एकादशी पर बन रहा दुर्लभ चतुर्ग्रही योग, 5 राशियों को होंगे बेहद लाभ, दूर होगी आर्थिक दिक्कतें

नई दिल्ली। 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी के अवसर पर एक बेहद दुर्लभ और शुभ ज्योतिषीय संयोग बनने जा रहा है। इस दिन मीन राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शनि एक साथ मिलकर चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुरु ग्रह की राशि में बनने वाला यह योग सुख, सौभाग्य और सफलता देने वाला होता है। साथ ही इसे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। इस विशेष योग का प्रभाव कुछ राशियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। वृषभ राशिइस योग के प्रभाव से वृषभ राशि वालों को अचानक धन लाभ हो सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है और परिवार से जुड़ी कोई शुभ सूचना मिल सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय नौकरी और करियर में बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकता है। मनचाही नौकरी, ट्रांसफर या नए ऑफर मिलने की संभावना है। व्यापार में विस्तार के योग भी बन रहे हैं। कन्या राशिकन्या राशि वालों के लिए आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त हो सकती हैं। नया काम या व्यवसाय शुरू करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। साझेदारी में किए गए कार्यों से लाभ मिल सकता है और वैवाहिक संबंध भी मजबूत होंगे। वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि के जातकों के लंबे समय से अटके हुए महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक लाभ के साथ-साथ परिवार, विशेषकर माता-पिता या बुजुर्गों का सहयोग मिलेगा। मीन राशिचूंकि यह योग मीन राशि में बन रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रहेगा। आय में वृद्धि, मान-सम्मान में बढ़ोतरी और रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। (डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है।)
वर्ष 2026 में ऊर्जा के सही प्रबंधन से खुलेंगे सफलता और समृद्धि के नए द्वार।…

नई दिल्ली:फेंगशुई के प्राचीन विज्ञान में फ्लाइंग स्टार्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह समय के साथ ऊर्जा के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। वर्ष 2026 के आगमन के साथ ही ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे जो हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करेंगे। चीनी ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक वर्ष नौ सितारे अलग अलग दिशाओं में संचरण करते हैं और उनकी स्थिति के आधार पर ही किसी स्थान की ऊर्जा शुभ या अशुभ निर्धारित होती है। वर्ष 2026 मुख्य रूप से अग्नि तत्व और अश्व की ऊर्जा से प्रभावित रहेगा जिससे समाज में उत्साह बना रहेगा। इस वर्ष के ऊर्जा चक्र में सबसे महत्वपूर्ण स्थान घर का मध्य भाग होता है जिसे ब्रह्मस्थान भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में मध्य क्षेत्र की ऊर्जा को संतुलित रखना अनिवार्य होगा क्योंकि यहाँ से पूरे भवन की सकारात्मकता संचालित होती है। यदि मध्य भाग में भारी निर्माण या गंदगी रहती है तो यह परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। फेंगशुई विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मध्य स्थान को जितना खुला और स्वच्छ रखा जाएगा घर में उतनी ही अधिक शांति और सुख का अनुभव होगा। दक्षिण दिशा जो प्रसिद्धि और सफलता का प्रतीक है वहां इस वर्ष शुभ सितारों का प्रभाव होने से करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे। जो लोग सार्वजनिक जीवन या रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं उनके लिए दक्षिण दिशा को व्यवस्थित और प्रकाशमान रखना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इस दिशा में लाल या नारंगी रंगों का संतुलित प्रयोग ऊर्जा को और अधिक सक्रिय कर सकता है। अपने कार्यक्षेत्र में इस दिशा का सही उपयोग करके आप अपनी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से पश्चिम और उत्तर पूर्व की दिशाएं इस वर्ष धन के आगमन के लिए शुभ संकेत दे रही हैं। इन दिशाओं में जल तत्व का सही समावेश और सफाई रखने से व्यापारिक लाभ और निवेश में सफलता मिलने के प्रबल योग बनते हैं। धन की आवक बढ़ाने के लिए इन कोनों में किसी भी प्रकार का कबाड़ इकट्ठा न होने दें। यदि आप अपने आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं तो पश्चिम दिशा की ऊर्जा को सक्रिय करना इस वर्ष आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि यह समृद्धि का मुख्य द्वार बनेगी। फेंगशुई केवल सकारात्मकता की ही बात नहीं करता बल्कि यह संभावित बाधाओं के प्रति सचेत भी करता है। वर्ष 2026 में पूर्व और उत्तर पश्चिम दिशा में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि वहां नकारात्मक सितारों का वास होगा। इन दिशाओं में यदि मुख्य द्वार है तो वहां ऊर्जा को शांत रखने के उपाय करने चाहिए ताकि अनावश्यक खर्चों और स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके। इन क्षेत्रों में धातु की वस्तुओं का प्रयोग करके और गहरे रंगों से परहेज करके आप नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। पारिवारिक रिश्तों और प्रेम संबंधों के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा का महत्व इस वर्ष भी बना रहेगा। इस दिशा की ऊर्जा को सक्रिय करने के लिए वहां पृथ्वी तत्व को मजबूती देना शुभ रहेगा जो आपसी संबंधों में मधुरता लाता है। मिट्टी के पात्र या क्रिस्टल का प्रयोग रिश्तों में स्थिरता और विश्वास पैदा करने में सहायक होगा। परिवार के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल के लिए इस कोने में संयुक्त परिवार की तस्वीर लगाना भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है जिससे घर में प्रेम का वातावरण बना रहता है। छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए उत्तर दिशा इस वर्ष विशेष वरदान साबित हो सकती है। यहां अध्ययन कक्ष बनाना या पढ़ते समय उत्तर की ओर मुख रखना एकाग्रता को बढ़ाने में बहुत सहायक होगा। यदि इस दिशा की ऊर्जा संतुलित रहती है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के अवसर बढ़ जाते हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे इस क्षेत्र को पूरी तरह व्यवस्थित रखें ताकि उनकी बौद्धिक क्षमता में वृद्धि हो सके और वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहें। व्यक्तिगत विकास और मानसिक शांति के लिए ध्यान के कोनों को उत्तर पूर्व दिशा में विकसित करना इस वर्ष सबसे उत्तम रहेगा। जैसे जैसे समय बदल रहा है लोग अपने परिवेश के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और फेंगशुई इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। घर के हर कोने को अनावश्यक वस्तुओं से मुक्त रखना और प्राकृतिक रोशनी का संचार सुनिश्चित करना ही ऊर्जा के सही प्रवाह की पहली सीढ़ी है। अनुशासन के साथ इन ऊर्जा नियमों का पालन करने से न केवल सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होगी। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह वर्ष शरीर की आंतरिक ऊर्जा को पुष्ट करने और जीवनशैली में सुधार लाने के लिए उपयुक्त है। घर के पूर्वी कोने को विशेष रूप से हरा भरा रखकर हम परिवार के बुजुर्गों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। फेंगशुई का मुख्य सार यही है कि हम अपने जीवन को केवल भाग्य के भरोसे न छोड़ें बल्कि अपने आसपास के परिवेश को सकारात्मक बनाएं। वर्ष 2026 की यह ऊर्जा यात्रा हमें एक संतुलित और समृद्ध भविष्य की ओर ले जाने का संकल्प प्रदान करती है जहां हर कार्य में सफलता की संभावना होती है।
सूर्य देव की कृपा पाने के उपाय, रविवार को करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना और श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और सफलता का संचार होता है। विशेषकर जब रविवार के दिन सूर्य मंत्रों का जाप किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और कई प्रकार के कष्टों से राहत मिलने की मान्यता है। रविवार को सूर्य को जल अर्पित करने का महत्वसुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल पुष्प, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। जल अर्पित करते समय “ॐ सूर्याय नमः” का उच्चारण करने से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में आत्मबल बढ़ता है और ग्रहों की स्थिति भी अनुकूल होने की मान्यता है। सूर्य बीज मंत्र का महत्व और जाप विधिरविवार के दिन सबसे प्रभावशाली मंत्रों में सूर्य बीज मंत्र को विशेष स्थान दिया गया है। शांत स्थान पर आसन लगाकर सुबह स्नान के बाद मन को एकाग्र करके“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और कार्यों में सफलता मिलने लगती है। यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। सूर्य गायत्री मंत्र से मिलती है मानसिक शांतिसूर्य देव की कृपा पाने के लिए रविवार के दिन सूर्य गायत्री मंत्र का जाप भी अत्यंत लाभकारी माना गया है।“ॐ भास्कराय विद्महे महादुत्याथिकराया धीमहि तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्”का श्रद्धा पूर्वक जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति को आत्मिक शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस मंत्र के प्रभाव से जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है। घृणि सूर्य मंत्र से बढ़ता है आत्मविश्वासरविवार को एक और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है“ॐ घृणि सूर्याय नमः”इस मंत्र का 108 बार जाप करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कहा जाता है कि यह मंत्र स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी राहत देने वाला है और व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। नकारात्मकता दूर करने वाला सूर्य मंत्रयदि जीवन में नकारात्मकता अधिक महसूस हो रही हो, तो“ॐ घृणि सूर्य्य आदित्यः”मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। शांत मन से इसका नियमित उच्चारण करने से मनोबल बढ़ता है और व्यक्ति के विचार सकारात्मक होने लगते हैं। यह मंत्र जीवन में स्थिरता और संतुलन लाने वाला माना जाता है। मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष सूर्य मंत्रमनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सूर्य देव को समर्पित एक विशेष मंत्र का उल्लेख मिलता है।“ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा”इस मंत्र का 108 बार जाप करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और रुके हुए कार्यों में गति मिलती है। सावधानी और नियमइन मंत्रों का जाप करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना आवश्यक है। बिना श्रद्धा और नियम के किया गया जाप पूर्ण फल नहीं देता, ऐसा माना जाता है। साथ ही, किसी भी प्रकार की जीवन समस्या के लिए केवल आध्यात्मिक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक प्रयास भी जरूरी हैं। रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा और मंत्र जाप भारतीय परंपरा में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नियमित रूप से श्रद्धा पूर्वक सूर्य उपासना करने से जीवन में नई दिशा, शांति और सफलता मिलने की मान्यता है।
Aaj Ka Rashifal: रविवार को किस्मत चमकेगी, पैतृक संपत्ति से मिल सकता है बड़ा फायदा

नई दिल्ली। 12 अप्रैल 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रसिद्ध भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास के अनुसार इस दिन शनि और बुध की दुर्लभ युति कई राशियों के जीवन में बड़े बदलाव ला सकती है। जहां कुछ राशियों के लिए यह दिन तरक्की और सफलता के नए रास्ते खोलेगा, वहीं कुछ जातकों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से सिंह, मकर और मीन राशि के लिए यह दिन बेहद शुभ रहने की संभावना है। इन जातकों के लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और करियर में नई ऊंचाइयों के द्वार खुल सकते हैं। वहीं मिथुन और धनु राशि के लोगों को धन लेन-देन में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मेष राशि (Aries)आज कार्यों की अधिकता रहेगी और सरकारी कामों में सावधानी जरूरी है। परिवार में चल रही दूरियां खत्म हो सकती हैं।करियर: व्यस्तता बढ़ेगीफाइनेंस: खर्चों पर नियंत्रण रखेंलव: पारिवारिक सहयोग मिलेगास्वास्थ्य: थकान संभव वृषभ राशि (Taurus)कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ेगा, संपत्ति या वाहन खरीद के योग बन सकते हैं।करियर: सफलता के अवसरफाइनेंस: निवेश से लाभलव: पारिवारिक समय अच्छा रहेगास्वास्थ्य: मानसिक शांति जरूरी मिथुन राशि (Gemini)दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा, धन लेन-देन से बचें।करियर: मेहनत अधिक करनी होगीफाइनेंस: उधारी से बचेंलव: जीवनसाथी का सहयोग मिलेगास्वास्थ्य: मानसिक शांति मिलेगी कर्क राशि (Cancer)भाग्य का साथ मिलेगा, नए अवसर मिल सकते हैं।करियर: नौकरी के ऑफर संभवफाइनेंस: लाभ के संकेतलव: परिवार में खुशीस्वास्थ्य: अच्छा रहेगा सिंह राशि (Leo)आज का दिन अत्यंत शुभ है, भाग्य पूरी तरह साथ देगा।करियर: प्रशंसा और सफलताफाइनेंस: कर्ज से राहतलव: रिश्ते मजबूत होंगेस्वास्थ्य: उत्तम रहेगा कन्या राशि (Virgo)आत्मविश्वास बढ़ेगा और सामाजिक मान-सम्मान मिलेगा।करियर: सफलता के योगफाइनेंस: स्थिर स्थितिलव: शुभ समाचार संभवस्वास्थ्य: ऊर्जा बनी रहेगी तुला राशि (Libra)प्रभावशाली लोगों से मुलाकात लाभदायक रहेगी।करियर: नए अवसर मिलेंगेफाइनेंस: धन लाभ के संकेतलव: रिश्तों में मजबूतीस्वास्थ्य: मानसिक शांति वृश्चिक राशि (Scorpio)साझेदारी में लाभ मिलेगा और करियर में सुधार होगा।करियर: प्रगति के योगफाइनेंस: आर्थिक मजबूतीलव: रिश्तों में मधुरतास्वास्थ्य: सामान्य रहेगा धनु राशि (Sagittarius)दिन सावधानी बरतने वाला रहेगा, जल्दबाजी से बचें।करियर: सतर्क रहेंफाइनेंस: बजट जरूरीलव: सहयोग मिलेगास्वास्थ्य: तनाव से बचें मकर राशि (Capricorn)आय के नए स्रोत खुलेंगे और सफलता मिलेगी।करियर: अधिकारियों का सहयोगफाइनेंस: आय में वृद्धिलव: पारिवारिक खुशीस्वास्थ्य: अच्छा रहेगा कुंभ राशि (Aquarius)पैतृक संपत्ति से लाभ और रुके कार्य पूरे हो सकते हैं।करियर: प्रगति के संकेतफाइनेंस: पुराने निवेश से लाभलव: सामाजिक समय अच्छास्वास्थ्य: मानसिक शांति रखें मीन राशि (Pisces)आज का दिन बेहद शुभ रहेगा, बड़ी सफलता मिल सकती है।करियर: व्यापार में लाभफाइनेंस: आर्थिक सुधारलव: मांगलिक आयोजन संभवस्वास्थ्य: बेहतर रहेगा
Surya Dev Upay: जीवन में सफलता और ऊर्जा पाने के लिए आज ही करें मंत्र जाप

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना गया है। इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत, पूजा और जल अर्पण करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है। सूर्य देव को ऊर्जा, तेज और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है। इसलिए रविवार के दिन सूर्य की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। रविवार व्रत का महत्वरविवार का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट कम होने और कुंडली में सूर्य दोष शांत होने की मान्यता है। व्रत के दौरान सुबह स्नान करके सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित किया जाता है और पूरे दिन संयम रखा जाता है। इस दिन सूर्य मंत्रों का जाप और व्रत कथा का श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है। रविवार व्रत कथा (संक्षेप में)पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी, जो हर रविवार सूर्य देव का व्रत और पूजा करती थी। वह नियमित रूप से उपवास रखती और सूर्य देव को जल अर्पित करती थी। उसकी श्रद्धा और नियमों के पालन से उसके जीवन के सभी दुख समाप्त हो गए और घर धन-धान्य से भर गया। कथा में आगे बताया गया कि एक बार पड़ोसन की ईर्ष्या के कारण उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसकी श्रद्धा और सूर्य देव की कृपा से उसके घर में एक गाय आई, जो सोने जैसा गोबर देती थी। इससे वह महिला अत्यंत धनवान हो गई। बाद में राजा को भी इस चमत्कार का ज्ञान हुआ और उसने भी सूर्य व्रत प्रारंभ किया। कहा जाता है कि इसके बाद पूरे राज्य में सुख-समृद्धि आ गई। यह कथा श्रद्धा और भक्ति का महत्व बताती है। रविवार को किए जाने वाले शक्तिशाली सूर्य मंत्र- 1. सूर्य बीज मंत्र“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ती है। 2. सूर्य गायत्री मंत्र“ॐ भास्कराय विद्महे महाद्युतिकराय धीमहि तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्” मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के लिए उत्तम माना जाता है। 3. सरल सूर्य मंत्र“ॐ घृणि सूर्याय नमः” नकारात्मकता दूर करने और जीवन में स्थिरता लाने वाला मंत्र। सूर्य पूजा की विधि सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनेंतांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करेंलाल फूल और अक्षत चढ़ाएंसूर्य मंत्रों का 108 बार जाप करेंरविवार व्रत कथा का श्रवण करें सावधानीइन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए। केवल आध्यात्मिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत और सकारात्मक कर्म भी आवश्यक हैं। रविवार व्रत, सूर्य पूजा और मंत्र जाप भारतीय परंपरा में ऊर्जा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धा पूर्वक सूर्य उपासना करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की मान्यता है।
शनि देव का परिचय, क्यों माना जाता है इन्हें न्यायप्रिय ग्रह और देवता

नई दिल्ली। शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा की जाता है। कहा जाता है कि, जो जातक उनका व्रत करते है उनके घर पर उनकी कृपा बनी रहती है उनकी क्रोधित दृष्टि ऊपर नहीं पड़ती। शनिदेव एक ऐसे देव हैं, जो लोगों को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक ऐसे ग्रह हैं, जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जरूर आते हैं। वह साढ़ेसाती और ढैय्या के रूप में आकर लोगों को उनके फल देते हैं। कौन हैं शनिदेव?सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं शनिदेव। उनके भाई यमराज (मृत्यु के देवता) और बहन यमुना हैं। भगवान शिव के आशीर्वाद से शनिदेव को ग्रहों में स्थान मिला और उनको न्याय का देवता कहा गया। वे न्याय प्रिय हैं। वे लोगों के साथ हमेशा न्याय करते हैं। शनिदेव का वर्ण काला या गहरा नीला बताया जाता है। वे काले वस्त्र धारण करते हैं और उनके हाथ में धनुष, त्रिशूल या गदा होती है। उनका वाहन कौआ (काला कौवा) है। उनका गंभीर और कठोर स्वरूप उनके न्यायप्रिय स्वभाव को दर्शाता है। शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहते हैं?कथा के अनुसार, शनिदेव का जन्म हुआ तो वे काले रंग के थे।सूर्यदेव ने जब शनिदेव को देखा तो खुश नहीं हुए.।उनके मन में यह शंका हुई कि उनका रंग गोरा है तो उनका पुत्र काला कैसे हो गया? इस वजह से वे शनिदेव की माता छाया के चरित्र पर शक करने लगे। इससे छाया काफी दुखी हुईं और सूर्य देव को श्राप दे दिया। जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे अपने पिता पर क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या कि ताकि वे अपने पिता को माता के प्रति गलत व्यवहार के लिए दंडित कर सकें।भगवान शिव जब प्रसन्न हुए तो उन्होंने शनिदेव को नक्षत्र मंडल में स्थान देकर दंडाधिकारी बना दिया। शिव भगवान की कृपा मिलने से शनिदेव कर्मफलदाता बन गए।उन्हें नवग्रह में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. चाहें देव हों, मनुष्य, राक्षस, गंधर्व, किन्नर, सभी को शनिदेव की दृष्टि का सामना करना पड़ता है।उनको कर्मों के अनुसार फल भुगतना पड़ता है।
Shaniwar Mantra: आज शनिवार के दिन करें शनि देव के इन खास मंत्रों का जाप, पूरी होगी मनोकामना

नई दिल्ली। आज शनिवार के दिन आपको शनि देव की पूजा अर्चना करनी चाहिए। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका व्रत भी रखना चाहिए। ऐसा करने से उनकी कृपा आप पर बनी रहती है आपके घर परिवार पर कोई भी पूरी शक्ति हावी नहीं होती है सकारात्मक बनी रहती है जिससे आपका कल्याण होता है। घर पर सुख समृद्धि और तरक्की आती है। आज के दिन आपको शनिदेव के कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए ऐसा करने से शनि देव आपसे प्रसन्न होते हैं। पूजा विधिशनि देव की पूजा अर्चना करने के लिए आपको सुबह जल्दी उठना चाहिए। शनि मंदिर जाकर आप शनि भगवान के दर्शन करें और उनका व्रत रखने का संकल्प लें। अगर आपकी कुंडली में शनि दोष है तो आज पूजा के दौरान आप काला वस्त्र ही पहनें। क्योंकि कल वस्त्र शनिदेव को बहुत प्रिय है इसीलिए आप ये धारण करें। इसके बाद आप शनि देव की पूजा अर्चना के दौरान उन्हें सरसों का तेल काली तिल चढ़ा सकते हैं इससे भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। इन मंत्रों का करें जाप ॐ शं शनिश्चराय नम: ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम । उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात । ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः शनि महामंत्र – ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ शनि दोष निवारण मंत्र – ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।। शनि का पौराणिक मंत्र – ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। शनि का वैदिक मंत्र – ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः। शनि गायत्री मंत्र – ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्। ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः इस प्रकार करें शनि देव को प्रसन्नशनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन आपको शनि देव के मंदिर जाना चाहिए। उनकी पूजा अर्चना करते समय आपको सरसों का तेल काला तिल उन्हें जरूर अर्पित करना चाहिए। आज के दिन आपको काला वस्त्र धारण करना चाहिए क्योंकि काला वस्त्र शनिदेव को बहुत प्रिय है।
बुध आज मीन राशि में करेंगे प्रवेश, 4 राशियों के लिए शुभ संकेत, अप्रैल अंत तक रहेगा असर

नई दिल्ली। आज बुध ग्रह ने अपनी चाल बदलते हुए मीन राशि में प्रवेश कर लिया है। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। बुध लगभग 23 से 25 दिनों तक मीन राशि में रहेंगे और इसके बाद अगली राशि में प्रवेश करेंगे। इसका असर अप्रैल के अंत तक बना रहेगा। इस दौरान लोगों की सोच, बातचीत करने का तरीका, निर्णय लेने की क्षमता और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से कम्युनिकेशन, बिजनेस और रिश्तों से जुड़े मामलों पर इसका प्रभाव अधिक रहेगा। मीन राशि में बुध का मिश्रित प्रभावमीन राशि को भावनात्मक और कल्पनाशील राशि माना जाता है। जब बुध इस राशि में आते हैं तो व्यक्ति अधिक संवेदनशील और रचनात्मक हो सकता है, लेकिन यह स्थिति बुध के लिए कमजोर मानी जाती है। ऐसे में कई लोगों को निर्णय लेने में भ्रम या असमंजस की स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे भाग्य के द्वार-इस गोचर का सबसे अधिक सकारात्मक असर वृषभ, मिथुन, कन्या और मीन राशि पर देखने को मिल सकता है।वृषभ राशि: आय के नए स्रोत बन सकते हैं और रुका हुआ पैसा मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।मिथुन राशि: करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। काम की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।कन्या राशि: रिश्तों में सुधार और पार्टनरशिप में मजबूती आने की संभावना है। सहयोग बढ़ेगा।मीन राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नए विचारों के साथ काम में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इन राशियों को रहना होगा सावधानमेष राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं कर्क राशि के लोगों को मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए किसी भी निर्णय में सावधानी जरूरी है। कामकाज और कारोबार पर असरयह गोचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है जो मीडिया, लेखन, संचार और व्यापार से जुड़े हैं। इस दौरान नए आइडिया और बेहतर संवाद के चलते काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। क्या रखें ध्यानइस अवधि में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। हर निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है। सही दिशा में किया गया प्रयास इस गोचर को तरक्की और सफलता में बदल सकता है। आज बुध ग्रह ने अपनी चाल बदलते हुए मीन राशि में प्रवेश कर लिया है। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। बुध लगभग 23 से 25 दिनों तक मीन राशि में रहेंगे और इसके बाद अगली राशि में प्रवेश करेंगे। इसका असर अप्रैल के अंत तक बना रहेगा। इस दौरान लोगों की सोच, बातचीत करने का तरीका, निर्णय लेने की क्षमता और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से कम्युनिकेशन, बिजनेस और रिश्तों से जुड़े मामलों पर इसका प्रभाव अधिक रहेगा। मीन राशि में बुध का मिश्रित प्रभाव मीन राशि को भावनात्मक और कल्पनाशील राशि माना जाता है। जब बुध इस राशि में आते हैं तो व्यक्ति अधिक संवेदनशील और रचनात्मक हो सकता है, लेकिन यह स्थिति बुध के लिए कमजोर मानी जाती है। ऐसे में कई लोगों को निर्णय लेने में भ्रम या असमंजस की स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे भाग्य के द्वार -इस गोचर का सबसे अधिक सकारात्मक असर वृषभ, मिथुन, कन्या और मीन राशि पर देखने को मिल सकता है। वृषभ राशि: आय के नए स्रोत बन सकते हैं और रुका हुआ पैसा मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। मिथुन राशि: करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। काम की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। कन्या राशि: रिश्तों में सुधार और पार्टनरशिप में मजबूती आने की संभावना है। सहयोग बढ़ेगा। मीन राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नए विचारों के साथ काम में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इन राशियों को रहना होगा सावधान मेष राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं कर्क राशि के लोगों को मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए किसी भी निर्णय में सावधानी जरूरी है। कामकाज और कारोबार पर असर यह गोचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है जो मीडिया, लेखन, संचार और व्यापार से जुड़े हैं। इस दौरान नए आइडिया और बेहतर संवाद के चलते काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। क्या रखें ध्यान इस अवधि में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। हर निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है। सही दिशा में किया गया प्रयास इस गोचर को तरक्की और सफलता में बदल सकता है।
सीता नवमी पर करें ये विधि पूरी होगी हर मनोकामना जानिए 2026 की डेट और शुभ समय

नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में बच्चों को नजर दोष से बचाने के लिए कई धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं और इनमें कालाष्टमी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है जिन्हें संकटों का नाश करने वाला और समय का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए उपाय नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और बच्चों को बुरी नजर से सुरक्षित रखते हैं। वर्ष 2026 में 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जा रहा है और इस दिन किए गए सरल उपाय बेहद प्रभावी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है। काशी में काल भैरव को कोतवाल कहा जाता है और उन्हें सुरक्षा और न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से भय संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को तंत्र मंत्र और रक्षा उपायों के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं और आपको लगता है कि उन्हें बार बार नजर लग जाती है तो कालाष्टमी के दिन कुछ आसान उपाय जरूर करने चाहिए। सबसे पहले घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद उसकी लौ से काजल तैयार करें और इस काजल को बच्चे के माथे या कान के पीछे हल्का सा लगा दें। ऐसा करने से नजर दोष से बचाव होता है और बच्चे के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है। इसके अलावा आप मंदिर जाकर भगवान काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित कर सकते हैं। इस धागे पर थोड़ा सा सिंदूर लगाकर इसे बच्चे के हाथ या गले में बांध दें। मान्यता है कि यह काला धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर के प्रभाव को दूर करता है। इस दौरान ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। कालाष्टमी के दिन रात 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा जल्दी फल देती है और भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं दीप जलाते हैं और भगवान से अपने परिवार विशेषकर बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह विश्वास और आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे उपाय लोगों को मानसिक शांति और सुरक्षा का एहसास देते हैं। हालांकि इन उपायों के साथ साथ बच्चों की देखभाल स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। कालाष्टमी पर किए गए ये सरल उपाय न केवल परंपरा का हिस्सा हैं बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास का प्रतीक भी हैं जो आज भी लोगों के जीवन में उतने ही प्रभावी माने जाते हैं।नई दिल्ली । हिंदू धर्म में वैशाख मास का विशेष महत्व होता है और इसी पावन महीने में सीता नवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है जिन्हें त्याग धैर्य और आदर्श नारीत्व का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को मनाई जाएगी और इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल 2026 को रात 07 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसका समापन 25 अप्रैल 2026 को शाम 06 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 25 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं जो पूजा पाठ और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगा वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से 3 बजकर 43 मिनट तक का समय सफलता और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। इसके अलावा अमृत काल शाम 6 बजकर 29 मिनट से रात 8 बजकर 04 मिनट तक रहेगा जो विशेष रूप से पूजा के लिए अनुकूल है। सीता नवमी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है और उनकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति का वास होता है। यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है। पूजा विधि की बात करें तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद उन्हें पीले फूल शृंगार की सामग्री और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। श्रद्धा के साथ ‘श्री जानकी रामाभ्यां नमः’ मंत्र का 108 बार जप किया जाता है और सीता नवमी की कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती कर भगवान से सुख समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। इस दिन ॐ सीतायै नमः और ॐ श्री सीता रामाय नमः जैसे मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी कष्ट दूर होते हैं। सीता नवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह नारी शक्ति सहनशीलता और समर्पण का भी प्रतीक है। यह दिन हमें जीवन में धैर्य और मर्यादा का महत्व सिखाता है और परिवार के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है।
अधिक मास 2026 की पूरी जानकारी इस अवधि में क्यों नहीं होते शादी गृहप्रवेश और नए काम

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है और इसे साल के सबसे पवित्र समयों में से एक माना जाता है। अधिक मास जिसे मल मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इस दौरान व्यक्ति को भक्ति साधना और आत्म चिंतन की ओर प्रेरित किया जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा और इस पूरे समय को आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है जबकि मांगलिक कार्यों के लिए यह अवधि वर्जित रहती है। अधिक मास का आधार हिंदू पंचांग की गणना पद्धति से जुड़ा हुआ है। हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है जबकि सौर वर्ष सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है जिससे समय के साथ अंतर बढ़ने लगता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है। यह प्रक्रिया समय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है और इसी कारण इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को मल मास भी कहा जाता है क्योंकि इस दौरान विवाह गृह प्रवेश नामकरण और जनेऊ जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इन कार्यों को इस अवधि में टाल दिया जाता है ताकि इन्हें अधिक शुभ समय में संपन्न किया जा सके। हालांकि नाम भले ही मल मास हो लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च माना जाता है और इसे पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ समय बताया गया है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं पूजा पाठ करते हैं और धार्मिक ग्रंथों का श्रवण करते हैं जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। इस पूरे महीने में लोगों को सांसारिक गतिविधियों से थोड़ा विराम लेकर आध्यात्मिक जीवन की ओर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालु इस समय दान पुण्य करते हैं मंदिरों में दर्शन करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इसके अलावा पेड़ पौधे लगाना समाज सेवा करना और धार्मिक कथाओं का आयोजन करना भी इस समय विशेष फलदायी माना जाता है। अधिक मास व्यक्ति को यह अवसर देता है कि वह अपने जीवन का मूल्यांकन करे अपने कर्मों पर विचार करे और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत बनाए। यह समय केवल धार्मिक अनुष्ठानों का ही नहीं बल्कि आत्म सुधार और आंतरिक शांति प्राप्त करने का भी होता है।