कितने किलोमीटर चलती है हाइब्रिड कार की बैटरी? खरीदने से पहले जरूर पढ़ें

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और बेहतर माइलेज की मांग के बीच Hybrid Cars तेजी से लोगों की पसंद बनती जा रही हैं। हालांकि नई Hybrid Car खरीदने से पहले ज्यादातर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि इसकी बैटरी आखिर कितने समय या कितने किलोमीटर तक साथ देती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों और हजारों Hybrid Cars के डेटा ने इस चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सही इस्तेमाल और नियमित सर्विसिंग के साथ Hybrid कारों की बैटरी 2 लाख से 3 लाख किलोमीटर तक आराम से चल सकती है। करीब 28,500 से ज्यादा Hybrid Cars के डेटा और टेस्ट में यह बात सामने आई कि ज्यादातर बैटरियां उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा प्रदर्शन दे रही हैं। खासतौर पर टोयोटा और होंडा जैसी कंपनियों की Hybrid तकनीक को काफी भरोसेमंद माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार Hybrid Cars में बैटरी पर लगातार पूरा दबाव नहीं पड़ता, क्योंकि इसमें पेट्रोल इंजन और बैटरी दोनों मिलकर काम करते हैं। शहर के ट्रैफिक में यह सिस्टम बैटरी और इंजन के बीच बेहतर संतुलन बनाता है, जिससे बैटरी की लाइफ लंबी होती है। ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि Hybrid बैटरी को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। नियमित सर्विसिंग और बैटरी हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी है। इसके अलावा कार को लंबे समय तक तेज धूप और अत्यधिक गर्मी में पार्क करने से बचना चाहिए क्योंकि गर्म तापमान बैटरी पर असर डाल सकता है। कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी बैटरी की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखता है। वहीं बहुत ज्यादा हार्ड ड्राइविंग और अचानक तेज एक्सीलरेशन बैटरी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। आजकल कई ऑटो कंपनियां Hybrid बैटरी पर 8 साल तक की वारंटी दे रही हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। इससे बैटरी बदलने को लेकर लोगों की चिंता भी काफी कम हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि Hybrid Cars अब सिर्फ बेहतर माइलेज ही नहीं बल्कि लंबी बैटरी लाइफ और कम मेंटेनेंस लागत की वजह से भी लोकप्रिय हो रही हैं। ऐसे में अगर आप नई Hybrid Car खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बैटरी लाइफ को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
नितिन गडकरी ने पेश की नई कुकिंग तकनीक, इथेनॉल स्टोव से घटेगा गैस खर्च

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा का केंद्र बन गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल आधारित स्टोव की तकनीक पेश की, जिसे भविष्य में एलपीजी का सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है। इस नई तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह चूल्हा इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलता है। दावा किया गया है कि इससे निकलने वाली फ्लेम गैस चूल्हे की तरह साफ और स्थिर होती है, जबकि धुआं बेहद कम निकलता है। इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह भारतीय है और इसे घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस स्टोव में करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाकर इथेनॉल का मिश्रण तैयार किया जाता है। यह मिश्रण स्टोव के फ्यूल टैंक में डाला जाता है और स्टार्ट होते ही यह साफ लौ पैदा कर खाना पकाने में इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे घरेलू रसोई के खर्च में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि यह तकनीक न केवल खाना पकाने का खर्च कम करेगी बल्कि विदेशी गैस आयात पर निर्भरता भी घटाएगी। उन्होंने कहा कि इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा क्योंकि यह ईंधन कृषि आधारित उत्पादों से तैयार होता है। इथेनॉल स्टोव को लेकर सरकार का दावा है कि यह लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में ज्यादा स्वच्छ विकल्प है। इससे घर के अंदर होने वाला धुआं और प्रदूषण भी कम होगा। फिलहाल यह तकनीक परीक्षण और मंजूरी के चरण में है। अभी इसकी कीमत और बाजार में लॉन्चिंग की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में यह घरेलू और व्यावसायिक रसोई दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
क्या आम आदमी विकास से बाहर छूट रहा है?

-ललित गर्गस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। शिक्षा को व्यक्ति निर्माण और चिकित्सा को जीवन रक्षा का माध्यम माना गया था। लेकिन स्वतंत्रता के लगभग आठ दशकों बाद स्थिति चिंताजनक प्रश्न खड़े करती है कि क्या ये दोनों क्षेत्र अपने मूल उद्देश्य से भटककर व्यवसाय और बाजार के अधीन नहीं हो गए हैं? आज शिक्षा और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में जो विसंगतियां दिखाई देती हैं, वे केवल व्यवस्थागत संकट नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं। एक ओर शिक्षा व्यवस्था परीक्षा, अंकों और प्रतिस्पर्धा की आर्थिक मशीन बन गई है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा सेवा लाभ-हानि के गणित में उलझती दिखाई देती है। इन दोनों क्षेत्रों की बढ़ती व्यावसायिकता ने आम आदमी को सबसे अधिक प्रभावित किया है। शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं था। शिक्षा अब डिग्री, नौकरी और प्रतिस्पर्धा तक सीमित होती दिखाई देती है। शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं का सबसे भयावह चेहरा कोटा, सीकर और अन्य कोचिंग एवं शिक्षा केंद्रों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है। कोटा, जो कभी देश की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र माना जाता था, अब विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, अकेलेपन और असफलता के भय के कारण आत्महत्या की घटनाओं से लगातार चर्चा में रहा है। कोटा, सीकर तथा अन्य कोचिंग नगरों में पिछले वर्षों में अनेक विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर किया है। राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या की घटना इसी विडंबना का उदाहरण है। परीक्षा रद्द होने से उत्पन्न अनिश्चितता और मानसिक तनाव ने एक संभावनाशील जीवन समाप्त कर दिया। यह घटना अकेली नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2024 में 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। औसतन हर 36 मिनट में एक विद्यार्थी जीवन समाप्त कर रहा है। यह केवल व्यक्तिगत विफलता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता है।शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं का सबसे भयावह चेहरा कोटा, सीकर और अन्य कोचिंग एवं शिक्षा केंद्रों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है। कोटा, जो कभी देश की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र माना जाता था, अब विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, अकेलेपन और असफलता के भय के कारण आत्महत्या की घटनाओं से लगातार चर्चा में रहा है। कोटा, सीकर तथा अन्य कोचिंग नगरों में पिछले वर्षों में अनेक विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर किया है। राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या की घटना इसी विडंबना का उदाहरण है। परीक्षा रद्द होने से उत्पन्न अनिश्चितता और मानसिक तनाव ने एक संभावनाशील जीवन समाप्त कर दिया। यह घटना अकेली नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2024 में 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। औसतन हर 36 मिनट में एक विद्यार्थी जीवन समाप्त कर रहा है। यह केवल व्यक्तिगत विफलता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता है। दूसरी ओर नीट, नेट, प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं तथा अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों में विवाद और अनिश्चितता की स्थितियों ने विद्यार्थियों में गहरा असंतोष और अविश्वास पैदा किया है। वर्षों की तैयारी करने वाले छात्र जब परीक्षा प्रणाली को ही अविश्वसनीय पाते हैं तो उनमें निराशा और मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। आज परीक्षा प्रणाली अविश्वसनीय होती जा रही है। प्रश्नपत्र लीक होना, परीक्षाओं का रद्द होना, मूल्यांकन विवाद, शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी, पीएचडी प्रक्रियाओं का औपचारिक बन जाना और कोचिंग संस्कृति का बढ़ना शिक्षा के बाजारीकरण की तस्वीर प्रस्तुत करता है। शिक्षा अब ज्ञान से अधिक निवेश और प्रतिफल का विषय बनती जा रही है। धीरे-धीरे शिक्षा सेवा से व्यवसाय में बदलती गई। बड़े निजी विद्यालय, कोचिंग संस्थान और विश्वविद्यालय आज करोड़ों के उद्योग बन चुके हैं। डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के सपनों का ऐसा व्यापार खड़ा हुआ जिसमें अभिभावक आर्थिक रूप से टूटने लगे। आज एक सामान्य परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जीवन भर की बचत खर्च करने को विवश है। विद्यालयों की ऊंची फीस, निजी कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा की महंगी व्यवस्था ने शिक्षा को आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया है। इसी प्रकार चिकित्सा क्षेत्र की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। चिकित्सा को कभी सेवा का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन आज निजी चिकित्सालयों की बढ़ती संख्या और उनकी व्यावसायिक प्रवृत्ति ने आम नागरिक को संकट में डाल दिया है। इलाज इतना महंगा हो गया है कि अनेक परिवार बीमारी के कारण आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। निजी अस्पतालों में उपचार, जांच, आईसीयू, दवाओं का खर्च और नकली दवाओं में जीवन समाप्त होने की घटनाएं लगातार बढ़ी है। अनेक मामलों में अनावश्यक परीक्षण, अत्यधिक शुल्क और व्यावसायिक दृष्टिकोण की शिकायतें सामने आती रहती हैं। चिकित्सा सेवा का उद्देश्य रोगी को राहत देना था, लेकिन कई स्थानों पर वह लाभ कमाने की प्रणाली में बदलती दिखाई देती है। जगह-जगह खुले निजी अस्पताल और शिक्षण संस्थान एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा में उतर आए हैं। लेकिन यह प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता की अपेक्षा लाभ कमाने की अधिक दिखाई देती है। परिणाम यह हुआ कि शिक्षा और चिकित्सा दोनों ही सामान्य नागरिक की आर्थिक क्षमता से बाहर जाने लगी हैं। इन परिस्थितियों का एक सामाजिक दुष्परिणाम भी सामने आया है। आर्थिक दबाव, भविष्य की अनिश्चितता, शिक्षा का तनाव, महंगी चिकित्सा और रोजगार संकट के कारण अवसाद, मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। युवा पीढ़ी उपलब्धियों के दबाव में टूट रही है, जबकि परिवार आर्थिक बोझ से जूझ रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय को अधिक सशक्त, उत्तरदायी और कठोर भूमिका निभाते हुए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और सुरक्षित बनाना होगा। इसी प्रकार चिकित्सा क्षेत्र में देशभर में स्थापित हुए नए एम्स संस्थानों एवं उच्च चिकित्सा केंद्रों का लाभ वास्तव में आम नागरिक तक सरल, सस्ती और सुलभ व्यवस्था के रूप में
सात्विकता में ही मनुष्य जीवन की श्रेष्ठता

-सुरेश गोयल धूप वाला भारतीय संस्कृति सदैव उच्च जीवन मूल्यों, नैतिक आदर्शों और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित रही है। हमारे ऋषि-मुनियों ने जीवन को केवल भौतिक सुखों तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे आत्मिक उन्नति और मानव कल्याण का माध्यम बताया। यही कारण है कि भारतीय जीवन पद्धति में “सात्विकता” को विशेष महत्व दिया गया। आज आधुनिकता और पाश्चात्य प्रभाव के कारण मनुष्य का जीवन भले ही सुविधासंपन्न हो गया हो, किंतु मानसिक शांति, संतोष और आत्मिक सुख उससे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में सात्विक जीवन शैली ही मनुष्य को वास्तविक श्रेष्ठता प्रदान कर सकती है। सात्विकता का अर्थ केवल भोजन की शुद्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के आहार, विचार और व्यवहार की पवित्रता से जुड़ी हुई है। सात्विक व्यक्ति सत्य, संतोष, विनम्रता, करुणा और परोपकार जैसे गुणों को अपने जीवन में अपनाता है। उसके भीतर ईर्ष्या, द्वेष, छल-कपट और दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं होता। वह स्वयं के साथ-साथ समाज के कल्याण की भावना रखता है। सात्विक जीवन का सबसे प्रमुख आधार शुद्ध और सादा आहार है। भारतीय आयुर्वेद में कहा गया है कि जैसा अन्न होता है, वैसा ही मन बनता है। इसलिए सात्विक भोजन ऐसा माना गया है जो प्रकृति से प्राप्त, ताजा, शाकाहारी और सुपाच्य हो। मौसमी फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, दूध, दही और मेवे शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मन को भी शांत और निर्मल बनाते हैं। इसके विपरीत अत्यधिक मसालेदार, तामसिक और बासी भोजन मनुष्य में आलस्य, क्रोध और असंयम को बढ़ाता है। आज अनेक बीमारियों का मुख्य कारण भी असंतुलित खानपान ही बन चुका है। यदि मनुष्य सात्विक आहार अपनाए तो उसका शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रह सकता है। सात्विकता का दूसरा महत्वपूर्ण आधार सत्य और अहिंसा है। हमारे धर्मग्रंथों में सत्य को ही परम धर्म बताया गया है। सत्य बोलने वाला व्यक्ति आत्मविश्वास और सम्मान प्राप्त करता है। इसी प्रकार अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और वाणी से भी किसी को कष्ट न पहुंचाना है। मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार और सभी जीवों के प्रति दया का भाव सात्विक जीवन की पहचान हैं। आज समाज में बढ़ती कटुता, तनाव और विवादों का एक बड़ा कारण सहनशीलता और संवेदनशीलता की कमी है। यदि मनुष्य सात्विक गुणों को अपनाए तो परिवार और समाज दोनों में सौहार्द का वातावरण बन सकता है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति के साथ तालमेल को भी सात्विक जीवन का आवश्यक अंग माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त में उठना, योग-प्राणायाम करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीना मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। आधुनिक जीवन शैली में देर रात तक जागना, कृत्रिम साधनों पर निर्भरता और भागदौड़ भरा जीवन मनुष्य को तनाव और अवसाद की ओर ले जा रहा है। इसके विपरीत सात्विक जीवन प्रकृति से जुड़कर मन और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। सात्विकता का सबसे बड़ा गुण संतोष है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे की दौड़ में इतना उलझ गया है कि उसके जीवन से शांति समाप्त होती जा रही है। अधिक पाने की लालसा ने उसे असंतुष्ट और तनावग्रस्त बना दिया है। जबकि सात्विक जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक सुख बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि और मानसिक शांति में है। संतोषी व्यक्ति कम साधनों में भी प्रसन्न रहता है और दूसरों की सफलता से ईर्ष्या नहीं करता।सात्विकता का सबसे बड़ा गुण संतोष है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे की दौड़ में इतना उलझ गया है कि उसके जीवन से शांति समाप्त होती जा रही है। अधिक पाने की लालसा ने उसे असंतुष्ट और तनावग्रस्त बना दिया है। जबकि सात्विक जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक सुख बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि और मानसिक शांति में है। संतोषी व्यक्ति कम साधनों में भी प्रसन्न रहता है और दूसरों की सफलता से ईर्ष्या नहीं करता। वास्तव में सात्विकता केवल एक जीवन शैली नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। यह मनुष्य को संयम, सदाचार और आत्मिक शांति की ओर ले जाती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अंधाधुंध पाश्चात्य जीवन शैली की नकल करने के बजाय अपनी भारतीय संस्कृति के सात्विक मूल्यों को अपनाएं। जब मनुष्य का आहार शुद्ध, विचार सकारात्मक और व्यवहार विनम्र होगा, तभी समाज में शांति, प्रेम और मानवता का विस्तार संभव हो सकेगा। निस्संदेह सात्विकता में ही मनुष्य जीवन की वास्तविक श्रेष्ठता निहित है।
Hast Rekha: हथेली के सूर्य पर्वत पर हों ये 5 निशान तो मिलती है खूब प्रसिद्धि, धन-दौलत की भी नहीं रहती कमी

नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं और पर्वतों का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें सूर्य पर्वत को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह पर्वत अनामिका यानी रिंग फिंगर के नीचे स्थित होता है और व्यक्ति की प्रसिद्धि, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, सरकारी सफलता और कला के क्षेत्र में उपलब्धियों का संकेत देता है। हस्तरेखा विशेषज्ञों के मुताबिक सूर्य पर्वत पर बने कुछ खास चिह्न जीवन में बड़ी सफलता और आर्थिक समृद्धि का संकेत माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत उभरा हुआ और साफ दिखाई देता है तो यह शुभ माना जाता है। वहीं इस पर्वत पर मौजूद कुछ विशेष निशान भविष्य के कई गहरे राज खोलते हैं। आइए जानते हैं सूर्य पर्वत पर बनने वाले उन 5 शुभ चिह्नों के बारे में जो व्यक्ति को प्रसिद्धि और धन लाभ दिला सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं वर्ग यानी चौकोर निशान की। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार सूर्य पर्वत पर वर्ग का निशान होना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे लोग समाज में अलग पहचान बनाते हैं और उन्हें खूब सम्मान मिलता है। ये लोग सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं और सरकारी क्षेत्र से भी लाभ प्राप्त करते हैं। इनका जीवन आमतौर पर सुख-सुविधाओं से भरपूर रहता है। सूर्य पर्वत पर वृत्त यानी गोल निशान भी खास महत्व रखता है। यह चिह्न बहुत कम लोगों की हथेली में दिखाई देता है। जिन लोगों के हाथ में यह निशान होता है, उन्हें जीवन में विदेश यात्रा के कई अवसर मिलते हैं। साथ ही ऐसे लोग मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल करते हैं और धीरे-धीरे उनका भाग्योदय होता है। त्रिकोण का निशान भी सूर्य पर्वत पर अत्यंत शुभ माना गया है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की हथेली में यह चिह्न होता है, वे कला, संगीत, अभिनय या रचनात्मक क्षेत्रों में खूब नाम कमाते हैं। उनकी प्रतिभा लोगों को आकर्षित करती है और समाज में उनकी विशेष पहचान बनती है। इसके अलावा सूर्य पर्वत पर नक्षत्र जैसा चिह्न होना भी बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे लोगों के सरकारी नौकरी पाने की संभावना काफी मजबूत मानी जाती है। ये लोग प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र में ऊंचे पद तक पहुंच सकते हैं। साथ ही इन्हें जीवन में धन, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान भी भरपूर मिलता है। हस्तरेखा शास्त्र में सूर्य पर्वत पर कई सीधी रेखाओं का होना भी शुभ संकेत माना गया है। यह व्यक्ति के मजबूत करियर और मेहनत से सफलता पाने की ओर इशारा करता है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करते हैं। हालांकि हस्तरेखा शास्त्र को आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग हस्तरेखा के जरिए अपने भविष्य और व्यक्तित्व को समझने की कोशिश करते हैं।
MP WHEAT PROCUREMNET:103 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी, MP ने रचा नया इतिहास; CM बोले- किसानों की मेहनत रंग लाई

HIGHLIGHTS: CM मोहन यादव ने सावरकर जयंती पर किया नमन सावरकर को बताया राष्ट्रभक्ति का प्रतीक MP ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य किया पार 13.36 लाख किसानों से खरीदा गेहूं सरकार बोली- जो कहा, सो किया MP WHEAT PROCUREMNET: भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों ने इस बार गेहूं उत्पादन और उपार्जन में नया इतिहास रच दिया है। बता दें कि प्रदेश में अब तक 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा जा चुका है। जिसको लेकर सरकार का कहना है कि इस बार तय लक्ष्य से भी ज्यादा खरीदी हुई है, इसे किसानों की मेहनत, बेहतर उत्पादन और मजबूत व्यवस्थाओं का परिणाम माना जा रहा है। MP Wheat Procurement : मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू, 10 अप्रैल से होगी खरीदी किसानो में खुशी की लहर प्रदेश के कई किसानों ने इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार होने की बात कही, समय पर खरीदी और भुगतान मिलने से किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सरकार का मानना है खरीदी केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश की गई, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। जिसके चलते बड़ी संख्या में किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचकर फायदा उठाया। MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई मोहन सरकार किसानों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरी तरह से किसानों का हित में है। साथ ही उन्होंने कहा कि मजबूत इरादों और सही नीतियों की वजह से मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य पार किया है। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाएं देना ही हमारी प्राथमिकता है। Friday Release: 29 मई को एंटरटेनमेंट का महाधमाका, 14 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज; थिएटर्स में 9 और OTT पर 5 की एंट्री खेती को और मजबूत बनाने पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने की तैयारी में है। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने, खरीदी प्रक्रिया को आसान बनाने और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर है। साथ ही उन्होंने का कहा कि ये किसानों की महनत का नतीजा है जो प्रदेश आज गेहूं उपार्जन में नंबर वन है।
Netflix समेत कई प्लेटफॉर्म पर जून में आएगा एंटरटेनमेंट का तूफान

नई दिल्ली। जून 2026 ओटीटी दर्शकों के लिए जबरदस्त एंटरटेनमेंट लेकर आने वाला है। इस महीने नेटफ्लिक्स, सोनी लिव, जियो हॉटस्टार और जी5 जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार दर्शकों को फैमिली ड्रामा, हॉरर, क्राइम थ्रिलर, स्पाई एक्शन और रोमांटिक ड्रामा जैसे हर तरह के कंटेंट का मजा मिलने वाला है। सबसे ज्यादा चर्चा नेटफ्लिक्स की रिलीज को लेकर है क्योंकि जून में अकेले नेटफ्लिक्स पर 8 नई फिल्में और सीरीज दस्तक देने वाली हैं। वहीं सोनी लिव भी अपने लोकप्रिय शो ‘गुल्लक’ के नए सीजन के साथ दर्शकों को भावुक और मनोरंजक सफर पर ले जाने के लिए तैयार है। सोनी लिव पर 5 जून को रिलीज हो रहा ‘गुल्लक सीजन 5’ इस महीने की सबसे चर्चित रिलीज में शामिल है। मिश्रा परिवार की छोटी-छोटी खुशियों और संघर्षों को दिखाने वाला यह शो पहले से ही दर्शकों का पसंदीदा रहा है। इस बार कहानी में परिवार के रिश्तों में आए बदलाव और बच्चों के बड़े होने के साथ पैदा हो रही दूरियों को दिखाया जाएगा। माइथोलॉजी पसंद करने वालों के लिए ‘हस्तिनापुर के वीर’ खास रहने वाला है। 2 जून को रिलीज होने वाली इस सीरीज में पांडवों के बचपन और उनके संघर्षों की कहानी दिखाई जाएगी। वहीं डांस रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ भी 6 जून से दर्शकों का मनोरंजन करेगा। नेटफ्लिक्स इस महीने क्राइम और हॉरर कंटेंट से भरपूर रहने वाला है। ‘लॉ एंड ऑर्डर स्पेशल विक्टिम्स यूनिट’ जैसी लोकप्रिय क्राइम सीरीज 1 जून को प्लेटफॉर्म पर आ रही है। वहीं माधुरी दीक्षित की डार्क क्राइम कॉमेडी ‘मां बहन’ भी 4 जून को रिलीज होगी। इस फिल्म में एक परिवार की जिंदगी तब उलझ जाती है जब उनके किचन में एक पड़ोसी की लाश मिलती है। कोरियन कंटेंट पसंद करने वालों के लिए ‘टीच यू अ लेसन’ भी खास होने वाली है। यह एक्शन थ्रिलर स्कूल में हो रही बुलिंग और हिंसा पर आधारित है। वहीं हॉरर और मिस्ट्री के शौकीनों को ‘द वॉचर्स’ और ‘द नन 2’ जैसी फिल्में डर और रोमांच का पूरा डोज देने वाली हैं। समुद्री एडवेंचर फिल्म ‘मेग 2 द ट्रेंच’ भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी जिसमें विशालकाय शार्क से इंसानों की खतरनाक लड़ाई दिखाई जाएगी। इसके अलावा ‘कलर ऑफ ईविल ब्लैक’ जैसी डार्क क्राइम थ्रिलर भी दर्शकों को सस्पेंस से भर देगी। जियो हॉटस्टार पर ‘धुरंधर द रिवेंज रॉ और अनदेखा’ खास आकर्षण रहेगा। इस फिल्म का अनकट वर्जन दर्शकों को थिएटर से अलग अनुभव देगा। वहीं ‘ठुकरा के मेरा प्यार 2’ में बदले और रिश्तों की नई कहानी देखने को मिलेगी। जी5 पर रिलीज हो रही ‘ब्राउन’ भी काफी चर्चा में है। इस सीरीज में करिश्मा कपूर एक पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आएंगी जो एक खतरनाक सीरियल किलर को पकड़ने की कोशिश करती हैं। कुल मिलाकर जून का महीना ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। चाहे आपको फैमिली ड्रामा पसंद हो, हॉरर देखना अच्छा लगता हो या फिर क्राइम थ्रिलर का रोमांच चाहिए, इस महीने हर दर्शक के लिए कुछ न कुछ खास जरूर मौजूद रहेगा।
SD बर्मन की बात से आहत हुई थीं लता मंगेशकर: ईगो भुलाकर 5 साल बाद मोहम्मद रफी के साथ गाया था यह यादगार गीत

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अगर किसी सिंगिंग जोड़ी ने सबसे ज्यादा जादू बिखेरा तो वह थी लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जोड़ी। दोनों की आवाज का ऐसा असर था कि हर फिल्ममेकर अपनी फिल्म में इनकी आवाज चाहता था। 1950 और 60 के दशक में इस जोड़ी ने दर्जनों सुपरहिट गाने दिए। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब दोनों दिग्गजों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि उन्होंने साथ गाना छोड़ने तक की कसम खा ली। दरअसल साल 1962 में गानों की रॉयल्टी को लेकर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच मतभेद हो गया। लता मंगेशकर का मानना था कि गायकों को गानों की रॉयल्टी मिलनी चाहिए, जबकि मोहम्मद रफी इस विचार से सहमत नहीं थे। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने साथ काम न करने का फैसला कर लिया। इसके बाद करीब चार से पांच साल तक दोनों ने कोई डुएट सॉन्ग रिकॉर्ड नहीं किया। इस दौरान मोहम्मद रफी ने आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर जैसी गायिकाओं के साथ कई सुपरहिट गाने दिए। दूसरी तरफ लता मंगेशकर भी अपने सोलो गानों में व्यस्त रहीं। लेकिन धीरे-धीरे इंडस्ट्री में नई आवाजों की एंट्री होने लगी और इसका असर लता मंगेशकर के करियर पर भी पड़ने लगा। इसी दौरान मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन एक बड़ी फिल्म के लिए गाना तैयार कर रहे थे। उन्होंने इस गाने के लिए लता मंगेशकर को फोन किया। शुरुआत में लता ने गाने के लिए हामी भर दी, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि इस गाने में मोहम्मद रफी भी होंगे, उन्होंने तुरंत ऑफर ठुकरा दिया। कहा जाता है कि एसडी बर्मन इस जवाब से नाराज नहीं हुए बल्कि सीधे लता मंगेशकर के घर पहुंच गए। वहां उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के लता से साफ कहा कि उनकी यह जिद उनके ही करियर को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह यह गाना नहीं गाएंगी तो वह इसे सुमन कल्याणपुर से रिकॉर्ड करवा देंगे। एसडी बर्मन की यह बात लता मंगेशकर को भीतर तक चुभ गई। उन्हें एहसास हुआ कि उनका ईगो धीरे-धीरे उनकी जगह किसी और को दिला सकता है। यही वह पल था जब उन्होंने अपने पुराने विवाद को खत्म करने का फैसला लिया। इसके बाद लता मंगेशकर ने संगीतकार जय किशन के जरिए मोहम्मद रफी तक संदेश पहुंचाया। खास बात यह रही कि रफी साहब ने भी पुराने मनमुटाव को पीछे छोड़ते हुए तुरंत हामी भर दी। फिर वह ऐतिहासिक पल आया जिसका संगीत प्रेमी वर्षों से इंतजार कर रहे थे। मुंबई के शन्मुखानंद हॉल में दोनों दिग्गज फिर एक साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे और 1967 में रिलीज हुई देव आनंद की फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के लिए सुपरहिट गाना ‘दिल पुकारे आ रे आ रे’ रिकॉर्ड किया गया। यह गाना रिलीज होते ही छा गया और इसके साथ ही लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई जोड़ी की वापसी हो गई। इसके बाद दोनों ने कई फिल्मों में साथ गाने गाए और हिंदी सिनेमा को ऐसे यादगार नगमे दिए जिन्हें आज भी लोग उतने ही प्यार से सुनते हैं। यह किस्सा सिर्फ दो महान कलाकारों के विवाद का नहीं बल्कि इस बात का भी उदाहरण है कि कला के सामने अहंकार ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता।
रणवीर सिंह का बड़ा ऑफर भी नहीं चला: फरहान अख्तर ने 10 करोड़ रुपए और फीस में 25% छूट का प्रस्ताव ठुकराया!

नई दिल्ली। बॉलीवुड में इन दिनों रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच चल रहा विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब इंडस्ट्री के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो चुका है। इसी बीच अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि रणवीर सिंह ने मामले को सुलझाने के लिए फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट को बड़ा ऑफर दिया था, लेकिन फरहान और रितेश सिधवानी ने उसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2026 के पहले हफ्ते में रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट को 10 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा था। इतना ही नहीं उन्होंने भविष्य में किसी दूसरे प्रोजेक्ट में साथ काम करने की स्थिति में अपनी फीस में 25 प्रतिशत तक की कटौती करने की बात भी कही थी। बताया जा रहा है कि रणवीर इस विवाद को खत्म कर रिश्ते सुधारना चाहते थे, लेकिन एक्सेल एंटरटेनमेंट इस मामले में अपना फैसला पहले ही कर चुका था। खबरों के अनुसार फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी पिछले दो सालों में हुए घटनाक्रम से बेहद नाराज हैं। फिल्म की शूटिंग में लगातार देरी, बातचीत में अनिश्चितता और अचानक प्रोजेक्ट छोड़ने की वजह से उन्हें आर्थिक और प्रोफेशनल दोनों तरह का नुकसान झेलना पड़ा। यही कारण है कि उन्होंने रणवीर सिंह के इस ऑफर को ठुकरा दिया और भविष्य में उनके साथ काम नहीं करने का फैसला किया। दरअसल पूरा विवाद फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ है। साल 2023 में फरहान अख्तर ने रणवीर सिंह को नए डॉन के रूप में लॉन्च करते हुए फिल्म का टीजर जारी किया था। अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के बाद रणवीर को इस आइकॉनिक किरदार में देखने को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ फैंस इस फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन रणवीर ने दर्शकों से उन्हें एक मौका देने की अपील की थी। इसके बाद अचानक खबर आई कि रणवीर सिंह फिल्म से बाहर हो गए हैं। बताया गया कि शूटिंग शुरू होने से महज तीन हफ्ते पहले उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया। उस समय तक फिल्म का प्री-प्रोडक्शन काफी आगे बढ़ चुका था और इसी वजह से एक्सेल एंटरटेनमेंट को भारी नुकसान उठाना पड़ा। FWICE यानी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी इस मामले में दखल दिया। संगठन ने बताया कि फरहान अख्तर ने अप्रैल 2026 में उनके पास शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में दावा किया गया कि रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, लेकिन डॉन 3 छोड़ने से कंपनी को करीब 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। फरहान अख्तर ने इस नुकसान की भरपाई की मांग भी की है। इस पूरे विवाद के दौरान रणवीर सिंह की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि उनकी टीम ने पहले यह जरूर कहा था कि अभिनेता जानबूझकर चुप्पी बनाए हुए हैं। दूसरी तरफ इंडस्ट्री में रणवीर के बैन होने की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन बाद में साफ किया गया कि उन्हें आधिकारिक रूप से बैन नहीं किया गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और क्या भविष्य में रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के रिश्ते फिर सामान्य हो पाएंगे या नहीं।
Friday Release: 29 मई को एंटरटेनमेंट का महाधमाका, 14 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज; थिएटर्स में 9 और OTT पर 5 की एंट्री

नई दिल्ली। मई महीने का आखिरी शुक्रवार सिनेप्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। 29 मई 2026 को मनोरंजन की दुनिया में बड़ा धमाका होने जा रहा है क्योंकि इस दिन एक साथ 14 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज हो रही हैं। खास बात यह है कि दर्शकों को इस बार थिएटर्स और ओटीटी दोनों प्लेटफॉर्म्स पर भरपूर कंटेंट मिलने वाला है। जहां 9 फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देंगी वहीं 5 नई फिल्में और सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होकर दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस शुक्रवार कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलेंगी। जियोहॉटस्टार पर रिलीज हो रही ‘कजिन्स एंड कल्याणम्स’ फैमिली ड्रामा और कॉमेडी का शानदार मिश्रण है। यह कहानी छह भाई-बहनों की जिंदगी और उनके रिश्तों के बदलते रंगों को दिखाती है। वहीं नेटफ्लिक्स पर ‘मर्डर माइंडफुली सीजन 2’ रिलीज हो रहा है जो डार्क कॉमेडी और क्राइम थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए खास होने वाला है। इस बार कहानी में अपराध से ज्यादा किरदार के मानसिक संघर्ष को दिखाया गया है। स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए नेटफ्लिक्स की मिनी सीरीज ‘ब्राजील 70 द थर्ड स्टार’ भी खास आकर्षण होगी। यह सीरीज 1970 फुटबॉल वर्ल्ड कप में ब्राजील टीम की ऐतिहासिक जीत की कहानी बयां करती है। वहीं अमेजन प्राइम वीडियो पर ‘सुखमानो सुखमन्न’ रिलीज हो रही है जिसमें एक एम्बुलेंस ड्राइवर की अकेलेपन और मानसिक संघर्ष से भरी जिंदगी दिखाई गई है। इसके अलावा एक्शन थ्रिलर ‘लीडर’ भी दर्शकों को रोमांच से भरने के लिए तैयार है। अगर थिएटर रिलीज की बात करें तो इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर हर तरह के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ मौजूद है। सस्पेंस और थ्रिल पसंद करने वालों के लिए ‘ऑब्सेस’ रिलीज हो रही है जिसमें एक महिला की जिंदगी में घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं को दिखाया गया है। फैमिली ड्रामा ‘द ब्रेडविनर’ एक ऐसे पिता की कहानी है जिसे पहली बार घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए ‘पैसेंजर’ डर और रहस्य से भरी कहानी लेकर आ रही है। वहीं जैकी श्रॉफ और प्रतीक बब्बर स्टारर ‘द ग्रेट ग्रांड सुपरहीरो’ बच्चों और फैमिली ऑडियंस को पसंद आ सकती है। फिल्म में एक बच्चे को अपने दादाजी की जादुई ताकतों का पता चलता है जो दुनिया को बचा सकती हैं। आध्यात्मिक और बायोपिक कंटेंट पसंद करने वालों के लिए ‘श्री बाबा नीब करोरी महाराज’ रिलीज हो रही है जिसमें नीम करौली बाबा के जीवन सफर को दिखाया गया है। दूसरी तरफ ‘रजनी की बारात’ सामाजिक संदेश और रोमांटिक कॉमेडी का मिश्रण लेकर आ रही है। क्रिकेट और इमोशनल कहानी पसंद करने वालों के लिए ‘कृष्ण और चिट्ठी’ खास हो सकती है जिसमें खेल और आस्था का मेल देखने को मिलेगा। इसके अलावा ‘हीर सारा और पुडुचेरी’ दोस्ती और जिंदगी को नए नजरिए से देखने वाली रोड ट्रिप ड्रामा फिल्म है जबकि ‘जीना दिल से’ युवाओं के सपनों रोमांस और जिंदगी को खुलकर जीने की कहानी दिखाएगी। कुल मिलाकर 29 मई का शुक्रवार हर उम्र और हर पसंद के दर्शकों के लिए एंटरटेनमेंट का फुल पैकेज साबित होने वाला है। चाहे आप ओटीटी पर घर बैठे कंटेंट देखना पसंद करते हों या थिएटर में बड़े पर्दे का रोमांच महसूस करना चाहते हों इस शुक्रवार आपके पास विकल्पों की कोई कमी नहीं रहने वाली।