JioCarSync लॉन्च: अब बिना तार के चलेगा CarPlay और Android Auto, जियो लाया सस्ता वायरलेस एडॉप्टर

नई दिल्ली। रिलायंस जियो की IoT कंपनी जियोथिंग्स ने भारतीय बाजार में नया JioCarSync 2-in-1 वायरलेस एडॉप्टर लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस उन कार यूजर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो हर बार फोन को USB केबल से जोड़ने की परेशानी से जूझते हैं। अब कार में Apple CarPlay और Android Auto को बिना तार के इस्तेमाल किया जा सकेगा। कंपनी के मुताबिक JioCarSync कार के मौजूदा वायर्ड CarPlay और Android Auto सिस्टम को वायरलेस में बदल देता है। यानी यूजर अब बिना केबल लगाए सीधे अपने स्मार्टफोन को कार से कनेक्ट कर पाएंगे। यह डिवाइस खासतौर पर उन कारों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें पहले से फैक्ट्री फिटेड Wired CarPlay या Android Auto मौजूद है। जियो का दावा है कि यह एडॉप्टर करीब 5 सेकंड में ऑटो-कनेक्ट हो जाता है। इसमें Bluetooth 5.3 और 5GHz Wi-Fi सपोर्ट दिया गया है, जिससे नेविगेशन, कॉलिंग और म्यूजिक स्ट्रीमिंग के दौरान तेज और स्थिर कनेक्टिविटी मिलती है। डिवाइस कार के स्टीयरिंग कंट्रोल, टचस्क्रीन और इनबिल्ट माइक्रोफोन को भी सपोर्ट करता है। JioCarSync का डिजाइन काफी कॉम्पैक्ट और हल्का रखा गया है। इसका वजन करीब 20 ग्राम है और इसमें एल्यूमिनियम यूनिबॉडी डिजाइन दिया गया है। कंपनी ने इसे Plug-and-Play सिस्टम के साथ पेश किया है, जिससे इंस्टॉलेशन बेहद आसान हो जाता है। यह डिवाइस iOS 12 या उससे ऊपर वाले iPhone और Android 11 या उससे ऊपर वाले स्मार्टफोन्स को सपोर्ट करता है। साथ ही USB Type-C पोर्ट वाली कारों के लिए बॉक्स में Type-C डॉन्गल भी दिया गया है। कीमत की बात करें तो JioCarSync की कीमत फिलहाल करीब 2500 रुपये रखी गई है। कंपनी इस पर एक साल की वारंटी भी दे रही है। माना जा रहा है कि यह डिवाइस पुरानी कारों को भी वायरलेस स्मार्ट कनेक्टिविटी का नया अनुभव देने वाला बड़ा अपग्रेड साबित हो सकता है।
एक पासवर्ड से चलेगा देशभर का Wi-Fi! सरकार ला रही नया सिस्टम, हर हॉटस्पॉट पर OTP की छुट्टी

नई दिल्ली। देशभर में पब्लिक Wi-Fi इस्तेमाल करने वालों के लिए जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार ऐसा नया सिस्टम तैयार कर रही है, जिसमें यूजर्स को हर बार अलग-अलग हॉटस्पॉट पर OTP डालकर लॉगिन नहीं करना पड़ेगा। एक बार लॉगिन करने के बाद यूजर देशभर के करीब 4 लाख पब्लिक Wi-Fi हॉटस्पॉट्स से आसानी से इंटरनेट चला सकेंगे। सरकार का मकसद इंटरनेट एक्सेस को आसान, तेज और ज्यादा सुरक्षित बनाना है। यह नई तैयारी PM-WANI योजना के सीमित असर के बाद की जा रही है। सरकार और TRAI अब ऐसा मॉडल लाने पर काम कर रहे हैं, जो आम लोगों के लिए सुविधाजनक होने के साथ ऑपरेटर्स के लिए भी फायदेमंद साबित हो। इसके लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने कंसल्टेशन पेपर जारी कर लोगों से सुझाव मांगे हैं। नई व्यवस्था में सुरक्षा पर भी खास फोकस रहेगा। इसके तहत WPA3 जैसे एडवांस सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू किए जाएंगे, जिससे पब्लिक नेटवर्क पर UPI और डिजिटल पेमेंट ज्यादा सुरक्षित हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी के मामलों में भी कमी आएगी। सरकार गांवों के लिए कम लागत वाला कम्यूनिटी Wi-Fi मॉडल भी तैयार कर रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों में सस्ता और बेहतर इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सके। अभी भारत में सिर्फ करीब 2% लोग पब्लिक Wi-Fi का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कई विकसित देशों में यह आंकड़ा 50% से 80% तक है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया Wi-Fi फ्रेमवर्क मोबाइल डेटा नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करेगा और वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सर्विस, AI आधारित सेवाओं व ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देगा। सरकार को उम्मीद है कि सस्ते और आसान इंटरनेट से डिजिटल इंडिया मिशन को नई मजबूती मिलेगी।
गर्मी से राहत का आसान उपाय: फ्रिज में पीला फोम रखने के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। अक्सर लोग मानते हैं कि फ्रिज में रखा खाना सिर्फ तापमान की वजह से खराब होता है, लेकिन असल वजह कई बार एक्स्ट्रा नमी (Moisture) होती है। फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में जब जरूरत से ज्यादा ह्यूमिडिटी जमा हो जाती है, तो वह सब्जियों और फलों की गुणवत्ता पर सीधा असर डालती है। हरी पत्तेदार सब्जियां चिपचिपी होने लगती हैं, स्ट्रॉबेरी जैसी नाजुक चीजें जल्दी गल जाती हैं और खीरा-गाजर अपनी कुरकुराहट खो देते हैं। यही वजह है कि कई बार फ्रिज होने के बावजूद खाना जल्दी खराब हो जाता है। सूखा स्पंज कैसे करता है जादू जैसा काम?इस वायरल किचन हैक की असली ताकत इसके बेहद साधारण होने में है। सूखा स्पंज अपनी बनावट की वजह से नमी को तेजी से सोख लेता है। जब इसे फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में रखा जाता है, तो यह आसपास की अतिरिक्त ह्यूमिडिटी को अपने अंदर खींच लेता है। इससे फ्रिज के अंदर का वातावरण संतुलित हो जाता है और फल-सब्जियां ज्यादा समय तक ताजा बनी रहती हैं। यह किसी केमिकल या महंगे उपकरण के बिना काम करने वाला एक प्राकृतिक तरीका है। किन चीजों को मिलता है सबसे ज्यादा फायदा?यह ट्रिक खासकर उन चीजों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है जो नमी से जल्दी खराब होती हैं, जैसे- पालक और अन्य हरी सब्जियांसलाद पत्तियां (लेट्यूस आदि)स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसी बेरीजखीरा, गाजर और शिमला मिर्चइन सभी चीजों की लाइफ स्पैन बढ़ जाती है और वे लंबे समय तक ताजी बनी रहती हैं। स्पंज रखने का सही तरीका क्या है?स्पंज को हमेशा फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर के किनारों या कोनों में रखना चाहिए। इसे सीधे खाने के ऊपर नहीं रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर एक से ज्यादा स्पंज भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, खासकर तब जब फ्रिज में नमी ज्यादा बनती हो। सबसे जरूरी बात यह है कि स्पंज पूरी तरह सूखा होना चाहिए ताकि वह प्रभावी तरीके से नमी सोख सके। साफ-सफाई है सबसे जरूरी नियमस्पंज नमी सोखता है, इसलिए समय-समय पर उसकी सफाई जरूरी है। अगर उसे लंबे समय तक बिना साफ किए रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। बेहतर है कि हर कुछ दिनों में उसे धोकर अच्छे से सुखाया जाए। बदबू आने पर उसे बदल देना ही सही विकल्प है। क्यों हो रहा है यह किचन हैक वायरल?आज के समय में लोग ऐसे आसान और सस्ते उपाय ढूंढ रहे हैं जो सच में काम करें। यह स्पंज ट्रिक बिना किसी खर्च के खाने की बर्बादी कम करने और फ्रिज को साफ रखने में मदद करती है। यही कारण है कि यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। छोटा बदलाव, बड़ा फायदाअगर आप भी चाहते हैं कि आपकी सब्जियां और फल ज्यादा समय तक ताजा रहें, तो फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में सूखा स्पंज रखना एक आसान और असरदार तरीका साबित हो सकता है। यह छोटा सा कदम आपकी रसोई को ज्यादा स्मार्ट और वेस्ट-फ्री बनाने में मदद कर सकता है।
ईयरबड्स खरीदने से पहले रुकिए! ये 7 स्मार्ट टिप्स जान लिए तो नहीं होगा पैसा बर्बाद

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने का साधन नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं ऑफिस कॉल्स से लेकर जिम और गेमिंग तक। लेकिन बाजार में ढेरों ऑप्शन के बीच गलत चुनाव आपका अनुभव खराब कर सकता है। इसलिए अगर आप नए ईयरबड्स लेने जा रहे हैं, तो इन जरूरी बातों को जरूर ध्यान में रखें। सबसे पहले साउंड क्वालिटी पर फोकस करें। अच्छे ईयरबड्स में बैलेंस्ड बेस, क्लियर वोकल्स और हाई वॉल्यूम पर भी बिना डिस्टॉर्शन के ऑडियो मिलना चाहिए। इसके बाद आता है नॉइज कैंसिलेशन (ANC) अगर आप ट्रैवल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर इस्तेमाल करते हैं, तो यह फीचर बाहरी शोर को कम कर शानदार अनुभव देता है। बैटरी लाइफ भी बेहद अहम है। ऐसे ईयरबड्स चुनें जो कम से कम 4-5 घंटे का प्लेबैक दें और केस के साथ 20-25 घंटे का बैकअप हो। साथ ही फास्ट चार्जिंग सपोर्ट हो, ताकि कम समय में ज्यादा इस्तेमाल मिल सके।कनेक्टिविटी के लिए लेटेस्ट Bluetooth (5.2 या उससे ऊपर) बेहतर रहेगा, खासकर गेमिंग के लिए लो-लेटेंसी बहुत जरूरी है। अगर आप कॉलिंग ज्यादा करते हैं, तो ENC (Environmental Noise Cancellation) माइक्रोफोन जरूर देखें, ताकि आपकी आवाज साफ पहुंचे। जिम या आउटडोर यूज के लिए IP रेटिंग (IPX4/IPX5) जरूरी है, जिससे पसीना या हल्की बारिश से डिवाइस सुरक्षित रहे। आखिर में सबसे जरूरी चीज कंफर्ट और फिट। लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए एर्गोनॉमिक डिजाइन और सही फिटिंग वाले ईयरबड्स चुनें, जिनके साथ अलग-अलग साइज के ईयर-टिप्स मिलें। सही ईयरबड्स वही हैं जो आपकी जरूरत के हिसाब से फिट बैठें, सिर्फ ब्रांड या कीमत देखकर फैसला लेना आपको नुकसान में डाल सकता है।
कूड़े का बॉक्स बना साइबर बम! Amazon-Flipkart पार्सल से लीक हो रहा आपका डेटा

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बढ़ते ही साइबर ठगों ने भी नया तरीका खोज लिया है। अमेज़न और फ्लिपकार्ट की सेल के दौरान घर-घर पहुंचने वाले डिलीवरी बॉक्स अब फ्रॉड का बड़ा जरिया बन रहे हैं। जिस खाली डिब्बे को आप बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं, वही आपकी निजी जानकारी का खजाना साबित हो सकता है। दरअसल हर पार्सल पर लगा शिपिंग लेबल आपके नाम, मोबाइल नंबर, घर के पते और ऑर्डर डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी से भरा होता है। लोग बिना इसे हटाए या मिटाए बॉक्स फेंक देते हैं और यहीं से ठगों का खेल शुरू होता है। ये जालसाज कूड़े से ऐसे बॉक्स इकट्ठा कर लेते हैं और लेबल से पूरी जानकारी निकाल लेते हैं। इसके बाद ठग आपको कॉल करते हैं और खुद को ई-कॉमर्स कंपनी का कस्टमर केयर या फीडबैक एजेंट बताते हैं। चूंकि उनके पास पहले से आपका सही नाम और पता होता है, इसलिए उनकी बातों पर भरोसा करना आसान हो जाता है। बातचीत के दौरान वे कैशबैक, ऑफर या रिवॉर्ड का लालच देकर एक लिंक भेजते हैं। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, आपका फोन हैक हो सकता है या आप फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं, जहां से ओटीपी , बैंक डिटेल्स और लॉगिन जानकारी चुरा ली जाती है। सेल के दौरान ऐसे मामलों में तेजी इसलिए आती है क्योंकि ज्यादा ऑर्डर का मतलब ज्यादा फेंके गए बॉक्स और ठगों के पास ज्यादा डेटा। साथ ही, इस समय लोग ऑफर्स और कॉल्स की उम्मीद में रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर स्कैमर्स आसानी से जाल बिछाते हैं। इस खतरे से बचना मुश्किल नहीं, बस थोड़ी सावधानी जरूरी है। पार्सल बॉक्स फेंकने से पहले हमेशा शिपिंग लेबल को फाड़ दें या मार्कर से अपनी जानकारी पूरी तरह मिटा दें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और फोन पर कभी भी ओटीपी या बैंक डिटेल्स साझा न करें। अगर कोई कॉलर ऑफर या कैशबैक का लालच दे, तो पहले उसकी सच्चाई जांच लें। याद रखें, आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर ठगों के लिए बड़ा मौका बन सकती है। इसलिए अगली बार पार्सल खोलने के बाद डिब्बा फेंकने से पहले अपनी जानकारी जरूर सुरक्षित करें।
Jio vs Starlink: आसमान में इंटरनेट की जंग, ‘देसी सैटेलाइट नेटवर्क’ से अंबानी का बड़ा दांव

नई दिल्ली। भारत में इंटरनेट की अगली लड़ाई अब धरती से उठकर अंतरिक्ष में पहुंचने वाली है। Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में एंट्री की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य हैSpaceX की Starlink को टक्कर देना और भारत के लिए मजबूत ‘देसी विकल्प’ तैयार करना। Jio का सैटेलाइट गेम प्लानरिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस अपनी टेक यूनिट Jio Platforms के तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की तैयारी में है। यह वही तकनीक है, जिसका इस्तेमाल Starlink करती है, जिससे दूर-दराज इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने मल्टी-लेवल रणनीति अपनाई है अलग-अलग टेक्निकल पहलुओं के लिए कई स्पेशलाइज्ड टीमें बनाई गई हैं सैटेलाइट डिजाइन, लॉन्चिंग, पेलोड और यूजर टर्मिनल पर काम जारी ग्लोबल सैटेलाइट कंपनियों से बातचीत और संभावित अधिग्रहण (acquisition) पर भी विचार ‘देसी नेटवर्क’ क्यों है अहम?भारत सरकार की प्राथमिकता है कि देश का खुद का सैटेलाइट इंटरनेट सिस्टम हो। विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता से डेटा प्राइवेसी और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।ऐसे में स्वदेशी सॉल्यूशन भारत को डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) देगा और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। मुकाबले में कौन-कौन?इस रेस में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है एलन मस्क की Starlink पहले से ग्लोबल मार्केट में मजबूत Amazon का प्रोजेक्ट कुइपर भी तेजी से आगेभारत में सुनील मित्तल की भारती ग्रुप सैटेलाइट सेक्टर में सक्रिय,फिलहाल Jio का यह प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और लॉन्च की कोई आधिकारिक टाइमलाइन सामने नहीं आई है। लेकिन संकेत साफ हैं कि रिलायंस इस सेक्टर में आक्रामक एंट्री की तैयारी में है। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो भारत को जल्द ही ‘देसी सैटेलाइट इंटरनेट’ मिल सकता है जो न सिर्फ कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि देश को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में और आत्मनिर्भर बनाएगा।
EV Battery Recycling: ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए 169 करोड़ रुपए का फंड जारी, 15 सितंबर तक मांगे गए प्रस्ताव।

EV Battery Recycling: नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ ने अपनी रणनीतिक और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाते हुए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियों की रीसाइक्लिंग के लिए तीसरी संयुक्त पहल का आगाज किया है। भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) के तत्वावधान में शुरू किया गया यह कार्यक्रम मुख्य रूप से ‘ग्रीन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी’ पर केंद्रित है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य ईवी सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती यानी इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के सुरक्षित निपटान और उनमें मौजूद कीमती खनिजों की रिकवरी का समाधान खोजना है। इस पहल के लिए करीब 169 करोड़ रुपए का विशाल फंड आवंटित किया गया है, जिसमें यूरोपीय संघ के ‘होराइजन यूरोप’ प्रोग्राम और भारत के भारी उद्योग मंत्रालय का महत्वपूर्ण सहयोग शामिल है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी प्राथमिकता लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ और कीमती पदार्थों को बैटरी से निकालने के लिए आधुनिक और प्रभावी तकनीकों का विकास करना है। वर्तमान में इन खनिजों के लिए आयात पर भारी निर्भरता है, जिसे यह पहल कम करने में मददगार साबित होगी। योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के इच्छुक नवाचारियों और शोधकर्ताओं के लिए 15 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इसके अलावा, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के जरिए बैटरियों के कलेक्शन को बेहतर बनाने और नई तकनीकों के व्यावहारिक परीक्षण के लिए विशेष पायलट प्रोजेक्ट्स को भी प्राथमिकता दी जाएगी। ASHOKNAGAR CENSUS: अशोकनगर में जनगणना कार्य की रफ्तार तेज, कलेक्टर ने किया औचक निरीक्षण इस पहल का एक मुख्य आकर्षण भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट की स्थापना है। यहाँ नई रीसाइक्लिंग तकनीकों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा ताकि उन्हें जल्द से जल्द औद्योगिक स्तर पर लागू किया जा सके। यह कार्यक्रम न केवल उच्च रिकवरी दर हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, बल्कि बैटरियों के दोबारा उपयोग (सेकंड लाइफ) की संभावनाओं को भी तलाशेगा। इससे एक मजबूत ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ का निर्माण होगा, जहाँ संसाधनों की बर्बादी न्यूनतम होगी और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचेगा। भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने इस कदम को भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया है। उनका मानना है कि बढ़ते ईवी बाजार के साथ एक प्रभावी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाना समय की मांग है। वहीं, भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन और यूरोपीय आयोग के अनुसंधान महानिदेशक मार्क लेमैत्रे ने भी इस साझेदारी को वैश्विक हरित बदलाव के लिए अनिवार्य बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।
CHANDIGARH AIRPORT FIRE: चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर फ्लाइट में अफरा-तफरी, पावर बैंक में आग लगने से मचा हड़कंप..

CHANDIGARH AIRPORT FIRE: नई दिल्ली। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक IndiGo फ्लाइट में पावर बैंक में आग लगने की घटना ने यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना उस समय हुई जब हैदराबाद से आई फ्लाइट लैंड कर चुकी थी और यात्री विमान से उतरने की तैयारी कर रहे थे। अचानक केबिन में धुआं फैलने लगा, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इमरजेंसी स्थिति पैदा हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक यात्री के पावर बैंक में अचानक आग लग गई, जिसके बाद धुआं तेजी से पूरे केबिन में फैल गया। स्थिति बिगड़ते देख क्रू मेंबर्स ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्य संभाला। इस घटना में कुल 6 यात्री घायल हो गए, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि इस घटना ने यात्रियों में दहशत का माहौल जरूर पैदा कर दिया। यह मामला अब विमान सुरक्षा नियमों की ओर एक बार फिर ध्यान खींच रहा है। पावर बैंक जैसे उपकरण, जिन्हें यात्री रोजमर्रा की जरूरत के लिए साथ रखते हैं, फ्लाइट सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। खासकर लिथियम बैटरी वाले डिवाइस में आग लगने का जोखिम अधिक होता है, जो विमान के सीमित और बंद वातावरण में गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। विमानन सुरक्षा नियामक संस्था द्वारा पहले ही इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। नियमों के अनुसार, पावर बैंक को केवल हैंड बैगेज में रखने की अनुमति है और इसे किसी भी स्थिति में ओवरहेड स्टोरेज में नहीं रखा जाना चाहिए। इसके अलावा उड़ान के दौरान पावर बैंक से किसी भी डिवाइस को चार्ज करने पर भी प्रतिबंध है। इन नियमों का उद्देश्य उड़ान के दौरान संभावित आग या तकनीकी खराबी की स्थिति को रोकना है। साथ ही एयरलाइंस को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी लगातार देती रहें और उन्हें संभावित जोखिमों के प्रति जागरूक करें। इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या यात्री सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए जागरूकता बेहद जरूरी है। फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस घटना की विस्तृत जांच में जुटी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पावर बैंक में आग लगने की असली वजह क्या थी। यह घटना विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
IIT Madras: सिलिकॉन वैली में भारत की एंट्री: IIT मद्रास ने अमेरिका में खोला पहला ग्लोबल रिसर्च सेंटर, स्टार्टअप्स को मिलेगा इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म

IIT Madras: नई दिल्ली। भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए IIT मद्रास ने अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। अमेरिका में अपना पहला ग्लोबल रिसर्च सेंटर लॉन्च कर संस्थान ने साफ कर दिया है कि भारतीय इनोवेशन अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े टेक हब में अपनी पहचान बनाएगा। कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में स्थापित यह नया सेंटर भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए गेमचेंजर साबित होने वाला है। इस पहल के जरिए स्टार्टअप्स को न सिर्फ ग्लोबल मार्केट तक पहुंच मिलेगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय निवेश, मेंटरशिप और बड़े टेक नेटवर्क से जुड़ने का मौका भी मिलेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 7.5 मिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा ‘ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट’ के रूप में शामिल है। यह सेंटर सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्टार्टअप इनक्यूबेशन और टेक्नोलॉजी के व्यवसायीकरण का भी एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनेगा। CHANDIGARH AIRPORT FIRE: चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर फ्लाइट में अफरा-तफरी, पावर बैंक में आग लगने से मचा हड़कंप.. सिलिकॉन वैली के पास होने का फायदा उठाते हुए यह सेंटर भारतीय स्टार्टअप्स के लिए लॉन्चपैड की तरह काम करेगा। यहां से उन्हें ग्लोबल कंपनियों के साथ साझेदारी, विदेशी बाजारों में एंट्री और नई टेक्नोलॉजी पर काम करने के अवसर मिलेंगे। इतना ही नहीं, IITM Global Research Foundation ने अमेरिका के ईस्ट कोस्ट पर भी दूसरा सेंटर खोलने की योजना बनाई है, जिससे भारत की तकनीकी ताकत और ज्यादा मजबूत होगी। यह पहल सिर्फ एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते टेक्नोलॉजी प्रभाव का संकेत है। आने वाले समय में यह सेंटर भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और देश को इनोवेशन हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
CMF Watch 3 Pro भारत में लॉन्च: 13 दिन की बैटरी, AI फिटनेस कोच और प्रीमियम डिजाइन के साथ मचाएगी धमाल

नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टवॉच बाजार में एक नया और दमदार खिलाड़ी उतर चुका है। CMF Watch 3 Pro को भारत में लॉन्च कर दिया गया है, जो स्टाइल, परफॉर्मेंस और हेल्थ ट्रैकिंग का शानदार कॉम्बिनेशन लेकर आई है। कंपनी का दावा है कि यह वॉच सिर्फ समय बताने तक सीमित नहीं, बल्कि आपकी पूरी फिटनेस और हेल्थ का ख्याल रखने में सक्षम है। कीमत की बात करें तो इस स्मार्टवॉच की शुरुआती कीमत ₹7,999 रखी गई है, लेकिन लॉन्च ऑफर के तहत इसे ₹6,999 में खरीदा जा सकता है। यह ऑफर सीमित समय के लिए है। बिक्री 8 मई 2026 से Flipkart और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू होगी, जबकि 7 मई को अर्ली एक्सेस सेल भी रखी गई है। डिजाइन और डिस्प्ले के मामले में यह वॉच काफी प्रीमियम फील देती है। इसमें 1.43 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो अल्ट्रा-थिन बेजल्स के साथ आता है। 120 से ज्यादा कस्टम वॉच फेस और IP68 रेटिंग इसे स्टाइलिश के साथ-साथ मजबूत भी बनाते हैं। यह वॉच चार आकर्षक रंगों लाइट ग्रीन, डार्क ग्रे, लाइट ग्रे और ऑरेंज में उपलब्ध है। इस स्मार्टवॉच की सबसे बड़ी खासियत इसका AI-पावर्ड फिटनेस सिस्टम है। यह Nothing के X ऐप पर काम करती है, जिसमें नया और आसान यूजर इंटरफेस दिया गया है। फिटनेस लवर्स के लिए इसमें Strava सपोर्ट भी मौजूद है। रनिंग के दौरान यह आपकी परफॉर्मेंस को एनालाइज कर 5K और 10K रनिंग प्रेडिक्शन तक देता है और पर्सनल कोच की तरह गाइड करता है। हेल्थ फीचर्स की बात करें तो इसमें SpO2 मॉनिटरिंग, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े फीचर्स, हाइड्रेशन रिमाइंडर और इनएक्टिविटी अलर्ट जैसे जरूरी टूल्स दिए गए हैं। डुअल-बैंड फाइव-सिस्टम GPS इसकी ट्रैकिंग को और भी सटीक बनाता है, जिससे रनिंग और वॉकिंग डेटा काफी एक्यूरेट मिलता है। बैटरी के मामले में भी यह वॉच काफी दमदार है। एक बार फुल चार्ज करने पर यह 13 दिनों तक चल सकती है, जो इस सेगमेंट में बड़ा प्लस पॉइंट है। वहीं, अगर बैटरी खत्म हो जाए तो यह सिर्फ 99 मिनट में फुल चार्ज हो जाती है। कुल मिलाकर, CMF Watch 3 Pro उन यूजर्स के लिए एक शानदार विकल्प बनकर उभरी है, जो बजट में प्रीमियम डिजाइन, लंबी बैटरी और एडवांस फिटनेस फीचर्स चाहते हैं।