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नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम

नई दिल्ली। नारद पुराण में जीवन, मृत्यु और परलोक से जुड़े गहरे रहस्यों का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार यमलोक की यात्रा करती है और वहीं उसे पाप और पुण्य का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार यह यात्रा साधारण नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह व्यक्ति के जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करती है। नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग अत्यंत लंबा बताया गया है, जिसे छियासी हजार योजन तक फैला हुआ कहा गया है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर होता है, ऐसे में यह दूरी अत्यंत विशाल मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, दान और पुण्य कर्म करता है, उसकी यह यात्रा सरल और सुखद होती है, जबकि पाप कर्म करने वालों को इस मार्ग में कठिनाइयों और कष्टों का सामना करना पड़ता है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि यमलोक के मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं, कहीं कीचड़, कहीं अग्नि, कहीं तीखी धार वाली शिलाएं और कहीं कांटों से भरे मार्ग मिलते हैं। पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं के बीच यमलोक तक ले जाते हैं। वे भय और कष्ट के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं और अपने जीवन के पापों का फल भोगते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपने जीवन में दान-पुण्य और धर्म का पालन करते हैं, उन्हें इस मार्ग में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे जीवों को उत्तम भोजन, वस्त्र, आभूषण और सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अन्न दान करने वाले को उत्तम भोजन, जल दान करने वाले को शीतल पेय, वस्त्र दान करने वाले को दिव्य वस्त्र और गोदान करने वाले को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों का सम्मान करता है, धर्म का पालन करता है और सदैव ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है, उसे यमलोक की यात्रा में विशेष सम्मान मिलता है और वह सुखपूर्वक धर्मराज के लोक तक पहुंचता है। अंत में धर्मराज जीवों को उनके कर्मों के अनुसार निर्णय देते हैं। पुण्यात्माओं को स्वर्ग और सुखमय लोक प्राप्त होता है, जबकि पापियों को उनके कर्मों के अनुसार कष्टदायक फल भोगना पड़ता है। पुराणों में यह संदेश दिया गया है कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे धर्म, सत्य, दान और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए, क्योंकि अंततः हर जीव को अपने कर्मों का ही फल प्राप्त होता है।

गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म

नई दिल्ली(New Delhi)।  ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व Ganga Dussehra इस वर्ष 2026 में 24 मई की शाम से शुरू होकर 25 मई की दोपहर तक रहेगा। इसी कारण इसकी सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि पर्व 24 मई को मनाया जाए या 25 मई को। पंचांग गणना के अनुसार उदया तिथि को महत्व देते हुए इस बार गंगा दशहरा 25 मई 2026, सोमवार को मनाना ही शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और इसी कारण इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसी वजह से देशभर में प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस वर्ष गंगा स्नान के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:40 से 05:23 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 से 01:10 बजे तक। इसके अलावा सूर्योदय के समय 06:06 बजे स्नान और सूर्य अर्घ्य देना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार हस्त नक्षत्र और रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि यह पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है। वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

शरीर पर छिपकली गिरना शुभ या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में जानें हर अंग का संकेत

नई दिल्ली। प्राचीन मान्यताओं और ज्योतिषीय ग्रंथ Samudrik Shastra में शरीर पर छिपकली गिरने को केवल एक सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संकेत के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर छिपकली गिरने का अर्थ अलग-अलग फल देता है, जो व्यक्ति के जीवन में शुभ या अशुभ घटनाओं की ओर इशारा कर सकता है। सिर पर छिपकली गिरना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे धन, सम्मान या बड़े अवसर की प्राप्ति का संकेत बताया गया है। वहीं माथे पर गिरना किसी पुराने परिचित से मुलाकात या सामाजिक मान-सम्मान बढ़ने का संकेत देता है। नाक पर छिपकली गिरने को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें रोग से राहत मिलने की संभावना बताई जाती है। कान पर छिपकली गिरना शुभ समाचार या लाभ का संकेत माना जाता है, जबकि आंख पर गिरना मानसिक तनाव से मुक्ति का प्रतीक बताया जाता है। होंठों पर इसके प्रभाव को आर्थिक स्थिति से जोड़ा गया है, जिसमें ऊपर के होंठ पर गिरना नुकसान और नीचे के होंठ पर गिरना लाभ का संकेत माना जाता है। हाथों पर छिपकली गिरने के भी अलग अर्थ बताए गए हैं—दाहिने हाथ पर गिरना सफलता और सम्मान का संकेत है, जबकि बाएं हाथ पर इसे सावधानी का संकेत माना गया है। पेट और नाभि क्षेत्र पर गिरना सुख-समृद्धि और संतान सुख से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है। पीठ पर छिपकली गिरना आमतौर पर अशुभ माना जाता है, जबकि पैर या जांघ पर इसका गिरना यात्रा, स्थान परिवर्तन या वाहन सुख से जुड़ा संकेत बताया जाता है। हालांकि यह सभी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी लोग इन्हें लोक आस्था और ज्योतिषीय संकेत के रूप में देखते हैं।

वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

नई दिल्ली ।  Shakun Apshakun: अधिकांश घर में लोग जगह की बचाने के लिए दरवाजे के पीछे, बैग, कपड़े, इत्यादि सामान लटाका देते हैं. वैसे तो लोग इस आदत पर बहुत ध्यान नहीं देते, लेकिन शास्त्रों में इसके बड़े नुकसान बताए गए हैं. शास्त्रों की मानें तो दरवाजे के पीछे सामान लटकाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. मान्यता है कि कुछ चीजों को दरवाजे के पीछे लटकाने से निगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है. साथ ही परिवार की आर्थिक तरक्की में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होने लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को बेहद साफ-सुथरा रखना चाहिए. आइए, अब जानते हैं कि दरवाजे के पीछे किन चीजों की लटकाना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे ना लटकाएं कपड़ेशास्त्र-पुराणों के अनुसार, दरवाजे के पीछे कभी भी सूखे या भींगे कपड़े नहीं लटकाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे टंगे भींगे कपड़े भयानक वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. कहा जाता है कि लगातार ऐसा करने से तनाव, कलह और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ऐसा करने से राहु दोष भी उत्पन्न हो सकता है. पुराने बैग और दवाइयांवास्तु शास्त्र की मानें तो दरवाजे के पीछे दवाइयों का थैला, पुराने बैग इत्यादि टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से परिवार के सदस्य बीमारियों से घिरे रहते हैं. कमाई का अधिकांश हिस्सा इलाज पर खर्च होता है. इसके अलावा दरवाजे के पीछे पुराने कैलेंडर को भी लटकाने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे करियर में तरक्की रुक जाती है जूते और चप्पलशकुन शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल इत्यादि के थैले को भी नहीं टांगना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होने लगता है. इस स्थिति में अच्छी कमाई के बावजूद भी धन नहीं टिकता है. इसलिए, दरवाजे के पीछे भूलकर भी जूते-चप्पल ना लटकाएं कैसे दूर होगी निगेटिव एनर्जी?वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे का हिस्सा बिल्कुल साफ और खाली रखना चाहिए. इसके साथ ही वास्तु दोष को दूर करने के लिए वहां स्वास्तिक का चिह्न बनाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होने लगती है.

Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी दौरान गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों का स्मरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिष और धर्म ग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा का दस दिवसीय पर्व 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 26 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और विशेष पूजन करेंगे। निर्णयसिंधु ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि जब ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ता है, तब गंगा दशहरा का पर्व उसी अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में मनाना शास्त्र सम्मत माना जाता है। इस बार गंगा दशहरा 26 मई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि का चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य का विशेष संयोग इस पर्व को महापुण्यकारी बना रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इसी प्रकार के योग में मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। अधिकमास में 33 देवों की पूजा का महत्वअधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इस मास में भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों के पूजन और नामस्मरण का विशेष महत्व बताया गया है। इन 33 देव स्वरूपों में विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, केशव, माधव, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, नारायण, त्रिविक्रम, वासुदेव, शेषशायी, दामोदर और श्रीपति जैसे दिव्य नाम शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन नामों का श्रद्धा से जप करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। अधिकमास में करें ये विशेष उपायधर्माचार्यों के अनुसार, अधिकमास में दान और सेवा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस अवधि में 33 पुए कांसे के पात्र में रखकर घी सहित ब्राह्मण को दान करने से 33 प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके अलावा गंगा स्नान, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दीपदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से भी विशेष पुण्य मिलता है। क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। हिंदू पंचांग में चंद्र और सौर गणना के संतुलन के लिए इसे जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब किसी मास का कोई स्वामी ग्रह नहीं होता, तब भगवान विष्णु उसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा देते हैं। इसी कारण यह महीना भक्ति, तप और दान के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

बुध उदय 2026: वृषभ राशि में बनेगा शक्तिशाली बुधादित्य योग, 6 राशियों की चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली। 26 मई 2026 को बुध ग्रह वृषभ राशि में उदित होने जा रहे हैं। खास बात यह है कि वृषभ राशि में पहले से सूर्य देव विराजमान हैं, जिसके कारण बुध और सूर्य की युति से बेहद प्रभावशाली बुधादित्य योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुध के उदित होते ही यह योग और अधिक शक्तिशाली हो जाएगा, जिसका सीधा असर कई राशियों के करियर, व्यापार, धन लाभ और पारिवारिक जीवन पर देखने को मिलेगा। खास तौर पर वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, व्यापार, वाणी, तर्क और संचार का कारक ग्रह माना गया है। वहीं सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जब बुध और सूर्य की युति बनती है तो व्यक्ति की निर्णय क्षमता, नेतृत्व कौशल और आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगती है। इस बार यह संयोग शुक्र की राशि वृषभ में बन रहा है, जहां बुध स्वयं को सहज और मजबूत स्थिति में महसूस करते हैं। वृषभ राशि वालों को उन्नति के नए अवसरबुध का उदय वृषभ राशि के लग्न भाव में होगा। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और व्यक्तित्व में आकर्षण आएगा। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी और व्यापार में सफलता मिलने के संकेत हैं। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और परिवार के साथ संबंध मधुर होंगे। स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिल सकता है। कर्क राशि वालों की बढ़ेगी आयकर्क राशि के लिए बुध का उदय एकादश भाव में होगा, जिसे आय और लाभ का स्थान माना जाता है। ऐसे में नए आय स्रोत बनने के योग हैं। मार्केटिंग, मीडिया, व्यापार और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को विशेष फायदा मिल सकता है। आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होंगी और करियर में नई संभावनाएं खुलेंगी। सिंह राशि को करियर में बड़ी सफलतासिंह राशि के जातकों के लिए बुध दशम भाव में उदित होंगे। यह भाव करियर और कार्यक्षेत्र का माना जाता है। नौकरी में प्रमोशन, नई जिम्मेदारियां और व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। पिता या वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। इस दौरान लिए गए फैसले भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। कन्या राशि वालों को मिलेगा भाग्य का साथकन्या राशि के नवम भाव में बुध का उदय होने जा रहा है। यह समय भाग्य वृद्धि और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। लंबे समय से रुके काम पूरे होने की संभावना है। वृश्चिक राशि के व्यापार में आएगी तेजीवृश्चिक राशि के सप्तम भाव में बुध उदित होंगे। इससे साझेदारी के कारोबार में लाभ मिलेगा। वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। व्यापार विस्तार और नए समझौतों से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। अचानक धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। कुंभ राशि वालों को मिलेगा आर्थिक लाभकुंभ राशि के चतुर्थ भाव में बुध उदित होंगे, जिससे घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। शिक्षा, संपत्ति और पारिवारिक मामलों में शुभ परिणाम मिल सकते हैं। आर्थिक क्षेत्र में मजबूती आएगी और परिवार से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। प्रेम संबंधों में भी मधुरता बढ़ेगी। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि बुधादित्य योग का प्रभाव बुद्धि, व्यापार और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है। ऐसे में 26 मई के बाद कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण जरूर कराना चाहिए

today Rashifal 19 May 2026: मेष की चमकेगी किस्मत, कर्क को मिलेगा राहत का बड़ा संकेत, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली। 19 मई 2026, मंगलवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की खास चाल के कारण कई राशियों के लिए तरक्की, धन लाभ और नए अवसर लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार दोपहर 2:19 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। सुबह 8:42 बजे तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, फिर आर्द्रा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। चंद्रमा पूरे दिन मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इस दिन गजकेसरी, बुधादित्य, धृति, शंख, रूचक, वाशि और सुनफा योग का शुभ संयोग बन रहा है। विशेष रूप से मेष, कर्क, तुला और मकर राशि वालों को लाभ के संकेत मिल रहे हैं। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशि (Aries)मेष राशि वालों के लिए मंगलवार आर्थिक दृष्टि से बेहद शुभ रहने वाला है। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। Property और निवेश से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। नया मकान, वाहन या दुकान खरीदने के योग बन रहे हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और विवाह की बात आगे बढ़ सकती है। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। शुभ रंग: लालशुभ अंक: 9 वृष राशि (Taurus)वृषभ राशि वालों का दिन भागदौड़ भरा रहेगा, लेकिन मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। व्यापार में नए आइडिया लाभ दिला सकते हैं। माता-पिता के सहयोग से कोई नया काम शुरू हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलेंगी। ज्यादा दौड़भाग के कारण थकान और पैरों में दर्द की समस्या रह सकती है। शुभ रंग: सफेदशुभ अंक: 2 मिथुन राशि (Gemini)मिथुन राशि वालों को स्वास्थ्य के मामले में सतर्क रहने की जरूरत है। मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी महसूस हो सकती है। कार्यक्षेत्र में फिलहाल बड़े बदलाव से बचना बेहतर रहेगा। परिवार में व्यवहार को लेकर विवाद हो सकता है। संतान की उपलब्धि मन को खुशी देगी। शुभ रंग: हराशुभ अंक: 5 कर्क राशि (Cancer)कर्क राशि वालों के लिए मंगलवार राहत लेकर आएगा। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां कम हो सकती हैं। अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो उससे राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार में विवाह या मांगलिक कार्यक्रम की चर्चा हो सकती है। साझेदारी के कारोबार में सावधानी बरतना जरूरी रहेगा। शुभ रंग: दूधिया सफेदशुभ अंक: 7 सिंह राशि (Leo)सिंह राशि वालों को अपने निजी मामलों को ज्यादा लोगों से साझा करने से बचना चाहिए। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। दूसरी कंपनी से आकर्षक ऑफर मिलने की संभावना है। नई संपत्ति खरीदने का सपना पूरा हो सकता है। बच्चों की संगति पर ध्यान देना जरूरी होगा। शुभ रंग: सुनहराशुभ अंक: 1 कन्या राशि (Virgo)कन्या राशि वालों के लिए दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में कुछ नया करने की सोच मजबूत होगी।शेयर बाजार या निवेश से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। नया वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। शुभ रंग: गहरा हराशुभ अंक: 6 तुला राशि (Libra)तुला राशि वालों को कामकाज में संतुलन बनाए रखना होगा। दूसरों के मामलों में ज्यादा दखल नुकसान पहुंचा सकता है।जीवनसाथी के साथ पुराने मतभेद खत्म हो सकते हैं। मानसिक तनाव रहेगा, इसलिए योग और ध्यान लाभकारी रहेगा। परिवार में किसी बात को लेकर बहस हो सकती है। शुभ रंग: हल्का नीलाशुभ अंक: 8 वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन प्रगति देने वाला रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और नई योजनाएं सफल होंगी।व्यापार में अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। घर में नया वाहन या मकान खरीदने की योजना बन सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में गुरुजनों का सहयोग मिलेगा। शुभ रंग: मैरूनशुभ अंक: 3 धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि वालों के लिए मंगलवार यादगार रहने वाला है। पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है।उधार दिया गया पैसा वापस मिलने की संभावना है। यात्रा के दौरान किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात करियर में लाभ दिला सकती है। जल्दबाजी में किए गए वादे भूलने से बचें। शुभ रंग: पीलाशुभ अंक: 4 मकर राशि (Capricorn)मकर राशि वालों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है।स्वास्थ्य में सुधार होगा। विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से भटक सकता है, इसलिए फोकस बनाए रखें। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें। शुभ रंग: कालाशुभ अंक: 10 कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि वालों के लिए दिन चुनौतियों से भरा रह सकता है। विरोधी सक्रिय रहेंगे और कार्यक्षेत्र में बाधाएं डालने की कोशिश करेंगे।व्यापार में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार में किसी की बात से मन दुखी हो सकता है। शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 11 मीन राशि (Pisces)मीन राशि वालों के लिए मंगलवार बेहद शुभ रहने वाला है। व्यापार में लाभ और करियर में सफलता मिलने के योग हैंधन संबंधित मामलों में मित्रों और परिवार का सहयोग मिलेगा। घर में धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम हो सकता है। कानूनी मामलों में अनुभवी व्यक्ति की सलाह लाभ दिलाएगी। शुभ रंग: केसरियाशुभ अंक: 12 Disclaimer: यह राशिफल ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

Aaj Ka Rashifal 18 May: 5 राशियों के लिए दिन रहेगा लाभदायक

नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष के अनुसार 18 मई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के हिसाब से कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला रहेगा। खासतौर पर 5 राशियों के लिए व्यापार और नौकरी में लाभ के योग बन रहे हैं। मेष राशिव्यापार में नई डील मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। मिथुन राशिनए अवसर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कार्यस्थल पर आपकी बातों को महत्व मिलेगा। सिंह राशिकरियर में प्रगति के योग हैं। प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में लाभ की स्थिति बनेगी। तुला राशिभाग्य का साथ मिलेगा। नए कॉन्ट्रैक्ट या डील फाइनल हो सकती है। नौकरी में बदलाव के अच्छे अवसर मिलेंगे। कुंभ राशिआर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। व्यापार में तेजी आएगी। नौकरी में स्थिरता और सम्मान बढ़ेगा। बाकी राशियों का हालअन्य राशियों के लिए दिन सामान्य रहेगा। किसी भी बड़े निर्णय में सोच-समझकर आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है। 18 मई का दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अच्छा रहेगा जो करियर में बदलाव या व्यापार विस्तार की योजना बना रहे हैं। मेहनत और सही निर्णय से सफलता मिल सकती है।

भगवान शिव को कौन से फूल प्रिय हैं, पूजा में क्या करें इस्तेमाल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा को अत्यंत सरल और भावपूर्ण माना गया है। शिवजी को “भोलेनाथ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल सच्ची श्रद्धा और शुद्ध भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, शिव पूजा में किसी एक फूल की अनिवार्यता नहीं होती, बल्कि भक्त की भावना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। फिर भी कुछ फूल और पत्ते ऐसे हैं जिन्हें शिवजी को अत्यंत प्रिय माना गया है। शिवजी को प्रिय माने जाने वाले प्रमुख पुष्पशिव आराधना में कई प्राकृतिक सामग्री का विशेष महत्व है। इनमें से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं- धतूरा (Datura)धतूरा को शिवजी का अत्यंत प्रिय पुष्प माना गया है। इसे वैराग्य और त्याग का प्रतीक भी माना जाता है। शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आक/मदार का फूलआक या मदार का फूल भी शिव पूजा में विशेष स्थान रखता है। यह शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और इसे शिव आराधना में अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है। सफेद फूलसफेद कमल, चमेली या अन्य सफेद पुष्प शांति, पवित्रता और संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं। शिवजी को सफेद रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। बेलपत्र: शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्साहालांकि बेलपत्र फूल नहीं है, लेकिन शिव पूजा में इसे सबसे महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है और इसे अर्पित करने से शिव कृपा प्राप्त होती है। शमी के पत्ते और उनका महत्वशमी के पत्ते विजय, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें शिव पूजा में अर्पित करने से जीवन में बाधाओं के दूर होने की मान्यता है। असली पूजा का सार: भाव और श्रद्धाशिव पूजा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भगवान शिव बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं। किसी भी पुष्प या पत्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण है भक्त की आस्था और निष्ठा। शास्त्रों के अनुसार, यदि श्रद्धा शुद्ध हो तो एक साधारण बेलपत्र भी शिव कृपा पाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। शिव पूजा में धतूरा, आक, सफेद फूल, शमी पत्ते और बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन अंततः पूजा का मूल आधार भाव और विश्वास ही है। यही कारण है कि भगवान शिव को “आशुतोष” यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता कहा जाता है।