लग्जरी घड़ी के लिए दुनिया में मचा बवाल, 40 हजार की वॉच पर टूटी भीड़, पुलिस तक को करना पड़ा दखल

नई दिल्ली। दिल्ली से लंदन और दुबई से न्यूयॉर्क तक 40-45 हजार रुपये की एक लग्जरी घड़ी ने ऐसा क्रेज पैदा कर दिया कि कई देशों में स्टोर्स के बाहर भीड़ बेकाबू हो गई और हालात संभालने के लिए पुलिस तक को दखल देना पड़ा। यह कोई करोड़ों की घड़ी नहीं थी, लेकिन इसके लिए लोगों की दीवानगी ऐसी थी कि कई जगह बैरिकेड टूट गए और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। दरअसल, स्विस लग्जरी वॉच ब्रांड Audemars Piguet और पॉपुलर वॉच कंपनी Swatch ने मिलकर एक खास कलेक्शन लॉन्च किया, जिसमें ऑडेमार्स पिगे के हाई-एंड डिजाइन को किफायती कीमत में पेश किया गया। इसी वजह से इसे खरीदने के लिए दुनिया भर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कंपनी ने इस वॉच की बिक्री सिर्फ चुनिंदा स्टोर्स तक सीमित रखी और ऑनलाइन सेल नहीं की, जिससे “पहले आओ पहले पाओ” की स्थिति बन गई। इसी रणनीति ने लोगों के बीच हाइप और बढ़ा दी और लॉन्च के दिन स्टोर्स के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। भारत में भी दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में लोग रातभर स्टोर्स के बाहर खड़े रहे। कई जगहों पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि बैरिकेडिंग टूट गई और स्टोर स्टाफ को स्थिति संभालनी मुश्किल हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग स्टोर्स में घुसने की कोशिश करते नजर आए। दुबई और यूरोप के कई शहरों में भी हालात बिगड़ गए। फ्रांस में तो भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस तक का इस्तेमाल करना पड़ा, जबकि लंदन और न्यूयॉर्क में भी भीड़ के चलते कुछ स्टोर्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका “लक्जरी ब्रांड” कनेक्शन माना जा रहा है। आम तौर पर ऑडेमार्स पिगे की घड़ियां बेहद महंगी होती हैं, लेकिन इस किफायती वर्जन ने लोगों को पहली बार उस ब्रांड का हिस्सा बनने का मौका दिया, जिससे इसका क्रेज और बढ़ गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस दीवानगी के पीछे सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है, जहां भीड़ और लाइन के वीडियो वायरल होते ही और ज्यादा लोग इसे खरीदने के लिए स्टोर्स की ओर दौड़ पड़े। इसके अलावा रिसेल मार्केट भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है, क्योंकि लॉन्च के तुरंत बाद ही यह घड़ी कई जगहों पर ज्यादा कीमत में बिकने लगी, जिससे इसे खरीदने वालों में मुनाफे की उम्मीद भी बढ़ गई।
Paytm का बड़ा धमाका: अब बिना बैंक अकाउंट भी बच्चे करेंगे UPI पेमेंट, पैरेंट्स रखेंगे हर खर्च पर नजर

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के दौर में अब बच्चों और किशोरों के लिए भी ऑनलाइन भुगतान करना आसान होने वाला है। देश की बड़ी फिनटेक कंपनी Paytm ने नया ‘Pocket Money’ फीचर लॉन्च किया है, जिसकी मदद से अब टीन्स बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले भी सुरक्षित तरीके से UPI पेमेंट कर सकेंगे। खास बात यह है कि इस पूरे सिस्टम का कंट्रोल माता-पिता के पास रहेगा और वे हर खर्च पर नजर रख सकेंगे। आज के समय में स्कूल, कोचिंग, कैंटीन, मेट्रो, मोबाइल रिचार्ज और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट आम हो चुका है। लेकिन ज्यादातर किशोरों के पास अपना बैंक अकाउंट नहीं होता, जिसकी वजह से उन्हें हर बार माता-पिता का फोन, OTP या QR कोड लेना पड़ता है। कई बार समय पर OTP न मिलने या फोन उपलब्ध न होने से परेशानी भी होती है। इसी दिक्कत को खत्म करने के लिए Paytm ने यह नया फीचर पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर NPCI के UPI Circle फ्रेमवर्क पर आधारित है। इसके जरिए माता-पिता अपने बैंक अकाउंट से बच्चों को सीमित और सुरक्षित UPI एक्सेस दे सकते हैं। यानी बच्चा अपने मोबाइल से सीधे QR स्कैन कर पेमेंट कर सकेगा, लेकिन खर्च की सीमा और कंट्रोल पूरी तरह पैरेंट्स के हाथ में रहेगा। इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत इसका पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम है। माता-पिता बच्चों के लिए मासिक खर्च सीमा तय कर सकते हैं। हर ट्रांजेक्शन की जानकारी रियल टाइम में उनके पास पहुंचेगी। जरूरत पड़ने पर वे तुरंत लिमिट बदल सकते हैं या UPI एक्सेस बंद भी कर सकते हैं। इससे बच्चों को डिजिटल पेमेंट की आजादी मिलेगी, लेकिन सुरक्षा और नियंत्रण बना रहेगा। Paytm ने इसमें ‘Spend Summary’ फीचर भी जोड़ा है। यह सिस्टम खर्च को अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर दिखाएगा कि पैसा सबसे ज्यादा कहां खर्च हो रहा है। इससे पैरेंट्स आसानी से समझ पाएंगे कि बच्चा फूड, ट्रांसपोर्ट, गेमिंग, रिचार्ज या शॉपिंग पर कितना खर्च कर रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने कई लिमिट्स भी तय की हैं। सेटअप के शुरुआती 30 मिनट में खर्च की अधिकतम सीमा 500 रुपये रहेगी। पहले 24 घंटे में कुल खर्च 5 हजार रुपये तक सीमित होगा। वहीं एक बार में अधिकतम 5 हजार रुपये का ही पेमेंट किया जा सकेगा। पूरे महीने में UPI खर्च की सीमा 15 हजार रुपये तय की गई है। इसके अलावा इंटरनेशनल पेमेंट और कैश निकासी जैसी सुविधाओं को पूरी तरह बंद रखा गया है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए बच्चे के फोन में स्क्रीन लॉक होना जरूरी होगा। माता-पिता अपने Paytm ऐप से कुछ ही मिनटों में Pocket Money फीचर सेटअप कर सकते हैं। इसके बाद बच्चा सीधे अपने फोन से UPI पेमेंट कर पाएगा। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के बीच यह फीचर परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इससे किशोर कम उम्र से ही जिम्मेदारी के साथ डिजिटल मनी मैनेजमेंट सीख पाएंगे और कैश पर निर्भरता भी कम होगी।
Google I/O 2026: सुंदर पिचाई के ऐलानों पर टिकी दुनिया की नजर, AI और Android में बड़े बदलाव की उम्मीद

नई दिल्ली। गूगल की सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस Google I/O 2026 को लेकर टेक दुनिया में जबरदस्त उत्साह है। यह इवेंट 19 और 20 मई 2026 को आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 30 मिनट पर होगी। पहले दिन की कीनोट स्पीच कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित Shoreline Amphitheatre में होगी, जिसे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई संबोधित करेंगे। इस इवेंट में कंपनी अपने आने वाले सॉफ्टवेयर, AI और हार्डवेयर से जुड़े कई बड़े अपडेट्स पेश कर सकती है। इस बार सबसे ज्यादा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Android इकोसिस्टम पर रहने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि गूगल अपने AI मॉडल Gemini को और ज्यादा एडवांस बनाकर नए फीचर्स के साथ पेश कर सकता है। यह भी चर्चा है कि कंपनी Gemini को सिर्फ एक AI टूल नहीं बल्कि पूरे Google इकोसिस्टम जैसे Android, Chrome, Gmail और Workspace में गहराई से इंटीग्रेट कर सकती है, जिससे यूजर्स का स्मार्टफोन और कंप्यूटर इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। Google के इस इवेंट में Android 17 को लेकर भी बड़े अपडेट्स की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अब तक का सबसे AI-सेंट्रिक Android वर्जन हो सकता है, जिसमें सिस्टम लेवल पर Gemini AI का गहरा इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है। इससे फोन सिर्फ कमांड फॉलो करने वाला डिवाइस नहीं रहेगा, बल्कि यूजर की आदतों को समझकर खुद भी काम करने में सक्षम हो सकता है। इसके साथ ही ChromeOS और Android के बीच बेहतर इंटीग्रेशन पर भी गूगल काम कर रहा है, ताकि लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन के बीच एक स्मूद और यूनिफाइड एक्सपीरियंस मिल सके। माना जा रहा है कि अगले-जेनरेशन हाइब्रिड डिवाइसेज के लिए नए सॉफ्टवेयर टूल्स भी इस इवेंट में पेश किए जा सकते हैं। हार्डवेयर सेगमेंट में भी कुछ सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि गूगल XR स्मार्ट ग्लासेस पर काम कर रहा है, जिन्हें Samsung और Xreal जैसी कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। इन डिवाइसेज में Gemini AI का सपोर्ट होने से रियल-टाइम जानकारी, नेविगेशन और ऑगमेंटेड रियलिटी एक्सपीरियंस और भी एडवांस हो सकता है। पिछले साल के Google I/O में AI Overviews और कई नए AI टूल्स ने सर्च और इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को बदल दिया था। इस बार उम्मीद है कि गूगल AI को एक कदम आगे ले जाकर “एजेंटिक AI सिस्टम” पेश कर सकता है, जो मल्टी-स्टेप टास्क खुद पूरा करने में सक्षम होगा। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि Google I/O मुख्य रूप से एक प्रेजेंटेशन इवेंट होता है, जिसमें दिखाए गए कई फीचर्स बाद में धीरे-धीरे या पूरी तरह प्रोडक्ट्स में शामिल किए जाते हैं। ऐसे में इस बार के बड़े ऐलान भी आने वाले महीनों या सालों में ही यूजर्स तक पहुंच सकते हैं। कुल मिलाकर Google I/O 2026 टेक दुनिया के लिए एक बड़ा इवेंट साबित हो सकता है, जहां AI, Android और भविष्य की कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी की दिशा तय होती दिखेगी
Zoho ने वर्क फ्रॉम होम पर क्यों लगाया पूर्ण विराम, श्रीधर वेम्बु ने बताए तकनीकी कारण!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पीएम मोदी ने हाल ही में नागरिकों और कंपनियों से ईंधन की बचत और यात्रा कम करने के लिए ऑनलाइन मीटिंग और रिमोट वर्क को बढ़ावा देने की सलाह दी थी। लेकिन इसी बीच टेक कंपनी Zoho ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्क फ्रॉम होम मॉडल को आगे नहीं बढ़ाएगी। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने अपने बयान में कहा कि कंपनी का फोकस पूरी तरह से ऑफिस-बेस्ड वर्क मॉडल पर रहेगा। उन्होंने बताया कि खासकर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) जैसे जटिल कामों में टीम का एक साथ, आमने-सामने बैठकर काम करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है। क्यों लिया गया यह फैसला? सामने आए तकनीकी कारणश्रीधर वेम्बु के अनुसार, जब टीमें एक ही स्थान पर बैठकर काम करती हैं तो समस्या-समाधान तेजी से होता है और विचारों का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से हो पाता है। उन्होंने कहा कि रिमोट वर्क के दौरान कई बार कम्युनिकेशन गैप बढ़ जाता है, जिससे किसी तकनीकी समस्या को हल करने में अधिक समय लगता है। वेम्बु ने यह भी बताया कि उनके अनुभव में ऑन-साइट टीमवर्क से इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी दोनों में सुधार देखने को मिला है। इसी वजह से कंपनी ने निर्णय लिया है कि वह पूर्ण रूप से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाने की योजना नहीं रखती। पीएम मोदी की अपील क्या थी?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग यात्रा कम करें, वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा दें और कोविड काल जैसी आदतों को फिर से अपनाएं, ताकि देश की ऊर्जा खपत और आयात पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि Zoho का यह फैसला दिखाता है कि अलग-अलग कंपनियां अपने कामकाज के हिसाब से वर्क मॉडल चुन रही हैं, और हर सेक्टर में रिमोट वर्क पूरी तरह प्रभावी नहीं माना जा रहा है, खासकर तकनीकी और डेवलपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में।
Apple ने आखिर क्यों बंद किए iPhone बॉक्स में मिलने वाले फ्री स्टिकर? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली। Apple iPhone Sticker Policy: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple ने अपने प्रोडक्ट्स के साथ लंबे समय से दी जाने वाली फ्री स्टिकर्स की परंपरा को अब खत्म कर दिया है। यह स्टिकर दशकों तक Apple की ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अहम हिस्सा रहे, लेकिन अब कंपनी ने इन्हें हटाकर पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया है। आइए समझते हैं कि आखिर Apple ने यह फैसला क्यों लिया। 1970 के दशक से शुरू हुई थी स्टिकर की कहानीApple ने अपने शुरुआती प्रोडक्ट Apple II के साथ 1970 के दशक में पहली बार रेनबो Apple लोगो वाले स्टिकर देना शुरू किया था। बाद में 1988 के आसपास कंपनी ने इन्हें सॉलिड कलर लोगो में बदल दिया। धीरे-धीरे ये स्टिकर MacBook, iPod, iPhone और iPad जैसे हर प्रोडक्ट का हिस्सा बन गए। यूजर्स इन्हें लैपटॉप, कार और बैग पर लगाकर Apple ब्रांड को प्रमोट करने लगे। Apple के लिए क्यों थे ये स्टिकर इतने खास?Apple के लिए ये सिर्फ स्टिकर नहीं बल्कि एक सस्ते लेकिन बेहद प्रभावी मार्केटिंग टूल थे। कंपनी ने बिना किसी अतिरिक्त विज्ञापन खर्च के अपने यूजर्स को ही ब्रांड एंबेसडर बना दिया था। जहां भी ये स्टिकर लगाए जाते, वहीं Apple का लोगो खुद-ब-खुद प्रमोशन करता। साथ ही, बॉक्स खोलते समय मिलने वाला यह छोटा गिफ्ट यूजर्स के लिए एक प्रीमियम एक्सपीरियंस भी बन गया था। अब क्यों बंद कर दिए गए फ्री स्टिकर?रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने 2024 के बाद से धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट बॉक्स से फ्री स्टिकर हटाने शुरू कर दिए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी का ‘कार्बन न्यूट्रल’ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी वाला लक्ष्य बताया जा रहा है। Apple अब पूरी तरह फाइबर-बेस्ड और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की ओर बढ़ रहा है। चूंकि पुराने स्टिकर प्लास्टिक आधारित थे, इसलिए इन्हें हटाना इस नई ग्रीन पॉलिसी का हिस्सा है। कुल मिलाकर, Apple का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे एक छोटे लेकिन लोकप्रिय फीचर का अंत भी हो गया है।
Earbuds का एक साइड क्यों नहीं करता काम? जानिए वजह और घर बैठे आसान तरीके से कैसे करें ठीक

नई दिल्ली। आजकल वायरलेस ईयरबड्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन कई यूजर्स एक आम समस्या से परेशान रहते हैं कि ईयरबड्स का एक साइड काम करना बंद कर देता है या जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है। अक्सर लोग इसे खराबी समझकर नया ईयरबड खरीदने की सोच लेते हैं, लेकिन कई बार इसकी वजह बहुत सामान्य होती है और इसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है। टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर वायरलेस ईयरबड्स में एक साइड “मेन ईयरबड” की तरह काम करता है, जो सीधे फोन से कनेक्शन बनाए रखता है। यही साइड कॉलिंग, माइक्रोफोन और कंट्रोल का ज्यादा इस्तेमाल संभालता है, जिससे उस पर ज्यादा लोड पड़ता है और उसकी बैटरी दूसरे ईयरबड की तुलना में जल्दी खत्म होने लगती है। इसके अलावा अगर कोई यूजर अक्सर सिर्फ एक ही ईयरबड का इस्तेमाल करता है, तो उस साइड की बैटरी समय के साथ जल्दी कमजोर हो सकती है। इसके अलावा एक और बड़ी वजह बैटरी की उम्र भी होती है। जैसे-जैसे ईयरबड्स पुरानी होते जाते हैं, उनकी छोटी बैटरियों की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे एक साइड पहले डिस्चार्ज होने लगता है या ठीक से काम नहीं करता। कई बार समस्या ईयरबड में नहीं बल्कि उसकी चार्जिंग में भी होती है। ईयरबड के चार्जिंग पिन या केस में धूल, गंदगी या ईयरवैक्स जमा हो जाता है, जिससे एक ईयरबड ठीक से चार्ज नहीं हो पाता। ऐसे में वह डेड दिखने लगता है। इस स्थिति में ईयरबड और चार्जिंग केस को साफ, सूखे और मुलायम कपड़े या कॉटन स्वैब से हल्के हाथों से साफ करना चाहिए। ध्यान रखना जरूरी है कि पानी का इस्तेमाल न किया जाए। इसके बाद दोनों ईयरबड्स को चार्जिंग केस में रखकर रीसेट करना भी एक असरदार तरीका है। कई कंपनियों के ईयरबड्स में रीसेट या री-पेयरिंग का ऑप्शन होता है, जिससे कनेक्शन और सिंकिंग से जुड़ी समस्याएं ठीक हो जाती हैं। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स को चेक करना जरूरी है। कई बार फोन में ईयरबड को “Forget Device” करके दोबारा पेयर करने से ऑडियो और बैटरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म हो जाती हैं। साथ ही फोन और ईयरबड दोनों के सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर अपडेट करना भी फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईयरबड्स की बैटरी लाइफ को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ गलतियों से बचना चाहिए, जैसे उन्हें पूरी रात चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना, बहुत गर्म जगह पर इस्तेमाल करना या हमेशा एक ही ईयरबड का लगातार उपयोग करना। दोनों ईयरबड्स का बराबर इस्तेमाल करने से उनकी बैटरी बैलेंस बनी रहती है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है। इस तरह थोड़ी सावधानी और आसान ट्रिक्स अपनाकर ईयरबड्स की ज्यादातर आम समस्याओं को घर बैठे ही ठीक किया जा सकता है और नए खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
Realme 16T भारत में 22 मई को होगा लॉन्च, 8000mAh बैटरी और 3 दिन बैकअप का दावा, कीमत ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली। रियलमी 22 मई 2026 को भारत में अपना नया स्मार्टफोन Realme 16T लॉन्च करने जा रही है, जो लॉन्च से पहले ही अपनी बैटरी और फीचर्स को लेकर चर्चा में आ गया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8000mAh की दमदार बैटरी बताई जा रही है, जिसे लेकर कंपनी दावा कर रही है कि यह एक बार चार्ज करने पर करीब तीन दिन तक चल सकती है। यानी यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की टेंशन से काफी हद तक राहत मिल सकती है। लॉन्च से ठीक पहले सामने आई लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक Realme 16T के रिटेल बॉक्स पर इसकी MRP ₹55,999 दिखाई गई है, हालांकि माना जा रहा है कि असल बिक्री कीमत इससे काफी कम यानी लगभग ₹20,000 से ₹25,000 के बीच हो सकती है। कंपनी इसे बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में आक्रामक कीमत के साथ पेश कर सकती है। फोन के फीचर्स की बात करें तो इसमें MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ मीडियम लेवल गेमिंग और स्ट्रीमिंग को आसानी से संभाल सकता है। इसके साथ 8GB रैम दी गई है, जिसे रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से 10GB तक बढ़ाया जा सकता है। डिस्प्ले के तौर पर इसमें 6.8 इंच का बड़ा LCD पैनल दिया गया है, जो वीडियो देखने और गेमिंग के लिए अच्छा एक्सपीरियंस दे सकता है, हालांकि इसमें AMOLED जैसी प्रीमियम क्वालिटी नहीं मिलेगी। कैमरा सेटअप में पीछे की तरफ 50MP का मेन सेंसर और 2MP का सेकेंडरी लेंस दिया गया है, जबकि फ्रंट में 16MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है। कैमरा को और बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने इसमें Sony IMX852 सेंसर और AI बेस्ड LumaColor Image Engine जैसे फीचर्स शामिल किए हैं, जो कम रोशनी में भी बेहतर फोटो क्लिक करने में मदद करते हैं। इसके साथ AI Portrait Glow और अन्य क्रिएटिव AI फीचर्स भी दिए गए हैं। डिजाइन के मामले में फोन को स्लिम रखा गया है, जिसकी मोटाई लगभग 8.8mm बताई जा रही है, जबकि इतनी बड़ी बैटरी होने के बावजूद यह हैंडसेट हल्का और पोर्टेबल रहने का दावा करता है। इसके अलावा 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे बैटरी तेजी से चार्ज हो सकेगी। फोन में रियर सेल्फी मिरर और AI Popout Collage जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जो इसे युवाओं के लिए और आकर्षक बनाते हैं। खास बात यह है कि इसमें 11 घंटे तक BGMI गेमिंग का भी सपोर्ट बताया जा रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल इसकी कीमत को लेकर है, क्योंकि बॉक्स पर ₹55,999 MRP दिखने के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फोन असल में मिड-रेंज सेगमेंट में लॉन्च होगा। ऐसे में Realme 16T भारतीय बाजार में बैटरी और AI फीचर्स के दम पर एक मजबूत विकल्प बन सकता है।
AI से नौकरी पर बड़ा खतरा! Anthropic CEO की चेतावनी- खत्म हो सकती हैं लाखों एंट्री लेवल जॉब्स

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती ताकत अब नौकरीपेशा लोगों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। AI कंपनी Anthropic के CEO Dario Amodei ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI लाखों एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खत्म कर सकता है। उनका कहना है कि फाइनेंस, टेक, कंसल्टिंग और एडमिनिस्ट्रेशन जैसे सेक्टर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। एक इंटरव्यू में डारियो एमोदेई ने कहा कि पिछले दो वर्षों में AI की क्षमता बेहद तेजी से बढ़ी है। उनके मुताबिक, जो AI पहले एक होशियार हाई स्कूल स्टूडेंट के स्तर पर काम करता था, वह अब एक स्मार्ट कॉलेज स्टूडेंट जैसी क्षमता हासिल कर चुका है। AI अब डॉक्यूमेंट समरी, डेटा एनालिसिस, रिसर्च, ब्रेनस्टॉर्मिंग और फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करने जैसे जटिल काम तेजी से सीख रहा है। एमोदेई ने कहा कि शुरुआती दौर में AI इंसानों की मदद करेगा, लेकिन बहुत जल्द कई जगह पूरी तरह उनकी जगह लेने लगेगा। खास तौर पर एंट्री-लेवल नौकरियों पर इसका सबसे बड़ा असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले 1 से 5 वर्षों के भीतर नौकरी बाजार में बड़े बदलाव दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि AI की रफ्तार को रोकना अब लगभग असंभव है, क्योंकि यह केवल एक कंपनी या देश तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के कारण AI डेवलपमेंट लगातार तेज हो रहा है। एमोदेई के अनुसार, अगर अमेरिकी कंपनियां काम धीमा भी कर दें, तब भी चीन जैसी शक्तियां इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ती रहेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते सही कदम उठाए जाएं तो इस संकट के असर को कम किया जा सकता है। इसके लिए लोगों को AI टूल्स का इस्तेमाल सिखाना जरूरी होगा, ताकि वे नई तकनीक के साथ खुद को ढाल सकें। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में AI कंपनियों पर विशेष टैक्स लगाया जा सकता है, जिससे उन लोगों की मदद की जा सके जिनकी नौकरियां AI की वजह से प्रभावित होंगी।
AC-फ्रिज पर संकट! सरकार की सख्ती से कंपनियों में हड़कंप, गर्मी में बढ़ सकती है किल्लत और कीमतें

नई दिल्ली। भीषण गर्मी के बीच देश में AC और फ्रिज की सप्लाई पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। केंद्र सरकार द्वारा एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर में इस्तेमाल होने वाले सबसे अहम पार्ट ‘कंप्रेसर’ के आयात पर सख्ती बढ़ाने के बाद बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने चेतावनी दी है कि बाजार में कूलिंग अप्लायंसेज की कमी हो सकती है। LG, Samsung और Blue Star जैसी कंपनियों का कहना है कि अगर आयात पर प्रतिबंध इसी तरह जारी रहा तो आने वाले महीनों में ग्राहकों को AC और फ्रिज के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है, वहीं कई मॉडल बाजार से गायब भी हो सकते हैं। दरअसल कंप्रेसर किसी भी AC या फ्रिज का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है। जैसे स्मार्टफोन में प्रोसेसर काम करता है, उसी तरह कंप्रेसर कूलिंग सिस्टम की पूरी क्षमता को नियंत्रित करता है। बिना कंप्रेसर के AC और फ्रिज काम ही नहीं कर सकते। सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए आयात कम करना चाहती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि भारत में फिलहाल इतनी उत्पादन क्षमता मौजूद नहीं है कि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के मुताबिक अचानक आयात सीमित होने से प्रोडक्शन यूनिट्स में जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो सकती है। इससे नई मशीनों की असेंबलिंग प्रभावित होगी और बाजार में सप्लाई घट सकती है। कंपनियों ने यह भी कहा कि नए वेंडर्स या घरेलू सप्लायर को शामिल करना आसान नहीं होता। किसी भी नए कंप्रेसर को इस्तेमाल करने से पहले लंबी टेस्टिंग, सेफ्टी चेक, एफिशिएंसी टेस्ट और लैब सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई महीने लग सकते हैं। इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर आम ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है। खासकर 5-स्टार इनवर्टर AC, स्मार्ट रेफ्रिजरेटर और AI आधारित कूलिंग अप्लायंसेज की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। कंपनियों का कहना है कि लॉजिस्टिक्स खर्च, नए सप्लायर्स की टेस्टिंग और सीमित स्टॉक के कारण कीमतें बढ़ेंगी। ऐसे में इस गर्मी ग्राहकों को न सिर्फ ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं, बल्कि पसंद के मॉडल मिलने में भी दिक्कत आ सकती है।
Motorola का बड़ा धमाका: भारत में लॉन्च हुए Moto G37 और G37 Power, 7,000mAh बैटरी और 13,999 रुपये से शुरू कीमत

नई दिल्ली। Motorola ने भारत में अपने दो नए बजट स्मार्टफोन Moto G37 और Moto G37 Power लॉन्च कर दिए हैं। कंपनी ने इन दोनों एंट्री-लेवल फोन्स को खासतौर पर कम कीमत में दमदार बैटरी और बेहतर परफॉर्मेंस चाहने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किया है। इनकी शुरुआती कीमत 13,999 रुपये रखी गई है और 25 मई से इनकी सेल शुरू होगी, जिसमें ग्राहकों को इंस्टेंट डिस्काउंट का भी फायदा मिलेगा। कीमत की बात करें तो Moto G37 का एक ही वेरिएंट लॉन्च किया गया है, जिसमें 4GB रैम और 64GB स्टोरेज मिलता है और इसकी कीमत 13,999 रुपये है। वहीं Moto G37 Power दो वेरिएंट में आता है, जिसमें 4GB + 128GB मॉडल की कीमत 15,999 रुपये और 8GB + 128GB मॉडल की कीमत 18,999 रुपये रखी गई है। दोनों फोन कई कलर ऑप्शन में उपलब्ध होंगे। फीचर्स की बात करें तो दोनों स्मार्टफोन कई मामलों में समान हैं। इनमें 6.6 इंच की HD+ LCD डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 720 x 1604 पिक्सल और 120Hz रिफ्रेश रेट है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन दिया गया है। परफॉर्मेंस के लिए दोनों डिवाइस में MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर दिया गया है और ये Android 16 पर रन करते हैं। कैमरा सेटअप की बात करें तो दोनों फोन्स में डुअल रियर कैमरा सिस्टम दिया गया है, जिसमें 50MP का मेन कैमरा और 2-इन-1 लाइट सेंसर शामिल है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। कैमरा सेटअप को बेसिक लेकिन क्लियर फोटोग्राफी के लिए डिजाइन किया गया है। Made for the ones who don’t slow down. Starting at just ₹13,999, the moto g37 and moto g37 power is ready when you are. Sale starts 25th May on Flipkart, https://t.co/azcEfy2uaW and leading retail stores. pic.twitter.com/uNwcPZqMeN — Motorola India (@motorolaindia) May 19, 2026 बैटरी इन दोनों फोन्स का सबसे बड़ा हाईलाइट है। Moto G37 में 5,200mAh बैटरी दी गई है जो 20W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है, जबकि Moto G37 Power में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जो 30W फास्ट चार्जिंग के साथ आती है। इसके अलावा दोनों फोन 6W रिवर्स चार्जिंग को भी सपोर्ट करते हैं, जिससे ये दूसरे डिवाइसेज को चार्ज करने में भी इस्तेमाल हो सकते हैं। कनेक्टिविटी के लिए दोनों स्मार्टफोन में 5G सपोर्ट, Wi-Fi 5, Bluetooth 5.4, GPS, USB Type-C और 3.5mm हेडफोन जैक दिया गया है। डिजाइन की बात करें तो Moto G37 का वजन 191 ग्राम है जबकि Moto G37 Power थोड़ा भारी 215 ग्राम के साथ आता है, क्योंकि इसमें बड़ी बैटरी दी गई है। लॉन्च ऑफर्स के तहत कंपनी ICICI, SBI और IDFC बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर 5,000 रुपये तक का इंस्टेंट डिस्काउंट दे रही है। वहीं EMI विकल्प पर खरीदने पर 5,500 रुपये तक की छूट भी मिल सकती है। ये दोनों स्मार्टफोन Flipkart, Motorola की ऑफिशियल वेबसाइट और ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर 25 मई से उपलब्ध होंगे।