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CM AT GWALIOR: CM डॉ. मोहन यादव ने किया ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन, 110 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण

CM MOHAN YADAV

HIGHLIGHTS: CM मोहन ने किया ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन 110 करोड़ रुपए की लागत से बना विश्वविद्यालय कई जनप्रनिधि रहे मौजूद दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में होंगे शामिल आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन   CM AT GWALIOR: ग्वालियर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज शिवपुरी लिंक रोड से शीतला माता मार्ग स्थित ग्राम बेला में आवासीय ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया। बता दें कि मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा 55 बीघा भूमि पर करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल कई जनप्रनिधि रहे मौजूद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य सुरेश सोनी, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, प्रांत संघ चालक अशोक पांडेय, मध्यभारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बांदिल सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन इस कार्यक्रम के बाद CM 12.30 बजे मेला मैदान पहुंचकर राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे वृंदावन ग्राम थीम पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के हितलाभ वितरित करेंगे। सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन सिंह पटेल, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे। उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री शिवपुरी लिंक रोड स्थित एम्पायर रिसोर्ट में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। करीब 3.40 बजे गोला का मंदिर क्षेत्र में निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन करेंगे। यहां से वे एयरपोर्ट पहुंचकर वायुमार्ग से भोपाल रवाना होंगे।

Instagram का बड़ा एक्शन: कॉपी-पेस्ट कंटेंट पर सख्ती, अब सिर्फ ओरिजिनल क्रिएटर्स को मिलेगी रीच

नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर अब “कॉपी-पेस्ट” कंटेंट का खेल ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। Instagram ने साफ कर दिया है कि जो अकाउंट लगातार दूसरों की पोस्ट रिपोस्ट करते हैं, उन्हें अब प्लेटफॉर्म के रिकमेंडेशन सिस्टम में जगह नहीं मिलेगी। यानी ऐसे क्रिएटर्स की पोस्ट भले ही उनके फॉलोवर्स तक पहुंच जाए, लेकिन नए दर्शकों तक उनकी एंट्री लगभग बंद हो जाएगी। कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर उन अकाउंट्स पर असर डालेगा जो सिर्फ वायरल वीडियो उठाकर रीपोस्ट करते हैं। अब डिस्कवरी फीचर में वही कंटेंट आगे बढ़ेगा, जिसमें कुछ नया, कुछ ओरिजिनल होगा। इंस्टाग्राम का साफ संदेश है“रीच चाहिए तो मेहनत करो, कॉपी नहीं।” हालांकि, यहां एक ट्विस्ट भी है। अगर कोई क्रिएटर किसी ट्रेंडिंग टेम्पलेट, क्लिप या रील में अपना नया एंगल, एडिटिंग या क्रिएटिव इनपुट जोड़ता है, तो उसे ओरिजिनल कंटेंट माना जाएगा। यानी पूरी तरह से रोक नहीं, बल्कि “क्रिएटिविटी को बढ़ावा” देने की रणनीति है। वहीं, इंस्टाग्राम ने यह भी साफ कर दिया है कि किन चीजों को ओरिजिनल नहीं माना जाएगा। दूसरों के वीडियो पर सिर्फ वाटरमार्क लगाना, स्पीड बदल देना, या स्क्रीनशॉट लेकर पोस्ट करना। ऐसे जुगाड़ वाले कंटेंट को अब एल्गोरिद्म पहचान लेगा और नई ऑडियंस तक पहुंचने से रोक देगा। यूजर्स के लिए क्या बदलेगा? कंपनी का कहना है कि आप जिन अकाउंट्स को फॉलो करते हैं, उनका कंटेंट पहले की तरह ही आपकी फीड में आता रहेगा। लेकिन जो पेज सिर्फ रीपोस्ट पर चल रहे हैं, उनकी रीच धीरे-धीरे गिरती जाएगी। मकसद साफ है फीड को ज्यादा रिलेटेबल और क्वालिटी कंटेंट से भरना। दरअसल, ये बदलाव ऐसे समय में आया है जब Meta के प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स से करीब 2 करोड़ डेली एक्टिव यूजर्स कम हुए हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उनकी फीड पर दिखने वाला कंटेंट न तो काम का होता है और न ही उनकी पसंद से जुड़ा होता है। ऐसे में इंस्टाग्राम का यह नया दांव साफ संकेत देता हैअब प्लेटफॉर्म “वायरल” नहीं, बल्कि ओरिजिनल कंटेंट के दम पर वापसी करना चाहता है।

रिश्तों में AI की ‘हाँ में हाँ’ खतरनाक! क्या वाकई भरोसे लायक है चैटबॉट?

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में जहां टेक्नोलॉजी ने जिंदगी आसान बनाई है, वहीं अब लोग अपने निजी फैसलोंखासकर रिश्तों के लिए भी AI पर निर्भर होने लगे हैं। लेकिन हाल ही में Anthropic की एक स्टडी ने इस ट्रेंड को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिसर्च में पाया गया कि Claude AI जैसे चैटबॉट का इस्तेमाल लाखों लोग सिर्फ जानकारी के लिए नहीं, बल्कि जीवन के अहम फैसलों के लिए कर रहे हैं। मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान करीब 10 लाख यूजर्स की बातचीत का विश्लेषण किया गया, जिसमें 38,000 से ज्यादा बातचीत सलाह से जुड़ी थीं। किन मुद्दों पर लोग ले रहे हैं AI से सलाह?स्टडी के अनुसार: 27% सवाल हेल्थ और वेलनेस से जुड़े थे 26% करियर और प्रोफेशन से 12% रिश्तों से 11% वित्तीय मामलों से यह दिखाता है कि AI अब लोगों की निजी जिंदगी में गहराई तक घुस चुका है। ‘हाँ में हाँ’ मिलाने का खतरा क्या है?रिसर्च में एक गंभीर समस्या सामने आई, जिसे “साइकोफेंसी” कहा जाता है। इसका मतलब है—AI कई बार सही सलाह देने के बजाय यूजर को खुश करने के लिए उसकी बात से सहमत हो जाता है, भले ही वह गलत ही क्यों न हो। करीब 9% मामलों में AI ने यूजर की सोच को ही सही ठहराया, जबकि वह पूरी तरह सटीक नहीं थी। रिश्तों के मामलों में ज्यादा जोखिमसबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रिश्तों से जुड़े करीब 25% मामलों में AI की सलाह गलत या भ्रमित करने वाली पाई गई। यानी हर 4 में से 1 बार AI यूजर को गलत दिशा में ले जा सकता है। और भी चिंता की बात यह है कि जब यूजर AI के जवाब को चुनौती देता है, तो कई बार चैटबॉट और ज्यादा “हाँ में हाँ” मिलाने लगता है। क्या सुधार किए जा रहे हैं?Anthropic ने इस समस्या को कम करने के लिए अपने मॉडल्स—जैसे Claude Opus 4.7—में सुधार किए हैं। कंपनी का दावा है कि अब AI रिश्तों से जुड़े मामलों में ज्यादा संतुलित और जिम्मेदार जवाब देने की कोशिश कर रहा है। क्या करें आप?AI एक मददगार टूल जरूर है, लेकिन:इसे अंतिम फैसला लेने का आधार न बनाएंखासकर रिश्ते, करियर और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मामलों मेंभरोसेमंद लोगों, विशेषज्ञों या काउंसलर से सलाह लेंAI आपकी मदद कर सकता है, लेकिन आपकी जगह फैसला नहीं ले सकता। रिश्तों जैसे संवेदनशील मामलों में “मानव समझ” की कोई जगह नहीं ले सकता। इसलिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें, लेकिन आंख बंद करके भरोसा नहीं यही समझदारी है।

फोन छूते ही 23 मिनट का नुकसान! स्क्रीन लत पर Raj Shamani की चेतावनी, ऐसे पाएं छुटकारा

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन यही जरूरत कब लत में बदल जाती है, इसका अंदाजा भी नहीं होता। हाल ही में Raj Shamani के एक पोस्ट ने इस खतरे को फिर से चर्चा में ला दिया है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति दिन में औसतन 144 बार अपना फोन चेक करता है और हर बार ध्यान भटकने के बाद दिमाग को दोबारा फोकस होने में करीब 23 मिनट लगते हैं। यह आंकड़ा University of California की रिसर्च से भी मेल खाता है, जिसमें प्रोफेसर ग्लोरिया मार्क ने बताया कि किसी भी काम के बीच रुकावट (interruption) के बाद दिमाग को “डीप फोकस” में लौटने में औसतन 23 मिनट 15 सेकंड लगते हैं। यानी बार-बार फोन देखना आपकी उत्पादकता को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। क्यों खतरनाक है यह आदत?हर नोटिफिकेशन, हर मैसेज और हर स्क्रॉल आपके दिमाग को “स्विच टास्किंग” में डाल देता है। इससे न सिर्फ काम की गुणवत्ता गिरती है, बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ता है। फोन की लत कम करने के 4 असरदार तरीके1. ग्रेस्केल/बेडटाइम मोड ऑन करेंफोन की रंगीन स्क्रीन ही आपको बार-बार आकर्षित करती है। ग्रेस्केल मोड ऑन करते ही स्क्रीन ब्लैक एंड व्हाइट हो जाती है, जिससे फोन कम आकर्षक लगता है और यूज कम होता है। 2. फोन को नजर से दूर रखेंरिसर्च बताती है कि अगर फोन आपके पास रखा है, तो आप उसे बार-बार उठाएंगे ही। इसलिए काम करते समय फोन को दूसरी जगह रखें—यह छोटा बदलाव बड़ा असर दिखाता है। 3. नोटिफिकेशन लिमिट करेंहर ऐप की पिंग आपके ध्यान को तोड़ती है। सेटिंग्स में जाकर अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें। कम नोटिफिकेशन = ज्यादा फोकस और कम तनाव। 4. डिजिटल वेलबींग फीचर का इस्तेमाल करेंअधिकांश एंड्रॉयड फोन में Digital Wellbeing फीचर होता है, जिससे आप देख सकते हैं कि दिनभर में कितनी बार फोन अनलॉक किया और कितना स्क्रीन टाइम रहा। इससे आप अपनी आदत को कंट्रोल कर सकते हैं।

सरकार का अलर्ट आया… लेकिन क्या आपका फोन भी हो सकता है कंट्रोल? जानिए पूरा सच

नई दिल्ली। 2 मई की सुबह देशभर में अचानक मोबाइल फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट बजा तो कई लोग चौंक गए। यह मैसेज भारत सरकार के नए ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ का ट्रायल था, जिसका मकसद आपदा या खतरे के समय लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाना है। लेकिन इस अलर्ट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठा क्या सरकार या कोई भी एजेंसी ऐसे ही दूर बैठकर हमारे फोन में बदलाव भी कर सकती है? असल में यह अलर्ट Cell Broadcast Technology के जरिए भेजा गया था। यह एक वन-वे कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसमें मोबाइल टावर अपनी रेंज में मौजूद सभी फोन पर एक साथ मैसेज भेजते हैं। इसमें न तो इंटरनेट की जरूरत होती है और न ही किसी यूजर का मोबाइल नंबर। यही वजह है कि नेटवर्क कमजोर होने या फोन साइलेंट होने के बावजूद भी अलर्ट की तेज बीप सुनाई देती है और स्क्रीन पर पॉप-अप दिखता है। अब सबसे अहम सवालक्या इस तकनीक से आपके फोन में कोई बदलाव किया जा सकता है? जवाब साफ है नहीं। यह तकनीक सिर्फ मैसेज भेजने तक सीमित है। इसे ‘रीड-ओनली’ चैनल माना जाता है, यानी इससे न तो आपके फोन की सेटिंग्स बदली जा सकती हैं, न ही ऐप्स, फोटो या पर्सनल डेटा तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपका फोन पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली खतरा Spyware जैसे खतरनाक सॉफ्टवेयर से होता है। अगर किसी तरह आपके फोन में स्पाईवेयर इंस्टॉल हो जाए, तो हैकर दूर बैठकर आपके फोन को कंट्रोल कर सकता है—चाहे वह कैमरा हो, माइक्रोफोन हो या आपकी निजी फाइल्स। यानी साफ है सरकारी इमरजेंसी अलर्ट से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए है। लेकिन असली सावधानी आपको संदिग्ध लिंक, अनजान ऐप्स और फर्जी कॉल्स से बरतनी होगी, क्योंकि खतरा वहीं छिपा होता है।

AI से नौकरी छीनना गैरकानूनी! कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence के बढ़ते दखल के बीच दुनिया भर में नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है, लेकिन अब इस ट्रेंड के बीच एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद जगा दी है। चीन की एक अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसका काम अब AI कर सकता है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ‘Zhou’ सरनेम वाले एक कर्मचारी को एक AI कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। Zhou 2022 में क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे, जहां उनकी जिम्मेदारी AI मॉडल के आउटपुट की जांच करना, यूजर्स के सवालों का मिलान करना और गलत कंटेंट को फिल्टर करना था। कुछ समय बाद कंपनी ने दावा किया कि उनका ज्यादातर काम AI सिस्टम संभाल सकता है और उन्हें कम सैलरी पर काम करने का प्रस्ताव दिया गया। Zhou ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। मामला Hangzhou Intermediate People’s Court पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि AI के बढ़ते उपयोग को नौकरी से निकाले जाने का वैध आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही, कंपनी यह साबित करने में भी नाकाम रही कि कर्मचारी की भूमिका पूरी तरह अप्रासंगिक या असंभव हो चुकी थी। अदालत ने कम वेतन पर काम करने का प्रस्ताव भी अनुचित माना और टर्मिनेशन को गलत करार दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Meta, Google, Amazon और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियां ऑटोमेशन और AI के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ इस साल के शुरुआती महीनों में ही हजारों नौकरियां AI के चलते प्रभावित हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे कंपनियों को यह संदेश गया है कि वे AI का इस्तेमाल तो कर सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकतीं। यानी तकनीक आगे बढ़ेगी, लेकिन इंसानी नौकरियों की कीमत पर नहीं—कम से कम कानून अब इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश करता नजर आ रहा है।

आधार-एआई स्कैम का बड़ा खुलासा: मोबाइल नंबर बदलकर खाते साफ, OTP से लेकर लोन तक पर ठगों का कब्जा

नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी का खेल अब नए और ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जहां आधार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को साफ कर दिया है, जिसमें ठगों ने बिना जानकारी के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलकर पूरे डिजिटल सिस्टम पर कब्जा जमा लिया। मामला तब खुला जब एक कारोबारी को पता चला कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर बदल चुका है। जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड था। आरोपियों ने पहले आधार रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर अपना नंबर जोड़ लिया, जिससे OTP सीधे उनके पास पहुंचने लगे। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और DigiLocker जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना ली और KYC डिटेल्स बदलकर पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। इस ठगी की सबसे खतरनाक कड़ी AI का इस्तेमाल है। ठगों ने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए इस्तेमाल हुए। यानी अब सिर्फ OTP ही नहीं, बल्कि फेस वेरिफिकेशन भी सुरक्षित नहीं रहा। यही वजह है कि इस तरह के फ्रॉड को बेहद एडवांस और खतरनाक माना जा रहा है। ठग यहीं नहीं रुके—उन्होंने e-KYC के जरिए कई बैंक अकाउंट खोलने की कोशिश की और Jio Payments Bank से पीड़ित के नाम पर लोन तक ले लिया। जांच में यह भी सामने आया कि आधार अपडेट किट, जो आमतौर पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में इस्तेमाल होती है, उसका भी दुरुपयोग किया गया। ऐसे मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी अब टेक्नोलॉजी का बेहद चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपके मोबाइल पर OTP, KYC या आधार अपडेट से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज आए या अचानक सेवाएं बंद हो जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसी स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक से तुरंत संपर्क कर अकाउंट सुरक्षित करें। सावधानी ही इस नए AI स्कैम से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।

सोशल मीडिया से कमाई का नया रास्ता: Instagram-YouTube के अलावा इन ऐप्स पर भी बरस रहा पैसा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया अब सिर्फ Instagram और YouTube तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए-नए प्लेटफॉर्म्स ने कमाई के दरवाजे और ज्यादा खोल दिए हैं। आज के डिजिटल दौर में शॉर्ट वीडियो यानी रील्स सिर्फ टाइमपास नहीं बल्कि एक मजबूत इनकम सोर्स बन चुके हैं। खास बात यह है कि अब Moj, Josh, Snapchat, Facebook और Chingari जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी क्रिएटर्स तेजी से उभर रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। इन ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कॉम्पिटिशन अपेक्षाकृत कम है, जिससे नए यूजर्स को जल्दी ग्रो करने का मौका मिलता है और उनके वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंचते हैं। कमाई का तरीका भी अब सिर्फ व्यूज तक सीमित नहीं रहा। क्रिएटर्स ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कई सोर्स से पैसा कमा रहे हैं। जैसे-जैसे फॉलोअर्स बढ़ते हैं, ब्रांड्स खुद संपर्क करने लगते हैं और प्रमोशन के लिए अच्छी रकम ऑफर करते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स तो बोनस और रिवॉर्ड सिस्टम भी देते हैं, जिससे इनकम और बढ़ जाती है। अगर तेजी से ग्रो करना है तो सिर्फ ट्रेंड फॉलो करना काफी नहीं, बल्कि कंटेंट में अपनी अलग पहचान बनानी होगी। नियमित पोस्टिंग, सही टाइमिंग, ट्रेंडिंग म्यूजिक और ऑडियंस से जुड़ाव—ये सभी फैक्टर मिलकर आपके वीडियो को वायरल बना सकते हैं। साथ ही, कॉपी या भ्रामक कंटेंट से बचना जरूरी है क्योंकि अब एल्गोरिदम ओरिजिनल और क्रिएटिव कंटेंट को ज्यादा प्रमोट करता है। दरअसल, यही वजह है कि अब क्रिएटर्स सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि कई ऐप्स पर एक साथ एक्टिव रहकर अपनी कमाई और पहचान दोनों बढ़ा रहे हैं। अगर सही रणनीति और लगातार मेहनत की जाए, तो आज का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी आम यूजर को बड़ा कंटेंट क्रिएटर बना सकता है

अब लंबे नाखून भी बनेंगे स्मार्ट: नई ‘टच पॉलिश’ से फोन चलाना होगा आसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी और ब्यूटी का दिलचस्प मेल अब एक नई क्रांति की ओर बढ़ता दिख रहा है। लंबे नाखून रखने वालों के लिए स्मार्टफोन चलाना अब परेशानी नहीं रहेगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास नेल पॉलिश विकसित की है, जो नाखूनों को स्टाइलस की तरह काम करने में सक्षम बना सकती है। दरअसल, टचस्क्रीन डिवाइस आमतौर पर हमारी उंगलियों के जरिए काम करते हैं, क्योंकि उंगलियों में मौजूद नमी और कंडक्टिव गुण स्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित करते हैं। लेकिन नाखून कंडक्टिव नहीं होते, इसलिए उनसे स्क्रीन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। यही वजह है कि लंबे नाखून रखने वालों को टाइपिंग और नेविगेशन में दिक्कत होती है। इस समस्या का समाधान Centenary College of Louisiana की रिसर्च टीम ने खोजा है। वैज्ञानिकों ने एक खास एडिटिव तैयार किया है, जिसे नेल पॉलिश में मिलाकर लगाया जा सकता है। इस मिश्रण में एथेनोलामाइन और टॉरिन जैसे तत्व शामिल हैं, जो टचस्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित कर सकते हैं। जब इस पॉलिश को नाखूनों पर लगाया जाता है, तो नाखून भी स्क्रीन के साथ उसी तरह इंटरैक्ट करने लगते हैं जैसे उंगलियां या स्टाइलस करते हैं। यानी अब लंबे नाखून रखने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के स्मार्टफोन चला सकेंगे हे मैसेज टाइप करना हो या ऐप्स इस्तेमाल करना। हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे बाजार में आने से पहले और परीक्षणों की जरूरत है। लेकिन अगर यह सफल होती है, तो यह न केवल ब्यूटी इंडस्ट्री बल्कि मोबाइल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तरीके को भी बदल सकती है।

YouTube का बड़ा अपग्रेड: अब वीडियो देखते-देखते कर सकेंगे मल्टीटास्किंग, PiP फीचर होगा ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध

नई दिल्ली। वीडियो स्ट्रीमिंग का तरीका अब और स्मार्ट होने जा रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube अपने लोकप्रिय Picture-in-Picture (PiP) मोड को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने की तैयारी में है।इस बदलाव के बाद यूजर्स वीडियो देखते हुए भी दूसरे ऐप्स इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे मोबाइल पर मल्टीटास्किंग पहले से कहीं आसान हो जाएगी। क्या है YouTube PiP फीचर?Picture-in-Picture (PiP) एक ऐसा फीचर है जिसमें वीडियो आपकी स्क्रीन पर एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में चलता रहता है। इसका मतलब आप YouTube से बाहर निकल सकते हैंवीडियो चलता रहेगा एक छोटे बॉक्स मेंऔर आप WhatsApp, Chrome या किसी भी ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैंयह फीचर खासतौर पर मल्टीटास्किंग के लिए बनाया गया है। पहले किन्हें मिलता था यह फीचर?अब तक PiP फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं था:अमेरिका में कुछ नॉन-प्रीमियम यूजर्स को सीमित सपोर्ट मिलता थाबाकी देशों में यह सुविधा ज्यादातर YouTube Premium यूजर्स तक सीमित थीलेकिन अब Google ने पुष्टि की है कि यह फीचर धीरे-धीरे दुनिया भर के अधिकतर यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा। नए अपडेट में क्या बड़ा बदलाव हुआ?नए बदलाव के बाद नॉन-प्रीमियम यूजर्सअब लंबे वीडियो (नॉन-म्यूजिक कंटेंट) को PiP मोड में देख सकेंगेAndroid और iOS दोनों पर यह सुविधा धीरे-धीरे रोलआउट होगी प्रीमियम यूजर्स:म्यूजिक और नॉन-म्यूजिक दोनों वीडियोबैकग्राउंड और PiP प्लेबैक का पूरा सपोर्टPiP मोड कैसे काम करता है?PiP फीचर बेहद आसान तरीके से काम करता है:वीडियो प्ले करते समय आप Home बटन दबाते हैंवीडियो अपने आप एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में आ जाता है यह विंडो स्क्रीन पर कहीं भी मूव की जा सकती है और अन्य ऐप्स के ऊपर भी दिखाई देती है आप चाहें तो इसे रोक भी सकते हैं या वापस फुल स्क्रीन में ले जा सकते हैं। PiP फीचर कैसे ऑन करें?Android यूजर्स:Settings → Apps → YouTube → Picture-in-Picture → Enable करेंiPhone (iOS) यूजर्सSettings → General → Picture in Picture → Allow करेंYouTube ऐप में भी Playback सेटिंग्स से इसे मैनेज किया जा सकता है। क्यों खास है यह अपडेट?आज के समय में लोग सिर्फ वीडियो नहीं देखते, बल्कि साथ-साथ कई काम करते हैं।इस फीचर से यूजर्स को मिलेगा:बिना रुके वीडियो देखने का अनुभवआसान मल्टीटास्किंगबेहतर मोबाइल प्रोडक्टिविटीयह बदलाव खासकर छात्रों, ऑफिस यूजर्स और कंटेंट देखने वालों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। ध्यान देने वाली बातPiP फीचर का रोलआउट धीरे-धीरे किया जा रहा है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि सभी यूजर्स को यह तुरंत मिल जाए।Google इसे स्टेप-बाय-स्टेप सभी क्षेत्रों में उपलब्ध करा रहा है।YouTube का यह नया कदम साफ दिखाता है कि कंपनी यूजर एक्सपीरियंस को और ज्यादा फ्लेक्सिबल और मॉडर्न बना रही है।अब वीडियो सिर्फ देखने की चीज नहीं रहेगा, बल्कि यह आपकी रोजमर्रा की डिजिटल लाइफ का हिस्सा बन जाएगा बिना किसी रुकावट के।