24 हजार से ज्यादा की छूट के साथ Galaxy S25 खरीदने का शानदार ऑफर

नई दिल्ली । अगर आप प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह आपके लिए शानदार मौका साबित हो सकता है। टेक कंपनी Samsung के फ्लैगशिप स्मार्टफोन Samsung Galaxy S25 पर इस समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart पर जबरदस्त डिस्काउंट दिया जा रहा है। भारी कीमत कटौती और बैंक ऑफर्स की वजह से ग्राहक इस प्रीमियम स्मार्टफोन को काफी कम दाम में खरीद सकते हैं। Samsung Galaxy S25 को भारत में 80,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन फिलहाल यह फोन करीब 24 हजार रुपये की भारी छूट के बाद 56,999 रुपये में उपलब्ध है। इतना ही नहीं, चुनिंदा बैंक कार्ड से भुगतान करने पर ग्राहकों को करीब 2,850 रुपये तक का अतिरिक्त इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल सकता है। ऐसे में कुल मिलाकर यह फ्लैगशिप स्मार्टफोन 55 हजार रुपये से भी कम कीमत में खरीदा जा सकता है, जो इसे एक बेहद आकर्षक डील बनाता है। Samsung Galaxy S25 अपने प्रीमियम डिजाइन और दमदार फीचर्स की वजह से बाजार में काफी चर्चा में है। फोन में 6.2 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। इसकी 2,600 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस तेज धूप में भी शानदार विजिबिलिटी देती है। डिस्प्ले की स्मूथनेस और कलर क्वालिटी इसे गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए बेहतरीन विकल्प बनाती है। परफॉर्मेंस की बात करें तो इस स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर दिया गया है, जो हाई-एंड मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए काफी पावरफुल माना जा रहा है। फोन में 12GB RAM और 512GB तक इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है, जिससे यूजर्स को स्टोरेज की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। कैमरा सेक्शन भी इस फ्लैगशिप फोन की बड़ी खासियत है। Samsung Galaxy S25 में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, जिसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा, 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा और 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 12 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। कम रोशनी में भी यह फोन शानदार फोटो क्वालिटी देने का दावा करता है। बैटरी बैकअप के लिए फोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 25W फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है। कंपनी का दावा है कि यह फोन लंबे समय तक स्मूद परफॉर्मेंस देने में सक्षम है। सैमसंग के अलावा Google का Google Pixel 10 5G भी इस समय डिस्काउंट ऑफर में उपलब्ध है। यह स्मार्टफोन Amazon India पर करीब 65,530 रुपये में मिल रहा है। साथ ही, ग्राहकों को करीब 2,000 रुपये तक का कैशबैक ऑफर भी दिया जा रहा है। अगर आप शानदार कैमरा, फ्लैगशिप परफॉर्मेंस और प्रीमियम डिजाइन वाला स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, तो Samsung Galaxy S25 पर मिल रहा यह ऑफर आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। भारी डिस्काउंट और बैंक ऑफर के कारण ग्राहक हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं।
कितने किलोमीटर चलती है हाइब्रिड कार की बैटरी? खरीदने से पहले जरूर पढ़ें

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और बेहतर माइलेज की मांग के बीच Hybrid Cars तेजी से लोगों की पसंद बनती जा रही हैं। हालांकि नई Hybrid Car खरीदने से पहले ज्यादातर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि इसकी बैटरी आखिर कितने समय या कितने किलोमीटर तक साथ देती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों और हजारों Hybrid Cars के डेटा ने इस चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सही इस्तेमाल और नियमित सर्विसिंग के साथ Hybrid कारों की बैटरी 2 लाख से 3 लाख किलोमीटर तक आराम से चल सकती है। करीब 28,500 से ज्यादा Hybrid Cars के डेटा और टेस्ट में यह बात सामने आई कि ज्यादातर बैटरियां उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा प्रदर्शन दे रही हैं। खासतौर पर टोयोटा और होंडा जैसी कंपनियों की Hybrid तकनीक को काफी भरोसेमंद माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार Hybrid Cars में बैटरी पर लगातार पूरा दबाव नहीं पड़ता, क्योंकि इसमें पेट्रोल इंजन और बैटरी दोनों मिलकर काम करते हैं। शहर के ट्रैफिक में यह सिस्टम बैटरी और इंजन के बीच बेहतर संतुलन बनाता है, जिससे बैटरी की लाइफ लंबी होती है। ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि Hybrid बैटरी को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। नियमित सर्विसिंग और बैटरी हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी है। इसके अलावा कार को लंबे समय तक तेज धूप और अत्यधिक गर्मी में पार्क करने से बचना चाहिए क्योंकि गर्म तापमान बैटरी पर असर डाल सकता है। कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी बैटरी की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखता है। वहीं बहुत ज्यादा हार्ड ड्राइविंग और अचानक तेज एक्सीलरेशन बैटरी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। आजकल कई ऑटो कंपनियां Hybrid बैटरी पर 8 साल तक की वारंटी दे रही हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। इससे बैटरी बदलने को लेकर लोगों की चिंता भी काफी कम हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि Hybrid Cars अब सिर्फ बेहतर माइलेज ही नहीं बल्कि लंबी बैटरी लाइफ और कम मेंटेनेंस लागत की वजह से भी लोकप्रिय हो रही हैं। ऐसे में अगर आप नई Hybrid Car खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बैटरी लाइफ को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
नितिन गडकरी ने पेश की नई कुकिंग तकनीक, इथेनॉल स्टोव से घटेगा गैस खर्च

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा का केंद्र बन गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल आधारित स्टोव की तकनीक पेश की, जिसे भविष्य में एलपीजी का सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है। इस नई तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह चूल्हा इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलता है। दावा किया गया है कि इससे निकलने वाली फ्लेम गैस चूल्हे की तरह साफ और स्थिर होती है, जबकि धुआं बेहद कम निकलता है। इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह भारतीय है और इसे घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस स्टोव में करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाकर इथेनॉल का मिश्रण तैयार किया जाता है। यह मिश्रण स्टोव के फ्यूल टैंक में डाला जाता है और स्टार्ट होते ही यह साफ लौ पैदा कर खाना पकाने में इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे घरेलू रसोई के खर्च में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि यह तकनीक न केवल खाना पकाने का खर्च कम करेगी बल्कि विदेशी गैस आयात पर निर्भरता भी घटाएगी। उन्होंने कहा कि इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा क्योंकि यह ईंधन कृषि आधारित उत्पादों से तैयार होता है। इथेनॉल स्टोव को लेकर सरकार का दावा है कि यह लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में ज्यादा स्वच्छ विकल्प है। इससे घर के अंदर होने वाला धुआं और प्रदूषण भी कम होगा। फिलहाल यह तकनीक परीक्षण और मंजूरी के चरण में है। अभी इसकी कीमत और बाजार में लॉन्चिंग की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में यह घरेलू और व्यावसायिक रसोई दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
ChatGPTने 80 साल पुराना गणित का सवाल हल किया, AI की ताकत से वैज्ञानिक जगत हैरान

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ जानकारी देने या सवालों के जवाब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब जटिल समस्याओं को हल करने और नए तर्क विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ता दिख रहा है। इसका ताजा उदाहरण ChatGPT द्वारा 80 साल पुराने अनसुलझे गणितीय सवाल को हल करने के रूप में सामने आया है। यह सवाल 1946 में मशहूर गणितज्ञ पॉल एर्डोश ने पूछा था, जिसमें यह समझना था कि किसी समतल सतह पर बने कई बिंदुओं में कितने जोड़े ऐसे हो सकते हैं जिनके बीच की दूरी ठीक 1 यूनिट हो। दशकों तक इस समस्या का कोई सर्वमान्य समाधान नहीं मिल पाया था। ChatGPT ने इस समस्या पर काम करते हुए ऐसे नए गणितीय पैटर्न और उदाहरण खोजे, जिनमें पहले से अधिक यूनिट डिस्टेंस जोड़े संभव हो सकते हैं। खास बात यह रही कि AI ने केवल पुरानी जानकारी नहीं दोहराई, बल्कि अलग-अलग गणितीय क्षेत्रों को जोड़कर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समाधान में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI ने अल्जेब्रिक नंबर थ्योरी जैसे जटिल सिद्धांतों का उपयोग किया और उन्हें ज्यामितीय समस्या से जोड़कर एक नया समाधान रास्ता तैयार किया। गणितज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि AI की रीजनिंग क्षमता का बड़ा प्रमाण है, जहां मशीनें केवल गणना नहीं बल्कि गहराई से सोचकर नए निष्कर्ष निकालने में सक्षम हो रही हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा। यह केवल समाधान सुझा सकता है, लेकिन यह तय करना कि कौन सा सवाल महत्वपूर्ण है और उसका वास्तविक अर्थ क्या है, यह भूमिका अभी भी इंसानों के पास ही रहेगी। कुल मिलाकर यह उपलब्धि दिखाती है कि AI आने वाले समय में विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
LPG VS Ethanol: LPG से सस्ता पड़ेगा एथेनॉल चूल्हा, जानिए क्या है नई टेक्नोलॉजी और कैसे करता है काम

नई दिल्ली। एथेनॉल चूल्हा एक नई पीढ़ी की कुकिंग तकनीक है, जिसमें ईंधन के रूप में लिक्विड या जेल एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है।यह वही एथेनॉल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह चूल्हा LPG सिलेंडर का एक संभावित विकल्प माना जा रहा है क्योंकि यह: बिना धुआं जलता है बिना कालिख के खाना पकाता है तेज और स्थिर आंच देता है कम लागत में काम करता है एथेनॉल स्टोव कैसे काम करता है?एथेनॉल स्टोव की कार्यप्रणाली काफी सरल होती है: स्टोव के टैंक में लिक्विड या जेल एथेनॉल भरा जाता है इसे जलाया जाता है नियंत्रित बर्नर एथेनॉल को पूरी तरह जलाते हैं इससे LPG जैसी तेज और साफ आंच मिलती है इस तकनीक में गैस पाइपलाइन या सिलेंडर की जरूरत नहीं होती, जिससे रिस्क भी कम हो जाता है। LPG vs Ethanol: कौन कितना सस्ता?रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 लीटर एथेनॉल लगभग 15 घंटे तक आंच दे सकता है LPG की तुलना में इसका प्रति यूनिट कुकिंग खर्च कम पड़ता है लंबे समय में यह घरेलू बजट पर राहत दे सकता है यही वजह है कि इसे “स्मार्ट और सस्ता कुकिंग फ्यूल” कहा जा रहा है। पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद?एथेनॉल स्टोव को “ग्रीन टेक्नोलॉजी” माना जाता है क्योंकि: यह कार्बन न्यूट्रल फ्यूल है गन्ना, मक्का और बायोमास से बनता है धुआं और जहरीली गैसें नहीं निकलतीं जंगलों पर ईंधन निर्भरता कम हो सकती है LPG से कैसे अलग है?फीचर LPG एथेनॉल स्टोवईंधन फॉसिल फ्यूल बायोफ्यूलधुआं थोड़ा लगभग नहींसुरक्षा गैस लीकेज रिस्क कम रिस्कलागत अधिक कम होने की संभावनापर्यावरण प्रदूषण क्लीन एनर्जी नितिन गडकरी का विजनकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कई मंचों पर एथेनॉल आधारित कुकिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की बात कही है।उनका मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई गई, तो: LPG पर निर्भरता कम होगी किसानों को एथेनॉल से नया बाजार मिलेगा भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा सेहत और सुरक्षा के फायदेधुआं न होने से सांस की बीमारियों का खतरा कम बर्तन काले नहीं पड़ते आग फैलने का जोखिम LPG की तुलना में कम इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर एथेनॉल स्टोव आने वाले समय में रसोई की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह न सिर्फ LPG का विकल्प बन सकता है, बल्कि सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल कुकिंग सिस्टम भी साबित हो सकता है।हालांकि इसका व्यापक उपयोग तभी संभव होगा जब इसका उत्पादन, सप्लाई और कीमत स्थिर रूप से विकसित हो।
Airtel का बड़ा दावा: ‘नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन नहीं’, प्रायोरिटी पोस्टपेड सर्विस पर सरकार के सामने रखा पक्ष

नई दिल्ली। एयरटेल (Airtel) की नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड सर्विस’ को लेकर उठे विवाद के बीच कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) की कमिटी के सामने अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि यह सेवा 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित है और इससे नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं होता। साथ ही, इसका असर प्रीपेड या अन्य ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड और सेवा गुणवत्ता पर नहीं पड़ेगा। एयरटेल ने स्पष्ट किया है कि उसकी यह प्रायोरिटी सर्विस पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है और इसमें किसी भी ऐप या वेबसाइट के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। न तो किसी ऐप को ब्लॉक किया जाता है, न उसकी स्पीड कम की जाती है और न ही किसी को अतिरिक्त प्राथमिकता देकर अन्य यूजर्स को नुकसान पहुंचाया जाता है। कंपनी के अनुसार, 5G क्षमता का वर्तमान उपयोग पीक टाइम में लगभग 38% है, जिसमें प्रायोरिटी पोस्टपेड ट्रैफिक की हिस्सेदारी बेहद कम है। इसलिए प्रीपेड यूजर्स के लिए पर्याप्त नेटवर्क क्षमता हमेशा उपलब्ध रहती है और उनकी सर्विस क्वालिटी प्रभावित नहीं होगी। एयरटेल ने यह भी तर्क दिया है कि अगर 5G नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर रोक लगाई गई, तो भारत में 6G तकनीक के विकास की संभावनाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भविष्य की उन्नत कनेक्टिविटी का आधार है। हाल ही में लॉन्च हुई इस सर्विस के तहत पोस्टपेड यूजर्स को भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहतर नेटवर्क और कम कॉल ड्रॉप जैसी सुविधाएं देने का दावा किया गया है। यह सेवा 449 रुपये के शुरुआती प्लान से उपलब्ध है। नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां किसी भी वेबसाइट या ऐप के साथ भेदभाव नहीं कर सकतीं, न ही किसी को पैसे लेकर तेज या धीमा इंटरनेट दे सकती हैं। इसी को लेकर इस नई सर्विस पर बहस तेज हो गई है।
BSNL का धमाकेदार ऑफर: सिर्फ ₹51 में 28 दिन अनलिमिटेड कॉल, 2GB डेली डेटा और फ्री सिम

नई दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक खास लिमिटेड टाइम ऑफर लेकर आई है। कंपनी ने इस योजना को “स्मार्ट स्टार्ट प्लान” नाम दिया है, जिसके तहत बेहद कम कीमत में यूजर्स को हाई वैल्यू बेनिफिट्स मिल रहे हैं। क्या है BSNL का ₹51 स्मार्ट स्टार्ट प्लान?इस ऑफर के तहत नए ग्राहकों को सिर्फ ₹51 में ये सुविधाएं मिल रही हैं: 28 दिनों की वैलिडिटी अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी कॉलिंग रोजाना 2GB हाई-स्पीड डेटा हर दिन 100 फ्री SMS फ्री BSNL सिम कार्ड (नए यूजर्स के लिए) ऑफर की वैलिडिटी और शर्तेंकंपनी के अनुसार यह ऑफर 22 मई 2026 से 30 जून 2026 तक सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा। सिर्फ नए ग्राहक ही इस ऑफर का लाभ ले सकते हैं मौजूदा BSNL यूजर्स इस प्लान के लिए पात्र नहीं हैं सिम कार्ड नजदीकी कस्टमर सर्विस सेंटर या रिटेलर से लिया जा सकता है पहले भी आए ऐसे ऑफरBSNL इससे पहले भी नए ग्राहकों के लिए ₹1 का पहला रिचार्ज कूपन (FRC) जैसी योजनाएं ला चुका है, जिसमें शुरुआती यूजर्स को किफायती दरों पर कॉलिंग और डेटा बेनिफिट्स दिए गए थे। क्यों ला रही है BSNL ऐसे ऑफर?BSNL देशभर में अपने 4G नेटवर्क विस्तार पर काम कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नए ग्राहकों को जोड़ना और निजी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले अपनी पकड़ मजबूत करना है।
Lava Shark 5G लॉन्च: 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ 15 हजार से कम में नया 5G स्मार्टफोन

नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Lava Shark 5G लॉन्च हो गया है, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा बैटरी वाला फोन माना जा रहा है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh बैटरी, 5G कनेक्टिविटी और 120Hz रिफ्रेश रेट डिस्प्ले है। कंपनी ने इसे बजट सेगमेंट में उतारा है ताकि कम कीमत में ज्यादा बैटरी और बेहतर परफॉर्मेंस चाहने वाले यूजर्स को आकर्षित किया जा सके। कीमत और उपलब्धताLava Shark 5G की भारत में कीमत 11,999 रुपये रखी गई है।यह स्मार्टफोन 10 जून से Lava के रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। कंपनी ने इसे ऑफलाइन मार्केट को ध्यान में रखकर लॉन्च किया है। डिजाइन और डिस्प्लेइस फोन में बड़ा और स्मूथ डिस्प्ले दिया गया है: 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट बड़ा स्क्रीन एक्सपीरियंस वीडियो और गेमिंग के लिए बेहतर 120Hz रिफ्रेश रेट इस प्राइस रेंज में इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है। प्रोसेसर और परफॉर्मेंसLava Shark 5G में दिया गया है: Unisoc T8200 चिपसेट (6nm प्रोसेस) Mali-G57 MC2 GPU 4GB LPDDR4X RAM 64GB UFS 2.2 स्टोरेज माइक्रोSD कार्ड सपोर्ट (1TB तक एक्सपेंडेबल स्टोरेज) यह कॉम्बिनेशन इसे बेसिक से मिड-लेवल यूज के लिए उपयुक्त बनाता है। बैटरी और चार्जिंगफोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी बैटरी है: 6000mAh बैटरी 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट इस बैटरी के साथ यूजर को लंबा बैकअप मिलने की उम्मीद है, खासकर वीडियो देखने और सोशल मीडिया इस्तेमाल में। कैमरा फीचर्सकैमरा सेटअप बजट कैटेगरी के अनुसार दिया गया है: 13MP रियर कैमरा 5MP फ्रंट कैमरा यह सेटअप बेसिक फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। अन्य फीचर्ससाइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर (पावर बटन में) 5G + 4G नेटवर्क सपोर्ट IP64 रेटिंग (धूल और हल्के पानी के छींटों से सुरक्षा) वजन लगभग 210 ग्राम क्या यह फोन खरीदना चाहिए?Lava Shark 5G अपने प्राइस सेगमेंट में कुछ मजबूत फीचर्स लेकर आता है: बड़ी 6000mAh बैटरी 120Hz डिस्प्ले 5G सपोर्ट एक्सपेंडेबल स्टोरेज कमियां: कैमरा औसत स्तर का परफॉर्मेंस मिड-रेंज ही माना जाएगा अभी तक पूरी तरह रिव्यू आधारित फीडबैक उपलब्ध नहीं है कुल मिलाकर यह फोन उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो कम बजट में लंबी बैटरी और 5G स्मार्टफोन चाहते हैं। Lava Shark 5G बजट सेगमेंट में एक मजबूत एंट्री है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबी बैटरी और बड़ा डिस्प्ले चाहते हैं। हालांकि कैमरा और प्रोसेसर परफॉर्मेंस में यह फ्लैगशिप लेवल अनुभव नहीं देता, लेकिन 12 हजार रुपये के अंदर यह एक संतुलित 5G पैकेज साबित हो सकता है।
क्या Earbuds से हो सकती है आपकी जासूसी? जानिए साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी और सच्चाई

नई दिल्ली। आज के समय में वायरलेस ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने या कॉल करने का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये स्मार्ट फीचर्स से लैस ऐसे डिवाइस बन चुके हैं जो माइक्रोफोन, ब्लूटूथ और AI तकनीक के जरिए लगातार फोन से जुड़े रहते हैं। इसी वजह से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इन डिवाइस को लेकर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Earbuds कैसे बन सकते हैं खतरा?आधुनिक Earbuds में माइक्रोफोन और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है, जिससे ये फोन से लगातार जुड़े रहते हैं। अगर किसी डिवाइस में सुरक्षा खामी हो या वह किसी मालवेयर से संक्रमित हो जाए तो हैकर माइक्रोफोन तक पहुंच बना सकता है। इस स्थिति में यूजर को बिना जानकारी दिए आसपास की बातचीत रिकॉर्ड होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि ऐसा आमतौर पर तभी संभव है जब डिवाइस या फोन किसी असुरक्षित ऐप या लिंक से प्रभावित हो। ब्लूटूथ हैकिंग का बढ़ता खतरासाइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सार्वजनिक जगहों जैसे एयरपोर्ट, मॉल या कैफे में ब्लूटूथ ऑन रखना जोखिम भरा हो सकता है। हैकर्स कई बार नकली ब्लूटूथ डिवाइस बनाकर यूजर्स को कनेक्ट करने के लिए ट्रिक करते हैं। अगर कोई यूजर गलती से ऐसे डिवाइस से कनेक्ट हो जाता है तो उसके फोन का डेटा, कॉन्टैक्ट्स और ऑडियो जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ सकता है। किन लोगों को ज्यादा खतरा?जो लोग लगातार Earbuds का इस्तेमाल ऑफिस कॉल, बिजनेस मीटिंग या निजी बातचीत के लिए करते हैं, वे ज्यादा संवेदनशील स्थिति में हो सकते हैं। खासकर सस्ते या अनजान ब्रांड के डिवाइस में सिक्योरिटी अपडेट की कमी के कारण खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, अगर किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा माइक्रोफोन परमिशन दी गई हो तो वह बैकग्राउंड में डेटा एक्सेस कर सकता है। कैसे बचें इस खतरे से?यूजर्स को हमेशा भरोसेमंद ब्रांड के Earbuds इस्तेमाल करने चाहिए और समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना चाहिए। अनजान ब्लूटूथ रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें और जरूरत न होने पर ब्लूटूथ बंद रखें। फोन में ऐप्स की माइक्रोफोन परमिशन नियमित रूप से चेक करना भी जरूरी है। किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप से बचकर रहना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
सिर्फ बिजली बिल नहीं बचाते Solar Panels, पर्यावरण से लेकर कमाई तक देते हैं कई बड़े फायदे

नई दिल्ली। आज के समय में बढ़ते बिजली बिल और ऊर्जा संकट के बीच Solar Energy लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनती जा रही है। घरों, ऑफिसों और फैक्ट्रियों में तेजी से सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। वजह सिर्फ बिजली बिल में बचत नहीं, बल्कि इसके कई ऐसे फायदे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद सोलर पैनल सालों तक कम खर्च में बिजली देते हैं और लंबे समय तक राहत पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर पैनल लगने के बाद बिजली के लिए सरकारी ग्रिड पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। खासकर ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम में बैटरी के जरिए बिजली स्टोर की जा सकती है, जिससे रात के समय भी बिजली का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। इससे बार-बार बिजली कटौती या बढ़ते बिजली बिल की चिंता कम हो जाती है। सोलर सिस्टम का एक बड़ा फायदा इसकी कम मेंटेनेंस लागत भी है। शुरुआती इंस्टॉलेशन खर्च थोड़ा ज्यादा जरूर होता है, लेकिन सरकारी सब्सिडी के कारण यह लागत काफी घट जाती है। एक बार पैनल लगाने के बाद सिर्फ साल में एक-दो बार सफाई या सामान्य देखभाल की जरूरत पड़ती है। अच्छी क्वालिटी के सोलर पैनल 20 से 25 साल तक आसानी से काम कर सकते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी सोलर एनर्जी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इससे बिजली बनाने के दौरान कोई धुआं, जहरीली गैस या प्रदूषण पैदा नहीं होता। यही कारण है कि इसे क्लीन और ग्रीन एनर्जी कहा जाता है। सोलर पावर का इस्तेमाल कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। सरकार भी लोगों को सोलर एनर्जी अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। केंद्र और कई राज्य सरकारें सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी और आसान लोन सुविधा दे रही हैं। इससे आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगाना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोलर एनर्जी घरेलू और व्यावसायिक बिजली जरूरतों का बड़ा स्रोत बन सकती है। कम खर्च, लंबी लाइफ और पर्यावरण सुरक्षा जैसे फायदे इसे भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा तकनीकों में शामिल कर रहे हैं।