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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले में फिर टली सुनवाई, अदालत ने 7 अगस्त की नई तारीख की तय

नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय तथा उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक मामले की सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ा दी गई है। चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में निर्धारित सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने मामले की अगली तारीख 7 अगस्त तय की है। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान न तो मुख्यमंत्री विजय अदालत पहुंचे और न ही उनकी पत्नी संगीता ने व्यक्तिगत रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से उनके अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों की गैरहाजिरी को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। यह मामला पिछले कई महीनों से फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले भी कई अवसरों पर सुनवाई निर्धारित होने के बावजूद दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। कानूनी प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति को लेकर भी अदालत के समक्ष अनुरोध प्रस्तुत किए गए थे। मुख्यमंत्री पद से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण कारणों के रूप में बताया गया है। संगीता ने वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने की मांग की थी। याचिका में यह कहा गया था कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न मतभेद ऐसे स्तर तक पहुंच चुके हैं जहां वैवाहिक संबंधों को सामान्य रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं रह गया है। याचिका में वैधानिक अधिकारों से संबंधित अन्य मांगों को भी शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री विजय का सार्वजनिक जीवन लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। फिल्म जगत में लोकप्रिय अभिनेता के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी पार्टी के माध्यम से राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक छवि पर लोगों की विशेष नजर बनी हुई है। इसी कारण उनके निजी जीवन से जुड़ा यह कानूनी मामला भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के निजी मामलों को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि रहती है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया को पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत दोनों पक्षों को पर्याप्त अवसर देती है ताकि किसी भी संभावित समाधान की संभावना को परखा जा सके। ऐसे मामलों में अदालत की प्राथमिकता कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना होती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत मामले की प्रगति, पक्षकारों की उपस्थिति और आगे की कानूनी कार्यवाही को लेकर निर्णय ले सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस चर्चित मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है। Google Photo Search Suggestion:

Zepto से खरीदी Apple Watch को लेकर विवाद, वीर दास ने नकली उत्पाद मिलने का किया दावा; ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह

नई दिल्ली । ऑनलाइन और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की प्रामाणिकता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रसिद्ध कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने दावा किया है कि उन्होंने एक क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जो Apple Watch खरीदी थी, वह नकली निकली। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और डिजिटल खरीदारी में ग्राहकों की सुरक्षा तथा भरोसे को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। वीर दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि एक पेशेवर आवश्यकता के चलते उन्हें तत्काल Apple Watch की जरूरत थी, जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन ऑर्डर देकर उत्पाद मंगाया। हालांकि डिलीवरी मिलने के बाद उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान नहीं मिल सका। मामले के सार्वजनिक होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि तेजी से बढ़ रहे क्विक कॉमर्स सेक्टर में महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था कितनी मजबूत है। कई उपभोक्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उत्पादों की जांच और सत्यापन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित कंपनी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। कंपनी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और उत्पाद की जांच के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत उत्पाद को वापस मंगाने और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा करने की बात कही गई है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक संतुष्टि और उत्पाद की गुणवत्ता उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज बाजार में कई ऐसे नकली इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उपलब्ध हैं जो पहली नजर में असली जैसे दिखाई देते हैं। विशेष रूप से प्रीमियम ब्रांडों के उत्पादों की कॉपी इतनी सटीक बनाई जाती है कि सामान्य उपभोक्ता के लिए अंतर समझना आसान नहीं होता। यही कारण है कि किसी भी महंगे गैजेट की खरीदारी के दौरान तकनीकी सत्यापन आवश्यक माना जाता है। उपभोक्ता विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद को प्राप्त करने के बाद उसके सीरियल नंबर और मॉडल विवरण की आधिकारिक रिकॉर्ड से जांच करनी चाहिए। यदि उत्पाद पर अंकित जानकारी और वास्तविक डिवाइस के विवरण में अंतर दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विक्रेता या प्लेटफॉर्म से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा पैकेजिंग, डिस्प्ले क्वालिटी, निर्माण फिनिश और सॉफ्टवेयर अनुभव जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। तकनीकी जानकारों का कहना है कि असली और नकली स्मार्टवॉच के बीच सबसे बड़ा अंतर प्रदर्शन और उपयोग अनुभव में दिखाई देता है। असली डिवाइस में इंटरफेस अधिक स्मूद, सेंसर अधिक सटीक और हैप्टिक फीडबैक बेहतर होता है, जबकि नकली उत्पादों में अक्सर इन पहलुओं की गुणवत्ता कमजोर होती है। यह मामला केवल एक ग्राहक की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ता विश्वास की अहमियत को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों को महंगे उत्पाद प्राप्त करते समय हर विवरण की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए और संतुष्ट होने के बाद ही डिलीवरी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। डिजिटल खरीदारी के दौर में सतर्कता ही उपभोक्ताओं को संभावित नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मानी जा रही है।

₹1000 से कम में सुपरफास्ट इंटरनेट और OTT का डबल फायदा, Jio Fiber, Airtel Xstream और BSNL के प्लान्स में कौन है सबसे आगे?

नई दिल्ली । डिजिटल दौर में घरों की इंटरनेट जरूरतें पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, क्लाउड गेमिंग और 4K वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों ने हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन को लगभग अनिवार्य बना दिया है। ऐसे में उपभोक्ता कम कीमत में बेहतर स्पीड, अनलिमिटेड डेटा और अतिरिक्त मनोरंजन सुविधाओं वाले प्लान की तलाश करते हैं। अच्छी बात यह है कि देश की प्रमुख टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड कंपनियां 1000 रुपये से कम कीमत में कई आकर्षक विकल्प उपलब्ध करा रही हैं। रिलायंस जियो का जियोफाइबर इस श्रेणी में लोकप्रिय विकल्पों में शामिल है। कंपनी का 399 रुपये वाला प्लान 30 Mbps स्पीड के साथ आता है, जबकि 699 रुपये के प्लान में 100 Mbps तक की स्पीड उपलब्ध कराई जाती है। जिन परिवारों में एक साथ कई डिवाइस इंटरनेट का उपयोग करते हैं, उनके लिए 100 Mbps वाला प्लान बेहतर माना जा सकता है। जियोफाइबर के प्लान घरेलू उपयोगकर्ताओं के बीच स्थिर कनेक्टिविटी और व्यापक उपलब्धता के कारण लोकप्रिय बने हुए हैं। एयरटेल एक्सस्ट्रीम फाइबर भी इस सेगमेंट में मजबूत दावेदार है। कंपनी के 599 रुपये, 699 रुपये और 899 रुपये के प्लान में क्रमशः 30 Mbps, 40 Mbps और 100 Mbps तक की स्पीड मिलती है। इन प्लान्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें कई OTT सुविधाएं और टीवी कंटेंट एक्सेस भी शामिल किए जाते हैं। जिन यूजर्स की प्राथमिकता इंटरनेट के साथ मनोरंजन है, उनके लिए एयरटेल के ये पैकेज काफी आकर्षक साबित हो सकते हैं। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल भी कम बजट वाले ग्राहकों के लिए कई प्रतिस्पर्धी विकल्प उपलब्ध करा रही है। 399 रुपये, 499 रुपये, 599 रुपये और 799 रुपये की श्रेणी में कंपनी विभिन्न स्पीड और डेटा क्षमता वाले फाइबर प्लान प्रदान करती है। कुछ प्लान में 60 Mbps से लेकर 100 Mbps और 150 Mbps तक की स्पीड भी उपलब्ध है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां निजी कंपनियों की पहुंच सीमित है, वहां बीएसएनएल का नेटवर्क कई उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी विकल्प बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्लान का चयन केवल कीमत देखकर नहीं किया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं को अपने मासिक डेटा उपयोग, परिवार में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या, उपलब्ध नेटवर्क गुणवत्ता और OTT जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। यदि प्राथमिकता केवल इंटरनेट स्पीड है तो जियोफाइबर और बीएसएनएल के कुछ प्लान बेहतर मूल्य प्रदान कर सकते हैं, जबकि मनोरंजन और OTT कंटेंट पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए एयरटेल एक्सस्ट्रीम फाइबर अधिक आकर्षक विकल्प बन सकता है। ब्रॉडबैंड बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। पहले जहां हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए अधिक खर्च करना पड़ता था, वहीं अब 1000 रुपये से कम कीमत में अनलिमिटेड डेटा, अच्छी स्पीड और डिजिटल एंटरटेनमेंट सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। यही कारण है कि घरेलू इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच फाइबर ब्रॉडबैंड की मांग लगातार बढ़ रही है और कंपनियां भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए ऑफर्स पेश कर रही हैं।

30 जून को भारत में लॉन्च होगा OnePlus N6, नई N सीरीज के साथ बजट स्मार्टफोन बाजार में कंपनी का बड़ा दांव

नई दिल्ली । स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वनप्लस भारतीय बाजार में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि उसकी नई N सीरीज का पहला स्मार्टफोन OnePlus N6 आगामी 30 जून को लॉन्च किया जाएगा। इस लॉन्च के साथ कंपनी पहली बार बजट स्मार्टफोन श्रेणी में बड़े स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में वनप्लस की पहचान अब तक मुख्य रूप से प्रीमियम और मिड-रेंज डिवाइसों के लिए रही है। हालांकि हाल के वर्षों में बजट सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की मांग को देखते हुए कंपनी ने अब एक नई रणनीति अपनाई है। N सीरीज को इसी रणनीतिक विस्तार का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक ग्राहकों तक वनप्लस का अनुभव पहुंचाना है। कंपनी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार OnePlus N6 को 30 जून को दोपहर 12 बजे लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन की डिजाइन और कुछ प्रमुख जानकारियों का खुलासा भी किया है। स्मार्टफोन का डिजाइन काफी हद तक वनप्लस की लोकप्रिय Nord सीरीज से प्रेरित दिखाई देता है, जिससे यह प्रीमियम लुक और आधुनिक डिजाइन का संतुलित मिश्रण पेश करता है। फोन के पिछले हिस्से में चौकोर आकार का कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें दो कैमरा सेंसर और एलईडी फ्लैश मौजूद हैं। फ्लैट बैक पैनल के बीच में वनप्लस की ब्रांडिंग दिखाई देगी। डिवाइस के दाईं ओर पावर और वॉल्यूम बटन दिए गए हैं, जबकि नीचे की तरफ यूएसबी टाइप-सी पोर्ट, स्पीकर ग्रिल और सिम ट्रे की सुविधा उपलब्ध होगी। फ्रंट में सेंटर पंच-होल डिस्प्ले दिया गया है, जो आधुनिक स्मार्टफोन डिजाइन ट्रेंड के अनुरूप माना जाता है। सबसे अधिक चर्चा इसकी संभावित कीमत को लेकर हो रही है। कंपनी ने संकेत दिया है कि N सीरीज के स्मार्टफोन 18 हजार से 25 हजार रुपये की मूल्य श्रेणी में पेश किए जाएंगे। इससे स्पष्ट है कि यह सीरीज मौजूदा Nord लाइनअप की तुलना में अधिक किफायती होगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मॉडल 20 हजार रुपये से कम कीमत में भी उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे यह सीरीज सीधे तौर पर बजट और अपर मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करेगी। OnePlus N6 को ब्लैक और ग्रीन रंग विकल्पों में पेश किया जाएगा। इसकी बिक्री प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से की जाएगी। कंपनी का लक्ष्य उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना है जो सीमित बजट में विश्वसनीय ब्रांड, बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव और आकर्षक डिजाइन वाले स्मार्टफोन की तलाश करते हैं। हालांकि कंपनी ने अभी तक प्रोसेसर, कैमरा क्षमताओं, बैटरी क्षमता और चार्जिंग तकनीक जैसी तकनीकी जानकारियों का खुलासा नहीं किया है। माना जा रहा है कि लॉन्च इवेंट के दौरान इन सभी फीचर्स की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इसी वजह से टेक्नोलॉजी जगत और स्मार्टफोन उपभोक्ताओं के बीच इस डिवाइस को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OnePlus N6 प्रतिस्पर्धी हार्डवेयर, लंबी बैटरी लाइफ और बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव के साथ आता है तो यह बजट स्मार्टफोन बाजार में मजबूत विकल्प बन सकता है। ऐसे में 30 जून का लॉन्च कार्यक्रम भारतीय स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां वनप्लस पहली बार इस मूल्य वर्ग में अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश करेगा।

₹4500 से कम में बिजली बचाने वाले BLDC फैन की बढ़ी मांग, Atomberg से Havells तक कई कंपनियों ने पेश किए दमदार विकल्प

नई दिल्ली । देशभर में बढ़ती गर्मी और बिजली की लागत को देखते हुए ऊर्जा दक्ष घरेलू उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में BLDC तकनीक से लैस सीलिंग फैन उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पारंपरिक पंखों की तुलना में कम बिजली खर्च करने वाले ये फैन अब किफायती कीमतों में भी उपलब्ध हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इन्हें अपनाना आसान हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में सबसे अधिक समय तक चलने वाले उपकरणों में सीलिंग फैन प्रमुख हैं। कई घरों में पंखे दिन और रात दोनों समय लगातार संचालित होते हैं। ऐसे में बिजली की खपत को कम करने के लिए BLDC यानी ब्रशलेस डीसी मोटर तकनीक को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। यह तकनीक सामान्य मोटर की तुलना में कम ऊर्जा का उपयोग करती है और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन देने में सक्षम होती है। बाजार में अब ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं जिनकी कीमत 4500 रुपये से कम है, लेकिन इनमें प्रीमियम श्रेणी के फीचर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रिमोट कंट्रोल, मल्टी स्पीड मोड, स्मार्ट ऑपरेशन, एलईडी डिस्प्ले और ऊर्जा बचत जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यही वजह है कि उपभोक्ता पारंपरिक पंखों की जगह BLDC फैन को प्राथमिकता देने लगे हैं। इस श्रेणी में कुछ मॉडल अपनी संतुलित परफॉर्मेंस के कारण विशेष रूप से चर्चा में हैं। कम बिजली खपत के साथ शांत संचालन और बेहतर एयर डिलीवरी देने वाले फैन उन उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं जो कम खर्च में अधिक उपयोगिता चाहते हैं। इसके अलावा स्मार्ट होम तकनीक के बढ़ते चलन ने भी इस श्रेणी की मांग को मजबूत किया है। स्मार्ट फीचर्स वाले मॉडल अब मोबाइल एप्लीकेशन और वॉयस कमांड के माध्यम से भी संचालित किए जा सकते हैं। इससे उपयोगकर्ताओं को सुविधा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का अनुभव भी मिलता है। कई फैन मॉडल ऐसे हैं जिन्हें रिमोट के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है और इनमें टाइमर, स्लीप मोड तथा ऑटो सेटिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। एयरफ्लो के मामले में भी कई कंपनियों ने विशेष ध्यान दिया है। बड़े कमरों और ड्रॉइंग रूम के लिए तैयार किए गए कुछ मॉडल अधिक हवा देने की क्षमता रखते हैं। इनमें अलग-अलग मोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार फैन की गति और प्रदर्शन को नियंत्रित कर सकते हैं। इससे आरामदायक वातावरण बनाए रखने में मदद मिलती है। डिजाइन के स्तर पर भी इस श्रेणी में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आधुनिक घरों की सजावट को ध्यान में रखते हुए कई कंपनियां आकर्षक फिनिश, एलईडी डिस्प्ले और प्रीमियम लुक वाले मॉडल पेश कर रही हैं। कुछ फैन पारंपरिक डिजाइन से अलग लकड़ी जैसी फिनिश और मल्टी-ब्लेड संरचना के साथ भी उपलब्ध हैं, जो इंटीरियर की सुंदरता को बढ़ाते हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार BLDC फैन पारंपरिक सीलिंग फैन की तुलना में 50 से 65 प्रतिशत तक बिजली की बचत कर सकते हैं। लंबे समय तक उपयोग करने पर यह बचत बिजली बिल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों की ओर बढ़ते रुझान के बीच BLDC तकनीक वाले फैन घरेलू बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा बचत और स्मार्ट तकनीक की मांग बढ़ने के साथ BLDC फैन की बिक्री में और वृद्धि हो सकती है। कम कीमत, बेहतर प्रदर्शन और आधुनिक सुविधाओं का संयोजन इन्हें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक व्यावहारिक और आर्थिक विकल्प बना रहा है।

ईवी आधारित राइड-हेलिंग बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, ग्रीन एसएम ने एयरपोर्ट ट्रांसफर और कॉर्पोरेट मोबिलिटी पर लगाया दांव

नई दिल्ली । भारत के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने जा रही है। हाल ही में परिचालन शुरू करने वाली ग्रीन एसएम ने देश में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए विस्तार की नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य केवल पारंपरिक राइड-हेलिंग सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एयरपोर्ट ट्रांसफर, कॉर्पोरेट मोबिलिटी और सब्सक्रिप्शन आधारित परिवहन सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित यह प्लेटफॉर्म ऐसे समय बाजार में उतरा है जब शहरी परिवहन क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक बेड़े के साथ परिचालन करने से उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि शुरुआती चरण से ही कंपनी अपनी सेवाओं को व्यापक स्तर पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वर्तमान में कंपनी गुरुग्राम, दक्षिण दिल्ली, मध्य दिल्ली और नोएडा के कुछ क्षेत्रों में परिचालन कर रही है। इसके लिए लगभग एक हजार इलेक्ट्रिक कारों का बेड़ा तैनात किया गया है। कंपनी का दावा है कि उसके परिचालन मॉडल का केंद्र केवल यात्रियों और ड्राइवरों को जोड़ना नहीं है, बल्कि संपूर्ण सेवा गुणवत्ता, चालक प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और वाहन प्रबंधन को सीधे नियंत्रित करना है। कंपनी की आगामी रणनीति में एयरपोर्ट ट्रांसफर सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। यह सेवा उन यात्रियों को लक्षित करेगी जो नियमित रूप से हवाई यात्रा करते हैं और समयबद्ध, सुरक्षित तथा प्रीमियम परिवहन सुविधा चाहते हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट मोबिलिटी सेगमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कंपनियां अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए संगठित परिवहन सेवाओं की मांग करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट मोबिलिटी भारत के शहरी परिवहन क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ खंड बनकर उभर रहा है। आईटी, वित्तीय सेवाओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तार के साथ कर्मचारियों के सुरक्षित और नियमित आवागमन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित संगठित परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। ग्रीन एसएम अपनी प्रीमियम सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती चरण में विशेष छूट भी उपलब्ध करा रही है। इसके जरिए कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है जो पारंपरिक टैक्सी सेवाओं के साथ-साथ बेहतर यात्रा अनुभव की तलाश में रहते हैं। इससे बाजार में पहले से मौजूद प्रमुख राइड-हेलिंग कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। भविष्य की योजनाओं में इलेक्ट्रिक दोपहिया परिवहन सेवाओं को भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो कंपनी शहरी क्षेत्रों में कम दूरी की यात्रा के लिए एक नया विकल्प पेश कर सकती है। यह मॉडल पहले से कुछ एशियाई बाजारों में सफल माना जाता है और भारत में भी इसकी संभावनाएं देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर बढ़ती जागरूकता, सरकारी प्रोत्साहन और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से ऐसे प्लेटफॉर्मों को लाभ मिल सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र केवल परिवहन सेवा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी गतिशीलता के व्यापक समाधान का हिस्सा बन सकता है। ग्रीन एसएम की नई रणनीति इसी बदलते बाजार परिदृश्य में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Vastu Tips: घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के 5 आसान उपाय, बढ़ेगी सुख-शांति और सकारात्मकता

नई दिल्ली । हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख, शांति और सकारात्मकता का माहौल बना रहे। वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर का वातावरण हमारे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। जब घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है तो परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, अनावश्यक विवाद, मानसिक अशांति और कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ सरल और पारंपरिक उपाय अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सकारात्मक और ऊर्जावान बनाया जा सकता है। समुद्री नमक से करें वातावरण शुद्धवास्तु मान्यताओं के अनुसार समुद्री नमक में नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है। कई वास्तु विशेषज्ञ घर के कोनों, बाथरूम या ऐसे स्थानों पर एक कटोरी में समुद्री नमक रखने की सलाह देते हैं, जहां ऊर्जा का प्रवाह कम महसूस होता हो। मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मकता कम होती है और वातावरण अधिक संतुलित महसूस होता है। बेहतर परिणाम के लिए नमक को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। नियमित करें हनुमान चालीसा का पाठधार्मिक मान्यताओं में Hanuman Chalisa का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, चिंता और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। भगवान Hanuman को शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनके स्मरण और आराधना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। टूटी-फूटी वस्तुओं को घर से हटाएंवास्तु शास्त्र में टूटी हुई घड़ियां, क्षतिग्रस्त शीशे और अनुपयोगी वस्तुओं को नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। ऐसी चीजें घर में अव्यवस्था और मानसिक बोझ बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। इसलिए घर की नियमित सफाई करें और लंबे समय से बेकार पड़ी वस्तुओं को हटाने की आदत डालें। स्वच्छ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। घर में पर्याप्त प्रकाश बनाए रखेंवास्तु में प्रकाश को ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। जिन स्थानों पर हमेशा अंधेरा रहता है, वहां उदासी और नकारात्मकता का अनुभव अधिक हो सकता है। इसलिए घर में प्राकृतिक सूर्य प्रकाश आने दें और आवश्यकता अनुसार उचित रोशनी की व्यवस्था करें। उजाला न केवल वातावरण को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक प्रसन्नता और सक्रियता को भी बढ़ावा देता है। कपूर का धुआं करेंभारतीय परंपरा में कपूर को शुद्धिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शाम के समय कपूर जलाकर उसका धुआं पूरे घर में फैलाने से वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। कई लोग इसे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रभावी उपाय मानते हैं। कपूर की सुगंध घर के वातावरण को शांत और आध्यात्मिक बनाने में सहायक मानी जाती है। सकारात्मकता का आधार है नियमिततावास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों का प्रभाव तभी अधिक महसूस होता है जब इन्हें नियमित रूप से अपनाया जाए। घर की साफ-सफाई, धार्मिक वातावरण, पर्याप्त प्रकाश और सकारात्मक सोच मिलकर जीवन में संतुलन और शांति लाने में मदद कर सकते हैं।

‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं। अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है। अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ। उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है। अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं। अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है। भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।

मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री मधुबाला का जादू सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं था। हाल ही में सामने आए ऐतिहासिक और सिनेमाई संस्मरणों के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी इस कदर हुस्न की मल्लिका के दीवाने थे कि वे अक्सर उनसे मिलने के लिए भारत आया करते थे। यह उस दौर की बात है जब मधुबाला अपनी सर्वकालिक महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में व्यस्त थीं। उस समय जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे, बल्कि एक बेहद पढ़े-लिखे, हैंडसम और उभरते हुए युवा राजनेता के तौर पर मुंबई के दौरों पर आते-जाते रहते थे। मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्से की पृष्ठभूमि साल 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से जुड़ती है। यह वह दौर था जब एक तरफ मधुबाला और महानायक दिलीप कुमार के बीच के रिश्तों में गंभीर तल्खी आ चुकी थी और उनका सालों पुराना संबंध टूटने की कगार पर था। ठीक उसी समय जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी में मधुबाला की एंट्री हुई। भुट्टो अक्सर मुंबई प्रवास के दौरान ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर पहुंच जाते थे, जहां वे घंटों बैठकर मधुबाला को अभिनय करते हुए निहारते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी होती चली गई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, दोनों अक्सर फिल्म के सेट पर ही एक साथ दोपहर का भोजन करते थे और भुट्टो हमेशा मधुबाला के करीब रहने का बहाना ढूंढते थे। इस रिश्ते का सबसे जटिल पहलू यह था कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो मधुबाला के करीब आ रहे थे, तब वे पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी शादी शिरीन नामक महिला से हो चुकी थी। इसके बावजूद मधुबाला की जादुई शख्सियत के आकर्षण में बंधकर भुट्टो ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की परवाह नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स और उस दौर के राजनैतिक-सिनेमाई गलियारों के दावों के अनुसार, भुट्टो ने एक दिन अपने दिल की बात खुलकर मधुबाला के सामने रख दी थी और उनके समक्ष बकायदा विवाह का प्रस्ताव भी पेश किया था। वे हर हाल में मधुबाला को अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहते थे और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे। मधुबाला उस दौर में जुल्फिकार भुट्टो की बुद्धिमत्ता और उनके व्यक्तित्व का सम्मान जरूर करती थीं और उनके साथ पर्याप्त समय भी बिताती थीं, लेकिन वे एक बेहद व्यावहारिक महिला भी थीं। उन्हें इस बात का पूरा संज्ञान था कि भुट्टो न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक दूसरे देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी हैं। ऐसे किसी संवेदनशील मोड़ पर शादी जैसा बड़ा और गंभीर फैसला लेना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए सही नहीं था। यही कारण रहा कि मधुबाला ने भुट्टो के प्रेम प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया और अपने रिश्ते को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरकार उन्होंने भुट्टो से अपनी दूरियां बना लीं और इस तरह राजनीति और कला का यह अध्याय हमेशा के लिए अधूरा रह गया। इस अधूरी प्रेम कहानी के अंत के बाद दोनों की राहें पूरी तरह जुदा हो गईं। जुल्फिकार अली भुट्टो से अलग होने के तुरंत बाद साल 1960 में मधुबाला ने मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। इसके कुछ समय बाद ही वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गईं और महज 36 वर्ष की अल्पायु में साल 1969 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दूसरी ओर, जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे और देश के विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1979 में तख्तापलट के बाद महज 51 वर्ष की आयु में भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई।

गरुड़ पुराण में बताई गईं ये 5 आदतें बना सकती हैं कंगाल! धनवान व्यक्ति भी हो सकता है आर्थिक संकट का शिकार

नई दिल्ली । सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण ग्रंथों में शामिल Garuda Purana केवल मृत्यु और परलोक से जुड़े विषयों का ही वर्णन नहीं करता, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाले अनेक आचार-विचार भी सिखाता है। इसके आचार कांड में व्यक्ति के दैनिक व्यवहार, स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक आचरण को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी आदतें हैं जो घर की समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकती हैं। हालांकि इन बातों को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है, लेकिन इनमें से कई आदतें व्यवहारिक जीवन में भी अनुशासन और सकारात्मकता बनाए रखने की सीख देती हैं। सुबह देर तक सोनागरुड़ पुराण के अनुसार सूर्योदय के बाद भी लंबे समय तक सोते रहना शुभ नहीं माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि सुबह का समय सकारात्मक ऊर्जा और नए कार्यों की शुरुआत का समय होता है। देर तक सोने से आलस्य बढ़ता है और व्यक्ति के कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में जागने की सलाह दी गई है। गंदे कपड़े पहनना और स्वच्छता की अनदेखीधार्मिक ग्रंथों में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि जहां साफ-सफाई होती है, वहां सुख और समृद्धि का वास होता है। गंदे कपड़े पहनना, नियमित स्नान न करना या घर में अव्यवस्था बनाए रखना नकारात्मकता को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि घर और शरीर दोनों को स्वच्छ रखने पर जोर दिया गया है। रसोई में जूठे बर्तन छोड़नारसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात में सिंक या रसोई में जूठे बर्तन छोड़ना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे घर में नकारात्मक वातावरण बन सकता है। इसलिए सोने से पहले रसोई को साफ-सुथरा रखने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। दूसरों की निंदा और बेवजह क्रोधगरुड़ पुराण में दूसरों की बुराई करने, ईर्ष्या रखने और हर समय क्रोधित रहने की प्रवृत्ति को भी नुकसानदायक बताया गया है। ऐसी आदतें व्यक्ति के रिश्तों को प्रभावित करती हैं और घर का वातावरण अशांत बना सकती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जहां कलह और तनाव अधिक होता है, वहां सुख-शांति लंबे समय तक नहीं टिकती। नाखून चबाने जैसी अशुभ आदतेंग्रंथ में दांतों से नाखून चबाने जैसी आदतों को भी अनुचित माना गया है। इसे अनुशासनहीनता और अस्वच्छ व्यवहार का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक दृष्टिकोण से भी यह आदत स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं मानी जाती। इसलिए इसे छोड़ने की सलाह दी जाती है। जीवन में अनुशासन का महत्वगरुड़ पुराण की इन शिक्षाओं का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन में स्वच्छता, अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार को अपनाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं व्यवहारिक दृष्टि से भी ये आदतें व्यक्ति के जीवन को व्यवस्थित और सफल बनाने में मदद कर सकती हैं।