Amazon Fire TV Stick HD लॉन्च: पुराने टीवी को बनाएगा स्मार्ट, 30 गुना फास्ट स्पीड और नए फीचर्स के साथ आया नया डिवाइस

नई दिल्ली। Amazon ने भारत में अपनी नई Fire TV Stick HD लॉन्च कर दी है, जिसे कंपनी अब तक की सबसे स्लिम और फास्ट स्ट्रीमिंग स्टिक बता रही है। यह डिवाइस पुराने नॉन-स्मार्ट टीवी को स्मार्ट टीवी में बदलने के लिए डिजाइन की गई है और इसे सीधे टीवी के HDMI पोर्ट में लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह पिछली जेनरेशन की तुलना में 30 गुना तेज है, जिससे ऐप्स तेजी से ओपन होते हैं और वीडियो स्ट्रीमिंग स्मूद रहती है। इस नए मॉडल की कीमत भारत में 4,999 रुपये रखी गई है। इसे Amazon.in के अलावा Blinkit, Swiggy Instamart, Zepto और Flipkart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से भी खरीदा जा सकता है। जल्द ही यह ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर भी उपलब्ध होगी। फीचर्स की बात करें तो Fire TV Stick HD में Wi-Fi 6 सपोर्ट और Full HD स्ट्रीमिंग की सुविधा दी गई है। इससे कमजोर इंटरनेट कनेक्शन में भी वीडियो कम रुकावट के साथ चलने का दावा किया गया है। इसका डिजाइन पहले से ज्यादा पतला और पोर्टेबल बताया गया है, जो पिछले मॉडल की तुलना में लगभग 30% स्लिम है। यह स्टिक बिना अलग पावर एडॉप्टर के भी काम कर सकती है, क्योंकि इसे सीधे टीवी के USB पोर्ट से पावर मिल सकती है। इसके नए सॉफ्टवेयर इंटरफेस को और ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाया गया है, जिसमें फिल्में, टीवी शो, लाइव और फ्री कंटेंट के लिए अलग-अलग सेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा इसमें Alexa सपोर्ट भी मिलता है, जिससे यूजर्स टीवी के साथ-साथ स्मार्ट होम डिवाइसेज जैसे AC, गीजर, पंखे और लाइट्स को भी वॉयस कमांड से कंट्रोल कर सकते हैं। कंपनी ने इसमें पहली बार क्लाउड गेमिंग का सपोर्ट भी जोड़ा है, जिससे यूजर्स गेमिंग का अनुभव भी ले सकते हैं। यह डिवाइस खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास अभी नॉन-स्मार्ट टीवी है या जो कम बजट में अपने पुराने टीवी को अपग्रेड करना चाहते हैं। इसके जरिए बिना नया स्मार्ट टीवी खरीदे स्ट्रीमिंग और स्मार्ट फीचर्स का अनुभव लिया जा सकता है।
OTT पर फ्री टीवी चैनलों पर रोक लगेगी? TRAI की समीक्षा से केबल–DTH और डिजिटल प्लेटफॉर्म में टकराव तेज

नई दिल्ली। भारत में फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) और OTT प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे लाइव टीवी चैनलों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केबल और DTH ऑपरेटर्स का कहना है कि Tata Play, Airtel Digital TV और अन्य पारंपरिक सेवाओं के ग्राहक तेजी से कम हो रहे हैं क्योंकि वही टीवी चैनल और कंटेंट अब इंटरनेट पर फ्री में उपलब्ध हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2022 में जहां DTH ग्राहकों की संख्या 6.66 करोड़ थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर लगभग 5.09 करोड़ रह गई। कंपनियों का आरोप है कि OTT प्लेटफॉर्म्स बिना भारी लाइसेंस फीस के वही कंटेंट दे रहे हैं, जो केबल और DTH पर भुगतान के साथ मिलता है। इसी वजह से वे मांग कर रहे हैं कि इंटरनेट टीवी प्लेटफॉर्म्स पर भी करीब 10 करोड़ रुपये तक की लाइसेंसिंग फीस और समान नियम लागू किए जाएं। वहीं दूसरी तरफ OTT और डिजिटल कंपनियों का तर्क है कि यह प्लेटफॉर्म टीवी ब्रॉडकास्ट नहीं बल्कि इंटरनेट आधारित सेवाएं हैं। Jio Platforms, JioStar और अन्य डिजिटल इकाइयों का कहना है कि पुराने केबल नियमों को इंटरनेट युग पर लागू करना गलत होगा। उनके अनुसार FAST चैनल्स टीवी नहीं बल्कि ऐप-आधारित स्ट्रीमिंग हैं, जिन्हें अलग कानूनी ढांचे में देखा जाना चाहिए। इसी विवाद में अब टीवी निर्माता कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ स्मार्ट टीवी में ऐप्स उपलब्ध कराते हैं, कंटेंट की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। भारत में करोड़ों लोग कनेक्टेड टीवी और मोबाइल पर फ्री लाइव चैनल देखते हैं, ऐसे में अगर TRAI केबल कंपनियों के पक्ष में फैसला देता है, तो कई फ्री OTT लाइव टीवी चैनल और स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है या उन्हें पेड मॉडल में बदलना पड़ सकता है। अब सबकी नजर TRAI के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भारत में डिजिटल टीवी और पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
Undersea Internet Cable पर ईरान की नजर! WhatsApp, Netflix और Google सेवाओं पर मंडरा सकता है खतरा

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया के इंटरनेट नेटवर्क पर भी खतरा गहराने लगा है। तेल सप्लाई और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से जारी विवाद के बीच ईरान ने अब समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका असर दुनिया भर में इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान उन अंडरसी इंटरनेट केबलों पर फीस लगाने की तैयारी कर रहा है, जो होर्मुज स्ट्रेट के नीचे से होकर गुजरती हैं। यही केबल एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच इंटरनेट डेटा ट्रांसफर का बड़ा माध्यम हैं। इनसे ही Google, Meta, Amazon और Microsoft जैसी कंपनियों की सेवाएं संचालित होती हैं। ईरान ने दी इंटरनेट केबल फीस की चेतावनीईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिया कि समुद्र के नीचे मौजूद इंटरनेट केबल नेटवर्क पर नियम और शुल्क लागू किए जा सकते हैं। इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े चैनलों ने कहा कि इन केबलों के ऑपरेटर्स को ईरानी कानूनों का पालन करना होगा और लाइसेंस फीस भी देनी पड़ सकती है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन केबलों की मरम्मत और रखरखाव का काम केवल ईरानी कंपनियों को दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। WhatsApp से Netflix तक सेवाएं हो सकती हैं प्रभावितसमुद्र के नीचे बिछे ये फाइबर ऑप्टिक केबल दुनिया के इंटरनेट ट्रैफिक की रीढ़ माने जाते हैं। इंस्टाग्राम रील्स, WhatsApp चैट, Netflix स्ट्रीमिंग, Google सर्च और Amazon क्लाउड सेवाएं काफी हद तक इन्हीं नेटवर्क्स पर निर्भर करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर इन केबलों पर कोई तकनीकी बाधा या राजनीतिक नियंत्रण बढ़ता है तो इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है, डेटा ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है और कई ऑनलाइन सेवाओं में रुकावट आ सकती है। भारत पर क्या पड़ेगा असर?भारत का इंटरनेट ट्रैफिक भी बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व से गुजरने वाले अंडरसी केबल नेटवर्क पर निर्भर करता है। अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबलों के रखरखाव में दिक्कत आती है, तो भारत में इंटरनेट स्पीड प्रभावित हो सकती है। खासकर इंटरनेशनल वेबसाइट्स, क्लाउड सर्विसेज और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर असर देखने को मिल सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के नीचे केबलों की मरम्मत बेहद संवेदनशील काम होता है। मरम्मत जहाजों को कई घंटों या दिनों तक एक ही जगह स्थिर रहना पड़ता है, जो संघर्ष वाले इलाकों में जोखिम भरा बन जाता है। कौन-कौन से केबल प्रभावित हो सकते हैं?रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कंपनियां सुरक्षा कारणों से ईरानी समुद्री क्षेत्र से दूरी बनाकर ओमान की तरफ से केबल बिछाती हैं। हालांकि Falcon और Gulf Bridge International (GBI) जैसे दो बड़े केबल सिस्टम अब भी ईरान के आसपास के क्षेत्र से गुजरते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ा तो वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है और डिजिटल सेवाओं की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
UPI Soundbox में बड़ा बदलाव! अब PhonePe-Paytm समेत सभी ऐप्स के लिए चलेगा एक ही डिवाइस

नई दिल्ली। देशभर के दुकानदारों के लिए जल्द बड़ी राहत आने वाली है। अब अलग-अलग UPI ऐप्स के लिए अलग साउंडबॉक्स रखने की जरूरत खत्म हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, National Payments Corporation of India यानी NPCI एक ऐसा कॉमन इंटरऑपरेबल साउंडबॉक्स सिस्टम तैयार कर रहा है, जो PhonePe, Paytm, BharatPe समेत सभी UPI ऐप्स के पेमेंट को सपोर्ट करेगा। अभी दुकानदारों को हर कंपनी का अलग QR कोड और अलग साउंडबॉक्स रखना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर Paytm से पेमेंट आने पर सिर्फ Paytm साउंडबॉक्स आवाज देता है, जबकि PhonePe पेमेंट के लिए अलग डिवाइस की जरूरत होती है। इससे छोटे व्यापारियों का खर्च बढ़ जाता है और दुकानों पर कई डिवाइस संभालना भी मुश्किल होता है। एक साउंडबॉक्स में सभी ऐप्स का पेमेंट अलर्टनई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी कंपनी के QR कोड से पेमेंट होने पर उसी एक डिवाइस में आवाज सुनाई देगी। यानी ग्राहक चाहे PhonePe से भुगतान करे, Paytm से या BharatPe से, दुकानदार को अलग-अलग डिवाइस रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक NPCI ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, जिससे सभी UPI नेटवर्क एक साथ काम कर सकें। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम और आसान और सस्ता हो जाएगा। दुकानदारों का खर्च होगा कमफिलहाल व्यापारियों को हर साउंडबॉक्स के लिए लगभग 100 से 150 रुपये मासिक शुल्क देना पड़ता है। कई दुकानदार 2-3 कंपनियों के साउंडबॉक्स रखते हैं, जिससे खर्च बढ़ जाता है। अगर एक ही डिवाइस सभी ऐप्स के लिए काम करेगा, तो मासिक खर्च में बड़ी बचत हो सकती है। अभी शुरुआती चरण में है योजनामीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार NPCI और पेमेंट कंपनियों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआती बातचीत हो चुकी है। हालांकि फिलहाल इसकी लॉन्च डेट तय नहीं हुई है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और कंपनियों के बीच इंटीग्रेशन में अभी कुछ समय लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सिस्टम लागू होता है, तो भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे छोटे दुकानदारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा और UPI भुगतान पहले से ज्यादा आसान बन जाएगा।
Gadgets News 18 May: महंगे हुए Realme फोन, Motorola Edge 70 Pro+ की एंट्री तय, Xiaomi 17T की लॉन्च डेट भी आई सामने

नई दिल्ली। स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां Motorola और Xiaomi अपने नए स्मार्टफोन्स लॉन्च करने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर Realme ने ग्राहकों को बड़ा झटका देते हुए अपने कई स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। मई 2026 के दूसरे पखवाड़े में टेक मार्केट में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं और कंपनियां नए फीचर्स के साथ यूजर्स को आकर्षित करने में जुटी हैं। 28 मई को लॉन्च होगी Xiaomi 17T Seriesचीनी टेक कंपनी Xiaomi ने अपनी अपकमिंग Xiaomi 17T सीरीज की ग्लोबल लॉन्च डेट का ऐलान कर दिया है। कंपनी के मुताबिक यह सीरीज 28 मई 2026 को ग्लोबल मार्केट में लॉन्च होगी। लॉन्च से पहले फोन का डिजाइन और कुछ अहम फीचर्स भी सामने आ चुके हैं। लीक जानकारी के अनुसार Xiaomi 17T Pro में 6.83 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलेगा, जिसका रिफ्रेश रेट 144Hz तक हो सकता है। फोन में 7000mAh की दमदार बैटरी दिए जाने की चर्चा है। वहीं स्टैंडर्ड Xiaomi 17T मॉडल में 6500mAh बैटरी और MediaTek Dimensity 8500 Ultra प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है। कैमरा सेगमेंट की बात करें तो दोनों मॉडल्स में 5x ऑप्टिकल जूम वाला टेलीफोटो कैमरा देखने को मिल सकता है। कंपनी ने कैमरा मॉड्यूल का डिजाइन भी रिवील कर दिया है, जिसमें ट्रिपल कैमरा सेटअप नजर आ रहा है। भारत में जल्द लॉन्च होगा Motorola Edge 70 Pro+इधर Motorola ने भी अपने नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Pro+ की लॉन्चिंग को टीज कर दिया है। कंपनी ने भारत में फोन के लिए माइक्रोसाइट लाइव कर दी है, जिससे साफ हो गया है कि इसकी एंट्री जल्द होने वाली है। फोन को भारत में ब्राउन और रेड कलर ऑप्शन में पेश किया जा सकता है। साथ ही यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। हालांकि कंपनी ने अभी आधिकारिक लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इसकी घोषणा की जा सकती है। Realme ने फिर बढ़ाए स्मार्टफोन के दामवहीं Realme ने ग्राहकों को बड़ा झटका देते हुए अपने कई स्मार्टफोन्स की कीमतों में इजाफा कर दिया है। मेमोरी चिप और दूसरे कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने के कारण कंपनी ने Realme 16 Pro और Realme 16 Pro+ की कीमतें फिर बढ़ा दी हैं। realme has hiked prices across the entire 16 series in India starting today. realme 16 Pro 5G: ₹38,999→₹39,999 (+₹1k) / ₹41,999→₹42,999 (+₹1k) realme 16 Pro+ 5G: ₹44,999→₹46,999 (+₹2k) / ₹46,999→₹48,999 (+₹2k) / ₹49,999→₹52,999 (+₹3k) realme 16 5G:… pic.twitter.com/vVjgnfXIjq — Abhishek Yadav (@yabhishekhd) May 18, 2026 रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग मॉडल्स पर 1000 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। खास बात यह है कि Realme 16 Pro+ अब अपनी लॉन्च कीमत से करीब 7000 रुपये ज्यादा महंगा हो चुका है। नई कीमतें 18 मई 2026 से लागू कर दी गई हैं। इसके अलावा हाल ही में लॉन्च हुए Realme 16 5G की कीमत में भी पहली बार इजाफा किया गया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में स्मार्टफोन खरीदना और महंगा हो सकता है।
Dome Vs Turret Vs Bullet CCTV Camera: घर के किस हिस्से में कौन सा कैमरा लगाना चाहिए, खरीदने से पहले जानें सही जानकारी!

नई दिल्ली। अगर आप अपने घर की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ कैमरा खरीद लेना काफी नहीं है। घर के हर हिस्से के लिए अलग प्रकार का कैमरा ज्यादा बेहतर काम करता है। सही कैमरा सही जगह लगाने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। घर के अंदर के लिए Dome Camera सबसे बेहतरडोम CCTV कैमरा इनडोर सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसका गोल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन इसे छत या दीवार में आसानी से फिट कर देता है, जिससे यह ज्यादा दिखाई भी नहीं देता। यह कैमरा कमरों, हॉल, गलियारों और ढके हुए गैरेज जैसे स्थानों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका वाइड एंगल कवरेज पूरे कमरे को कवर करने में मदद करता है। आंगन और एंट्री पॉइंट के लिए Turret Camera सही विकल्पटरेट कैमरा, जिसे आईबॉल कैमरा भी कहा जाता है, आधुनिक घरों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह खासतौर पर घर के आंगन, मुख्य गेट, ड्राइववे और साइड एंट्री जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साफ विज़न और बेहतर नाइट विज़न देता है, साथ ही रिफ्लेक्शन की समस्या भी कम होती है। लंबी दूरी की निगरानी के लिए Bullet Camera बेस्टबुलेट कैमरा लंबी दूरी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग आमतौर पर बड़े यार्ड, खुले मैदान, फार्म हाउस और सड़क की ओर फेसिंग एरिया में किया जाता है। इसका लंबा आकार और मजबूत डिजाइन दूर तक निगरानी करने में मदद करता है और बाहरी सुरक्षा के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। घर की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कैमरे का सही चयन जरूरी है।घर के अंदर: Dome Camera आंगन और गेट: Turret Camera बड़े खुले एरिया: Bullet Camera सही जगह सही कैमरा लगाने से आपके घर की सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत हो जाती है।
WiFi vs LiFi: इंटरनेट की दुनिया में नई क्रांति! जानिए WiFi और LiFi में क्या है बड़ा फर्क

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर, ऑफिस, स्कूल या मनोरंजन हर जगह तेज इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। अब तक ज्यादातर लोग WiFi का इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन अब LiFi नाम की नई टेक्नोलॉजी तेजी से चर्चा में है। दोनों तकनीकें वायरलेस इंटरनेट देती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। WiFi रेडियो वेव्स यानी रेडियो सिग्नल के जरिए डेटा ट्रांसफर करता है। यही वजह है कि इसका नेटवर्क दीवारों के पार भी पहुंच जाता है और पूरे घर या ऑफिस में इंटरनेट आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी तरफ LiFi यानी Light Fidelity इंटरनेट पहुंचाने के लिए LED लाइट का इस्तेमाल करता है। इसमें बल्ब बेहद तेजी से ऑन-ऑफ होकर डेटा ट्रांसफर करता है, जिसे इंसानी आंखें पहचान नहीं पातीं। LiFi को इंटरनेट की अगली पीढ़ी की तकनीक माना जा रहा है क्योंकि इसकी स्पीड WiFi से कई गुना ज्यादा हो सकती है। साथ ही यह ज्यादा सुरक्षित भी माना जाता है, क्योंकि इसका सिग्नल कमरे की रोशनी तक सीमित रहता है और बाहर आसानी से नहीं पहुंचता। हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जहां रोशनी नहीं पहुंचेगी, वहां इंटरनेट भी काम नहीं करेगा। WiFi जहां घरों, दुकानों और ऑफिसों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, वहीं LiFi का इस्तेमाल अस्पतालों, रिसर्च सेंटर और एयरक्राफ्ट जैसी जगहों पर ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, जहां रेडियो सिग्नल से दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। फिलहाल LiFi नई तकनीक है और इसका इस्तेमाल सीमित है, लेकिन आने वाले समय में WiFi और LiFi मिलकर इंटरनेट की दुनिया को और ज्यादा तेज, सुरक्षित और स्मार्ट बना सकते हैं।
PM मोदी की अपील के बाद बड़ा बदलाव, गैस चूल्हे की जगह इंडक्शन स्टोव को बढ़ावा देने की तैयारी

नई दिल्ली। पीएम मोदी की तेल और गैस बचाने की अपील के बाद केंद्र सरकार अब रसोई में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। सरकार की योजना देशभर में LPG की निर्भरता कम करने के लिए इंडक्शन कुकटॉप को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की है। इसके लिए एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने नेशनल एफिशिएंट कुकिंग प्रोग्राम के तहत लाखों इंडक्शन स्टोव उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक EESL ने पहले चरण में करीब 2 लाख इंडक्शन कुकटॉप के लिए टेंडर जारी किया है, जो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। आगे चलकर सरकार की योजना इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की है, जिसमें 60 से 80 लाख यूनिट तक इंडक्शन स्टोव खरीद और वितरण का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसका मकसद बिजली आधारित खाना पकाने को बढ़ावा देकर एलपीजी की खपत पर दबाव कम करना है। सरकार पहले भी LED बल्ब योजना के जरिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा बचत अभियान चला चुकी है, जिससे कीमतें कम हुई थीं और इस्तेमाल बढ़ा था। अब उसी मॉडल को इंडक्शन कुकटॉप पर लागू करने की तैयारी है ताकि घरेलू कुकिंग सिस्टम धीरे-धीरे हाईटेक और इलेक्ट्रिक आधारित बन सके। हालांकि इस बदलाव की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आयातित एलपीजी व कच्चे तेल पर बढ़ता दबाव भी माना जा रहा है। फिलहाल सरकार का फोकस ऊर्जा बचत, लागत में कमी और घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग को मजबूत बनाने पर है। टैग:इंडक्शन चूल्हा,PM मोदी,सरकारी योजना,EESL,एलपीजी,ऊर्जा बचत,LED योजना,भारत सरकार,हाईटेक किचन,इलेक्ट्रिक कुकिंग
OnePlus Pad 4 Review 2026: स्लिम डिजाइन, पावरफुल परफॉर्मेंस और लैपटॉप का दम, क्या सच में PC को कर देता है रिप्लेस?

नई दिल्ली। OnePlus Pad 4 को कंपनी ने एक ऐसे प्रीमियम टैबलेट के तौर पर पेश किया है, जो न सिर्फ एंटरटेनमेंट बल्कि प्रोडक्टिविटी के मामले में भी लैपटॉप को कड़ी टक्कर देता है। 5.94mm की अल्ट्रा-स्लिम बॉडी, 3.4K 144Hz डिस्प्ले और Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर के साथ यह डिवाइस हाई-एंड यूजर्स को टारगेट करता है। डिजाइन की बात करें तो OnePlus Pad 4 बेहद प्रीमियम फील देता है। मेटल यूनिबॉडी और करीब 664 ग्राम वजन इसे पोर्टेबल और स्टाइलिश दोनों बनाते हैं। कैफे हो या ऑफिस मीटिंग, यह टैबलेट हाथ में एक फ्लैगशिप डिवाइस का अहसास कराता है। डिस्प्ले इसकी सबसे बड़ी ताकत है। 13.2-इंच की 3.4K स्क्रीन 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ बेहद स्मूद एक्सपीरियंस देती है। Netflix, गेमिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट में इसका विजुअल आउटपुट काफी शार्प और कलरफुल नजर आता है। साथ ही 8 स्पीकर सिस्टम इसे एक पावरफुल एंटरटेनमेंट डिवाइस बना देता है। परफॉर्मेंस के मामले में यह टैबलेट काफी मजबूत साबित होता है। Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट के साथ मल्टीटास्किंग, गेमिंग और वीडियो एडिटिंग जैसे काम बिना किसी लैग के आसानी से हो जाते हैं। OxygenOS 16 (Android 16 आधारित) बड़े स्क्रीन यूज के लिए ऑप्टिमाइज्ड है, जिससे स्प्लिट स्क्रीन और फ्लोटिंग विंडो जैसे फीचर्स बेहद आसान हो जाते हैं। Stylo Pro सपोर्ट इसे क्रिएटिव यूजर्स के लिए और खास बनाता है। नोट्स लेने और ड्राइंग के दौरान इसका रिस्पॉन्स काफी स्मूद और प्रिसाइज है, जिससे यह स्टूडेंट्स और आर्टिस्ट्स के लिए उपयोगी बन जाता है। बैटरी इसकी एक और बड़ी खासियत है। 13,380mAh की बैटरी लंबे समय तक चलती है और 80W फास्ट चार्जिंग इसे तेजी से वापस तैयार कर देती है। हैवी यूज में भी यह आसानी से पूरा दिन निकाल सकता है। कैमरा सेक्शन बेसिक लेकिन कामचलाऊ है, जिसमें 13MP रियर और 8MP फ्रंट कैमरा वीडियो कॉलिंग और मीटिंग्स के लिए पर्याप्त साबित होता है। कुल मिलाकर OnePlus Pad 4 उन यूजर्स के लिए शानदार विकल्प है जो लैपटॉप जैसा अनुभव चाहते हैं लेकिन हल्के और पोर्टेबल डिवाइस की तलाश में हैं। हालांकि प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर यूजर्स के लिए अभी भी लैपटॉप की जरूरत बनी रह सकती है।
महाराष्ट्र में Ola-Uber-Rapido पर संकट, ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश, बाइक टैक्सी नियमों को लेकर बड़ा विवाद

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों की बाइक टैक्सी सेवाओं पर सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां बिना आवश्यक मंजूरी और नियमों के बाइक टैक्सी सेवाएं चला रही हैं, जिससे मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र साइबर विभाग ने IT एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत Google और Apple को नोटिस भेजकर इन ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। परिवहन विभाग का आरोप है कि इन ऐप्स पर चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं में ड्राइवर वेरिफिकेशन, इंश्योरेंस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियां पाई गई हैं। हाल ही में हुई कुछ घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। सरकार का यह भी कहना है कि राज्य में बाइक टैक्सी केवल तय नियमों के तहत और ईवी (Electric Vehicle) नीति के अनुसार ही चल सकती है। कंपनियों को जरूरी दस्तावेज और अनुपालन के लिए समय दिया गया था, लेकिन पर्याप्त जवाब न मिलने पर यह सख्त कार्रवाई की गई। हालांकि, फिलहाल Ola, Uber और Rapido के ऐप्स पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और Google Play Store तथा Apple App Store पर उपलब्ध हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर कैब और अन्य सेवाएं भी सामान्य रूप से जारी हैं। विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Rapido ऐप कुछ समय के लिए ऐप स्टोर से गायब भी हुआ था, हालांकि बाद में यह फिर से उपलब्ध हो गया। अब मामला इस बात पर टिका है कि क्या कंपनियां सरकार की शर्तों को मानकर अपने ऑपरेशन में बदलाव करती हैं या फिर यह विवाद और आगे बढ़ता है। फिलहाल यह मुद्दा राइड-हेलिंग सेक्टर और डिजिटल ट्रांसपोर्ट पॉलिसी के बीच बड़ा टकराव बनता जा रहा है।