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एआई और ऑटोमेशन को कार्यबल कटौती का प्रमुख कारण बताया जा रहा..

नई दिल्ली: वैश्विक तकनीकी उद्योग एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजरता दिखाई दे रहा है जहां कार्यबल में बड़े पैमाने पर कटौती की आशंका ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों में से एक द्वारा अपने संगठनात्मक ढांचे में पुनर्गठन की तैयारी की जा रही है जिसके तहत कुल कर्मचारियों की संख्या में लगभग दस प्रतिशत तक की कमी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस प्रस्तावित कदम से हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ सकता है और पूरे उद्योग में अस्थिरता का माहौल बनता नजर आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह छंटनी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है और इसका पहला चरण आगामी महीनों में शुरू होने की संभावना है। अनुमान है कि इस शुरुआती दौर में करीब आठ हजार कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं। वहीं यदि यह प्रक्रिया आगे विस्तारित होती है तो कुल कटौती का आंकड़ा बीस प्रतिशत तक पहुंच सकता है जिससे लगभग सोलह हजार से अधिक पदों पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इस संभावित बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग को माना जा रहा है। तकनीकी कंपनियां अब अपने कार्यों को अधिक कुशल और स्वचालित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं जिससे पारंपरिक भूमिकाओं की आवश्यकता में कमी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी हुई भर्ती के बाद अब कंपनियां अपने खर्चों को नियंत्रित करने और संचालन को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यह बदलाव न केवल एक कंपनी तक सीमित है बल्कि पूरे तकनीकी उद्योग में एक व्यापक परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। वर्तमान समय में वैश्विक तकनीकी क्षेत्र पहले से ही आर्थिक दबाव और बदलती बाजार परिस्थितियों का सामना कर रहा है। कोविड के बाद के दौर में जहां कंपनियों ने बड़े स्तर पर भर्ती की थी वहीं अब उसी विस्तार को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वजह से कई कंपनियां अपने कार्यबल में कटौती कर रही हैं और संगठनात्मक संरचना को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। इससे रोजगार के अवसरों पर सीधा असर पड़ रहा है और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों के लिए अनिश्चितता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीकी उद्योग में केवल उन्हीं कौशलों की मांग बढ़ेगी जो नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और स्वचालित प्रणालियों के साथ तालमेल बिठा सकें। इस बदलाव ने कार्य संस्कृति और रोजगार की प्रकृति दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कई बड़ी कंपनियां पहले ही अपने कार्यबल में बड़े स्तर पर कटौती कर चुकी हैं और यह प्रवृत्ति अभी भी जारी रहने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर हो रहे इस परिवर्तन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी उद्योग अब तेजी से एक नए युग की ओर बढ़ रहा है जहां दक्षता और तकनीकी अनुकूलन ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।

धोलेरा में देश का पहला सेमीकंडक्टर चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र को मंजूरी

नई दिल्ली: भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गुजरात के धोलेरा में देश का पहला चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को टाटा समूह से जुड़ी इकाई द्वारा विकसित किया जाएगा और इसे आधुनिक तकनीकी ढांचे के साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। यह विशेष आर्थिक क्षेत्र बड़े पैमाने पर विकसित किया जाएगा और इसमें इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के लिए उन्नत उत्पादन और संचालन प्रणाली स्थापित की जाएगी। यहां अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को गति मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की संभावना भी जताई जा रही है। सरकार द्वारा हाल के वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों के तहत विशेष आर्थिक क्षेत्र से जुड़े नियमों को अधिक निवेश अनुकूल और लचीला बनाया गया है। भूमि उपयोग से संबंधित प्रावधानों में बदलाव करते हुए परियोजनाओं के लिए आवश्यक न्यूनतम क्षेत्र को कम किया गया है, जिससे अधिक कंपनियों को इस ढांचे में आने का अवसर मिल सके। साथ ही घरेलू बाजार में सीमित बिक्री की अनुमति और वित्तीय अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापार सुगमता को बढ़ाया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। सरकार का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेंगी बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाएंगी। धोलेरा परियोजना के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग इकाइयों के साथ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण क्लस्टर शामिल हैं। इन परियोजनाओं में भारी निवेश के चलते औद्योगिक ढांचे को नई मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास से भारत में एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार होगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा। साथ ही नवाचार और उच्च तकनीक निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार और उद्योग जगत के बीच बढ़ते सहयोग को इस क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। नीतिगत समर्थन और निजी निवेश के संयुक्त प्रयास से भारत धीरे धीरे वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।

बड़ी खुशखबरी: Samsung फोन्स की कीमत घटी, खरीदना हुआ आसान

नई दिल्ली। भारत में सैमसंग ने अपनी फ्लैगशिप Samsung Galaxy S25 सीरीज की कीमतों में बड़ा कटौती कर दी है। इस प्राइस ड्रॉप के बाद अब ये प्रीमियम स्मार्टफोन पहले से ज्यादा किफायती हो गए हैं, जिससे आम यूज़र्स के लिए इन्हें खरीदना आसान हो गया है। नई कीमतें: अब कितने में मिल रहे हैं फोन?Samsung Galaxy S25 (128GB) – ₹56,999Samsung Galaxy S25 (256GB) – ₹62,999Samsung Galaxy S25 FE – ₹44,999Samsung Galaxy S25 Ultra (12GB + 256GB) – ₹99,999सबसे ज्यादा कीमत में गिरावट S25 Ultra में देखने को मिली है, जो अब पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है। क्यों घटाई गई कीमतें?कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया है, लेकिन आमतौर पर ऐसा तब होता है जब नए मॉडल लॉन्च होते हैं। हाल ही में Samsung Galaxy S26 और Samsung Galaxy S26 Ultra के आने के बाद पुरानी S25 सीरीज की कीमत कम करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यूज़र्स के लिए क्या है फायदा?अब यूज़र्स को कम कीमत में फ्लैगशिप फीचर्स वाले स्मार्टफोन मिल रहे हैं। इसमें बेहतर कैमरा, दमदार प्रोसेसर और प्रीमियम डिजाइन जैसे फीचर्स शामिल हैं। अगर आप लंबे समय से फ्लैगशिप स्मार्टफोन लेने का इंतजार कर रहे थे, तो यह सही मौका हो सकता है। कम कीमत में प्रीमियम फोन मिलने से यह डील पहले से ज्यादा आकर्षक बन गई है।

Bike Buying Tips: पहली बाइक लेते समय न करें ये 7 गलतियां, वरना होगा भारी नुकसान

नई दिल्ली।  पहली बाइक खरीदना हर किसी के लिए एक खास और यादगार पल होता है। लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या कम जानकारी की वजह से ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका नुकसान बाद में उठाना पड़ता है। बाइक खरीदना सिर्फ उसकी कीमत या लुक पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसमें माइलेज, मेंटेनेंस, बजट और आपकी जरूरत जैसी कई अहम बातें शामिल होती हैं। अगर आप पहली बार बाइक खरीदने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सिर्फ लुक देखकर बाइक खरीदनाकई लोग बाइक का डिजाइन देखकर ही उसे पसंद कर लेते हैं और तुरंत खरीदने का फैसला कर लेते हैं। लेकिन सिर्फ लुक के आधार पर बाइक खरीदना सही नहीं है। हर बाइक अलग जरूरत के हिसाब से बनाई जाती है। इसलिए हमेशा अपनी जरूरत के अनुसार बाइक चुनें। बजट से बाहर जाकर खर्च करनाअक्सर लोग EMI के चक्कर में अपने बजट से ज्यादा महंगी बाइक खरीद लेते हैं। शुरुआत में यह आसान लगता है, लेकिन बाद में इसकी किस्त और बाकी खर्च संभालना मुश्किल हो जाता है। बाइक खरीदते समय हमेशा अपने बजट का ध्यान रखें और अतिरिक्त खर्च जैसे पेट्रोल, सर्विस और इंश्योरेंस को भी जोड़ें। माइलेज और मेंटेनेंस को नजरअंदाज करनाकई लोग बाइक खरीदते समय माइलेज और मेंटेनेंस को नजरअंदाज कर देते हैं। बाद में ज्यादा पेट्रोल खर्च और सर्विसिंग की वजह से परेशानी होती है। अगर आप रोजाना बाइक चलाते हैं, तो अच्छी माइलेज वाली बाइक लेना फायदेमंद रहेगा। बिना टेस्ट राइड लिए बाइक खरीदना एक बड़ी गलती है। हर बाइक का राइडिंग अनुभव अलग होता है। टेस्ट राइड लेने से आपको पता चलता है कि बाइक आपके लिए आरामदायक है या नहीं। इसलिए खरीदने से पहले टेस्ट राइड जरूर लें। फीचर्स को समझे बिना खरीद लेनाआजकल बाइक में कई एडवांस फीचर्स आते हैं, जैसे डिजिटल मीटर, ABS और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी। लेकिन कई लोग इन्हें समझे बिना ही बाइक खरीद लेते हैं। हमेशा उन्हीं फीचर्स को चुनें जो आपके काम के हों। सही इंजन कैपेसिटी न चुननाकुछ लोग ज्यादा पावर के चक्कर में बड़ी इंजन वाली बाइक खरीद लेते हैं, जबकि उनकी जरूरत छोटी बाइक से भी पूरी हो सकती है। शहर के लिए 100-125cc बाइक बेहतर विकल्प होती है। ज्यादा पावर वाली बाइक का खर्च भी ज्यादा होता है। कई बार लोग बाइक खरीदते समय डॉक्यूमेंट्स और इंश्योरेंस को ठीक से नहीं देखते, जिससे बाद में परेशानी होती है। हमेशा सभी कागज सही तरीके से चेक करें और एक अच्छा इंश्योरेंस प्लान जरूर लें। अगर आप पहली बार बाइक खरीदने जा रहे हैं, तो जल्दबाजी से बचें और सोच-समझकर फैसला लें। सही जानकारी और समझदारी से लिया गया निर्णय न सिर्फ आपके पैसे बचाएगा, बल्कि आपको एक बेहतर और सुरक्षित राइडिंग अनुभव भी देगा।

अमेज़न का ₹10 लाख करोड़ से ज्यादा का दांव, स्पेस रेस में मचा हलचल

नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Amazon ने अंतरिक्ष और सैटेलाइट इंटरनेट की दौड़ में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। कंपनी ने $11.57 अरब (करीब ₹1,07,838 करोड़) में सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Globalstar को खरीदने का ऐलान किया है। इस डील के बाद एलन मस्क की Starlink और जेफ बेजोस की Amazon के बीच स्पेस टेक्नोलॉजी में मुकाबला और तेज हो गया है। सैटेलाइट इंटरनेट में Amazon की बड़ी छलांगAmazon पहले से ही अपने प्रोजेक्ट ‘Kuiper’ के तहत सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क बना रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2029 तक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 3,200 सैटेलाइट्स तैनात किए जाएं। Globalstar की एंट्री के बाद Amazon का नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा, क्योंकि कंपनी के पास पहले से ही 200 से ज्यादा सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इस अधिग्रहण से Amazon को न सिर्फ टेक्नोलॉजी बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्लोबल स्तर पर अपनी पकड़ भी मजबूत करने का मौका मिलेगा। Direct-to-Device टेक्नोलॉजी से बदलेगा इंटरनेट का भविष्यGlobalstar की सबसे बड़ी ताकत उसकी Direct-to-Device (D2D) टेक्नोलॉजी है। इस तकनीक की मदद से मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकते हैं, यानी इसके लिए किसी टावर या ग्राउंड नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। यह तकनीक उन क्षेत्रों में बेहद उपयोगी है जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता या इमरजेंसी सेवाओं के लिए कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। Amazon का फोकस अब इसी तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करने पर है, जिसे कंपनी 2028 तक लॉन्च करने की योजना बना रही है। Apple के साथ साझेदारी रहेगी बरकरारGlobalstar पहले से ही Apple के साथ काम कर रही है। iPhone और Apple Watch में मिलने वाले Emergency SOS और Find My जैसे फीचर्स इसी सैटेलाइट नेटवर्क पर आधारित हैं। Amazon ने स्पष्ट किया है कि इस डील के बाद भी Apple के साथ साझेदारी जारी रहेगी।Apple ने 2024 में Globalstar में करीब $1.5 बिलियन का निवेश कर 20% हिस्सेदारी हासिल की थी, जिससे यह कंपनी पहले से ही तकनीकी रूप से मजबूत स्थिति में थी। Starlink की चुनौती और मस्क की बढ़तएलन मस्क की कंपनी SpaceX का Starlink फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में सबसे आगे है। कंपनी के पास करीब 10,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स का विशाल नेटवर्क है और यह 90 लाख से अधिक यूजर्स को सेवा दे रही है।Starlink हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के साथ-साथ अब D2D तकनीक पर भी तेजी से काम कर रही है। ऐसे में Amazon के लिए यह प्रतिस्पर्धा आसान नहीं होगी, लेकिन Globalstar की तकनीक से उसे नई मजबूती जरूर मिलेगी। स्पेस में नई ‘टेक वॉर’ की शुरुआतविशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल एक कंपनी अधिग्रहण नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में प्रभुत्व की नई जंग की शुरुआत है। जहां एक तरफ Elon Musk अपने Starlink नेटवर्क को विस्तार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ Jeff Bezos की Amazon अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है।Globalstar की टेक्नोलॉजी और Amazon की फाइनेंशियल ताकत मिलकर आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह बदल सकती है।

टाटा का बड़ा दांव: ₹1500 करोड़ निवेश से चीन को कड़ी टक्कर, बदलता मैन्युफैक्चरिंग गेम

नई दिल्ली।भारत की दिग्गज कंपनी Tata Group ने iPhone मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब ₹1,500 करोड़ का नया निवेश कर टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस निवेश के साथ कंपनी का लक्ष्य भारत को एप्पल का प्रमुख ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब Apple अपनी सप्लाई चेन को चीन से धीरे-धीरे बाहर निकालकर भारत जैसे देशों में शिफ्ट कर रहा है। iPhone मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती पकड़रिपोर्ट्स के अनुसार, अब अमेरिका में बिकने वाले 70% से ज्यादा iPhones भारत में तैयार हो रहे हैं। इसमें Tata Electronics और Foxconn जैसी कंपनियों की अहम भूमिका है।टाटा की एंट्री और लगातार बढ़ते निवेश ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मैप पर मजबूत स्थिति दिलाई है। ₹1,500 करोड़ निवेश से बड़ा विस्तारTata Sons ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट की अधिकृत पूंजी बढ़ाकर ₹6,250 करोड़ कर दी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है।इसके अलावा, टाटा ने पहले ही Pegatron की भारत यूनिट में 60% हिस्सेदारी खरीदकर iPhone सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। लगातार बढ़ रहा निवेश और उत्पादन क्षमताFY26 में Tata Group ने लगभग ₹3,000 करोड़ का निवेश Tata Electronics में किया है।पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार का तेजी से विस्तार किया है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है।FY25 में कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर ₹66,206 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना वृद्धि दर्शाती है। सेमीकंडक्टर में भी बड़ा दांवटाटा सिर्फ iPhone मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारी निवेश कर रही है।गुजरात में लगभग $14 बिलियन का फेब्रिकेशन प्लांटअसम में चिप असेंबली और टेस्टिंग यूनिटये दोनों प्रोजेक्ट भारत को टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत करेंगे। भारत बन सकता है ग्लोबल टेक हबविशेषज्ञों का मानना है कि टाटा और Apple की साझेदारी भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बना सकती है।चीन के दबदबे को चुनौती देते हुए भारत तेजी से नई सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनता जा रहा है।

पेट्रोल-डीजल से राहत: भारत में लॉन्च होंगी 6 नई इलेक्ट्रिक कारें, 500KM+ रेंज

नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बाजार और भी बड़ा होने वाला है। Tata Motors, Maruti Suzuki, Toyota और Kia जैसी बड़ी कंपनियां अगले दो सालों में नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन कारों की खास बात यह होगी कि इनमें से कई मॉडल 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने में सक्षम होंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे सरकार की नीतियां, चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार और बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतें अहम कारण हैं। ऐसे में अब कंपनियां बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक नई EVs लॉन्च करने पर जोर दे रही हैं। Toyota eBella और Kia Syros EVइस सूची में सबसे पहले नाम Toyota eBella का आता है, जो 543 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा करती है और इसे प्रीमियम डिजाइन के साथ पेश किया जाएगा। वहीं Kia Syros EV को शहर के उपयोग के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 369 किलोमीटर हो सकती है। Tata Sierra EV और VinFast VF3इसी कड़ी में Tata Sierra EV की भी वापसी हो रही है, जो 90 के दशक की मशहूर SUV का इलेक्ट्रिक अवतार होगी। यह कार 2026 में लॉन्च हो सकती है और इसमें दमदार परफॉर्मेंस देखने को मिलेगी। इसके अलावा वियतनाम की कंपनी VinFast भी भारत में अपनी VinFast VF3 के साथ एंट्री करने जा रही है, जो खासतौर पर शहरों के लिए डिजाइन की गई छोटी इलेक्ट्रिक कार होगी। Tata Safari EV और Maruti YMC MPVटाटा मोटर्स अपनी लोकप्रिय SUV Tata Safari EV को भी इलेक्ट्रिक अवतार में लाने की तैयारी में है, जिसमें बड़ी बैटरी और नए फीचर्स देखने को मिलेंगे। वहीं Maruti Suzuki एक नई इलेक्ट्रिक MPV Maruti YMC MPV पर काम कर रही है, जो बड़े परिवारों के लिए किफायती विकल्प बन सकती है। आने वाले समय में भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की भरमार होने वाली है। लंबी रेंज, कम खर्च और बेहतर तकनीक के साथ ये गाड़ियां पेट्रोल-डीजल वाहनों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।

दवाइयों की खोज में AI का बढ़ता दखल, एक्सपर्ट्स ने बताया गेमचेंजर

नई दिल्ली। दवाइयों की खोज और विकास के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभाने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई के उपयोग से सटीक और प्रभावी दवाइयों का विकास संभव होगा, जिससे मरीजों को बेहतर और पर्सनलाइज्ड इलाज मिल सकेगा। ‘इंडिया फार्मा 2026’ में भविष्य की रणनीति पर मंथनइंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन आयोजित चार प्रमुख सत्रों में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने फार्मा सेक्टर के भविष्य पर चर्चा की। इस दौरान हेल्थकेयर इकोसिस्टम को इनोवेशन आधारित बनाने पर जोर दिया गया। सिर्फ डिजिटलीकरण नहीं, सिस्टम को नए सिरे से सोचने की जरूरतफार्मा सेक्टर के विशेषज्ञों ने कहा कि केवल मौजूदा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण काफी नहीं है, बल्कि उन्हें पूरी तरह नए तरीके से डिजाइन करना होगा। इसके लिए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीकी आधार जरूरी है। नीतियों और क्रियान्वयन के बीच गैप कम करने पर जोरउद्घाटन सत्र में नीतिगत उद्देश्यों और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच मौजूद अंतर को कम करने की जरूरत बताई गई। मनोज जोशी ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले मॉडल और मजबूत सरकारी लैब नेटवर्क की वकालत की। भारत-आधारित रिसर्च मॉडल की आवश्यकताराजीव बहल ने कहा कि रिसर्च फंडिंग बढ़ने के बावजूद भारत को अपने खुद के रिसर्च मॉडल को मजबूत करना होगा, जिसमें उद्योग और शिक्षा जगत के बीच विश्वास और सहयोग बढ़े। रेगुलेटरी सिस्टम को बनाना होगा ग्लोबल स्तर काएक सत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप कुशल और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया।डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि बेहतर रेगुलेशन के लिए सभी हितधारकों की भागीदारी जरूरी है। फार्मा वैल्यू चेन में एआई की बढ़ती भूमिकातीसरे सत्र में यह सामने आया कि एआई दवा खोज से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन को बदल सकता है। इससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी और नई दवाइयों की खोज तेज होगी। CRDMO सेक्टर में भारत की मजबूत पकड़चौथे सत्र में CRDMO सेक्टर में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर का यह उद्योग 10-12% की दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक आउटसोर्सिंग की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

Android यूजर्स के लिए खुशखबरी, मिलेगा iPhone जैसा फीचर, गूगल जल्द करेगा लॉन्च

नई दिल्ली। Android स्मार्टफोन यूजर्स को जल्द ही iPhone जैसा आसान और तेज फाइल शेयरिंग अनुभव मिलने वाला है। Google एक नए फीचर ‘Tap to Share’ पर काम कर रहा है, जिससे सिर्फ दो फोन को पास लाकर तुरंत डेटा शेयर किया जा सकेगा। यह फीचर काफी हद तक NameDrop जैसा बताया जा रहा है। कैसे काम करेगा नया फीचर? Tap to Share का इस्तेमाल बेहद सरल होगा। यूजर्स को अपने दोनों Android फोन अनलॉक करके एक-दूसरे के करीब लाना होगा जैसे स्क्रीन-टू-स्क्रीन या किनारे मिलाकर। कनेक्शन बनते ही स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा, जो डेटा ट्रांसफर शुरू होने का संकेत देगा। अगर पहली बार में कनेक्शन नहीं बनता, तो यूजर्स फोन को अलग तरीके से जैसे बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग कंपनियों के फोन में NFC सेंसर की पोजिशन अलग होती है। क्या-क्या कर सकेंगे शेयर? इस फीचर के जरिए सिर्फ फोटो और वीडियो ही नहीं, बल्कि कॉन्टैक्ट, लिंक, लोकेशन और अन्य डेटा भी आसानी से शेयर किया जा सकेगा। यानी यह एक ऑल-इन-वन फाइल शेयरिंग टूल की तरह काम करेगा। शुरुआत में कनेक्शन NFC के जरिए होगा, लेकिन बड़ी फाइल्स ट्रांसफर करने के लिए यह ऑटोमैटिकली Wi-Fi या Bluetooth जैसे तेज माध्यमों का इस्तेमाल करेगा। मौजूदा सिस्टम से होगा इंटीग्रेशन Tap to Share, Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा। खासतौर पर इसे Quick Share के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे यूजर्स को और स्मूथ अनुभव मिलेगा। प्राइवेसी पर भी फोकस इस फीचर में यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलेगा कि वे कौन-सी जानकारी शेयर करना चाहते हैं जैसे फोन नंबर, ईमेल या प्रोफाइल फोटो। इससे डेटा सुरक्षा बेहतर होगी। कब तक होगा लॉन्च? हालांकि Google ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फीचर Android 17 के साथ इस साल लॉन्च हो सकता है। शुरुआती टेस्टिंग Samsung के डिवाइसेज पर देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि इसका रोलआउट जल्द शुरू हो सकता है।

बजट सेगमेंट में धमाका: Realme का नया 5G फोन शानदार फीचर्स के साथ लॉन्च

नई दिल्ली। Realme आज भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन Realme Narzo 100 Lite 5G लॉन्च करने जा रहा है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए लाया जा रहा है जो कम कीमत में बड़ी बैटरी और स्मूद परफॉर्मेंस चाहते हैं। 7000mAh बैटरी बनेगी सबसे बड़ी ताकतइस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7000mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल का भरोसा देती है। कंपनी इसमें बायपास चार्जिंग फीचर भी दे रही है, जिससे गेमिंग के दौरान फोन ज्यादा गर्म नहीं होगा। 144Hz डिस्प्ले के साथ स्मूद एक्सपीरियंसफोन में 6.8 इंच की बड़ी डिस्प्ले दी गई है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 180Hz टच सैंपलिंग रेट सपोर्ट करती है। इसके अलावा 900 निट्स की पीक ब्राइटनेस से धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देगी। दमदार प्रोसेसर और कूलिंग सिस्टमRealme Narzo 100 Lite 5G में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए बेहतर परफॉर्मेंस देगा। साथ ही इसमें एयरफ्लो वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी मिलेगा, जिससे फोन ओवरहीट नहीं होगा। कैमरा और AI फीचर्सफोन में 13 मेगापिक्सल का AI रियर कैमरा दिया गया है। इसके अलावा स्मार्ट टच 2.0 और कई AI फीचर्स भी इस डिवाइस में मिलेंगे, जो यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाएंगे। यह स्मार्टफोन IP64 रेटिंग के साथ आएगा, जिससे यह धूल और पानी से कुछ हद तक सुरक्षित रहेगा। फोन एंड्रॉयड 16 पर आधारित Realme UI 7.0 पर काम करेगा। कीमत और मुकाबलारिपोर्ट्स के अनुसार, इस फोन की कीमत ₹10,000 से ₹12,000 के बीच रखी जा सकती है। इस रेंज में यह फोन Redmi 15C 5G, POCO M7 5G और Samsung Galaxy F70e को कड़ी टक्कर दे सकता है। Realme Narzo 100 Lite 5G बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और 5G सपोर्ट के साथ बजट सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। अब यूजर्स को इसके लॉन्च के बाद कीमत और परफॉर्मेंस का इंतजार है।