इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।
पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है।
महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?
महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिका
बाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है।
उम्र और हार्मोनल बदलाव का अस
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है।
पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।