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नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है। किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है। हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मंगलवार की पूजा विधि: ऐसे करें हनुमान जी की आराधना, मिलेगी संकटों से मुक्ति

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साहस, शक्ति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही वजह है कि मंगलवार को देशभर के हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। धर्माचार्यों के अनुसार मंगलवार की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन लाल या केसरिया रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण किया जाता है, क्योंकि हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त माने जाते हैं। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू की जाती है। पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन पाठों से भय, शत्रु बाधा और मानसिक तनाव दूर होता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मंगलवार का व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और कुंडली के दोषों में कमी आती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जिन्हें बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें मंगलवार का व्रत और हनुमान पूजा करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक परंपराओं में इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को गुड़, मसूर दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान शुभ माना गया है। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। मंगलवार को कई लोग व्रत रखते हैं और केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि संयम और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है। धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। बजरंगबली की भक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

आपकी चाल में छिपा है लंबी जिंदगी का राज: रिसर्च में सामने आया तेज और धीमी चाल का चौंकाने वाला असर

नई दिल्ली। स्वस्थ और लंबी जिंदगी जीना लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली को लंबे जीवन का आधार माना जाता है, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस विषय में एक दिलचस्प पहलू सामने रखा है। अध्ययन के अनुसार केवल पैदल चलना ही नहीं, बल्कि चलने की गति भी व्यक्ति की संभावित उम्र और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है। यह दावा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि रोजमर्रा की आदत से जुड़ा यह पहलू जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों की जीवनशैली और चलने की आदतों का विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि तेज गति से चलने और धीमी गति से चलने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन अवधि में क्या अंतर दिखाई देता है। शोध में पाया गया कि नियमित रूप से तेज चाल में चलने वाले लोगों की संभावित उम्र अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। वहीं धीमी गति से चलने वाले कुछ समूहों में जीवन अवधि अपेक्षाकृत कम देखी गई। अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि केवल शरीर का वजन या बाहरी शारीरिक स्थिति ही बेहतर स्वास्थ्य का पैमाना नहीं हो सकती। इसके बजाय व्यक्ति की सक्रिय जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियां ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग अधिक सक्रिय रहते हैं और नियमित रूप से तेज गति से चलते हैं, उनमें स्वास्थ्य संबंधी कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे शरीर की कार्यक्षमता और फिटनेस स्तर बेहतर होने की संभावना भी बढ़ती है। एक अन्य अध्ययन में इस विषय से जुड़ा जैविक कारण भी समझने की कोशिश की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर की कोशिकाओं और उम्र बढ़ने के बीच संबंध रखने वाले कुछ जैविक तत्वों का संबंध चलने की गति से भी हो सकता है। अध्ययन में यह संकेत मिला कि तेज चाल से चलने वाले लोगों में शरीर के कुछ ऐसे संकेतक बेहतर स्थिति में पाए गए, जिन्हें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संकेतक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और भविष्य की शारीरिक स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल तेज चलना ही लंबी उम्र की गारंटी नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक एक स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। फिर भी यह अध्ययन संकेत देता है कि रोजमर्रा की एक साधारण आदत, जैसे चलने की गति, भी व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में सक्रिय जीवनशैली अपनाना और नियमित रूप से पैदल चलना स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

नई दिल्ली। आजकल वजन कम करने के लिए लोग केवल जिम और डाइटिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू उपायों और डिटॉक्स ड्रिंक्स की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है। खासकर सुबह खाली पेट पी जाने वाली कुछ पारंपरिक ड्रिंक्स लोगों के बीच काफी चर्चा में रहती हैं। इनमें जीरा पानी और मेथी पानी का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स के दौर में इन दोनों ड्रिंक्स को लेकर कई दावे किए जाते हैं कि ये तेजी से वजन कम करने, पेट की चर्बी घटाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां भी मौजूद हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जीरा पानी और मेथी पानी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। इसलिए यह कहना कि इनमें से कोई एक सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर है, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, खानपान, पाचन क्षमता और लाइफस्टाइल के आधार पर इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। जीरा पानी को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले घरेलू उपाय के रूप में देखा जाता रहा है। माना जाता है कि यह पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। जब पाचन बेहतर होता है तो शरीर भोजन को सही तरीके से प्रोसेस कर पाता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में अप्रत्यक्ष सहायता मिल सकती है। इसके अलावा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और भारीपन की समस्या कम होने से हल्कापन महसूस हो सकता है। दूसरी तरफ मेथी पानी का प्रभाव भूख नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। जिन लोगों को अनावश्यक स्नैकिंग या ओवरईटिंग की आदत होती है, उनके लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा ब्लड शुगर संतुलन में मदद मिलने से भी अचानक लगने वाली भूख कम हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इन ड्रिंक्स को वजन घटाने का जादुई उपाय मानना सही नहीं होगा। केवल जीरा या मेथी पानी पीने से तेजी से फैट लॉस होने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर हो सकता है। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पानी का सही सेवन और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन ड्रिंक्स का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट संबंधी दिक्कतें या अन्य परेशानियां हो सकती हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं, मधुमेह की दवा लेने वालों और किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली की जगह कोई एक ड्रिंक नहीं ले सकती, बल्कि यह केवल अच्छी आदतों को सपोर्ट करने का काम करती है।

ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम क्या है? जानिए कैसे बिगड़ सकती है आपकी स्किन

नई दिल्ली। आज के दौर में ग्लोइंग और बेदाग त्वचा पाने की चाहत में लोग कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स और वायरल ट्रेंड्स के प्रभाव में आकर लोग एक साथ कई सीरम, क्रीम, एक्सफोलिएटर और एक्टिव इंग्रीडिएंट्स को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना लेते हैं। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से ज्यादा स्किन केयर करना अब एक नई समस्या बनकर सामने आ रहा है, जिसे “ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम” कहा जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्किन की भी एक प्राकृतिक सुरक्षा परत होती है, जिसे बार-बार फेसवॉश, स्क्रब, एसिड बेस्ड प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त कॉस्मेटिक्स से नुकसान पहुंच सकता है। जब लोग बिना जरूरत कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो त्वचा की नैचुरल बैरियर कमजोर होने लगती है। इसका असर जलन, लालपन, ड्रायनेस, पिंपल्स और एलर्जी के रूप में दिखाई देता है। त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक, ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम के सबसे सामान्य लक्षणों में त्वचा का अत्यधिक संवेदनशील हो जाना, बार-बार दाने निकलना, चेहरे पर खुजली, स्किन का छिलना और लगातार रूखापन शामिल हैं। कई बार लोग इन समस्याओं को ठीक करने के लिए और ज्यादा प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि हर चमकदार या वायरल प्रोडक्ट हर स्किन टाइप के लिए सही नहीं होता। बिना विशेषज्ञ की सलाह के एक्टिव इंग्रीडिएंट्स जैसे रेटिनॉल, सैलिसिलिक एसिड, विटामिन-सी और केमिकल पील्स का अधिक उपयोग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्किनकेयर रूटीन हमेशा सरल और संतुलित होना चाहिए। एक अच्छे फेसवॉश, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त होता है। इसके अलावा त्वचा को पर्याप्त आराम देना, पानी ज्यादा पीना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार स्किन संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो घरेलू प्रयोग या सोशल मीडिया ट्रेंड्स अपनाने की बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है। ब्यूटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वस्थ त्वचा पाने का मतलब केवल ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाना नहीं, बल्कि त्वचा की जरूरत को समझकर सही देखभाल करना है।

26 मई 2026 राशिफल: कुंभ राशि को करियर में लाभ, कई राशियों की चमकेगी किस्मत

राशिफल । 26 मई 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है। कुछ लोगों को करियर और व्यापार में सफलता मिलने के योग हैं, तो कुछ राशियों को आर्थिक मामलों और स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सोमवार का दिन विशेष रूप से कुंभ राशि वालों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। मेष राशि के लोगों में ऊर्जा और आत्मविश्वास बना रहेगा। नौकरी और व्यवसाय में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा, हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन आर्थिक दृष्टि से मजबूत रहने वाला है। पुराने रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और किसी करीबी से अच्छी खबर मिलने के संकेत हैं। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी रखने की सलाह दी गई है। मिथुन राशि वालों के लिए करियर में नए अवसर बनने की संभावना है। मित्रों का सहयोग मिलेगा और यात्रा के योग भी बन सकते हैं। हालांकि मानसिक तनाव से बचने की जरूरत होगी। कर्क राशि के लोगों को नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में सकारात्मक माहौल रहेगा। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल माना जा रहा है। सिंह राशि वालों को व्यापार में लाभ और सामाजिक सम्मान मिलने के संकेत हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। वहीं कन्या राशि के जातकों को मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है, लेकिन छोटे-छोटे लाभ मिलते रहेंगे। तुला राशि वालों के लिए नए संपर्क भविष्य में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। नौकरी में तरक्की और परिवार में शुभ कार्यों की चर्चा संभव है। वृश्चिक राशि के जातकों को पुराने विवादों से राहत मिल सकती है, लेकिन व्यापार में सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी होगा। धनु राशि के लोगों के लिए भाग्य का साथ मिलने के योग हैं। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और विद्यार्थियों को सफलता मिलने की संभावना है। मकर राशि के जातकों का दिन कामकाज में व्यस्तता भरा रहेगा, हालांकि परिवार का सहयोग उन्हें मानसिक राहत देगा। कुंभ राशि वालों के लिए 26 मई बेहद शुभ माना जा रहा है। नौकरी और व्यापार में लाभ मिलने के प्रबल संकेत हैं। अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है और निवेश के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा। वहीं मीन राशि के लोगों को भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी गई है। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार का दिन सकारात्मक सोच और संयम के साथ बिताने से कई राशियों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

महंगी सब्जियों से छुटकारा, घर की बालकनी में ऐसे उगाएं करेला और पाएं ताजा, केमिकल-फ्री फसल

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली के बीच अब लोग सिर्फ घर सजाने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि घरों की बालकनी, छत और छोटे-छोटे खाली स्थानों को मिनी गार्डन में बदलने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां उगाने की इच्छा लोगों को घर पर खेती की ओर आकर्षित कर रही है। इसी बढ़ते ट्रेंड में करेला भी लोगों की पसंदीदा सब्जियों में शामिल हो गया है। सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद माने जाने वाले करेले को अब लोग बाजार से खरीदने के बजाय घर में उगाने की कोशिश कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े खेत या ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके और थोड़ी देखभाल के साथ करेला घर की बालकनी में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी शुरुआत अच्छे बीजों के चयन से होती है। किसी भी पौधे की तरह करेले की बेहतर पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों का चयन बहुत जरूरी माना जाता है। स्वस्थ बीज पौधों की वृद्धि को तेज करते हैं और उत्पादन भी अच्छा मिलता है। यदि शुरुआत सही हो तो पौधे की देखभाल भी आसान हो जाती है। करेले की बेल तेजी से फैलती है, इसलिए इसे सामान्य छोटे गमलों की बजाय बड़े और गहरे गमलों में लगाना ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। पौधे की जड़ों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलना जरूरी होता है। साथ ही गमले में अतिरिक्त पानी निकलने की व्यवस्था होना भी आवश्यक माना जाता है, क्योंकि पानी जमा होने से पौधे की जड़ों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। हल्की, नरम और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी पौधों के विकास में अहम भूमिका निभाती है। मिट्टी में जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे पौधे की बढ़त बेहतर होती है और फल भी स्वस्थ तैयार होते हैं। धूप भी करेले की खेती का एक अहम हिस्सा मानी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस पौधे को पर्याप्त धूप की जरूरत होती है। अगर पौधे को रोजाना कई घंटे सीधी धूप मिले तो उसकी वृद्धि तेजी से होती है और फल भी अच्छी गुणवत्ता के आते हैं। यही वजह है कि बालकनी या छत पर ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जहां पर्याप्त सूर्य प्रकाश पहुंचता हो। करेले की बेल ऊपर की ओर बढ़ती है, इसलिए उसे सहारे की जरूरत होती है। बेल को सही दिशा देने के लिए जाली, रस्सी या लकड़ी जैसी चीजों का उपयोग किया जा सकता है। इससे पौधे को फैलने में मदद मिलती है और हवा का प्रवाह भी बेहतर रहता है। आज के समय में घर पर उगाई गई सब्जियां केवल शौक नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनती जा रही हैं। थोड़ी मेहनत और सही जानकारी के जरिए कोई भी व्यक्ति अपनी बालकनी को हरे-भरे किचन गार्डन में बदल सकता है और ताजा करेले का आनंद घर बैठे ले सकता है।

क्या ज्यादा आम खाने से चेहरे पर निकलते हैं पिंपल्स? गर्मियों की सबसे चर्चित बहस पर डॉक्टरों ने बताई त्वचा की असली कहानी

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही आम की मिठास लोगों के बीच उत्साह बढ़ा देती है, लेकिन इसके साथ एक पुरानी बहस भी फिर चर्चा में आ जाती है। अक्सर यह माना जाता है कि ज्यादा आम खाने से चेहरे पर पिंपल्स निकलने लगते हैं। कई लोग त्वचा खराब होने के डर से आम खाने से दूरी तक बना लेते हैं। खासतौर पर युवाओं के बीच यह धारणा काफी आम हो चुकी है कि आम और मुंहासों का सीधा संबंध होता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय इस सोच से अलग दिखाई देती है। उनका मानना है कि आम को सीधे तौर पर पिंपल्स की वजह मानना पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार त्वचा पर मुंहासे निकलने के पीछे कई शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं। हार्मोनल बदलाव, ऑयली स्किन, तनाव, अनियमित दिनचर्या, कम नींद, गलत खानपान और पर्याप्त पानी की कमी जैसे कई कारण त्वचा की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा आनुवंशिक कारण भी त्वचा पर असर डालते हैं। ऐसे में केवल आम को दोष देना एक अधूरी समझ मानी जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आम अपने आप में पोषण से भरपूर फल है। इसमें शरीर और त्वचा के लिए जरूरी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में सीमित मात्रा में आम का सेवन नुकसान की बजाय लाभ देने वाला माना जाता है। हालांकि समस्या तब बढ़ सकती है जब लोग आम को अत्यधिक मात्रा में खाना शुरू कर देते हैं या उसे असंतुलित खानपान के साथ शामिल करते हैं। गर्मियों में कई लोग आम के साथ अत्यधिक मीठे, क्रीमी या तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन भी करते हैं। ऐसे खाद्य संयोजन शरीर में सूजन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं, जिसका प्रभाव त्वचा पर दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि कई बार लोग वास्तविक कारणों को नजरअंदाज कर आम को जिम्मेदार मान लेते हैं। गर्मी के मौसम में त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ने के पीछे मौसम भी बड़ी भूमिका निभाता है। अधिक पसीना आना, त्वचा पर धूल-मिट्टी जमा होना, चेहरे को बार-बार छूना और साफ-सफाई की कमी त्वचा के रोमछिद्रों को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण चेहरे पर दाने और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में लोग मौसम और दिनचर्या के प्रभाव को समझने के बजाय सीधे आम को कारण मान लेते हैं। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कुछ लोगों में आम से जुड़ी एलर्जी जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है। कई बार चेहरे के आसपास लाल दाने, खुजली या छोटे चकत्ते दिखाई देते हैं जिन्हें लोग पिंपल समझ लेते हैं। जबकि कई मामलों में यह त्वचा की एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए त्वचा पर होने वाले हर बदलाव को एक्ने मान लेना भी सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित मात्रा में आम का सेवन, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और सही स्किन केयर आदतें अपनाने से त्वचा को स्वस्थ रखा जा सकता है। इसलिए आम को पूरी तरह दोष देने के बजाय जीवनशैली और शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना अधिक जरूरी माना जा रहा है।

मनाली में पर्यटन सीजन बना बड़ी चुनौती, शहर से अटल टनल तक फैले महाजाम ने बढ़ाई मुश्किलें; घंटों सड़कों पर थमे सैलानी और स्थानीय लोग

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मनाली इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण गंभीर ट्रैफिक संकट से जूझ रही है। पर्यटन सीजन अपने चरम पर है और लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या ने शहर की सड़कों पर दबाव कई गुना बढ़ा दिया है। स्थिति ऐसी बन गई है कि शहर से लेकर अटल टनल मार्ग तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई इलाकों में वाहन घंटों तक रेंगते रहे, जिससे पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बढ़ते ट्रैफिक दबाव ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर व्यवस्थाओं और तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को सप्ताहांत समाप्त होने के बाद भी पर्यटकों की आवाजाही में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सामान्य दिनों की तुलना में अधिक संख्या में वाहन सड़कों पर उतरे, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर हालात बिगड़ते चले गए। मनाली शहर, अटल टनल मार्ग, सोलंगनाला, पलचान, वशिष्ठ और बाजार क्षेत्रों में सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सबसे अधिक दबाव मनाली से सोलंगनाला और अटल टनल की ओर जाने वाले मार्गों पर देखने को मिला, जहां कई किलोमीटर तक वाहन फंसे रहे। जाम का असर केवल घूमने आए पर्यटकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्थानीय लोगों की दिनचर्या भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुई। टैक्सी चालक, होटल कर्मचारी, स्कूल जाने वाले बच्चे और रोजमर्रा के कार्यों के लिए निकलने वाले लोगों को घंटों तक सड़कों पर समय बिताना पड़ा। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती भीड़ के अनुपात में ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारियां पर्याप्त नहीं दिखाई दे रही हैं। शहर के कई हिस्सों में अव्यवस्थित पार्किंग और अनियोजित यातायात व्यवस्था ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह रही कि इन दिनों प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव भी बना हुआ है। पंचायत चुनावों के चलते सुरक्षा और पुलिस बल के कई कर्मियों की ड्यूटी अन्य जिम्मेदारियों में लगी हुई है। सामान्य परिस्थितियों में पर्यटन सीजन के दौरान बड़ी संख्या में जवान ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन मौजूदा समय में सीमित स्टाफ के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित होती दिखाई दे रही हैं। परिणामस्वरूप यातायात नियंत्रण की कोशिशों के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। उनका कहना है कि बेहतर पार्किंग व्यवस्था, शटल सेवाएं और वैकल्पिक यातायात योजनाएं अब समय की जरूरत बन चुकी हैं। दूसरी ओर प्रशासन भी लोगों से सहयोग की अपील कर रहा है और अनावश्यक निजी वाहनों के उपयोग से बचने की सलाह दे रहा है। फिलहाल बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के बीच मनाली का ट्रैफिक संकट आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।

संघर्ष से सफलता तक: ‘सारांश’ के 42 साल पर अनुपम खेर ने सुनाई सपनों, मेहनत और पहचान बनने की कहानी

नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा में कुछ कहानियां केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीवंत मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी दिग्गज अभिनेता Anupam Kher की है, जिन्होंने सीमित साधनों और बड़े सपनों के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में अपनी जगह बनाई। उनकी पहली फिल्म Saaransh के 42 साल पूरे होने के मौके पर अभिनेता ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने एक बार फिर उनके संघर्षपूर्ण सफर को चर्चा में ला दिया। वर्ष 1984 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अनुपम खेर को फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई थी। खास बात यह थी कि अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने उम्र से कहीं अधिक बड़े किरदार को निभाकर अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है। यह फिल्म उनके करियर के लिए केवल शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसे सफर की नींव बनी जिसने आगे चलकर उन्हें सैकड़ों फिल्मों तक पहुंचाया। अपने अनुभव साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि जब वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे थे, तब उनके पास केवल 37 रुपए थे। न कोई बड़ा सहारा था और न ही इंडस्ट्री में मजबूत पहचान। लेकिन उनके पास एक चीज थी—अपने सपनों पर अटूट विश्वास। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति मेहनत और धैर्य बनाए रखे तो सफलता की राह बनाई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बीते चार दशकों में दर्शकों, निर्देशकों, निर्माताओं और साथी कलाकारों से उन्हें जो प्यार मिला, वह उनकी कल्पना से कहीं ज्यादा था। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अब तक वे 551 फिल्मों का हिस्सा बन चुके हैं। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, समर्पण और अभिनय के प्रति उनके जुनून की कहानी भी बयां करता है। अभिनेता ने अपने सफर में साथ देने वाले लोगों का भी आभार व्यक्त किया और उन फिल्मकारों को विशेष धन्यवाद दिया, जिनका उनके करियर में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने अपने शुरुआती दौर की कई यादों को भी साझा किया और बताया कि फिल्म रिलीज के समय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन समय ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। आज भी जब भारतीय सिनेमा में दमदार अभिनय और यादगार किरदारों की बात होती है तो उनकी पहली फिल्म का नाम जरूर सामने आता है। उनका सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह कहानी बताती है कि सफलता की शुरुआत अक्सर छोटी होती है, लेकिन हौसले बड़े होने चाहिए।