‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

नई दिल्ली । 26 नवंबर 2008 की भयावह रात को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म केवल एक आतंकी हमले की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन अनदेखे और अक्सर उपेक्षित नायकों को सामने लाती है, जिन्होंने संकट की घड़ी में असाधारण साहस का परिचय दिया था। फिल्म देखने के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रभाव और कलाकारों के अभिनय की सराहना की है। फिल्म का केंद्र बिंदु कामा अस्पताल की एक नर्स है, जो 26/11 हमलों के दौरान अचानक ऐसी परिस्थिति में पहुंच जाती है, जहां हर निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाता है। कंगना रनौत ने इस किरदार को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि उनका अभिनय कहानी की भावनात्मक गहराई को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। सिनेमाघरों से बाहर निकलने वाले कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म देखते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे उस दौर की घटनाओं को दोबारा जी रहे हों। अस्पताल के भीतर फैला तनाव, मरीजों की सुरक्षा की चिंता और लगातार मंडराता खतरा दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई जा रही है कि इसमें आतंकवादी हमलों को नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है, जो हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस संदेश की भी सराहना की, जिसमें समाज में सामान्य कर्मचारियों की भूमिका और महत्व को रेखांकित किया गया है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि संकट के समय केवल नेतृत्वकारी पदों पर बैठे लोग ही नहीं, बल्कि अस्पतालों, आपात सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े साधारण कर्मचारी भी समाज की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कई दर्शकों ने विशेष रूप से नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनका कहना था कि फिल्म उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जिनका सामना स्वास्थ्यकर्मी अक्सर चुपचाप करते हैं। मरीजों की देखभाल, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को फिल्म में प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही कारण है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। हालांकि कुछ दर्शकों ने यह भी माना कि 26/11 हमलों से जुड़े कुछ दृश्यों को और अधिक वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था। वहीं कुछ लोगों ने फिल्म के अंतिम हिस्से को अपेक्षाकृत कमजोर बताया। इसके बावजूद अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं और दर्शकों ने फिल्म की गंभीर विषयवस्तु तथा प्रस्तुति की प्रशंसा की है। फिल्म का पहला भाग अस्पताल की सामान्य दिनचर्या, नर्सों के संघर्ष और उनके व्यक्तिगत जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे उस भयावह रात की ओर बढ़ती है, जब मुंबई आतंकी हमलों से दहल उठता है। दूसरे भाग में घटनाओं की तीव्रता बढ़ती है और नर्सों के साहस, जिम्मेदारी तथा मानवता की भावना को केंद्र में रखा जाता है। ‘भारत भाग्य विधाता’ उन वास्तविक नायकों को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है, जिन्होंने कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि फिल्म दर्शकों को केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाती, बल्कि साहस, सेवा और मानवता के महत्व को भी मजबूती से सामने लाती है।
एक जुलाई से महंगी होंगी टाटा की कारें, बढ़ती लागत के दबाव में कंपनी ने किया कीमत बढ़ाने का ऐलान

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में वाहन कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में वृद्धि करने की घोषणा की है। यह नई कीमतें आगामी एक जुलाई से लागू होंगी और कंपनी के विभिन्न मॉडल तथा वैरिएंट के अनुसार इनका प्रभाव अलग-अलग देखने को मिलेगा। इस फैसले का असर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कंपनी के पूरे यात्री वाहन पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ समय से उत्पादन से जुड़ी लागत में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। कच्चे माल, कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी का असर वाहन निर्माण उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना आवश्यक हो गया है ताकि कारोबारी संतुलन बनाए रखा जा सके। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि लागत वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा वह स्वयं वहन कर रही है। कीमतों में किया गया संशोधन केवल उस अतिरिक्त बोझ को आंशिक रूप से संतुलित करने के उद्देश्य से किया गया है, जो हाल के महीनों में उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। कंपनी का दावा है कि कीमतों में बदलाव के बावजूद उसके वाहन ग्राहकों के लिए प्रतिस्पर्धी और मूल्य आधारित विकल्प बने रहेंगे। ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में वाहन निर्माण क्षेत्र कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, तकनीकी उन्नयन, नई सुरक्षा आवश्यकताएं, उत्सर्जन मानकों का अनुपालन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में निवेश जैसे कारकों ने कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में मूल्य संशोधन कई कंपनियों के लिए व्यावसायिक आवश्यकता बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में बढ़ते निवेश का भी कंपनियों की वित्तीय योजनाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। नई बैटरी तकनीक, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इससे कंपनियां भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर रही हैं, लेकिन इसके साथ लागत दबाव भी बढ़ रहा है। ऑटो उद्योग में यह बदलाव केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में कई प्रमुख वाहन निर्माताओं ने भी अपने उत्पादों की कीमतों में संशोधन किया है। अधिकांश कंपनियों ने बढ़ती इनपुट लागत, महंगे कच्चे माल और बढ़ते परिचालन खर्चों को इसका प्रमुख कारण बताया है। इससे स्पष्ट है कि पूरा उद्योग फिलहाल लागत प्रबंधन और लाभप्रदता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में सीमित वृद्धि के बावजूद यात्री वाहनों की मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। त्योहारी सीजन, बढ़ती आय और व्यक्तिगत परिवहन की बढ़ती आवश्यकता आने वाले महीनों में वाहन बिक्री को समर्थन दे सकती है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ती रुचि भी बाजार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में ऑटोमोबाइल कंपनियां तकनीकी नवाचार, ईंधन दक्षता और ग्राहक सुविधाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करती नजर आ सकती हैं। ऐसे में कीमतों में होने वाले बदलाव केवल लागत का परिणाम नहीं होंगे, बल्कि भविष्य की तकनीकों और बेहतर उत्पादों में निवेश की रणनीति का भी हिस्सा बनेंगे।
8000mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और AI फीचर्स से लैस रियलमी P4R 5G, मिड-रेंज सेगमेंट में बना चर्चा का केंद्र

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां कैमरा क्वालिटी, प्रोसेसर और डिजाइन को स्मार्टफोन खरीदने का सबसे बड़ा आधार माना जाता था, वहीं अब लंबी बैटरी लाइफ उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बनकर उभरी है। डिजिटल जीवनशैली के विस्तार और मोबाइल उपयोग के बढ़ते समय ने स्मार्टफोन कंपनियों को अपने उत्पादों की रणनीति बदलने के लिए प्रेरित किया है। इसी बदलते रुझान को ध्यान में रखते हुए रियलमी ने अपना नया P4R 5G स्मार्टफोन बाजार में उतारा है। यह डिवाइस विशेष रूप से उन ग्राहकों को लक्ष्य बनाकर पेश किया गया है जो बजट श्रेणी में अधिक समय तक चलने वाली बैटरी और संतुलित प्रदर्शन वाला स्मार्टफोन तलाश रहे हैं। 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 8000mAh क्षमता वाली बैटरी है, जो इस श्रेणी के अधिकांश स्मार्टफोनों से कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही है। स्मार्टफोन उद्योग में आमतौर पर 5000mAh से 6000mAh बैटरी वाले उपकरण देखने को मिलते हैं, लेकिन रियलमी ने इस सीमा को आगे बढ़ाते हुए बड़ी बैटरी क्षमता पर जोर दिया है। कंपनी का दावा है कि सामान्य उपयोग की स्थिति में यह डिवाइस एक बार चार्ज करने के बाद कई दिनों तक काम करने में सक्षम है। लगातार वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया उपयोग, ऑनलाइन मीटिंग और गेमिंग जैसी गतिविधियों के दौरान भी बैटरी प्रदर्शन को मजबूत बनाए रखने का प्रयास किया गया है। बड़ी बैटरी के बावजूद फोन को अपेक्षाकृत पतला और हल्का रखने पर भी ध्यान दिया गया है। इससे उपयोगकर्ताओं को भारी बैटरी वाले स्मार्टफोन से जुड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ 45 वॉट फास्ट चार्जिंग तकनीक दी गई है, जो कम समय में बैटरी को चार्ज करने में मदद करती है। यह सुविधा उन उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय तक चार्जिंग का इंतजार नहीं करना चाहते। रियलमी ने बैटरी सुरक्षा और उसकी दीर्घकालिक क्षमता को भी प्रमुखता दी है। कंपनी के अनुसार, बैटरी को विभिन्न सुरक्षा मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजारा गया है। इसके अलावा एआई आधारित बैटरी प्रबंधन प्रणाली ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने और बैटरी की उम्र बढ़ाने में सहायता करती है। इससे लंबे समय तक फोन के प्रदर्शन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। डिवाइस केवल बैटरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य तकनीकी विशेषताओं के मामले में भी प्रतिस्पर्धी नजर आता है। इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो दैनिक कार्यों के साथ-साथ मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। बड़ी रैम क्षमता और पर्याप्त स्टोरेज विकल्प उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने का प्रयास करते हैं। फोन में 144Hz रिफ्रेश रेट वाली बड़ी डिस्प्ले दी गई है, जिससे स्क्रीन स्क्रॉलिंग और गेमिंग अधिक स्मूथ हो जाती है। इसके अलावा 50 मेगापिक्सल कैमरा, एआई आधारित इमेजिंग फीचर्स और आधुनिक सॉफ्टवेयर सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए आईपी65 रेटिंग तथा मजबूत निर्माण गुणवत्ता इसे रोजमर्रा के उपयोग के लिए अधिक भरोसेमंद बनाती है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बैटरी प्रदर्शन अब निर्णायक कारक बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में रियलमी P4R 5G अपनी बड़ी बैटरी, तेज चार्जिंग, आधुनिक फीचर्स और संतुलित हार्डवेयर के साथ उन उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प के रूप में सामने आया है, जो सीमित बजट में लंबे बैटरी बैकअप और बेहतर उपयोग अनुभव की तलाश कर रहे हैं।
रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है। हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था। अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है। बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है। इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए। अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।
जब मोहम्मद रफी ने बिना फीस गाईं सिर्फ 4 लाइनें, अमिताभ बच्चन की मौत वाले सीन ने रुला दिया था पूरा देश

नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे गीत और कुछ ऐसे क्षण हैं, जो समय बीतने के बावजूद लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं। महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की आवाज भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने पीढ़ियों को भावनाओं से जोड़ने का काम किया है। रफी साहब ने अपने करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन एक फिल्म में उन्होंने केवल चार लाइनें गाकर ऐसा जादू पैदा किया कि वह दृश्य और वह गीत आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है। यह किस्सा जुड़ा है साल 1978 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ से। निर्देशक प्रकाश मेहरा की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, रेखा और राखी जैसे सितारों ने अभिनय किया था। कहानी, संवाद, संगीत और अभिनय के साथ-साथ इसका भावनात्मक क्लाइमेक्स भी दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया। फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था, जबकि गीतकार अंजान ने इसके गीत लिखे थे। फिल्म के अधिकांश लोकप्रिय गीत किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किए गए थे। ‘ओ साथी रे’, ‘रोते हुए आते हैं सब’ और टाइटल ट्रैक जैसे गीत उस दौर के सुपरहिट गानों में शामिल रहे। हालांकि फिल्म के अंतिम और सबसे भावनात्मक दृश्य के लिए संगीतकारों को कुछ अलग चाहिए था। कहा जाता है कि जब फिल्म के क्लाइमेक्स में सिकंदर की मौत का दृश्य फिल्माया गया, तब संगीतकार आनंदजी को लगा कि इस दृश्य में जिस दर्द, विरह और भावनात्मक गहराई की जरूरत है, उसे मोहम्मद रफी की आवाज से बेहतर कोई नहीं दे सकता। इसके लिए केवल चार लाइनों की आवश्यकता थी, लेकिन वे चार लाइनें पूरे दृश्य का भाव बदलने वाली थीं। संगीतकारों के सामने एक चुनौती भी थी। फिल्म के लगभग सभी गीत किशोर कुमार गा चुके थे और ऐसे में सिर्फ चार लाइनों के लिए मोहम्मद रफी से अनुरोध करना उन्हें थोड़ा असहज लग रहा था। आखिरकार आनंदजी ने रफी साहब से संपर्क किया और अपनी बात रखी। बताया जाता है कि रफी ने पहले पूछा कि जब पूरी फिल्म के गाने किशोर कुमार गा रहे हैं तो यह हिस्सा भी उनसे ही क्यों नहीं गवाया जाता। तब आनंदजी ने उन्हें समझाया कि इस दृश्य के लिए जिस दर्द और आत्मीयता की जरूरत है, वह उनकी आवाज में ही संभव है। रफी साहब ने इस अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने जिन चार पंक्तियों को अपनी आवाज दी, वे थीं- “जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…”। इन पंक्तियों ने फिल्म के क्लाइमेक्स को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। दर्शकों ने न सिर्फ अमिताभ बच्चन के अभिनय को सराहा, बल्कि रफी की दर्दभरी आवाज ने भी उस दृश्य को अमर बना दिया। फिल्मी गलियारों में प्रचलित किस्सों के अनुसार, मोहम्मद रफी ने इन चार पंक्तियों के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने यह रिकॉर्डिंग की और अपनी संवेदनशील गायकी से दृश्य में ऐसी जान डाल दी कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक क्षणों में शामिल हो गया। आज, दशकों बाद भी जब ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का यह दृश्य या यह गीत सुनाई देता है, तो दर्शकों की भावनाएं उसी तरह उमड़ पड़ती हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मोहम्मद रफी की कला, संवेदनशीलता और संगीत के प्रति उनके समर्पण का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
फिल्मी करियर छोड़ने के फैसले पर यश चोपड़ा ने लगाई थी फटकार, भाग्यश्री बोलीं- आज भी नहीं है कोई पछतावा

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री भाग्यश्री ने अपनी पहली ही फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से देशभर के दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली थी। सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता साबित हुई। ऐसे समय में जब उनका करियर तेजी से ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा था, भाग्यश्री ने अचानक फिल्मी दुनिया से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। यह निर्णय उस दौर में उनके प्रशंसकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भाग्यश्री ने अपने करियर के उस अहम मोड़ को याद करते हुए बताया कि उस समय उनकी जिंदगी में प्यार और परिवार सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुके थे। उन्होंने कहा कि वह बहुत कम उम्र में प्रेम में थीं और शादी कर अपना परिवार बसाना चाहती थीं। अभिनेत्री के अनुसार जब ‘मैंने प्यार किया’ रिलीज हुई, तब वह शादीशुदा थीं और मां बनने वाली थीं। उस दौर में फिल्मों के निर्माण और रिलीज के बीच लंबा अंतर होता था, इसलिए दर्शकों को यह बात ज्यादा पता नहीं चल पाई थी। भाग्यश्री ने कहा कि 20 वर्ष की उम्र में उन्हें एक कठिन फैसला लेना पड़ा था। उनके सामने एक ओर उभरता हुआ फिल्मी करियर था और दूसरी ओर उनका व्यक्तिगत जीवन। उन्होंने परिवार और रिश्तों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया और उसी राह पर आगे बढ़ीं। हालांकि बाद में उन्होंने कुछ फिल्मों में काम किया, लेकिन वे फिल्में मुख्य रूप से उनके पति हिमालय दासानी के साथ थीं। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि अपने पति के साथ फिल्मों में काम करने का फैसला पूरी तरह व्यावहारिक सोच के आधार पर लिया गया था। उन्हें लगा था कि साथ काम करना आसान और सहज रहेगा, लेकिन दर्शकों ने इस जोड़ी को उस तरह स्वीकार नहीं किया जैसा उन्होंने उम्मीद की थी। भाग्यश्री के अनुसार युवावस्था में लिए गए कई फैसलों की तरह यह भी एक ऐसा निर्णय था, जिसे बाद में अलग नजरिए से देखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने इसे गलती कहने के बजाय एक अनुभव माना और कहा कि उस समय उन्होंने और उनके पति ने साथ काम करते हुए अच्छे पल बिताए। इंटरव्यू के दौरान भाग्यश्री ने एक दिलचस्प खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि उनके फिल्मी करियर से दूरी बनाने के फैसले से कई बड़े फिल्म निर्माता निराश हो गए थे। अभिनेत्री के अनुसार प्रसिद्ध निर्देशक यश चोपड़ा ने उन्हें इस फैसले के लिए डांटा था। वहीं दिग्गज फिल्मकार मनमोहन देसाई भी उनके साथ काम करना चाहते थे और उन्होंने उनसे फिल्म के लिए हामी भरने का आग्रह किया था। हालांकि इतने बड़े अवसर हाथ से निकल जाने के बावजूद भाग्यश्री को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में जो भी निर्णय लिए, उन्हें पूरी समझ और ईमानदारी के साथ लिया। उनका मानना है कि परिवार को प्राथमिकता देना उस समय उनके लिए सबसे सही विकल्प था। हां, एक इच्छा जरूर रह गई कि यदि उन्हें यश चोपड़ा और मनमोहन देसाई जैसे महान फिल्मकारों के साथ काम करने का अवसर मिलता तो वह अनुभव बेहद खास होता। भाग्यश्री ने कहा कि जीवन में कुछ अवसर छूट जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति पीछे मुड़कर केवल अफसोस करता रहे। उनके अनुसार जीवन आगे बढ़ने का नाम है और हर निर्णय अपने साथ कुछ नई सीख लेकर आता है। यही वजह है कि आज भी वह अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े फैसलों को लेकर संतुष्ट हैं और उन्हें अपने चुनावों पर गर्व है।
जेलर 2 में दिखेगा ऋतिक रोशन का धमाकेदार कैमियो, चेन्नई में रजनीकांत के साथ हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस करेंगे शूट

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि देश के सबसे बड़े फिल्म स्टार्स में शुमार रजनीकांत और ऋतिक रोशन लगभग चालीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर एक साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। निर्देशक नेल्सन दिलीप कुमार के निर्देशन में बन रही बहुप्रतीक्षित और ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी फिल्म ‘जेलर 2’ में ऋतिक रोशन की एंट्री हो चुकी है। फिल्म उद्योग के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस फिल्म में ऋतिक एक बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण कैमियो भूमिका में दिखाई देंगे, जो फिल्म की कहानी को एक नया मोड़ देने का काम करेगा। इस ऐतिहासिक रीयूनियन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज से ठीक चालीस साल पहले वर्ष 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘भगवान दादा’ में इन दोनों कलाकारों ने पहली बार एक साथ स्क्रीन साझा की थी। हालांकि, उस समय ऋतिक रोशन महज एक बाल कलाकार थे और उन्होंने अपने पिता राकेश रोशन के निर्माण और नाना जे. ओमप्रकाश के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रजनीकांत के बेटे की भूमिका निभाई थी। अब चार दशक बीत जाने के बाद, जब ऋतिक खुद भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और स्थापित सुपरस्टार्स में से एक बन चुके हैं, रजनीकांत के साथ उनका यह दोबारा स्क्रीन साझा करना प्रशंसकों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। वैरायटी इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेकर्स और ऋतिक रोशन के बीच पिछले कई हफ्तों से इस विशेष भूमिका को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। पटकथा और किरदार की महत्ता को समझने के बाद आखिरकार अभिनेता ने इस प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक तौर पर अपनी सहमति दे दी है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, ऋतिक रोशन आगामी 22 और 23 जून को चेन्नई में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ शामिल होंगे और अपने विशिष्ट दृश्यों की शूटिंग पूरी करेंगे। इस दो दिवसीय शूटिंग शेड्यूल को लेकर चेन्नई में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। फिल्म के मुख्य विजुअल्स की शूटिंग शुरू होने से पहले मेकर्स ऋतिक रोशन के साथ कई तरह के लुक टेस्ट आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि निर्देशक नेल्सन इस फिल्म में ऋतिक रोशन को एक बिल्कुल नए और अनोखे अवतार में पेश करना चाहते हैं, जिसे दर्शकों ने इससे पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा होगा। इस विशेष कैमियो को बहुत बड़े पैमाने पर फिल्माया जाएगा, जिसमें दर्शकों को एक हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेगा, जो पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स से लैस होगा। पटकथा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कहानी के एक बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण मोड़ पर ऋतिक रोशन के किरदार की एंट्री होगी। जब फिल्म के मुख्य नायक यानी रजनीकांत का चरित्र एक बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थिति में फंसा होगा, तब ऋतिक का किरदार संकटमोचक बनकर उभरेगा और कहानी की दिशा बदल देगा। यह दृश्य फिल्म का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अभिनेता ऋतिक रोशन के करियर ग्राफ की बात करें तो अगस्त 2025 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘वॉर 2’ के बाद ‘जेलर 2’ उनके करियर का अगला सबसे बड़ा और नया प्रोजेक्ट होने जा रहा है, जिसे लेकर सिनेमाई हलकों में भारी उत्साह है। कुछ समय पहले प्रदर्शित हुई एक डाक्यूमेंट्री सीरीज के दौरान ऋतिक ने रजनीकांत के साथ बचपन में काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि मात्र दस साल की उम्र में जब वे ‘भगवान दादा’ की शूटिंग कर रहे थे, तो अभिनय के दौरान होने वाली गलतियों का दोष रजनीकांत सहर्ष अपने ऊपर ले लेते थे ताकि एक बच्चे के रूप में उनके मन में कोई हीनभावना या झिझक पैदा न हो। अब जब दोनों कलाकार परिपक्वता के इस दौर में दोबारा एक साथ आ रहे हैं, तो बॉक्स ऑफिस पर एक नया रिकॉर्ड बनने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
दीपिका पादुकोण की तारीफ में बोलीं कंगना रनौत: ‘बॉलीवुड में बढ़ रही है नेगेटिविटी और इनसिक्योरिटी’

नई दिल्ली। बॉलीवुड में अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उन्होंने किसी विवादित मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ती असुरक्षा, जलन और कलाकारों के बीच कम होते भाईचारे को लेकर अपनी राय साझा की है। खास बात यह रही कि बातचीत के दौरान कंगना ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की खुलकर तारीफ की और बताया कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में उनसे कई सकारात्मक बातें सीखीं। एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि उन्हें अक्सर यह देखकर आश्चर्य होता है कि कई लोग कितनी असुरक्षा की भावना के साथ जीवन जीते हैं। उनके अनुसार किसी व्यक्ति के पास क्या है और क्या नहीं है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी मानसिकता होती है। उन्होंने कहा कि इंसान के भीतर जलन, असुरक्षा या दूसरों से खुद की तुलना करने जैसी भावनाएं होना सामान्य बात है, लेकिन इन भावनाओं को अपने ऊपर हावी होने देना या उन पर नियंत्रण रखना व्यक्ति की अपनी पसंद होती है। कंगना का मानना है कि नकारात्मक भावनाएं किसी भी व्यक्ति की प्रतिभा, आकर्षण और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे लोगों को देखा है जो बेहद प्रतिभाशाली, आकर्षक और सफल हैं, लेकिन असुरक्षा की भावना उन्हें भीतर से कमजोर बना देती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही यह तय कर लिया था कि वे ऐसी भावनाओं को अपने व्यक्तित्व पर हावी नहीं होने देंगी। अभिनेत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कम अनुभवी या कम प्रतिभाशाली है तो वे उसकी मदद करने और उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करती हैं। वहीं यदि कोई उनसे अधिक प्रतिभाशाली है तो वे उससे सीखने में विश्वास रखती हैं। उनके अनुसार सीखने और आगे बढ़ने की यह प्रक्रिया ही व्यक्ति को बेहतर बनाती है, जबकि असुरक्षा केवल विकास की राह में बाधा बनती है। बातचीत के दौरान कंगना ने अपने शुरुआती संघर्षों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे बहुत कम उम्र में अपने घर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में आई थीं, तब उन्हें इस दुनिया के बारे में बहुत कम जानकारी थी। गांव से आने और सीमित अनुभव होने के कारण कई चीजें उनके लिए चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे समय में उन्होंने अपने आसपास के लोगों को देखकर और उनसे सीखकर खुद को विकसित किया। इसी संदर्भ में उन्होंने दीपिका पादुकोण का उदाहरण दिया। कंगना ने कहा कि दीपिका का खेलों से जुड़ा बैकग्राउंड रहा है और उन्होंने हमेशा उनकी फिटनेस, अनुशासन और समर्पण की भावना को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि एक विज्ञान पृष्ठभूमि से आने वाली लड़की होने के बावजूद उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से बहुत कुछ सीखा और दीपिका उनमें से एक हैं। कंगना के अनुसार किसी व्यक्ति की अच्छी बातों को स्वीकार करना और उसकी प्रशंसा करना सीखने की पहली सीढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई किसी की खूबसूरती, प्रतिभा या विशेष गुणों को स्वीकार ही नहीं करेगा, तो उनसे सीखने का अवसर भी खो देगा। कंगना का मानना है कि प्रशंसा करने से व्यक्ति छोटा नहीं होता, बल्कि उसका दृष्टिकोण व्यापक होता है। अंत में कंगना ने वर्तमान पीढ़ी के कलाकारों के बीच बढ़ती दूरी पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पहले के दशकों में कलाकारों के बीच दोस्ती और अपनापन अधिक दिखाई देता था, जबकि आज बातचीत और आपसी सराहना का माहौल कम होता जा रहा है। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि आजकल लोग एक-दूसरे की खुलकर तारीफ करने से भी बचते हैं, जबकि सकारात्मकता और सहयोग किसी भी रचनात्मक क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।
सलमान खान के फार्महाउस विवाद में हाईकोर्ट सख्त: पड़ोसी को सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और उनके पनवेल स्थित फार्महाउस को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत या विवाद होने पर उसका समाधान संबंधित अधिकारियों और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक या विवादित सामग्री प्रसारित करके। मामला सलमान खान और उनके पड़ोसी केतन कक्कड़ के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी मुद्दे को लेकर शिकायत है तो वह पहले संबंधित सरकारी अथॉरिटी या सक्षम संस्थाओं के पास क्यों नहीं जाता और सीधे सोशल मीडिया का सहारा क्यों लेता है। जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग अभिव्यक्ति के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ, चाहे वह कोई प्रसिद्ध हस्ती ही क्यों न हो, अपमानजनक या आधारहीन आरोपों से भरी सामग्री सार्वजनिक मंचों पर साझा करे। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया की पहुंच बहुत व्यापक है और ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और सावधानी बरतना आवश्यक है। मामले में अदालत ने केतन कक्कड़ द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई कुछ पोस्ट और वीडियो को लेकर आपत्ति जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि विवादित सामग्री को हटाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि किसी तीसरे पक्ष ने ऐसी सामग्री अपलोड की है, तो संबंधित इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को भी उसे हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। गौरतलब है कि केतन कक्कड़ का आरोप है कि सलमान खान के फार्महाउस से जुड़े कुछ निर्माण कार्य पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं और उनकी संपत्ति तक पहुंच से जुड़े अधिकार प्रभावित हुए हैं। कक्कड़ का यह भी दावा है कि उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अभी अदालत द्वारा नहीं दिया गया है और मामला विचाराधीन है। दूसरी ओर, सलमान खान का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और मानहानिकारक हैं। अभिनेता ने वर्ष 2022 में अपने पड़ोसी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। यह मामला उस अपील से जुड़ा है जिसमें सलमान खान ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट अब इसी मामले पर सुनवाई कर रहा है। अदालत ने फिलहाल दोनों पक्षों के तर्क सुने हैं और मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की है। इस बीच, सलमान खान अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में हैं। अभिनेता हाल ही में फिल्म ‘सिकंदर’ में नजर आए थे और अब आगामी फिल्म ‘मातृभूमि’ की तैयारी में जुटे हैं। इसके अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेत्री नयनतारा के साथ उनकी नई फिल्म को लेकर भी फिल्म इंडस्ट्री में काफी उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल पनवेल फार्महाउस विवाद पर सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला

नई दिल्ली। बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद जहां दर्शकों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं अक्षय कुमार की फीस को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने इस फिल्म के लिए करीब 1.7 से 1.8 करोड़ रुपये की फीस ली है। अब खुद अक्षय कुमार ने इन चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान जब मीडिया ने उनसे उनकी फीस को लेकर सवाल किया तो अक्षय कुमार ने मुस्कुराते हुए इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसने कहा है ये? आपने कहा 1.7 करोड़? मैंने इतने नहीं लिए, ना ही मुझे इतने मिले हैं।” अक्षय के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। अक्षय कुमार ने इस मौके पर फिल्म से जुड़े अपने भावनात्मक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यादों से जुड़ा एक खास अध्याय है। अभिनेता ने दिवंगत लेखक और निर्देशक नीरज वोहरा को याद करते हुए कहा कि उनकी कॉमेडी की समझ को निखारने में नीरज का सबसे बड़ा योगदान रहा है। अक्षय ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी की बारीकियां तीन दिग्गजों से सीखी हैं प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और नीरज वोहरा। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार कहा है कि मेरी कॉमेडी की समझ इन तीन लोगों की वजह से बनी है। इनमें नीरज वोहरा का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। इस फिल्म से मेरा एक भावनात्मक जुड़ाव भी है क्योंकि इसी सफर में मैं उनके साथ जुड़ा था।” कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के साथ अपने लंबे रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह उन्हें पिछले 36 वर्षों से जानते हैं। अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह उस समय अक्सर फिरोज नाडियाडवाला के ऑफिस जाया करते थे। दिलचस्प अंदाज में अक्षय ने कहा, “मैं तब भी स्ट्रगल कर रहा था और आज भी स्ट्रगल कर रहा हूं।” उनके इस बयान ने दर्शकों और मीडिया का ध्यान खींचा। ‘वेलकम टू द जंगल’ मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के अलावा कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म में सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, रवीना टंडन, लारा दत्ता, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। गौरतलब है कि यह साल 2007 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘वेलकम’ का तीसरा भाग है। पहली फिल्म में अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर, नाना पाटेकर और परेश रावल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। इसके बाद 2015 में ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुई थी। अब लगभग एक दशक बाद ‘वेलकम टू द जंगल’ के जरिए यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक बार फिर हंसी और मनोरंजन का भरपूर डोज देने का वादा करती है।