Apple का बंपर ऑफर: iPhone 17 Pro Max पर 49,000 रुपये की छूट, सिर्फ सालगिरह सेल में

नई दिल्ली। टेक दिग्गज Apple ने अपनी 50वीं सालगिरह के मौके पर ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी का फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17 Pro Max अब भारी डिस्काउंट के साथ उपलब्ध है। इस ऑफर के चलते महंगा प्रीमियम फोन अब पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है। 1.49 लाख से घटकर ₹1.02 लाख तक पहुंची कीमत दरअसल, लॉन्च के समय iPhone 17 Pro Max की कीमत ₹1,49,900 थी, लेकिन अब यह ऑफर्स के बाद घटकर करीब ₹1,02,900 तक पहुंच गई है। यह खास डील Imagine Store के जरिए दी जा रही है, जो Apple का अधिकृत रीसेलर है। इस ऑफर ने उन लोगों के लिए शानदार मौका पैदा कर दिया है, जो लंबे समय से iPhone खरीदने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे मिल रहा है ₹49,000 का डिस्काउंट इस कीमत में कमी कई तरह के ऑफर्स को मिलाकर की गई है। इसमें ₹4,000 का बैंक कैशबैक, ₹1,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट और ₹6,000 का एक्सचेंज बोनस शामिल है। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन पर ₹36,000 तक का एक्सचेंज वैल्यू भी मिल रहा है। इन सभी ऑफर्स को जोड़ने के बाद कुल मिलाकर करीब ₹49,000 तक की बचत हो रही है। सिर्फ iPhone नहीं, बाकी डिवाइस पर भी ऑफर सिर्फ iPhone 17 Pro Max ही नहीं, बल्कि इस सेल में अन्य Apple डिवाइस पर भी आकर्षक ऑफर मिल रहे हैं। iPhone 17 Pro की कीमत घटकर करीब ₹89,900 तक पहुंच गई है। वहीं iPad 2025 के WiFi वेरिएंट पर भी छूट मिल रही है और इसे ₹31,900 में खरीदा जा सकता है। Apple Watch के कई मॉडल्स भी इस सेल में डिस्काउंट के साथ उपलब्ध हैं। iPhone 17 Pro Max के दमदार फीचर्स अगर फीचर्स की बात करें, तो iPhone 17 Pro Max को कंपनी का अब तक का सबसे पावरफुल स्मार्टफोन माना जा रहा है। इसमें 6.9 इंच का 120Hz OLED डिस्प्ले, A19 Pro चिप और 12GB RAM दी गई है, जो इसे बेहद तेज और स्मूथ बनाती है। कैमरे के मामले में भी यह फोन काफी दमदार है, जिसमें 48MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और 8x ऑप्टिकल जूम मिलता है। साथ ही इसकी बैटरी 37 घंटे तक वीडियो प्लेबैक देने में सक्षम है। Apple की यह एनिवर्सरी सेल ग्राहकों के लिए बड़ा मौका बनकर आई है। इतने बड़े डिस्काउंट के साथ प्रीमियम iPhone खरीदना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अगर आप नया स्मार्टफोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह ऑफर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
2026 के लिए बेस्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर: लंबी रेंज और दमदार परफॉर्मेंस वाले ये 5 विकल्प

नई दिल्ली।भारत में पेट्रोल के बढ़ते दामों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के चलते इलेक्ट्रिक स्कूटर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। रोजाना सफर और लंबी रेंज के हिसाब से इन पांच स्कूटर्स को सबसे बेहतर माना जा रहा है। 1. TVS iQube – भरोसेमंद और लंबी रेंजनिर्माता: TVS Motor Companyरेंज: 94 किमी – 212 किमीकीमत: ₹94,999 – ₹1.61 लाखTVS iQube विश्वसनीयता और लंबी रेंज के लिए जाना जाता है। अलग-अलग वेरिएंट्स में यह स्कूटर शहर और लंबी दूरी दोनों के लिए उपयुक्त है। 2. Ather Rizta – फैमिली फ्रेंडली विकल्पनिर्माता: Ather Energyरेंज: 123 किमी – 159 किमीकीमत: ₹1.04 लाख – ₹1.30 लाखAther Rizta खासतौर पर फैमिली यूज के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आरामदायक सीट, आधुनिक फीचर्स और स्मार्ट कनेक्टिविटी शामिल हैं। 3. Bajaj Chetak EV – मजबूत और प्रीमियमनिर्माता: Bajaj Autoरेंज: 113 किमी – 151 किमीकीमत: ₹89,500 – ₹1.22 लाखBajaj Chetak EV ऑल-मेटल बॉडी के साथ आता है और प्रीमियम फील देता है। यह रोजाना इस्तेमाल और लंबी दूरी के लिए सुरक्षित विकल्प है। 4. Vida V2 / VX2 – बजट में दमदारनिर्माता: Hero MotoCorpरेंज: 92 किमी – 165 किमीकीमत: ₹73,850 – ₹1.40 लाखVida V2 और VX2 बजट में उपलब्ध होते हुए भी फीचर्स में कम नहीं हैं। यह स्कूटर शहर और मध्यम दूरी के सफर के लिए बढ़िया विकल्प है। 5. Suzuki e-Access – नया और प्रीमियमनिर्माता: Suzuki Motor Corporationरेंज: लगभग 95 किमीकीमत: ₹1.88 लाखSuzuki e-Access हाल ही में भारतीय बाजार में लॉन्च हुआ है। यह प्रीमियम विकल्प है और शहर में दैनिक उपयोग के लिए सुविधाजनक है। यदि आप रोजाना इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं, तो TVS iQube, Ather Rizta, Bajaj Chetak EV, Vida V2/VX2 और Suzuki e-Access जैसे विकल्प भरोसेमंद साबित हो सकते हैं। सही स्कूटर चुनते समय रेंज, बजट और फीचर्स पर ध्यान देना जरूरी है।
iPhone 20: Apple तैयार कर रहा नया डिजाइन, 2027 में पूरी तरह बदलेगा लुक

नई दिल्ली। Apple अपने iPhone के 20 साल पूरे होने के मौके पर बड़ा सरप्राइज देने की तैयारी में है। खबर है कि कंपनी सीधे iPhone 19 को स्किप कर iPhone 20 लॉन्च कर सकती है, जो पूरी तरह नए डिजाइन के साथ आएगा। नया डिजाइन: अल्ट्रा-स्लिम बैजल और कर्व्ड लुकलीक्स के मुताबिक iPhone 20 में बेहद पतले यानी करीब 1.1mm के बैजल्स मिल सकते हैं। फोन क्वॉड-कर्व्ड डिजाइन के साथ आ सकता है, जिससे स्क्रीन किनारों तक फैली हुई नजर आएगी। यह डिजाइन iPhone को पहले से ज्यादा प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक बना सकता है। कैमरा में भी बड़ा बदलाव संभवरिपोर्ट्स के अनुसार, Apple अंडर-डिस्प्ले कैमरा टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है, जिसे Samsung पहले से टेस्ट कर चुकी है। हालांकि, अभी इमेज क्वालिटी को लेकर कंपनी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में iPhone 20 में: छोटा पंच-होल कटआउट या छोटा Dynamic Island देखने को मिल सकता है। हट सकते हैं फिजिकल बटनiPhone 20 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फोन में पावर, वॉल्यूम और कैमरा बटन की जगह सॉलिड-स्टेट बटन दिए जा सकते हैं। ये बटन दबाने पर हिलेंगे नहीं, बल्कि हेप्टिक फीडबैक के जरिए दबाने जैसा अनुभव देंगे। Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च करने जा रही है। इन मॉडल्स में छोटा Dynamic Island बेहतर फेस आईडी टेक्नोलॉजी जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा कंपनी अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी पेश कर सकती है। iPhone 20 Apple के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित हो सकता है। नए डिजाइन, एडवांस फीचर्स और टेक्नोलॉजी के साथ यह iPhone पूरी तरह नया अनुभव दे सकता है। हालांकि, अभी ये सभी जानकारी लीक्स पर आधारित है, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया की टेक साझेदारी हुई हकीकत, बातचीत से प्रगति

नई दिल्ली। तीन देशों-भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-इंडिया टेक्नोलॉजी और ट्रांसमिशन (एसीआईटीआई) पार्टनरशिप अब केवल बातचीत का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि वास्तविक त्रिपक्षीय सहयोग के रूप में सामने आ रही है। इस साझेदारी के तहत नई दिशाओं और कनाडा-भारत की 13 यूनिवर्सिटियों के निर्माण के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (उपयोग), क्वांटम रिसर्च और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।तीनों देशों की पूरक क्षमताएंरिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इंजीनियरिंग प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यावहारिक उत्थान की क्षमता प्रदान करता है, कनाडा आधारभूत अभिविन्यास अनुसंधान और विश्वसनीय अभिविन्यास का योगदान देता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया डीप-टेक रिसर्च क्षमता लाता है। इस संयोजन ने एसीआईटीआई को सिर्फ गतिशील गठबंधन नहीं, बल्कि डेमोक्रेटिक टेक्नोलॉजी सहयोग का मॉडल बनाया है। व्यावहारिक समझौते और छात्रवृत्तिसमझौते में अभिविन्यास, सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला की उन्नति पर व्यावहारिक कार्य योजनाएं शामिल हैं। कनाडा-भारत यूनिवर्सिटी साझेदारी में छात्र अभिविन्यास, फैकल्टी एक्सचेंज, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग शामिल है। टोरंटो यूनिवर्सिटी के माध्यम से 274 से अधिक छात्रवृत्तियों के लिए 25 मिलियन कैनेडियन डॉलर तक की स्वीकृति का समर्थन किया गया, जिससे भारतीय छात्रों को कैनेडियन अभिविन्यास वाली पुस्तकों में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और कैनेडियन शोधकर्ता भारत के बड़े डिजिटल जौ से परिचित होंगे। नवाचार और उद्योग को जोड़नासमझौते ने सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को अभिविन्यास नीति के समान अवधारणा में शामिल किया है। इसका अर्थ है कि बैंडविड्थ क्षमता, चिप तक पहुंच और गतिशील की चुंबकीय आपूर्ति अब नवाचार नीति के मुख्य मुद्दे बन गए हैं। कार्य-एकीकृत शिक्षा के माध्यम से भारतीय इंजीनियर और शोधकर्ता त्रि-पक्षीय सद्भाव तंत्र को मजबूत करेंगे।सफलतापूर्वक काम करने की कुंजीरिपोर्ट में बताया गया है कि इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रयोगशालाओं, यौगिकों, शिशुओं और अफ्रीका उत्थान को तेजी से जोड़कर त्रि-पक्षीय सद्भावना को कंपनियों, उत्पादों और उच्च मूल्य वाली नौकरियों में बदला जाए।
मैसेजिंग ऐप्स यूजर्स को बड़ी राहत…. SIM Binding नियम लागू होने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ी

नई दिल्ली। डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal के लिए SIM Binding नियम बनाया है। पहले सरकार का इस नियम को 1 मार्च से लागू करने का प्लान था लेकिन दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत दी है। सरकार ने SIM Binding नियम को लागू करने की आखिरी तारीख को अब साल के अंत तक 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। दरअसल, इन प्लेटफॉर्म्स ने सरकार को बताया कि इस नियम को लागू करने में उन्हें कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने ज्यादा समय मांगा था। इस पर सरकार ने उनकी बात मानते हुए डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। मनीकंट्रोल के सूत्रों के मुताबिक, DoT ने 30 मार्च से कंपनियों को अलग-अलग इस फैसले की जानकारी देना शुरू कर दिया था। सिर्फ मैसेजिंग ऐप्स ही नहीं, बल्कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां जैसे Google और Apple ने भी इस नियम को लागू करने के लिए ज्यादा समय मांगा था। खासतौर पर Apple ने कहा कि उसके iOS सिस्टम में कुछ तकनीकी सीमाएं हैं, जिनकी वजह से इस नियम को तुरंत लागू करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी इस पर काम कर रही है और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। इस नियम के तहत अब इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वे तभी काम करें जब यूजर का रजिस्टर्ड SIM उसी फोन में मौजूद हो। यानी अगर SIM निकाल दिया गया या बदल दिया गया, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। ऐसे काम करता है यह नियमSIM Binding नियम को इस तरह तैयार किया गया है कि मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal यूजर के मोबाइल में मौजूद SIM कार्ड से जुड़े रहें। आसानी से समझें तो अगर आपने जिस नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में होना चाहिए। अगर SIM हटा दिया गया, बदल दिया गया या बंद हो गया, तो ऐप का एक्सेस सीमित हो सकता है या अकाउंट काम करना बंद कर सकता है। इस नियम का मकसद यह कन्फर्म करना है कि हर अकाउंट किसी असली और एक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ा रहे, जिससे फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड को रोका जा सके। जरूरी है यह नियमदरअसल, इस नियम की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि हाल के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी WhatsApp अकाउंट और साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोग बिना एक्टिव SIM के भी मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे उनकी पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में SIM Binding नियम से हर अकाउंट को एक असली मोबाइल नंबर से जोड़ना आसान होगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।
ईरान की धमकी से टेक जगत में खलबली, Intel ने कर्मचारियों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता, उठाए जरूरी कदम

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिलिकॉन वैली तक पहुंच गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने हाल ही में अमेरिका की 18 बड़ी टेक कंपनियों को वैध सैन्य लक्ष्य घोषित किया है, जिसमें Apple, Google, Microsoft, Intel और अन्य शामिल हैं। इस धमकी के बाद ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है। Intel ने उठाया सुरक्षा कदमईरान की धमकी के तुरंत बाद Intel ने बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मिडिल ईस्ट में अपने कर्मचारियों और ऑपरेशंस की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। Intel इस मामले में प्रतिक्रिया देने वाली पहली बड़ी अमेरिकी टेक कंपनी बन गई है। ईरान की नाराजगी का कारणIRGC ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट कर अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान की धरती पर शामिल रही हैं। गार्ड्स ने कहा कि हर हत्या के बदले एक अमेरिकी कंपनी को तबाह किया जाएगा। कंपनियों को कार्यालय खाली करने का निर्देश भी दिया गया। निशाने पर कौन-कौनईरान की लिस्ट में दुनिया की प्रमुख टेक और अन्य कंपनियां शामिल हैं। टेक कंपनियों में Apple, Google, Microsoft, Nvidia, Intel, Cisco, HP, Oracle, IBM, Dell, Palantir और Boeing शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग, ईवी और AI क्षेत्र की कंपनियां जैसे JPMorgan, Tesla, GE और UAE की AI फर्म G42 भी शामिल हैं। डेटा सेंटर्स पर बढ़ता खतरामार्च में Amazon Web Services (AWS) के डेटा सेंटर्स पर हमला हुआ था, जिससे UAE में बड़े स्तर पर डिजिटल आउटेज हुआ। खाड़ी देश अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्लोबल हब बन रहे हैं। ऐसे में डेटा सेंटर्स पर हमले का खतरा पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। बता दें कि Intel के मुख्य ऑफिस अमेरिका में हैं, लेकिन इनके ऑपरेशंस और डेटा सेंटर्स इजरायल और UAE में हैं। इन जगहों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यही खतरा अन्य अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भी बना हुआ है, क्योंकि उनका मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन और डेटा सेंटर मौजूद है।
Realme आज लांच करेगी देश का पहला ‘सेल्फी मिरर’ फोन, जानिए इसके फीचर्स

नई दिल्ली। स्मार्टफोन कंपनी Realme आज भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन Realme 16 5G लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने इसे देश का पहला “सेल्फी मिरर फोन” बताया है। इसके साथ ही इसमें डुअल 50 मेगापिक्सल पोर्ट्रेट कैमरा सेटअप मिलने का दावा किया गया है। जानिए खासियत इस फोन की खासियत इसका यूनिक “सेल्फी मिरर” फीचर है। कंपनी ने बैक पैनल पर कैमरा मॉड्यूल के पास एक छोटा गोल मिरर दिया है, जिससे यूजर्स रियर कैमरे से ही हाई-रेजोल्यूशन सेल्फी ले सकेंगे। यह मिरर फोटो लेते समय यूजर को अपनी पोजिशन देखने में मदद करेगा। कंपनी ने Realme 16 5G के लिए अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर माइक्रोसाइट भी जारी की है, जहां इसके कई फीचर्स सामने आए हैं। फोन में 6.57 इंच का बड़ा डिस्प्ले दिया जाएगा और इसे मजबूत बनाने के लिए IP69 रेटिंग दी गई है, जिससे यह धूल और पानी से सुरक्षित रहेगा। पावरफुल बैटरी बैटरी के मामले में भी यह स्मार्टफोन काफी पावरफुल बताया जा रहा है। इसमें 7000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि यह दो दिन तक चल सकती है। हालांकि चार्जिंग स्पीड से जुड़ी जानकारी लॉन्च के समय सामने आएगी। ट्रिपल रियर कैमरा कैमरा सेटअप की बात करें तो Realme 16 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का सेल्फी कैमरा दिया गया है। कीमत कीमत को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लीक्स के अनुसार इसकी कीमत 25,000 से 30,000 रुपये के बीच हो सकती है। लॉन्च इवेंट में बैंक ऑफर्स और अन्य वेरिएंट्स की जानकारी भी दी जाएगी। फोन के प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज जैसे कई अहम फीचर्स का खुलासा कंपनी आज लॉन्चिंग के दौरान करेगी।
स्पेस नेटवर्क: कैसे काम करता है अंतरिक्ष का ‘सेल टावर’ और डेटा पहुंचाता है पृथ्वी तक

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स और पृथ्वी पर मिशन कंट्रोल टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक ‘स्पेस नेटवर्क’ नामक एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं। यह नेटवर्क अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और पृथ्वी से जुड़े रहने में मदद करता है, ताकि डेटा, वीडियो और आवाज तुरंत ट्रांसमिट हो सके। स्पेस नेटवर्क क्या है?स्पेस नेटवर्क में ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट्स (TDRS) का समूह शामिल है। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी से लगभग 35,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा में घूमते हैं और अंतरिक्ष में ‘सेल टावर’ की तरह काम करते हैं। इसका मतलब है कि स्पेस स्टेशन अपनी कक्षा में कहीं भी हो, टीडीआरएस सैटेलाइट से संपर्क बनाए रख सकता है। डेटा कैसे ट्रांसमिट होता है?जब स्पेस स्टेशन पर कोई अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल को डेटा, वीडियो या आवाज भेजता है, तो स्टेशन का कंप्यूटर इसे रेडियो सिग्नल में बदल देता है। यह सिग्नल स्टेशन के एंटीना के जरिए टीडीआरएस सैटेलाइट तक पहुंचता है। फिर टीडीआरएस इसे न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स कॉम्प्लेक्स तक रिले करता है, जहां से लैंडलाइन के जरिए ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल तक सिग्नल जाता है। पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड में पूरी होती है, इसलिए बातचीत में कोई noticeable देरी नहीं होती। वैज्ञानिक डेटा का पृथ्वी पर ट्रांसमिशनस्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स भौतिकी, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान जैसे कई प्रयोग करते हैं। इन प्रयोगों से मिलने वाला डेटा भी उसी स्पेस नेटवर्क के जरिए पृथ्वी पर भेजा जाता है। डेटा रेडियो सिग्नल में बदलकर टीडीआरएस सैटेलाइट तक भेजा जाता है, फिर व्हाइट सैंड्स और ह्यूस्टन होते हुए वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण वैज्ञानिक लगभग रीयल टाइम में डेटा प्राप्त कर पाते हैं। शिक्षा और संपर्क में सुधारनासा इस नेटवर्क का इस्तेमाल शिक्षा कार्यक्रमों के लिए भी करता है। अंतरिक्ष यात्री वीडियो और वॉइस कॉल के जरिए स्कूलों के बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं। पहले, जब यह नेटवर्क नहीं था, तो संपर्क सिर्फ 15 मिनट तक सीमित था। अब लगभग हर समय अंतरिक्ष यात्री और पृथ्वी की टीम के बीच सतत संपर्क रहता है। प्रबंधन और निगरानीस्पेस नेटवर्क का प्रबंधन नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (मैरीलैंड) द्वारा किया जाता है। इसके रणनीतिक संचालन की देखरेख स्कैन प्रोग्राम ऑफिस करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच डेटा और आवाज का आदान-प्रदान लगातार और सुरक्षित रहे।
डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज 5G यूजर्स में भारत बना नंबर 2 हर महीने रिकॉर्ड डेटा खपत

नई दिल्ली । भारत में डिजिटल क्रांति अब एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है जहां मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। Nokia की हालिया रिपोर्ट Nokia Mobile Broadband Index 2026 के मुताबिक देश में हर मोबाइल यूजर एक महीने में औसतन 31GB से ज्यादा डेटा खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा न सिर्फ भारत में इंटरनेट की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि लोग अब डिजिटल सेवाओं पर कितने ज्यादा निर्भर हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 5G टेक्नोलॉजी का विस्तार बेहद तेजी से हो रहा है। साल दर साल 5G ट्रैफिक में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं अब देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा 5G से आ रहा है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि यूजर्स तेजी से नई और तेज नेटवर्क तकनीक को अपना रहे हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस बन चुका है। इसका मतलब है कि केवल एक देश ही भारत से आगे है जबकि बाकी दुनिया भारत से पीछे है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ साल पहले तक 4G ही मुख्य नेटवर्क था और अब 5G तेजी से उसकी जगह ले रहा है। डेटा खपत में इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। आजकल लोग 4K वीडियो स्ट्रीमिंग का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे डेटा की खपत तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा AI आधारित एप्लिकेशन और क्लाउड गेमिंग जैसे नए ट्रेंड भी डेटा उपयोग को बढ़ा रहे हैं। मनोरंजन से लेकर कामकाज तक लगभग हर चीज अब इंटरनेट पर निर्भर हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेट्रो शहर 5G उपयोग में सबसे आगे हैं जहां कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का 58 प्रतिशत हिस्सा 5G का है। इसका मतलब है कि बड़े शहरों में लोग तेजी से हाई स्पीड इंटरनेट अपना रहे हैं और उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। अगर डिवाइस की बात करें तो 2025 तक देश में 892 मिलियन से ज्यादा 4G डिवाइस एक्टिव थे जिनमें से 383 मिलियन डिवाइस 5G सपोर्ट के साथ आ चुके हैं। खास बात यह है कि हाल ही में लॉन्च हुए 90 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ आ रहे हैं जो इस टेक्नोलॉजी के भविष्य को और मजबूत बनाता है। आने वाले समय में यह आंकड़े और भी तेजी से बढ़ने वाले हैं। अनुमान है कि 2031 तक भारत में 5G यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि देश की डिजिटल इकोनॉमी और भी मजबूत होगी और इंटरनेट का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में और गहराई से जुड़ जाएगा। यह पूरा परिदृश्य दिखाता है कि भारत अब सिर्फ इंटरनेट यूजर वाला देश नहीं रहा बल्कि वह एक डिजिटल पावरहाउस बनता जा रहा है जहां डेटा ही नई ताकत है और 5G उसकी सबसे बड़ी गति बनकर उभर रहा है
अंतरिक्ष में खेती का कमाल: जानिए ‘वेजी’ सिस्टम कैसे उगाता है पौधे

नई दिल्ली जैसे-जैसे इंसान गहरे अंतरिक्ष मिशनों की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहां लंबे समय तक रहने की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों में एक बड़ी जरूरत है ताजा और पौष्टिक भोजन की। इसी को ध्यान में रखते हुए NASA ने अंतरिक्ष में खेती का अनोखा प्रयोग शुरू किया है, जिसे ‘वेजी’ (Veggie) सिस्टम कहा जाता है। यह सिस्टम International Space Station (आईएसएस) पर स्थापित है और अंतरिक्ष यात्रियों को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ पौधों की वृद्धि पर शोध करने में मदद कर रहा है। क्या है ‘वेजी’ सिस्टम?‘वेजी’ एक छोटे स्पेस गार्डन की तरह काम करता है, जिसका आकार लगभग एक कैरी-ऑन बैग जितना होता है। इसमें एक समय में करीब छह पौधे उगाए जा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधों की वृद्धि को समझना और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ताजा भोजन उपलब्ध कराना है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कैसे काम करता है यह स्पेस गार्डन?वेजी सिस्टम में पौधों को मिट्टी के बजाय खास “प्लांट पिलो” (तकिए) में उगाया जाता है, जिनमें उर्वरक और जरूरी पोषक तत्व पहले से भरे होते हैं। ये पिलो जड़ों तक पानी, हवा और पोषण का संतुलन बनाए रखते हैं। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण पानी बूंदों या बुलबुलों के रूप में तैरता है, जिससे पौधों को पानी देना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।इस समस्या से निपटने के लिए वेजी में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को ऊपर से एलईडी लाइट्स द्वारा रोशनी दी जाती है, जिसमें लाल और नीली किरणें प्रमुख होती हैं। यही कारण है कि वेजी चैंबर अक्सर गुलाबी या लाल रंग में चमकता दिखाई देता है। अंतरिक्ष में उगीं ये फसलेंअब तक इस सिस्टम में कई प्रकार की फसलें सफलतापूर्वक उगाई जा चुकी हैं। इनमें लेट्यूस की अलग-अलग किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, लाल रशियन केल और जिनिया जैसे फूल शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ फसलों को अंतरिक्ष यात्रियों ने वहीं खाया भी, जबकि कुछ नमूनों को पृथ्वी पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भेजा गया। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंदअंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पौधों की देखभाल करना अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तनाव कम करने का एक तरीका बनता है। NASA का मानना है कि पौधे उगाने से उन्हें पृथ्वी से जुड़ाव महसूस होता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’: अगली पीढ़ी की तकनीकवेजी के अलावा NASA ने ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’ (APH) नामक एक और उन्नत सिस्टम विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वचालित है और इसमें 180 से अधिक सेंसर लगे हैं, जो लगातार डेटा पृथ्वी पर भेजते हैं। इस सिस्टम में बौनी गेहूं जैसी फसलों का परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, मिर्च और बेरी जैसे पौधे उगाने की योजना है, जो पोषण के साथ-साथ अंतरिक्ष विकिरण से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं। भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की नींवस्पेस में खेती सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य के मंगल और चंद्रमा मिशनों की तैयारी है। अगर इंसान को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना है, तो उसे भोजन के लिए पृथ्वी पर निर्भरता कम करनी होगी। ‘वेजी’ सिस्टम इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।