पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 भारत में नहीं दिखेगा फिर भी क्यों खास है यह खगोलीय घटना

नई दिल्ली । साल 2026 में लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के रूप में सामने आ रहा है जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और वैज्ञानिक के साथ साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे खास माना जा रहा है हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस ग्रहण को अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे क्योंकि जिस समय यह ग्रहण लगेगा उस समय भारत में रात होगी ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक चलेगा इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा जिससे कुछ क्षेत्रों में दिन के समय भी अंधकार जैसा वातावरण बन जाएगा यह नजारा मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड और आइसलैंड में साफ तौर पर देखा जा सकेगा इसके अलावा उत्तरी स्पेन और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा जबकि फ्रांस ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा भारत में इस ग्रहण के दिखाई न देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं होता वहां सूतक काल लागू नहीं माना जाता इसलिए भारत के लोगों को इस दौरान किसी विशेष नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी हालांकि परंपराओं और मान्यताओं के चलते कुछ लोग फिर भी सावधानी बरतना पसंद करते हैं भारतीय संस्कृति में ग्रहण को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं जिनका पालन आज भी किया जाता है मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए लोग इस समय भोजन से दूरी बनाते हैं और पूजा पाठ या ध्यान में समय बिताते हैं खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है उन्हें घर के अंदर रहने और किसी भी नुकीली वस्तु के उपयोग से बचने को कहा जाता है ग्रहण का समय आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है कई लोग इसे मंत्र जाप और ध्यान साधना के लिए शुभ मानते हैं ऐसा विश्वास है कि इस दौरान किया गया जाप और साधना अधिक फलदायी होता है ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की भी परंपरा है जिसे शुद्धि और पुण्य प्राप्ति से जोड़ा जाता है हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है जो सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है फिर भी इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ा हुआ है यही कारण है कि हर ग्रहण को लेकर लोगों में जिज्ञासा और आस्था दोनों बनी रहती हैं
चिलकुर के इस धाम में मन्नत मांगते ही दूर होती है विदेश यात्रा की हर बाधा..

नई दिल्ली। भारत अपनी विविधता और आस्था के अनगिनत केंद्रों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के निकट एक ऐसा मंदिर है जिसकी ख्याति आधुनिक युग की जरूरतों से जुड़ी हुई है। उस्मान सागर झील के किनारे बसे चिलकुर गांव में स्थित भगवान वेंकटेश्वर का पावन धाम ‘चिलकुर बालाजी’ के नाम से जाना जाता है, जिसे लोग प्यार से ‘वीजा मंदिर’ भी कहते हैं। यह मंदिर उन युवाओं और पेशेवरों के लिए आशा की एक बड़ी किरण बन चुका है, जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी का सपना देखते हैं। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक माथा टेकने से वीजा मिलने की प्रक्रिया में आने वाली हर रुकावट जादुई रूप से दूर हो जाती है। इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसके पीछे एक अत्यंत भावुक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि 16वीं या 17वीं शताब्दी में भगवान तिरुपति बालाजी का एक अनन्य भक्त स्वास्थ्य कारणों से तिरुमाला की लंबी यात्रा करने में असमर्थ था। अपने भक्त की व्याकुलता और सच्ची भक्ति देख भगवान स्वयं चिलकुर के इसी स्थान पर प्रकट हुए थे। आज के दौर में इस स्थान ने एक अनूठी पहचान बना ली है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि यहाँ आने वाले भक्त अक्सर अपने हाथों में पेन और आवेदन पत्र जैसे दस्तावेज लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और विदेश यात्रा का सफल आशीर्वाद मांगते हैं। यहाँ मन्नत मांगने और उसे पूर्ण करने की परंपरा भी काफी दिलचस्प और अनुशासित है। जब कोई भक्त पहली बार अपनी मनोकामना लेकर आता है, तो वह मंदिर के गर्भगृह की 11 बार परिक्रमा करता है। जैसे ही उसकी विदेश जाने की मुराद पूरी हो जाती है और उसे वीजा प्राप्त हो जाता है, वह भगवान का धन्यवाद करने के लिए दोबारा मंदिर आता है और इस बार श्रद्धा भाव से 108 बार परिक्रमा करता है। चिलकुर बालाजी मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। यहाँ न तो कोई दान पेटी रखी गई है और न ही यहाँ किसी भी तरह का सशुल्क ‘वीआईपी’ दर्शन कराया जाता है। राजा हो या रंक, यहाँ सभी के लिए एक समान व्यवस्था है, जो इस मंदिर को आधुनिक समय में भी आध्यात्मिकता का एक सच्चा केंद्र बनाती है।
रविवार को जलदान और पूजन से मिलेगा अक्षय पुण्य, पितृ दोषों से मुक्ति का है यह सबसे शुभ समय

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सूर्य को जगत की आत्मा और प्रत्यक्ष देव माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना भगवान सूर्य नारायण की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य अपनी पूर्ण शक्ति और तेज के साथ विद्यमान होते हैं। प्रचंड गर्मी और तपती धूप वाले इस महीने में सूर्य देव की आराधना करने से न केवल व्यक्तित्व में निखार आता है, बल्कि जातक को आरोग्य शरीर और लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के प्रत्येक रविवार को नियमपूर्वक किए गए पूजन से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन के समस्त अंधकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह के रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। पूजन के लिए लाल या केसरिया रंग के वस्त्रों का चुनाव करना श्रेष्ठ रहता है, जो सूर्य के तेज का प्रतीक हैं। अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करते हुए उसमें जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर ‘ऊँ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की गिरती धारा से सूर्य की किरणों को देखना आंखों के स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। पूजन के अंत में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और सूर्य के 12 नामों का स्मरण करने से अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और पितृ दोषों से भी राहत मिलती है। ज्येष्ठ के रविवार को व्रत रखने के भी विशेष नियम बताए गए हैं। इस दिन नमक का सेवन वर्जित माना गया है, केवल फलाहार के माध्यम से ही व्रत पूर्ण किया जाता है। प्रचंड गर्मी के इस मौसम में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जलदान को इस माह में सबसे बड़ा धर्म माना गया है; प्यासे राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और जरूरतमंदों को छाता या चप्पल दान करना यज्ञ के समान फलदायी होता है। यह माह हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और सूर्य की असीमित ऊर्जा का उपयोग कर अपने जीवन को प्रकाशमान बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
COW PROTECTION PROTEST: गौ संरक्षण की मांग तेज, अशोकनगर में गोवंश को ‘राष्ट्रीय माता’ बनाने की मांग

HIGHLIGHTS : तहसील स्तर पर निकाली गई रैली, सौंपे गए ज्ञापन गोवंश की घटती संख्या पर जताई गंभीर चिंता तस्करी और अवैध वध को गैर-जमानती अपराध बनाने की मांग हर जिले में आदर्श गोशाला, गांवों में नंदीशाला की मांग गो-एम्बुलेंस और गोचर भूमि संरक्षण पर जोर COW PROTECTION PROTEST: मध्यप्रदेश। अशोकनगर में गौ सेवकों ने गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर तहसील स्तर पर रैली निकाली। रैली के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें गोवंश संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। उज्जैन में सनसनी: कृषि अध्ययनशाला के गेट पर धमकी भरा संदेश, लिखा- “तुम सब मरोगे” घटती संख्या और बदहाल हालात पर चिंता ज्ञापन में देशी गोवंश की लगातार घटती संख्या पर गहरी चिंता जताई गई। गौ सेवकों ने इसके पीछे भूख, सड़क दुर्घटनाएं, तस्करी और अवैध वध जैसे कारण बताए। साथ ही सड़कों और खेतों में भटकते पशुओं की दयनीय स्थिति को भी गंभीर समस्या बताया गया, जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई गई। सड़क सुरक्षा पर हाईकोर्ट का सवाल- अवैध कट और धीमी एंबुलेंस सेवा पर मांगा जवाब कड़े कानून और सुविधाओं की मांग गौ सेवकों ने मांग की कि गोवंश की तस्करी और वध को गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए। इसके अलावा गोवंश को ‘विधिक व्यक्ति’ का दर्जा देने, प्रत्येक जिले में आदर्श गोशाला और हर ग्राम पंचायत में नंदीशाला स्थापित करने की बात कही गई। साथ ही गो-एम्बुलेंस सेवा शुरू करने और गोचर भूमि के संरक्षण की भी मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने साले पर किया जानलेवा हमला, सड़क पर तड़पता छोड़ा जागरूकता और जनभागीदारी पर जोर आयोजकों ने स्कूली पाठ्यक्रम में गो-विज्ञान को शामिल करने की भी मांग रखी, ताकि नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़े। उनका कहना है कि यह अभियान किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की स्वस्फूर्त पहल है, जो सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रहित की भावना से प्रेरित है।
एक मई को बुद्ध पूर्णिमा पर अस्त होंगे बुध…. 27 दिनों तक इन राशियों पर पड़ेगा बुरा असर….

नई दिल्ली। एक मई को बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) का पर्व मनाया जाएगा. संयोगवश इसी दिन बुध (Budh Asta 2026) मेष राशि (Aries) में अस्त हो रहे हैं, जिससे बुध की स्थिति अगले 27 दिनों तक बहुत ही कमजोर हो जाएगी. ज्योतिष के अनुसार जब बुध ग्रह अस्त होते हैं, तो इसका असर खासतौर पर हमारी सोचने-समझने की क्षमता और बातचीत के तरीके पर पड़ता है. मई में बुध के अस्त होने से कुछ राशियों के लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी. इस दौरान जल्दबाजी में लिए गए फैसले परेशानी बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं किन राशियों को संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है। वृषभ राशि: इस समय आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है. पैसों के मामले में सतर्क रहें. बड़े निवेश या जोखिम लेने से बचें. छोटी-छोटी लापरवाही भी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। मिथुन राशि: आपकी योजनाएं इस दौरान पूरी तरह सफल नहीं हो पाएंगी. सेहत में उतार-चढ़ाव आ सकता है. कामकाज में भी अड़चनें आ सकती हैं. आत्मविश्वास ठीक है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस से बचें, वरना गलत फैसले नुकसान दे सकते हैं. कन्या राशि: रिश्तों के मामले में सावधानी जरूरी है. छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी बढ़ सकती है. मन में नकारात्मक सोच हावी हो सकती है, इसलिए बातचीत के जरिए चीजों को संभालने की कोशिश करें। वृश्चिक राशि: कार्यक्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है. तनाव के कारण आपका ध्यान भटक सकता है. काम प्रभावित हो सकता है. सहकर्मियों के साथ बहस या टकराव से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा। मीन राशि: इस दौरान मन थोड़ा उलझा हुआ रह सकता है. किसी भी फैसले को लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार करें. जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है, इसलिए धैर्य रखना जरूरी है।
सोमवार का अंक राशिफल: जानें सभी मूलांक के लिए दिन कैसा रहेगा..

नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन अंक ज्योतिष के दृष्टिकोण से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि आज का भाग्यांक 5 है, जो बुध ग्रह से प्रभावित होता है। बुध ग्रह को बुद्धि, संवाद, व्यापार और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में आज का दिन कई लोगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, जबकि कुछ को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है। अंक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति का मूलांक उसके जीवन की ऊर्जा और स्वभाव को दर्शाता है। आज मूलांक 1 से 9 तक के सभी जातकों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है, जो उनके करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और निजी जीवन को प्रभावित करेगा। मूलांक 1 के जातकों के लिए आज नेतृत्व और आत्मविश्वास बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं, लेकिन अहंकार से बचना जरूरी रहेगा ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे। मूलांक 2 के लोगों के लिए दिन भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। दूसरों के साथ तालमेल बनाए रखना आवश्यक होगा और अनावश्यक बहस से बचना बेहतर रहेगा। मूलांक 3 वालों के लिए आज रचनात्मकता और नए विचारों का दिन है। अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर सफलता मिलने की संभावना है और कार्यस्थल पर प्रशंसा भी मिल सकती है। मूलांक 4 के जातकों को आज मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा। कुछ कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास से स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी। मूलांक 5 के लिए आज का दिन विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। नए अवसर, यात्रा और बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। व्यापार और नौकरी दोनों में प्रगति की संभावना मजबूत है। मूलांक 6 वालों के लिए दिन संबंधों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने का है। पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी और पुराने संबंध मजबूत हो सकते हैं। मूलांक 7 के जातकों के लिए आज आत्मचिंतन और मानसिक शांति का समय है। कार्यों की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन योजना बनाने के लिए यह समय उपयोगी रहेगा। मूलांक 8 वालों के लिए जिम्मेदारियों का दबाव रह सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा, हालांकि आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत हैं। मूलांक 9 के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। कार्यों में तेजी आएगी और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिल सकते हैं।
आज का राशिफल 27 अप्रैल 2026: मेष और सिंह के लिए सफलता के संकेत, वृषभ और कन्या रहें सतर्क

नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल कई राशियों के जीवन में बदलाव के संकेत दे रही है। आज का दिन कुछ लोगों के लिए सफलता, आत्मविश्वास और नए अवसरों का द्वार खोल सकता है, जबकि कुछ राशियों को धैर्य और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है। यह दिन खासकर करियर, आर्थिक स्थिति, प्रेम संबंध और स्वास्थ्य के मामलों में मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं और नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। सिंह राशि वालों के लिए भी यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने का है। इन दोनों राशियों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। दूसरी ओर वृषभ और कन्या राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अनावश्यक खर्च या जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है, इसलिए सोच-समझकर आगे बढ़ना जरूरी होगा। मिथुन और तुला राशि के लिए दिन संतुलन बनाने का है। काम और निजी जीवन के बीच तालमेल बनाए रखना जरूरी रहेगा। छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन संवाद और समझदारी से उनका समाधान संभव है। कर्क राशि के जातकों को भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रहना पड़ सकता है, इसलिए परिवार और निजी संबंधों में धैर्य बनाए रखना बेहतर होगा। वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नए अवसर, यात्राएं और सीखने के मौके मिलने की संभावना है। यह समय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और नई योजनाओं को शुरू करने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। मकर और कुंभ राशि के जातकों को आज संयम और सावधानी से काम लेना होगा, क्योंकि कार्यक्षेत्र में कुछ दबाव या चुनौतियां सामने आ सकती हैं। धैर्य और योजना के साथ काम करने से स्थिति बेहतर होगी। मीन राशि के लिए आज का दिन सहयोग और टीमवर्क पर आधारित रहेगा। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और पुराने संपर्क फिर से सक्रिय हो सकते हैं। यह समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है।
सोना पहनने से बदल सकता है भाग्य? इन राशियों को लेकर ज्योतिष में कही गई अहम सावधानियां

नई दिल्ली। सोने के आभूषण भारतीय परंपरा और संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं। इसे केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों से जुड़ा शक्तिशाली तत्व भी माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सोने का संबंध सूर्य और गुरु ग्रह से जोड़ा जाता है, जिन्हें जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सम्मान का कारक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार सोना हर व्यक्ति के लिए समान परिणाम नहीं देता। इसका प्रभाव व्यक्ति की राशि, ग्रहों की स्थिति और जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। यही कारण है कि कुछ परिस्थितियों में सोना अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसे पहनने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। मान्यताओं के अनुसार मेष, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए सोने की अंगूठी पहनने को लेकर विशेष सावधानी बताई जाती है। कहा जाता है कि इन राशियों पर सोने का प्रभाव कभी-कभी असंतुलित परिणाम दे सकता है। ऐसी धारणा है कि गलत तरीके से सोना पहनने पर जीवन में आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि यह सभी विचार पूरी तरह परंपरागत और मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। आधुनिक दृष्टिकोण में इन्हें आस्था और सांस्कृतिक विश्वास का हिस्सा माना जाता है। ज्योतिष में सोना पहनने को लेकर कुछ नियम भी बताए गए हैं। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि सोने की अंगूठी को तर्जनी उंगली में पहनना शुभ होता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाएं हाथ में सोना पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गले में सोने की चेन पहनने को सकारात्मक ऊर्जा और संबंधों में स्थिरता से जोड़ा जाता है। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी समस्याओं में सोने के आभूषण सहायक माने जा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह विश्वास पर आधारित है और चिकित्सा विज्ञान इसका समर्थन नहीं करता।
आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

नई दिल्ली। सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने का विधान सदियों पुराना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के छोटे से मंदिर में इस्तेमाल होने वाली घंटी का भी अपना एक विशेष विज्ञान और महत्व है? हिंदू परिवारों में मुख्य रूप से ‘गरुड़ घंटी’ का उपयोग किया जाता है, जिसके ऊपरी भाग पर भगवान विष्णु के वाहन और संदेशवाहक गरुड़ देव की आकृति बनी होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गरुड़ देव को भगवान विष्णु का द्वारपाल माना गया है, इसलिए घर में इस घंटी का होना और इसे बजाना साक्षात श्रीहरि और माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने के समान है। धार्मिक ग्रंथों में इस विशेष घंटी की ध्वनि को ‘ब्रह्म नाद’ की संज्ञा दी गई है। माना जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था, तब जो पहली आवाज गूँजी थी, घंटी की ध्वनि उसी का सूक्ष्म रूप है। यही कारण है कि पूजा के दौरान इसे बजाने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और व्यक्ति का मन संसार की मोह-माया से हटकर सीधे ईश्वर की ओर केंद्रित होने लगता है। गरुड़ घंटी बजाने से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन घरों में नियमित रूप से गरुड़ घंटी का नाद होता है, वहां कभी दरिद्रता का वास नहीं होता और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी घंटी बजाने के कई फायदे बताए गए हैं। घंटी से निकलने वाली विशेष तरंगें और सूक्ष्म कंपन वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, इसकी सुरीली आवाज हमारे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय कर देती है, जिससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है। आरती के समय घंटी बजाना हमारे एकाग्रता स्तर को बढ़ाता है, जिससे भक्त पूरी तरह से पूजा में लीन हो जाता है। गरुड़ जी की उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि हमारी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुँचाने का कार्य स्वयं उनके संदेशवाहक कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, घंटियों के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं। ‘गरुड़ घंटी’ का प्रयोग व्यक्तिगत पूजा और छोटे मंदिरों में किया जाता है। इसके अलावा ‘द्वार घंटी’ होती है जो घरों या मंदिरों के प्रवेश द्वार पर शुभता के लिए लगाई जाती है। ‘हाथ घंटी’ पीतल की एक गोलाकार प्लेट की तरह होती है जिसे लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है, जबकि ‘बड़ा घंटा’ मंदिरों के विशाल प्रांगण में स्थापित किया जाता है जिसकी गूँज मीलों दूर तक सुनाई देती है। इन सभी में गरुड़ घंटी को घर की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सबसे उत्तम और प्रभावी माना गया है। घर में नियमित इसका प्रयोग न केवल सौभाग्य लाता है बल्कि जीवन में अनुशासन और शांति का भी संचार करता है।
DATIYA GOVANSH PROTEST: गोवंश को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग, दतिया में सड़कों पर उतरे गोभक्त

HIGHLIGHTS: भांडेर में गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत प्रदर्शन गोवंश को ‘राज्य माता’ घोषित करने की मांग अलग गो-सेवा मंत्रालय बनाने की उठी आवाज गोवंश से जुड़ी समस्याओं पर जताई चिंता तीन महीने में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी DATIYA GOVANSH PROTEST: दतिया। जिले की भांडेर तहसील में 27 मार्च को ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत गोभक्तों और संत समाज ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार और एसडीएम को सौंपा गया। बता दें कि प्रदर्शनकारियों ने गोवंश संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की और इसे सामाजिक व धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया। 16 करोड़ के साथ माइकल की बायोपिक मैदान में, अक्षय और रणवीर की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा ‘राज्य माता’ और अलग मंत्रालय की मांग ज्ञापन में गोवंश को ‘राज्य माता’ घोषित करने के साथ-साथ गो-सेवा एवं संरक्षण के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। साथ ही केंद्र सरकार को गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की अनुशंसा भेजने का आग्रह भी किया गया, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर इस विषय को प्राथमिकता मिल सके। अदाणी पब्लिक स्कूल के 25 वर्ष पूरे, हजारों छात्रों के भविष्य को मिली नई दिशा.. समस्याओं पर चिंता, सख्त कानून की मांग अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि गोवंश दुर्घटनाओं, तस्करी, कुपोषण, प्लास्टिक खाने और निराश्रित स्थिति जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने गोवध पर सख्त कानून, तस्करी में उपयोग वाहनों की राजसात कार्रवाई, पशु मेलों में निगरानी और गोचर भूमि संरक्षण जैसे कदम उठाने की मांग की है। Khargone Cow Protection Rally: गो संरक्षण को लेकर सड़कों पर उतरा सकल हिंदू समाज, खरगोन में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तीन महीने का अल्टीमेटम प्रदर्शनकारियों ने गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा, पंचगव्य अनुसंधान केंद्र, बायोगैस प्लांट और गोशालाओं के लिए डीबीटी पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं लागू करने की भी मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि तीन महीने के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।