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तमिल सिनेमा में शोक की लहर, सुपरस्टार अजित कुमार की मां का चेन्नई में निधन

चेन्नई । तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता अजित कुमार के परिवार पर गहरा दुख टूट पड़ा है, क्योंकि उनकी मां मोहिनी मणि का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। परिवार के लिए यह क्षण बेहद कठिन बताया जा रहा है, और उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर फैल गई। बताया जा रहा है कि मोहिनी मणि पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं और उन्होंने शनिवार सुबह चेन्नई में अंतिम सांस ली। सूचना मिलते ही अजित कुमार, जो इस समय दुबई में मौजूद थे, तुरंत चेन्नई लौटने के लिए रवाना हो गए। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारियां चेन्नई के पलवक्कम स्थित आवास पर की जा रही हैं। हालांकि इस दुखद घटना को लेकर अभिनेता या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन परिवार में शोक का माहौल गहरा है और करीबी लोग उन्हें सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब अजित कुमार का परिवार किसी बड़े नुकसान से गुजरा है। इससे पहले वर्ष 2023 में उनके पिता पी. सुब्रमण्यम का भी निधन हो गया था। अब तीन वर्षों के भीतर माता-पिता दोनों के निधन ने परिवार को भावनात्मक रूप से गहरे संकट में डाल दिया है। यह समय उनके लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि दोनों ही माता-पिता लंबे समय से परिवार का मजबूत सहारा रहे थे। मोहिनी मणि के निधन पर फिल्म जगत से लेकर राजनीतिक क्षेत्र तक कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और नेता कमल हासन ने इसे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया और अजित कुमार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अन्य राजनीतिक हस्तियों ने भी इस दुखद समाचार पर शोक जताते हुए परिवार को इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की कामना की है। अजित कुमार हाल के समय में अपनी फिल्मों और रेसिंग गतिविधियों को लेकर सक्रिय रहे हैं। वे “विदामुयार्ची” और “गुड बैड अग्ली” जैसी फिल्मों में नजर आए थे और साथ ही अपनी रेसिंग टीम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट्स में भी भाग ले रहे थे। लेकिन इस व्यक्तिगत क्षति ने उनके जीवन के इस व्यस्त दौर को अचानक भावनात्मक रूप से प्रभावित कर दिया है।

घर से काम करने वालों के लिए स्मार्ट निवेश: 2000 रुपये से कम का गैजेट जो दर्द और थकान से दिला सकता है राहत

नई दिल्ली । डिजिटल दौर में घर से काम करने का चलन तेजी से बढ़ा है और इसके साथ ही कर्मचारियों के सामने स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियां भी उभरकर सामने आई हैं। दिनभर लैपटॉप या डेस्कटॉप के सामने बैठकर काम करने वाले लाखों लोगों को अब कलाई, उंगलियों, गर्दन और कंधों में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लगातार टाइपिंग, माउस का इस्तेमाल और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने से शरीर पर दबाव बढ़ता है, जिसका असर धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में दिखाई देने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ एर्गोनॉमिक कीबोर्ड और माउस को एक प्रभावी और व्यावहारिक समाधान मान रहे हैं। आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक कीबोर्ड और माउस मानव शरीर की प्राकृतिक बनावट को पूरी तरह ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किए जाते। परिणामस्वरूप काम करते समय हाथों और कलाइयों को असहज स्थिति में रखना पड़ता है, जिससे मांसपेशियों और नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहने पर दर्द, झुनझुनी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई मामलों में यह स्थिति रिपीटिटिव स्ट्रेन इंजरी जैसी गंभीर परेशानी का रूप भी ले सकती है, जो व्यक्ति की कार्यक्षमता और दैनिक जीवन दोनों को प्रभावित करती है। एर्गोनॉमिक कीबोर्ड और माउस विशेष रूप से ऐसी समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। इनका डिजाइन हाथों और कलाइयों की प्राकृतिक स्थिति को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे शरीर पर अनावश्यक दबाव कम पड़ता है। कई एर्गोनॉमिक कीबोर्ड घुमावदार या विभाजित डिजाइन में आते हैं, जिससे टाइपिंग करते समय हाथ अधिक आरामदायक स्थिति में रहते हैं। इसी तरह एर्गोनॉमिक माउस हथेली को बेहतर सहारा देता है और अंगूठे के लिए अतिरिक्त सपोर्ट प्रदान करता है, जिससे लंबे समय तक काम करने पर भी हाथों में थकान कम महसूस होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपकरणों का नियमित उपयोग करने से कलाइयों और उंगलियों में होने वाले दर्द में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक काम करने के दौरान शरीर पर पड़ने वाला दबाव भी कम होता है। जब हाथ और कंधे आरामदायक स्थिति में रहते हैं तो टाइपिंग और अन्य कार्य अधिक सहजता से किए जा सकते हैं, जिससे उत्पादकता में भी सुधार देखने को मिलता है। अच्छी बात यह है कि एर्गोनॉमिक कीबोर्ड और माउस अब केवल महंगे प्रीमियम उत्पादों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बाजार में 1500 से 2000 रुपये के बजट में भी कई ऐसे विकल्प उपलब्ध हैं जो सामान्य उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। खरीदारी के समय डिजाइन, कलाई के सपोर्ट, वायरलेस सुविधा, आरामदायक पकड़ और बैटरी क्षमता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सही उत्पाद का चयन लंबे समय तक उपयोग के अनुभव को बेहतर बना सकता है। हालांकि केवल उपकरण बदल लेना ही पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञ सही बैठने की मुद्रा अपनाने, नियमित अंतराल पर छोटे ब्रेक लेने और हाथों तथा कंधों की हल्की एक्सरसाइज करने की भी सलाह देते हैं। इन आदतों को एर्गोनॉमिक उपकरणों के साथ जोड़कर अपनाया जाए तो कंप्यूटर आधारित काम करने वाले लोगों को अधिक आराम, बेहतर स्वास्थ्य और लंबे समय तक कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

200MP कैमरा और अगली पीढ़ी का प्रोसेसर, OnePlus 16 को लेकर सामने आई बड़ी जानकारी

नई दिल्ली । प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली कंपनी वनप्लस के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन OnePlus 16 को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक इस डिवाइस की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालिया लीक रिपोर्ट्स ने टेक्नोलॉजी जगत में इसकी चर्चा तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि OnePlus 16 को अत्याधुनिक AI फीचर्स, हाई-एंड कैमरा सिस्टम, दमदार बैटरी और अगली पीढ़ी के प्रोसेसर के साथ पेश किया जा सकता है। यदि सामने आई जानकारियां सही साबित होती हैं, तो यह डिवाइस कंपनी के अब तक के सबसे उन्नत स्मार्टफोन्स में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार OnePlus 16 में 185Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले दिया जा सकता है। यह फीचर स्मार्टफोन इंडस्ट्री में एक नया मानक स्थापित कर सकता है, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश फ्लैगशिप डिवाइस इससे कम रिफ्रेश रेट के साथ आते हैं। फोन में फ्लैट OLED डिस्प्ले पैनल और 1.5K रेजोल्यूशन मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही बेहद पतले बेज़ल्स और प्रीमियम डिजाइन इसे आकर्षक लुक प्रदान कर सकते हैं। उच्च रिफ्रेश रेट का लाभ गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और रोजमर्रा के उपयोग में अधिक स्मूद अनुभव के रूप में देखने को मिल सकता है। कैमरा विभाग में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक स्मार्टफोन में 200 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा शामिल किया जा सकता है, जो 3x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा। यह कैमरा लंबी दूरी की तस्वीरों को बेहतर डिटेल और स्पष्टता के साथ कैप्चर करने में सक्षम हो सकता है। मोबाइल फोटोग्राफी पसंद करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह फीचर विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इसके अलावा कंपनी कैमरा सॉफ्टवेयर और इमेज प्रोसेसिंग में भी AI आधारित सुधार जोड़ सकती है, जिससे फोटो और वीडियो क्वालिटी को और बेहतर बनाया जा सके। प्रोसेसर की बात करें तो OnePlus 16 में क्वालकॉम का अगली पीढ़ी का फ्लैगशिप चिपसेट दिए जाने की संभावना है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह डिवाइस स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 6 प्रो प्रोसेसर के साथ आ सकता है, जिसकी क्लॉक स्पीड 5GHz तक पहुंच सकती है। यह चिपसेट हाई-परफॉर्मेंस गेमिंग, मल्टीटास्किंग और AI आधारित प्रोसेसिंग के लिए बेहतर क्षमता प्रदान कर सकता है। तेज प्रोसेसिंग स्पीड और ऊर्जा दक्षता के कारण उपयोगकर्ताओं को अधिक स्मूद और शक्तिशाली अनुभव मिलने की उम्मीद है। स्मार्टफोन में एक नया डेडिकेटेड AI बटन भी दिए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इस बटन के माध्यम से यूजर्स विभिन्न AI फीचर्स और स्मार्ट असिस्टेंट टूल्स तक तुरंत पहुंच सकेंगे। हालांकि इसके कार्य करने के तरीके को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। AI तकनीक पर बढ़ते फोकस को देखते हुए कंपनी इसे अपने प्रमुख आकर्षण के रूप में पेश कर सकती है। बैटरी क्षमता के मामले में भी OnePlus 16 मजबूत नजर आ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें लगभग 7000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है, जो लंबे समय तक बैकअप प्रदान करने में सक्षम होगी। इससे गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और लगातार उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को विशेष लाभ मिल सकता है। फिलहाल कंपनी ने लॉन्च टाइमलाइन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह स्मार्टफोन वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में बाजार में दस्तक दे सकता है।

हीटवेव का स्मार्टफोन पर भी असर, बढ़ती गर्मी में ओवरहीटिंग से फोन को बचाना क्यों है जरूरी

नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर जारी है और तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। कई शहरों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसका असर केवल लोगों की सेहत पर ही नहीं बल्कि उनके स्मार्टफोन पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती गर्मी के कारण मोबाइल फोन तेजी से गर्म हो रहे हैं, बैटरी अपेक्षा से अधिक तेजी से खत्म हो रही है और कई डिवाइसों में चार्जिंग तथा कैमरा संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ओवरहीटिंग की स्थिति स्मार्टफोन की कार्यक्षमता और उसकी उम्र दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। स्मार्टफोन आज दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं और उनका उपयोग संचार, बैंकिंग, मनोरंजन, फोटोग्राफी तथा कार्यालयी कार्यों तक के लिए किया जाता है। ऐसे में डिवाइस का बार-बार गर्म होना उपयोगकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बन रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक तापमान का सबसे ज्यादा असर बैटरी पर पड़ता है। लगातार गर्मी के संपर्क में रहने से बैटरी की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे फोन की बैकअप क्षमता घट जाती है और चार्जिंग चक्र भी प्रभावित होता है। ओवरहीटिंग की स्थिति में स्मार्टफोन अपने आप कुछ सुरक्षा उपाय अपनाता है। इसे तकनीकी भाषा में थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान फोन का प्रोसेसर अपनी गति कम कर देता है ताकि आंतरिक तापमान नियंत्रित किया जा सके। इसके कारण फोन की परफॉर्मेंस धीमी हो सकती है, एप्लिकेशन खुलने में अधिक समय लग सकता है और गेमिंग या वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यह व्यवस्था डिवाइस को नुकसान से बचाने के लिए बनाई गई है, लेकिन बार-बार ऐसा होना फोन के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म मौसम में फोन के उपयोग को लेकर कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। धूप में लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और यदि डिवाइस गर्म महसूस हो तो उसे तुरंत छायादार स्थान पर रखना चाहिए। अत्यधिक गर्म फोन को तुरंत चार्जिंग पर लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि चार्जिंग प्रक्रिया स्वयं अतिरिक्त गर्मी उत्पन्न करती है। इससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और डिवाइस की सुरक्षा प्रणाली चार्जिंग को स्वतः रोक सकती है। गर्मी के मौसम में वाहन के अंदर फोन छोड़ना भी जोखिम भरा हो सकता है। बंद कार का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में काफी अधिक हो जाता है, जिससे फोन की बैटरी, स्क्रीन और कैमरा सेंसर प्रभावित हो सकते हैं। कई मामलों में बैटरी फूलने, स्क्रीन पर धब्बे आने या डिवाइस के अचानक बंद हो जाने जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं। विशेषज्ञ बैटरी सेवर मोड और डार्क मोड के उपयोग की भी सलाह देते हैं। इसके अलावा कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में 5जी सेवा को अस्थायी रूप से बंद करने से भी फोन की गर्मी कम की जा सकती है। सही उपयोग और सावधानी के जरिए स्मार्टफोन को भीषण गर्मी के दुष्प्रभावों से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उसकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है।

BSNL का दमदार प्रीपेड प्लान बना ग्राहकों की पसंद, 150 दिन की वैलिडिटी के साथ रोज 2GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग

नई दिल्ली । भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और इसी बीच सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अपने लंबी वैलिडिटी वाले प्रीपेड प्लानों के कारण ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। ऐसे समय में जब अधिकांश उपभोक्ता बार-बार रिचार्ज कराने की परेशानी से बचना चाहते हैं, कंपनी का 997 रुपये वाला प्रीपेड प्लान एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आया है। यह प्लान ग्राहकों को पूरे 150 दिनों की वैलिडिटी प्रदान करता है, जिससे लगभग पांच महीने तक दोबारा रिचार्ज कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। टेलीकॉम बाजार में आज उपभोक्ताओं की प्राथमिकता केवल डेटा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे ऐसे पैकेज तलाशते हैं जिनमें डेटा, कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी सभी आवश्यक सेवाएं एक साथ उपलब्ध हों। BSNL का यह प्लान इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्लान के तहत ग्राहकों को प्रतिदिन 2GB हाई-स्पीड डेटा उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा देशभर में अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी दी जाती है। साथ ही रोजाना 100 मुफ्त SMS का लाभ भी मिलता है, जिससे यह पैकेज सामान्य और पेशेवर दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी वैलिडिटी वाले प्लान उन लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक होते हैं जो अपने मोबाइल नंबर को लगातार सक्रिय रखना चाहते हैं और बार-बार रिचार्ज की प्रक्रिया से बचना चाहते हैं। छात्रों, वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने वालों और नियमित इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए इस तरह के प्लान विशेष रूप से लाभदायक माने जाते हैं। प्रतिदिन मिलने वाला 2GB डेटा वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन मीटिंग, सोशल मीडिया उपयोग और सामान्य इंटरनेट गतिविधियों के लिए पर्याप्त माना जाता है। बाजार में मौजूद अन्य टेलीकॉम कंपनियों के समान श्रेणी के प्लानों की तुलना में BSNL का यह पैकेज वैलिडिटी के मामले में अलग पहचान बनाता है। जहां कई निजी कंपनियां लगभग समान कीमत पर सीमित अवधि की सेवा उपलब्ध कराती हैं, वहीं BSNL लंबी अवधि तक सेवाएं प्रदान कर ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधा देने का प्रयास कर रही है। यही कारण है कि बजट और वैलिडिटी दोनों को महत्व देने वाले उपभोक्ताओं के बीच इस प्लान की चर्चा बढ़ रही है। दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच BSNL लगातार अपने नेटवर्क विस्तार और ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ऐसे किफायती प्लान उपलब्ध कराना है जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा कर सकें। 997 रुपये वाला यह प्रीपेड प्लान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें लंबी वैलिडिटी के साथ डेटा, कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी सुविधाओं का संतुलित पैकेज दिया गया है। आने वाले समय में ऐसे प्लान उन ग्राहकों के लिए और अधिक आकर्षक साबित हो सकते हैं जो कम खर्च में अधिक अवधि तक निर्बाध मोबाइल सेवाओं का लाभ लेना चाहते हैं।

डेटा ज्यादा या वैलिडिटी लंबी, सिर्फ ₹1 के अंतर वाले दो प्रीपेड प्लान ने बढ़ाई ग्राहकों की दिलचस्पी

नई दिल्ली । देश के दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए-नए रिचार्ज विकल्प पेश कर रही हैं। इसी क्रम में एक प्रमुख टेलीकॉम कंपनी ने अपने प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए ₹199 का नया प्लान बाजार में उतारा है। खास बात यह है कि कंपनी का ₹198 वाला प्लान भी पहले की तरह उपलब्ध है। दोनों योजनाओं के बीच कीमत का अंतर मात्र ₹1 है, लेकिन इनके लाभ और उपयोगिता को लेकर ग्राहकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि कौन-सा प्लान किस प्रकार के उपभोक्ताओं के लिए अधिक उपयुक्त साबित हो सकता है। ₹198 वाला प्लान उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो इंटरनेट का अधिक उपयोग करते हैं और तेज नेटवर्क सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं। इस प्लान में 14 दिनों की वैधता प्रदान की जाती है। उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 2 जीबी हाई-स्पीड डेटा मिलता है, जिसके आधार पर पूरे रिचार्ज अवधि में कुल 28 जीबी डेटा का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और प्रतिदिन 100 एसएमएस की सुविधा भी दी जाती है। पात्र ग्राहकों को हाई-स्पीड 5G नेटवर्क का अतिरिक्त लाभ भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे डेटा उपयोग की सीमाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। यही वजह है कि अधिक इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के बीच यह प्लान आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दूसरी ओर नया ₹199 प्लान अलग सोच के साथ पेश किया गया है। इस योजना में ग्राहकों को प्रतिदिन 1.5 जीबी हाई-स्पीड डेटा उपलब्ध कराया जाता है। कुल मिलाकर उपभोक्ता पूरे रिचार्ज चक्र में 27 जीबी डेटा का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि डेटा की मात्रा ₹198 प्लान की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता 18 दिनों की वैधता है। यानी ग्राहकों को सिर्फ ₹1 अतिरिक्त खर्च करने पर चार दिन ज्यादा सेवा अवधि प्राप्त होती है। इस प्लान में भी अनलिमिटेड कॉलिंग और प्रतिदिन 100 एसएमएस की सुविधा शामिल है, जिससे सामान्य उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह एक संतुलित विकल्प बनकर उभरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिचार्ज योजना का चुनाव करते समय केवल कीमत नहीं बल्कि उपयोग की आवश्यकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। जिन उपभोक्ताओं के पास 5G समर्थित स्मार्टफोन है और जो वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग या अन्य डेटा-आधारित गतिविधियों का अधिक उपयोग करते हैं, उनके लिए ₹198 वाला प्लान अधिक लाभदायक माना जा सकता है। वहीं जिन ग्राहकों का दैनिक डेटा उपयोग सीमित है और जो अधिक वैधता की तलाश में रहते हैं, उनके लिए ₹199 का नया प्लान बेहतर मूल्य प्रदान करता है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां अब केवल कम कीमत पर नहीं बल्कि अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार करने पर जोर दे रही हैं। यही कारण है कि मात्र ₹1 के अंतर वाले ये दोनों प्लान अलग-अलग उपभोक्ता वर्ग को आकर्षित कर रहे हैं। ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने डेटा उपयोग, नेटवर्क आवश्यकता और वैधता की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प का चयन करें, ताकि उन्हें अपने खर्च का अधिकतम लाभ मिल सके।

CM MOHAN YADAV KATRA VISIT: CM मोहन यादव बोले- महाकाल और भोजशाला में लागू करेंगे वैष्णो देवी जैसा मॉडल

CM MOHAN YADAV KATRA VISIT

CM MOHAN YADAV KATRA VISIT:  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जम्मू-कश्मीर के कटरा पहुंचे, जहां उन्होंने माता वैष्णो देवी के दर्शन किए और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अधिकारीयों द्वारा वैष्णो देवी मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। MP HIGH COURT ACTION: कागजों में दो बार किया रिटायर, कोर्ट पहुंचा चौकीदार तो खुली विभाग की पोल महाकाल, ओंकारेश्वर और भोजशाला पर रहेगा फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर देवस्थान और धार की भोजशाला में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। हाल ही में भोजशाला को मां वाग्देवी मंदिर की मान्यता मिलने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं को मजबूत करने पर सरकार का विशेष ध्यान है । MP INDUSTRIAL HUB: CM मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश बना इंडस्ट्रियल हब, 48 नए औद्योगिक पार्क बनाने पर फोकस श्राइन बोर्ड की भीड़ प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कटरा दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की भीड़ प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, यात्री सुविधाओं और डिजिटल प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य यह समझना है कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन कैसे करवाया जाए। आंधी-बारिश के असर से विदिशा का मौसम सुहाना, तापमान में आई गिरावट धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार चाहती है कि महाकाल, ओंकारेश्वर और भोजशाला देश के सबसे व्यवस्थित और आकर्षक धार्मिक स्थलों में शामिल हों।

चालान से लेकर अनुभव तक होगी पूरी जांच, ट्रक ड्राइवरों के लिए रेटिंग सिस्टम पर सरकार का विचार

नई दिल्ली । देश में वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कुशल चालकों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इस योजना के तहत ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए एक विशेष रेटिंग आधारित ‘ड्राइवर इंडेक्स’ विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य चालकों के कौशल, अनुभव और सड़क सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर उनकी रैंकिंग तय करना है, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर कार्य कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस रेटिंग प्रणाली में चालक के पेशेवर रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। इनमें ड्राइविंग अनुभव, लाइसेंस की वैधता अवधि, यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े चालान, बीमा संबंधी जानकारी और सड़क सुरक्षा मानकों के पालन जैसे बिंदु प्रमुख होंगे। इन सभी मापदंडों के आधार पर प्रत्येक चालक का एक समग्र मूल्यांकन तैयार किया जाएगा, जिससे उसके कौशल और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रणाली लागू होने से परिवहन कंपनियों को योग्य और अनुभवी चालकों की पहचान करने में आसानी होगी। वर्तमान में कई कंपनियां चालक चयन के दौरान सीमित सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेती हैं, जिसके कारण कई बार अपेक्षित स्तर के चालक उपलब्ध नहीं हो पाते। नई व्यवस्था इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है। सरकार इस परियोजना के तकनीकी और विश्लेषणात्मक पहलुओं पर भी काम कर रही है। इसके लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की सहायता ली जा रही है ताकि एक वैज्ञानिक और निष्पक्ष रेटिंग मॉडल तैयार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस सूचकांक की सफलता उसके मापदंडों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो भविष्य में यह वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में भर्ती का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। देश में कुशल चालकों की कमी लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के बावजूद प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार पहले भी चालक प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास पर जोर दे चुकी है। इसके तहत देशभर में बड़ी संख्या में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी ताकि पेशेवर और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा दिया जा सके। विशेष रूप से भारी और आधुनिक वाणिज्यिक वाहनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित चालकों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक ट्रकों और उन्नत परिवहन प्रणालियों के विस्तार को देखते हुए चालक प्रशिक्षण और मूल्यांकन की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। सरकार का मानना है कि रेटिंग आधारित ड्राइवर इंडेक्स न केवल योग्य चालकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा, परिवहन दक्षता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

IIP का नया ढांचा: 2022-23 आधार वर्ष से औद्योगिक आंकड़ों को मिलेगी नई दिशा

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय देश की अर्थव्यवस्था का आकलन करने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण संकेतकों की समीक्षा कर रहा है। उसने राष्ट्रीय लेखा और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के लिए नई श्रृंखला मुहैया करा दी हैं। अगले सप्ताह वह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के लिए नई श्रृंखला जारी करने वाला है। ये महत्त्वपूर्ण बदलाव हैं क्योंकि नए सूचकांक अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों को दर्शाते हैं। आईआईपी के आधार वर्ष को 2011-12 से हटाकर 2022-23 किया जा रहा है। पिछले एक दशक में देश में औद्योगिक गतिविधियां बहुत अधिक बदली हैं और नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डिजिटल तकनीक और अहम खनिजों के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है।मंत्रालय के मुताबिक नई श्रृंखला में दुर्लभ खनिज, लघु खनिज, गैस और बिजली आपूर्ति, गंदे जल और कचरे का प्रबंधन आदि शामिल हैं। केरोसिन, सिलाई मशीन,फ्लूरोसेंट ट्यूब्स आदि को इससे बाहर कर दिया गया है। कुल वस्तुओं की संख्या 407 से बढ़ाकर 463 कर दी गई है। विनिर्माण में ही संख्या 405 से बढ़कर 455 कर दी गई है। 64 वस्तु समूह हटाए गए हैं और 120 नए शामिल कर दिए गए हैं। बढ़ी हुई बास्केट सूचकांक को नीति निर्माताओं, कारोबारों और निवेशकों के लिए अधिक प्रासांगिक बनाएगी। इस कवायद के लिए गठित तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने औद्योगिक मापन को आधुनिक बनाने का प्रयास भी किया। इसमें पद्धतियों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाएं शामिल की गईं। उन्नत अर्थव्यवस्थाएं तेजी से ऐसी गतिशील औद्योगिक मापन प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं, जिनमें भार और उत्पादन के पैटर्न लगातार अपडेट होते रहते हैं।टीएसी की रिपोर्ट में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) तथा संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग की औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, 2010 से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों का उल्लेख किया गया है जो कठोर तयशुदा आधार प्रणालियों के बजाय श्रृंखला से जुड़े सूचकांकों का समर्थन करती हैं। ऐसी प्रणालियों में प्रतिस्थापन पर पक्षपात कम होता है और औद्योगिक भार को पुराना नहीं होने पाता, विशेषकर तब जब पुराने उद्योगों का पतन होता है और नए उद्योग तेजी से उभरते हैं। फिर भी इस बड़े बदलाव ने कुछ खामियों को उजागर किया है। भारत की सांख्यिकीय प्रणाली अब भी विलंबित सर्वेक्षणों, राज्यों से असमान सूचना, पुरानी प्रशासनिक प्रणालियों और कमजोर डिजिटल डेटा प्रणालियों पर निर्भर हैं। विनिर्माण का बड़ा हिस्सा अब भी असंगठित क्षेत्र में है, जहां उत्पादन छोटे पैमाने पर तथा अनौपचारिक होता है और जिसकी निगरानी करना कठिन होता है। हालांकि टीएसी ने असंगठित क्षेत्र के लिए सूचकांक बनाने की दूरदर्शी सिफारिश की है लेकिन देखना होगा कि यह लागू कैसे किया जाए। इसके अलावा मशीनरी और उपकरणों की मरम्मत तथा स्थापना जैसी गतिविधियां अब भी कठिन हैं क्योंकि वे मुख्यतः सेवा उन्मुख हैं और विश्वसनीय मापदंड विकसित करने की आवश्यकता होती है जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का समावेश उभरती प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भारत की महत्त्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। यद्यपि भारत के पास विश्व के तीसरे सबसे बड़े दुर्लभ पृथ्वी खनिज भंडार हैं, लेकिन देश में प्रसंस्करण क्षमता अब भी सीमित है। मूल्य अपस्फीतक मूल्य-आधारित उत्पादन आंकड़ों को मात्रा आधारित उत्पादन अनुमान में बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस संदर्भ में उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की अनुपस्थिति एक बड़ी कमी बनी हुई है। यही वजह है कि संशोधित आईआईपी श्रृंखला को अधिक आधुनिक औद्योगिक मापन प्रणाली की ओर बढ़ना माना जा सकता है। हमारी फौरी प्राथमिकता डेटा की गुणवत्ता में सुधार करना, डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणालियों को मजबूत करना, अपस्फीतकों को परिष्कृत करना और असंगठित तथा खंडित क्षेत्रों को पकड़ने के लिए बेहतर तरीकों का विकास करना होना चाहिए। निरंतर संस्थागत सुधारों और पद्धतिगत सुधारों के साथ आईआईपी भारत के औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन का अधिक भरोसेमंद संकेतक बन सकता है।

देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है, और अधिकांश नदी घाटियाँ गंभीर जल संकट की स्थिति के करीब पहुँचती जा रही हैं।

भीषण गर्मी और लू की वजह से पूरे भारत में जल आपूर्ति की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और रात में भी तापमान लगातार ऊंचा रहने से पानी तथा बिजली की मांग बढ़ रही है। सुपर अल नीनो के कारण बारिश में व्यवधान की आशंका से समस्या और गंभीर हो सकती है। केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जिन 166 जलाशयों पर नजर रखी जा रही है, उनमें 30 अप्रैल को मौजूद 71.08 अरब घन मीटर पानी 14 मई तक घटकर 63.23 अरब घन मीटर ही रह गया है। यानी सिर्फ दो हफ्तों में लगभग 8 अरब घन मीटर की गिरावट आई है। तेरह प्रमुख जलाशयों में जल स्तर अपने सामान्य भंडारण स्तर के आधे से भी कम रह गया है। यह समस्या तब आ रही है, जब भारत में पानी का बहुत अधिक इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें एथनॉल मिश्रण, डेटा सेंटर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का ढांचा और विनिर्माण शामिल हैं। इनमें से कई निवेश पानी के संकट वाले क्षेत्रों में हो रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक बार-बार सूखे और भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से जूझते रहे हैं मगर गन्ने की खेती और एथनॉल उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जबकि गन्ने की खेती में पानी की सबसे ज्यादा खपत होती है। इसी तरह अक्सर शहरी जल संकट से जूझने वाले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक डेटा सेंटर के बड़े अड्डे बनते जा रहे हैं। हाइपरस्केल डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। मुद्दा यह नहीं है कि इन क्षेत्रों का विस्तार होना चाहिए या नहीं, मुद्दा यह है कि औद्योगिक और ऊर्जा नीतियां जल विज्ञान संबंधी हकीकत के मुताबिक हैं या नहीं। औद्योगिक स्थलों के चयन, शहरी नियोजन और कृषि प्रोत्साहन में जल की उपलब्धता प्रमुख मानदंड होना चाहिए। इस व्यापक संकट के परिणाम भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक लिफ्ट नहर के बंद होने से कई गांव इकलौते हैंडपंप पर निर्भर हो गए हैं। दिल्ली में यमुना में पानी कम होने और प्रदूषण बढ़ने से जल शोधन क्षमता कम हो गई है, जबकि गर्मियों के महीनों में पानी की मांग बढ़ जाती है, इसलिए शहर को पड़ोसी राज्यों से मदद मांगनी पड़ रही है। वर्ष 2024 के बेंगलूरु जल संकट ने यह दिखाया कि भूजल भंडार कम होने, झीलों पर अतिक्रमण होने और वर्षा जल संचयन नियमों का ठीक से पालन न होने पर शहरी जल व्यवस्था कितनी तेजी से चरमरा सकती है। यह संकट अब केवल वर्षा की कमी तक सीमित नहीं है। तापमान बढ़ने से ज्यादा पानी भाप बनकर उड़ रहा है और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। भारत लगभग 251 अरब घन मीटर सालाना भूजल दोहन पहले से करता आ रहा है, जो विश्व में कुल दोहन का लगभग एक चौथाई है। 1950 में यहां हर व्यक्ति के लिए लगभग 5,000 घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो 2021 में घटकर 1,486 घन मीटर रह गई है, जिसमें और भी कमी आने का अनुमान है। ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद के शोध से पता चलता है कि भारत के 15 प्रमुख नदी बेसिनों में से 11 गंभीर जल संकट के कगार पर हैं। जल की कमी और संकट के व्यापक आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं। खाद्य उत्पादन पर इसका असर पड़ा तो महंगाई तेजी से बढ़ सकती है, जिसके व्यापक नीतिगत प्रभाव हो सकते हैं। दुर्भाग्यवश स्थानीय निकाय पेयजल संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए ठीक से तैयार नहीं हैं। तेजी से शहरीकरण होने के बाद भी अधिकतर शहरों में अभी व्यापक जल सुरक्षा योजनाएं नहीं हैं। नगरपालिकाएं भूजल दोहन, आपात स्थितियों के दौरान टैंकरों द्वारा आपूर्ति और संकट में अस्थायी प्रतिक्रियाओं पर ज्यादा निर्भर हैं। संपादकीय