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Jhulelal Jayanti 2026: जल, ज्योति और आस्था का संगम, चेटीचंड पर सिंधी नववर्ष का भव्य आगाज

नई दिल्ली । सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व चेटीचंड इस वर्ष 20 मार्च 2026 को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक होने के साथ साथ भगवान झूलेलाल की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाला यह पर्व चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन पड़ता है जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। सिंधी भाषा में चेट का अर्थ चैत्र और चंड का अर्थ चंद्रमा होता है इसलिए इसे चैत्र का चांद भी कहा जाता है। इस खास अवसर पर श्रद्धालु पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:51 बजे से रात 8:12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान भक्त भगवान झूलेलाल की आराधना कर सुख समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि सिंधी समाज की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है। चेटीचंड का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण बेहराना साहिब की परंपरा होती है जिसे अत्यंत श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है। इसमें दीपक मिश्री फल इलायची और सूखे मेवे सजाए जाते हैं। साथ ही भगवान झूलेलाल की सुंदर प्रतिमा को सुसज्जित कर शोभायात्रा निकाली जाती है। यह शोभायात्रा किसी नदी या जल स्रोत तक पहुंचती है जहां विधिपूर्वक पूजा अर्चना के बाद बेहराना साहिब का विसर्जन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ यह आयोजन सामूहिक भक्ति का रूप ले लेता है। इस पर्व की एक और विशेष परंपरा ज्योति जागरण है जिसमें श्रद्धालु आटे के दीपक में पांच बत्तियां जलाकर भगवान की आराधना करते हैं। यह दीपक आस्था ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं और चालिहो के तहत लगातार प्रार्थना करने का संकल्प लेते हैं जो उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। चेटीचंड का पर्व जल ज्योति और भक्ति का अद्भुत संगम है जो जीवन में संतुलन शांति और समृद्धि का संदेश देता है। यह न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है बल्कि समाज में एकता प्रेम और भाईचारे की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। सिंधी समुदाय के लिए यह दिन नई शुरुआत उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है जो आने वाले वर्ष को शुभ और सफल बनाने की प्रेरणा देता है।

गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त

नई दिल्ली । हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में श्रद्धा भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस खास दिन मंदिर ट्रस्ट द्वारा बाप्पा को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की भव्य नीलामी आयोजित की गई जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर कोई इस पावन अवसर पर भगवान गणेश के चरणों से जुड़े किसी भी आभूषण को अपने घर ले जाकर उसे आशीर्वाद के रूप में प्राप्त करना चाहता था। इस वर्ष की नीलामी खास इसलिए भी रही क्योंकि इसमें कुल 234 बहुमूल्य गहनों को शामिल किया गया था जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई। नीलामी में सोने के सिक्कों से लेकर आकर्षक जंजीरें नक्काशीदार लॉकेट कंगन चांदी की पादुका और भगवान गणेश के प्रिय वाहन मूषक की प्रतिमाएं भी शामिल थीं। जैसे ही नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई मंदिर परिसर में उत्साह और भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। भक्तों के बीच इन पवित्र वस्तुओं को प्राप्त करने की होड़ साफ दिखाई दी। भक्तों के लिए ये गहने केवल धातु के आभूषण नहीं बल्कि साक्षात बाप्पा का आशीर्वाद माने जाते हैं। मान्यता है कि गुड़ी पड़वा पर खरीदी गई कोई भी वस्तु विशेष शुभ फल देती है और यदि वह वस्तु सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी हो तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। एक श्रद्धालु ने बताया कि ऐसे पावन गहनों को घर में रखने से सुख-समृद्धि शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यही वजह है कि लोग लाखों रुपये तक की बोली लगाने में भी पीछे नहीं हटते। इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू भी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार नीलामी से प्राप्त होने वाली करोड़ों रुपये की राशि का उपयोग केवल मंदिर के रखरखाव तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसे समाजसेवा के विभिन्न कार्यों में भी लगाया जाता है। शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए यह धन एक मजबूत आधार बनता है। इस प्रकार भक्तों की आस्था से जुड़ी यह नीलामी समाज के कमजोर वर्गों के लिए आशा और सहयोग का माध्यम बन जाती है। गुड़ी पड़वा जैसे शुभ पर्व पर आयोजित यह नीलामी न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि भक्ति और सेवा का मेल समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सिद्धिविनायक मंदिर का यह अनूठा प्रयास आस्था को एक नई दिशा देता है जहां श्रद्धा केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर सामूहिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

20 मार्च 2026 का राशिफल: शुभ योग और विशेष राशि फल की पूरी जानकारी

नई दिल्ली।नई दिल्ली। मेष (21 मार्च – 19 अप्रैल-आज आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिन्हें संभालना जरूरी होगा। वित्तीय मामलों में सतर्कता बरतें, अनावश्यक खर्च से बचें। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, हल्का व्यायाम फायदेमंद रहेगा।वृष (20 अप्रैल – 20 मई) आज आपके धैर्य और समझदारी की परीक्षा हो सकती है। छोटे विवादों से दूर रहें। कार्य और व्यवसाय में स्थिरता बनी रहेगी। घर में सुख-शांति का माहौल रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, खानपान में संतुलन बनाए रखें।मिथुन (21 मई – 20 जून) आज संचार और सामाजिक मेलजोल पर ध्यान दें। यात्रा के योग बन रहे हैं। व्यापार और नौकरी में लाभकारी अवसर मिल सकते हैं। मित्रों और सहयोगियों से मदद मिलेगी। मानसिक शांति और उत्साह बना रहेगा।कर्क (21 जून – 22 जुलाई) आज आपके निर्णय और प्रयास सफल रहेंगे। पैसों के मामलों में लाभ के अवसर मिल सकते हैं। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन तनाव कम करने के उपाय करें। कार्यस्थल पर सहयोगियों का समर्थन मिलेगा।सिंह (23 जुलाई – 22 अगस्त) कार्यस्थल पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। संयम बनाए रखें और जल्दबाजी से बचें। भाग्य के बल पर अचानक लाभ के योग हैं। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर ध्यान दें।कन्या (23 अगस्त – 22 सितंबर) आज मानसिक प्रयास और योजना सफल होंगी। शिक्षा और करियर के मामले में नए अवसर मिल सकते हैं। मित्र और सहयोगी मदद करेंगे। आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, हल्की दिनचर्या बनाए रखें।तुला (23 सितंबर – 22 अक्टूबर) आज निवेश और संपत्ति के मामलों में सावधानी जरूरी है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। स्वास्थ्य में हल्की चंचलता हो सकती है, ध्यान दें। कार्यस्थल पर सहयोगियों के साथ तालमेल अच्छा रहेगा। नए अवसरों के लिए नजर रखें।वृश्चिक (23 अक्टूबर – 21 नवंबर) आज व्यवसाय और करियर में वृद्धि के अच्छे अवसर हैं। मानसिक शांति बनी रहेगी। परिवार और मित्रों से सहयोग मिलेगा। यात्रा लाभकारी और सुखद रहेगी। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें।धनु (22 नवंबर – 21 दिसंबर) आज आर्थिक मामलों में लाभ मिलेगा और धन संबंधी मामलों में सुधार होगा। शिक्षा और अध्यान में ध्यान लगाएं। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, हल्का व्यायाम फायदेमंद रहेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। सामाजिक संबंध मजबूत होंगे।मकर (22 दिसंबर – 19 जनवरी) कार्यस्थल में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, धैर्य बनाए रखें। निवेश के मामलों में सतर्कता जरूरी है। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। मित्रों और सहयोगियों का समर्थन मिलेगा।कुंभ (20 जनवरी – 18 फरवरी) आज नए अवसर मिल सकते हैं, सामाजिक और पेशेवर संबंध मजबूत होंगे। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। यात्रा के लिए दिन शुभ है। आर्थिक मामलों में सुधार और लाभ के योग हैं। मानसिक शांति बनी रहेगी।मीन (19 फरवरी – 20 मार्च) आज का दिन शुभ है, मानसिक रूप से शांत और प्रसन्न रहेंगे। आर्थिक मामलों में सुधार होगा। परिवार और मित्रों से सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता के योग हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज 19 मार्च 2026 से आरंभ हो चुका है जो 27 मार्च 2026 को राम नवमी के दिन संपन्न होगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और सौभाग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में स्थिरता सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष घटस्थापना यानी कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक रहेगा जिसकी अवधि लगभग 50 मिनट है। यदि इस समय पूजा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और बरकत लेकर आती है। पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा या मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है जो नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसके बाद मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए उन्हें सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं क्योंकि सफेद रंग उन्हें अत्यंत प्रिय है। भोग के रूप में मां को गाय के दूध से बनी मिठाई या अन्य सफेद खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्रोच्चारण और प्रार्थना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के समापन पर आरती का विशेष महत्व होता है। सुबह की आरती सूर्योदय के समय और शाम की आरती सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ आरती में शामिल होना घर में प्रेम एकता और सामंजस्य को बढ़ाता है। मां शैलपुत्री की आरती के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं और जीवन में सुख-संपत्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और मन के विकार दूर होते हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं उन्हें हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। इस प्रकार नवरात्रि का पहला दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि में समय की कमी? दुर्गा सप्तशती के बराबर फल देगा यह छोटा मंत्र

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी बताया गया है। हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के लिए इनका पूरा पाठ करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में शास्त्रों में कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं जिनसे समान फल की प्राप्ति संभव मानी गई है। दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा की महिमा शक्ति और उनकी महिषासुर पर विजय का वर्णन 13 अध्यायों में किया गया है। मान्यता है कि इसका पाठ करने से जीवन के कष्ट भय और बाधाएं दूर होती हैं तथा साधक को मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि नवरात्रि में नवचंडी और शतचंडी यज्ञ जैसे अनुष्ठान भी किए जाते हैं। कम समय में भी करें प्रभावशाली पाठ अगर आपके पास पूरा पाठ करने का समय नहीं है तो आप दुर्गा सप्तशती के केवल रात्रि सूक्त प्रथम अध्याय और देवी सूक्त पंचम अध्याय का पाठ कर सकते हैं। इसे भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इससे माता की कृपा प्राप्त होती है। मंत्र जप से मिलेगा समान फल यदि इतना समय भी नहीं है तो शास्त्रों के अनुसार यह बीज मंत्र सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय माना गया है ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे इस मंत्र का 108 या 1008 बार जप करने से दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान फल मिलने की मान्यता है। इसके अलावा या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता का नियमित जप भी जीवन से भय बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। और यदि आप सबसे आसान उपाय चाहते हैं तो जय माता दी या दुर्गा-दुर्गा का सच्चे मन से स्मरण करना भी उतना ही फलदायी माना गया है। इस प्रकार समय की कमी होने पर भी श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए छोटे-छोटे मंत्र जप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

अश्लीलता के आरोप में ‘सरके चुनर’ गाना घिरा विवाद में महिला आयोग ने जारी किया समन

नई दिल्ली: फिल्म ‘KD The Devil’ के आइटम नंबर ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह गाना अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गूंज अब राजनीतिक और कानूनी गलियारों तक पहुंच चुकी है। गाने की सामग्री को लेकर उठे सवालों के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग ने गाने को उत्तेजक और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा है कि इसकी सामग्री भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती प्रतीत होती है। आयोग का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में गलत संदेश देती है और विशेषकर महिलाओं की गरिमा को प्रभावित करती है। इसी के चलते आयोग ने फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें अभिनेता संजय दत्त, अभिनेत्री नोरा फतेही और फिल्म के निर्देशक को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। सभी को 24 मार्च को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले में गाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध देखने को मिला है। आलोचकों का कहना है कि गाने के बोल और प्रस्तुति अश्लीलता की सीमा को पार करते हैं। बढ़ते विवाद के बाद फिल्म के हिंदी वर्जन को कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा चुका है। वहीं अभिनेत्री नोरा फतेही ने इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि हिंदी वर्जन में गाना इस तरह से पेश किया जाएगा। उनके अनुसार गाने की शूटिंग कन्नड़ वर्जन के लिए की गई थी और हिंदी वर्जन के कंटेंट की जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा है कि वह इस गाने का प्रचार नहीं करेंगी। इससे पहले यह मामला संसद तक भी पहुंच चुका है, जहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के तहत संबंधित गाने पर कार्रवाई करते हुए इसे प्रतिबंधित भी किया गया है। कुल मिलाकर ‘सरके चुनर’ गाना अब एक बड़े विवाद का केंद्र बन चुका है, जहां एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता और दूसरी ओर सामाजिक जिम्मेदारी के बीच बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या निर्णय सामने आता है, यह देखना अहम होगा और यह तय करेगा कि इस तरह के कंटेंट पर आगे किस तरह की सख्ती बरती जाएगी

‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है। कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं। कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है। उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है। कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।  कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है

चांद देख लेना में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह की जोड़ी ने दिखाया गहरा भावनात्मक रिश्ता

नई दिल्ली : सलमान खान ने ईद के मौके पर अपने प्रशंसकों को एक खास तोहफा दिया है। उनकी आने वाली फिल्म ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ का नया गीत ‘चांद देख लेना’ रिलीज हो चुका है, जिसने अपने भावनात्मक अंदाज से दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जो प्यार, जुदाई और उम्मीद की गहराई को बेहद सजीव तरीके से प्रस्तुत करता है। इस गीत में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह की जोड़ी एक ऐसे रिश्ते को दर्शाती है, जिसमें दूरी तो है लेकिन दिलों का जुड़ाव बेहद मजबूत है। कहानी एक सैनिक और उसकी पत्नी के इर्द गिर्द घूमती है। जहां एक ओर सैनिक सरहद पर देश की रक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी घर पर उसके सुरक्षित लौटने की आस लगाए बैठी है। यह भावनात्मक जुड़ाव ही गीत की आत्मा है, जो हर उस परिवार की कहानी को छूता है जो अपने प्रियजनों की वापसी का इंतजार करते हैं। ‘चांद देख लेना’ में चांद को एक भावनात्मक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ईद का चांद जहां खुशी और मिलन का संदेश देता है, वहीं करवा चौथ का चांद प्यार, विश्वास और इंतजार की गहराई को दर्शाता है। गीत इन दोनों भावनाओं को एक साथ पिरोकर एक खूबसूरत अनुभव बनाता है, जो दर्शकों के दिल को छू जाता है। इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है, जिनकी धुनें हमेशा से ही श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाती हैं। गीत को निहाल टौरो और अंकोना मुखर्जी ने अपनी मधुर आवाज दी है, जिन्होंने इस गीत के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पहले आए गीतों को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था और अब यह नया गीत फिल्म के भावनात्मक पक्ष को और मजबूत करता है। ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ का नाम पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया ताकि फिल्म की कहानी में मौजूद मानवीय पहलुओं को अधिक गहराई से दिखाया जा सके। सलमान खान द्वारा निर्मित और अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म बहादुरी, त्याग और रिश्तों की मजबूती की कहानी को सामने लाने का प्रयास करती है। ‘चांद देख लेना’ इसी कहानी का एक अहम हिस्सा है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल होता है।  यह गीत उन अनगिनत परिवारों की भावनाओं का आईना है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा और वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं और गर्व के साथ उनके कर्तव्य को स्वीकार करते हैं। यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक गहरी भावना है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा

GUNA MLA CONTROVERSY: गुना में सियासी बयानबाजी तेज; विधायक ने कलेक्टर को बताया ‘नकारा’, मंच से साधा निशाना

GUNA MLA

HIGHLIGHTS: गुना विधायक पन्नालाल शाक्य का प्रशासन पर तीखा हमला कलेक्टर को मंच से बताया ‘नकारा’ गुनिया नदी प्रोजेक्ट पर दी चेतावनी “कागजों में नहीं, जमीन पर काम” की नसीहत SDM को लेकर विवादित बयान से बढ़ी चर्चा GUNA MLA CONTROVERSY: गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में सियासी बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा हाल ही में जिला प्रशासन की तारीफ के ठीक दो दिन बाद, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को ‘नकारा’ बताते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर आउट क्रांति और अपराध की उलझी कहानी विक्रमोत्सव मंच से प्रशासन पर हमला नवसंवत्सर के अवसर पर मानस भवन में आयोजित विक्रमोत्सव कार्यक्रम में विधायक मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से ही अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि आप लोग कागजों में काम करते हैं, जमीन पर कुछ नजर नहीं आता। मध्य पूर्व तनाव का असर, भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 2% से अधिक गिरकर खुला गुनिया नदी प्रोजेक्ट को लेकर चेतावनी विधायक शाक्य ने गुनिया नदी के प्रस्तावित कार्य को लेकर अधिकारियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह काम आसान नहीं है और इसमें कई प्रभावशाली लोग अड़चन डाल सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति काम करो, तभी याद किए जाओगे अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि केवल बैठकों और कागजी कार्यवाही से कुछ नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ करके दिखाओ, तभी लोग आपको याद करेंगे। ASHOKNAGAR RAPE CASE: मां ने चुप कराया, सौतेले पिता ने रौंदा बचपन; अशोकनगर में दुष्कर्म के आरोपियों को 40 साल की सजा पुराने कलेक्टरों का दिया उदाहरण विधायक ने पुराने कलेक्टरों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन अधिकारियों ने अच्छा काम किया, उन्हें आज भी लोग याद करते हैं। उन्होंने वर्तमान प्रशासन को भी उसी दिशा में काम करने की सलाह दी। सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण SDM को लेकर विवादित टिप्पणी कार्यक्रम के दौरान विधायक ने SDM को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नवरात्रि में SDM दुर्गा स्वरूप बनकर तलवार लेकर निकलें, तो जिले में बदलाव दिखेगा। इस बयान के बाद माहौल और गरमा गया।

Bengali Film : बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर आउट क्रांति और अपराध की उलझी कहानी

   Bengali Film : नई दिल्ली: बंगाली सिनेमा के दर्शकों के लिए एक नई और दिलचस्प पेशकश के रूप में फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर जारी कर दिया गया है। इस टीजर ने रिलीज होते ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है क्योंकि इसमें एक ऐसी कहानी की झलक दिखाई गई है जो समाज, अपराध और क्रांति के बीच की जटिल रेखा को दर्शाती है। फिल्म की कहानी 1960 के दशक के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो उस समय के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। टीजर में अभिनेता जीत एक बिल्कुल नए और प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। उनका किरदार अनंत सिंह नाम के एक रहस्यमयी शख्स के इर्द गिर्द घूमता है, जिसे समाज का एक हिस्सा अपराधी मानता है जबकि कुछ लोग उसे गरीबों का मसीहा समझते हैं। यह द्वंद्व ही फिल्म की कहानी को और गहराई देता है और दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े करता है। फिल्म में अनंत सिंह के अतीत और वर्तमान को भी समानांतर रूप से दिखाया गया है। कहानी के अनुसार वह कभी स्वतंत्रता सेनानी रहा था और मास्टरदा सूर्य सेन के नेतृत्व में भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल था। लेकिन आजादी के बाद जब वह उन आदर्शों को टूटते हुए देखता है, जिनके लिए उसने अपना सब कुछ समर्पित किया था, तो उसके भीतर गहरा मोहभंग पैदा होता है। यही मोहभंग उसे एक अलग राह पर ले जाता है, जहां वह समाज के भ्रष्ट और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करता है। टीजर में दिखाया गया है कि कैसे अनंत सिंह समाज के उन लोगों को निशाना बनाता है जो कमजोर और वंचित वर्ग का शोषण करते हैं। उसके इन कदमों से शहर में एक ओर डर का माहौल बनता है तो दूसरी ओर लोगों के बीच जिज्ञासा भी बढ़ती है। इसी बीच इंस्पेक्टर दुर्गा रॉय की एंट्री होती है, जो अनंत सिंह की तलाश में एक सख्त अभियान शुरू करती हैं। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि क्या अनंत सिंह वास्तव में एक अपराधी है या फिर वह एक क्रांतिकारी है जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहा है। फिल्म का टीजर अपने विजुअल्स और कहानी के अंदाज से दर्शकों को 1960 के दशक के कोलकाता में ले जाता है, जहां सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और सत्ता की खामियां साफ दिखाई देती हैं। कहानी का यह पहलू इसे सिर्फ एक थ्रिलर नहीं बल्कि एक विचारोत्तेजक फिल्म भी बनाता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। कुल मिलाकर ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर एक मजबूत और गहन कहानी की झलक पेश करता है, जिसमें जीत का किरदार, रहस्यमयी कथानक और सामाजिक संदेश मिलकर इसे एक बहुप्रतीक्षित फिल्म बनाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अपने पूरे स्वरूप में दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है