वरुथिनी एकादशी 2026: जानें पूजा विधि, व्रत नियम और महत्व

नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है वरुथिनी एकादशी इस साल 13 अप्रैल को पड़ रही है और 14 अप्रैल की मध्यरात्रि तक इसकी तिथि रहेगी इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा विशेष रूप से की जाती है मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से न केवल पाप नष्ट होते हैं बल्कि जीवन में आने वाली परेशानियां और श्राप भी समाप्त हो जाते हैं वरुथिनी एकादशी अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत है और यह कृष्ण पक्ष की तिथि में आता है इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन भगवान का ध्यान और भजन कर मन और शरीर को शुद्ध करते हैं वरुथिनी एकादशी के दिन अनाज जैसे चावल गेहूं और दालें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए क्योंकि इन्हें पचाना कठिन होता है और ये व्रत में ध्यान भंग कर सकते हैं साथ ही बीन्स मटर और भारी भोजन भी वर्जित हैं चाय कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी कैफीनयुक्त चीजें नहीं लेनी चाहिए इस दिन केवल सात्विक भोजन या फलाहार ही उचित माना गया है मांस मछली प्याज लहसुन जैसी तामसिक वस्तुएं भी वर्जित हैं वरुथिनी एकादशी पर तुलसी की पूजा विशेष महत्व रखती है इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़े जाएं और घर में तुलसी का स्थान पवित्र रखा जाए व्रत के दिन बाल धोने से भी परहेज किया जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि और ध्यान का दिन होता है इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करने से विशेष लाभ होता है और जीवन में शांति तथा आत्मिक संतोष प्राप्त होता है यह व्रत श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी और शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को भी इसका महत्व बताया था राजा परीक्षित ने अपने अंतिम समय में इस व्रत और भगवान की भक्ति के माध्यम से मोक्ष का मार्ग पाया था यही कारण है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है इस साल वरुथिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को रात 01 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 14 अप्रैल को रात 01 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगा श्रद्धालु इस समय के अनुसार व्रत का पालन और पूजा कर सकते हैं व्रत पूर्ण करने के बाद पारण किया जाता है जिसमें हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है वरुथिनी एकादशी व्रत रखने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होते हैं बल्कि शरीर और मन की शुद्धि भी होती है इससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है और वह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है इस दिन का ध्यान और भक्ति जीवन में सुख समृद्धि और शांति का मार्ग खोलती है
राशिफल 9 अप्रैल: जानें हर राशि के लिए आज के खास उपाय और फल!

नई दिल्ली।गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 के लिए राशिफल बता रहा है कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ रहेगी, तो कुछ राशियों को सतर्क रहने की जरूरत है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने से आर्थिक परेशानियों में राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं राशियों के अनुसार दिन की स्थिति: मेष (Aries)आज विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक साबित होंगे। करियर में बढ़त पाने और प्रमोशन के लिए ऑफिस में पूरी मेहनत करें। बातों में सावधानी रखें और कठोर शब्दों का प्रयोग न करें। वृषभ (Taurus)करियर में नए अवसर सामने आएंगे और आपको प्रशंसा मिल सकती है। व्यापार अच्छा चलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। दिन सकारात्मक और लाभकारी रहेगा। मिथुन (Gemini)आज मनमुताबिक परिणाम नहीं मिल सकते। तनाव से बचने के लिए सेल्फ-केयर पर ध्यान दें। परिवार से कोई सुखद समाचार मिल सकता है। कर्क (Cancer)काम की सराहना मिलेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। ऑयली फूड्स से दूरी बनाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस करें। काम का दबाव ज्यादा न लें। सिंह (Leo)व्यवसायियों को खर्चों में सावधानी बरतनी होगी। जीवनसाथी से बहस से बचें। घूमने-फिरने का प्लान बन सकता है। कन्या (Virgo)पॉजिटिव एटीट्यूड बनाए रखें। डाइट में हरी सब्जियों को शामिल करें और फिटनेस पर ध्यान दें। तनाव से दूर रहें। तुला (Libra)भाग्य आपके पक्ष में रहेगा। यह दिन सपने सच होने जैसा अनुभव देगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और व्यवसाय में मुनाफा होगा। वृश्चिक (Scorpio)कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। प्रमोशन या नया कार्यभार मिलने की संभावना है। सीनियर्स के साथ सावधानी रखें, ऑफिस पॉलिटिक्स से बचें। धनु (Sagittarius)धन और वित्त के मामले में दिन अच्छा रहेगा। नई स्किल्स सीखने और अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने के लिए अनुकूल समय है। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। मकर (Capricorn)दिन की शुरुआत अच्छी रहेगी, लेकिन अंत मध्यम रहेगा। अप्रत्याशित घटनाओं से काम की गति धीमी हो सकती है। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, पर खर्चे बढ़ सकते हैं। कुंभ (Aquarius)अहंकारी न बनें और सुझावों को खुले दिल से स्वीकार करें। कारोबार में विकास और अच्छे प्रॉफिट की संभावना है। मीन (Pisces)करियर और फाइनेंशियल लाइफ नॉर्मल रहेगी। लक्ष्यों को पाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। व्यवसाय में आर्थिक कमजोरी और कुछ नुकसान हो सकते हैं।
भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के गुरुवार व्रत में जरूर करें ये काम, काम होंगे सफल

नई दिल्ली।गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, बेसन से बनी चीज़ों का भोग लगाते हैं और व्रत रखते हैं। धर्म-शास्त्रों में कहा गया है कि सात consecutive गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े अशुभ फल दूर होते हैं और गुरु शुभ फल देने लगते हैं। कथाएक नगर में एक समृद्ध व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल भेजकर बहुत धन कमाता था और दान-पुण्य भी करता था। लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। एक बार व्यापारी जब व्यापार के लिए बाहर गया, तब बृहस्पति देव साधु वेश में उसकी पत्नी के पास आए और भिक्षा मांगी। पत्नी ने उन्हें अपमानित किया और कहा कि वह अपने धन को दान में नहीं देना चाहती। बृहस्पति देव ने उसे कई पुण्य उपाय सुझाए, लेकिन पत्नी ने उन्हें नहीं माना। बृहस्पति देव ने सलाह दी कि सात गुरुवार विशेष विधि से क्रियाएं करनी होंगी, जिससे उसका धन नष्ट हो जाएगा। पत्नी ने यही किया। केवल तीन गुरुवार बीतने पर सम्पूर्ण संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। व्यापारी जब वापस आया, तो उसने देखा कि सब कुछ नष्ट हो चुका है। उसने जंगल से लकड़ी काटकर बेचने का काम शुरू किया, ताकि अपनी पुत्री को जीवित रख सके। बृहस्पति देव का वरदानएक दिन व्यापारी बृहस्पतिवार को दुखी बैठा था, तभी बृहस्पति देव साधु रूप में प्रकट हुए। उन्होंने व्यापारी को गुरुवार के दिन दो पैसे के चने और गुड़ लेकर कथा पढ़ने और प्रसाद वितरित करने का निर्देश दिया। व्यापारी ने ऐसा किया और उसकी कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। अगले गुरुवार को उसने कथा नहीं पढ़ी, और परिणामस्वरूप कुछ समस्याएँ फिर सामने आईं। राजा के यज्ञ के समय व्यापारी और उसकी पुत्री को गलत आरोप में कैद कर दिया गया। व्यापारी ने फिर गुरुवार की कथा पढ़कर प्रसाद वितरित किया, जिससे बृहस्पति देव प्रकट हुए और उनकी सभी परेशानियाँ दूर कर दीं। व्यापारी और उसकी पुत्री को मुक्त कर दिया गया और उन्हें आधा राज्य, विवाह हेतु उच्च कुल में दहेज़ और सम्मान मिला। बृहस्पतिवार व्रत का महत्वगुरुवार व्रत से बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।सात गुरुवार व्रत करने से धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।व्रत के दौरान कथा पढ़ना और प्रसाद बांटना अत्यंत फलदायक है।पीले कपड़े पहनना और बेसन के व्यंजन चढ़ाना शुभ माना गया है। इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि गुरु और भगवान का सम्मान करना चाहिए। व्रत और कथा से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।
Budhwar Ka Vrat: गणेश जी की कृपा पाने के लिए अपनाएं सही नियम!

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में देवी-देवताओं की कृपा पाने के लिए पूजा के साथ-साथ व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है बुधवार का व्रत, जो Lord Ganesha और Budh Dev को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसे बुद्धि, विवेक, सफलता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। खासकर करियर और कारोबार में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है। कब से शुरू करें बुधवार का व्रतधार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का व्रत किसी भी हिंदी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से शुरू करना शुभ होता है। यदि इस दिन बुध का नक्षत्र भी पड़ जाए तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। आमतौर पर यह व्रत 21 या 45 बुधवार तक किया जाता है। यदि किसी कारणवश व्रत बीच में छूट जाए, तो उसे बाद में पूरा करते हुए सही विधि से उद्यापन करना चाहिए। व्रत की विधि और पूजा का तरीकाबुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करने के बाद Lord Ganesha और Budh Dev की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। गणेश जी को 21 गांठों वाली दूर्वा अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। वहीं बुध देव को हरे वस्त्र, हरी मूंग या अन्य हरी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जप करना और अंत में आरती करना जरूरी माना गया है। बुधवार व्रत का धार्मिक महत्वधार्मिक मान्यता है कि यह व्रत करने से साधक को बुद्धि, विद्या, विवेक और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। Lord Ganesha विघ्नहर्ता माने जाते हैं, इसलिए उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। वहीं Budh Dev की कृपा से व्यक्ति की वाणी, तर्कशक्ति और व्यापारिक समझ मजबूत होती है। इस व्रत से करियर और व्यवसाय में सफलता मिलने की भी मान्यता है। उद्यापन कैसे करेंजब व्रत की निर्धारित संख्या पूरी हो जाए, तो उसका विधि-विधान से उद्यापन करना चाहिए। उद्यापन के दिन प्रातः स्नान-ध्यान के बाद पूजा करें। मान्यता के अनुसार इस दिन बुध देव के मंत्र का कम से कम 19000 बार जप किया जाता है और अपामार्ग की लकड़ी से हवन किया जाता है। इसके बाद Lord Ganesha और Budh Dev की पूजा, कथा और आरती की जाती है। अंत में अपनी क्षमता अनुसार हरी वस्तुओं, अनाज या वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। व्रत से जुड़ी सावधानियांव्रत के दौरान शुद्धता और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। कड़वे या तामसिक भोजन से बचना चाहिए और मन में सकारात्मक भाव रखना चाहिए।
11 अप्रैल से मंगल और बुध की युति से इन राशियों की होगी तरक्की, बढ़ेगी आय, जानिए क्या होंगे लाभ?

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तो यह युति बहुत खास मानी जाती है। मंगल ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि बुध बुद्धि, संवाद और रणनीति का ग्रह। इन दोनों का संगम व्यक्ति की सोचने-समझने और स्मार्ट तरीके से काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह युति 11 अप्रैल 2026 को मीन राशि में बनेगी। मंगल पहले ही 2 अप्रैल को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, और बुध भी 11 अप्रैल को मीन राशि में आ जाएंगे। यह युति 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय पैसों और करियर के मामले में अनुकूल रहेगा। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आपकी पहचान बढ़ेगी। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है। निवेश करने का समय अनुकूल रहेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात आपका दिन और बेहतर बना सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए यह युति आर्थिक मजबूती और अवसर लेकर आएगी। धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नया काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। व्यवसाय में विस्तार और पार्टनरशिप से लाभ होने की संभावना है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। घर या वाहन खरीदने का विचार भी सफल हो सकता है। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और वित्तीय मामलों में फायदेमंद रहेगा। नौकरी में प्रमोशन या तरक्की के योग हैं। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। 11 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच का समय आपके लिए नए अवसर और मनचाही नौकरी या नई शुरुआत के संकेत लेकर आएगा।
अक्षय तृतीया पर बनेगा खास संयोग, ‘अक्षय योग’ से इन राशियों पर होगी धन वर्षा

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ‘अक्षय योग’ को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है-जो कभी समाप्त न हो, यानी इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल लंबे समय तक मिलता है। यह योग तब बनता है, जब सूर्य और चंद्रमा अपनी-अपनी उच्च राशियों में स्थित होते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे, जिससे यह विशेष योग बनेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इस संयोग से कई राशियों के जीवन में धन, सफलता और समृद्धि का प्रवेश होगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। आइए जानते हैं किन राशियों को मिलेगा इस शुभ योग का विशेष लाभ।मेष राशि (Aries)इस राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में लाभदायक साबित होंगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन के संकेत हैं, जबकि व्यापारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और निवेश में फायदा होने की संभावना है। वृषभ राशि (Taurus)वृषभ राशि वालों के लिए यह योग सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। घर, जमीन या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा और कार्यों में सफलता के योग बनेंगे। सिंह राशि (Leo)सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आएगा। लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है और कोई बड़ा अवसर हाथ लग सकता है, जो आगे चलकर लगातार फायदा देगा। वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि वालों के लिए यह अवधि आर्थिक दृष्टि से लाभकारी रहेगी। अचानक धन लाभ के संकेत हैं और पुराने निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिल सकता है। विदेश यात्रा की योजना सफल हो सकती है। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई उपलब्धि मिलने के योग हैं, जिससे करियर में उन्नति होगी।
हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है जिन्हें संकट मोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ मंगलवार का व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करता है उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंगलवार व्रत की महिमा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है मानसिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है। मंगलवार व्रत रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले साधक को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर साधना करें। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या के समय प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। व्रत के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं और दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक होता है। धूम्रपान और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है। जैसे महिलाओं को हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए और पूजा के दौरान हनुमान जी को चरणामृत से स्नान नहीं कराया जाता है। यह परंपराएं शास्त्रों में वर्णित हैं और इनका पालन करना शुभ माना जाता है। मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। जब व्यक्ति पूरे मन से इस व्रत का पालन करता है तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार का व्रत रखते हैं तो इन नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका व्रत पूर्ण और फलदायी बन सके।
आज का राशिफल 8 अप्रैल 2026: मेष से मीन राशि तक, जानें कल का दिन कैसा रहेगा
नई दिल्ली।आज आपकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत रहेगी। हेल्थ भी अच्छी बनी रहेगी। लव लाइफ का आनंद लें और पुराने मतभेदों को सुलझाएँ। कुल मिलाकर धन और सेहत दोनों ही पॉजिटिव रहेंगे। सिंह (Leo)आज आप अपनी काबिलियत साबित करने के लिए हर मौके का लाभ उठाएँ। रिलेशनशिप को रोमांचक और प्रोडक्टिव बनाए रखें। पॉजिटिव सोच से वर्क स्ट्रेस कम होगा और दिन बेहतर बीतेगा। कन्या (Virgo)आज का दिन आपके लिए खुशहाल पर्सनल और प्रोफेशनल रहेगा। ऑफिस में अपने सीनियर्स को परफॉर्मेंस से संतुष्ट रखें। हेल्थ सामान्य है, लेकिन खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। तुला (Libra)रिलेशन में पार्टनर के साथ असहमति सुलझाएँ। प्रोफेशनल नतीजे शानदार रहेंगे। पैसों को समझदारी से इन्वेस्ट करें। कोई बड़ी हेल्थ समस्या परेशान नहीं करेगी। वृश्चिक (Scorpio)नौकरी में जरूरी काम ध्यान से करें। पार्टनर के साथ समय बिताएँ। सही लाइफस्टाइल अपनाएँ और हेल्दी रहें। आज धन लाभ होगा। रिलेशन में अहंकार के लिए कोई जगह नहीं रहेगी। धनु (Sagittarius)आज रोमांस से जुड़े मामलों को संभालें। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में सावधानी बरतें। हेल्थ पर विशेष ध्यान दें। मकर (Capricorn)ऑफिस में आपका रवैया महत्वपूर्ण रहेगा। धन की कमी नहीं होगी। अधिक से अधिक सेविंग्स करने के विकल्प दिखेंगे। हेल्थ से समझौता न करें। कुंभ (Aquarius)रोमांस में संतुलन बनाएं। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में सावधान रहें। प्रेम संबंध सफल रहेंगे और पार्टनर के लिए अपने जुनून को साबित करने के मौके मिलेंगे। मीन (Pisces)आज आपकी ईमानदारी का असर रोमांटिक रिश्तों पर पड़ेगा। काम की जगह चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। सुरक्षित पैसों के निवेश को प्राथमिकता दें।
गजकेसरी योग का बड़ा असर अक्षय तृतीया पर मेष से धनु तक धन सफलता और समृद्धि के खुलेंगे द्वार

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पावन पर्व अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन अत्यंत शुभ माने जाने वाला गजकेसरी योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को राजयोग के समान प्रभावशाली माना जाता है जो व्यक्ति के जीवन में धन समृद्धि और सफलता के नए द्वार खोल सकता है। ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा और गुरु एक दूसरे से केंद्र स्थान में होते हैं तब यह विशेष योग बनता है। इस बार यह संयोग अक्षय तृतीया के दिन बन रहा है जिसे बेहद शुभ संकेत माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य और निवेश अक्षय फल देते हैं यानी उनका लाभ लंबे समय तक बना रहता है। यही कारण है कि इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है और इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार गजकेसरी योग का सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रभाव मेष तुला और धनु राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है। लंबे समय से रुके हुए कामों में तेजी आ सकती है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह बेहद अनुकूल समय है। व्यापार से जुड़े लोगों को अचानक धन लाभ हो सकता है और मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है। तुला राशि के जातकों के लिए यह योग सुख सुविधाओं और मान सम्मान में वृद्धि का संकेत दे रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और जो लोग बदलाव की सोच रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं धनु राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा सकता है क्योंकि गुरु इस राशि के स्वामी माने जाते हैं। इस दौरान बौद्धिक क्षमता में वृद्धि हो सकती है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद लाभकारी रहने की संभावना है और कर्ज से मुक्ति मिलने के संकेत भी मिल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में गजकेसरी योग का विस्तार से वर्णन किया गया है जिसमें बताया गया है कि यह योग व्यक्ति को हाथी जैसी शक्ति और सिंह जैसा साहस प्रदान करता है। वहीं फल दीपिका में भी उल्लेख मिलता है कि इस योग में किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ फल देते हैं। कुल मिलाकर इस वर्ष की अक्षय तृतीया केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत खास मानी जा रही है। ऐसे में इस शुभ अवसर पर सही निर्णय और सकारात्मक प्रयास जीवन में नई दिशा दे सकते हैं और आने वाले समय को समृद्ध बना सकते हैं।
कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा। ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादकथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है। ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णुमहादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्यलंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मानचूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला। कालाष्टमी कब हैहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी। (Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)