के बावजूद पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पूजित हो रहा है। मान्यता है कि यह शिवलिंग मंदिर निर्माण से पहले से ही इसी स्वरूप में मौजूद था। समय के साथ जहां अन्य शिवलिंगों में परिवर्तन देखने को मिलता है वहीं यहां का शिवलिंग प्रारंभ से ही खंडित अवस्था में बताया जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु इसे भगवान शिव का साक्षात रूप मानकर जल दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं। खंडित होने पर भी पूजनीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी अवस्था में पूजनीय होता है। यही कारण है कि यहां टूटा हुआ शिवलिंग भी उतनी ही आस्था के साथ पूजित है। जबकि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए खंडित होने पर पूजा के अलग नियम बताए जाते हैं।रहस्यमयी मान्यताएं मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध कहां जाता है यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। इसके अलावा मंदिर परिसर में सांप दिखाई देने की भी स्थानीय लोगों द्वारा चर्चा की जाती है जिसे शिव की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।पौराणिक जुड़ाव इस मंदिर का संबंध पौराणिक कथाओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पांडव ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। कुछ लोककथाओं में कर्ण और छत्रपति शिवाजी महाराज के यहां पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। आज भी दूर दूर से श्रद्धालु इस अद्भुत शिवधाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान शिव की शरण में आते हैं।

मासिक शिवरात्रि आज: भोलेनाथ की पूजा से दूर होती हैं बाधाएं, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में हर माह आने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि आज 17 मार्च को मनाई जा रही है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के दिन श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया व्रत विशेष फलदायी होता है। कहा जाता है कि इस दिन भोलेनाथ अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। विशेष रूप से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने की भी मान्यता है।शुभ मुहूर्त और पूजा का समय वैदिक पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि का आरंभ 17 मार्च सुबह 9:23 बजे से हुआ है, जो 18 मार्च सुबह 8:25 बजे तक रहेगी। शिव पूजा के लिए निशिता काल का विशेष महत्व होता है। इस दिन निशिता काल रात 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। इस समय की गई पूजा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। जलाभिषेक का महत्व ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर अभिषेक करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही रुद्राष्टकम या अन्य शिव स्तोत्रों का पाठ करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।मासिक शिवरात्रि का यह पावन अवसर भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का उत्तम समय माना जाता है।

टीवी के फेवरेट कपल Divyanka Tripathi-Vivek Dahiya के घर आएगी खुशखबरी, 10 साल बाद गूंजेंगी किलकारियां

नई दिल्ली: टीवी इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय और चहेते कपल्स में गिने जाने वाले Divyanka Tripathi और Vivek Dahiya को लेकर इन दिनों एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। खबरों की मानें तो शादी के लगभग 10 साल बाद यह कपल अपने पहले बच्चे का स्वागत करने जा रहा है। हालांकि अभी तक दोनों में से किसी ने भी इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस खबर ने फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपल के करीबी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि दिव्यांका और विवेक जल्द ही माता-पिता बनने वाले हैं और उनके परिवारों ने इस खास मौके की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में एक प्राइवेट बेबी शॉवर सेरेमनी भी आयोजित की जा सकती है, जिसमें केवल परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त ही शामिल होंगे। इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने खुशी जाहिर करनी शुरू कर दी है। हर कोई बस उस पल का इंतजार कर रहा है जब यह प्यारा कपल खुद इस खुशखबरी को अपने अंदाज में साझा करेगा। हाल ही में Divyanka Tripathi ने होली के मौके पर सोशल मीडिया पर कुछ खूबसूरत तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने एक भावुक कैप्शन भी लिखा, जिसमें उन्होंने अपने बचपन की होली की यादों को ताजा किया। उन्होंने लिखा कि हर होली अपने साथ बीते दिनों की यादों का सैलाब लेकर आती है और उन्हें अपने पुराने दोस्तों के साथ बिताए गए वे पागलपन भरे पल आज भी याद आते हैं। दिव्यांका की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता Banoo Main Teri Dulhann में निभाए गए विद्या और दिव्या के डबल रोल से मिली। इसके बाद Yeh Hai Mohabbatein में डॉ. इशिता भल्ला के किरदार ने उन्हें हर घर का पसंदीदा चेहरा बना दिया। वहीं Vivek Dahiya भी टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं और दोनों की जोड़ी को फैंस ने हमेशा खूब प्यार दिया है। दोनों की केमिस्ट्री रियलिटी शो Nach Baliye 8 में भी देखने को मिली, जहां इस कपल ने शानदार परफॉर्मेंस देते हुए ट्रॉफी अपने नाम की थी। दिव्यांका और विवेक की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों की मुलाकात Yeh Hai Mohabbatein के सेट पर हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती प्यार में बदली। 16 जनवरी 2016 को दोनों ने सगाई की और उसी साल 8 जुलाई को शादी के बंधन में बंध गए। आज यह जोड़ी टीवी की दुनिया की सबसे क्यूट और प्रेरणादायक जोड़ियों में से एक मानी जाती है। अगर यह खबर सच साबित होती है, तो यह उनके जीवन का एक नया और बेहद खूबसूरत अध्याय होगा।  इस खबर की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि इस कपल के घर आने वाली खुशियां उनके चाहने वालों के लिए भी किसी जश्न से कम नहीं होंगी।

BARAITHA TOLL PROTESET: ‘नो रोड-नो टोल’ जनआंदोलन के दौरान टोल प्लाजा पर हुई तोड़फोड़; CCTV कैमरा-बूथ क्षतिग्रस्त, पुलिस ने संभाली स्थिति

BARAITHA TOLL PLAZA

HIGHLIGHTS: • NH-719 चौड़ीकरण मांग पर ‘रोड नहीं तो टोल नहीं’ आंदोलन भड़का • बरेठा टोल प्लाजा पर CCTV और बूथ तोड़फोड़ की घटना • फास्टैग से टोल कटने पर आंदोलनकारियों का आक्रोश • पुलिस की समझाइश से स्थिति काबू में आई • संत समाज ने टेंट-अखाड़ा जमाकर धरना जारी रखा BARAITHA TOLL PROTESET: ग्वालियर। भिंड जिले के मालनपुर स्थित बरेठा टोल प्लाजा पर सोमवार को ‘रोड नहीं तो टोल नहीं’ जनआंदोलन के दौरान भारी हंगामा मचा। बता दें कि संत समाज के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन में पूर्व सैनिक, किसान, व्यापारी, नौजवान और स्थानीय लोग शामिल हुए। NH-719 (ग्वालियर-भिंड-इटावा) को चौड़ा फोरलेन/सिक्स लेन बनाने की लंबित मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने टोल वसूली का विरोध किया। दीपिका पादुकोण ने अपने जन्मदिन पर शुरू किया टैलेंट सपोर्ट प्रोग्राम, रणवीर सिंह ने किया प्रेरक कमेंट फास्टैग से टोल कटने पर भड़के आंदोलनकारी आंदोलन के दौरान बूम बैरियर डाउन होने के बावजूद एक आंदोलनकारी की कार से ऑनलाइन फास्टैग के जरिए टोल कट गया। इससे नाराज प्रदर्शनकारी पहले टोल प्लाजा ऑफिस पहुंचे और शिकायत की। इसके बाद वे बूथ पर आए और हंगामा शुरू कर दिया। MORENA PADYATRA : माता के चरणों में भक्ति की पदयात्रा; चैत्र नवरात्रि पर शुरू हुई कैलादेवी धाम की 85 किमी पैदल यात्रा तोड़फोड़ और पुलिस हस्तक्षेप आक्रोश में कुछ लोगों ने टोल प्लाजा के CCTV कैमरों को तोड़ा और बूथ पर लगे पोल को गिराने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला, भारी पुलिस बल ने समझाइश दी और आंदोलनकारियों को शांत कराया। इसके बाद मामला नियंत्रण में आ गया, लेकिन टोल प्लाजा के आसपास बैरिकेडिंग और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। संत समाज का धरना, प्रशासन सतर्क संत समाज ने बरेठा टोल पर टेंट लगाकर अखाड़ा जमाया और सुंदरकांड पाठ से आंदोलन की शुरुआत हुई। प्रशासन की अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों लोग जुटे। भिंड-ग्वालियर प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। प्रदर्शनकारी का कहना है कि संकरी सड़क पर रोज हादसे हो रहे हैं, मौतें हो रही हैं, इसलिए टोल वसूली उचित नहीं।

दीपिका पादुकोण ने अपने जन्मदिन पर शुरू किया टैलेंट सपोर्ट प्रोग्राम, रणवीर सिंह ने किया प्रेरक कमेंट

नई दिल्ली:बॉलीवुड की चमक-दमक और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाली एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका प्रभाव सिर्फ अभिनय तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में दीपिका ने अपने प्लेटफॉर्म “क्रिएट विद मी” के तहत शुरू किए गए द ऑनसेट प्रोग्राम की अपडेट साझा की, जिसने इंडस्ट्री में नए टैलेंट को आगे बढ़ाने के उनके संकल्प को और मजबूत किया है। यह पहल फिल्म, टेलीविजन और विज्ञापन के क्षेत्र में उभरते क्रिएटिव लोगों को अवसर देने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है। इस प्रोग्राम को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बीच, देश-विदेश से 5000 से ज्यादा आवेदन आए हैं। दीपिका ने हाल ही में एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि वह और उनकी टीम पिछले तीन महीनों से इन सभी आवेदनकर्ताओं की ध्यानपूर्वक समीक्षा कर रही हैं। खास बात यह है कि दीपिका खुद इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं। वह न केवल आवेदन देख रही हैं बल्कि कई आवेदकों को सीधे कॉल करके उनसे बातचीत भी कर रही हैं और उनके रचनात्मक सपनों और सफर को समझ रही हैं। दीपिका की इस पहल पर उनके पति और अभिनेता रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया पर दिल से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा कि यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि दीपिका दूसरों की मदद कर रही हैं और इंडस्ट्री को वापस कुछ दे रही हैं। रणवीर का यह कमेंट उनके प्यार और समर्थन की मिसाल भी बन गया। द ऑनसेट प्रोग्राम की घोषणा दीपिका ने अपने जन्मदिन पर की थी और यह उनके उस विज़न का हिस्सा है, जिसके तहत वह इंडस्ट्री में सार्थक योगदान देना चाहती हैं, जिसने उनके करियर को आकार दिया। इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिभा को पहचानना नहीं, बल्कि उन्हें एक्सपीरियंस आधारित लर्निंग प्रदान करना है। प्रोग्राम के पहले चरण में प्रतिभागियों को फिल्ममेकिंग के अलग-अलग विभागों में काम करने का अवसर मिलेगा। इसमें राइटिंग, डायरेक्शन, कैमरा, लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड डिजाइन, आर्ट डायरेक्शन, कॉस्ट्यूम डिजाइन, हेयर स्टाइलिंग, मेक-अप आर्टिस्ट्री और प्रोडक्शन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुभव मिलेगा। प्रतिभागी सेट पर काम करके इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स से सीधे सीखेंगे और अपने करियर के लिए जरूरी स्किल्स विकसित करेंगे। इस पहल के जरिए दीपिका न केवल अपने अभिनय से बल्कि इंडस्ट्री के भविष्य को आकार देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वह नई पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स और क्रिएटर्स के लिए रास्ते खोल रही हैं और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दे रही हैं। दीपिका पादुकोण की यह पहल यह संदेश देती है कि बॉलीवुड केवल ग्लैमर की दुनिया नहीं है, बल्कि यह नए टैलेंट को पहचानने, उन्हें आगे बढ़ाने और इंडस्ट्री के विकास में योगदान देने का भी मंच है। रणवीर सिंह का समर्थन और प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि उनके प्रयास सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज और इंडस्ट्री के लिए प्रेरणादायक हैं। द ऑनसेट प्रोग्राम की सफलता से साफ है कि दीपिका पादुकोण न केवल पर्दे पर बल्कि पर्दे के पीछे भी बदलाव लाने की दिशा में सक्रिय हैं। उनकी यह पहल नए क्रिएटिव्स को अवसर और मार्गदर्शन देगी, जिससे भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का भविष्य और मजबूत होगा।

मनन शाह ने गाया और कंपोज किया शिव शंभो, The Kerala Story 2 में मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स

नई दिल्ली: The Kerala Story 2 की बॉक्स ऑफिस सफलता के साथ-साथ फिल्म का म्यूजिक भी दर्शकों के बीच जबरदस्त पॉपुलैरिटी हासिल कर रहा है। फिल्म के चार गानों वाले साउंडट्रैक और बैकग्राउंड स्कोर को तैयार करने वाले मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर मनन शाह ने अपने करियर में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। खास बात यह है कि उन्होंने भक्ति गीत शिव शंभो को अपनी आवाज भी दी और पहली बार बैकग्राउंड स्कोर कंपोज किया।  एल्बम में चार गाने हैं, जिनमें अलग-अलग इमोशनल लेयर और म्यूजिक स्टाइल देखने को मिलती है। विशाल मिश्रा ने साथी रे गाया है, जो फिल्म के डार्क अंडरटोन के साथ मेल खाता है। श्रेया घोषाल का ओ माई री गाना मां-बेटी की भावनाओं को गहराई से दर्शाता है। राजस्थानी लोक-प्रेरित भक्ति गीत थारी जोगन डेब्यूटेंट शाओनी ने गाया, और शिव शंभो गाने को मनन शाह ने कंपोज और गाया, जो फिल्म के क्लाइमेक्स में अहम भूमिका निभाता है। मनन शाह ने कहा कि प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह के साथ काम करना उनके लिए खास रहा क्योंकि पहले भी उन्होंने कमांडो फ्रैंचाइजी और नमस्ते इंग्लैंड पर काम किया है। डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह के साथ सहयोग ने उन्हें एल्बम और बैकग्राउंड स्कोर दोनों में क्रिएटिव फ्रीडम दी। थिएटर में जब दर्शकों ने गानों और बैकग्राउंड स्कोर पर नारों और सीटियों के साथ प्रतिक्रिया दी, तो मनन शाह की खुशी सातवें आसमान पर थी। उन्होंने आगे बताया कि म्यूजिक को भारतीय क्लासिकल और लोक प्रभावों से जोड़ना उनका लक्ष्य था। श्रेया घोषाल, विशाल मिश्रा और शाओनी जैसे टैलेंटेड सिंगर्स के साथ काम करना उनके लिए बेहद शानदार अनुभव रहा। लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर के साथ उनकी पहली कोलेबोरेशन ने गानों के इमोशनल ताने-बाने को और गहरा किया। मनन शाह ने पहले भी मराठी फिल्म रूप नगर के चीते का म्यूजिक बनाया और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर हुआ। इसके अलावा उन्होंने शंकर महादेवन और जावेद अख्तर के साथ म्यूजिक प्लेटफॉर्म गूंगूनालो को को-फाउंड किया, जिससे म्यूजिशियंस को उनकी क्रिएटिव ओनरशिप मिलती है। The Kerala Story 2 का म्यूजिक एल्बम दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ने में सफल रहा है। चार गाने, बैकग्राउंड स्कोर और भक्ति ट्रैक की सफलता ने मनन शाह के करियर में नया मुकाम तय किया है और फिल्म के साथ उनका यह म्यूजिकल सफर यादगार बन गया है।