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चैत्र नवरात्रि अष्टमी कब है? जानें कन्या पूजन की सारी जानकारी

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिन्दू धार्मिक कैलेंडर के अनुसार नौ दिनों तक चलने वाला पावन त्योहार है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस नौ दिवसीय पूजा में अष्टमी का दिन यानी आठवां दिन और भी ज्यादा महत्पूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग माता के आठवें रूप की पूजा करते हैं साथ ही कन्या पूजन भी करते हैं। लेकिन इस नवरात्रि अष्टमी कब पड़ेगी चलिए उसके बारे में जानते हैं। चैत्र अष्ठमी कब?चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अष्टमी के दिन भक्त खास पूजा, कन्या पूजन और सांधी पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा मां दुर्गा से अपने घर-परिवार में सुख, समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं। अच्छा मुहूर्त25 मार्च को दोपहर में 1 बजकर 51 मिनट पर होगा और 26 तारीख को अष्टमी तिथि सुबह में 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।11 बजकर 49 मिनट के बाद से ही नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा और 27 मार्च को सुबह में 10 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, नवरात्रि दशमी तिथि 28 मार्च को सुबह में 8 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन नवरात्रि व्रत पारण भी किया जाएगा। जानें पूजा विधिइस दिन सुबह स्नान करके सफेद या लाल वस्त्र पहनें।घर या मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।दीपक जलाएं और माँ को लाल चावल, फूल, मिठाई, फल आदि अर्पित करें।दुर्गा सप्तशती के अष्टम अध्याय का पाठ या देवी मंत्र का जाप करें।पूजा के अंत में प्रसाद और फूल कन्याओं को अर्पित करें।इसके बाद उन्हें भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें। माता रानी प्रसन्न होकर अपनी कृपा आप पर बनाएं रखती हैं।

नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..

नई दिल्ली:शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का तीसरा दिन इस बार और भी खास बन गया है क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि पर प्रसिद्ध पर्व गणगौर भी मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गणगौर का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से है। इस दिन शिवजी को ईसर और माता पार्वती को गौरा या गवरजा के रूप में पूजा जाता है। गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती होता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र सहित कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और विवाहित महिलाओं को सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं पूरे मनोभाव से व्रत रखकर माता गौरा की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी दिनभर रहेगा और यह 22 मार्च की देर रात तक प्रभावी रहेगा। वहीं, योग इन्द्र शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय माना जाता है। अमृत काल शाम 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। हालांकि, कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिनमें शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 31 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ नहीं माना जाता। नवरात्र का यह तीसरा दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां मां गौरा और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह दिन भक्ति, आस्था और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

चैत्र नवरात्रि 2026: अखंड ज्योति बुझ जाए तो न घबराएं, तुरंत करें ये सरल उपाय

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना के दौरान अखंड ज्योति जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह ज्योति श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलाने का विधान है। हालांकि, कई बार हवा, घी की कमी या बाती के कारण यह ज्योति बुझ जाती है। ऐसे में भक्तों के मन में डर और चिंता पैदा हो जाती है कि कहीं यह अपशकुन तो नहीं। धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष के अनुसार, अखंड ज्योति का बुझना कोई बड़ा अपशकुन नहीं है। यह एक सामान्य भौतिक कारण से होने वाली घटना भी हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण आपकी श्रद्धा और भक्ति है। यदि मन सच्चा है, तो छोटी-मोटी त्रुटियां पूजा को प्रभावित नहीं करतीं। अखंड ज्योति का महत्व बहुत गहरा है। यह घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और देवी कृपा का प्रतीक मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में भी बताया गया है कि पूजा में कर्मकांड से अधिक महत्व भाव और श्रद्धा का होता है। अगर किसी कारणवश ज्योति बुझ जाए, तो घबराने की बजाय शांत मन से तुरंत उपाय करना चाहिए। सबसे पहले मां दुर्गा का ध्यान करें और एक छोटा साक्षी दीपक जलाएं। इसके बाद अखंड ज्योति के दीपक को साफ करें और जली हुई बाती को निकाल दें। नई और लंबी बाती डालकर उसमें शुद्ध घी भरें। फिर साक्षी दीपक की लौ से ही अखंड ज्योति को पुनः प्रज्वलित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर मां से अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा मांगें और ॐ दुं दुर्गायै नमः या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। इस प्रक्रिया से आपकी पूजा और साधना पुनः सुचारु रूप से जारी रहती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योति बुझने को अपशकुन मानकर पूजा बंद करना या डर जाना गलत धारणा है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि अनजाने में हुई गलतियां क्षमा योग्य होती हैं। देवी भागवत और अन्य ग्रंथों में भी भक्ति को कर्मकांड से ऊपर बताया गया है। अखंड ज्योति को बुझने से बचाने के लिए कुछ सावधानियां भी अपनाई जा सकती हैं। हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाली लंबी बाती और शुद्ध घी का उपयोग करें। दीपक को हवा से बचाने के लिए कांच या मिट्टी का कवर लगाएं। समय-समय पर घी की मात्रा जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत भरें। पूजा स्थान को हवादार लेकिन सुरक्षित रखें। नवरात्रि का यह संदेश है कि भक्ति में भाव सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो छोटी भूलों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। मां दुर्गा भक्तों की सच्ची भावना को समझती हैं और उन्हें हमेशा आशीर्वाद देती हैं।

21 मार्च का राशिफल: जानिए आज आपके दिन में क्या रहेगा खास और किन बातों का रखना होगा ध्यान

नई दिल्ली। आज 21 मार्च, शनिवार है। इस दिन शनि देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार को शनि देव की आराधना करने से जीवन में स्थिरता, सुख और शांति बनी रहती है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, आज का दिन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ रहेगा, जबकि कुछ लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं सभी राशियों का हाल- मेषआज नए काम की जिम्मेदारी लेते समय सतर्क रहें। मन थोड़ा अशांत रह सकता है, इसलिए खुद को संयमित रखें। बेवजह गुस्सा और विवाद से बचें। आर्थिक लाभ के संकेत हैं, लेकिन बातचीत में संतुलन जरूरी है। व्यापार में भागदौड़ बढ़ेगी और परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। वृषभआज मन में बेचैनी रह सकती है और लक्ष्य हासिल करना कठिन लग सकता है। आत्मविश्वास में कमी महसूस होगी, इसलिए धैर्य बनाए रखें। संयम से काम लें। नौकरी में बदलाव के साथ उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। मिथुनआज आय के कई स्रोत खुल सकते हैं। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा, लेकिन सफलता के लिए कड़ी मेहनत जरूरी होगी। नौकरी में बदलाव के योग हैं और प्रमोशन के अवसर मिल सकते हैं। आय और वाहन सुख में वृद्धि संभव है। कर्कआज जीवन में सुखद अनुभव मिलेंगे। निजी जीवन में भावनाएं साझा करना आपके रिश्तों को मजबूत करेगा। कार्यक्षेत्र में दिन आपके पक्ष में रहेगा और नए अवसर सामने आ सकते हैं। सिंहआज आत्मविश्वास उच्च स्तर पर रहेगा। काम में लाभ मिलने के संकेत हैं और तरक्की के योग बन रहे हैं। हालांकि, कोई भी निर्णय लेने से पहले सोच-विचार जरूर करें। नई रणनीति अपनाने की जरूरत पड़ेगी। कन्यातनावपूर्ण परिस्थितियों में भी शांत बने रहें। प्रेम जीवन को बेहतर बनाने के लिए नए और रोमांटिक तरीके अपनाएं। कार्यस्थल पर विवादों से दूर रहें। स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी। तुलाआज अपने पार्टनर के साथ रचनात्मक गतिविधियों में समय बिताएं, इससे संबंध मजबूत होंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और करियर में उन्नति के संकेत हैं। स्वास्थ्य को लेकर भी आप निश्चिंत रह सकते हैं। वृश्चिकआज रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। लंबे समय से लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए आप तैयार रहेंगे। किसी भी कार्य से पहले सही योजना और शोध जरूरी है। धनुप्रेम जीवन में खुशियों के पल तलाशें और कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहें। समझदारी से लिए गए आर्थिक फैसले लाभ देंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। किसी समस्या का हल बातचीत के जरिए निकल सकता है। मकरयात्रा के दौरान भी अपने साथी से संपर्क बनाए रखें। ऑफिस की राजनीति से दूरी बनाकर रखें। अपने जीवनसाथी से खुलकर अपनी भावनाएं साझा करें, इससे रिश्ते मजबूत होंगे। कुंभआज कार्यस्थल पर अपना धैर्य बनाए रखें और वरिष्ठों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें। धन लाभ के संकेत हैं। तली-भुनी और मसालेदार चीजों से दूरी रखें। जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। मीनआज आप दूसरों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रेम संबंधों को मजबूत बनाए रखें और कार्यक्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाएं। स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। भविष्य के लिए बचत पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

नवरात्रि तृतीया पर मां चंद्रघंटा की आराधना से मिलेगा साहस और शांति, अपनाएं सही पूजा विधि

नई दिल्ली:चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप साहस, शांति और शक्ति का अद्भुत प्रतीक माना जाता है। मां के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जो उन्हें चंद्रघंटा नाम देता है। सिंह पर सवार और दस भुजाओं वाली मां का यह रूप भक्तों के सभी भय और कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप जहां एक ओर उग्रता और वीरता का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह शांति और संतुलन का संदेश भी देता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आत्मविश्वास, बुद्धि तथा मानसिक शांति में वृद्धि होती है। पूजा की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके की जाती है। स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं और मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापना करें जिसमें जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। घी का दीपक जलाकर मां को लाल फूल, चंदन, रोली और फल अर्पित करें। नैवेद्य में खीर या हलवा चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप विशेष महत्व रखता है। मां चंद्रघंटा का महामंत्र इस प्रकार हैया देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः बीज मंत्रऐं श्रीं ह्रीं क्लीं चंद्रघंटायै नमःयाऐं श्रीं शक्तये नमः इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करने से मन को शांति मिलती है और मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा चंद्रघंटा स्तोत्र और उपासना मंत्र का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना गया है। नियमित रूप से इनका जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें। मन को शांत और एकाग्र रखें और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार से दूर रहें। मां को सफेद या लाल फूल अर्पित करें और सात्विक भोजन का ही सेवन करें। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई मां चंद्रघंटा की भक्ति से व्यक्ति को निर्भीकता, सफलता और आंतरिक शांति प्राप्त होती है। नवरात्रि का यह तीसरा दिन आत्मबल बढ़ाने और जीवन में स्थिरता लाने का विशेष अवसर माना जाता है।

चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है। इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है। वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए: रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता। मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि। बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता। गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन। इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है। पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार

नई दिल्ली । नवरात्रि के नौ दिवसीय व्रत में आहार का चुनाव बहुत मायने रखता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि मखाना व्रत के लिए सबसे अच्छा और सात्विक आहार है। यह हल्का आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाने का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है थकान दूर करता है और व्रत के दौरान कमजोरी नहीं होने देता। उत्तर प्रदेश कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार व्रत का असली सार है आस्था अनुशासन और स्वास्थ्य का संतुलन। मखाना इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। मखाने के स्वास्थ्य लाभ ऊर्जा और ताकत: मखाना में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और व्रत के दौरान भूख और कमजोरी कम लगती है। पाचन स्वास्थ्य: इसमें हाई फाइबर पाया जाता है जिससे पाचन सुधरता है कब्ज नहीं होती और पेट हल्का रहता है। ब्लड शुगर नियंत्रण: मखाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए यह डायबिटीज में भी फायदेमंद है। दिल और हड्डियां: पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इम्यूनिटी और त्वचा: एंटीऑक्सीडेंट से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है सूजन कम होती है और त्वचा स्वस्थ रहती है। वजन नियंत्रण: कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण यह वजन बढ़ने नहीं देता। व्रत में मखाने का सेवन मखाना को कई तरीकों से खाया जा सकता है: घी में भूनकर: कुरकुरे और स्वादिष्ट स्नैक के रूप में। दूध में डालकर खीर: मीठा और पौष्टिक विकल्प। सादा स्नैक: हल्का और आसानी से पचने वाला।इस प्रकार मखाना न सिर्फ व्रत को सात्विक और पौष्टिक बनाता है बल्कि शरीर और मन को हल्का ऊर्जा से भरपूर और स्वस्थ रखता है।

चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और आरती

नई दिल्ली । आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो मां ब्रह्मचारिणी के नाम समर्पित है। हिन्दू धर्मग्रंथों में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी कहा गया है। उनका यह रूप भक्तों को साधना और संयम की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं। मां के सामने दीपक जलाना, फूल अर्पित करना और भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्र जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है। पूजा के बाद मां की आरती गाना या सुनना अत्यंत शुभ होता है। आरती के माध्यम से भक्त मां की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यहां पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी माता की आरती: ब्रह्मचारिणी माता की आरती ओम जय ब्रह्मचारिणी मां अपने भक्त जनों पे करती सदा ही दया ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। दर्शन अनुपम मधुरम, साद नारद रेहती शिव जी की आराधना, मैया सदा करती ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। बाएँ हाथ कमंडल, दाहिन में माला रूप जो तिरीमय अद्भुत, सुख देने वाला ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। देव ऋषि मुनि साधु, सब गुण मां के गाते शक्ति स्वरूपा मैया, सब तुझको ध्याते ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। संयम तप वैराग्य, प्राणी वो पाता ब्रह्मचारिणी मां को, जो निशिदिनी ध्याता ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। नव दुर्गो में मैया, दूजा तुम्हारा स्वरूप श्वेत वस्त्र धारिणी मां, ज्योतिर्मय तेरा रूप ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। दूजे नवरात्रे मैया, जो तेरा व्रत धारे करके दया जग जननी, तू उसको तारे ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। शिव प्रिय शिवा ब्रम्हाणी, हम पे दया करियो बालक है तेरे ही, दया दृष्टि रखियो ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। शरण तिहारी आए, ब्रम्हाणी माता करुणा हम पे दिखाओ, शुभ फल की दाता ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। जो कोई गावे, कहत शिवानंद स्वामी मन वांछित फल पावे, ओम जय ब्रह्मचारिणी मां। पूजा और आरती के साथ मंत्र का जाप करना भी अत्यंत प्रभावशाली होता है। मां ब्रह्मचारिणी के प्रमुख मंत्र हैं: ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।इस दिन विधिपूर्वक पूजा, आरती और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, संयम और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप संयम ज्ञान और वैराग्य की प्रतीक देवी हैं। उनका यह रूप हमें कठिन समय में भी संयम और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके स्वरूप का परिचायक है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यही कारण है कि उनका पूजन साधना और संयम का अभ्यास करवा कर व्यक्ति को अडिग बनाता है। जीवन या व्यवसाय में अगर कोई बड़ी बाधा बार-बार आती है तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपकी इच्छाओं को पूरा करने में मदद कर सकती है और आत्मविश्वास को नया बल देती है। इस दिन का शुभ-मुहूर्त सुबह का समय माना गया है लेकिन विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सफेद या हल्के पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। इससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है। पूजन विधि सरल है लेकिन प्रभावशाली। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने कृतज्ञता भाव व्यक्त करें। मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें क्योंकि ये उनके प्रिय माने जाते हैं। भोग में चीनी मिश्री या पंचामृत चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना आवश्यक है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र है: “या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥” इस मंत्र का अर्थ है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। साधारण मंत्र भी है: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जिसका जाप कर श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना की जाती है। इस प्रकार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा न केवल आत्मविश्वास और संयम की शक्ति देती है बल्कि जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी लाती है। इस दिन विधि-विधान और उचित मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

नवरात्रि स्पेशल: व्रत की थाली में शामिल करें ये सुपरफूड्स, नहीं होगी कमजोरी

नई दिल्ली नवरात्रि के पावन पर्व में व्रत रखना सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि शरीर और मन को बनाए रखने का भी एक तरीका है। ऐसे में सही खान-पान बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि पूरे दिन ऊर्जा बनी रहे और कमजोरी महसूस न हो। व्रत की थाली में ये चीजें जरूर शामिल करेंव्रत के दौरान प्रभाव, सुपाच्य और मोनसायटिक भोजन लेना चाहिए। थाली में मखाना, साबूदाना, कुट्टू और समुद्री फल जरूर शामिल करें। ये सभी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। मखाना: परमाणु बम का सबसे अच्छा विकल्पमखाना लो कैलोरी और हाई चॉकलेट वप्रोटीन से भरपूर होती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। इसे भूनकर या खेडगेरे का खजाना पाया जा सकता है। यह ब्लड डीवीडी कंट्रोलर और किडनी को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। साबूदाना: तत्काल ऊर्जा का स्रोतसाबूदाना कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। यह प्रभाव और आसानी से पचने वाला होता है। इसे वड़ा या खेड के रूप में खाया जाता है। बेहतर पोषण के लिए इसे दही या मूंगफली के साथ लेना खतरनाक होता है। कुट्टू: लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखेंकुट्टू का आटा प्रोटीन, आयरन और विविधता से भरपूर होता है। यह ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। कुट्टू की रोटी, पूरी या चीला व्रत में अच्छे विकल्प हैं। चमत्कारी फल: ताजगी और इम्युनिटी का खजानासेब, केला, सेंट्रा और अनार जैसे फलों को विटामिन और वस्तुएं दी जाती हैं। ये शरीर को बनाए रखते हैं, डिटॉक्स करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं। ध्यान में क्या रखें?व्रत के दौरान अधिकतर ताला-भुना खाने से अर्थव्यवस्था और पानी का ठहराव होता है। श्रेणी आहार लेने से शरीर पर प्रभाव, मन शांत और ऊर्जा संरक्षित रहता है।