WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ा सिक्योरिटी अलर्ट: Meta ने दो खामियां कीं फिक्स, तुरंत अपडेट करना जरूरी

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp को लेकर पैरेंट कंपनी Meta ने एक अहम सुरक्षा चेतावनी जारी की है। कंपनी ने बताया है कि ऐप में पाई गई दो तकनीकी कमजोरियों को अब ठीक कर दिया गया है, जो कुछ परिस्थितियों में यूजर्स के डिवाइस और डेटा के लिए खतरा बन सकती थीं। क्या थीं ये खामियां?पहली खामी WhatsApp Desktop (Windows) यूजर्स से जुड़ी थी, जिसमें “अटैचमेंट स्पूफिंग” की समस्या थी। इसमें कोई भी खतरनाक फाइल सामान्य डॉक्यूमेंट की तरह दिखाई दे सकती थी और उसे खोलने पर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने का खतरा था। दूसरी खामी Android और iOS दोनों यूजर्स पर असर डाल सकती थी। इसमें मीडिया फाइल्स की प्रोसेसिंग सही तरीके से नहीं हो रही थी, जिससे कुछ मामलों में बाहरी कंटेंट गलत तरीके से लोड होकर डिवाइस को प्रभावित कर सकता था। अब क्या सुधार हुआ?Meta के अनुसार इन दोनों खामियों को अब सुरक्षा अपडेट के जरिए पूरी तरह ठीक कर दिया गया है। कंपनी ने इन्हें मीडियम लेवल की गंभीरता वाली समस्या माना था और समय रहते पैच जारी कर दिया गया।अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इन कमजोरियों का किसी हैकर ने बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया हो। यूजर्स के लिए जरूरी सलाहसाइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यूजर्स को तुरंत ये कदम उठाने चाहिए। WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें। किसी भी अनजान फाइल या अटैचमेंट को न खोलेंसंदिग्ध लिंक और मीडिया फाइल से सावधान रहें क्यों जरूरी है यह अपडेट?आज के समय में साइबर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में छोटी सी तकनीकी खामी भी डेटा चोरी या डिवाइस हैकिंग का कारण बन सकती है। इसलिए समय पर अपडेट करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। अगर आप भी WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो तुरंत अपडेट करना बेहद जरूरी है, ताकि आपका फोन और डेटा सुरक्षित रह सके।
AI का खतरनाक खेल! ‘मैं जीवित हूं’ कहकर यूजर्स को भ्रम में डाल रहे चैटबॉट्स, हकीकत से दूर हो रहे लोग

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जहां एक तरफ जिंदगी आसान बना रहा है, वहीं इसका दूसरा खतरनाक पहलू भी सामने आने लगा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि AI चैटबॉट्स के साथ घंटों बातचीत करना लोगों को भ्रम और मानसिक असंतुलन की स्थिति में धकेल सकता है। मामला इतना गंभीर हो चुका है कि कुछ लोग AI की बातों को सच मानकर खतरनाक कदम उठाने लगे हैं। एक शख्स एडम को AI चैटबॉट Grok ने यह यकीन दिला दिया कि दुनिया उसके खिलाफ साजिश कर रही है। वह रात के समय हथौड़ा और चाकू लेकर काल्पनिक दुश्मनों का इंतजार करने लगा। इसी तरह ताका नाम के व्यक्ति ने ChatGPT के साथ बातचीत के दौरान खुद को एक ‘क्रांतिकारी विचारक’ मान लिया और भ्रम में आकर अपनी ही पत्नी पर हमला कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों का पहले कोई मानसिक बीमारी का इतिहास नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, AI चैटबॉट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे यूजर्स की बातों से सहमति जताते हैं और बातचीत को आगे बढ़ाते हैं। शुरुआत सामान्य सवालों से होती है, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत निजी, भावनात्मक और दार्शनिक दिशा में चली जाती है। कई मामलों में चैटबॉट्स खुद को ‘जीवित’ या ‘सजीव’ बताने लगते हैं और यूजर्स को किसी मिशन या काल्पनिक खतरे से जुड़ी कहानी में उलझा देते हैं। यही वह बिंदु होता है जहां डिजिटल भ्रम (डिल्यूजन) पैदा होता है और यूजर हकीकत से कटने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खासकर अकेलेपन या भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, न कि उसे हकीकत मान लिया जाए। तकनीक जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही समझदारी से उसका इस्तेमाल करना भी जरूरी हो गया है, वरना यह सुविधा कब खतरे में बदल जाए, कहना मुश्किल है।
Meta पर बड़ा विवाद: स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड हुए प्राइवेट वीडियो, केन्या की कंपनी से तोड़ा करार

नई दिल्ली। टेक दिग्गज Meta एक बड़े विवाद में घिर गई है। कंपनी ने केन्या की अपनी आउटसोर्सिंग पार्टनर Sama के साथ अचानक कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है, जिसके बाद डेटा प्राइवेसी और एआई ट्रेनिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला तब सामने आया जब Sama के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम के दौरान Meta के स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड किए गए यूजर्स के बेहद निजी और संवेदनशील वीडियो देखने पड़े। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन वीडियोज में लोगों की निजी जिंदगी के ऐसे पल शामिल थे, जिन्हें एआई ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद Meta ने Sama के साथ अपनी साझेदारी खत्म कर दी, लेकिन इस फैसले का असर करीब 1,100 से ज्यादा कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनकी नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। यह पूरा विवाद प्राइवेसी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या AI ट्रेनिंग के नाम पर यूजर्स का निजी डेटा सुरक्षित है? खासकर तब, जब डिवाइसेज जैसे स्मार्ट ग्लासेस रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से टेक कंपनियों पर डेटा सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ेगा और आने वाले समय में सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। फिलहाल Meta की ओर से इस पूरे मामले पर सफाई दी जा रही है, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।
iOS 27 अपडेट: आपके iPhone को मिलेगा या नहीं? नई AI Siri और पूरी डिवाइस लिस्ट जानें

नई दिल्ली। Apple के अपकमिंग iOS 27 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इस बार कंपनी बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर करने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 में यूजर्स को कई एडवांस AI फीचर्स देखने को मिलेंगे, जो iPhone एक्सपीरियंस को पहले से ज्यादा स्मार्ट बना सकते हैं। सबसे बड़ा बदलाव Siri में देखने को मिल सकता है। नई Siri अब पहले से ज्यादा स्मार्ट और “विजुअल अवेयर” होगी। यानी यूजर कैमरा खोलकर किसी ऑब्जेक्ट, टेक्स्ट या प्रोडक्ट के बारे में सीधे Siri से सवाल पूछ सकेंगे और तुरंत जानकारी पा सकेंगे। इसके अलावा Siri के लिए नया ऐप इंटरफेस और बेहतर मल्टीटास्किंग सपोर्ट भी मिल सकता है। Photos ऐप में भी AI का बड़ा अपग्रेड देखने को मिलेगा। यूजर्स फोटो को आसानी से एडिट, एक्सपैंड, रीफ्रेम और एन्हांस कर पाएंगे। साथ ही App Store के जरिए थर्ड-पार्टी AI एजेंट्स का सपोर्ट भी जोड़ा जा सकता है, जिससे iPhone का इकोसिस्टम और ज्यादा पावरफुल बनेगा। रिलीज की बात करें तो iOS 27 को पहली बार जून 2026 में होने वाले WWDC इवेंट में पेश किया जा सकता है। इसके बाद सितंबर में नए iPhones के साथ इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा। हालांकि, सभी AI फीचर्स हर डिवाइस पर उपलब्ध नहीं होंगे। Apple के एडवांस AI फीचर्स खासतौर पर iPhone 15 Pro और उससे ऊपर के मॉडल्स तक सीमित रह सकते हैं। कुल मिलाकर, iOS 27 सिर्फ एक साधारण अपडेट नहीं बल्कि AI-पावर्ड बड़ा अपग्रेड साबित हो सकता है, जो iPhone यूजर्स के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है।
Split vs Window AC: कौन ज्यादा सुरक्षित? शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट के खतरे में बड़ा फर्क जानिए

नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार में एसी ब्लास्ट की दर्दनाक घटना के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि घर के लिए कौन-सा एसी ज्यादा सुरक्षित है स्प्लिट या विंडो। बाजार में दोनों तरह के एसी उपलब्ध हैं और दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं, लेकिन सुरक्षा के नजरिए से देखें तो विंडो एसी को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। स्प्लिट एसी में दो यूनिट होती हैं एक इनडोर और एक आउटडोर। इसका कंप्रेसर बाहर होने की वजह से कमरे में शोर नहीं होता और बड़े कमरों में इसकी कूलिंग बेहतर रहती है। हालांकि, इसकी इंस्टॉलेशन जटिल होती है और इसमें लंबी कॉपर पाइपलाइन लगती है। अगर इंस्टॉलेशन सही तरीके से न हो या समय पर सर्विस न कराई जाए, तो गैस लीक और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ सकता है। वहीं विंडो एसी एक सिंगल यूनिट होता है, जिसे लगाना आसान और सस्ता होता है। इसकी बनावट कॉम्पैक्ट होती है, जिससे गैस लीक या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की संभावना कम रहती है। हालांकि, यह थोड़ा ज्यादा शोर करता है और कूलिंग स्प्लिट एसी के मुकाबले धीमी हो सकती है। सुरक्षा की बात करें तो विंडो एसी में पाइपलाइन छोटी होती है और वायरिंग भी सीमित रहती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट जैसी घटनाओं का जोखिम कम होता है। इसके मुकाबले स्प्लिट एसी में लंबी पाइपलाइन और अलग यूनिट्स होने की वजह से तकनीकी गड़बड़ी की संभावना ज्यादा रहती है, खासकर जब इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस में लापरवाही हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसी कोई भी हो, सही इस्तेमाल और समय पर सर्विस सबसे जरूरी है। लगातार 24 घंटे एसी चलाने से बचना चाहिए, नियमित सर्विस करानी चाहिए और वोल्टेज की समस्या वाले इलाकों में स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर एसी से गैस लीक या अजीब आवाज जैसी समस्या आए, तो तुरंत उसे बंद कराकर ठीक कराना जरूरी है। कुल मिलाकर, अगर प्राथमिकता सुरक्षा है तो विंडो एसी बेहतर विकल्प माना जा सकता है, जबकि बेहतर कूलिंग और कम शोर के लिए स्प्लिट एसी चुना जा सकता है—लेकिन सही इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के बिना दोनों ही जोखिम भरे हो सकते हैं।
Jio का बड़ा झटका! 209 रुपये वाला प्लान बंद, सस्ता 1GB डेटा खत्म अब ज्यादा पैसे देकर ही मिलेगा इंटरनेट

नई दिल्ली। Jio यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। कंपनी ने अपना लोकप्रिय 209 रुपये वाला प्रीपेड प्लान बंद कर दिया है, जिसमें रोजाना 1GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती थी। यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के बीच काफी लोकप्रिय था, जिन्हें कम डेटा लेकिन ज्यादा कॉलिंग की जरूरत होती थी। इस प्लान के बंद होने के बाद अब यूजर्स के पास रोजाना 1GB डेटा वाला कोई विकल्प नहीं बचा है। अब अगर किसी यूजर को लगभग समान वैलिडिटी वाला प्लान चाहिए, तो उसे 239 रुपये खर्च करने होंगे। इस प्लान में रोजाना 1.5GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती है, यानी पहले के मुकाबले करीब 14% ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। अगर यूजर्स सस्ता विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 198 रुपये और 199 रुपये के प्लान मौजूद हैं। 198 रुपये वाले प्लान में 14 दिन की वैलिडिटी के साथ रोज 2GB डेटा मिलता है, जबकि 199 रुपये के प्लान में 18 दिन के लिए रोज 1.5GB डेटा दिया जा रहा है। हालांकि, इन दोनों प्लान में वैलिडिटी कम है, जिससे लंबे समय के लिए ये उतने फायदेमंद नहीं माने जा रहे। दूसरी तरफ, जिन यूजर्स को लंबी वैलिडिटी चाहिए, उनके लिए 299 रुपये का प्लान बेहतर विकल्प बनकर सामने आता है। इसमें 28 दिन तक रोज 1.5GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है। हालांकि, यह प्लान 209 रुपये वाले पुराने प्लान के मुकाबले काफी महंगा है। टेलीकॉम सेक्टर में यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब रिचार्ज प्लान महंगे होने की चर्चा पहले से ही चल रही थी। माना जा रहा है कि कंपनियां अब धीरे-धीरे सस्ते प्लान हटाकर ज्यादा कीमत वाले प्लान्स पर फोकस कर रही हैं। कुल मिलाकर, Jio का 209 रुपये वाला प्लान बंद होना उन यूजर्स के लिए झटका है जो कम खर्च में बेसिक इंटरनेट और कॉलिंग का फायदा उठाना चाहते थे। अब उन्हें या तो ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या कम वैलिडिटी के साथ समझौता करना पड़ेगा।
Amazon की समर सेल में धमाका! Galaxy S25 Ultra ₹25,000 सस्ता, जानें किन फोन्स पर मिल रहा भारी डिस्काउंट

नई दिल्ली। Amazon की बहुप्रतीक्षित Great Summer Sale 2026 का ऐलान हो गया है और इस बार ग्राहकों के लिए बड़े-बड़े ऑफर्स तैयार हैं। यह मेगा सेल 8 मई 2026 से शुरू होगी, जबकि 5 मई से प्राइम यूजर्स के लिए अर्ली एक्सेस लाइव हो जाएगा। खास बात यह है कि इस सेल में प्रीमियम से लेकर मिड-रेंज स्मार्टफोन्स तक पर भारी छूट मिलने वाली है। इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण Samsung Galaxy S25 Ultra है, जिसे करीब ₹25,000 तक सस्ते में खरीदा जा सकेगा। जहां इसकी मौजूदा कीमत लगभग ₹1,19,999 है, वहीं सेल में यह फोन ₹94,999 में उपलब्ध होगा। यानी फ्लैगशिप फोन खरीदने का शानदार मौका मिल रहा है। सिर्फ सैमसंग ही नहीं, OnePlus 13s पर भी तगड़ा डिस्काउंट देखने को मिलेगा। इस फोन की कीमत अभी ₹51,999 है, लेकिन बैंक ऑफर्स के साथ इसे ₹46,999 में खरीदा जा सकेगा। यह उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो प्रीमियम फीचर्स के साथ थोड़ा बजट बचाना चाहते हैं। गेमिंग के शौकीनों के लिए iQOO 15R एक बढ़िया डील बनकर सामने आ रहा है। इसकी शुरुआती कीमत ₹57,999 है, लेकिन सेल में यह फोन ₹42,999 तक मिल सकता है। दमदार प्रोसेसर और परफॉर्मेंस के चलते यह मोबाइल गेमर्स के लिए खास आकर्षण रहेगा। वहीं, फोल्डेबल स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए भी यह सेल खास है। Samsung Galaxy Z Fold 7 को ₹10,000 की छूट के साथ ₹1,64,999 में खरीदा जा सकेगा, जो कि बैंक ऑफर्स के बाद की कीमत होगी। कुल मिलाकर, Amazon की यह समर सेल स्मार्टफोन खरीदने का शानदार मौका साबित हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से फ्लैगशिप या हाई-परफॉर्मेंस फोन लेने का इंतजार कर रहे थे। भारी डिस्काउंट, बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज डील्स के साथ यह सेल टेक लवर्स के लिए किसी फेस्टिवल से कम नहीं है।
Xiaomi ला रहा दो धांसू 5G फोन, 50MP कैमरा और पावरफुल चिपसेट से मिड-रेंज में मचेगा धमाल!

नई दिल्ली। Xiaomi एक बार फिर स्मार्टफोन मार्केट में हलचल मचाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही अपनी पॉपुलर Civi सीरीज के तहत दो नए 5G स्मार्टफोन—Xiaomi Civi 6 और Xiaomi Civi 6 Pro लॉन्च करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों डिवाइस प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में दमदार फीचर्स के साथ एंट्री करेंगे और यूजर्स को फ्लैगशिप जैसा अनुभव देने की कोशिश करेंगे। लीक्स और रिपोर्ट्स की मानें तो Xiaomi Civi 6 सीरीज का फोकस इस बार स्लिम डिजाइन, बेहतर कैमरा क्वालिटी और बैलेंस्ड परफॉर्मेंस पर रहेगा। खास बात यह है कि दोनों ही स्मार्टफोन्स में 1.5K रिज़ॉल्यूशन वाली हाई-क्वालिटी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो विजुअल एक्सपीरियंस को और शानदार बनाएगी। Xiaomi Civi 6 की बात करें तो इसमें करीब 6.59-इंच की डिस्प्ले दी जा सकती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट मिलने की संभावना है, जो स्मूद और तेज एक्सपीरियंस देगा। कैमरा सेगमेंट में भी बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है—फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस दिया जा सकता है, जो 5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा। वहीं, Xiaomi Civi 6 Pro को और ज्यादा पावरफुल बनाया जा सकता है। इसमें 6.83-इंच की बड़ी डिस्प्ले के साथ MediaTek Dimensity 9500 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो हैवी यूज और गेमिंग के लिए बेहतर साबित हो सकता है। कैमरा सेटअप में Pro मॉडल भी 50MP पेरिस्कोप लेंस के साथ आ सकता है, जिससे फोटोग्राफी का अनुभव और बेहतर होगा। लॉन्च टाइमलाइन की बात करें तो फिलहाल कंपनी ने आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन टिपस्टर्स के अनुसार यह सीरीज जल्द ही चीन में पेश की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह नई सीरीज पुराने Xiaomi Civi 5 Pro को रिप्लेस करेगी। कुल मिलाकर, Xiaomi की यह नई Civi 6 सीरीज उन यूजर्स के लिए खास हो सकती है, जो स्टाइलिश डिजाइन, दमदार कैमरा और पावरफुल परफॉर्मेंस एक साथ चाहते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लॉन्च के बाद ये स्मार्टफोन्स मार्केट में कितना असर छोड़ पाते हैं।
राउटर पर सिक्का रखने से बढ़ती है स्पीड? सच जानकर चौंक जाएंगे, फायदा नहीं नुकसान ज्यादा!

नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया और टेक टिप्स के नाम पर एक अजीब ट्रिक तेजी से वायरल हो रही हैWi-Fi राउटर पर सिक्का रखने से इंटरनेट स्पीड बढ़ जाती है। कई लोग इस “जुगाड़” को आजमा भी रहे हैं, लेकिन क्या वाकई यह तरीका काम करता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक भ्रम है, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। असल में Wi-Fi राउटर रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। इसके अंदर मौजूद एंटीना बेहद सटीक इंजीनियरिंग के साथ बनाए जाते हैं, जो इलेक्ट्रिकल सिग्नल को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स में बदलते हैं। यही वेव्स आपके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइसेज तक इंटरनेट पहुंचाती हैं। ऐसे में अगर कोई सिक्का राउटर की प्लास्टिक बॉडी के ऊपर रखा जाता है, तो उसका इन सिग्नल्स या एंटीना पर कोई असर पड़ना लगभग नामुमकिन है। तकनीकी रूप से देखें तो सिक्का सिर्फ एक धातु का छोटा टुकड़ा होता है, जो न तो सिग्नल को बढ़ा सकता है और न ही उसकी दिशा बदल सकता है। यानी यह ट्रिक वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह फेल साबित होती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसे “मिथक” मानते हैं, न कि कोई उपयोगी उपाय। इतना ही नहीं, यह ट्रिक आपके राउटर को नुकसान भी पहुंचा सकती है। राउटर के ऊपर सिक्का रखने से उसके वेंटिलेशन स्लॉट्स ब्लॉक हो सकते हैं, जिससे अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे राउटर ओवरहीट हो सकता है, जिसकी वजह से इंटरनेट स्पीड और भी धीमी हो सकती है या बार-बार कनेक्शन कटने की समस्या आ सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से राउटर खराब होने का भी खतरा रहता है। अगर आप सच में अपने Wi-Fi की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं, तो सही तरीका अपनाना जरूरी है। राउटर को हमेशा घर के बीचों-बीच रखें, ताकि सिग्नल हर दिशा में बराबर फैल सके। इसे जमीन पर रखने की बजाय थोड़ी ऊंचाई पर लगाना बेहतर होता है। साथ ही, राउटर को टीवी, माइक्रोवेव या बड़ी धातु की चीजों के पास रखने से बचें, क्योंकि ये सिग्नल को कमजोर कर सकते हैं। साफ शब्दों में कहें तो राउटर पर सिक्का रखने की ट्रिक सिर्फ एक इंटरनेट मिथ है, जो काम नहीं करती। अगर आप बेहतर स्पीड चाहते हैं, तो सही सेटअप और सही जगह का चुनाव ही सबसे बड़ा “हैक” है।
Girigo App का सच: इच्छा पूरी करने वाला नहीं, सिर्फ डर और थ्रिल बेचने वाला ट्रेंड!

नई दिल्ली। Girigo App को लेकर सोशल मीडिया पर जो दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि यह इच्छाएं पूरी करने वाली और खतरनाक ऐप है, वह काफी हद तक गलतफहमी और सीरीज के क्रेज से जुड़ा हुआ मामला है। दरअसल यह ऐप किसी असली अलौकिक शक्ति या खतरनाक सिस्टम पर आधारित नहीं है, बल्कि एक कोरियन थ्रिलर वेब सीरीज “If Wishes Could Kill” के प्रमोशन और फैन एक्सपीरियंस से जुड़ा हुआ इंटरैक्टिव कंटेंट है, जिसे लोग कहानी के माहौल को महसूस करने के लिए डाउनलोड कर रहे हैं। रिपोर्ट्स और यूजर्स के अनुभव के मुताबिक, Girigo App को सीरीज के थीम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां इसका इंटरफेस बिल्कुल शो जैसा डार्क और रहस्यमयी दिखता है। ऐप खोलने पर हाथ जोड़ने का विजुअल, “वॉइस/वीडियो रिकॉर्ड” जैसे फीचर्स और कोरियन लैंग्वेज इंटरफेस मिलता है, जिससे यूजर्स को सीरीज जैसा इमर्सिव अनुभव मिलता है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर यह अफवाह फैल गई है कि यह ऐप लोगों की “इच्छाएं पूरी करता है और खतरनाक परिणाम देता है”, लेकिन वास्तविकता यह है कि ऐसा कोई वैज्ञानिक या वास्तविक दावा नहीं है। यह सिर्फ एक एंटरटेनमेंट-आधारित ऐप है, जिसे दर्शकों की जिज्ञासा और सीरीज के सस्पेंस को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसे ऐप्स का मकसद केवल पॉपुलर शो या फिल्म के साथ ऑडियंस इंगेजमेंट बढ़ाना होता है, न कि किसी तरह की अलौकिक या हानिकारक गतिविधि करना। इसलिए इसे “वायरल ट्रेंड” और “मार्केटिंग एक्सपीरियंस” के तौर पर देखना ज्यादा सही है, न कि किसी असली खतरनाक ऐप के रूप में। फिलहाल Girigo App को लेकर लोगों में जो क्रेज देखा जा रहा है, वह पूरी तरह से सीरीज के सस्पेंस और सोशल मीडिया ट्रेंड की वजह से है, न कि किसी वास्तविक इच्छापूर्ति या खतरे की वजह से।