पूजा सामग्री का पुनः उपयोग: शास्त्र क्या कहते हैं, जानें नियम और अपवाद

नई दिल्ली । पूजा-पाठ के दौरान अक्सर घरों में यह सवाल उठता है कि क्या भगवान को अर्पित की गई सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग फूल माला अक्षत या जल को फिर से पूजा में उपयोग कर लेते हैं। लेकिन हिंदू शास्त्र इस विषय में स्पष्ट नियम बताते हैं। पूजा की शुद्धता और पवित्रता को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी वजह से पूजा सामग्री के पुनः उपयोग को लेकर कुछ दिशानिर्देश तय किए गए हैं। शास्त्रों में पूजा में अर्पित सामग्री को निर्माल्य कहा गया है। इसका अर्थ है वह सामग्री जो एक बार भगवान को अर्पित की जा चुकी हो। नियम के अनुसार जो फूल माला या अक्षत भगवान को अर्पित कर दिए जाते हैं वे उनके प्रसाद का हिस्सा बन जाते हैं। इन्हें दोबारा धोकर या साफ करके पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता और भगवान को अर्पण का महत्व भी कम हो जाता है। जल और दीपक के संबंध में भी शास्त्र स्पष्ट हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाला जल हमेशा ताजा होना चाहिए। अगर कलश में रखा जल किसी कारण अशुद्ध स्पर्श में आ जाए तो उसे फिर से पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार तांबे या पीतल के बर्तनों को हर पूजा के बाद शुद्ध मिट्टी या नींबू से धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। दीपक जलाते समय पुराने दीये की जली हुई बत्ती और बचा हुआ तेल हटा देना चाहिए। इससे पूजा की पवित्रता और नियमों का पालन सुनिश्चित होता है। हालांकि कुछ अपवाद भी हैं। गंगाजल को कभी बासी नहीं माना जाता इसलिए इसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है। तुलसी के पत्तों को भी विशेष परिस्थितियों में धोकर दोबारा अर्पित किया जा सकता है। इसी तरह भगवान की मूर्ति शालिग्राम घंटी शंख मंत्र जाप की माला और पूजा के धातु के पात्रों को धोकर पुनः इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ सामग्री को दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि भगवान शिव को अर्पित बेलपत्र को भी बशर्ते खंडित या दागदार न हो दोबारा अर्पित किया जा सकता है। लेकिन फूल माला भोग चंदन कुमकुम धूप-दीप नारियल अक्षत या दीपक में बचा तेल दोबारा पूजा में नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। पूजा सामग्री का सम्मान करना ही धार्मिक नियमों का पालन माना जाता है और इससे श्रद्धालु को आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रकार पूजा सामग्री के पुनः उपयोग में शास्त्र के नियमों और अपवादों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इससे पूजा की पवित्रता भगवान को अर्पण की श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं की महत्ता बनी रहती है। श्रद्धालु इस नियम का पालन करके पूजा के दौरान आध्यात्मिक लाभ और मानसिक संतोष प्राप्त कर सकते हैं।
Kharmas 2026 : एक माह तक मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, जानें पवित्र स्नान और वर्जित कार्य

नई दिल्ली । साल का दूसरा खरमास 2026 बस कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। ज्योतिष गणना के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं उसी समय को खरमास कहा जाता है। इस वर्ष वैदिक पंचांग के अनुसार सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे जिससे साल का दूसरा खरमास प्रारंभ होगा। पहले खरमास की अवधि 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रही थी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष खरमास की अवधि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि तक होगी। इस समय के दौरान धार्मिक और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लगाया जाता है। इस अवधि को विशेष ध्यान और संयम का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि खरमास में पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान नदी में दीपदान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस समय साधना और आत्मशुद्धि पर अधिक ध्यान देते हैं। खरमास में कई मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान विवाह करना शुभ नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि इस समय विवाह किया जाए तो दांपत्य जीवन में परेशानियां और भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। इसके अलावा गृह प्रवेश नया घर बनवाना और अन्य शुभ कार्य भी नहीं किए जाते। नए कार्यों की शुरुआत से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस समय कोई नया व्यवसाय या निवेश शुरू करने से आर्थिक हानि और कार्यों में सफलता नहीं मिलती। इसी प्रकार मुंडन संस्कार नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य भी इस अवधि में नहीं किए जाते। इस समय को संयम साधना जप-तप और आत्मचिंतन का समय माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार खरमास के दौरान धार्मिक नियमों का पालन करना व्यक्ति के लिए लाभकारी होता है। इस समय अपने कर्तव्यों और साधना पर ध्यान देना मानसिक शांति बनाए रखना और पवित्र नदियों में स्नान करना आर्थिक और मानसिक उन्नति के लिए शुभ माना गया है। श्रद्धालु इस अवधि में उपवास दान और धर्म-कर्म के कार्यों में अधिक ध्यान देते हैं। इसका उद्देश्य जीवन में संयम बनाए रखना और अपने कर्मों को शुद्ध करना है। खरमास के बाद ही मांगलिक कार्य और नए काम की शुरुआत को शुभ माना जाता है। इस तरह खरमास 2026 के दौरान धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना विशेष महत्व रखता है। यह समय अपने मन शरीर और कर्मों की शुद्धि का होता है जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बना रहता है।
चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और देवी आगमन की खास बातें

नई दिल्ली । साल में चार नवरात्रि आती हैं लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को पड़ेगी जिसे हिंदू नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि गुरुवार 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रामनवमी के साथ समाप्त होंगे। यह नौ दिन का पर्व भक्तों के लिए मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा और आराधना का अवसर लेकर आता है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होती है। 19 मार्च गुरुवार सुबह 6.52 बजे से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी और 20 मार्च शुक्रवार सुबह 4.52 बजे समाप्त होगी। धार्मिक मान्यता अनुसार उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। इस दिन से भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिनों तक पूजा अर्चना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इस दिन देवी के आवाहन के लिए घर या मंदिर में कलश स्थापित किया जाता है। साल 2026 में कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6.52 बजे से 7.43 बजे तक रहेगा जबकि दूसरा मुहूर्त दोपहर 12.5 बजे से 12.53 बजे तक रहेगा। इन दोनों समयों में श्रद्धालु अपनी विधिपूर्वक पूजा और कलश स्थापना कर सकते हैं। नवरात्रि से पहले देवी आगमन का तरीका भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल मां दुर्गा का आगमन डोली पर नहीं होगा क्योंकि गुरुवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण इसे अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार डोली पर देवी का आगमन अस्थिरता और समाज तथा राजनीति में उथल पुथल का संकेत माना जाता है। इसके विपरीत इस वर्ष मां दुर्गा का गमन हाथी पर होगा जिसे शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हाथी पर गमन सुख समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत देता है जिससे पूरे देश में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। इस बार की विशेषता यह है कि चैत्र नवरात्रि में किसी भी तिथि का क्षय या वृद्धि नहीं होगी। यानी पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालु बिना किसी बाधा के मां दुर्गा के नौ अलग अलग रूपों की पूजा कर सकेंगे। 19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाले इन नवरात्रियों में भक्तों को मां के पूरे नौ दिन की आराधना करने का अवसर मिलेगा। चैत्र नवरात्रि 2026 श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक शांति समृद्धि और घर में खुशहाली का संदेश लेकर आ रहा है। कलश स्थापना से लेकर देवी आगमन तक हर चरण में धार्मिक मान्यताओं का पालन करना शुभ फलदायी माना गया है। इसलिए इस नवरात्रि पर भक्त अपने घर या मंदिर में विधिपूर्वक पूजा कर घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य की प्राप्ति कर सकते हैं।
चारधाम यात्रा 2026: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, 19 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा

नई दिल्ली ।उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब श्रद्धालु घर बैठे मोबाइल कंप्यूटर ऐप या वॉट्सएप के माध्यम से यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। यात्रा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है ताकि प्रशासन संख्या सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन बेहतर ढंग से संभाल सके। इस साल चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होगी। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के तीन तरीके हैं: वेबसाइट से रजिस्ट्रेशन:उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर अकाउंट बनाकर यात्रा की तारीख धाम और यात्रियों की जानकारी भरनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर रजिस्ट्रेशन स्लिप डाउनलोड की जा सकती है। मोबाइल ऐप से रजिस्ट्रेशन: Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप डाउनलोड कर अकाउंट बनाने के बाद यात्रा संबंधी जानकारी भरें और पास डाउनलोड करें। वॉट्सएप से रजिस्ट्रेशन:8394833833 नंबर पर Yatra मैसेज भेजकर चैटबॉट के जरिए रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं। सरकार ने 0135-1364 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जिससे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन या यात्रा संबंधित जानकारी ली जा सकती है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे खुलेंगे। यह महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 के पंचांग गणना के अनुसार तय किया गया है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। पिछली यात्रा के दौरान 2025 में केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को और बद्रीनाथ के 25 नवंबर को बंद किए गए थे। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 22 और 23 अक्टूबर 2025 को बंद हुए थे।श्रद्धालु ध्यान दें कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन 17 अप्रैल से शुरू होगा और हरिद्वार ऋषिकेश समेत कई प्रमुख स्थानों पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर लगाए जाएंगे।
मार्च में सूर्य के 4 गोचर, इन राशियों पर होगी खास कृपा, करियर, पैसा और तरक्की के योग

नई दिल्ली। मार्च 2026 में सूर्य ग्रह कुल चार बार गोचर करेंगे और द्रिक पंचांग के अनुसार इनकी टाइमिंग खास है। सबसे पहले 5 मार्च की देर रात 1 बजे सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 15 मार्च को देर रात 1 बजकर 8 मिनट पर सूर्य मीन राशि में गोचर करेंगे। फिर 18 मार्च की सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे। अंत में 31 मार्च की शाम 8 बजकर 16 मिनट पर सूर्य रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस बार के गोचर मुख्य रूप से पांच राशियों के लिए विशेष फलदायी होंगे, जिससे करियर, आत्मविश्वास, यश और आर्थिक उन्नति में मदद मिलेगी। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए मार्च का महीना नेटवर्किंग और करियर दोनों के लिहाज से शुभ रहेगा। नौकरी और व्यवसाय में तरक्की के अवसर मिलेंगे। आपकी पर्सनालिटी और बातचीत का तरीका लोगों को आकर्षित करेगा। एक से अधिक स्रोतों से धन लाभ होने की संभावना है और कोई बड़ा अवसर हाथ लग सकता है। सिंह राशिसिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और इस बार के मल्टीपल गोचर इस राशि वालों की लीडरशिप क्षमताओं को निखारेंगे। खासतौर पर सरकार और प्रशासन से जुड़े लोग फायदा उठा सकते हैं। कामकाज का विस्तार होगा और नई संपत्ति खरीदने के योग बन सकते हैं। तुला राशितुला राशि वालों के करियर में रफ्तार बढ़ेगी। अचानक बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। पार्टनरशिप में काम करने वालों के लिए समय शुभ रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, निवेश करने के अवसर मिल सकते हैं और संबंधों में प्रेम बढ़ेगा। अटका हुआ काम पूरा होने से राहत महसूस होगी। धनु राशिधनु राशि वालों को भाग्य का साथ मिलेगा। नई नौकरी मिल सकती है और विशेष रूप से छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा। पढ़ाई, परीक्षाओं या इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है। कुछ लोग धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं या घर में धार्मिक आयोजन हो सकता है। मकर राशिमकर राशि वाले मेहनत का फल पाने वाले हैं। बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है और नई नौकरी या प्रमोशन के प्रयास सफल होंगे। आर्थिक मजबूती आएगी और परिवार से सहयोग मिलेगा। सूर्य के उपायसूर्य देव आत्मविश्वास, यश, सफलता, सेहत और पिता के कारक हैं। सूर्य की कृपा पाने के लिए रोजाना तांबे के पात्र में जल अर्पित करें। यदि सूर्य कमजोर होने के कारण करियर में बाधा आ रही है, तो सुबह आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करने से जल्दी लाभ मिलने की संभावना है। (Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)
आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज शुक्रवार का भविष्यफल

युगाब्ध-5126, विक्रम संवत 2082, राष्ट्रीय शक संवत-1947, सूर्योदय 06.44, सूर्यास्त 06.04, ऋतु – ग्रीष्मचैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया, , 06 मार्च 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल। मेष राशि :- जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। पर प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। आत्मीय श्रेष्ठता बनेगी। शुभांक-2-5-6 वृष राशि :- हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। शुभांक-3-6-7 मिथुन राशि :- कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। दैनिक सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। ज्ञानार्जन का वातावरण बनेगा। शुभांक-3-5-7 कर्क राशि :- किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहें। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार मिलेंगे। कुछ एकाग्रता की प्रवृत्ति बनेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-7-8 सिंह राशि :– अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। जरा-सी लापरवाही आपको परेशानी में डाल सकती हैं। शुभांक-3-5-7 कन्या राशि :- संयमित भाषा का इस्तेमाल करें। कुछ कार्यक्रम बदलने होंगे। सब्र का फल मीठा होता है अत:धैर्य रखें व अच्छे समय इन्तजार करें। कर्म प्रधान विचार धारा बनाये रखें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। काम में लगे रहें लाभ होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। शत्रु से सावधान रहें। शुभांक-1-3-5 तुला राशि :- महत्त्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। शुभांक-2-4-6 वृश्चिक राशि :- स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। पत्नी व संतान पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। शुभांक-3-4-5 धनु राशि :- पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। संतान पक्ष की समस्या समाप्त होगी। खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। पत्नी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-2-4-7 मकर राशि :- व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। आलस्य का त्याग करें। सच्चाई का सहारा लें कार्यसिद्घि होगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। समय आपके पक्ष का बना रहेगा। शुभांक-3-5-7 कुम्भ राशि :- जो चल रहा हैं उसे सावधानीपूर्वक संभालें। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभांक-2-4-6 मीन राशि :- मध्याह्न से ही आशाएं बलवती होंगी। महत्त्वपूर्ण कार्यों को आज ही निबटा लें उसके बाद समय व्ययकारी सिद्घ होगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। नौकरी में स्थिति सामान्य ही रहेगी। शुभांक-1-3-5
5 मार्च का प्रेम राशिफल: इन राशियों के लिए आज प्यार का इजहार जरूरी, संवाद और विश्वास से सुलझेंगे रिश्तों के उलझे धागे

नई दिल्ली :आज का दिन प्रेम संबंधों के लिहाज से मिलाजुला रहने वाला है। कई राशियों के जीवन में रोमांस और खुशियों की नई शुरुआत हो सकती है तो कुछ लोगों को रिश्तों में छोटी गलतफहमियों और अहंकार से बचने की जरूरत होगी। ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि आज संवाद और समझदारी से रिश्तों को मजबूत किया जा सकता है। जो लोग अपने प्रेम संबंधों में दूरी महसूस कर रहे हैं उन्हें आज खुलकर दिल की बात कहनी चाहिए। प्रेम में विश्वास और धैर्य सबसे बड़ी ताकत साबित होगा। मेष राशि के लोगों के लिए आज का दिन थोड़ा सावधानी भरा हो सकता है। किसी छोटी बात को लेकर प्रेम साथी के साथ असहमति हो सकती है। हालांकि बाद में आपको अपनी गलती का एहसास भी हो सकता है इसलिए बेहतर होगा कि अहंकार को छोड़कर रिश्ते को बचाने के लिए खुद पहल करें और जरूरत पड़े तो माफी मांगने में भी देर न करें। वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन सुखद रहने के संकेत दे रहा है। आपका प्रियजन आपको कहीं घूमने चलने का प्रस्ताव दे सकता है। यह समय रिश्ते को और मजबूत बनाने का है। साथ बिताया गया समय आप दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ाएगा और प्रेम में मिठास भी घोलेगा। मिथुन राशि के लोगों का प्रेम जीवन आज बेहद रोमांटिक रह सकता है। आपका साथी रोमांटिक मूड में रहेगा और साथ में कहीं बाहर जाने का प्लान भी बन सकता है। मौसम और माहौल दोनों आपके पक्ष में रहेंगे जिससे आप दोनों के बीच प्यार और स्नेह बढ़ेगा। कर्क राशि के लोगों को प्रेम जीवन में खुशखबरी मिल सकती है। जिन लोगों की जिंदगी में अभी तक कोई खास नहीं था उनके जीवन में नए प्रेम संबंध की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। प्रेम साथी के साथ लॉन्ग ड्राइव या रोमांटिक पल बिताने का अवसर मिल सकता है। भविष्य को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं बन सकती हैं। सिंह राशि के लोगों को अपने लव पार्टनर से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। दिन प्रकृति के बीच समय बिताने और यादगार पल बनाने का हो सकता है। रिश्ते में उत्साह और नई ऊर्जा का अनुभव होगा। कन्या राशि के लोगों के लिए आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रेम साथी की अपेक्षाएं अधिक हो सकती हैं और संवाद की कमी के कारण गलतफहमी पैदा हो सकती है। ऐसे में शांत मन से बातचीत करना ही सबसे अच्छा समाधान होगा। तुला राशि के लोगों को आज प्रेम साथी के व्यवहार में थोड़ा बदलाव महसूस हो सकता है। ऐसा लग सकता है कि वे कुछ बातें छिपा रहे हैं लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचें। धैर्य और शांति के साथ बातचीत करने से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वृश्चिक राशि के लिए आज का दिन प्रेम संबंधों के लिहाज से काफी अच्छा रहेगा। आप अपने दिल की बात खुलकर कह सकते हैं। अपने प्रेम का इजहार करने का यह सही समय है। इससे रिश्ता और मजबूत होगा। धनु राशि के लोगों को आज रिश्तों में तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप से सावधान रहना होगा। किसी की बातों में आकर अपने रिश्ते को नुकसान पहुंचाने से बचें। बेहतर होगा कि आप दोनों मिलकर शांतिपूर्वक समाधान निकालें। मकर राशि के लोगों के लिए आज का दिन प्यार से भरा रहेगा। आपका साथी दिल खोलकर अपने प्रेम का इजहार कर सकता है और कोई छोटा सा तोहफा भी दे सकता है। दिन को खास बनाने का अवसर मिलेगा। कुंभ राशि के लोगों के लिए आज का दिन भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रेम साथी अपने दिल की बात कह सकता है और रिश्ते को आगे बढ़ाने या विवाह जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा भी हो सकती है। मीन राशि के लोगों के लिए आज का दिन प्रेम और मिठास से भरा रहेगा। एक छोटा सा उपहार या सरप्राइज रिश्ते में नई खुशियां ला सकता है। पुराने मनमुटाव खत्म होंगे और प्रेम संबंध और मजबूत होंगे।
Chaitra Navratri 2026: चैत्र माह की शुरुआत पूरे महीने रहेंगी धार्मिक पर्वों की धूम नवरात्रि रामनवमी हनुमान जयंती की तिथियां नोट करें

Chaitra Navratri 2026: नई दिल्ली:होली के पर्व के साथ हिंदू पंचांग के पहले महीने चैत्र मास की शुरुआत हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इसी समय से हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही सृष्टि की रचना की शुरुआत हुई थी। इसी कारण यह महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के रचयिता Brahma ने इसी तिथि से सृष्टि निर्माण का कार्य शुरू किया था। इस कारण चैत्र मास को नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। चैत्र मास के प्रारंभिक दिनों में कई प्रमुख व्रत मनाए जाएंगे। इस क्रम में 6 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। 11 मार्च को शीतला अष्टमी का व्रत आएगा जो विशेष रूप से Sheetala Mata की पूजा के लिए जाना जाता है। इसके बाद 15 मार्च को पाप मोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। 16 मार्च को प्रदोष व्रत और 17 मार्च को मासिक Shiva रात्रि यानी मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद 18 मार्च को चैत्र अमावस्या होगी। चैत्र मास के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों की शुरुआत 19 मार्च से होगी जब चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा। इसी दिन Gudi Padwa और Ugadi के साथ हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक Durga के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और देशभर में मंदिरों और घरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इसके बाद 21 मार्च को गणगौर पूजा का पर्व मनाया जाएगा जो खास तौर पर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 24 मार्च को चैती छठ और यमुना छठ का पर्व आएगा। 26 मार्च को भगवान Rama के जन्मोत्सव के रूप में राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 27 मार्च को चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा। महीने के अंतिम दिनों में भी कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व आएंगे। 29 मार्च को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा जबकि 31 मार्च को Mahavira जयंती मनाई जाएगी। इसके बाद 2 अप्रैल को Hanuman जयंती और चैत्र पूर्णिमा का पर्व आएगा जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह में कुछ विशेष धार्मिक कार्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को पंखा घड़ा सूती वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी फलदायी माना जाता है। इसके अलावा चैत्र मास में देवी उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान Durga Saptashati का पाठ करना और देवी की आराधना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।
13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती के कठोर प्रभाव से मिलेगी राहत, इन राशियों को होगा फायदा

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है। यह ग्रह सबसे धीमी गति से चलता है और एक राशि में लगभग ढाई साल तक ठहरता है, जिससे इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इस समय शनि मीन राशि में हैं और 2 जून 2027 तक यहीं रहेंगे। इस दौरान शनि मार्गी, वक्री और अस्त-उदय की अवस्थाओं में रहेंगे। शनि अस्त का समयद्रिक पंचांग के अनुसार, 13 मार्च 2026, शुक्रवार को शाम 7:13 बजे शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे। वे लगभग 40 दिनों तक अस्त रहेंगे और 22 अप्रैल 2026, बुधवार को सुबह 4:49 बजे दोबारा उदित होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि के अस्त होने से उनके कठोर प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाते हैं और कुछ राशियों को राहत और लाभ मिल सकते हैं। मेष राशिमेष राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना राहत देने वाला साबित हो सकता है। शनि आपके बारहवें भाव में अस्त होंगे, जहां पहले से साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण आ सकता है, आर्थिक स्थिति सुधर सकती है और स्वास्थ्य में राहत मिल सकती है। विदेश से जुड़े कामों में सफलता और लंबे समय से अटके कामों में प्रगति देखने को मिल सकती है। कार्यस्थल पर विवादों से दूर रहना आवश्यक है। वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का अस्त कई मामलों में फायदेमंद रहेगा। शनि आपके पांचवें भाव में अस्त होंगे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम फिर से शुरू हो सकते हैं। नौकरी और व्यापार में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं, प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापारियों को नए ऑर्डर या डील मिल सकती हैं। हालांकि, पढ़ाई और संतान से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना आवश्यक है, और खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए शनि का अस्त मिलाजुला असर देगा, लेकिन कुल मिलाकर लाभ के संकेत हैं। शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे और साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं और मेहनत का फल मिल सकता है। नौकरी में सराहना मिलेगी और संपत्ति से लाभ हो सकता है। हालांकि बोलचाल में सख्ती और खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है, ताकि रिश्तों में तनाव न बढ़े।
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का 3 शुभ योगों में होगा शुभारंभ, जानें तारीख और घटस्थापना का समय

Chaitra Navratri 2026: नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह नवरात्रि मार्च या अप्रैल में आती है। इस साल चैत्र नवरात्रि मार्च में पड़ रही है, इसलिए इसे लोग “मार्च की नवरात्रि” कह रहे हैं। होली के समापन के बाद यह बड़ा धार्मिक पर्व आता है, जिसमें कलश स्थापना और मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है। पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 6:52 बजे से शुरू हो रही है। यह प्रतिपदा तिथि अगले दिन 20 मार्च, शुक्रवार को सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। व्रत के लिए इस तिथि की उदयातिथि को शुभ माना गया है। 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ पहला व्रत रखा जाएगा। 3 शुभ योग बन रहे हैं चैत्र नवरात्रि 2026 पर तीन शुभ योग शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि बन रहे हैं। ये सभी योग विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं: सुबह का मुहूर्त: 6:52 बजे से 7:43 बजे तक (50 मिनट) दोपहर का मुहूर्त: 12:05 बजे से 12:53 बजे तक (48 मिनट) सुबह के मुहूर्त में कलश स्थापना करना उत्तम माना जाता है। यदि सुबह यह समय न मिले तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं। पहले दिन के अन्य शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त: 4:51 बजे – 5:39 बजे प्रातः संध्या मुहूर्त: 5:15 बजे – 6:26 बजे विजय मुहूर्त: 2:30 बजे दोपहर – 3:18 बजे गोधूलि मुहूर्त: 6:29 बजे शाम – 6:53 बजे शाम सायाह्न संध्या: 6:32 बजे – 7:43 बजे अमृत काल: 11:32 बजे रात – 1:03 बजे निशिता मुहूर्त: 12:05 बजे रात – 12:52 बजे इस प्रकार, इस साल चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ अत्यंत शुभ समय में हो रहा है और कलश स्थापना के लिए सुबह या दोपहर दोनों समय उपयोगी हैं।