‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला

नई दिल्ली। बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद जहां दर्शकों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं अक्षय कुमार की फीस को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने इस फिल्म के लिए करीब 1.7 से 1.8 करोड़ रुपये की फीस ली है। अब खुद अक्षय कुमार ने इन चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान जब मीडिया ने उनसे उनकी फीस को लेकर सवाल किया तो अक्षय कुमार ने मुस्कुराते हुए इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसने कहा है ये? आपने कहा 1.7 करोड़? मैंने इतने नहीं लिए, ना ही मुझे इतने मिले हैं।” अक्षय के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। अक्षय कुमार ने इस मौके पर फिल्म से जुड़े अपने भावनात्मक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यादों से जुड़ा एक खास अध्याय है। अभिनेता ने दिवंगत लेखक और निर्देशक नीरज वोहरा को याद करते हुए कहा कि उनकी कॉमेडी की समझ को निखारने में नीरज का सबसे बड़ा योगदान रहा है। अक्षय ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी की बारीकियां तीन दिग्गजों से सीखी हैं प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और नीरज वोहरा। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार कहा है कि मेरी कॉमेडी की समझ इन तीन लोगों की वजह से बनी है। इनमें नीरज वोहरा का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। इस फिल्म से मेरा एक भावनात्मक जुड़ाव भी है क्योंकि इसी सफर में मैं उनके साथ जुड़ा था।” कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के साथ अपने लंबे रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह उन्हें पिछले 36 वर्षों से जानते हैं। अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह उस समय अक्सर फिरोज नाडियाडवाला के ऑफिस जाया करते थे। दिलचस्प अंदाज में अक्षय ने कहा, “मैं तब भी स्ट्रगल कर रहा था और आज भी स्ट्रगल कर रहा हूं।” उनके इस बयान ने दर्शकों और मीडिया का ध्यान खींचा। ‘वेलकम टू द जंगल’ मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के अलावा कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म में सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, रवीना टंडन, लारा दत्ता, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। गौरतलब है कि यह साल 2007 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘वेलकम’ का तीसरा भाग है। पहली फिल्म में अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर, नाना पाटेकर और परेश रावल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। इसके बाद 2015 में ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुई थी। अब लगभग एक दशक बाद ‘वेलकम टू द जंगल’ के जरिए यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक बार फिर हंसी और मनोरंजन का भरपूर डोज देने का वादा करती है।
75 की उम्र में पहली बार विलेन बनेंगी शबाना आजमी, ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी से होगी दमदार टक्कर

नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में शामिल ‘आवारापन’ के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब 19 साल बाद इस फिल्म का सीक्वल ‘आवारापन 2’ दर्शकों के बीच आने जा रहा है और इस बार फिल्म में एक ऐसा चेहरा जुड़ा है, जिसने इसकी चर्चा को कई गुना बढ़ा दिया है। हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी फिल्म में एक दमदार नेगेटिव किरदार निभाने जा रही हैं। खास बात यह है कि लंबे और शानदार फिल्मी करियर के बावजूद शबाना आजमी पहली बार पर्दे पर पूर्ण रूप से विलेन के रूप में दिखाई देंगी। फिल्म में इमरान हाशमी एक बार फिर अपने लोकप्रिय किरदार ‘शिवम’ के रूप में नजर आएंगे। वहीं दिशा पाटनी भी अहम भूमिका में दिखाई देंगी। लेकिन सबसे ज्यादा उत्सुकता शबाना आजमी के किरदार ‘नफीसा’ को लेकर है, जिसे अंडरवर्ल्ड की बेहद प्रभावशाली और खतरनाक महिला सरगना के रूप में पेश किया जाएगा। फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि यह किरदार कहानी का सबसे मजबूत और यादगार पहलू बन सकता है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के लेखक बिलाल सिद्दीकी ने शुरुआत में इस किरदार को एक पुरुष अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में तैयार किया था। हालांकि बाद में निर्माता विशेष भट्ट ने कहानी में महिला विलेन को शामिल करने का सुझाव दिया। इस विचार ने पूरी कहानी की दिशा बदल दी और ‘नफीसा’ नाम का एक नया और प्रभावशाली किरदार सामने आया। इसके बाद मेकर्स को लगा कि इस भूमिका के लिए शबाना आजमी से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। विशेष भट्ट के मुताबिक, शबाना आजमी की अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस इस किरदार को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगी। उनका मानना है कि दर्शक शबाना को इस रूप में देखकर चौंक जाएंगे। फिल्म में उनका किरदार केवल खलनायिका नहीं होगा, बल्कि कहानी की दिशा तय करने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण चरित्र होगा। फिल्म से जुड़ने का शबाना आजमी का फैसला भी मेकर्स के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने 18 सितंबर 2025 को आधिकारिक रूप से इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की सहमति दी थी। भट्ट परिवार और शबाना आजमी के बीच वर्षों पुराने पारिवारिक संबंध भी इस सहयोग की एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं। ‘आवारापन 2’ का निर्देशन नितिन कक्कड़ कर रहे हैं, जबकि इसकी पटकथा बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है। फिल्म का निर्माण विशेष भट्ट के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत के मौके पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। गौरतलब है कि ‘आवारापन’ का पहला भाग वर्ष 2007 में रिलीज हुआ था। महेश भट्ट द्वारा निर्मित और मोहित सूरी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने अपने भावनात्मक कथानक, शानदार संगीत और इमरान हाशमी के दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। अब लगभग दो दशक बाद लौट रही इस फ्रेंचाइजी से दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की कसौटी पर कितना सफल साबित होती है।
“बचपन को मिले श्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार”

बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026– ललित गर्ग –हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। उसके हाथों में औजार, ईंट, बर्तन, हथौड़े, कूड़े की बोरी या कारखानों की मशीनें नहीं, बल्कि किताबें, खिलौने, रंग, सुनहले सपने और संभावनाएं होनी चाहिए। बचपन जीवन का वह स्वर्णिम काल है जिसमें व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, शिक्षा और भविष्य की नींव रखी जाती है। यदि यही काल श्रम, शोषण और अभाव की भट्टी में झोंक दिया जाए तो केवल एक बच्चे का नहीं, पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- आईअलओ द्वारा 2002 में शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य बाल श्रम की भयावहता के प्रति वैश्विक चेतना जगाना और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों को गति देना है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस ऐसे समय पर आ रहा है जब दुनिया तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक प्रगति के नए आयाम छू रही है, लेकिन दूसरी ओर करोड़ों बच्चे आज भी शिक्षा और बचपन के अधिकार से वंचित हैं। यह विडम्बना मानव सभ्यता के सामने एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। जब हम किसी ढाबे, होटल, चाय की दुकान, कारखाने, गैरेज, ईंट-भट्टे, खेत या ट्रैफिक सिग्नल पर किसी मासूम बच्चे को कठिन श्रम करते देखते हैं, तब अक्सर हमारी संवेदना कुछ क्षणों के लिए जागती है और फिर हम अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि कब तक हम इस पीड़ा को सामान्य मानते रहेंगे? क्या हम उस बचपन की चीख नहीं सुन पा रहे जो अपने अधिकारों से वंचित होकर मजदूरी के अंधेरे में खो रहा है? आज भी विश्व में करोड़ों बच्चे किसी न किसी रूप में बाल श्रम में संलग्न हैं। इनमें से बड़ी संख्या खतरनाक परिस्थितियों में काम करती है, जहां उनका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास बाधित होता है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता, विस्थापन, तस्करी, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और कमजोर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएं बाल श्रम की प्रमुख वजहें हैं। परिवार की आर्थिक विवशताएं बच्चों को स्कूल की बजाय काम की दुनिया में धकेल देती हैं। लेकिन गरीबी का समाधान बच्चों से काम कराना नहीं, बल्कि परिवारों को सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। बाल श्रम केवल आर्थिक समस्या नहीं है; यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। यह बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, आत्मविश्वास और भविष्य छीन लेता है। जो बच्चा विद्यालय में होना चाहिए, वह यदि कारखाने में है, तो यह केवल उस बच्चे की नहीं, पूरे समाज की विफलता है। बाल श्रम गरीबी का चक्र भी बनाए रखता है, क्योंकि अशिक्षित बच्चा बड़ा होकर कम आय वाले कार्यों तक सीमित रह जाता है और अगली पीढ़ी भी उसी अभाव में जीने को मजबूर होती है। भारत सहित अनेक देशों में बाल श्रम रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आईअलओ के कन्वेंशन 138 और कन्वेंशन 182 न्यूनतम कार्य आयु और बाल श्रम के सबसे खतरनाक रूपों पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। भारत में भी बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा शिक्षा का अधिकार कानून मौजूद हैं। लेकिन कानूनों की प्रभावशीलता उनके कठोर और ईमानदार क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। कई बार कानूनी प्रावधान होने के बावजूद बाल श्रम छिपे हुए रूपों में जारी रहता है। आज आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने की है। बाल श्रम को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाए जाने चाहिए। विद्यालयों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, मीडिया, उद्योग जगत और नागरिक समाज को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। जिस प्रकार पर्यावरण संरक्षण और महिला अधिकारों को लेकर वैश्विक चेतना विकसित हुई है, उसी प्रकार बाल अधिकारों के लिए भी विश्वव्यापी जनमत तैयार करना होगा। कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते लेकिन क्या इस उम्र के लगभग 25 से 30 करोड़ बच्चों से बाल मजदूरी के जरिए उनका बचपन और उनसे पढने का अधिकार छीनने का यह सुनियोजित षड्यंत्र नहीं लगता? मिसाल के तौर पर एक कानून बनाकर हमने बच्चों से उनका बचपन छिनने की कुचेष्टा की है। इस कानून में हमने यदि पारिवारिक कामधंधा या रोजगार है तो 4 से 14 की उम्र के बच्चों से कानूनन काम कराया जा सकता है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह कैसी विडम्बना है कि जब इस उम्र के बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, खानदानी व्यवसाय के नाम पर एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा, खेलकूद और सामान्य बाल्य सुलभ व्यवहार से वंचित किया जा रहा है और हम अपनी पीठ थपथपाए जा रहे हैं। बच्चों को बचपन से ही आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर हकीकत में हम उन्हें पैसा कमाकर लाने की मशीन बनाकर अंधकार में धकेल रहे हैं। विशेष रूप से डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग बाल श्रम उन्मूलन के लिए किया जा सकता है। प्रत्येक उद्योग और आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शी निगरानी, बाल श्रम शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल, त्वरित कार्रवाई तंत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणालियां विकसित की जा सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी आपूर्ति श्रृंखला में कहीं भी बाल श्रम का उपयोग न हो। जो कंपनियां ऐसा करती पाई जाएं, उनके विरुद्ध कठोर आर्थिक और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। बाल श्रम समाप्त करने का सबसे प्रभावी उपाय गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा है। केवल विद्यालय खोल देना पर्याप्त नहीं है; शिक्षा ऐसी हो जो बच्चों को आकर्षित करे, जीवनोपयोगी कौशल दे और उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास करे। गरीब परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का विस्तार आवश्यक है। यदि परिवार की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी तो बच्चों को मजदूरी के लिए भेजने की मजबूरी भी कम होगी। हमें यह भी समझना होगा कि बचपन केवल जीवित रहने का नाम नहीं है; बचपन का अर्थ है सपने देखने की स्वतंत्रता, खेलने का अधिकार, सीखने का
आज का राशिफल 12 जून 2026: मिथुन राशि में दिखेगा आर्थिक उछाल, जानें सभी 12 राशियों का हाल

नई दिल्ली । 12 जून 2026 का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, आर्थिक प्रगति और पारिवारिक सुख लेकर आ रहा है। मिथुन राशि के जातकों के लिए दिन विशेष रूप से लाभकारी रहेगा, वहीं कुछ राशियों को सतर्कता और धैर्य की आवश्यकता होगी। मेष राशि: नए प्रयोगों से बढ़ेगा लाभमेष राशि के जातक आज अपने कार्यों में अलग सोच के साथ आगे बढ़ेंगे। करियर में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे और पारिवारिक सहयोग बढ़ेगा। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वृषभ राशि: निवेश में रखें सावधानीवृषभ राशि वालों को आज व्यापार में सामान्य स्थिति का सामना करना पड़ेगा। कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर लें। लुभावने प्रस्तावों से बचें और कानूनी मामलों में सावधानी रखें। मिथुन राशि: आर्थिक पक्ष में जबरदस्त उछालमिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहद शुभ है। कारोबार में तेजी आएगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बड़े लक्ष्य पूरे होंगे और कार्यक्षेत्र में अनुकूलता मिलेगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा और सफलता के नए रास्ते खुलेंगे। कर्क राशि: रिश्तों में बढ़ेगा स्नेहकर्क राशि के लोग परिवार और मित्रों के साथ अच्छा समय बिताएंगे। कार्यक्षेत्र में नई योजनाओं को गति मिलेगी और सम्मान बढ़ेगा। सिंह राशि: अवसरों से भरा दिनसिंह राशि वालों के लिए करियर में नए अवसर मिलेंगे। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। आय में वृद्धि के योग हैं। कन्या राशि: सावधानी से करें कार्यकन्या राशि वालों को स्वास्थ्य और कार्य दोनों में सतर्क रहना होगा। छोटी गलती नुकसान का कारण बन सकती है। तुला राशि: दांपत्य जीवन में मधुरतातुला राशि के जातकों के लिए पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। व्यापार विस्तार के योग बनेंगे और रिश्तों में मजबूती आएगी। वृश्चिक राशि: खर्चों पर रखें नियंत्रणवृश्चिक राशि वालों को बजट और खर्च पर ध्यान देने की जरूरत है। भावनाओं में बहने से बचें। धनु राशि: संवाद से मिलेगा लाभधनु राशि के जातकों के लिए मित्रों और परिवार के साथ समय अच्छा रहेगा। प्रतिभा प्रदर्शन में सफलता मिलेगी। मकर राशि: निजी मामलों पर फोकस बढ़ेगामकर राशि वालों का ध्यान निजी जीवन और कार्यक्षेत्र दोनों पर रहेगा। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि: आत्मविश्वास में बढ़ोतरीकुंभ राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। भाई-बंधुओं का सहयोग मिलेगा और कार्यों में तेजी आएगी। मीन राशि: आर्थिक मजबूती का समयमीन राशि वालों के लिए घर-परिवार में सुख और समृद्धि बढ़ेगी। आर्थिक योजनाएं सफल होंगी और धन लाभ के योग बनेंगे। 12 जून 2026 का दिन कुल मिलाकर कई राशियों के लिए प्रगति और अवसरों से भरा रहेगा। विशेष रूप से मिथुन राशि वालों के लिए यह दिन आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद शुभ साबित होगा।
MP SAHITYA ACADEMY: साहित्य की दुनिया में चमके सुयश त्यागी, ‘छूटते किनारे’ को मिला राजा वीरसिंह देव सम्मान

MP SAHITYA ACADEMY: भोपाल। भोपाल में मध्यप्रदेश साहित्य जगत के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने वर्ष 2024 के पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। इस बार कुल 56 लेखकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें 30 लेखक प्रादेशिक स्तर पर और 26 लेखक राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए हैं। साथ ही चयनित लेखकों को 1 लाख रुपये और 51 हजार रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की जाएगी। भाजपा सोशल मीडिया संयोजक भी शामिल घोषित पुरस्कारों में प्रदेश भाजपा के सोशल मीडिया संयोजक सुयश त्यागी का नाम भी शामिल है। उन्हें उनकी चर्चित कृति ‘छूटते किनारे’ के लिए राजा वीरसिंह देव पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान और लेखन को मिली महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। MP Agriculture Growth: CM मोहन यादव के नेतृत्व में MP ने रचा नया रिकॉर्ड, सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर MP साहित्यकारों का हर साल सम्मान मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी हर साल अलग-अलग विधाओं में अच्छा साहित्य लिखने वाले लेखकों को सम्मान देती है। इस साल भी प्रदेश और देश के कई प्रसिद्ध लेखकों को उनकी रचनात्मक उपलब्धियों के लिए चुना गया है। देवास में रास्ता विवाद से बवाल: 400 परिवारों का चक्काजाम, स्थायी समाधान की मांग तेज जल्द आयोजित होगा पुरस्कार समारोह अकादमी ने बताया है कि जल्द ही एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी चुने गए साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा।
मनुस्मृति और भारतीय संविधान : नीति-निदेशक तत्वों का तुलनात्मक दृष्टिकोण..

लेखक: डॉ. राकेश कुमार आर्य भारतीय संविधान में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है। ये ऐसे संवैधानिक निर्देश हैं जो राज्य को लोककल्याण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, यद्यपि इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता। संविधान सभा के सलाहकार सर बी.एन. राव ने इन तत्वों को नैतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में रखने का सुझाव दिया था, जिसे संविधान सभा ने स्वीकार किया। नीति-निदेशक तत्वों का मूल उद्देश्य यह है कि राज्य एक कल्याणकारी व्यवस्था की ओर अग्रसर हो। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, फिर भी शासन की नीतियों के निर्माण में इनका विशेष महत्व है। अनुच्छेद 38 से 51 तक विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है। इनमें सामाजिक न्याय, समानता, आजीविका के अवसर, श्रमिक कल्याण, समान वेतन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, समान नागरिक संहिता तथा अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे व्यापक विषय शामिल हैं। अनुच्छेद 39 विशेष रूप से राज्य को यह निर्देश देता है कि वह संपत्ति और संसाधनों के समान वितरण की दिशा में कार्य करे तथा पुरुषों और महिलाओं को समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करे। इसी प्रकार अनुच्छेद 39क में निःशुल्क विधिक सहायता और समान न्याय की व्यवस्था की बात कही गई है। अनुच्छेद 41 से 43 तक रोजगार, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार जैसे विषयों पर बल दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य देश में समान कानून व्यवस्था स्थापित करना है। अनुच्छेद 45 और 46 शिक्षा, विशेषकर बाल शिक्षा तथा कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक उत्थान पर केंद्रित हैं। इसके बाद अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण स्तर सुधारने का दायित्व राज्य पर डालता है। अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन तथा 48क पर्यावरण संरक्षण पर बल देता है। अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण, अनुच्छेद 50 न्यायपालिका और कार्यपालिका के पृथक्करण तथा अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। इस संदर्भ में लेखक द्वारा मनुस्मृति की परंपरा का उल्लेख करते हुए यह विचार प्रस्तुत किया गया है कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को लोककल्याण, अनुशासन और न्याय व्यवस्था से जोड़ा गया था। मनु के अनुसार राजा का प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा, न्याय व्यवस्था का पालन और अपराध नियंत्रण माना गया है। लेख में यह भी बताया गया है कि महर्षि मनु के विचारों के अनुसार शासक को संसाधनों का उपयोग लोकहित में करना चाहिए तथा प्राप्त संपदा को शिक्षा, धर्म, अनाथों और समाज कल्याण में लगाना चाहिए। साथ ही शासक के लिए यह भी आवश्यक माना गया है कि वह राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखे। राजा के विभिन्न रूपों—जैसे इंद्र, सूर्य, वायु, यम, वरुण, चंद्र आदि—के माध्यम से शासन के विविध गुणों का प्रतीकात्मक वर्णन किया गया है, जिसमें न्याय, अनुशासन, लोकप्रियता, निगरानी और दंड व्यवस्था जैसे तत्वों को जोड़ा गया है। समग्र रूप से यह लेख यह स्थापित करने का प्रयास करता है कि भारतीय संविधान के नीति-निदेशक तत्व आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की लोककल्याणकारी अवधारणा को स्पष्ट करते हैं, जबकि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों से जोड़ने की परंपरा रही है। इस प्रकार दोनों दृष्टिकोणों में भिन्न ऐतिहासिक संदर्भों के बावजूद लोककल्याण, न्याय और सुव्यवस्था की भावना को एक समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
फोल्डेबल फोन के बाद अब फोल्डेबल माउस की एंट्री, Logitech Mobi Fold ने पोर्टेबल टेक्नोलॉजी को दिया नया आयाम

नई दिल्ली । फोल्डेबल स्मार्टफोन के बाद अब कंप्यूटर एक्सेसरीज़ की दुनिया में भी फोल्डेबल तकनीक ने दस्तक दे दी है। वैश्विक टेक कंपनी Logitech ने एक ऐसे माउस को पेश किया है, जो उपयोग न होने पर बीच से मुड़कर बेहद कॉम्पैक्ट आकार में बदल जाता है। Mobi Fold नाम का यह नया डिवाइस पोर्टेबिलिटी और आधुनिक डिजाइन का अनूठा मिश्रण माना जा रहा है, जिसने टेक प्रेमियों और पेशेवर उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है। कंपनी के अनुसार Mobi Fold को विशेष रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो लगातार यात्रा करते हैं, दूरस्थ स्थानों से काम करते हैं या हल्के और आसानी से ले जाए जा सकने वाले गैजेट्स को प्राथमिकता देते हैं। यह माउस सामान्य स्थिति में पूरी तरह कार्यात्मक रहता है, लेकिन उपयोग समाप्त होने पर क्लैमशेल डिजाइन में फोल्ड होकर काफी छोटा हो जाता है। इसका डिजाइन आधुनिक फोल्डेबल स्मार्टफोन से प्रेरित माना जा रहा है। डिवाइस की सबसे बड़ी विशेषता इसका फोल्डिंग मैकेनिज्म है। माउस के बीच में एक विशेष हिंज लगाया गया है, जिसकी मदद से यह दो हिस्सों में मुड़ जाता है। कंपनी का कहना है कि इस हिंज को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए विशेष परीक्षण किए गए हैं। दावा किया गया है कि सामान्य उपयोग की स्थिति में यह कई वर्षों तक बिना किसी बड़ी समस्या के काम कर सकता है। Mobi Fold केवल डिजाइन के मामले में ही नहीं बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी प्रभावशाली नजर आता है। इसमें लंबी बैटरी लाइफ दी गई है, जिससे उपयोगकर्ता बार-बार चार्जिंग की चिंता से मुक्त रह सकते हैं। कंपनी के अनुसार एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर यह लगभग 30 दिनों तक काम कर सकता है। वहीं यदि बैटरी पूरी तरह समाप्त हो जाए तो केवल एक मिनट की चार्जिंग से करीब 22 घंटे तक उपयोग संभव है। यह फीचर उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है जिन्हें यात्रा या काम के दौरान तुरंत डिवाइस की आवश्यकता पड़ती है। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी इस माउस को बहुउपयोगी बनाया गया है। इसमें ब्लूटूथ सपोर्ट के साथ Logitech का Bolt USB रिसीवर भी उपलब्ध कराया गया है। इसकी मदद से इसे Windows, Mac, Linux और Android जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म से आसानी से जोड़ा जा सकता है। यही कारण है कि यह अलग-अलग डिवाइस इस्तेमाल करने वाले पेशेवरों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बन सकता है। माउस के डिजाइन को अधिक कॉम्पैक्ट बनाए रखने के लिए पारंपरिक मैकेनिकल स्क्रॉल व्हील की जगह टच-आधारित स्क्रॉलिंग एरिया दिया गया है। इससे डिवाइस का आकार छोटा रखने में मदद मिली है और आधुनिक उपयोग अनुभव भी मिलता है। कंपनी ने इसे धूल से सुरक्षित रखने के लिए डस्ट-रेसिस्टेंट फीचर्स भी शामिल किए हैं। इसके अलावा ड्रॉप टेस्टिंग के जरिए इसकी मजबूती को भी परखा गया है। Mobi Fold को लेकर बाजार में उत्सुकता बढ़ रही है क्योंकि यह पारंपरिक माउस डिजाइन से अलग एक नया प्रयोग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपभोक्ताओं से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी फोल्डेबल एक्सेसरीज़ के क्षेत्र में नए उत्पाद पेश कर सकती हैं। फिलहाल इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 79.99 डॉलर निर्धारित की गई है। हालांकि भारतीय बाजार में इसकी उपलब्धता और लॉन्च टाइमलाइन को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
भारत के टेक भविष्य पर दुनिया की नजर, पीएम मोदी को टिम कुक की बधाई ने फिर दिखाई वैश्विक भरोसे की तस्वीर

नई दिल्ली । भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश और विदेश से लगातार शुभकामनाएं मिल रही हैं। इसी क्रम में वैश्विक टेक उद्योग की प्रमुख हस्तियों में शामिल ऐपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने भी प्रधानमंत्री को बधाई संदेश भेजते हुए भारत में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया है। इस संदेश को भारत की बढ़ती तकनीकी प्रतिष्ठा और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती साख के रूप में देखा जा रहा है। टिम कुक ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले नवाचारों और नई तकनीकों को प्रोत्साहन देने के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने तकनीकी विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों की सराहना करते हुए भारत की प्रगति को उल्लेखनीय बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संदेश का जवाब देते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के विभिन्न वर्गों से मिल रहे शुभकामना संदेश उन्हें भावुक और प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही हर व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से उत्तर देना संभव न हो, लेकिन प्रत्येक शुभकामना उनके लिए अत्यंत मूल्यवान है और उन्हें आगे बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की जनता ने बार-बार स्थिरता, सुशासन और विकास की नीतियों पर विश्वास जताया है। यही विश्वास सरकार को लगातार नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करता है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने तथा देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करते रहने का संकल्प दोहराया। विशेषज्ञों का मानना है कि टिम कुक का यह संदेश केवल एक औपचारिक बधाई नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और वैश्विक निवेश आकर्षण का भी संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऐपल के संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आई है। भारत न केवल ऐपल के लिए एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता बाजार बनकर उभरा है, बल्कि कंपनी के वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क में भी उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं और डिजिटल अवसंरचना के विस्तार ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का विश्वास मजबूत किया है। इसका परिणाम यह है कि स्मार्टफोन निर्माण से लेकर आपूर्ति श्रृंखला तक भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। कई प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियां भारत को भविष्य के रणनीतिक केंद्र के रूप में देख रही हैं। हाल के वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल भुगतान, 5जी नेटवर्क और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भारत ने तेज प्रगति दर्ज की है। सरकार की ओर से 6जी, चिप निर्माण और अनुसंधान आधारित तकनीकी विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है। टिम कुक की ओर से आया बधाई संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब भारत स्वयं को तकनीक, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह संदेश भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और भविष्य के तकनीकी रोडमैप में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट लॉन्च की तैयारी तेज, स्टारलिंक ने अफवाहों को किया खारिज, सरकार के सहयोग पर जताया भरोसा

नई दिल्ली । भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्टारलिंक ने अपने संचालन संबंधी लाइसेंस पर रोक लगाए जाने की खबरों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार के साथ उसकी बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और वह देश में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण भारत सरकार ने स्टारलिंक के कमर्शियल ऑपरेशन को मंजूरी देने की प्रक्रिया रोक दी है। इन खबरों के सामने आने के बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई, जिसमें ऐसे दावों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया गया। स्टारलिंक की बिजनेस ऑपरेशन्स की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि कंपनी भारत सरकार के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक ने सभी आवश्यक नियमों, प्रक्रियाओं और कानूनी आवश्यकताओं का जिम्मेदारीपूर्वक पालन किया है तथा कंपनी का उद्देश्य देश में विश्वसनीय और तेज इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना है। भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। विशेष रूप से दूरदराज, ग्रामीण और भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने के लिए सैटेलाइट आधारित नेटवर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे इलाकों में पारंपरिक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क का विस्तार कई बार चुनौतीपूर्ण साबित होता है। इसी वजह से स्टारलिंक जैसी सेवाओं को डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। मामला उस समय चर्चा में आया जब कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि कंपनी को भारत में अंतिम लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ वैश्विक घटनाओं और सैटेलाइट संचार सेवाओं के उपयोग से जुड़े सुरक्षा पहलुओं के कारण नियामकीय स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि कंपनी ने ऐसे दावों को निर्णायक आधार वाला नहीं माना और कहा कि भारत सरकार के साथ उसका सहयोगात्मक संबंध बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी को भारत में सेवा संचालन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत पहले ही कुछ महत्वपूर्ण मंजूरियां मिल चुकी हैं, जबकि अंतिम लाइसेंस प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। इसी चरण को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें सामने आ रही थीं। स्टारलिंक का कहना है कि वह सभी शर्तों और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए नियामकीय प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की दिशा में उसकी तकनीक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहां अभी भी उच्च गति इंटरनेट सेवाओं की पहुंच सीमित है, सैटेलाइट इंटरनेट एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। इसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को भी गति मिलने की संभावना है। स्टारलिंक का ताजा बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी भारतीय बाजार को लेकर गंभीर है और नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद शीघ्र संचालन शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। अब उद्योग जगत और उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया कब पूरी होती है और देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का नया अध्याय कब शुरू होता है।
2900 नए 5G टावरों से मजबूत हुई कनेक्टिविटी, लेकिन एक सेटिंग बंद रही तो नहीं मिलेगा हाई-स्पीड नेटवर्क का फायदा

नई दिल्ली । देश में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में दूरसंचार क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5G नेटवर्क के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर नेटवर्क कवरेज, तेज इंटरनेट स्पीड और अधिक भरोसेमंद मोबाइल सेवाएं उपलब्ध कराना है। नए टावरों के स्थापित होने से शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाओं और वर्क फ्रॉम होम जैसी गतिविधियों ने तेज और स्थिर इंटरनेट की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में 5G नेटवर्क का विस्तार दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस विस्तार का लाभ उत्तर भारत के अनेक जिलों में रहने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। बेहतर नेटवर्क उपलब्ध होने से वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग, हाई-डेफिनिशन कंटेंट स्ट्रीमिंग और डिजिटल सेवाओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगा। साथ ही व्यवसाय, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी सेवाएं भी तेज कनेक्टिविटी का लाभ उठा सकेंगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल क्षेत्र में 5G नेटवर्क उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका स्मार्टफोन 5G तकनीक को सपोर्ट करता हो। इसके अलावा मोबाइल डिवाइस में 5G नेटवर्क से जुड़ी सेटिंग्स सक्रिय होना भी आवश्यक है। कई बार उपयोगकर्ताओं के क्षेत्र में 5G सेवा उपलब्ध होने के बावजूद फोन की सेटिंग्स सही न होने के कारण उन्हें अपेक्षित नेटवर्क स्पीड नहीं मिल पाती। तकनीकी जानकारों के अनुसार सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि स्मार्टफोन 5G सक्षम है या नहीं। इसके बाद यह भी देखना चाहिए कि उपयोग किया जा रहा सिम कार्ड 5G सेवाओं के अनुकूल है। मोबाइल सॉफ्टवेयर का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल होना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कई बार अपडेट के माध्यम से नेटवर्क से जुड़े सुधार उपलब्ध कराए जाते हैं। एंड्रॉयड स्मार्टफोन उपयोगकर्ता मोबाइल नेटवर्क या कनेक्टिविटी सेटिंग्स में जाकर पसंदीदा नेटवर्क मोड का चयन कर सकते हैं। यदि 5G विकल्प उपलब्ध हो तो उसे सक्रिय करना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के स्मार्टफोन में यह विकल्प अलग नामों से दिखाई दे सकता है, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है। वहीं आईफोन उपयोगकर्ता भी सेलुलर नेटवर्क सेटिंग्स के माध्यम से 5G विकल्प चुन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 5G तकनीक देश के डिजिटल विकास की आधारशिला बनने वाली है। स्मार्ट शहरों, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं और उद्योगों के डिजिटलीकरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यही कारण है कि दूरसंचार कंपनियां लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं और उपभोक्ताओं को नई पीढ़ी की कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं। बढ़ती डिजिटल जरूरतों के बीच 5G नेटवर्क का विस्तार केवल बेहतर इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।