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टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

लाइफस्टाइल | गर्मियों में धूप, धूल और पसीने की वजह से त्वचा डल और टैन हो जाती है। ऐसे में लोग महंगे फेस वॉश और स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसी कारण अब लोग घरेलू और नेचुरल स्किन केयर की ओर लौट रहे हैं। घर पर बने क्लींजर के फायदेब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं:त्वचा को गहराई से साफ करती हैंडेड स्किन हटाती हैंटैनिंग कम करती हैंस्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाती हैं कैसे बनाएं होममेड फेस क्लींजर?इसके लिए आपको चाहिए:1 चम्मच कॉफी पाउडर1 चम्मच ताजा दही1 चम्मच शहदइन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। कैसे करें इस्तेमाल?चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें20–25 मिनट तक छोड़ देंफिर साफ पानी से धो लेंहफ्ते में 2–3 बार इस्तेमाल करें सावधानी जरूरी हैपहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें।यह घरेलू क्लींजर बिना केमिकल के त्वचा को साफ करने और प्राकृतिक निखार देने में मदद कर सकता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरा ज्यादा मुलायम, साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।

हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स

नई दिल्ली। आज के समय में बाल झड़ने की समस्या हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। जैसे ही बाल गिरने लगते हैं, लोग तुरंत नया शैंपू खरीद लेते हैं कभी प्याज वाला, कभी अदरक वाला, कभी “हर्बल” नाम देखकर। मार्केटिंग भी इसी उम्मीद पर टिकी होती है कि लोग सोचेंगे कि नया प्रोडक्ट ही उनकी समस्या का हल है। लेकिन हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। उनका मानना है कि शैंपू बदलने से बालों का झड़ना नहीं रुकता, क्योंकि असली समस्या शैंपू नहीं बल्कि स्कैल्प की स्थिति होती है। स्कैल्प की गंदगी कैसे बढ़ाती है हेयर फॉल?बालों की जड़ों यानी स्कैल्प पर अगर तेल, धूल और पसीना जमा हो जाए तो रोमछिद्र (pores) बंद होने लगते हैं। इससे:बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषण कम पहुंचता हैस्कैल्प में इंफेक्शन या डैंड्रफ बढ़ सकता हैबाल कमजोर होकर तेजी से गिरने लगते हैंइसलिए सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट बदलने से ज्यादा जरूरी है कि स्कैल्प को साफ और बैलेंस रखा जाए। प्याज और अदरक वाले शैंपू का सचआजकल बाजार में “ऑनियन शैंपू”, “जिंजर शैंपू” जैसे कई प्रोडक्ट मिलते हैं, जिनका दावा होता है कि ये हेयर फॉल रोक देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि शैंपू एक wash-off product होता है, जो कुछ ही मिनट में धो दिया जाता है। ऐसे में उसमें मौजूद हर्बल इंग्रीडिएंट्स को स्कैल्प में गहराई तक असर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ नाम या इंग्रीडिएंट देखकर यह मान लेना कि हेयर फॉल रुक जाएगा, सही नहीं है। जावेद हबीब की असली हेयर केयर टिप्सहेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार बालों की सही देखभाल के लिए कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है:स्कैल्प को नियमित रूप से साफ रखेंहल्का और बैलेंस्ड शैंपू इस्तेमाल करेंजरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट बदलने से बचेंडैंड्रफ और ऑयल बिल्डअप को कंट्रोल करेंसही डाइट और नींद का ध्यान रखें बालों का झड़ना रोकने का कोई “मैजिक शैंपू” नहीं है। असली समाधान स्कैल्प की सफाई, सही हेयर केयर रूटीन और लाइफस्टाइल में सुधार है। बार-बार शैंपू बदलना समस्या को हल करने के बजाय उसे और उलझा सकता है।

Aaj Ka Rashifal 18 May: 5 राशियों के लिए दिन रहेगा लाभदायक

नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष के अनुसार 18 मई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के हिसाब से कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला रहेगा। खासतौर पर 5 राशियों के लिए व्यापार और नौकरी में लाभ के योग बन रहे हैं। मेष राशिव्यापार में नई डील मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। मिथुन राशिनए अवसर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कार्यस्थल पर आपकी बातों को महत्व मिलेगा। सिंह राशिकरियर में प्रगति के योग हैं। प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में लाभ की स्थिति बनेगी। तुला राशिभाग्य का साथ मिलेगा। नए कॉन्ट्रैक्ट या डील फाइनल हो सकती है। नौकरी में बदलाव के अच्छे अवसर मिलेंगे। कुंभ राशिआर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। व्यापार में तेजी आएगी। नौकरी में स्थिरता और सम्मान बढ़ेगा। बाकी राशियों का हालअन्य राशियों के लिए दिन सामान्य रहेगा। किसी भी बड़े निर्णय में सोच-समझकर आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है। 18 मई का दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अच्छा रहेगा जो करियर में बदलाव या व्यापार विस्तार की योजना बना रहे हैं। मेहनत और सही निर्णय से सफलता मिल सकती है।

भगवान शिव को कौन से फूल प्रिय हैं, पूजा में क्या करें इस्तेमाल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा को अत्यंत सरल और भावपूर्ण माना गया है। शिवजी को “भोलेनाथ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल सच्ची श्रद्धा और शुद्ध भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, शिव पूजा में किसी एक फूल की अनिवार्यता नहीं होती, बल्कि भक्त की भावना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। फिर भी कुछ फूल और पत्ते ऐसे हैं जिन्हें शिवजी को अत्यंत प्रिय माना गया है। शिवजी को प्रिय माने जाने वाले प्रमुख पुष्पशिव आराधना में कई प्राकृतिक सामग्री का विशेष महत्व है। इनमें से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं- धतूरा (Datura)धतूरा को शिवजी का अत्यंत प्रिय पुष्प माना गया है। इसे वैराग्य और त्याग का प्रतीक भी माना जाता है। शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आक/मदार का फूलआक या मदार का फूल भी शिव पूजा में विशेष स्थान रखता है। यह शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और इसे शिव आराधना में अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है। सफेद फूलसफेद कमल, चमेली या अन्य सफेद पुष्प शांति, पवित्रता और संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं। शिवजी को सफेद रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। बेलपत्र: शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्साहालांकि बेलपत्र फूल नहीं है, लेकिन शिव पूजा में इसे सबसे महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है और इसे अर्पित करने से शिव कृपा प्राप्त होती है। शमी के पत्ते और उनका महत्वशमी के पत्ते विजय, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें शिव पूजा में अर्पित करने से जीवन में बाधाओं के दूर होने की मान्यता है। असली पूजा का सार: भाव और श्रद्धाशिव पूजा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भगवान शिव बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं। किसी भी पुष्प या पत्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण है भक्त की आस्था और निष्ठा। शास्त्रों के अनुसार, यदि श्रद्धा शुद्ध हो तो एक साधारण बेलपत्र भी शिव कृपा पाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। शिव पूजा में धतूरा, आक, सफेद फूल, शमी पत्ते और बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन अंततः पूजा का मूल आधार भाव और विश्वास ही है। यही कारण है कि भगवान शिव को “आशुतोष” यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता कहा जाता है।

पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली। बालों का झड़ना आज एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में इसका पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। पुरुषों में जहां समय के साथ सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल तेजी से कम होकर गंजापन दिखने लगता है, वहीं महिलाओं में आमतौर पर पूरे सिर में हल्का-हल्का बाल पतला होता है, लेकिन पूरी तरह गंजापन बेहद कम देखा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है। महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिकाबाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है। उम्र और हार्मोनल बदलाव का असजैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है। पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।

Shiv Puja Tips: सोमवार को कैसे करें शिवजी की पूजा, मिलेगा विशेष फल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। शिव को “भोलेनाथ” कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सरल भक्ति से भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे मन से की गई पूजा से ही महादेव कृपा बरसाते हैं।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार शिव पूजा करें तो उसका प्रभाव और भी अधिक शुभ माना जाता है। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में बाधाएं भी कम हो सकती हैं। राशि अनुसार शिव पूजा विधि- मेष राशिमेष जातक तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र पर “श्रीराम” लिखकर अर्पित करना शुभ माना जाता है। वृषभ राशिवृषभ जातक दूध, दही और शक्कर से शिव अभिषेक करें। सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें। मिथुन राशिगन्ने के रस या शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। इससे साधना में सफलता मिलने की मान्यता है। कर्क राशिकच्चे दूध, दही, घी और मिश्री से अभिषेक करें। सफेद पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें। सिंह राशिगुड़ मिश्रित जल और शुद्ध घी से शिव अभिषेक करें। यह सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है। कन्या राशिभांग, पान, शमीपत्र और बेलपत्र अर्पित करें और विधिवत पूजा करें। तुला राशिदही, शहद या गन्ने के रस से अभिषेक करें और सुगंधित पुष्प चढ़ाएं। वृश्चिक राशिदूध, शक्कर और शहद मिलाकर अभिषेक करें। लाल पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें। धनु राशिकेसर या हल्दी मिले दूध से अभिषेक करें। पीले फूल और फल चढ़ाएं। मकर राशिगंगाजल अर्पित करें और नीले पुष्प चढ़ाकर रुद्राक्ष से मंत्र जप करें। कुंभ राशितिल या बादाम के तेल से अभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। मीन राशिकेसर मिश्रित दूध और जल से अभिषेक करें। पीले फूल और फल अर्पित करें। सोमवार को की गई शिव आराधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति ला सकती है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक राशि अनुसार पूजा की जाए तो यह साधना और भी अधिक फलदायी मानी जाती है।

सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना को अत्यंत शुभ और शीघ्र फल देने वाली माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि महादेव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता हैं, जो केवल सच्चे भाव और श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शिव उपासना में जटिल विधियों की बजाय शुद्धता और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है, जिससे जीवन के कष्टों का निवारण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।  पंचामृत और पवित्र जल से अभिषेक का महत्शिव पूजन में जल और पंचामृत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, चीनी और घी से अभिषेक करते हैं, जिसे पंचामृत कहा जाता है। मान्यता है कि पंचामृत से किया गया अभिषेक न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। सफेद चंदन का लेपन मानसिक शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है। बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्तों का विशेष महत्वभगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही धतूरा, आंकड़े के फूल और शमी के पत्ते भी शिव पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। ये सभी सामग्री शिव के त्याग, तप और वैराग्य भाव का प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त इन वस्तुओं को अर्पित कर अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की कामना करते हैं। भोग और प्रसाद में सात्विकता का संदेशशिव पूजन में भोग का भी विशेष महत्व है। भक्त भगवान शिव को भांग, मिश्री और सात्विक मिठाइयों का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि सात्विक भोग से मन शुद्ध होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  भांग को शिव का प्रिय माना गया है, जो उनके वैराग्य और योगी स्वरूप का प्रतीक है। वहीं मिश्री और मिठाई भक्ति में मधुरता और सौम्यता का संदेश देती हैं। श्रद्धा और विश्वास से बदलता जीवनसोमवार को की गई शिव आराधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है। जल, पंचामृत और पवित्र पत्तों से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सुख और समृद्धि लाने की मान्यता रखती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई शिव भक्ति से जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और भाग्य का नया मार्ग खुलता है।

Dome Vs Turret Vs Bullet CCTV Camera: घर के किस हिस्से में कौन सा कैमरा लगाना चाहिए, खरीदने से पहले जानें सही जानकारी!

नई दिल्ली। अगर आप अपने घर की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ कैमरा खरीद लेना काफी नहीं है। घर के हर हिस्से के लिए अलग प्रकार का कैमरा ज्यादा बेहतर काम करता है। सही कैमरा सही जगह लगाने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। घर के अंदर के लिए Dome Camera सबसे बेहतरडोम CCTV कैमरा इनडोर सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसका गोल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन इसे छत या दीवार में आसानी से फिट कर देता है, जिससे यह ज्यादा दिखाई भी नहीं देता। यह कैमरा कमरों, हॉल, गलियारों और ढके हुए गैरेज जैसे स्थानों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका वाइड एंगल कवरेज पूरे कमरे को कवर करने में मदद करता है। आंगन और एंट्री पॉइंट के लिए Turret Camera सही विकल्पटरेट कैमरा, जिसे आईबॉल कैमरा भी कहा जाता है, आधुनिक घरों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह खासतौर पर घर के आंगन, मुख्य गेट, ड्राइववे और साइड एंट्री जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साफ विज़न और बेहतर नाइट विज़न देता है, साथ ही रिफ्लेक्शन की समस्या भी कम होती है। लंबी दूरी की निगरानी के लिए Bullet Camera बेस्टबुलेट कैमरा लंबी दूरी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग आमतौर पर बड़े यार्ड, खुले मैदान, फार्म हाउस और सड़क की ओर फेसिंग एरिया में किया जाता है। इसका लंबा आकार और मजबूत डिजाइन दूर तक निगरानी करने में मदद करता है और बाहरी सुरक्षा के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। घर की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कैमरे का सही चयन जरूरी है।घर के अंदर: Dome Camera आंगन और गेट: Turret Camera बड़े खुले एरिया: Bullet Camera सही जगह सही कैमरा लगाने से आपके घर की सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत हो जाती है।

WiFi vs LiFi: इंटरनेट की दुनिया में नई क्रांति! जानिए WiFi और LiFi में क्या है बड़ा फर्क

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर, ऑफिस, स्कूल या मनोरंजन हर जगह तेज इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। अब तक ज्यादातर लोग WiFi का इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन अब LiFi नाम की नई टेक्नोलॉजी तेजी से चर्चा में है। दोनों तकनीकें वायरलेस इंटरनेट देती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। WiFi रेडियो वेव्स यानी रेडियो सिग्नल के जरिए डेटा ट्रांसफर करता है। यही वजह है कि इसका नेटवर्क दीवारों के पार भी पहुंच जाता है और पूरे घर या ऑफिस में इंटरनेट आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी तरफ LiFi यानी Light Fidelity इंटरनेट पहुंचाने के लिए LED लाइट का इस्तेमाल करता है। इसमें बल्ब बेहद तेजी से ऑन-ऑफ होकर डेटा ट्रांसफर करता है, जिसे इंसानी आंखें पहचान नहीं पातीं। LiFi को इंटरनेट की अगली पीढ़ी की तकनीक माना जा रहा है क्योंकि इसकी स्पीड WiFi से कई गुना ज्यादा हो सकती है। साथ ही यह ज्यादा सुरक्षित भी माना जाता है, क्योंकि इसका सिग्नल कमरे की रोशनी तक सीमित रहता है और बाहर आसानी से नहीं पहुंचता। हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जहां रोशनी नहीं पहुंचेगी, वहां इंटरनेट भी काम नहीं करेगा। WiFi जहां घरों, दुकानों और ऑफिसों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, वहीं LiFi का इस्तेमाल अस्पतालों, रिसर्च सेंटर और एयरक्राफ्ट जैसी जगहों पर ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, जहां रेडियो सिग्नल से दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। फिलहाल LiFi नई तकनीक है और इसका इस्तेमाल सीमित है, लेकिन आने वाले समय में WiFi और LiFi मिलकर इंटरनेट की दुनिया को और ज्यादा तेज, सुरक्षित और स्मार्ट बना सकते हैं।

PM मोदी की अपील के बाद बड़ा बदलाव, गैस चूल्हे की जगह इंडक्शन स्टोव को बढ़ावा देने की तैयारी

नई दिल्ली। पीएम मोदी की तेल और गैस बचाने की अपील के बाद केंद्र सरकार अब रसोई में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। सरकार की योजना देशभर में LPG की निर्भरता कम करने के लिए इंडक्शन कुकटॉप को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की है। इसके लिए एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने नेशनल एफिशिएंट कुकिंग प्रोग्राम के तहत लाखों इंडक्शन स्टोव उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक EESL ने पहले चरण में करीब 2 लाख इंडक्शन कुकटॉप के लिए टेंडर जारी किया है, जो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। आगे चलकर सरकार की योजना इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की है, जिसमें 60 से 80 लाख यूनिट तक इंडक्शन स्टोव खरीद और वितरण का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसका मकसद बिजली आधारित खाना पकाने को बढ़ावा देकर एलपीजी की खपत पर दबाव कम करना है। सरकार पहले भी LED बल्ब योजना के जरिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा बचत अभियान चला चुकी है, जिससे कीमतें कम हुई थीं और इस्तेमाल बढ़ा था। अब उसी मॉडल को इंडक्शन कुकटॉप पर लागू करने की तैयारी है ताकि घरेलू कुकिंग सिस्टम धीरे-धीरे हाईटेक और इलेक्ट्रिक आधारित बन सके। हालांकि इस बदलाव की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आयातित एलपीजी व कच्चे तेल पर बढ़ता दबाव भी माना जा रहा है। फिलहाल सरकार का फोकस ऊर्जा बचत, लागत में कमी और घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग को मजबूत बनाने पर है। टैग:इंडक्शन चूल्हा,PM मोदी,सरकारी योजना,EESL,एलपीजी,ऊर्जा बचत,LED योजना,भारत सरकार,हाईटेक किचन,इलेक्ट्रिक कुकिंग